दमोह (कुंडलपुर)। निर्यापक मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि मनुष्य जो भी करता है, वही कर्म बनकर उसके भाग्य का निर्माण करता है। जीवन में जो कुछ भी हमें प्राप्त होता है, वह हमारे कर्मों का ही विधान है। यदि अपने भाग्य के विधान को बदलना है, तो सबसे पहले अपने कर्मों को बदलना होगा। मुनिश्री ने कहा, हम जो भी करते हैं, वही कर्म बनकर हमारा-तुम्हारा भाग्य बनता है और जो हमें प्राप्त होता है,वह हमारे कर्मों के विधान का ही परिणाम होता है। उन्होंने कहा कि यदि अपने भाग्य को बदलना चाहते हैं, तो प्रतिदिन अपने-अपने मंदिरों में पूजा, पाठ और विधान करते रहें। नियमित आराधना और धर्म साधना से जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल सकती हैं।
प्रभु की आराधना से मनुष्य ऊँचा उठ सकता है
मुनिश्री ने कहा कि यदि जीवन में बड़े स्तर पर परिवर्तन लाना है तो मूलनायक भगवान श्री आदिनाथ बड़े बाबा के दरबार में आना होगा। बड़े बाबा की भक्ति और उनके चरणों में समर्पण साधारण व्यक्ति को भी महान बना देता है। उन्होंने कहा कि संसार में बड़ा बनना अलग बात है, लेकिन प्रभु की आराधना से मनुष्य इतना ऊँचा उठ सकता है कि अंततः सिद्ध पद को भी प्राप्त कर ले।
गृह त्याग कर घातिया कर्मों का क्षय करें तो स्वतंत्र
उन्होंने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आध्यात्मिक स्वतंत्रता का संदेश देते हुए कहा कि 15 अगस्त हमें देश की राजनीतिक स्वतंत्रता की याद दिलाता है, जबकि भगवान आदिनाथ ने युगारंभ में गृह त्याग कर घातिया कर्मों का क्षय किया और अंततः समस्त कर्मों का नाश कर संसार से पूर्ण स्वतंत्रता अर्थात मोक्ष पद को कर हमेशा के लिये स्वतंत्र हो गये और यही वास्तविक स्वतंत्रता है, जिसे प्रत्येक जीव को अपना लक्ष्य बना कर चलना चाहिए।
आत्मचिंतन के माध्यम से आत्मिक स्वतंत्रता का अनुभव
मुनिश्री ने आगे कहा कि बड़ेबाबा के चरणों में बैठकर हमें केवल राष्ट्रीय स्वतंत्रता का ही स्मरण नहीं करना चाहिए, बल्कि उस परम स्वतंत्रता का भी चिंतन करना चाहिए, जिसे भगवान आदिनाथ ने प्राप्त किया। साधना, समर्पण और भक्ति के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति भी उसी मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ सकता है। प्रवचन के अंत में मुनिश्री ने मंगलकामना व्यक्त करते हुए कहा कि जैसे प्रभु ने पूर्ण स्वतंत्रता का परम आनंद प्राप्त किया, वैसे ही हम सभी भी अपने जीवन में शुभ कर्म, आराधना और आत्मचिंतन के माध्यम से आत्मिक स्वतंत्रता का अनुभव करें।
ध्वजारोहण का भव्य कार्यक्रम किया गया
राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं क्षेत्रीय प्रचार मंत्री जयकुमार जलज ने बताया कि मूलनायक भगवान श्री आदिनाथ बड़ेबाबा के चरणों में होने वाले पावन अभिषेक एवं शांतिधारा से पूर्व प्रतिदिन प्रातः 7.30 बजे निर्यापक मुनि श्री समता सागर महाराज के मंगल प्रवचनों का लाभ श्रद्धालुओं को प्राप्त होता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर प्रवचन, अभिषेक एवं आराधना का पुण्य लाभ लेने का आग्रह किया। सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मुनि ससंघ सानिध्य में ध्वजारोहण का भव्य कार्यक्रम किया गया।




