श्रीफल की विशेष श्रृंखला में आज मिलिए इंदौर के नरेंद्र–शकुंतला वेद परिवार से

दशलक्षण पर्व केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं, बल्कि जीवन को समय, संयम और शुभ विचारों से जोड़ने का अवसर भी है। इन्हीं बातों को जानने के लिए श्रीफल समूह की संपादक रेखा संजय जैन ने इंदौर के प्रतिष्ठित समाजसेवी नरेंद्र वेद से चर्चा की। उन्होंने बताया कि इन दस दिनों में उनके परिवार की दिनचर्या आम दिनों की तुलना में पूरी तरह बदल जाती है।

नरेंद्र वेद कहते हैं, “आम दिनों में न खाने का कोई निश्चित समय रहता है और न ही उठने-बैठने का। जैसी परिस्थिति होती है, वैसा काम चलता है। लेकिन दशलक्षण पर्व के दस दिनों में सब कुछ समय पर होने लगता है। कब उठना है, कब पूजा करनी है, कब भोजन करना है—हर बात में एक अनुशासन आ जाता है।”

वे बताते हैं कि दशलक्षण पर्व मानो पूरे परिवार को टाइम मैनेजमेंट सिखा देता है। परिवार के सभी सदस्य अपनी रुचि और सामर्थ्य के अनुसार धर्म से जुड़ते हैं। कोई जिनालय में पूजा और अभिषेक करता है, कोई जाप करता है, कोई जैन चैनल पर प्रतिक्रमण सुनता है तो कोई सामायिक करता है। घर में धर्म की चर्चा बढ़ जाती है और दिन शुभ क्रिया तथा शुभ विचारों में निकल जाता है।

वेद कहते हैं, “इन दिनों बाजार का खाना बिल्कुल बंद हो जाता है। खान-पान में भी संयम आ जाता है। सामान्य दिनों की तुलना में परिवार में धर्म की बातें, अच्छे उदाहरण और आत्मचिंतन अधिक होने लगता है। ऐसा लगता है जैसे हम घर में नहीं, किसी तीर्थ क्षेत्र में रह रहे हों।”

हालांकि रोज की सामान्य दिनचर्या से यह बदलाव कभी-कभी थोड़ा अलग भी लगता है। नरेंद्र वेद मुस्कराते हुए कहते हैं, “कभी लगता है कि दिन बहुत बड़ा तो नहीं हो जाएगा, क्योंकि काम, भोजन और आराम—सबकी दिनचर्या बदल जाती है। लेकिन यही बदलाव मन को अच्छा भी लगता है। दस दिन बाद लगता है कि जीवन में थोड़ा अनुशासन और शांति और बढ़नी चाहिए।”

इंदौर जैन समाज में नरेंद्र वेद एक प्रतिष्ठित नाम हैं। उन्होंने अपनी चंचल लक्ष्मी का सदुपयोग करते हुए भव्य श्री दिगंबर जैन नवग्रह जिनालय अतिशय क्षेत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस जिनालय में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और मंगल भावनाओं के साथ अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं। उनके परिवार में कुल नौ सदस्य हैं, जो दशलक्षण पर्व के इन दिनों को मिल-जुलकर धर्म, संयम और सद्भावना के साथ मनाते हैं।

श्रृंखला का उद्देश्य

श्रीफल की इस विशेष “दस दिन–दस परिवार” श्रृंखला का उद्देश्य यह जानना है कि दशलक्षण पर्व के दिनों में जैन परिवारों की दिनचर्या में क्या बदलाव आता है, आम दिनों और इन दस दिनों में कितना अंतर होता है तथा इस पर्व का परिवार और जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है।

कल मिलेंगे एक और परिवार से, जो बताएगा कि दशलक्षण पर्व उनके घर में किस तरह आत्मशुद्धि, संस्कार और अनुशासन का वातावरण बनाता है।

जय जिनेन्द्र।