नौगामा। जैन पाठशाला के बच्चों ने रविवार को पटाखों नहीं छोड़ने का संकल्प लिया। यह एक बहुत ही सराहनीय और प्रेरणादायक पहल है। जैन धर्म के मूल सिद्धांत 'अहिंसा परमो धर्म:' (जीवों पर दया और रक्षा) को बच्चों ने अपनी व्यावहारिक दिनचर्या में उतारा है।अहिंसा और जीव रक्षा का संदेश: पटाखों के प्रयोग से सूक्ष्म जीवों, पशु-पक्षियों की हिंसा होती है। बच्चों द्वारा पटाखे न छोड़ने का संकल्प लेना जीव रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पर्यावरण संरक्षण
दिवाली और अन्य त्योहारों पर पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण से बचने के लिए यह सामूहिक शपथ बेहद अनुकरणीय है।
संस्कार और धार्मिक शिक्षा
श्री आदिनाथ मंदिर में मनीषा नानावटी और कुसुमलता नानावटी के मार्गदर्शन में पूजा-अर्चना के साथ-साथ बच्चों को समाज और प्रकृति के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने का संस्कार दिया जा रहा है।
सकारात्मक उत्सव
पूजा-अर्चना, संगीतमय भक्ति जैसी गतिविधियों से बच्चों में खुशियां बांटने और बिना हिंसा/प्रदूषण के त्योहार मनाने की भावना जागृत होती है। नौगामा जैन पाठशाला के बच्चों, आयोजकों और रिपोर्टर सुरेशचंद्र गांधी का यह प्रयास समाज और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला है। आज बच्चों को विनेश जैन बच्चों की बर्थडे होने पर उनकी ओर से बच्चों को अल्पाहार एवं पुरस्कार दिया गया




