आगरा। निर्मल सेवा सदन छीपीटोला में आयोजित पावन अवसर पर श्री पार्श्वनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव अत्यंत भक्तिभाव, श्रद्धा एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर, छीपीटोला से भगवान पार्श्वनाथ भगवान की पालकी बड़े धूमधाम से निकाली गयी। जिसमें श्रद्धालुओ ने जगह-जगह आरती उतारी थीं। पट्टाचार्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के सुयोग्य शिष्य मुनि श्री समत्व सागरजी महाराज, मुनि श्री शील सागरजी महाराज, मुनि श्री सुप्रभात सागरजी के सानिध्य में पार्श्वनाथ भगवान का अभिषेक और शांतिधारा हुई। अभिषेक एवं शांतिधारा के पश्चात पुजारियों, महिला मंडल, युवा मंच, पुरुषों, महिलाओं एवं सैकड़ों श्रद्धालु भक्तों ने श्री सम्मेद शिखर पर्वत पर सामूहिक रूप से भगवान श्री पार्श्वनाथ की पूजा-अर्चना की तथा अत्यंत भक्तिभाव से निर्वाण लाड़ू अर्पित किए और श्रद्धालुओं ने श्री सम्मेद शिखर पर्वत पर वंदना की l इसके बाद दीप प्रज्वलन, मुनि श्री का पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट आदि मंगलाचरण हुआ। श्री पार्श्वनाथ भगवान का 23 किलो का निर्वाण लाडू भक्ति भाव से समर्पित किया गया l
इन्होंने प्राप्त किया लाडू अर्पण का पुण्यार्जन
इस पावन अवसर पर निर्वाण लाड़ुओं की बोली लगाई गई। प्रथम निर्वाण लाड़ू का सौभाग्य संयुक्त रूप से कैलाश चंद जैन जयपुर परिवार ने प्राप्त किया जबकि द्वितीय नमोस्तु शासन संघ ने प्राप्त किया, तीसरा निर्वाण लाड़ू का सौभाग्य श्री पारस जैन परिवार और चौथा निर्माण लाडू दिनेश चंद गौरव जैन, राजीव कुमार नमन जैन, वीरेंद्र शास्त्री, गौरव जैन ने प्राप्त किया।
अब सबकी श्रद्धा का परिचय हो जाता है
मुनि श्री समत्व सागर महाराज जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पार्श्वनाथ भगवान को मानते हैं, ये लोग हाथ इसलिए नीचा धीरे-धीरे उठा रहे थे कि कहीं दूसरी जगह जाना पड़ा न, तो अपन चल देंगे, फँसना नहीं है हमें। यानी अभी तुम्हारी श्रद्धा पार्श्वनाथ भगवान पर भी नहीं है कि पार्श्वनाथ भगवान को मानते तो हो, लेकिन हम ठीक है, अगर उनकी मानने की आएगी न, तो धीरे से कहीं और निकल जाएंगे। अब सबकी श्रद्धा का परिचय हो जाता है पार्श्वनाथ भगवान को मानने के बाद। आप अपने आप को सम्यक् दृष्टि मान सकते थे, लेकिन अब यहाँ पर परीक्षा हो गई कि पार्श्वनाथ भगवान को मानते हो, लेकिन क्या पार्श्वनाथ भगवान की मानने वाले हो? वे तो कह रहे हैं बैर मत कीजिए, कमठ- कमठ जैसा बैर धारण मत कीजिए। किसी ने छोड़ा? पार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक व्रत उपवास रख लीजिए, लेकिन इसके साथ यह भी तो देख लीजिए कि हम कर क्या रहे हैं। ये निर्मल सेवा सदन और सामने विराजमान हैं पार्श्वनाथ भगवान। किसकी दृष्टि- किसकी दृष्टि में बैठे हो आप? सामने चंदा प्रभु भगवान। मैं तो देख रहा था, आज सुबह-सुबह जब चंदा प्रभु की टोंक के दर्शन किए, पहले मैं पार्श्वनाथ भगवान की टोंक के दर्शन करके आया।
रागी हो, तो पार्श्वनाथ भगवान की टोंक पर जाओगे
आप लोग करते कि नहीं? नहीं, कुछ लोग तो ऐसे होंगे— कहाँ गए, पार्श्वनाथ भगवान की टोंक के दर्शन किए कि नहीं आपने सम्मेद शिखर में? तो सीधे-सीधे पार्श्वनाथ की टोंक पर ही जाते हो? कि पहले पूरी वंदना करते हुए जाते हो? पूरी वंदना करते हो? वहाँ महावीर भगवान की टोंक भी मिलती है, मिलती है? वहाँ चंदा प्रभु भगवान की टोंक भी मिलती है, मिलती है कि नहीं? और आप अगर पार्श्वनाथ भगवान के रागी हो, तो पार्श्वनाथ भगवान की टोंक पर जाते हो, वहाँ से वापस आ जाते हो, सत्य हैl रागी हो, तो पार्श्वनाथ भगवान की टोंक पर जाओगे, वापस आ जाओगे। प्रवीण भैया रागी नहीं हैं, तो पूरी वंदना करेगा, 24 गणधर भगवंतों के गणधर परमेष्ठी की वंदना करेगा और सबसे पहले पार्श्वनाथ की दिशा के विपरीत हो भले ही, लेकिन चंदा प्रभु भगवान की टोंक के दर्शन करेगा और फिर वापस आएगा। ऐसे ही ज्ञानियों, अहोभाग्य मानो छिपीटोला।मंच संचालन सतेंद्र जैन साहूला और पंडित विजय शास्त्री ने किया।
यह समाजजन रहे मौजूद
इस मौके पर श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के मनोज जैन, रमेश जैन, प्रवीन जैन (पद्मावती), आनंद जैन, शैलेश जैन (लाला जी), मुकेश जैन , रमेश जैन, आशीष जैन, विवेक जैन, चक्रेश जैन, सतेंद्र जैन (साहुल)आशीष जैन (बाबा), सचिन जैन(तार) , आशु (वी.के), रोहित जैन,नितिन, सनी, अनिकेत,दीपक जैन मीडिया प्रभारी राहुल जैन समस्त मंडल एवं सकल जैन मौजूद थाl
मीडिया प्रभारी राहुल जैन समस्त मंडल एवं सकल जैन समाज मौजूद था।


