भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को राजधानी भोपाल स्थित विद्योदय तीर्थ पहुंचकर विद्या शिरोमणि परम पूज्य आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित वर्षायोग एवं भव्य चातुर्मास-2026 कार्यक्रम में सहभागिता की। मुख्यमंत्री ने कलश स्थापना महोत्सव में भाग लेते हुए आचार्यश्री का चरण प्रक्षालन किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

संतों का सान्निध्य सद्मार्ग की प्रेरणा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि संतों का सान्निध्य और आशीर्वाद समाज को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भारतीय संस्कृति में संत परंपरा केवल आध्यात्मिक चेतना का आधार नहीं रही, बल्कि नैतिक मूल्यों, संयम, सेवा और मानवता को मजबूत करने वाली परंपरा भी रही है।

उन्होंने आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के तप, त्याग और धर्मोपदेश की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रवचन समाज में सद्भाव, आत्मानुशासन और नैतिक जीवन मूल्यों को सुदृढ़ करने का कार्य कर रहे हैं।

श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ कलश स्थापना समारोह

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, समाजजनों एवं संत-भक्तों की उपस्थिति में कलश स्थापना समारोह संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री ने आचार्यश्री के श्रीचरणों में श्रद्धापूर्वक वंदन करते हुए प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं जनकल्याण की कामना की।

विधानसभा में प्रवचन का आमंत्रण

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार आगामी दिनों में एक दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित कर आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज को विधानसभा में धर्म, नैतिकता एवं जीवन मूल्यों पर प्रवचन के लिए आमंत्रित करेगी।

आचार्यश्री को राजकीय अतिथि का सम्मान

मुख्यमंत्री ने आचार्य श्री समय सागर जी महाराज को राजकीय अतिथि का सम्मान प्रदान किया। इस निर्णय को प्रदेश में संत परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति सरकार की आस्था एवं सम्मान के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

जैन दर्शन और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान

धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने मुख्यमंत्री की इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने इसे आध्यात्मिक चेतना, भारतीय संस्कृति तथा जैन दर्शन के प्रति सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

धर्म, नैतिकता और जनकल्याण का संदेश

आचार्यश्री के चातुर्मास में मुख्यमंत्री की सहभागिता और विधानसभा में प्रवचन के आमंत्रण की घोषणा से धर्म, नैतिकता, संयम, सेवा एवं मानव मूल्यों के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की दिशा में पहल सामने आई है।