इंदौर। भारत सरकार ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत जानवरों पर होने वाले प्रयोगों के नियमों में बदलाव का ड्राफ्ट जारी कर जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ से जुड़े प्राणी मित्रों ने इस ड्राफ्ट को बेजुबान जानवरों के लिए खतरनाक बताया है। प्राणी मित्र राजेश जैन दद्दू, राकेश गोहिल, मयंक जैन और वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेंद्र जैन ने बताया कि ड्राफ्ट में दो बड़े बदलाव चिंताजनक हैं। पहला, देश में जानवरों पर कॉस्मेटिक टेस्टिंग पर लगा बैन हट सकता है।
उपलब्धता आसान होगी, निगरानी कमजोर पड़ेगी
भारत ने इस पर रोक लगाकर दुनिया में मिसाल कायम की थी, लेकिन नई व्यवस्था में लिपस्टिक, क्रीम जैसे उत्पादों के लिए फिर से खरगोशों और अन्य जानवरों पर परीक्षण की अनुमति मिल सकती है। दूसरा, अब तक लैब ट्रायल के लिए सीपीसीएसईए से कड़ी सरकारी अनुमति लेनी पड़ती थी, लेकिन नए ड्राफ्ट में कई मामलों में सिर्फ लोकल एथिक्स पैनल ही अप्रूवल दे सकेगा। इससे प्रयोगशालाओं में जानवरों की उपलब्धता आसान हो जाएगी और निगरानी कमजोर पड़ेगी।
यह अहिंसा के सिद्धांत के विपरीत
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि इससे भारत विदेशी कंपनियों के लिए सस्ती टेस्टिंग लैब बन जाएगा, जहां खरगोश, चूहे, बंदर और कुत्तों पर क्रूर प्रयोग होंगे। यह अहिंसा के सिद्धांत के विपरीत है। सरकार ने इस ड्राफ्ट पर 5 नवंबर तक आपत्ति दर्ज कराने की समय सीमा तय की है। अहिंसा प्रेमियों से अपील की गई है कि वे जारी QR कोड को स्कैन कर अपनी आपत्ति दर्ज कराएं।





