इंदौर। इंद्रपुरी चातुर्मास उत्सव समिति के तत्वावधान में नेमिनगर जैन कॉलोनी में बुधवार को चतुर्थ पट्टाधीश प्राकृताचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ने अपनी मंगल देशना में देव-शास्त्र-गुरु के साथ मुनिराज, साधुवृंद का सानिध्य करने के प्रेरित किया। उन्होंने बुधवार को प्रवचन सभा में उत्तम समाधि के लिए देव-शास्त्र और गुरु को बेहद जरूरी बताया। आचार्य श्री ने कहा कि सम्यक दर्शन प्राप्त कर लो जीवन में खुशहाली होगी। देव-शास्त्र-गुरु साथ रहेंगे तो जीवन में हर पल हरियाली होगी। उन्होंने कहा कि यह सम्यक दर्शन का ही प्रताप है कि नरक में रहने वाले नार का भी उद्धार हो जाएगा। गुरु के चरणों, जहां यति, मुनिराज, साधु और संत विराजित हों, जिनालय, जिन मंदिरों तथा भगवान के सामने अगर समाधि मरण हो तो उससे उत्तम क्या हो सकता है।
संयम का उपकरण ही काम आता है
आचार्यश्री सुनीसागर जी ने मंगल प्रवचन में आगे कहा कि वीतराग का स्मरण करते-करते अगर समाधि मरण हुआ हो तो कुछ तो पुण्य रहा होगा। जहां विज्ञान फेल हो जाते हैं वहां संयम का उपकरण ही काम आता है। उन्होंने कविता की लाइन सुनाते हुए कहा कि शब्दों को होठों पर लाकर भेद न खोलो, आंखों से बोलों हम आंखों की भाषा जानते हैं। जब जीवन का अंत हो मेरे सामने संत हो। जिनवाणी का मंत्र हो और सामने अरिहंत हो। आचार्य श्री ने कहा कि अब इस जीवन को उत्तम बनाना है तो अपने भाव में एकत्व भावना हो। अकेले आए हैं। अकेले जाएंगे। जीवन की सच्ची हरियाली धर्म से आती है। धर्म से ही धरती हरियाली छा गई। खुशहाली आ गई।
एकत्व भाव ही सार्थक होता है
आचार्य श्री ने श्रावकों को सावधान करते हुए कहा कि धर्म से भटकाने वाले बहुत मिल जाएंगे। धर्म के मार्ग से भटकना नहीं है। सही राह दिखाने वाले दुर्लभ हैं। जीते जी इन से सावधान रहो। एकत्व भाव ही सार्थक होता है। मिथ्यात्व आगे बढ़ने नहीं देता है। मनुष्य पर द्रव्य एकत्र करने में लगा रहा। निज शुद्धत्व को नहीं माना।
णमोकार पढ़ लो जीवन सुधर जाएगा
किसी को भी इष्ट मान लिया। इष्ट-अनिष्ट बनाकर मैंने बहुत दुख पाए हैं। अब आपकी शरण में आया हूं। यह भाव होना चाहिए। वीतरागी के चक्कर में पड़ोगे तो कल्याण होगा जाएगा। णमोकार पढ़ लो जीवन सुधर जाएगा। जागना, जानना और गुरु की वाणी को समझना ही कल्याण का मार्ग बताएगा।
यह समाजजन श्रेष्ठी उपस्थित रहे
इस अवसर पर इंद्रपुरी चातुर्मास उत्सव समिति के इंद्रकुमार सेठी, नेमिनगर जैन कॉलोनी मंदिर समिति के अध्यक्ष कैलाश लुहाड़िया, देवेंद्र सेठी, कुशलराज जैन पमपम सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।



