श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, कस्टम रोड, जवाहर गंज, डबरा में परम पूज्य गणाचार्य विनम्र सागर जी महाराज की परम प्रभाव शिष्या परम पूज्य आर्यिका 105 श्री विश्रेय श्री माताजी ने मंदिर में प्रवचन दिए। इस अवसर पर अभिषेक, पूजन, शांति धारा जैसे धार्मिक कार्यक्रम भी हुए।
डबरा । श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, कस्टम रोड, जवाहर गंज, डबरा में परम पूज्य गणाचार्य विनम्र सागर जी महाराज की परम प्रभाव शिष्या परम पूज्य आर्यिका 105 श्री विश्रेय श्री माताजी ने मंदिर में अभिषेक, पूजन, शांति धारा के पश्चात अपने प्रवचन में कहा कि मिथ्या दृष्टि देव हैं तो वे वनस्पतिकाय में जन्म लेंगे और चक्रवर्ती मिथ्यात्व चारित्र से नरक में जाएगा तो सोचो कि मिथ्या दृष्टि मनुष्य कहां जाएंगे।

मनुष्य के लिए चारों गति खुली है लेकिन संयमियों के लिए केवल मात्र एक गति देवगति खुली है। इसलिए अपने जीवन में सम्यक्तव प्राप्त करो। जो सम्यक दृष्टि जीव सम्यक्तव 8 अंगों का पालन करता है वो सम्यक दृष्टि सम्यक्तव के आठ अंगों नि: शंकित, नि:कांक्षित, निर्विचिकित्सा, अमूढ़ दृष्टि, उपगूहन, स्थिति करण, वात्सल्य और प्रभावना ये सम्यक्तव के अंग अपने जीवन में लाएं और इस पर्याय को सार्थक करें। इस अवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज की महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित थे।