बदनावर। नगर के प्राचीन भोयरा वाले मंदिर में श्रद्धालुओं ने एक अद्भुत चमत्कार देखा। भादवा की छठ को संध्या आरती के दौरान मंदिर की दीवारों से केसरिया रंग की पतली-पतली जलधारा निकलने लगी। पास जाने पर उसमें से केसर की खुशबू आ रही थी। यह दृश्य देखकर श्रद्धालुओं ने तुरंत पास में विराजित साध्वी मंडल को सूचना दी। साध्वी श्री ब्रह्मा जी मसा आदि ठाणा मौके पर पहुंचीं। दृश्य देखकर साध्वी मंडल ने बताया कि यह अमिझरा अर्थात केसर की बारिश है। कुछ ही देर में केसर की बूंदें मंदिर के गुंबज और छत पर भी दिखाई देने लगीं। श्रद्धालुओं ने इसे चमत्कार मानकर किसी ने नोट पर तो किसी ने रुमाल पर निशानी के रूप में केसर की बूंदों को लिया। इस अवसर पर साध्वी मंडल ने बताया कि जैन मंदिरों के अधिष्ठायक देव होते हैं। जब वे भक्तों की प्रभु भक्ति और पवित्र वातावरण को देखकर प्रसन्न होते हैं तो ऐसे चमत्कार करते हैं। इस मंदिर में 2300 वर्ष प्राचीन सम्प्रति राजा के शासनकाल की प्रतिमा विराजित है।

संगीत की आवाज आती थी

मान्यता है कि जितनी प्राचीन प्रतिमा होती है, उसका अतिशय उतना ही अधिक होता है और देवता भी यहां दर्शन के लिए आते हैं। पूर्व में जब यह प्रतिमा जमीन के अंदर भोयरे में थी, तब भी इस प्रकार के चमत्कार होते रहते थे। मंदिर के पास रहने वाले पूर्व पुजारी कोमल राम शर्मा ने बताया कि कभी-कभी मध्यरात्रि में मंदिर के अंदर से संगीत की आवाज आती थी।

चांदी का सिक्का प्राप्त होता था

मान्यता है कि रात्रि में देवता यहां आकर भक्ति और नृत्य करते हैं। इसके पूर्व के पुजारी मोतीलाल रावल को भी प्रतिदिन मंदिर के द्वार खोलते ही एक चांदी का सिक्का प्राप्त होता था। यह बात उनके सुपुत्र और वर्तमान में पूजा करने वाले उमाकांत रावल ने स्वयं कई बार बताई है। उन्हें भी कई बार छोटे-छोटे चमत्कार देखने को मिले और सहयोग मांगने पर अधिष्ठायक देव उनकी सहायता करते थे।