आगरा। सेक्टर-7, आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की श्रद्धापूर्वक आराधना की गई। प्रातः धार्मिक विधि-विधानों के साथ मूलनायक भगवान शांतिनाथ का अभिषेक संपन्न हुआ।
स्वर्ण कलश से अभिषेक और शांतिधारा
दो पुण्यार्जक श्रद्धालुओं ने स्वर्ण कलश से मूलनायक भगवान शांतिनाथ का अभिषेक किया। चारों इंद्रों ने रजत मुकुट एवं माला धारण कर रजत झारियों से पांडुक शिला पर विराजमान भगवान पद्मप्रभु की शांतिधारा की।
लगभग 80 पुजारियों ने पांडुक शिला पर विराजमान भगवान पद्मप्रभु का अभिषेक किया। इसके उपरांत सामूहिक आरती एवं संगीतमय पूजन संपन्न हुआ। विधि-विधान की क्रियाएं पंडित सिद्धांत जैन शास्त्री, मथुरा के निर्देशन में कराई गईं।
ममता ही परिग्रह का कारण
पंडित सिद्धांत जैन शास्त्री ने कहा कि आत्मा के अपने गुणों के अतिरिक्त जगत में कोई भी वस्तु वास्तव में उसकी नहीं है। आत्मा का स्वभाव आकिंचन है, किंतु मोहवश जीव जड़ और चेतन पदार्थों को अपना मानकर उनसे ममता जोड़ लेता है।
उन्होंने कहा कि माता-पिता, पुत्र-पुत्री, पति-पत्नी, मित्र तथा धन-संपत्ति, मकान, दुकान, सोना-चांदी और अन्य भौतिक वस्तुओं के प्रति अत्यधिक अपनत्व ही परिग्रह का कारण बनता है। प्रिय वस्तु की सहायता करने वाले को व्यक्ति अपना हितैषी मानता है और उसे हानि पहुंचाने वाले से द्वेष करने लगता है। यही ममता सांसारिक विवादों का मूल कारण है।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में समिति अध्यक्ष अतुल जैन, मंत्री राकेश जैन, मगन कुमार जैन, प्रवीण जैन, महेशचंद्र जैन, राजेश बैनाड़ा, विजय जैन निमोरब, अरुण जैन, अनिल आदर्श जैन, सुनील जैन, सतीश जैन, राजेंद्र जैन, संजय जैन, जितेश जैन, विपुल जैन, आलोक जैन, मोहित जैन, प्रशांत जैन, वैभव जैन, दीपक जैन, दीपेश जैन, चंदन जैन, आदिश जैन, विशाल जैन, अनंत जैन, विपिन जैन एवं अभिषेक जैन सहित सकल जैन समाज उपस्थित रहा।
आज उत्तम आकिंचन्य धर्म की आराधना
मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि 24 सितंबर 2026 को सुबह 7:30 बजे से मंदिर में उत्तम आकिंचन्य धर्म की पूजा, आरती एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
श्रीफल साथी : राहुल जैन, आगरा




