आगरा। निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला से संत चर्या शिरोमणि पट्टाचार्य आचार्य श्री विशुद्धसागर महाराज के सुयोग्य शिष्यों मुनि श्री समत्वसागर महाराज, मुनि श्री शीलसागर महाराज एवं मुनि श्री सुप्रभातसागर महाराज ससंघ का श्री 1008 शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर, सेठ बिहारीलाल जैन गुदड़ी, मंसूर खां में मंगल प्रवेश हुआ।

मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ मुनि संघ की अगवानी की। धर्मसभा का शुभारंभ आचार्य विरागसागर महाराज के चित्र अनावरण से हुआ। समाजजनों ने मुनि संघ का पाद प्रक्षालन कर श्रद्धा व्यक्त की।

शांतिधारा एवं आहारचर्या संपन्न

मंदिर आगमन के बाद मुनि श्री के मुखारविंद से शांतिधारा संपन्न हुई। इसके पश्चात धर्मसभा आयोजित हुई तथा मुनि संघ की आहारचर्या संपन्न हुई।

आदतें ही बनती हैं संसार-चक्र का कारण

मुनि श्री समत्वसागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि संसार का चक्र कारण और कार्य की निरंतर श्रृंखला के रूप में चलता रहता है। मनुष्य दैनिक जीवन में अनेक कार्यों और परिस्थितियों का इतना अभ्यस्त हो जाता है कि वह अपने आसपास और अपने भीतर होने वाले परिणामों के प्रति सजग नहीं रह पाता।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार व्यक्ति नियमित मार्ग पर चलते हुए गड्ढों और मोड़ों से अनायास बच निकलता है, उसी प्रकार जीव अनेक जन्मों के संस्कारों के कारण कषायों और इंद्रिय-विषयों में सहजता से प्रवृत्त होता रहता है। इन आदतों को पहचानकर उनसे ऊपर उठने का प्रयास ही आत्मजागरण की दिशा है।

अंतरंग परिणामों को पहचानने की जरूरत

मुनि श्री ने कहा कि बाहर के घर की वस्तुओं के साथ-साथ अंतरंग घर अर्थात अपने मन में उठने वाले भावों को भी पहचानना आवश्यक है। कब क्रोध, मान, माया, लोभ अथवा स्वार्थ के भाव मन को घेर लेते हैं, इसकी सजगता ही साधना का प्रारंभ है।

इस अवसर पर वीरेंद्र कुमार जैन, अजय कुमार जैन, सुधांशु जैन, राजेश जैन, अनिल जैन, विक्रम जैन, सुभाषचंद जैन, विकी जैन, राकेश जैन, धर्मेंद्र जैन एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

श्रीफल साथी : राहुल जैन, आगरा