आगरा। निर्मल सेवा सदन, रकाबगंज छीपीटोला में पर्युषण पर्व के नौवें दिन उत्तम आकिंचन्य धर्म के अवसर पर आत्मस्पंदन ध्यान शिविर श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ आयोजित हुआ। संतचर्या शिरोमणि आचार्य श्री 108 विशुद्धसागरजी महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि श्री 108 समत्वसागरजी महाराज, मुनि श्री 108 शीलसागरजी महाराज एवं मुनि श्री 108 सुप्रभातसागरजी महाराज के सान्निध्य में शिविरार्थियों ने पूजन, अभिषेक एवं शांतिधारा में सहभागिता की।
दीप प्रज्ज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट के साथ मंगलाचरण संपन्न हुआ। पंडित प्रदीप शास्त्री, दमोह का भी सान्निध्य प्राप्त हुआ।
पर-वस्तु को अपना मानने से बढ़ता है दुख
मुनि समत्वसागर महाराज ने कहा कि जीवन में अशांति और दुख का कारण पर-वस्तुओं को अपना मान लेना है। दान और त्याग करने के बाद भी यदि व्यक्ति ‘मैंने दिया है’ अथवा ‘मेरा जिनालय, मेरा मंदिर’ का भाव रखता है, तो उसके भीतर ममत्व शेष रहता है।
उन्होंने कहा कि जो वस्तु अथवा व्यक्ति हमसे छिनता है, वह वास्तव में हमारा था ही नहीं। जो हमारा है, वह छिन नहीं सकता। संयोग और वियोग वाली वस्तुएं आत्मा से भिन्न हैं; इसलिए उनके प्रति अत्यधिक अपनापन दुख का कारण बनता है।
इष्ट-वियोग और अनिष्ट-संयोग में समता
मुनिश्री ने कहा कि इष्ट व्यक्ति अथवा वस्तु का वियोग जीव को दुखी करता है और अनिष्ट का संयोग भी कष्ट देता है। परिवार, संपत्ति और संबंध सुख के लिए बनाए जाते हैं, किंतु उनमें गहरा अपनापन स्थापित हो जाने पर वही दुख का कारण बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति हमारे प्रति अनुकूल व्यवहार न करे, तब भी उसके प्रति क्षमाभाव रखना चाहिए। यह कर्मों की राग-द्वेष परंपरा को कम करने और आत्मा की शांति का मार्ग बनता है।
दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म
मंच संचालन सतेंद्र जैन साहूला ने किया। कार्यक्रम में श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के रमेश जैन, मनोज जैन, मुकेश जैन, प्रवीण जैन पद्मावती, शैलेश जैन, मुकेश जैन लले, विवेक जैन, चक्रेश जैन, राजीव जैन, आशीष जैन बाबा, दीपक जैन, रोहित जैन सहित सकल जैन समाज उपस्थित रहा।
मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि 25 सितंबर 2026 को प्रातः 7 बजे मुनि समत्वसागर महाराज के सान्निध्य में दशलक्षण पर्व के दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर अभिषेक, पूजा एवं विधान होगा। शाम को निर्मल सेवा सदन में आरती आयोजित की जाएगी।
श्रीफल साथी : राहुल जैन, आगरा




