श्री सिद्धचक्र मंडल विधान आत्मशुद्धि, आत्मकल्याण और मोक्ष मार्ग का अद्वितीय साधन है। इसमें साधक सिद्ध भगवान की पूर्णता, पवित्रता और मुक्तात्म स्वरूप का स्मरण करता है। यह उद्गार आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज ने श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतिम दिन निकली रथयात्रा के दौरान व्यक्त किए। इंदौर से पढ़िए, यह खबर...
इंदौर। श्री सिद्धचक्र मंडल विधान आत्मशुद्धि, आत्मकल्याण और मोक्ष मार्ग का अद्वितीय साधन है। इसमें साधक सिद्ध भगवान की पूर्णता, पवित्रता और मुक्तात्म स्वरूप का स्मरण करता है। यह उद्गार आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज ने श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतिम दिन निकली रथयात्रा के दौरान व्यक्त किए। महोत्सव अध्यक्ष राहुल जैन केसरी ने बताया कि रथयात्रा सुबह इंडो किड्स स्कूल तिलकनगर से निकाली गई। बैंडबाजों, ध्वज, आकर्षक झांकियों, मनमोहक सजावट, तीन विशाल रथ और हाथी के साथ यात्रा निकाली गई। तिलक नगर महिला मंडल सदस्य भी मौजूद रहीं। सुबह 6.45 बजे वंदना, अभिषेक-अर्घ्य, स्वाध्याय, पूजन, कलश स्थापना, प्रवचन और शाम को आरती और ध्यान सत्र हुए।

इस अवसर पर विधान संरक्षक राजेश उदावत, विमल अजमेरा, सचिन उद्योगपति, विधानाचार्य राजेश भैया, जिनेश मलैया, मनोज छाबड़ा, विमल जैन, प्रवीण दिवाकर और नवीन गोधा आदि मौजूद रहे। विधान समिति में देवेंद्र जैन, अतिशय जैन, राजेंद्र गंगवाल, रज्जू भैया, राजू श्रीफल, ऋषभ जैन और राजेंद्र मोदी का विशेष सहयोग रहा। द्रव्य पुण्यार्जक मनोज बाकलीवाल, भोजन पुण्यार्जक सतीश, विक्रम राजावत और मनीष नायक रहे।