मुरैना। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री उदारसागर जी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य अपने भीतर विराजमान परमात्मा को भूलकर बाहरी आडंबरों में अधिक उलझता जा रहा है। उन्होंने कहा कि आत्मा का परमात्मा से शाश्वत संबंध है और आत्मस्वरूप की अनुभूति ही धर्म का वास्तविक आधार है।
आत्मचिंतन से मिलता है परमात्मा का बोध
आचार्यश्री ने कहा कि जब तक आत्मा का परमात्मा से मिलन का भाव बना रहता है, तब तक मनुष्य के भीतर श्रद्धा, भक्ति और धर्म का प्रवाह निरंतर चलता रहता है। जैसे ही मनुष्य आत्मस्वरूप को भूलता है, उसके जीवन से धर्म का भाव भी क्षीण होने लगता है। उन्होंने बाहरी दिखावे की अपेक्षा आत्मचिंतन और आत्मपहचान पर बल दिया।
प्रतिदिन मंदिर जाना जीवन को देता है दिशा
परम पूज्य 108 मुनि श्री उपशांतसागर जी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि मंदिर जाना केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मचिंतन और सकारात्मक जीवनशैली का माध्यम है। प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन भगवान के दर्शन, पूजन और ध्यान का नियम बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नियमित मंदिर जाने वाला व्यक्ति अधिक प्रसन्न, संतुलित और संतोषी रहता है। मुनिश्री ने युवाओं से समयबद्ध दिनचर्या अपनाने तथा देर रात तक जागने की प्रवृत्ति से बचने का भी आह्वान किया।
आज होगा चातुर्मास मंगल कलश स्थापना समारोह
संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री अभिनंदनसागर जी महाराज के परम प्रभावक आज्ञानुवर्ती शिष्य आचार्य श्री उदारसागर जी महाराज अपने शिष्य मुनि श्री उपशांतसागर जी महाराज, ऐलक श्री उत्साहसागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री उपकारसागर जी महाराज, क्षुल्लिका उदितमति माताजी एवं क्षुल्लिका उपासनामति माताजी सहित वर्ष 2026 के मंगल चातुर्मास की स्थापना करेंगे।
दोपहर 1 बजे होगा भव्य आयोजन
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आज दोपहर 1 बजे से चातुर्मास मंगल कलश स्थापना समारोह आयोजित होगा। समारोह में बड़ी संख्या में गुरु भक्त, साधर्मी बंधु, मातृशक्ति एवं युवा वर्ग सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त करेंगे।
मंत्रोच्चार के साथ होंगे धार्मिक अनुष्ठान
समारोह में ब्रह्मचारी प्रदीप जैन ‘पीयूष’ के मार्गदर्शन में प्रतिष्ठाचार्य संजय शास्त्री (सिहोनिया), प्राचार्य चक्रेश शास्त्री (जैन छात्रावास) तथा विद्वान नवनीत शास्त्री (मुरैना) द्वारा मंत्रोच्चार के साथ सभी धार्मिक अनुष्ठान विधि-विधानपूर्वक संपन्न कराए जाएंगे।
सामूहिक वात्सल्य भोज की व्यवस्था
मंगल कलश स्थापना समारोह के उपरांत श्रद्धालुओं के लिए सामूहिक वात्सल्य भोज की व्यवस्था भी रहेगी। आयोजन को लेकर मुरैना जैन समाज में श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक वातावरण बना हुआ है।



