कुंभोज। आचार्य श्री 108 चंद्रप्रभसागरजी महाराज का अवतरण दिवस तथा उनके शिष्य मुनि श्री 108 चंद्रकीर्तिसागर जी महाराज का प्रथम दीक्षा दिवस 19 अक्टूबर को कुंभोज में हर्षाेल्लास से मनाया जाएगा। इस अवसर पर विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। अखिल भारतीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशेका पाटील ने बताया कि आचार्य श्री चंद्रप्रभसागरजी महाराज का पूर्वाश्रम नाम बा. ब्र. जिनेंद्र भुपाल आवटी है। आपका जन्म 18 अक्टूबर 1980 को मौजे डिग्रज, तहसील मिरज, जिला सांगली में हुआ था। आपके पिताजी का नाम स्व. भुपाल धुळाप्पा आवटी तथा माता का नाम सरोजनी भुपाल आवटी है, जो वर्तमान में आर्यिका चंदनमती माताजी के रूप में दीक्षित हैं। आपने 12वीं तक लौकिक शिक्षा ग्रहण की है।
आपने 6 फरवरी 2002 को भोपाल में आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज से ब्रह्मचर्य व्रत लिया। 21 फरवरी 2008 को हेरले, कोल्हापुर में ऐलक दीक्षा और 25 जून 2009 को बाहुबली, कोल्हापुर में दिगंबर दीक्षा ग्रहण की। आपके दीक्षा गुरु आचार्य श्री सन्मतिसागर महाराज हैं। आपको 29 मार्च 2015 को आष्टा, सांगली में चतुर्विध संघ के सान्निध्य में समाज द्वारा आचार्य पद प्रदान किया गया।
इन उपाधियों से किया गया अलंकृत
आपको विभिन्न अवसरों पर अनेक उपाधियों से विभूषित किया गया है। 16 मई 2010 को अर्जुनवाड में युवासम्राट, 18 अक्टूबर 2010 को आष्टा में क्रांतिरत्न, 4 अप्रैल 2011 को आष्टा में बालाचार्य, 29 मार्च 2015 को आष्टा में आचार्य, 29 मार्च 2016 को मजगाव में प्रवचन केसरी, 27 अक्टूबर 2016 को मालगांव में सम्यक रत्नाकर, 8 मार्च 2018 को श्रवणबेळगोळ में संत वात्सल्य निधि, 9 नवंबर 2018 को औरवाड में जिनवाणी कंठभूषण, 8 मार्च 2022 को कुंभोज में ज्ञान दिवाकर और 26 फरवरी 2023 को आष्टा में वात्सल्यमूर्ति की उपाधि प्रदान की गई।
आचार्यश्री के यह हैं प्रिय शिष्य
आचार्य श्री के शिष्य परिवार में प.पू. 105 आर्यिका अजितमती माताजी जिन्होंने 10 अगस्त 2010 को आष्टा में दीक्षा ली और अब समाधिस्थ हैं, प.पू. 108 श्री विदेहसागर महाराज जिन्होंने 21 जुलाई 2016 को श्रवणबेळगोळ में दीक्षा ली, प.पू. 108 श्री सरलसागर महाराज जिन्होंने 29 फरवरी 2019 को आष्टा में दीक्षा ली, प.पू. 105 आर्यिका सुव्रतमती माताजी जिन्होंने 29 अप्रैल 2022 को मिरज में दीक्षा ली और प.पू. 105 क्षुल्लिका चरमती माताजी जिन्होंने 4 अगस्त 2022 को वळीवडे में दीक्षा ली और अब समाधिस्थ हैं, शामिल हैं।
इन स्थानों पर हुए हैं चातुर्मास
आचार्य श्री ने अब तक 19 चातुर्मास किए हैं जिनमें 2008 में कुंभोज, 2009 में हारोली, 2010 में आष्टा, 2011 में शिरदवाड, 2012 में मजगाव, 2013 में कोथळी, 2014 में दत्तवाड, 2015 में बस्तवाड, 2016 और 2017 में श्रवणबेळगोळ, 2018 में औरवाड, 2019 में मालगाव, 2020 में नातेपुते, 2021 में धर्मनगर, 2022 में वळीवडे, 2023 में कुंथलगिरी, 2024 में जयसिंगपूर, 2025 में कोथळी और 2026 में कुंभोज में चातुर्मास शामिल है।
शिष्य मुनि श्री चंद्रकीर्ति महाराज का परिचय
आचार्य श्री के शिष्य मुनि श्री 108 चंद्रकीर्ति महाराज का जन्म 1 मार्च 1985 को आळते में हुआ था। उनका पूर्वाश्रम नाम राहुल रायगोंडा कनवाडे है और उन्होंने बी.ए. तक शिक्षा प्राप्त की है। उनकी कर्मभूमि हेरले रही है। उन्होंने 30 अक्टूबर 2006 को गोरखपुर-अमरकंटक में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया। वर्ष 2013 में रामटेक में शांतिनाथ भगवान के समक्ष द्वितीय प्रतिमा तथा 2016 के भोपाल चातुर्मास में तृतीय प्रतिमा ग्रहण की। विजयादशमी 2 अक्टूबर 2025 को चिपरी स्थित आचार्य श्री चिकित्सालय में उन्होंने मुनि दीक्षा ग्रहण की। उनका प्रथम चातुर्मास 2025 में कोथली में हुआ और द्वितीय चातुर्मास 2026 में कुंभोज में चल रहा है। ब्रह्मचर्य अवस्था में मुनिश्री ने 450 निर्जल उपवास किए हैं। उनकी प्रमुख तप-साधनाओं में षोडशकारण के नौ निर्जल उपवास, जिनगुण संपत्ति के 65 उपवास, णमोकार मंत्र के 35 उपवास, दशलक्षण पर्व के नौ उपवास, प्रायश्चित के दस उपवास और 64 ऋद्धि के 65 उपवास शामिल हैं। वर्ष 2012 में उन्होंने सदलगा से सम्मेद शिखरजी तक पदयात्रा की, जहां 16 उपवास कर 17वें दिन पारणा किया और 18वें दिन पर्वत वंदना की। उसी वर्ष उन्होंने सम्मेद शिखरजी पर्वत की 24 वंदनाएं भी कीं।
त्यागी सेवा कमेटी कुंभोज के श्रावक-श्राविका कर रही आयोजन
इस अवसर पर आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर कुंभोज, पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर कुंभोज, महावीर दिगंबर जैन मंदिर कुंभोज, वीर सेवा दल, वीर महिला मंडल, जैन युवा मंच, ब्र. श्वेता दीदी, ब्र. अस्मिता दीदी, ब्र. बंडू भैया, ब्र. संदीप भैया, विद्यासन्मतीदास चातुर्मास कमेटी 2026, त्यागी सेवा कमेटी कुंभोज के श्रावक-श्राविकाओं द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।




