धरियावद। आचार्य कल्प पुण्य सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य में वर्षायोग स्थल महावीर वाटिका में 48 दिवसीय भक्तामर विधान की आराधना चल रही है। 27वें दिन 16 पुण्यार्जक परिवारों ने विधान में बैठकर भक्तामर महामंडल महामंत्र की आराधना की और भक्तिभावपूर्वक मंडप पर 48 अर्घ्य समर्पित किए। विधान के बाद आयोजित धर्मसभा में आचार्य कल्प पुण्य सागर जी महाराज के संघस्थ मुनिराज श्री मुदित सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि प्रत्येक जीव सुख चाहता है और दुख से घबराता है, लेकिन विडंबना यह है कि मनुष्य अपने जीवन में ऐसे कार्य करता है जो धर्म और संयम के विरुद्ध होते हैं। इसी कारण उसे वास्तविक सुख की प्राप्ति नहीं हो पाती। मुनि श्री ने कहा कि यदि मनुष्य जीवन में सुख चाहता है तो उसे संयमपूर्ण जीवन जीना चाहिए और जो प्राप्त है, उसमें संतोष रखना चाहिए। धर्म का अनुसरण करते हुए सदाचार के मार्ग पर चलने से जीवन में शांति और सुख की अनुभूति होती है।
रक्षाबंधन एवं ग्यारहवें तीर्थंकर श्रेयांसनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक
आचार्य कल्प श्री पुण्य सागर जी महाराज ससंघ (20 पिच्छी) का वर्षायोग महावीर वाटिका में चल रहा है। वर्षायोग कमिटी के अध्यक्ष सागरमल बोहरा ने बताया कि शुक्रवार 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व मनाया गया। जैन मान्यताओं के अनुसार इसी दिन अकम्पनाचार्य के संघस्थ सात सौ मुनिराजों पर आए उपसर्ग का निवारण हुआ था। इसी पावन प्रसंग की स्मृति में जैन समाज द्वारा रक्षाबंधन पर्व धर्म की रक्षार्थ श्रद्धा एवं भक्तिभाव से मनाया जाता है। साथ ही तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ के मोक्ष कल्याणक दिवस के अवसर पर शुक्रवार को निर्वाण लाड़ू भी समर्पित किया गया




