नागदा (धार)। आचार्य देव श्री आनन्दसागर सुरीश्वरजी मसा की 152 वीं जन्म जयंती श्री संघ जन द्वारा तप त्याग एवं समर्पण भाव से मनाई गई। जन्म जयंती के अवसर पर प्रातः स्नात्र महोत्सव मनाते हुए स्नात्र पूजन अष्ट प्रकारी पूजन करते हुए गुरुदेव की प्रतिमा पर वासछेप पूजन किया गया। सामूहिक सामायिक की गई। जिसमें समाजजनों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। गुणानुवाद सभा में समाज जनों ने बताया कि पूज्य आनंदसागर जी मसा की मालवांचल पर विशेष कृपा रही। आप ही की पावन प्रेरणा एवं निश्रा में अनेक प्राचीन जैन तीर्थ की प्रतिष्ठा संपन्न हुई।

जिसमें जैन समाज के महानतम तीर्थ 20-20 तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि सम्मेद शिखरजी, मक्सीजी, अंतरिक्षजी, केसरियाजी जैसे बड़े तीर्थ जो कि जैन अनुयायियों के लिए आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। ऐसे तीर्थाें की तीर्थ स्थापना कर शासन शोभा बढ़ाई। आप एक मात्र ऐसे मुनि भगवंत हुए। जिन्होंने श्लोक सहित 45 आगम की रचना ताम्र पत्र में कर आगमों की सुरक्षा की एवं आगम मंदिर का निर्माण करवाया। आपको अनेक पदवियों से अलंकृत हुए साथ ही सैलाना नरेश प्रतिबोधक पद से भी अलंकृत किया गया। आपके द्वारा अनेक शास्त्र की रचना की गई।

गुणवाद सभा के पूर्व गुरु भगवंत के चित्र के सम्मुख अखिल भारतीय श्री जैन श्वेतांबर मालवा महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष मेहता, राष्ट्रीय पदाधिकारी राजेंद्र बोकडिया, मूर्ति पूजक संघ अध्यक्ष संतोष मोदी ने दीप प्रज्वलित एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस अवसर पर शैतानमल कांकरिया, अभय मेहता, सुरेश मुथा, पुखराज कटारिया, पवन मेहता पंकज मोदी ने अपने भाव रखे। महिला मंडल द्वारा नवकार मंत्र के जाप किए गए।