धामनोद। दिगंबर जैन समाज के 11 वें तीर्थंकर भगवान श्री श्रेयांशनाथ जी को श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को निर्वाण की प्राप्ति हुई थी और सम्मेद शिखर क्षेत्र से योग निरोध कर के कई कोड़ा कौड़ी मुनियों के संग मोक्ष प्राप्त किया था। इस अवसर पर दिगंबर जैन समाज धामनोद समाजजनों के सानिध्य में प्रातः भगवान के अभिषेक और शांतिधारा नित्य नियम की पूजा हुई और भगवान श्रेयांशनाथ के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण कांड की सुमधुर वाणी से बड़ी भक्ति भाव और उल्लास के साथ एवं भगवान का निर्वाण लाडू भी चढ़ाया गया। साथ ही जैन धर्म में रक्षाबंधन के पर्व का क्या महत्व है और क्यों मनाया जाता है भी बताया गया।

700 मुनियों पर आए उपसर्ग को अपनी विक्रिया रिद्धि से दूर किया

समाज अध्यक्ष दीपक प्रधान ने बताया कि हस्तिनापुर नगरी में मुनि विष्णु कुमार ने अकंपनाचार्य और 700 मुनियों पर आए उपसर्ग को अपनी विक्रिया रिद्धि से दूर किया और उन्हें जलने से बचाया और बताया कि कैसे राजा बलि के मंत्रियों द्वारा षडयंत्र कर जलाने का प्रयास किया तब विष्णु कुमार मुनि को अपनी ऋद्धि बल से ज्ञात हुआ और उन्होंने अपनी तप बल की शक्ति से वामन का रूप धर कर तीन पद जमीन मांगी।

राजा बलि ने माफी मांगी

उन्होंने अपना विशाल रूप कर के एक कदम सुमेरु पर्वत पर ,दूूसरा कदम मानुषोत्तर पर्वत पर और जब तीसरा कदम रखने की जगह नहीं मिली तो राजा बलि ने अपने पीठ पर रखने को बोला और वो कांप उठा और उसमें क्षमा मांगी और इस प्रकार विष्णु कुमार मुनि ने 700 मुनियों पर आए उपसर्ग से रक्षा की तथा देवताओं ने क्षमा मांगी राजा बलि ने माफी मांगी। तब से ये रक्षा का त्यौहार धर्म की मुनियों रक्षार्थ रक्षा बंधन के रूप में मनाया जाता है।

मंदिर में अभिषेक की दूसरी टीम ने भी महोत्सव मनाया

जैन मुनियों को इस दिन आहार में खीर का आहार दिया जाता है। समाज द्वारा सामूहिक रक्षा बंधन भी मनाया गया। इस दौरान श्रावक-श्राविकाएं इंद्र सहित सभी उपस्थित थे। मंदिर में अभिषेक की दूसरी टीम ने भी महोत्सव मनाया। प्राचीन मंदिर धामनोद के समीप बिखरोन जैन मंदिर में भी मनाया गया। यह जानकारी मीडिया प्रभारी यश जैन, समाज अध्यक्ष दीपक प्रधान और सह सचिव अजय जैन ने दी। मंदिर जी में पुरुष महिलाओं में काफी उत्साह भक्ति में था।