मुरैना/अम्बाह। रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर शुक्रवार को अम्बाह की जैन बगीची में धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों की धूम रही। आचार्य श्री सिद्धांत सागर महाराज की शिष्या गणिनी आर्यिका संगममति माताजी के संसघ मंगल सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर जिनेंद्र भगवान की आराधना की। णमोकार महामंत्र के जाप और धार्मिक जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने विधि-विधानपूर्वक श्रीजी का अभिषेक, पूजन एवं आरती की। इस अवसर पर आचार्य सिद्धांत सागर महाराज का 34वां आचार्य पदारोहण दिवस, मुनि उपसर्ग निवारण पर्व एवं श्रमण संस्कृति रक्षा दिवस श्रद्धा के साथ मनाया गया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालुओं ने 700 श्रीफल जिनेंद्र भगवान को समर्पित किए। श्रीफल अर्पित करते हुए श्रद्धालुओं ने आत्मशुद्धि, कर्म निर्जरा तथा संयम और सदाचार की भावना व्क्त की। भगवान के मोक्ष कल्याणक के पावन प्रसंग पर निर्वाण लाडू भी अर्पित किया गया।
क्रोध, मान, माया और लोभ आत्मा को कर्मबंधन में बांधते
इस अवसर पर आर्यिका संगममति माताजी ने कहा कि जैन धर्म के पर्व केवल परंपराओं के निर्वहन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आत्मचिंतन और आत्मजागरण का अवसर प्रदान करते हैं। रक्षाबंधन का आध्यात्मिक संदेश आत्मा को पाप और कषायों से बचाने का है। क्रोध, मान, माया और लोभ आत्मा को कर्मबंधन में बांधते हैं, इसलिए इन पर विजय प्राप्त कर आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। माताजी ने कहा कि साधु-संत त्याग, तप और संयम के माध्यम से आत्मकल्याण का मार्ग दिखाते हैं। श्रमण संस्कृति की रक्षा के लिए आवश्यक है कि भगवान महावीर के सिद्धांत और जिनवाणी के संस्कार बच्चों एवं युवाओं तक पहुंचाए जाएं। नई पीढ़ी को धर्म और संस्कारों से जोड़ना ही श्रमण संस्कृति की वास्तविक रक्षा है।
चातुर्मास समाज के लिए आध्यात्मिक सौभाग्य
जैन समाज अध्यक्ष जिनेश जैन ने कहा कि आर्यिका संगममति माताजी के सान्निध्य में चल रहा चातुर्मास समाज के लिए आध्यात्मिक सौभाग्य है। ऐसे आयोजनों से समाज में धर्म, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है। कार्यक्रम में महिलाओं, पुरुषों, युवाओं एवं बच्चों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।





