मुरैना। दिगंबर जैन साधु-संत परंपरा में परम पूज्य गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंतसागर जी मुनिराज का नाम श्रद्धा, विनय और भक्ति के साथ लिया जाता है। ध्यान, स्वाध्याय, संयम और अध्यात्म के माध्यम से उन्होंने हजारों लोगों को आत्मचिंतन और धर्म की दिशा में प्रेरित किया है। उनकी सरलता, गंभीर साधना और ओजस्वी प्रवचन शैली विशेष पहचान रखती है।

जन्म और पारिवारिक परिचय
उपाध्यायश्री विहसंतसागर जी का गृहस्थ अवस्था का नाम पंकज जैन था। आपका जन्म 12 अगस्त 1983 को जगदलपुर (बस्तर), छत्तीसगढ़ में धार्मिक श्रावक श्रेष्ठी श्री बृजेश जैन एवं श्रीमती मीना जैन के परिवार में हुआ। आपका पैतृक ग्राम माडुमड, अतिशय क्षेत्र पपौरा जी, जिला टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) के समीप स्थित है।
बाल्यकाल से धर्म और वैराग्य की ओर
बाल्यकाल से ही देव, शास्त्र और गुरु के प्रति श्रद्धा रही। दिगंबर जैन मुनियों के प्रथम दर्शन ने अंतर्मन में वैराग्य की भावना को प्रबल किया। अध्ययन के साथ धर्म, ध्यान और आत्मचिंतन में विशेष रुचि रही। आपने औपचारिक शिक्षा दसवीं कक्षा तक प्राप्त की।
ब्रह्मचर्य से उपाध्याय पद तक संयम यात्रा
उपाध्यायश्री की संयम यात्रा महत्वपूर्ण पड़ावों से होकर गुजरी—
- 22 अप्रैल 2001: ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण।
- 24 मई 2004, श्रुत पंचमी, नागपुर (महाराष्ट्र): क्षुल्लक दीक्षा।
- 27 फरवरी 2012, सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी: मुनि दीक्षा।
- 13 फरवरी 2023, श्री विरागोदय तीर्थ, पथरिया (दमोह): उपाध्याय पद से विभूषित।
आपकी दिगंबरी जैनेश्वरी मुनि दीक्षा बुंदेलखंड के प्रथम दिगंबराचार्य परम पूज्य गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज के करकमलों से संपन्न हुई। गुरुदेव के सान्निध्य में आपने जैन दर्शन का गहन अध्ययन करते हुए संयम साधना की बारीकियों को आत्मसात किया।
ध्यान और स्वाध्याय बनी विशेष पहचान
उपाध्यायश्री की विशेष रुचि मेडिटेशन अर्थात ध्यान, स्वाध्याय, मनन और युवाओं को धर्म के प्रति जागृत करने में रही है। इसी कारण समाज उन्हें स्नेहपूर्वक ‘मेडिटेशन गुरु’ के नाम से जानता है।
संयम जीवन में उन्होंने आजीवन तेल, दही, मीठा एवं समस्त मीठे पदार्थों का त्याग कर कठोर तप और अनुशासन का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
चातुर्मास यात्रा का विस्तृत क्रम
संयम पथ की यात्रा में उपाध्यायश्री के चातुर्मास विभिन्न नगरों और तीर्थ क्षेत्रों में हुए।
ब्रह्मचारी अवस्था:
2001—जगदलपुर, 2002—राजनांदगांव, 2003—झांसी।
क्षुल्लक अवस्था:
2004—बीना, 2005—भिण्ड, 2006—आगरा, 2007—ग्वालियर, 2008—गाजियाबाद, 2009—बड़ौत, 2010—ज्योति नगर दिल्ली, 2011—कैलाश नगर दिल्ली।
मुनि अवस्था:
2012—गुड़गांव, 2013—विवेक विहार दिल्ली, 2014—इंदिरापुरम गाजियाबाद, 2015—लक्ष्मीनगर दिल्ली, 2016—बड़ौत (उत्तर प्रदेश), 2017—गाजियाबाद, 2018—मौजपुर दिल्ली, 2019—अतिशय क्षेत्र महातीर्थ बरासो जी (भिण्ड), 2020—इटावा, 2021—करहल (उत्तर प्रदेश), 2022—जैन नगर, नंदीश्वर द्वीप भोपाल, 2023—डबरा (मध्यप्रदेश), 2024—आगरा, 2025—भिण्ड।
वर्ष 2026: श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, आशियाना, लखनऊ में मंगल चातुर्मास चल रहा है।
बस्तर से दीक्षित होने वाले प्रथम दिगंबर जैन मुनि
उपाध्यायश्री का एक विशिष्ट गौरव यह है कि वे नक्सल प्रभावित जगदलपुर (बस्तर), छत्तीसगढ़ से दीक्षित होने वाले प्रथम दिगंबर जैन मुनि हैं। यह उपलब्धि बस्तर क्षेत्र के साथ संपूर्ण जैन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
धर्म, शिक्षा और सेवा के प्रकल्प
उपाध्यायश्री की प्रेरणा से देश के विभिन्न क्षेत्रों में धार्मिक, शैक्षणिक एवं सेवा प्रकल्प संचालित अथवा निर्माणाधीन हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- अतिशय क्षेत्र महातीर्थ बरासो जी, भिण्ड
- विहसंतसागर तीर्थ, जैतपुरा, इटावा
- श्री विमल-विराग आरोग्य धाम हॉस्पिटल, महातीर्थ शान्तिधाम, आसई, इटावा
- श्री शान्तिनाथ चेरिटेबल हॉस्पिटल, फूफ, भिण्ड
- मुनिराज विहसंतसागर भोजनालय, लालघाटी, भोपाल
- श्री शांतिनाथ चैरिटेबल हॉस्पिटल, मौजपुर, दिल्ली
- विरागोदय अहिंसा औषधालय, करहल, मैनपुरी
- विरागोदय गुरुकुल, पथरिया, दमोह
- श्री जी गुरुकुल, मंगलगिरि, सागर
- विहसंतसागर पब्लिक स्कूल (VSPS), आगरा
- विहसंतसागर हॉस्पिटल, सोनागिर
- सम्यग्ज्ञान विराग विद्यापीठ स्कूल, भिण्ड
युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र
उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी मुनिराज का जीवन संयम, साधना, ध्यान, सेवा और आत्मकल्याण का जीवंत संदेश है। वे प्रवचनों के माध्यम से आत्मचिंतन, ध्यान, अहिंसा, नैतिकता और संस्कारों का संदेश देते हुए विशेष रूप से युवा पीढ़ी को धर्म और अध्यात्म से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
12 अगस्त को अवतरण दिवस
वर्तमान में पूज्य गुरुदेव का वर्ष 2026 का मंगल चातुर्मास श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, आशियाना, लखनऊ में धार्मिक प्रभावना के साथ चल रहा है। 12 अगस्त को मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंतसागर जी मुनिराज के अवतरण दिवस पर श्रद्धालु पूज्यश्री के प्रति अपनी विनयांजलि अर्पित करेंगे।



