जयपुर। जनकपुरी जैन मंदिर परिसर में रविवार को आयोजित धर्म सभा के बाद जनकपुरी जैन पाठशाला के विद्यार्थियों ने आचार्य श्री आदित्य सागर जी महाराज के उनके कक्ष में जाकर दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर बच्चों में विशेष उत्साह एवं धार्मिक संस्कारों के प्रति श्रद्धा देखने को मिली। पाठशाला के विद्यार्थियों ने श्रीपाल–मैना सुन्दरी की कथा से संबंधित प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी धार्मिक जानकारी का परिचय दिया। बच्चों द्वारा उत्साहपूर्वक दिए गए प्रश्नोत्तर की आचार्य श्री ने सराहना की तथा उन्हें धर्म के साथ-साथ संस्कारों और सदाचार को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।
‘दर्शन विशुद्धि भावना’ को समझाया
प्रवचन में रविवार को आचार्य श्री ने आचार्य समन्तभद्र विरचित ‘रत्नकरंड श्रावकाचार’ के माध्यम से सोलहकारण भावनाओं का महत्व बताया। उन्होंने इनमें प्रथम भावना ‘दर्शन विशुद्धि भावना’ को समझाया। आचार्य श्री ने कहा कि सम्यक दर्शन की निर्मलता और शुद्धता आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण आधार है। श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के प्रवचन का लाभ लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया। आचार्य श्री आदित्य सागर जी महाराज ने पाठशाला के बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें उपहार प्रदान किए। उपहार पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।




