आगरा। श्री निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला में शनिवार को भव्य वर्षायोग कलश स्थापना का शुभारंभ हुआ। जिसमें सबसे पहले छोटी बच्ची के मंगलाचारण के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ और श्रमण सांस्कृतिक महिला मंडल के द्वारा छोटे बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम किया। सिंगर आशीष जैन,दीक्षा जैन ने भजनों से भक्ति से समा बांध दिया। आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी के तीन शिष्य मुनि श्री समत्व सागर जी महाराज, श्रमण मुनि श्री शील सागर जी महाराज, श्रमण मुनि श्री सुप्रभात सागर महाराज के सानिध्य में 11वां गुरु उपकार महा महोत्सव एवं मुनि दीक्षा दिवस एवं डिवाइन भक्ति संध्या का आयोजन किया गया। निर्मल सेवा सदन छीपीटोला में धूमधाम से सभी मण्डलों ने महिला मण्डलों और युवा मण्डलों ने भक्ति से झूमकर मुनि श्री अर्घ्य और श्रीफल चढ़ाया। मंच के पीछे व आगे कलाकृतियो में कमल खिले नजर आ रहे थे तो पंडाल में भक्तों के मन कमल की तरह खिले हुए प्रतीत हो रहे थे। 3 मुनिराजों के मंच पर आते ही पंडाल जयकारों से गूंज उठा। विशाल पंडाल ऐसा लग रहा था जैसे किसी मंदिर का प्रांगण हो और वहां भक्त उत्सव मना रहे हों। महिला मंडल द्वारा सुन्दर मंगलाचरण किया गया। इसके बाद दीप प्रज्जवलन, पाद प्रक्षालन आदि मांगलिक कार्य संपन्न हुए।
29 अगस्त 2015 में भी दीक्षा सम्पन्न हुई
29 अगस्त 2015 में भी दीक्षा सम्पन्न हुई, गुरुवर विशुद्ध सागर जी ने दीक्षित किया। 21 नवम्बर, 18 दिसम्बर आचार्य भगवन के जन्म दिवस और दीक्षा दिवस है जो कि उन तिथियों में आचार्य जी सदन विहार में रहते हैं। 24 अगस्त 2015 में समत्व के निरूद्ध बिगुल फूंका और 29 अगस्त 2015 से भाईयो को आचार्य जी के दीक्षा दी l और उनकी दीक्षा लेने की घोषणा आचार्य जी ने अपने गुरु श्री विराग सागर जी महाराज जी से कराई। दीक्षा के संस्कार तो 1/2 घंटे में ही हो जाते हैं। लेकिन दीक्षा को सुरक्षित रखना बहुत सावधानी का काम है।दीक्षा योग की तरफ ले जाती है भोग की तरफ नहीं अब 11.45 हो चुके है सामायिक का समय है। अब प्रवचन के बाद आप भोजन करेंगे और हम सामायिक करेंगे।परिग्रह मुनि सुब्रत सागर जी स्कूल में प्रथम बार मिले, यदि आप इस नोट के किसी विशिष्ट वाक्य का अर्थ समझना चाहते हैं या इसमें लिखे जैन मुनियों के इतिहास के बारे में और जानना चाहते हैं, तो मुझे बताएं।
वस्त्रों की नगरी जहां निर्वस्त्र होने का भाव बनाया
मुनि श्री समत्व सागर महाराज जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि निरंतर गतिमान यह जीव की यात्रा, जो अनंत काल से चली आ रही है। कुछ क्षण ऐसे हुआ करते हैं जहां इस यात्रा पर वह मोड़ आ जाया करता है जहां से परिवर्तन का दौर प्रारंभ हो जाया करता है। जीवन में वे क्षण बड़े ही अद्भुत और अतुलनीय हुआ करते हैं जब जीवन सारी विपत्तियों और संकटों से निकलकर किसी श्रेष्ठ मार्ग की ओर अग्रसर हो जाता है।
वह वस्त्रों की नगरी जहां निर्वस्त्र होने का भाव बनाया, ऐसी वह भीलवाड़ा नगरी 2015। वह क्षण था, वह क्षण था जहां पर इस यात्रा का वह मोड़ आया जिसने जीवन को ही बदल के रख दिया। वह भीलवाड़ा की वह, कोटा राजस्थान की नगरी। किंतु यदि मार्ग को सही बताने वाला न होता, तो शायद आज उस मार्ग पर गतिमान नहीं होते जिस मार्ग पर दिखाई दे रहे हैं।
। वे कौन से विशुद्ध परिणाम थे
पंडित जी, पता नहीं आचार्य विराग सागर जी ने अपने एक शिष्य को कौन सी ऐसी दीक्षा दी थी, कौन से मंत्र पढ़े थे वह सलेहा की भूमि पर जहां से वह धारा प्रवाहित हुई और आज उनके माध्यम से हजारों हम जैसे युवा दीक्षा को प्राप्त कर रहे हैं और जिन शासन के लिए। वे कौन से विशुद्ध परिणाम थे, वे कौन से विशुद्ध परिणाम थे जो आचार्य भगवंत विराग सागर जी के साथ रहे होंगे और वही विशुद्ध परिणामों का फल जैसे उन्होंने पूरा का पूरा अपने शिष्य विशुद्ध सागर जी में दे दिया था और उनकी विशुद्धि इतनी थी कि आज उनके विशुद्ध के उस महासागर में हर कोई डुबकी लगा रहा है। बहुत कठिन होता है।
गुरु जी का हृदय भले ही बहुत गंभीर है, सागर जैसी गहराइयों को स्पर्श करता है
मैंने तो अधिकांशतः यह देखा था। अधिकांशतः यह देखा था कि जब भी कोई गुरु या कोई भी मुनिराज आते हैं, तो अधिकांशतः बड़ों की, जो समाज के वरिष्ठ लोग होते हैं, उनकी संख्या अधिक दिखाई देती है। लेकिन जब मेरी दीक्षा हो गई और दीक्षा के पश्चात जब गुरु भगवंत के साथ में हम लोगों का विहार होता, मुझे एक भी वृद्ध और वरिष्ठ ज्यादा नहीं दिखाई देता। केवल और केवल सैकड़ों-सैकड़ों की भीड़ केवल युवाओं की दिखाई देती है। पता नहीं कौन सा जादू वे करते हैं, लेकिन वह जादू वे जो करते हैं ना, वे सब बता देते हैं। इतने सरल हृदयी हैं गुरु जी का हृदय भले ही बहुत गंभीर है, सागर जैसी गहराइयों को स्पर्श करता है।
अन्तर्यात्रा का पुस्तक विमोचन हुआ
बाहर से पधारे श्रद्धालुजन, आगरा एवं फिरोजाबाद, जयपुर, टीकमगढ़, बरेली, मेरठ, सागर, दिल्ली, भिंड से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालुओं ने नृत्यमय भक्ति कीl मंच संचालन कवि पंडित विकर्ष शास्त्री जी ने किया l इस यह पावन समारोह विशाल जनसमुदाय के मध्य सानन्द और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। मुनि के सानिध्य में समत्व की अन्तर्यात्रा का पुस्तक विमोचन हुआ।
यह समाजजन मौजूद रहे
इस अवसर पर श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के मनोज जैन, रमेश जैन, प्रवीण जैन, (पद्मावती ज्वैलर्स), मुकेश जैन (लले), सचिन जैन,शैलेश जैन, विवेक जैन, चक्रेश जैन, राजीव जैन, अनिल जैन, आशीष जैन, अमित जैन बॉबी, आशीष जैन, हरेश जैन (बबलू), कैलाश जैन, दया चंद्र जैन, सतेंद्र जैन (सदर), राजू भाई (चचे), अमित जैन, पंकज जैन, अंशुल जैन, रोहित जैन, सनी जैन, दीपक जैन, विनित जैन, संभव जैन, सोनू जैन, दीपक जैन बोतल मीडिया प्रभारी राहुल जैन समस्त समस्त मंडल एवं सकल जैन मौजूद था।




