नई दिल्ली। जैन आगम की अनुपम कृति जैन ज्योतिष को विश्व पटल पर अंकित कराने के लिए संकल्पित अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद (पंजी.) के नवम राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ ऋषभ विहार में विराजित पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में हुआ। अपार जनसमूह के बीच भारत के विभिन्न प्रदेशों से पधारे ज्योतिषाचार्यों ने ज्योतिष के विषय में फैली भ्रांतियों का निराकरण किया तथा जैन ज्योतिष को अपनाकर मिथ्यात्व से दूर होने के विषय में अपने विचार प्रकट किए।

आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ने अपने मंगल आशीष प्रवचन में कहा कि जैन ज्योतिष अनादि काल से है और जैन ज्योतिष को अपनाकर हम अपने जीवन का कल्याण कर सकते हैं। इस अवसर पर कार्यकारणी श्री दिगंबर जैन मंदिर ऋषभ विहार ने सभी विद्वानों का तिलक, माला आदि से स्वागत सम्मान किया। पूज्य श्री के हस्त कमल से सभी विद्वानों को साहित्य प्राप्त हुआ। सभी ज्योतिषाचार्य अतिशय क्षेत्र कल्पतरू सर्वाेदय तीर्थ श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, धारूहेड़ा पहुंचे।

आने वाले समय को पहचान कर कठिनाई को दूर सकते हैं: आचार्य श्री समाधि सागर जी

कल्पतरू सर्वाेदय तीर्थ पर विराजित आचार्य श्री समाधि सागर जी महाराज के सानिध्य में अपरान्ह तीन बजे अधिवेशन आरंभ हुआ। पूज्य श्री ने सभी विद्वानों को अपना मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि ज्योतिष से हम आने वाले समय को पहचान कर अपने जीवन में आने वाली कठिनाई को कम कर सकते हैं। इस अवसर पर क्षेत्र के ट्रस्टी प्रद्युम्न जैन ने क्षेत्र पर समय-समय पर हुए अतिशय की जानकारी दी। सभी विद्वानों का स्वागत सम्मान मोमेंटो के साथ किया। क्षेत्र पर सभी ने श्रीजी की सामूहिक आरती का भी लाभ लिया।

अमर कृति ‘जीवन है पानी की बूंद’ प्रदान कर दिया आशीष

प्रसिद्ध अतिशय क्षेत्र देहरा तिजारा में विराजित आचार्य श्री विमर्श सागर जी ससंघ के सानिध्य में प्रातः 8 बजे अधिवेशन प्रारंभ हुआ, ज्योतिष के विद्वानों ने विभिन्न क्षेत्रों, जैसे वास्तु शास्त्र, कुंडली मिलान, हस्तरेखा एवं जैन मंत्रों के उपयोग आदि विषयों पर अपने विचार प्रकट किए, आचार्य श्री ने भी जैन ज्योतिष पर अपने विद्वतापूर्ण विचार प्रकट किए तथा उपस्थित जनसमूह को मिथ्यात्व से हटकर जैन आगम में बताए उपायों को अपनाने पर बल दिया तथा पूज्य श्री की अमर कृति ‘जीवन है पानी की बूंद’ के साथ जैन ज्योतिष एवं समस्त परिषद को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। लौटते समय मुनि श्री बाहुबली सागर जी की प्रेरणा से निर्मित सिद्धांत क्षेत्र शिकोहपुर के दर्शनों का लाभ भी प्राप्त हुआ,

नेपाल, आबूधाबी, दुबई, बैंकॉक, थाईलैंड तक पहुंचा ज्योतिष

सभी स्थानों पर परिषद ने आयोजन कार्यकारिणी को अभिनंदन पत्र भी भेंट किया तथा सभी कार्यकारिणी ने विद्वानों का तिलक, माला, मोमेंटो,अंग वस्त्र पहनने के साथ-साथ आचार्यों के साहित्य को भी भेंट किया। अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद (पंजी) के संस्थापक, अध्यक्ष विश्व प्रसिद्ध, जैन ज्योतिषचार्य रवि जैन गुरुजी दिल्ली ने बताया कि जैन ज्योतिष को विश्व पटल पर अंकित कराने के लिए भारत के विभिन्न प्रांतों के साथ-साथ विदेशी भूमि नेपाल, आबूधाबी, दुबई, बैंकॉक, थाईलैंड आदि जैसे देशों में जैन ज्योतिष का प्रचार-प्रसार किया जा चुका है तथा भविष्य में भी जैन ज्योतिष के प्रचार-प्रसार के लिए अन्य देशों में जाने की भी योजना है।

इन विद्वानों की उपस्थिति रही

इस अवसर पर डॉ. टीकमचंद जैन दिल्ली, हुकुमचंद जैन ग्वालियर, विमलकुमार जैन जैन जबलपुर, सुशीलकुमार जैन बुराड़ी, डीके जैन, दिल्ली, डॉ. सुमेरचद जैन, दिल्ली, कविता जैन गुरुग्राम,पंडित महावीर प्रसाद जैन दिल्ली, पंडित सुयश जैन इंदिरापुरम, पंडित प्रदीप जैन दिल्ली, कमल जैन साहिबाबाद, मंजुला जैन उज्जैन, नवीन जैन मूणत नागपुर, राजीव जैन बिहारी कॉलोनी दिल्ली, पंडित संजय जैन भजनपुरा, पंडित नितिन जैन इंदौर, पंडित दीपक जैन दिल्ली, विकास जैन ग्वालियर, रविंद्र जीतू भैया पृथ्वीपुर, एडवोकेट शिल्पा जैन जयपुर, मुकेश जैन मोदीनगर, जयकुमार जैन जयपुर, डॉ. नेहा जैन जयपुर, सुधा शाह वापी(गुजरात), जयदीप जैन भोपाल, विनोद जैन दिल्ली, संजय जैन पावला दिल्ली, सुनील जैन भंडारी ग्वालियर, जिनेंद्र सिंघई छतरपुर, मीनल जैन जयपुर, नीरज जैन दिल्ली,पंडित ंविमल जैन दिल्ली, प्रदीप जैन भोपाल, उर्मिल जैन कनाडा उपस्थिति रही।