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	<title>गिरनार जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>18 अप्रैल को है विश्व धरोहर दिवस : विश्व धरोहर सूची में जैन धरोहरों को भी स्थान मिले </title>
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		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 05:51:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व धरोहर दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस कहा जाता है, प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट एंड साइट की ओर से 1982 में की गई और बाद में यूनेस्को ने इसे वैश्विक मान्यता दी। विश्व धरोहर दिवस पर डॉ यतीश जैन, जबलपुर का पढ़िए, विशेष [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विश्व धरोहर दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस कहा जाता है, प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट एंड साइट की ओर से 1982 में की गई और बाद में यूनेस्को ने इसे वैश्विक मान्यता दी। <span style="color: #ff0000">विश्व धरोहर दिवस पर डॉ यतीश जैन, जबलपुर का पढ़िए, विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जबलपुर।</strong> विश्व धरोहर दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस कहा जाता है, प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट एंड साइट की ओर से 1982 में की गई और बाद में यूनेस्को ने इसे वैश्विक मान्यता दी। इस दिवस का उद्देश्य मानव सभ्यता की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। आज विश्व में लगभग 1200 के आसपास धरोहर स्थल सूचीबद्ध हैं, जबकि भारत में वर्तमान में 42 विश्व धरोहर स्थल हैं, जो हमारे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।भारत की धरोहरों में जैन परंपरा का विशेष स्थान है। जैन धर्म अत्यंत प्राचीन है और इसके सिद्धांत- अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मसंयम, न केवल धार्मिक जीवन को बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को भी दिशा देते हैं। जैन धरोहर स्थल केवल पूजा के स्थान नहीं हैं, बल्कि वे तप, त्याग, ज्ञान और कला के केंद्र हैं। इन स्थलों की विशेषता यह है कि यहाँ आध्यात्मिकता और स्थापत्य कला का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। संपूर्ण देश में प्रत्येक राज्य में अति प्राचीन जैन तीर्थ स्थल एवं जैन धरोहर है जिन्हें विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित किया जा सकता है। इसके लिए सार्थक प्रयास किया जाना आवश्यक है। उदाहरण स्वरूप कुछ ही स्थलों के बारे में जानकारी दे रहा हूं जिन्हें आसानी से यूनेस्को के मापदंड में लिया जा सकता है।</p>
<p><strong>श्रवणबेलगोला जैन धरोहरों में अत्यंत महत्वपूर्ण</strong></p>
<p>कर्नाटक में स्थित श्रवणबेलगोला जैन धरोहरों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ भगवान बाहुबली की 57 फीट ऊँची एकाश्म प्रतिमा स्थित है, जिसका निर्माण 981 ईस्वी में हुआ था। यह प्रतिमा पूरी तरह एक ही पत्थर से बनी है और यह त्याग, वैराग्य और आत्मविजय का प्रतीक है। हर 12 वर्ष में यहाँ महामस्तकाभिषेक का भव्य आयोजन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। राजस्थान के दिलवाड़ा जैन मंदिर जैन स्थापत्य कला के सर्वोत्तम उदाहरणों में से एक हैं। 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच निर्मित इन मंदिरों की संगमरमर की नक्काशी इतनी सूक्ष्म और सुंदर है कि पत्थर भी जीवंत प्रतीत होता है।</p>
<p><strong>विश्व का सबसे बड़ा जैन मंदिर समूह पालिताना</strong></p>
<p>गुजरात का शत्रुंजय पहाड़ी (पालिताना) जैन धर्म का अत्यंत पवित्र स्थल है। यहाँ लगभग 863 से अधिक मंदिर एक ही पर्वत पर स्थित हैं। यह विश्व का सबसे बड़ा जैन मंदिर समूह माना जाता है। इन मंदिरों का निर्माण विभिन्न कालों में हुआ, विशेष रूप से 11वीं से 19वीं शताब्दी के बीच। यहाँ तक पहुँचने के लिए लगभग 3800 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, जो एक प्रकार की साधना का अनुभव कराती हैं। यह स्थल यह दर्शाता है कि जैन धर्म में तप और श्रम का कितना महत्व है।</p>
<p><strong>मथुरा का कंकाली टीला का विशेष महत्व</strong></p>
<p>इसी प्रकार रणकपुर जैन मंदिर में 1444 स्तंभ हैं, और प्रत्येक स्तंभ की बनावट अलग-अलग है। यह स्थापत्य विज्ञान और कला का अद्भुत संगम है। गुजरात का गिरनार पर्वत जैन तीर्थ अत्यंत प्राचीन और पवित्र स्थल है, जहाँ 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का संबंध माना जाता है। यहाँ लगभग 9999 सीढ़ियाँ हैं, जो साधना और आत्मअनुशासन का प्रतीक हैं। देशभर में जैन धर्म की प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों की बात करें, तो मथुरा का कंकाली टीला का विशेष महत्व है। यहाँ से प्राप्त अवशेष पहली शताब्दी ईसा पूर्व से गुप्तकाल तक के हैं। यहाँ से जैन स्तूप, आयागपट्ट, मूर्तियाँ और अभिलेख प्राप्त हुए हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि मथुरा प्राचीन काल में जैन धर्म का प्रमुख केंद्र था। कंकाली टीला जैन कला और मूर्तिकला के प्रारंभिक विकास का साक्षी है।</p>
<p><strong>गोपाचल पर्वत जैन प्रतिमाएँ जैन शिल्पकला अद्वितीय</strong></p>
<p>उड़ीसा में स्थित उदयगिरि खंडगिरि गुफाएँ जैन मुनियों की तपस्थली रही हैं। ये गुफाएँ दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में राजा खारवेल के समय निर्मित हुई थीं। इन गुफाओं में साधना और ध्यान के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। हाथीगुम्फा अभिलेख यहाँ का प्रमुख आकर्षण है, जो उस समय के इतिहास को स्पष्ट करता है। यह स्थल दर्शाता है कि जैन धर्म का विस्तार पूर्वी भारत तक व्यापक रूप से था। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्थित गोपाचल पर्वत जैन प्रतिमाएँ जैन शिल्पकला का अत्यंत भव्य उदाहरण हैं। यहाँ चट्टानों को काटकर 7वीं से 15वीं शताब्दी के बीच विशाल तीर्थंकर प्रतिमाएँ बनाई गई हैं। कुछ प्रतिमाएँ 50 फीट से भी अधिक ऊँची हैं। ये प्रतिमाएँ न केवल कला का अद्भुत उदाहरण हैं, बल्कि वे जैन धर्म के प्रभाव और विस्तार को भी दर्शाती हैं।</p>
<p><strong>विश्व धरोहर मानकों के अनुरूप</strong></p>
<p>मध्यप्रदेश का सोनागिरि जैन तीर्थ भी जैन सिद्ध क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध है, जहाँ लगभग 100 से अधिक मंदिर स्थित हैं। यह स्थान मोक्षभूमि के रूप में जाना जाता है।</p>
<p>इन सभी जैन धरोहरों का यदि समग्र रूप से अध्ययन किया जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि वे यूनेस्को के विश्व धरोहर मानकों के अनुरूप हैं। इनमें ऐतिहासिकता, स्थापत्य उत्कृष्टता, सांस्कृतिक निरंतरता और आध्यात्मिक महत्व जैसे सभी गुण मौजूद हैं। ये धरोहरें हजारों वर्षों से जीवित परंपरा का हिस्सा हैं, जहाँ आज भी लाखों लोग आस्था और श्रद्धा के साथ आते हैं।</p>
<p><strong>धरोहरों को उचित संरक्षण मिले</strong></p>
<p>भारतीय संदर्भ में जैन धरोहरों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि ये केवल धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि वे मानवता के लिए नैतिक और आध्यात्मिक संदेश भी देती हैं। अहिंसा और संयम जैसे सिद्धांत आज के वैश्विक समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। यदि इन धरोहरों को उचित संरक्षण और वैश्विक पहचान मिले, तो यह न केवल जैन धर्म बल्कि सम्पूर्ण मानव सभ्यता के लिए लाभकारी होगा। विश्व धरोहर दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझें, उसका सम्मान करें और उसे सुरक्षित रखने का संकल्प लें। जैन धरोहरों के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है कि सच्ची प्रगति केवल भौतिक विकास में नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक उन्नति में भी निहित है। यदि हम इन धरोहरों को सहेजकर रखेंगे, तो हम अपने अतीत का सम्मान करते हुए भविष्य को सशक्त बना सकेंगे। यही इस दिवस का वास्तविक संदेश है।</p>
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		<title>भगवान नेमीनाथ के भक्त गिरनार जी की यात्रा पर रवाना:  यात्रियों के पुण्य की अनुमोदना का आह्वान </title>
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		<pubDate>Mon, 30 Jun 2025 08:20:01 +0000</pubDate>
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<p><strong>इंदौर से विश्व जैन संगठन और सकल जैन समाज के तीर्थ रक्षक, धर्मवीर, दानवीर परिवार के सहयोग से 500 यात्री बसों से इंदौर से जूनागढ़ गिरनार जी की यात्रा पर संकल्प के साथ जा रहे हैं। सभी वहां 2 जुलाई को श्री नेमीनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव पर निर्वाण लाडू चढ़ाएंगे।<span style="color: #ff0000"> इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> इंदौर से विश्व जैन संगठन और सकल जैन समाज के तीर्थ रक्षक, धर्मवीर, दानवीर परिवार के सहयोग से लगभग 500 यात्री निःशुल्क बस द्वारा इंदौर से गिरनार जी संकल्प के साथ जा रहे हैं। वहां 2 जुलाई बुधवार को श्री नेमीनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव पर निर्वाण लाडू चढ़ाएंगे। विश्व जैन संगठन के अध्यक्ष मयंक जैन एवं राजेश जैन दद्दू ने समाज श्रेष्ठी एवं समाज जन से आह्वान किया कि धर्मवीरों के पुण्य की अनुमोदना करें।</p>
<p>जिन्होंने अपनी साधन संपन्नता से 9 बसों का बंदोबस्त तीर्थ भक्तों के लिए किया। हम सब उनका स्वागत करते हैं, वंदन करते हैं। साथ ही, जो संकल्प के साथ यात्रा पर जा रहे हैं। धर्म वीरों को शुभकामनाएं प्रेषित कर मंगलमय यात्रा की अनुमोदना कर मंगल भावना भाएं कि सभी यात्रियों को निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य मिले। इसी कामना के साथ सभी समाजजन, वरिष्ठ पदाधिकारी, समाज सेवी, संस्था, ट्रस्टी जन सभी महावीर बाग आकर बसों से जा रहे सभी यात्रियों और बसों के पुण्यर्जकों का वंदन अभिनंदन एवं सतिशय पुण्य की अनुमोदना करे। सोमवार को शाम 6 महावीर बाग एरोड्रम रोड से बसें रवाना होंगी।</p>
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		<title>प्रशासन ने आश्वस्त किया विश्व जैन संगठन को : सुरक्षित दर्शन कराने के लिए प्रतिबद्धता जताई </title>
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		<pubDate>Thu, 26 Jun 2025 08:33:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जूनागढ़ पुलिस सभी जैन यात्रियों को गिरनार जी पर सुरक्षित दर्शन कराने के लिए प्रतिबद्ध है। जूनागढ़ पुलिस उप महानिरीक्षक और विश्व जैन संगठन को भवनाथ थाना निरीक्षक ने लिखित आश्वासन पत्र जारी किया है। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। जूनागढ़ पुलिस सभी जैन यात्रियों को गिरनार जी पर सुरक्षित दर्शन कराने के लिए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जूनागढ़ पुलिस सभी जैन यात्रियों को गिरनार जी पर सुरक्षित दर्शन कराने के लिए प्रतिबद्ध है। जूनागढ़ पुलिस उप महानिरीक्षक और विश्व जैन संगठन को भवनाथ थाना निरीक्षक ने लिखित आश्वासन पत्र जारी किया है।<span style="color: #ff0000"> इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जूनागढ़ पुलिस सभी जैन यात्रियों को गिरनार जी पर सुरक्षित दर्शन कराने के लिए प्रतिबद्ध है। जूनागढ़ पुलिस उप महानिरीक्षक और विश्व जैन संगठन को भवनाथ थाना निरीक्षक ने लिखित आश्वासन पत्र जारी किया है। विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि गुजरात पुलिस के जूनागढ़ रेंज के उप पुलिस महानिरीक्षक ने विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन की ओर से दिल्ली से गिरनार तक संयोजित धर्म पद यात्रा, यात्रा में शामिल सभी जैन यात्रियों को 2 जुलाई को सुरक्षा देने और गिरनार पर्वत पर नेमीनाथ भगवान की मोक्ष स्थली पर सभी जैन यात्रियों को सुरक्षित दर्शन-पूजन करने के गुजरात हाईकोर्ट के 17 फरवरी 2005 के आदेश का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध बताया।</p>
<p>भवनाथ, जूनागढ़ पुलिस स्टेशन निरीक्षक ने जावक संख्या 460/2025/ 14 जनवरी 2025 को लिखित में पुलिस अधीक्षक जूनागढ़ और विश्व जैन संगठन को लिखित आश्वासन पत्र प्रेषित किया। विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन के प्रशासन एवं सरकार द्वारा सीसीटीवी कैमरों की मांग पर भवनाथ थाने की ओर से जूनागढ़ कलेक्टर को सूची प्रेषित की है। दद्दू ने कहा कि संगठन द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय को 1 जनवरी 2025 को धर्म पद यात्रा की सुरक्षा, गिरनार पर जैन यात्रियों के सुरक्षित दर्शन और विशेष रूप से 2 जुलाई 2025 को नेमीनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक पर सभी सधर्मी यात्रियों को सुरक्षित दर्शन करने में सहयोग के लिए प्रेषित निवेदन पत्र क्रमांक PMOPG/D/2025/0002507 पर कार्रवाई करते हुए गुजरात पुलिस को प्रेषित किया गया था।</p>
<p>समाज जन एवं विश्व जैन संगठन द्वारा पुलिस प्रशासन के निर्देशों का पालन किया जाएगा। कृपया भड़काऊ भाषणबाजी से बचें और जैन सिद्धांतो अनुसार गिरनार यात्रा करें। गिरनार पर्वतराज पर वंदना के दौरान किसी भी प्रकार की गैर कानूनी गतिविधि के लिए यात्री स्वयंम जिम्मेवार होगा। गुजरात पुलिस द्वारा प्रेषित संलग्न पत्र का सभी समाज जन पालन करें।</p>
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		<title>जैन पदयात्रा को लेकर राष्ट्रपति को पत्र : गिरनार की पांचवीं टोंक पर सुरक्षा की मांग </title>
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		<pubDate>Wed, 25 Jun 2025 11:48:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गुजरात के गिरनार पर्वत स्थित जैन तीर्थ स्थल पर होने वाली धार्मिक पदयात्रा को लेकर विश्व जैन संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र भेजा है। पत्र में 2 जुलाई 2025 को भगवान नेमिनाथ के निर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जैन पदयात्रा के दौरान सुरक्षा और न्यायालय के निर्देशों के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गुजरात के गिरनार पर्वत स्थित जैन तीर्थ स्थल पर होने वाली धार्मिक पदयात्रा को लेकर विश्व जैन संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र भेजा है। पत्र में 2 जुलाई 2025 को भगवान नेमिनाथ के निर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जैन पदयात्रा के दौरान सुरक्षा और न्यायालय के निर्देशों के पालन की मांग की गई है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नई दिल्ली/जूनागढ़।</strong> गुजरात के गिरनार पर्वत स्थित जैन तीर्थ स्थल पर होने वाली धार्मिक पदयात्रा को लेकर विश्व जैन संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र भेजा है। पत्र में 2 जुलाई 2025 को भगवान नेमिनाथ के निर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जैन पदयात्रा के दौरान सुरक्षा और न्यायालय के निर्देशों के पालन की मांग की गई है।</p>
<p>पत्र में बताया गया है कि गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश (स्पेशल सिविल एप्लीकेशन संख्या 6426/2004) दिनांक 17 फरवरी 2005 के अनुसार, गिरनार पहाड़ की पांचवीं टोंक तक जैन यात्रियों को धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना करने की अनुमति है। इस आदेश के पालन हेतु जूनागढ़ के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को भी सूचित किया गया था।</p>
<p>विश्व जैन संगठन ने निवेदन किया है कि 2 जुलाई को महिलाएं, बच्चे समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूसरी, तीसरी, चौथी और विशेष रूप से पांचवीं टोंक तक पहुंचेंगे। संगठन ने आशंका जताई है कि पूर्व में इस क्षेत्र में यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार और हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं, जिनकी पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रशासनिक हस्तक्षेप आवश्यक है।</p>
<a href="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/courtorder-2005.pdf" class="pdfemb-viewer" style="" data-width="max" data-height="max" data-toolbar="bottom" data-toolbar-fixed="on">courtorder 2005</a>
<p>पत्र में एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि 24 मई 2025 को महाराष्ट्र के वासिम निवासी जैन श्रद्धालु आशीष प्रभाकर डहाले पर पांचवीं टोंक पर लाठी से हमला किया गया। यह घटना न्यायालय के स्पष्ट आदेशों और अल्पसंख्यक अधिकारों का उल्लंघन मानी जा रही है।</p>
<p>संगठन ने मांग की है कि पूरे यात्रा मार्ग, विशेषकर पांचवीं टोंक के भीतर और बाहर समुचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की बाधा या हिंसा से तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, संबंधित अधिकारियों से इस संबंध में ठोस कार्रवाई की जानकारी भी प्रदान करने का आग्रह किया गया है।</p>
<p>गौरतलब है कि गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक दिगंबर जैन समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है, जहां भगवान नेमिनाथ के प्राचीन चरणचिह्न और मूर्ति स्थित हैं।</p>
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		<title>गिरनार जी में नेमिनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव 1-2 जुलाई को: आचार्य निर्मल सागरजी का होगा 58 वां दीक्षा महोत्सव </title>
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		<pubDate>Tue, 10 Jun 2025 07:13:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व शांति निर्मल ध्यान केंद्र ट्रस्ट के तत्वावधान में जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जी का मोक्ष कल्याणक 2 जुलाई को मनाया जाएगा। समवशरण मंदिर, विश्व शांति निर्मल ध्यान केंद्र गिरनार जी यह महोत्सव होगा। 1 जुलाई को प्रातः 7.30 बजे ध्वजारोहण के साथ महोत्सव प्रारंभ होगा। समाधिस्थ श्री निर्मल सागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विश्व शांति निर्मल ध्यान केंद्र ट्रस्ट के तत्वावधान में जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जी का मोक्ष कल्याणक 2 जुलाई को मनाया जाएगा। समवशरण मंदिर, विश्व शांति निर्मल ध्यान केंद्र गिरनार जी यह महोत्सव होगा। 1 जुलाई को प्रातः 7.30 बजे ध्वजारोहण के साथ महोत्सव प्रारंभ होगा। समाधिस्थ श्री निर्मल सागर जी का 58 वां दीक्षा महोत्सव के कार्यक्रम होंगे। इसमें पूजन,मंगल प्रवचन,आरती आदि कार्यक्रम किए जाएंगे। <span style="color: #ff0000">गिरनार से पढ़िए, उदयभान जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>गिरनार (जूनागढ़)।</strong> विश्व शांति निर्मल ध्यान केंद्र ट्रस्ट के तत्वावधान में जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जी का मोक्ष कल्याणक 2 जुलाई को मनाया जाएगा। मुनि श्री धरसेन सागर जी महाराज, मुनि श्री अजितसेन महाराज और र्निमल ध्यान ज्ञान केंद्र गिरनार के पीठाधीश क्षुल्लक श्री श्रीसमर्पण सागर जी के निर्देशन ब्रह्मचारी शांताबेन, ब्रह्मचारी सुमति भैया के सानिध्य में समवशरण मंदिर, विश्व शांति निर्मल ध्यान केंद्र गिरनार जी यह महोत्सव होगा। यहां नेमिनाथ निर्वाण महोत्सव समिति का संयोजन रहेगा। पीठाधीश क्षुल्लक श्री समर्पण सागर के मार्गदर्शन में ट्रस्टी एवं महोत्सव समिति के अध्यक्ष पारस जैन बज, अभिनंदन, ब्रह्मचारी सुमति भैया ने बताया कि 1 जुलाई को प्रातः 7.30 बजे ध्वजारोहण के साथ महोत्सव प्रारंभ होगा। इसके बाद विशाल रथ यात्रा समवशरण मंदिर जी से निर्मल ध्यान केंद्र तलहटी तक जाएगी। जहां 22 फीट उत्त॔ग भगवान नेमिनाथ जी की मनमोहक प्रतिमा जी का महामस्तकाभिषेक होगा। दोपहर को 2.30 बजे गिरनार गौरव समाधिस्थ श्री निर्मल सागर जी का 58 वां दीक्षा महोत्सव के कार्यक्रम होंगे। इसमें पूजन,मंगल प्रवचन,आरती आदि कार्यक्रम किए जाएंगे। रात्रि 8.30 बजे आचार्य भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।</p>
<p><strong>अतिथियों का किया जाएगा सम्मान </strong></p>
<p>2जुलाई को प्रातः गिरनार यात्रा निकाली जाएगी। समवशरण मंदिर में दोपहर को धर्मसभा का आयोजन होगा। इसमें मोक्ष कल्याण पर विशेष प्रस्तुति, सम्मान समारोह, निर्वाण कांड पढ़कर सिद्ध लाडू, अरिहंत लाडू, आचार्य लाडू, उपाध्याय लाडू, सर्वसाधु लाडू, नेमी प्रभु लाडू समर्पित किए जाएंगे। महोत्सव समिति के संरक्षक एवं निर्मल ज्ञान ध्यान केन्द्र के अध्यक्ष सोभागमल कटारिया, अध्यक्ष पारस जैन बज, ऋषभ जैन, रतन पाटनी आदि पदाधिकारी अतिथियों का सम्मान करेंगे।</p>
<p><strong>दूर-दूर से पहुंच रहे समाजजन और विद्वान </strong></p>
<p>इस राष्ट्रीय महोत्सव में देश के विभिन्न प्रांतो से विद्वान, श्रेष्ठि और युवा पहुंच रहे हैं। इस अवसर पर विश्व जैन संगठन के नेतृत्व में दिल्ली से निकली विशाल धर्म पदयात्रा भी गिरनार पहुंच रही है। सभी मिलकर सौहार्दपूर्ण वातावरण में शांति के साथ भगवान नेमीनाथ जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाएंगे। निर्वाण महोत्सव के अवसर पर पहाड़ पर पहली टोंक पर मंदिर जी एवं तलहटी पर निर्मल ध्यान केन्द्र स्थित भगवान नेमीनाथ की उत्तंग प्रतिमा तथा तलहटी प्रांगण में स्थित बड़ी धर्मशाला मंदिर में मूलनायक भगवान नेमिनाथ जी के सामने निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा।</p>
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		<title>जैन मित्र मंडल ने की गिरनार धर्म पदयात्रा की अगवानी: धर्मध्वजा फहराते सामूहिक सहभागिता की </title>
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		<pubDate>Mon, 28 Apr 2025 10:56:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री गिरनार धर्म पद यात्रा के आगमन पर स्थानीय जैन मित्र मंडल ने ग्वालियर पहुंचकर भव्य अगवानी की। पद यात्रा दिल्ली से प्रारंभ होकर 101 दिन में 1500 किमी की दूरी तय करके 1 जुलाई को गिरनार जी पहुंचेगी। जैन विश्व संगठन के अध्यक्ष एवं गिरनार धर्म पदयात्रा के संयोजक संजय जैन से सौजन्य भेंटकर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री गिरनार धर्म पद यात्रा के आगमन पर स्थानीय जैन मित्र मंडल ने ग्वालियर पहुंचकर भव्य अगवानी की। पद यात्रा दिल्ली से प्रारंभ होकर 101 दिन में 1500 किमी की दूरी तय करके 1 जुलाई को गिरनार जी पहुंचेगी। जैन विश्व संगठन के अध्यक्ष एवं गिरनार धर्म पदयात्रा के संयोजक संजय जैन से सौजन्य भेंटकर कई धार्मिक एवं सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> श्री गिरनार धर्म पद यात्रा के आगमन पर स्थानीय जैन मित्र मंडल ने ग्वालियर पहुंचकर भव्य अगवानी की। जैन मित्र मंडल के गिरनार यात्रा अगवानी संयोजक अनिल जैन नायक गढ़ी एवं चंद्रप्रकाश जैन चंदू कुथियाना ने बताया कि पद यात्रा दिल्ली से प्रारंभ होकर 101 दिन में 1500 किमी की दूरी तय करके 1 जुलाई को गिरनार जी पहुंचेगी। गिरनार जी में जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक पर 2 जुलाई को सभी लोग सामूहिक रूप से गिरनार पर्वत पर भगवान नेमीनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक मनाते हुए निर्वाण लाड़ू अर्पित करेंगे। यह यात्रा के ग्वालियर आगमन पर जैन मित्र मंडल के नेतृत्व में जैन समाज ने पद यात्रा की भव्य अगवानी की। जैन मित्र मंडल के मुख्य संयोजक सतेंद्र जैन खनेता वाले ने बताया कि अतिशय क्षेत्र टिकटोली के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी, वरिष्ठ समाजसेवी ओमप्रकाश जैन गोपालपुरा, एडवोकेट धर्मेंद्र जैन, अशोक जैन मेडिकल, नरेश जैन टिल्लू, प्रवीण जैन चौटा एवं अन्य सदस्यों ने गिरनार रेस्ट हाउस ग्वालियर में जैन विश्व संगठन के अध्यक्ष एवं गिरनार धर्म पदयात्रा के संयोजक संजय जैन से सौजन्य भेंटकर कई धार्मिक एवं सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की। सभी सदस्यों ने संजय जैन का भावभीना स्वागत सम्मान किया।</p>
<p><strong>भगवान नेमीनाथ स्वामी के जयघोष के साथ पदयात्रा की अगवानी की।</strong></p>
<p>श्री गिरनार धर्म पदयात्रा में तीन सुसज्जित रथ साथ में चल रहे थे। एक रथ में भगवान नेमीनाथ जी की भव्य प्रतिमा विराजमान थी। पद यात्रा में 108 मीटर की पचरंगी ध्वजा आकर्षण का केंद्र थी। जैन मित्र मंडल के सभी सदस्यगण अपनी झकाझक सफेद परिधान, सुसज्जित बैज एवं सिर पर पीली टोपी के साथ सभी का आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। लगभग पचास से अधिक सदस्यों ने भगवान नेमीनाथ स्वामी का जयघोष करते हुए पदयात्रा की भव्य अगवानी की। सभी सदस्यगण सामूहिक रूप में अपने बैनर के साथ पदयात्रा में चलायमान थे। सभी सदस्यों ने जैन धर्म की आन-बान और शान का प्रतीक पंचरंगीन ध्वज को नमन किया और अत्यंत ही श्रद्धा भाव के साथ उस ध्वज को अपने हाथों से पकड़कर पद यात्रा में सहभागिता प्रदान की। इस पदयात्रा में वीरेंद्र जैन बरहाना, अभिषेक जैन टीटू, विमल जैन टोस वाले, अमर जैन, राजकुमार पलपुरा, एडवोकेट दिनेश जैन वरैया, राजकुमार जैन कुथियाना, अनुराग जैन झांसी, मनेंद्र जैन रानू, पवन जैन श्यामपुर, सोनू ज्ञान तीर्थ, सुनील जैन बीमा, आशीष जैन गंज, नितिन जैन बघपुरा, राजकुमार पलपुरा, जयचंद नंदपुरा, पंकज नायक आगरा, राकेश जैन प्रमुख रूप से उपस्थित थे।</p>
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		<title>मेरठ के जगदीश मंडपम में महामंडल विधान में आचार्य श्री  ज्ञेयसागर जी दिया आशीर्वादः दिल्ली से गिरनार तक होगी 101 दिवसीय धर्म पदयात्रा </title>
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		<pubDate>Sat, 28 Dec 2024 08:25:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[23 मार्च 2025 से आरंभ होने वाली धार्मिक पदयात्रा के लिए आचार्य श्री 108 ज्ञेयसागर जी मुनिराज से मंगल आशीर्वाद लिया गया। इस धार्मिक पदयात्रा का समापन गिरनार जी में 2 जुलाई को होगा। यात्रा में सम्मिलित होने के आह्वान किया गया है। पढ़िए मेरठ से आकाश जैन की खबर&#8230; मेरठ। 23 मार्च 2025 से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>23 मार्च 2025 से आरंभ होने वाली धार्मिक पदयात्रा के लिए आचार्य श्री 108 ज्ञेयसागर जी मुनिराज से मंगल आशीर्वाद लिया गया। इस धार्मिक पदयात्रा का समापन गिरनार जी में 2 जुलाई को होगा। यात्रा में सम्मिलित होने के आह्वान किया गया है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मेरठ से आकाश जैन की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मेरठ।</strong> 23 मार्च 2025 से आरंभ होने वाली धार्मिक पदयात्रा के लिए 27 दिसंबर को मेरठ के जगदीश मंडपम में श्री समवशरण महामंडल विधान में ससंघ विराजमान आचार्य श्री 108 ज्ञेयसागर जी से मंगल आशीर्वाद लिया। आगामी 23 मार्च 2025 को दिल्ली से आरंभ होकर पदयात्रा 22 वें जैन तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान के मोक्षस्थल गिरनार जी में 2 जुलाई को निर्वाण दिवस पर पहुंचेगी। विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन ने जगदीश मंडपम में धर्म सभा को संबोधित करते हुए साधु सेवा समिति की ओर से विधान की सफलता के लिए साधुवाद दिया। सभी को दिल्ली से 1500 किमी लंबी गिरनार जी की धर्म पदयात्रा के माध्यम से विभिन्न राज्यों के जैन समाज को जोड़ने और नेमिनाथ भगवान की मोक्ष स्थली के दर्शन करने के साथ अहिंसा, भाईचारे का संदेश देने के उद्देश्य की जानकारी दी और सभी को परिवार, मित्रों सहित पदयात्रा में सम्मिलित होकर तीर्थ वंदना का पुण्यार्जन करने का आह्वान किया। संजय जैन ने शिखर जी की स्वतंत्र पहचान और पवित्रता के लिए संगठन द्वारा किए गए आंदोलन में मेरठ जैन समाज और विशेष रूप से ऋतुराज जी और सभी संस्थाओं का आभार माना।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-71658" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241228-WA0046.jpg" alt="" width="812" height="465" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241228-WA0046.jpg 812w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241228-WA0046-300x172.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241228-WA0046-768x440.jpg 768w" sizes="(max-width: 812px) 100vw, 812px" />रुचि जैन ने महिलाओं को किया प्रेरित</strong></p>
<p>संगठन की महिला प्रकोष्ठ संयोजिका रुचि जैन ने विधान में उपस्थित महिलाओं को परिवार सहित धर्म पदयात्रा में सहभागिता करने और 2 जुलाई को नेमिनाथ भगवान के मोक्षकल्याणक के अवसर पर उनकी मोक्षस्थली गिरनार जी की वंदना करने के लिए प्रेरित किया।</p>
<p><strong>आचार्यश्री ने आशीर्वाद दिया</strong></p>
<p>संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और शिखर जी आंदोलन के संयोजक यश जैन, युवा प्रकोष्ठ के महामंत्री सागर जैन ने बताया कि आचार्य श्री ने पदयात्रा के निर्विघ्न पूरा होने का आशीर्वाद दिया।</p>
<p><strong>आचार्यश्री ने पुण्यार्जन का आशीष भी दिया</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने मेरठ सहित समस्त जैन समाज को भगवान नेमिनाथ मोक्ष कल्याणक के पावन दिवस 2 जुलाई 2025 को मोक्षस्थल गिरनार जी की यात्रा, दर्शन और निर्वाण लाडू समर्पण के लिए अधिकाधिक संख्या में तीर्थ वंदना करने और उनके क्षेत्र से होकर जाने वाली धर्म पदयात्रा में शामिल होकर पुण्यार्जन का आशीर्वाद दिया।</p>
<p><strong> ब्र. निशांत भैया ने की अनुमोदना</strong></p>
<p>विधान में नवागढ़ से आए ब्रह्मचारी निशांत भैया जी ने सभी को यात्रा में सहभागिता करने और गिरनार यात्रा के लिए अनुमोदना की और संगठन के कार्यों की प्रशंसा की। सरधना से संगठन के युवा प्रकोष्ठ से संयम जैन, अरिहंत जैन, निमित जैन और संगठन सदस्यों ने सहभागिता की।</p>
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		<title>आचार्य पुलक सागर जी संसंघ ने आशीर्वाद दे कर रवाना किया : ऋषभदेव से गिरनार तीर्थ यात्रा में 1008 मुनि भक्त 22 बसों से रवाना </title>
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		<pubDate>Thu, 24 Oct 2024 07:54:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ सकल दिगंबर जैन समाज के 1008 से अधिक भक्त बुधवार को गिरनार तीर्थ की यात्रा के लिए दोपहर तीन बजे गुरुकुल मैदान पर एकत्रित हुए। राष्ट्र संत आचार्य पुलक सागर जी संसंघ के आशीर्वाद के बाद, गुरुकुल ट्रस्ट के महामंत्री सुंदरलाल भाणावत एवं समाज के वरिष्ठजनों ने सभी भक्तों को हरि झंडी दिखाकर रवाना किया। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> सकल दिगंबर जैन समाज के 1008 से अधिक भक्त बुधवार को गिरनार तीर्थ की यात्रा के लिए दोपहर तीन बजे गुरुकुल मैदान पर एकत्रित हुए। राष्ट्र संत आचार्य पुलक सागर जी संसंघ के आशीर्वाद के बाद, गुरुकुल ट्रस्ट के महामंत्री सुंदरलाल भाणावत एवं समाज के वरिष्ठजनों ने सभी भक्तों को हरि झंडी दिखाकर रवाना किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए धरणेन्द्र जैन की खास रिपोर्ट&#8230; </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>खैरवाड़ा।</strong> सकल दिगंबर जैन समाज के 1008 से अधिक भक्त बुधवार को गिरनार तीर्थ की यात्रा के लिए दोपहर तीन बजे गुरुकुल मैदान पर एकत्रित हुए। राष्ट्र संत आचार्य पुलक सागर जी संसंघ के आशीर्वाद के बाद, गुरुकुल ट्रस्ट के महामंत्री सुंदरलाल भाणावत एवं समाज के वरिष्ठजनों ने सभी भक्तों को हरि झंडी दिखाकर रवाना किया।संघपति प्रदीप मामा और परिवार ने बग्गी में बैठकर विशाल शोभायात्रा निकाली। यात्रा संयोजक मधु सुमेश वाणावत ने सभी सदस्यों को श्री सिद्धक्षेत्र गिरनार यात्रा के तीन दिवसीय कार्यक्रम के बारे में बताया।</p>
<p>समस्त यात्री गण दोपहर 12:30 बजे गुरुकुल ग्राउंड पहुंचे, जहां संगपती प्रदीप मामा एवं प्रतिभा मामी के साथ जिनेंद्र दर्शन हेतु बड़े मंदिर ले जाया गया। इस आयोजन में उन्हें भव्य सम्मान प्रदान किया गया, और जगह-जगह शाल, माला, और पगड़ी से स्वागत किया गया। जिनेंद्र दर्शन के बाद, दोपहर 2 बजे सभी ने आचार्य पुलक सागर जी गुरुदेव का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। तत्पश्चात, ठीक 3 बजे गुरुकुल ग्राउंड से निर्धारित वाहनों के माध्यम से गिरनार के लिए प्रस्थान किया।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-68840" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241024-WA0004.jpg" alt="" width="739" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241024-WA0004.jpg 739w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241024-WA0004-139x300.jpg 139w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241024-WA0004-473x1024.jpg 473w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241024-WA0004-709x1536.jpg 709w" sizes="(max-width: 739px) 100vw, 739px" /> गिरनार पर्वत के बारे में</strong></p>
<p>गिरनार, जिसे गिरिनगर या रेवतक पर्वत के नाम से भी जाना जाता है, भारत के गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित है। यह हिमालय से भी पुराना माना जाता है और इसे 3672 फीट की ऊंचाई पर पवित्र माना जाता है। गिरनार पर्वत जैनियों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, जो तीसरी शताब्दी से मंदिरों और धार्मिक स्थलों से घिरा हुआ है। यहां तक पहुँचने के लिए 9999 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, और यहाँ तीर्थंकर नेमिनाथ का मंदिर है, जिसे जैन श्रद्धालु &#8220;नेमिनाथ पर्वत&#8221; कहते हैं।</p>
<p><strong>रोपवे के बारे में</strong></p>
<p>गिरनार में भारत का सबसे तकनीकी रूप से उन्नत रोपवे है, जिसकी लंबाई 2126.4 मीटर है। इसमें अत्याधुनिक केबिन हैं, जो तीर्थयात्रियों को गिरनार स्थित मां अंबाजी मंदिर तक ले जाएगा। यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से सहायक है जो शिखर तक पहुँचने के लिए 5000 सीढ़ियाँ चढ़ने में असमर्थ हैं। यह गुजरात का सबसे बड़ा रोपवे है, जो तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए बनाया गया है।</p>
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		<title>11000 श्रद्धालु भक्तों की तीर्थराज सम्मेद शिखर जी यात्रा हर्षोल्लास से संपन्न : भरत का भारत नाटक का भावपूर्ण महामंचन </title>
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		<pubDate>Wed, 23 Oct 2024 07:12:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिल्ली से पवन गोधा एवं विजय जैन चांदीवाला परिवार के सौजन्य से 11000 श्रद्धालुओं के साथ तीर्थराज सम्मेद शिखरजी की वंदना की यात्रा 15 अक्टूबर से 22 अक्टूबर तक ट्रेन और फ्लाइट द्वारा हर्षोल्लास के वातावरण में संपन्न हुई। वहीं 18 अक्टूबर को मधुबन श्री सम्मेद शिखर जी में &#8220;भरत का भारत&#8221; महानाट्य का भावपूर्ण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिल्ली से पवन गोधा एवं विजय जैन चांदीवाला परिवार के सौजन्य से 11000 श्रद्धालुओं के साथ तीर्थराज सम्मेद शिखरजी की वंदना की यात्रा 15 अक्टूबर से 22 अक्टूबर तक ट्रेन और फ्लाइट द्वारा हर्षोल्लास के वातावरण में संपन्न हुई। वहीं 18 अक्टूबर को मधुबन श्री सम्मेद शिखर जी में &#8220;भरत का भारत&#8221; महानाट्य का भावपूर्ण महामंचन रंगशाला की निदेशक, धर्मनिष्ठ, व्यवहार कुशल, प्रतिभावान जैन रत्न श्रीमती साधना जी मादावत इंदौर द्वारा किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए धरणेन्द्र जैन की खास रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>खैरवाड़ा।</strong> दिल्ली से पवन गोधा एवं विजय जैन चांदीवाला परिवार के सौजन्य से 11000 श्रद्धालुओं के साथ तीर्थराज सम्मेद शिखरजी की वंदना की यात्रा 15 अक्टूबर से 22 अक्टूबर तक ट्रेन और फ्लाइट द्वारा हर्षोल्लास के वातावरण में संपन्न हुई। वहीं 18 अक्टूबर को मधुबन श्री सम्मेद शिखर जी में &#8220;भरत का भारत&#8221; महानाट्य का भावपूर्ण महामंचन रंगशाला की निदेशक, धर्मनिष्ठ, व्यवहार कुशल, प्रतिभावान जैन रत्न श्रीमती साधना जी मादावत इंदौर द्वारा किया गया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-68823" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-23-at-12.38.41-PM.jpeg" alt="" width="631" height="1032" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-23-at-12.38.41-PM.jpeg 631w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-23-at-12.38.41-PM-183x300.jpeg 183w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-23-at-12.38.41-PM-626x1024.jpeg 626w" sizes="(max-width: 631px) 100vw, 631px" /> इस महानाट्य के माध्यम से बताया गया कि ऋषभ पुत्र भरत के नाम से ही इस देश का नाम भारत पड़ा है, जिसे 165 देशों में करोड़ों लोगों ने आदिनाथ टीवी चैनल के माध्यम से देखा और खूब सराहा। &#8220;भरत का भारत&#8221; महानाट्य की प्रस्तुति से भावविभोर होकर कई श्रद्धालु भक्तों ने 31 हजार रुपये नकद का पुरस्कार प्रदान किया, जिसे श्रीमती साधना जी मादावत ने बड़ी सौम्यता और विनयपूर्वक मंच पर ही पवन गोधा एवं ट्रस्टी गणों को वापस लौटा दिया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-68824" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-23-at-12.38.19-PM.jpeg" alt="" width="798" height="486" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-23-at-12.38.19-PM.jpeg 798w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-23-at-12.38.19-PM-300x183.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-23-at-12.38.19-PM-768x468.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 798px) 100vw, 798px" />इस पुरस्कार राशि को ट्रस्टी गणों ने गौशाला के लिए तत्काल प्रदान कर दिया। राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन पार्श्वमणि पत्रकार कोटा ने जानकारी देते हुए बताया कि साधना जैन मादावत देवी अहिल्या की नगरी इंदौर/मुम्बई में रंगशाला प्रोडक्शन हाउस एवं नृत्य नाटक अकादमी की निर्देशिका हैं। उनके द्वारा आज की युवा पीढ़ी और बाल पीढ़ी को जैन धर्म से जोड़ने के लिए पूरे देश में जैन धर्म के कथानकों, चरित्रों और चारित्रों पर आधारित नाटकों और महानाट्यों की प्रस्तुति दी जाती है। इनके प्रॉडक्शन हाउस के माध्यम से कई फिल्मों का भी निर्माण किया गया है, जिनमें प्रमुख हैं:</p>
<p>&#8211; प. पू. गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमति माताजी की जीवन गाथा पर आधारित फिल्म &#8220;दिव्य शक्ति&#8221;<br />
&#8211; सल्लेखना/संथारा पर आधारित फिल्म &#8220;वीर गोम्मटेशा&#8221;<br />
&#8211; किसानों की आत्महत्या विषय पर आधारित फिल्म &#8220;काकोली के राम&#8221;, जो एक सकारात्मक फिल्म है और बताती है कि किस तरह एक रामलीला में राम की भूमिका निभाने वाला ग्रामीण किसान राम के जीवन से प्रेरित होकर अपनी समस्याओं का हल ढूंढता है।</p>
<p>फिल्म &#8220;काकोली के राम&#8221; ने कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किए हैं। इसके अलावा, कई जैन तीर्थों पर डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का भी निर्माण किया गया है, जिसमें विश्व प्रसिद्ध कांच मंदिर पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर डॉक्यूमेंट्री का निर्माण शामिल है। जज की प्रशासकीय सर्विस का त्याग कर, इनका मूल उद्देश्य जैन कथानकों के मंचन के माध्यम से पूरे देश में जैन धर्म और सनातन धर्म की प्रभावना करना है। उनकी टीम में जैन युवाओं एवं युवतियों की उभरती प्रतिभाओं को मौका दिया जाता है।</p>
<p>आज के माता-पिता बच्चों को उच्च से उच्च शिक्षा देने पर जोर देते हैं, परंतु उनमें धार्मिक, सामाजिक सद्भाव और संस्कारों का बीजारोपण एवं संस्कृति से परिचय नहीं करवाते, जो कि समाज में एक बड़ी विडंबना है। बचपन में दिए गए सद संस्कार पचपन की दहलीज पर पहुंचने के बाद भी ज्यों के त्यों बने रहते हैं। यह सार्वभौमिक सत्य है।</p>
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		<title>ऋषभदेव से 1008 मुनि भक्त आज सिद्ध क्षेत्र गिरनार तीर्थ यात्रा पर रवाना होंगे :  गिरनार पर्वत पर होगा महा अर्चना विधान, प्रदीप मामा परिवार का होगा बहुमान </title>
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		<pubDate>Wed, 23 Oct 2024 07:08:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत गौरव राष्ट्र संत, मनोग्याचार्य, जिनशर्णम तीर्थ के प्रणेता आचार्य श्री पुलक सागर जी गुरुदेव के मंगल आशीर्वाद से सिद्ध भूमि श्री गिरनार जी (उर्जयंत शिखर) पर तीर्थंकर श्री नेमीनाथ भगवान की चरण वंदना एवं महाअर्चना विधान का भव्य आयोजन किया जा रहा है। पढ़िए धरणेन्द्र जैन की रिपोर्ट&#8230; खेरवाड़ा। भारत गौरव राष्ट्र संत, मनोग्याचार्य, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भारत गौरव राष्ट्र संत, मनोग्याचार्य, जिनशर्णम तीर्थ के प्रणेता आचार्य श्री पुलक सागर जी गुरुदेव के मंगल आशीर्वाद से सिद्ध भूमि श्री गिरनार जी (उर्जयंत शिखर) पर तीर्थंकर श्री नेमीनाथ भगवान की चरण वंदना एवं महाअर्चना विधान का भव्य आयोजन किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए धरणेन्द्र जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>खेरवाड़ा।</strong> भारत गौरव राष्ट्र संत, मनोग्याचार्य, जिनशर्णम तीर्थ के प्रणेता आचार्य श्री पुलक सागर जी गुरुदेव के मंगल आशीर्वाद से सिद्ध भूमि श्री गिरनार जी (उर्जयंत शिखर) पर तीर्थंकर श्री नेमीनाथ भगवान की चरण वंदना एवं महाअर्चना विधान का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यात्रा के संयोजक सुमेश मधु वानावत ने बताया कि यात्रा में आज दोपहर गुरुकुल मैदान से 25 लग्जरी बसों के माध्यम से 1008 मुनि भक्त ऋषभदेव से रवाना होंगे और 25 अक्टूबर को पुनः लौटेंगे।</p>
<p>यह पूरी यात्रा भोपाल, मध्यप्रदेश निवासी संगति एवं पुण्यार्जक प्रदीप &#8220;मामा,&#8221; प्रतिभा &#8220;मामी,&#8221; राहुल जिम्मी, रेयान जैन, कृतज्ञ, लवली, सुनय, रिया परिवार द्वारा आयोजित की गई है। यात्रा संयोजक सुमेश मधु वानावत ने बताया कि इस आयोजन में सकल दिगंबर जैन समाज ऋषभदेव के सदस्य एवं आस-पास के पुलक मंच के सदस्य भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को लेकर समाज में उत्साह देखने को मिल रहा है। इतने बड़े आयोजन के लिए विधिवत कमेटियां बनाई गई थीं, जो सभी तैयारियां पूरी कर चुकी हैं। इस यात्रा के आयोजन की जिम्मेदारी अखिल भारतीय पुलक मंच परिवार ऋषभदेव द्वारा निभाई जा रही है, और इस संपूर्ण कार्यक्रम के आयोजक मंच परिवार एवं जिनशर्णम तीर्थ ट्रस्ट उपलाट वापी रहेंगे।</p>
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