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	<title>गिरनार जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>गिरनार जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भगवान नेमीनाथ के मोक्ष कल्याणक पर गिरनार पर्वत पर चढ़ाया निर्वाण लाडू : हजारों श्रद्धालुओं ने की वंदना और आराधना </title>
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		<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 11:02:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान नेमीनाथ के मोक्ष कल्याणक पर गुजरात स्थित पवित्र गिरनार जी पर्वत पर हजारों श्रद्धालुओं ने अभिषेक, शांतिधारा, पूजन एवं निर्वाण लाडू समर्पित किया। मध्यप्रदेश सहित देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं श्रद्धा के साथ पर्व मनाया। पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन रागी/रत्नेश जैन रागी की यह रिपोर्ट। जूनागढ़ (गुजरात)। जैन धर्म के 22वें [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान नेमीनाथ के मोक्ष कल्याणक पर गुजरात स्थित पवित्र गिरनार जी पर्वत पर हजारों श्रद्धालुओं ने अभिषेक, शांतिधारा, पूजन एवं निर्वाण लाडू समर्पित किया। मध्यप्रदेश सहित देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं श्रद्धा के साथ पर्व मनाया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन रागी/रत्नेश जैन रागी की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जूनागढ़ (गुजरात)।</strong> जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान श्री नेमीनाथ के मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर गिरनार जी पर्वत की प्रथम टोंक स्थित श्री बंडीलाल दिगंबर जैन मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ अभिषेक, शांतिधारा, पूजन एवं निर्वाण लाडू अर्पित किया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश सहित देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गिरनार जी पहुंचे और मोक्षभूमि की वंदना कर धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<p><strong>गिरनार पर्वत पर उमड़ा आस्था का सैलाब</strong></p>
<p>मोक्ष कल्याणक महोत्सव के दौरान गिरनार जी की तलहटी से लेकर प्रथम टोंक और प्रथम से पंचम टोंक तक दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने भगवान नेमीनाथ के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हुए गिरनार पर्वत की वंदना एवं आराधना की।</p>
<p><strong>निर्वाण लाडू एवं शांतिधारा का आयोजन</strong></p>
<p>प्रथम टोंक पर निर्वाण लाडू अजीत-अनीता जैन एवं योगेश जैन द्वारा अर्पित किया गया। वहीं तलहटी स्थित बंडीलाल दिगंबर जैन मंदिर में पदमचंद-उर्मिला जैन (सुकेश इंडस्ट्री, जयपुर) तथा दीपचंद-सनत कुमार छाबड़ा (कोलकाता) ने निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त किया। शांतिधारा पदमचंद जैन (जयपुर) एवं रविंद्र प्रसाद-राजीव जैन (दिल्ली) द्वारा संपन्न हुई।</p>
<p><strong>व्यवस्थाओं में रहा विशेष सहयोग</strong></p>
<p>भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी मध्यांचल के प्रचार प्रमुख एवं प्रवक्ता राजेश जैन रागी ने बताया कि आयोजन को सफल बनाने हेतु ट्रस्ट एवं विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों ने कई दिनों तक शासन-प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर व्यवस्थाओं को सुचारु रखा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भोजन, स्वल्पाहार एवं भाता की भी विशेष व्यवस्था की गई।</p>
<p><strong>सहयोगियों का किया सम्मान और आभार</strong></p>
<p>श्री बंडीलाल दिगंबर जैन कारखाना ट्रस्ट कमेटी तथा सहयोगी संस्थाओं ने आयोजन की सफलता के लिए शासन-प्रशासन, समाज के विभिन्न संगठनों, पुण्यार्जकों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए सभी के पुण्यों की अनुमोदना की।</p>
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		<title>गिरनार जी यात्रा 9 जुलाई को इंदौर पहुंचेगी: दिगंबर जैन समाज ने संरक्षण की मांग दोहराई   </title>
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		<pubDate>Wed, 08 Jul 2026 08:21:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन समाज के लिए गुजरात स्थित गिरनार जी पर्वत आस्था का सर्वाेच्च केंद्र है। इसी पवित्र स्थान पर 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक हुआ था। जैन धर्म में गिरनार जी को ‘रेवतगिरि’ के नाम से भी जाना जाता है और यहां भगवान नेमिनाथ के कुल पांच कल्याणक हुए हैं &#8211; गर्भ, जन्म, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन समाज के लिए गुजरात स्थित गिरनार जी पर्वत आस्था का सर्वाेच्च केंद्र है। इसी पवित्र स्थान पर 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक हुआ था। जैन धर्म में गिरनार जी को ‘रेवतगिरि’ के नाम से भी जाना जाता है और यहां भगवान नेमिनाथ के कुल पांच कल्याणक हुए हैं &#8211; गर्भ, जन्म, दीक्षा, ज्ञान और मोक्ष कल्याणक। इसी कारण दिगंबर जैन समाज की आस्था इस तीर्थ से अत्यंत गहराई से जुड़ी हुई है। <span style="color: #ff0000">आज पढ़िए, इंदौर ब्यूरो डेस्क की यह रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। दिगंबर जैन समाज के लिए गुजरात स्थित गिरनार जी पर्वत आस्था का सर्वाेच्च केंद्र है। इसी पवित्र स्थान पर 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक हुआ था। जैन धर्म में गिरनार जी को ‘रेवतगिरि’ के नाम से भी जाना जाता है और यहां भगवान नेमिनाथ के कुल पांच कल्याणक हुए हैं &#8211; गर्भ, जन्म, दीक्षा, ज्ञान और मोक्ष कल्याणक। इसी कारण दिगंबर जैन समाज की आस्था इस तीर्थ से अत्यंत गहराई से जुड़ी हुई है। विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन के नेतृत्व में इस वर्ष भी विशाल ‘नेमि-गिरनार धर्म यात्रा’ का आयोजन किया गया है। यह यात्रा देशभर से बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबियों को साथ लेकर चल रही है। यात्रा 9 जुलाई को इंदौर पहुंचेगी। इंदौर में यात्रा के स्वागत-अभिनंदन की जोरदार तैयारियां की जा रही हैं। आयोजकों के अनुसार रीगल चौराहे पर स्थित ऐतिहासिक कीर्ति स्तंभ पर यात्रा का भव्य स्वागत किया जाएगा। इंदौर में विराजित साधु-संतों के सानिध्य में कीर्ति स्तंभ से यह यात्रा राजवाड़ा की ओर प्रस्थान करेगी।</p>
<p><strong>’क्यों महत्वपूर्ण है गिरनार जी यात्रा?’  </strong></p>
<p>गिरनार जी केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भगवान नेमिनाथ की तपोभूमि और मोक्ष भूमि है। मान्यता है कि भगवान नेमिनाथ ने यहीं से 700 मुनियों के साथ मोक्ष प्राप्त किया। दिगंबर परंपरा में इसे ‘सिद्ध क्षेत्र’ का दर्जा प्राप्त है। इसी कारण हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पैदल यात्रा कर पुण्य अर्जित करते हैं।</p>
<p><strong>क्या है विवाद?  </strong></p>
<p>पिछले कुछ वर्षों से गिरनार जी तीर्थ को लेकर विवाद गहराया है। दिगंबर जैन समाज का कहना है कि गिरनार जी के कुछ हिस्सों पर अन्य समुदायों द्वारा अतिक्रमण और निर्माण किए जा रहे हैं, जिससे तीर्थ की मूल पहचान और प्राचीन स्वरूप प्रभावित हो रहा है। समाज की मांग है कि गिरनार जी को ‘जैन तीर्थ क्षेत्र’ घोषित कर इसके संरक्षण और जीर्णाेद्धार के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। विश्व जैन संगठन इस मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों से लगातार पत्राचार और आंदोलन कर रहा है। इंदौर पहुंच रही यह धर्म यात्रा इसी संरक्षण आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम भी बनेगी। यहां उल्लेखनीय है कि इंदौर से भी बड़ी संख्या में दिगंबर जैन समाज के श्रद्धालुगण गिरनार जी पहुंचकर 20 जुलाई को भगवान नेमिनाथ जी का महामस्तकाभिषेक और शांतिधारा कर निर्वाण लाडू अर्पित करेंगे। यहां देशभर से लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।</p>
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		<title>प्रथम बार शिवपुरी पहुंची श्री नेमि गिरनार धर्मयात्रा : भव्य शोभायात्रा, झांकी, पचरंगा और तिरंगा बने आकर्षण का केंद्र </title>
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		<pubDate>Sat, 04 Jul 2026 15:47:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री नेमि गिरनार जी धर्मयात्रा के प्रथम बार शिवपुरी आगमन पर सकल जैन समाज ने भव्य शोभायात्रा एवं धर्मसभा का आयोजन किया। गिरनार तीर्थ की झांकी, 250 फीट तिरंगा और पचरंगा ध्वज आकर्षण का केंद्र रहे। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट। मुरैना/शिवपुरी। परम पूज्य आचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महाराज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्री नेमि गिरनार जी धर्मयात्रा के प्रथम बार शिवपुरी आगमन पर सकल जैन समाज ने भव्य शोभायात्रा एवं धर्मसभा का आयोजन किया। गिरनार तीर्थ की झांकी, 250 फीट तिरंगा और पचरंगा ध्वज आकर्षण का केंद्र रहे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/शिवपुरी।</strong> परम पूज्य आचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में 25 जून को दिल्ली से प्रारंभ हुई 5100 किलोमीटर की श्री नेमि गिरनार जी धर्मयात्रा के प्रथम बार शिवपुरी आगमन पर सकल जैन समाज एवं विभिन्न जैन संगठनों द्वारा भव्य शोभायात्रा निकालकर श्रद्धापूर्वक स्वागत किया गया। यात्रा के समापन पर विशाल धर्मसभा का आयोजन भी हुआ।</p>
<p><strong>भव्य शोभायात्रा का हुआ आयोजन</strong></p>
<p>कार्यक्रम संयोजक चंद्रसेन जैन एवं सकल जैन समाज महापंचायत के अध्यक्ष दिनेश जैन कल्लू भैया ने बताया कि शोभायात्रा श्री महावीर जिनालय, महल कॉलोनी से प्रारंभ होकर राजेश्वरी रोड, अस्पताल रोड, भगवान महावीर स्वामी कीर्ति स्तंभ, कोर्ट रोड, माधव चौक और गुरुद्वारा चौक सहित प्रमुख मार्गों से होकर पुनः जिनालय परिसर पहुंची।</p>
<p><strong>गिरनार झांकी और विशाल ध्वज बने आकर्षण</strong></p>
<p>धर्मयात्रा में ट्रक पर सुसज्जित श्री सिद्धक्षेत्र गिरनार की आकर्षक झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। इसके साथ 250 फीट लंबा तिरंगा एवं 250 फीट लंबा पचरंगा जैन ध्वज लेकर समाजजन पूरे उत्साह के साथ नगर भ्रमण में शामिल हुए, जिससे पूरे शहर में धार्मिक वातावरण निर्मित हो गया।</p>
<p><strong>धर्मसभा में गिरनार पहुंचने का आह्वान</strong></p>
<p>धर्मसभा का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन ने 20 जुलाई को भगवान नेमिनाथ के निर्वाण कल्याणक महोत्सव पर अधिक से अधिक संख्या में श्री सिद्धक्षेत्र गिरनार पहुंचने का आह्वान किया। कोऑर्डिनेटर अंचल जैन ने बताया कि तीर्थ पर यात्रियों के लिए भोजन एवं आवास की समुचित व्यवस्था की गई है।</p>
<p><strong>समाज और संगठनों ने किया स्वागत</strong></p>
<p>कार्यक्रम में विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन, कोऑर्डिनेटर अंचल जैन एवं पुजारी विनोद जैन का सकल जैन समाज, मंदिर समितियों एवं विभिन्न जैन संगठनों द्वारा माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। स्वागत भाषण पत्रकार संजीव जैन बाँझल ने दिया।</p>
<p><strong>सामाजिक एकता का दिया संदेश</strong></p>
<p>राष्ट्रभक्त सवर्ण समाज संगठन के मुख्य संयोजक शत्रुघ्न सिंह तोमर ने अपने संबोधन में जैन समाज के धार्मिक कार्यों में सदैव सहयोग देने का विश्वास व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में संयोजक चंद्रसेन जैन ने सभी मंदिर समितियों, महिला मंडलों, युवा मंडलों एवं सहयोगी संगठनों का आभार व्यक्त किया। संचालन महेंद्र जैन ने किया।</p>
<p><strong>गिरनार यात्रा का उद्देश्य</strong></p>
<p>विश्व जैन संगठन द्वारा आयोजित यह 5100 किलोमीटर की धर्मयात्रा देशभर के श्रद्धालुओं को भगवान नेमिनाथ की मोक्षस्थली श्री सिद्धक्षेत्र गिरनार से जोड़ने तथा 20 जुलाई को आयोजित निर्वाण कल्याणक महोत्सव में अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निकाली जा रही है।</p>
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		<title>रात को स्वप्न में दर्शन किए और सुबह प्रारंभ हुई श्री नेमि गिरनार धर्मयात्रा : 20 जुलाई को लाखों श्रद्धालु चढ़ाएंगे गिरनार जी में निर्वाण लाडू </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/rat_ko_swapn_me_darshan_kiye_aur_subah_prarambh_hui_shri_nemi_girnar_dharmayatra/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Jun 2026 16:58:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राजधानी दिल्ली के कृष्णानगर जैन मंदिर से श्री नेमि गिरनार धर्मयात्रा का शुभारंभ हुआ। आचार्य विमर्शसागर जी महाराज के सान्निध्य में प्रारंभ हुई यह यात्रा 20 जुलाई को गिरनार जी पहुंचेगी, जहां श्रद्धालु निर्वाण लाडू अर्पित करेंगे। पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट। दिल्ली। जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की निर्वाण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>राजधानी दिल्ली के कृष्णानगर जैन मंदिर से श्री नेमि गिरनार धर्मयात्रा का शुभारंभ हुआ। आचार्य विमर्शसागर जी महाराज के सान्निध्य में प्रारंभ हुई यह यात्रा 20 जुलाई को गिरनार जी पहुंचेगी, जहां श्रद्धालु निर्वाण लाडू अर्पित करेंगे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>दिल्ली।</strong> जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की निर्वाण भूमि सिद्धक्षेत्र श्री गिरनार जी में निर्वाण लाडू अर्पित करने के उद्देश्य से 25 जून को राजधानी दिल्ली स्थित कृष्णानगर जैन मंदिर से भव्य &#8220;श्री नेमि गिरनार धर्मयात्रा&#8221; का शुभारंभ हुआ। यह यात्रा परम पूज्य जिनागम पंथ प्रवर्तक भावलिंगी संत दिगम्बराचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज ससंघ (33 पिच्छी) के मंगल सान्निध्य में प्रारंभ हुई।</p>
<p><strong>यात्रा का भव्य शुभारंभ</strong></p>
<p>विश्व जैन संगठन के नेतृत्व एवं श्री संजय जैन के संयोजकत्व में प्रारंभ हुई यह धर्मयात्रा 25 दिनों तक देश के विभिन्न नगरों, तीर्थक्षेत्रों और धार्मिक स्थलों से होकर गुजरेगी। यात्रा का मुख्य उद्देश्य भगवान नेमिनाथ के निर्वाण कल्याणक की प्रभावना एवं जैन तीर्थों के प्रति श्रद्धा का जागरण है।</p>
<p><strong>20 जुलाई को पहुंचेगी गिरनार जी</strong></p>
<p>आयोजकों के अनुसार यह धर्मयात्रा 20 जुलाई 2026 को सिद्धक्षेत्र श्री गिरनार जी पहुंचेगी। इस अवसर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु पांचवीं टोंक पर भगवान नेमिनाथ के चरणों में निर्वाण लाडू अर्पित करेंगे और पुण्यार्जन का लाभ प्राप्त करेंगे।</p>
<p><strong>पिछले वर्ष भी हुआ था आयोजन</strong></p>
<p>विगत वर्ष भी दिगम्बराचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज के ससंघ सान्निध्य में यह धर्मयात्रा बलबीर नगर से प्रारंभ होकर गिरनार जी पहुंची थी। इस वर्ष कृष्णानगर जैन मंदिर को इस ऐतिहासिक धर्मयात्रा के शुभारंभ का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।</p>
<p><strong>आचार्यश्री ने दिया प्रेरक संदेश</strong></p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने कहा कि हमारी पहचान हमारे तीर्थों से है। सम्पूर्ण विश्व में जैन धर्म के जितने प्राचीन और महत्वपूर्ण तीर्थ हैं, वे हमारी गौरवशाली परंपरा और संस्कृति के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि श्री गिरनार जी भगवान नेमिनाथ की निर्वाण स्थली है और यह प्रत्येक जैन श्रद्धालु की आस्था का प्रमुख केंद्र है।</p>
<p><strong>स्वप्न में हुए भगवान के दर्शन</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने अपने उद्बोधन में एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व रात्रि में उन्हें स्वप्न में एक प्राचीन जिनालय के दर्शन हुए, जहां एक दिव्य जिनप्रतिमा एवं समीप अंबिका माता की प्रतिमा विराजमान थी। स्वप्न में उन्हें यह अनुभूति हुई कि यह भगवान नेमिनाथ की प्रतिमा है और यहां उनकी महती प्रभावना होने वाली है। इस दिव्य अनुभव ने उन्हें अत्यंत आनंद और उत्साह से भर दिया।</p>
<p><strong>यात्रा की सफलता का आशीर्वाद</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि यह प्रभु की विशेष कृपा है कि उन्हें पुनः इस धर्मयात्रा का शुभारंभ कराने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने सभी यात्रियों और श्रद्धालुओं को मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह धर्मयात्रा धर्मप्रभावना, भक्ति और आध्यात्मिक जागरण का नया अध्याय स्थापित करेगी।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं में उत्साह</strong></p>
<p>धर्मयात्रा के शुभारंभ अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजजन और धर्मप्रेमी उपस्थित रहे। सभी ने भगवान नेमिनाथ के जयघोष के साथ यात्रा को विदाई दी और इसकी सफल एवं मंगलमय पूर्णता की कामना की। यात्रा को लेकर दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।</p>
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		<title>गिरनार जी में मनेगा 20 जुलाई को भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक : विश्व जैन संगठन का राष्ट्रव्यापी आह्वान हर नगर से एक यात्रा हो गिरनार जी की ओर </title>
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		<pubDate>Mon, 18 May 2026 04:09:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ दिगंबर जैन ग्लोबल महासभा राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ ने इस विशेष धर्म यात्रा को संपूर्ण समर्थन देते हुए भारत वर्षीय समस्त जैन समाज से इस पुण्य अभियान में सक्रिय रूप से जुड़ने एवं अधिकाधिक श्रद्धालुओं को यात्रा में सहभागी बनाने का विनम्र आग्रह किया है। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। श्री दिगंबर जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> दिगंबर जैन ग्लोबल महासभा राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ ने इस विशेष धर्म यात्रा को संपूर्ण समर्थन देते हुए भारत वर्षीय समस्त जैन समाज से इस पुण्य अभियान में सक्रिय रूप से जुड़ने एवं अधिकाधिक श्रद्धालुओं को यात्रा में सहभागी बनाने का विनम्र आग्रह किया है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। श्री दिगंबर जैन ग्लोबल महासभा राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ ने इस विशेष धर्म यात्रा को संपूर्ण समर्थन देते हुए भारत वर्षीय समस्त जैन समाज से इस पुण्य अभियान में सक्रिय रूप से जुड़ने एवं अधिकाधिक श्रद्धालुओं को यात्रा में सहभागी बनाने का विनम्र आग्रह किया है। विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन ने बताया कि गिरनार जी वह सिद्धभूमि है । जैन धर्म के जहां 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ ने मोक्ष प्राप्त किया था। इस पवित्र भूमि पर पहुँचकर भगवान नेमीनाथ की मोक्ष स्थली पाँचवीं टोंक की वंदना, भक्ति करना हम सभी का परम सौभाग्य है। वर्तमान परिस्थितियों में जैन एकता के साथ धर्म संस्कृति एवं तीर्थों की सुरक्षा और अस्मिता के लिए समाज का एकजुट होना अत्यंत आवश्यक है। हर शहर,हर नगर से एक यात्रा – हमारा आह्वान एवं संकल्प है। विश्व जैन संगठन ने कहा कि चाहे 4 श्रद्धालु जाएं, 40 जाएं, 400 जाएं या 4000 महत्वपूर्ण यह है कि आपके नगर क्षेत्र से धर्म यात्रा अवश्य पहुँचे। इसका उद्देश्य गिरनार जी जैसे प्राचीन जैन सिद्धक्षेत्र पर हमारा अधिकार और आस्था संस्कृति सुरक्षित रखने का संदेश विश्व तक पहुँचाना है।</p>
<p><strong>यात्रा की कार्ययोजना एवं महत्वपूर्ण तिथियाँ </strong></p>
<p>विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं मयंक जैन ने बताया कि भारत वर्षीय सभी मंदिर समितियों, समाज एवं संस्थाओं से आग्रह किया गया है कि मई–जून स्थानीय स्तर पर समिति गठन, चंदा संग्रह एवं बस/ट्रेन टिकट की अग्रिम बुकिंग प्रारंभ करें। 1 जुलाई यात्रियों की अंतिम सूची तैयार करें। 18-19 जुलाई गिरनार जी के लिए प्रस्थान करें। 20 जुलाई भगवान नेमीनाथ मोक्ष कल्याणक के दिन पाँचवीं टोंक वंदना एवं निर्माण लाडू समर्पित कर विशेष दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य करें।</p>
<p><strong> ना रुकेगा कारवां, ना झुकेगा स्वाभिमान</strong></p>
<p>ग्लोबल महासभा राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ, विश्व जैन संगठन ने अपील की है कि जो श्रद्धालु स्वयं नहीं जा सकते, वे अपनी चंचला लक्ष्मी खर्च कर किसी अन्य समाज श्रद्धालु को भेजकर इस पुण्य कार्य में सहभागी बनें। जैन समाज ने ठाना है कि घर-घर अलख जगाकर, हर शहर से बस चलाकर नेमिनाथ प्रभु की मोक्ष स्थली पर शीश नवाना है। संगठन का उद्घोष है कि ना रुकेगा कारवां, ना झुकेगा स्वाभिमान। हर मोहल्ले से यात्रा, यही है हमारा अभियान। यदि आपके गांव, कस्बे या शहर से धर्म यात्रा नहीं गई, तो आने वाली पीढ़ियाँ अवश्य पूछेंगी —जब गिरनार जी पर हमारी आस्था सुरक्षित रखने का समय था, तब हमारा नगर कहाँ था?&#8221;</p>
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		<title>18 अप्रैल को है विश्व धरोहर दिवस : विश्व धरोहर सूची में जैन धरोहरों को भी स्थान मिले </title>
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		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 05:51:39 +0000</pubDate>
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<p><strong>विश्व धरोहर दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस कहा जाता है, प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट एंड साइट की ओर से 1982 में की गई और बाद में यूनेस्को ने इसे वैश्विक मान्यता दी। <span style="color: #ff0000">विश्व धरोहर दिवस पर डॉ यतीश जैन, जबलपुर का पढ़िए, विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जबलपुर।</strong> विश्व धरोहर दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस कहा जाता है, प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट एंड साइट की ओर से 1982 में की गई और बाद में यूनेस्को ने इसे वैश्विक मान्यता दी। इस दिवस का उद्देश्य मानव सभ्यता की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। आज विश्व में लगभग 1200 के आसपास धरोहर स्थल सूचीबद्ध हैं, जबकि भारत में वर्तमान में 42 विश्व धरोहर स्थल हैं, जो हमारे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।भारत की धरोहरों में जैन परंपरा का विशेष स्थान है। जैन धर्म अत्यंत प्राचीन है और इसके सिद्धांत- अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मसंयम, न केवल धार्मिक जीवन को बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को भी दिशा देते हैं। जैन धरोहर स्थल केवल पूजा के स्थान नहीं हैं, बल्कि वे तप, त्याग, ज्ञान और कला के केंद्र हैं। इन स्थलों की विशेषता यह है कि यहाँ आध्यात्मिकता और स्थापत्य कला का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। संपूर्ण देश में प्रत्येक राज्य में अति प्राचीन जैन तीर्थ स्थल एवं जैन धरोहर है जिन्हें विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित किया जा सकता है। इसके लिए सार्थक प्रयास किया जाना आवश्यक है। उदाहरण स्वरूप कुछ ही स्थलों के बारे में जानकारी दे रहा हूं जिन्हें आसानी से यूनेस्को के मापदंड में लिया जा सकता है।</p>
<p><strong>श्रवणबेलगोला जैन धरोहरों में अत्यंत महत्वपूर्ण</strong></p>
<p>कर्नाटक में स्थित श्रवणबेलगोला जैन धरोहरों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ भगवान बाहुबली की 57 फीट ऊँची एकाश्म प्रतिमा स्थित है, जिसका निर्माण 981 ईस्वी में हुआ था। यह प्रतिमा पूरी तरह एक ही पत्थर से बनी है और यह त्याग, वैराग्य और आत्मविजय का प्रतीक है। हर 12 वर्ष में यहाँ महामस्तकाभिषेक का भव्य आयोजन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। राजस्थान के दिलवाड़ा जैन मंदिर जैन स्थापत्य कला के सर्वोत्तम उदाहरणों में से एक हैं। 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच निर्मित इन मंदिरों की संगमरमर की नक्काशी इतनी सूक्ष्म और सुंदर है कि पत्थर भी जीवंत प्रतीत होता है।</p>
<p><strong>विश्व का सबसे बड़ा जैन मंदिर समूह पालिताना</strong></p>
<p>गुजरात का शत्रुंजय पहाड़ी (पालिताना) जैन धर्म का अत्यंत पवित्र स्थल है। यहाँ लगभग 863 से अधिक मंदिर एक ही पर्वत पर स्थित हैं। यह विश्व का सबसे बड़ा जैन मंदिर समूह माना जाता है। इन मंदिरों का निर्माण विभिन्न कालों में हुआ, विशेष रूप से 11वीं से 19वीं शताब्दी के बीच। यहाँ तक पहुँचने के लिए लगभग 3800 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, जो एक प्रकार की साधना का अनुभव कराती हैं। यह स्थल यह दर्शाता है कि जैन धर्म में तप और श्रम का कितना महत्व है।</p>
<p><strong>मथुरा का कंकाली टीला का विशेष महत्व</strong></p>
<p>इसी प्रकार रणकपुर जैन मंदिर में 1444 स्तंभ हैं, और प्रत्येक स्तंभ की बनावट अलग-अलग है। यह स्थापत्य विज्ञान और कला का अद्भुत संगम है। गुजरात का गिरनार पर्वत जैन तीर्थ अत्यंत प्राचीन और पवित्र स्थल है, जहाँ 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का संबंध माना जाता है। यहाँ लगभग 9999 सीढ़ियाँ हैं, जो साधना और आत्मअनुशासन का प्रतीक हैं। देशभर में जैन धर्म की प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों की बात करें, तो मथुरा का कंकाली टीला का विशेष महत्व है। यहाँ से प्राप्त अवशेष पहली शताब्दी ईसा पूर्व से गुप्तकाल तक के हैं। यहाँ से जैन स्तूप, आयागपट्ट, मूर्तियाँ और अभिलेख प्राप्त हुए हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि मथुरा प्राचीन काल में जैन धर्म का प्रमुख केंद्र था। कंकाली टीला जैन कला और मूर्तिकला के प्रारंभिक विकास का साक्षी है।</p>
<p><strong>गोपाचल पर्वत जैन प्रतिमाएँ जैन शिल्पकला अद्वितीय</strong></p>
<p>उड़ीसा में स्थित उदयगिरि खंडगिरि गुफाएँ जैन मुनियों की तपस्थली रही हैं। ये गुफाएँ दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में राजा खारवेल के समय निर्मित हुई थीं। इन गुफाओं में साधना और ध्यान के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। हाथीगुम्फा अभिलेख यहाँ का प्रमुख आकर्षण है, जो उस समय के इतिहास को स्पष्ट करता है। यह स्थल दर्शाता है कि जैन धर्म का विस्तार पूर्वी भारत तक व्यापक रूप से था। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्थित गोपाचल पर्वत जैन प्रतिमाएँ जैन शिल्पकला का अत्यंत भव्य उदाहरण हैं। यहाँ चट्टानों को काटकर 7वीं से 15वीं शताब्दी के बीच विशाल तीर्थंकर प्रतिमाएँ बनाई गई हैं। कुछ प्रतिमाएँ 50 फीट से भी अधिक ऊँची हैं। ये प्रतिमाएँ न केवल कला का अद्भुत उदाहरण हैं, बल्कि वे जैन धर्म के प्रभाव और विस्तार को भी दर्शाती हैं।</p>
<p><strong>विश्व धरोहर मानकों के अनुरूप</strong></p>
<p>मध्यप्रदेश का सोनागिरि जैन तीर्थ भी जैन सिद्ध क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध है, जहाँ लगभग 100 से अधिक मंदिर स्थित हैं। यह स्थान मोक्षभूमि के रूप में जाना जाता है।</p>
<p>इन सभी जैन धरोहरों का यदि समग्र रूप से अध्ययन किया जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि वे यूनेस्को के विश्व धरोहर मानकों के अनुरूप हैं। इनमें ऐतिहासिकता, स्थापत्य उत्कृष्टता, सांस्कृतिक निरंतरता और आध्यात्मिक महत्व जैसे सभी गुण मौजूद हैं। ये धरोहरें हजारों वर्षों से जीवित परंपरा का हिस्सा हैं, जहाँ आज भी लाखों लोग आस्था और श्रद्धा के साथ आते हैं।</p>
<p><strong>धरोहरों को उचित संरक्षण मिले</strong></p>
<p>भारतीय संदर्भ में जैन धरोहरों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि ये केवल धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि वे मानवता के लिए नैतिक और आध्यात्मिक संदेश भी देती हैं। अहिंसा और संयम जैसे सिद्धांत आज के वैश्विक समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। यदि इन धरोहरों को उचित संरक्षण और वैश्विक पहचान मिले, तो यह न केवल जैन धर्म बल्कि सम्पूर्ण मानव सभ्यता के लिए लाभकारी होगा। विश्व धरोहर दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझें, उसका सम्मान करें और उसे सुरक्षित रखने का संकल्प लें। जैन धरोहरों के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है कि सच्ची प्रगति केवल भौतिक विकास में नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक उन्नति में भी निहित है। यदि हम इन धरोहरों को सहेजकर रखेंगे, तो हम अपने अतीत का सम्मान करते हुए भविष्य को सशक्त बना सकेंगे। यही इस दिवस का वास्तविक संदेश है।</p>
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		<title>भगवान नेमीनाथ के भक्त गिरनार जी की यात्रा पर रवाना:  यात्रियों के पुण्य की अनुमोदना का आह्वान </title>
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		<pubDate>Mon, 30 Jun 2025 08:20:01 +0000</pubDate>
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<p><strong>इंदौर से विश्व जैन संगठन और सकल जैन समाज के तीर्थ रक्षक, धर्मवीर, दानवीर परिवार के सहयोग से 500 यात्री बसों से इंदौर से जूनागढ़ गिरनार जी की यात्रा पर संकल्प के साथ जा रहे हैं। सभी वहां 2 जुलाई को श्री नेमीनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव पर निर्वाण लाडू चढ़ाएंगे।<span style="color: #ff0000"> इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> इंदौर से विश्व जैन संगठन और सकल जैन समाज के तीर्थ रक्षक, धर्मवीर, दानवीर परिवार के सहयोग से लगभग 500 यात्री निःशुल्क बस द्वारा इंदौर से गिरनार जी संकल्प के साथ जा रहे हैं। वहां 2 जुलाई बुधवार को श्री नेमीनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव पर निर्वाण लाडू चढ़ाएंगे। विश्व जैन संगठन के अध्यक्ष मयंक जैन एवं राजेश जैन दद्दू ने समाज श्रेष्ठी एवं समाज जन से आह्वान किया कि धर्मवीरों के पुण्य की अनुमोदना करें।</p>
<p>जिन्होंने अपनी साधन संपन्नता से 9 बसों का बंदोबस्त तीर्थ भक्तों के लिए किया। हम सब उनका स्वागत करते हैं, वंदन करते हैं। साथ ही, जो संकल्प के साथ यात्रा पर जा रहे हैं। धर्म वीरों को शुभकामनाएं प्रेषित कर मंगलमय यात्रा की अनुमोदना कर मंगल भावना भाएं कि सभी यात्रियों को निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य मिले। इसी कामना के साथ सभी समाजजन, वरिष्ठ पदाधिकारी, समाज सेवी, संस्था, ट्रस्टी जन सभी महावीर बाग आकर बसों से जा रहे सभी यात्रियों और बसों के पुण्यर्जकों का वंदन अभिनंदन एवं सतिशय पुण्य की अनुमोदना करे। सोमवार को शाम 6 महावीर बाग एरोड्रम रोड से बसें रवाना होंगी।</p>
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		<title>प्रशासन ने आश्वस्त किया विश्व जैन संगठन को : सुरक्षित दर्शन कराने के लिए प्रतिबद्धता जताई </title>
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		<pubDate>Thu, 26 Jun 2025 08:33:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जूनागढ़ पुलिस सभी जैन यात्रियों को गिरनार जी पर सुरक्षित दर्शन कराने के लिए प्रतिबद्ध है। जूनागढ़ पुलिस उप महानिरीक्षक और विश्व जैन संगठन को भवनाथ थाना निरीक्षक ने लिखित आश्वासन पत्र जारी किया है। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। जूनागढ़ पुलिस सभी जैन यात्रियों को गिरनार जी पर सुरक्षित दर्शन कराने के लिए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जूनागढ़ पुलिस सभी जैन यात्रियों को गिरनार जी पर सुरक्षित दर्शन कराने के लिए प्रतिबद्ध है। जूनागढ़ पुलिस उप महानिरीक्षक और विश्व जैन संगठन को भवनाथ थाना निरीक्षक ने लिखित आश्वासन पत्र जारी किया है।<span style="color: #ff0000"> इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जूनागढ़ पुलिस सभी जैन यात्रियों को गिरनार जी पर सुरक्षित दर्शन कराने के लिए प्रतिबद्ध है। जूनागढ़ पुलिस उप महानिरीक्षक और विश्व जैन संगठन को भवनाथ थाना निरीक्षक ने लिखित आश्वासन पत्र जारी किया है। विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि गुजरात पुलिस के जूनागढ़ रेंज के उप पुलिस महानिरीक्षक ने विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन की ओर से दिल्ली से गिरनार तक संयोजित धर्म पद यात्रा, यात्रा में शामिल सभी जैन यात्रियों को 2 जुलाई को सुरक्षा देने और गिरनार पर्वत पर नेमीनाथ भगवान की मोक्ष स्थली पर सभी जैन यात्रियों को सुरक्षित दर्शन-पूजन करने के गुजरात हाईकोर्ट के 17 फरवरी 2005 के आदेश का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध बताया।</p>
<p>भवनाथ, जूनागढ़ पुलिस स्टेशन निरीक्षक ने जावक संख्या 460/2025/ 14 जनवरी 2025 को लिखित में पुलिस अधीक्षक जूनागढ़ और विश्व जैन संगठन को लिखित आश्वासन पत्र प्रेषित किया। विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन के प्रशासन एवं सरकार द्वारा सीसीटीवी कैमरों की मांग पर भवनाथ थाने की ओर से जूनागढ़ कलेक्टर को सूची प्रेषित की है। दद्दू ने कहा कि संगठन द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय को 1 जनवरी 2025 को धर्म पद यात्रा की सुरक्षा, गिरनार पर जैन यात्रियों के सुरक्षित दर्शन और विशेष रूप से 2 जुलाई 2025 को नेमीनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक पर सभी सधर्मी यात्रियों को सुरक्षित दर्शन करने में सहयोग के लिए प्रेषित निवेदन पत्र क्रमांक PMOPG/D/2025/0002507 पर कार्रवाई करते हुए गुजरात पुलिस को प्रेषित किया गया था।</p>
<p>समाज जन एवं विश्व जैन संगठन द्वारा पुलिस प्रशासन के निर्देशों का पालन किया जाएगा। कृपया भड़काऊ भाषणबाजी से बचें और जैन सिद्धांतो अनुसार गिरनार यात्रा करें। गिरनार पर्वतराज पर वंदना के दौरान किसी भी प्रकार की गैर कानूनी गतिविधि के लिए यात्री स्वयंम जिम्मेवार होगा। गुजरात पुलिस द्वारा प्रेषित संलग्न पत्र का सभी समाज जन पालन करें।</p>
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		<title>जैन पदयात्रा को लेकर राष्ट्रपति को पत्र : गिरनार की पांचवीं टोंक पर सुरक्षा की मांग </title>
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		<pubDate>Wed, 25 Jun 2025 11:48:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गुजरात के गिरनार पर्वत स्थित जैन तीर्थ स्थल पर होने वाली धार्मिक पदयात्रा को लेकर विश्व जैन संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र भेजा है। पत्र में 2 जुलाई 2025 को भगवान नेमिनाथ के निर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जैन पदयात्रा के दौरान सुरक्षा और न्यायालय के निर्देशों के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गुजरात के गिरनार पर्वत स्थित जैन तीर्थ स्थल पर होने वाली धार्मिक पदयात्रा को लेकर विश्व जैन संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र भेजा है। पत्र में 2 जुलाई 2025 को भगवान नेमिनाथ के निर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जैन पदयात्रा के दौरान सुरक्षा और न्यायालय के निर्देशों के पालन की मांग की गई है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नई दिल्ली/जूनागढ़।</strong> गुजरात के गिरनार पर्वत स्थित जैन तीर्थ स्थल पर होने वाली धार्मिक पदयात्रा को लेकर विश्व जैन संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र भेजा है। पत्र में 2 जुलाई 2025 को भगवान नेमिनाथ के निर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जैन पदयात्रा के दौरान सुरक्षा और न्यायालय के निर्देशों के पालन की मांग की गई है।</p>
<p>पत्र में बताया गया है कि गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश (स्पेशल सिविल एप्लीकेशन संख्या 6426/2004) दिनांक 17 फरवरी 2005 के अनुसार, गिरनार पहाड़ की पांचवीं टोंक तक जैन यात्रियों को धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना करने की अनुमति है। इस आदेश के पालन हेतु जूनागढ़ के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को भी सूचित किया गया था।</p>
<p>विश्व जैन संगठन ने निवेदन किया है कि 2 जुलाई को महिलाएं, बच्चे समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूसरी, तीसरी, चौथी और विशेष रूप से पांचवीं टोंक तक पहुंचेंगे। संगठन ने आशंका जताई है कि पूर्व में इस क्षेत्र में यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार और हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं, जिनकी पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रशासनिक हस्तक्षेप आवश्यक है।</p>
<div class="wp-block-pdfemb-pdf-embedder-viewer"><a href="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/courtorder-2005.pdf" class="pdfemb-viewer" style="" data-width="max" data-height="max" data-toolbar="bottom" data-toolbar-fixed="on">courtorder 2005</a></div>
<p>पत्र में एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि 24 मई 2025 को महाराष्ट्र के वासिम निवासी जैन श्रद्धालु आशीष प्रभाकर डहाले पर पांचवीं टोंक पर लाठी से हमला किया गया। यह घटना न्यायालय के स्पष्ट आदेशों और अल्पसंख्यक अधिकारों का उल्लंघन मानी जा रही है।</p>
<p>संगठन ने मांग की है कि पूरे यात्रा मार्ग, विशेषकर पांचवीं टोंक के भीतर और बाहर समुचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की बाधा या हिंसा से तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, संबंधित अधिकारियों से इस संबंध में ठोस कार्रवाई की जानकारी भी प्रदान करने का आग्रह किया गया है।</p>
<p>गौरतलब है कि गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक दिगंबर जैन समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है, जहां भगवान नेमिनाथ के प्राचीन चरणचिह्न और मूर्ति स्थित हैं।</p>
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		<title>गिरनार जी में नेमिनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव 1-2 जुलाई को: आचार्य निर्मल सागरजी का होगा 58 वां दीक्षा महोत्सव </title>
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		<pubDate>Tue, 10 Jun 2025 07:13:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व शांति निर्मल ध्यान केंद्र ट्रस्ट के तत्वावधान में जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जी का मोक्ष कल्याणक 2 जुलाई को मनाया जाएगा। समवशरण मंदिर, विश्व शांति निर्मल ध्यान केंद्र गिरनार जी यह महोत्सव होगा। 1 जुलाई को प्रातः 7.30 बजे ध्वजारोहण के साथ महोत्सव प्रारंभ होगा। समाधिस्थ श्री निर्मल सागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विश्व शांति निर्मल ध्यान केंद्र ट्रस्ट के तत्वावधान में जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जी का मोक्ष कल्याणक 2 जुलाई को मनाया जाएगा। समवशरण मंदिर, विश्व शांति निर्मल ध्यान केंद्र गिरनार जी यह महोत्सव होगा। 1 जुलाई को प्रातः 7.30 बजे ध्वजारोहण के साथ महोत्सव प्रारंभ होगा। समाधिस्थ श्री निर्मल सागर जी का 58 वां दीक्षा महोत्सव के कार्यक्रम होंगे। इसमें पूजन,मंगल प्रवचन,आरती आदि कार्यक्रम किए जाएंगे। <span style="color: #ff0000">गिरनार से पढ़िए, उदयभान जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>गिरनार (जूनागढ़)।</strong> विश्व शांति निर्मल ध्यान केंद्र ट्रस्ट के तत्वावधान में जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जी का मोक्ष कल्याणक 2 जुलाई को मनाया जाएगा। मुनि श्री धरसेन सागर जी महाराज, मुनि श्री अजितसेन महाराज और र्निमल ध्यान ज्ञान केंद्र गिरनार के पीठाधीश क्षुल्लक श्री श्रीसमर्पण सागर जी के निर्देशन ब्रह्मचारी शांताबेन, ब्रह्मचारी सुमति भैया के सानिध्य में समवशरण मंदिर, विश्व शांति निर्मल ध्यान केंद्र गिरनार जी यह महोत्सव होगा। यहां नेमिनाथ निर्वाण महोत्सव समिति का संयोजन रहेगा। पीठाधीश क्षुल्लक श्री समर्पण सागर के मार्गदर्शन में ट्रस्टी एवं महोत्सव समिति के अध्यक्ष पारस जैन बज, अभिनंदन, ब्रह्मचारी सुमति भैया ने बताया कि 1 जुलाई को प्रातः 7.30 बजे ध्वजारोहण के साथ महोत्सव प्रारंभ होगा। इसके बाद विशाल रथ यात्रा समवशरण मंदिर जी से निर्मल ध्यान केंद्र तलहटी तक जाएगी। जहां 22 फीट उत्त॔ग भगवान नेमिनाथ जी की मनमोहक प्रतिमा जी का महामस्तकाभिषेक होगा। दोपहर को 2.30 बजे गिरनार गौरव समाधिस्थ श्री निर्मल सागर जी का 58 वां दीक्षा महोत्सव के कार्यक्रम होंगे। इसमें पूजन,मंगल प्रवचन,आरती आदि कार्यक्रम किए जाएंगे। रात्रि 8.30 बजे आचार्य भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।</p>
<p><strong>अतिथियों का किया जाएगा सम्मान </strong></p>
<p>2जुलाई को प्रातः गिरनार यात्रा निकाली जाएगी। समवशरण मंदिर में दोपहर को धर्मसभा का आयोजन होगा। इसमें मोक्ष कल्याण पर विशेष प्रस्तुति, सम्मान समारोह, निर्वाण कांड पढ़कर सिद्ध लाडू, अरिहंत लाडू, आचार्य लाडू, उपाध्याय लाडू, सर्वसाधु लाडू, नेमी प्रभु लाडू समर्पित किए जाएंगे। महोत्सव समिति के संरक्षक एवं निर्मल ज्ञान ध्यान केन्द्र के अध्यक्ष सोभागमल कटारिया, अध्यक्ष पारस जैन बज, ऋषभ जैन, रतन पाटनी आदि पदाधिकारी अतिथियों का सम्मान करेंगे।</p>
<p><strong>दूर-दूर से पहुंच रहे समाजजन और विद्वान </strong></p>
<p>इस राष्ट्रीय महोत्सव में देश के विभिन्न प्रांतो से विद्वान, श्रेष्ठि और युवा पहुंच रहे हैं। इस अवसर पर विश्व जैन संगठन के नेतृत्व में दिल्ली से निकली विशाल धर्म पदयात्रा भी गिरनार पहुंच रही है। सभी मिलकर सौहार्दपूर्ण वातावरण में शांति के साथ भगवान नेमीनाथ जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाएंगे। निर्वाण महोत्सव के अवसर पर पहाड़ पर पहली टोंक पर मंदिर जी एवं तलहटी पर निर्मल ध्यान केन्द्र स्थित भगवान नेमीनाथ की उत्तंग प्रतिमा तथा तलहटी प्रांगण में स्थित बड़ी धर्मशाला मंदिर में मूलनायक भगवान नेमिनाथ जी के सामने निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा।</p>
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