इस अवसर्पिणी युग का प्रारंभ ही स्त्री शक्ति के विकास एवं महत्व की सर्वाधिक महत्वपूर्ण आधारशिला है। प्रभु श्री आदिनाथ ने अपने ग्रहस्थावस्था में भी भोगभूमि से कर्मभूमि में परिणत भरत क्षेत्र की आकुलित जनता को षटकर्म का उपदेश दे कर जीवन निर्वाह की कला से परिचित कराया। असि, मसि, कृषि, विद्या, वाणिज्य और शिल्प। … Continue reading समस्त विशालताओं में विशालतम है स्त्री : विश्व की समस्त विशालताओं में विशालतम है-परमात्मा, आसमां और महात्मा। किंतु ये शब्द संग्रह भी मां वर्ण के बिना अधूरे हैं, अपूर्ण हैं।
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