<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>world heritage day &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/world-heritage-day/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Sat, 18 Apr 2026 11:00:12 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>world heritage day &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>विश्व धरोहर सूची में जैन धरोहरों को भी स्थान मिले : अद्वितीय और बेशकीमती हैं जैन पुरा संपदा </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/jain_heritage_sites_should_also_be_included_in_the_world_heritage_list/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/jain_heritage_sites_should_also_be_included_in_the_world_heritage_list/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 11:00:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आलेख]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Ascetic]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[International Day for Monuments and Sites]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Updates]]></category>
		<category><![CDATA[Lucknow. श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Nirgranth Center of Archaeology]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[world heritage day]]></category>
		<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[निर्ग्रंथ सेंटर आफ आर्कियोलॉजी]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[विश्व धरोहर दिवस]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=105024</guid>

					<description><![CDATA[विश्व धरोहर दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस कहा जाता है। प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मान्यूमेंट एंड साइट्स की ओर से 1982 में की गई और बाद में यूनेस्को ने इसे वैश्विक मान्यता दी। इस दिवस का उद्देश्य मानव सभ्यता की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>विश्व धरोहर दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस कहा जाता है। प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मान्यूमेंट एंड साइट्स की ओर से 1982 में की गई और बाद में यूनेस्को ने इसे वैश्विक मान्यता दी। इस दिवस का उद्देश्य मानव सभ्यता की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। विश्व धरोहर दिवस पर पढ़िए, निर्ग्रंथ सेंटर आफ आर्कियोलॉजी, लखनऊ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ.यतीश जैन, जबलपुर का यह आलेख। <span style="color: #ff0000">इसकी प्रस्तुति की राजेश जैन रागी ने। </span></strong></p>
<hr />
<p>विश्व धरोहर दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस कहा जाता है। प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मान्यूमेंट एंड साइट्स की ओर से 1982 में की गई और बाद में यूनेस्को ने इसे वैश्विक मान्यता दी। इस दिवस का उद्देश्य मानव सभ्यता की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। विश्व में लगभग 1200 के आसपास धरोहर स्थल सूचीबद्ध हैं, जबकि भारत में वर्तमान में 42 विश्व धरोहर स्थल हैं, जो हमारे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। भारत की धरोहरों में जैन परंपरा का विशेष स्थान है। जैन धर्म अत्यंत प्राचीन है और इसके सिद्धांत अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मसंयम, न केवल धार्मिक जीवन को बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को भी दिशा देते हैं। जैन धरोहर स्थल केवल पूजा के स्थान नहीं हैं, बल्कि वे तप, त्याग, ज्ञान और कला के केंद्र हैं। इन स्थलों की विशेषता यह है कि यहां आध्यात्मिकता और स्थापत्य कला का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। संपूर्ण देश में प्रत्येक राज्य में अति प्राचीन जैन तीर्थ स्थल एवं जैन धरोहर है, जिन्हें विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जा सकता है। इसके लिए सार्थक प्रयास किया जाना आवश्यक है। उदाहरण स्वरूप कुछ ही स्थलों के बारे में जानकारी दे रहा हूं जिन्हें आसानी से यूनेस्को के मापदंड में लिया जा सकता है। कर्नाटक में स्थित श्रवणबेलगोला जैन धरोहरों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां भगवान बाहुबली की 57 फीट ऊंची एकाश्म प्रतिमा स्थित है, जिसका निर्माण 981 ईस्वी में हुआ था। यह प्रतिमा पूरी तरह एक ही पत्थर से बनी है और यह त्याग, वैराग्य और आत्मविजय का प्रतीक है। हर 12 वर्ष में यहां महामस्तकाभिषेक का भव्य आयोजन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। राजस्थान के दिलवाड़ा जैन मंदिर जैन स्थापत्य कला के सर्वाेत्तम उदाहरणों में से एक हैं। 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच निर्मित इन मंदिरों की संगमरमर की नक्काशी इतनी सूक्ष्म और सुंदर है कि पत्थर भी जीवंत प्रतीत होता है। गुजरात का शत्रुंजय पहाड़ी (पालिताना) जैन धर्म का अत्यंत पवित्र स्थल है। यहां लगभग 863 से अधिक मंदिर एक ही पर्वत पर स्थित हैं। यह विश्व का सबसे बड़ा जैन मंदिर समूह माना जाता है। इन मंदिरों का निर्माण विभिन्न कालों में हुआ, विशेष रूप से 11वीं से 19वीं शताब्दी के बीच। यहां तक पहुंचने के लिए लगभग 3800 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो एक प्रकार की साधना का अनुभव कराती हैं। यह स्थल यह दर्शाता है कि जैन धर्म में तप और श्रम का कितना महत्व है। रणकपुर जैन मंदिर में 1444 स्तंभ हैं, और प्रत्येक स्तंभ की बनावट अलग-अलग है। यह स्थापत्य विज्ञान और कला का अद्भुत संगम है। गुजरात का गिरनार पर्वत जैन तीर्थ अत्यंत प्राचीन और पवित्र स्थल है, जहां 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का संबंध माना जाता है। यहां लगभग 9999 सीढ़ियाँ हैं, जो साधना और आत्मअनुशासन का प्रतीक हैं।</p>
<p><strong>कंकाली टीला जैन कला और मूर्तिकला के प्रारंभिक विकास का साक्षी </strong></p>
<p>देशभर में जैन धर्म की प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों की बात करें तो मथुरा का कंकाली टीला का विशेष महत्व है। यहां से प्राप्त अवशेष पहली शताब्दी ईसा पूर्व से गुप्तकाल तक के हैं। यहां से जैन स्तूप, आयागपट्ट, मूर्तियां और अभिलेख प्राप्त हुए हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि मथुरा प्राचीन काल में जैन धर्म का प्रमुख केंद्र था। कंकाली टीला जैन कला और मूर्तिकला के प्रारंभिक विकास का साक्षी है। उड़ीसा में स्थित उदयगिरि खंडगिरि गुफाएँ जैन मुनियों की तपस्थली रही हैं। ये गुफाएँ दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में राजा खारवेल के समय निर्मित हुई थीं। इन गुफाओं में साधना और ध्यान के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। हाथीगुम्फा अभिलेख यहां का प्रमुख आकर्षण है, जो उस समय के इतिहास को स्पष्ट करता है। यह स्थल दर्शाता है कि जैन धर्म का विस्तार पूर्वी भारत तक व्यापक रूप से था। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्थित गोपाचल पर्वत पर जैन प्रतिमाएं जैन शिल्पकला का अत्यंत भव्य उदाहरण हैं। यहां चट्टानों को काटकर 7वीं से 15वीं शताब्दी के बीच विशाल तीर्थंकर प्रतिमाएं बनाई गई हैं। कुछ प्रतिमाएं 50 फीट से भी अधिक ऊँची हैं। ये प्रतिमाएं न केवल कला का अद्भुत उदाहरण हैं, बल्कि वे जैन धर्म के प्रभाव और विस्तार को भी दर्शाती हैं।</p>
<p><strong>भारतीय संदर्भ में जैन धरोहरों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक</strong></p>
<p>मध्यप्रदेश का सोनागिरि जैन तीर्थ भी जैन सिद्ध क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध है, जहाँ लगभग 100 से अधिक मंदिर स्थित हैं। यह स्थान मोक्षभूमि के रूप में जाना जाता है। इन सभी जैन धरोहरों का यदि समग्र रूप से अध्ययन किया जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि वे न्छम्ैब्व् के विश्व धरोहर मानकों के अनुरूप हैं। इनमें ऐतिहासिकता, स्थापत्य उत्कृष्टता, सांस्कृतिक निरंतरता और आध्यात्मिक महत्व जैसे सभी गुण मौजूद हैं। ये धरोहरें हजारों वर्षों से जीवित परंपरा का हिस्सा हैं, जहाँ आज भी लाखों लोग आस्था और श्रद्धा के साथ आते हैं। भारतीय संदर्भ में जैन धरोहरों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि ये केवल धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि वे मानवता के लिए नैतिक और आध्यात्मिक संदेश भी देती हैं। अहिंसा और संयम जैसे सिद्धांत आज के वैश्विक समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। यदि इन धरोहरों को उचित संरक्षण और वैश्विक पहचान मिले, तो यह न केवल जैन धर्म बल्कि सम्पूर्ण मानव सभ्यता के लिए लाभकारी होगा। विश्व धरोहर दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझें, उसका सम्मान करें और उसे सुरक्षित रखने का संकल्प लें। जैन धरोहरों के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है कि सच्ची प्रगति केवल भौतिक विकास में नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक उन्नति में भी निहित है। यदि हम इन धरोहरों को सहेजकर रखेंगे, तो हम अपने अतीत का सम्मान करते हुए भविष्य को सशक्त बना सकेंगे। यही इस दिवस का वास्तविक संदेश है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/jain_heritage_sites_should_also_be_included_in_the_world_heritage_list/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>18 अप्रैल को है विश्व धरोहर दिवस : विश्व धरोहर सूची में जैन धरोहरों को भी स्थान मिले </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/world_heritage_day_is_on_april_18/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/world_heritage_day_is_on_april_18/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 05:51:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[18 अप्रैल]]></category>
		<category><![CDATA[April 18]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Ascetic]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Girnar ji  श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[International Day for Monuments and Sites]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Heritage]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Updates]]></category>
		<category><![CDATA[Palitana]]></category>
		<category><![CDATA[Shravanabelagola]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[T]]></category>
		<category><![CDATA[world heritage day]]></category>
		<category><![CDATA[World Heritage List]]></category>
		<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[गिरनार जी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन धरोहर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पालिताना]]></category>
		<category><![CDATA[विश्व धरोहर दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[विश्व धरोहर सूची]]></category>
		<category><![CDATA[श्रवणबेलगोला]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=104187</guid>

					<description><![CDATA[विश्व धरोहर दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस कहा जाता है, प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट एंड साइट की ओर से 1982 में की गई और बाद में यूनेस्को ने इसे वैश्विक मान्यता दी। विश्व धरोहर दिवस पर डॉ यतीश जैन, जबलपुर का पढ़िए, विशेष [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>विश्व धरोहर दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस कहा जाता है, प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट एंड साइट की ओर से 1982 में की गई और बाद में यूनेस्को ने इसे वैश्विक मान्यता दी। <span style="color: #ff0000">विश्व धरोहर दिवस पर डॉ यतीश जैन, जबलपुर का पढ़िए, विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जबलपुर।</strong> विश्व धरोहर दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस कहा जाता है, प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट एंड साइट की ओर से 1982 में की गई और बाद में यूनेस्को ने इसे वैश्विक मान्यता दी। इस दिवस का उद्देश्य मानव सभ्यता की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। आज विश्व में लगभग 1200 के आसपास धरोहर स्थल सूचीबद्ध हैं, जबकि भारत में वर्तमान में 42 विश्व धरोहर स्थल हैं, जो हमारे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।भारत की धरोहरों में जैन परंपरा का विशेष स्थान है। जैन धर्म अत्यंत प्राचीन है और इसके सिद्धांत- अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मसंयम, न केवल धार्मिक जीवन को बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को भी दिशा देते हैं। जैन धरोहर स्थल केवल पूजा के स्थान नहीं हैं, बल्कि वे तप, त्याग, ज्ञान और कला के केंद्र हैं। इन स्थलों की विशेषता यह है कि यहाँ आध्यात्मिकता और स्थापत्य कला का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। संपूर्ण देश में प्रत्येक राज्य में अति प्राचीन जैन तीर्थ स्थल एवं जैन धरोहर है जिन्हें विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित किया जा सकता है। इसके लिए सार्थक प्रयास किया जाना आवश्यक है। उदाहरण स्वरूप कुछ ही स्थलों के बारे में जानकारी दे रहा हूं जिन्हें आसानी से यूनेस्को के मापदंड में लिया जा सकता है।</p>
<p><strong>श्रवणबेलगोला जैन धरोहरों में अत्यंत महत्वपूर्ण</strong></p>
<p>कर्नाटक में स्थित श्रवणबेलगोला जैन धरोहरों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ भगवान बाहुबली की 57 फीट ऊँची एकाश्म प्रतिमा स्थित है, जिसका निर्माण 981 ईस्वी में हुआ था। यह प्रतिमा पूरी तरह एक ही पत्थर से बनी है और यह त्याग, वैराग्य और आत्मविजय का प्रतीक है। हर 12 वर्ष में यहाँ महामस्तकाभिषेक का भव्य आयोजन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। राजस्थान के दिलवाड़ा जैन मंदिर जैन स्थापत्य कला के सर्वोत्तम उदाहरणों में से एक हैं। 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच निर्मित इन मंदिरों की संगमरमर की नक्काशी इतनी सूक्ष्म और सुंदर है कि पत्थर भी जीवंत प्रतीत होता है।</p>
<p><strong>विश्व का सबसे बड़ा जैन मंदिर समूह पालिताना</strong></p>
<p>गुजरात का शत्रुंजय पहाड़ी (पालिताना) जैन धर्म का अत्यंत पवित्र स्थल है। यहाँ लगभग 863 से अधिक मंदिर एक ही पर्वत पर स्थित हैं। यह विश्व का सबसे बड़ा जैन मंदिर समूह माना जाता है। इन मंदिरों का निर्माण विभिन्न कालों में हुआ, विशेष रूप से 11वीं से 19वीं शताब्दी के बीच। यहाँ तक पहुँचने के लिए लगभग 3800 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, जो एक प्रकार की साधना का अनुभव कराती हैं। यह स्थल यह दर्शाता है कि जैन धर्म में तप और श्रम का कितना महत्व है।</p>
<p><strong>मथुरा का कंकाली टीला का विशेष महत्व</strong></p>
<p>इसी प्रकार रणकपुर जैन मंदिर में 1444 स्तंभ हैं, और प्रत्येक स्तंभ की बनावट अलग-अलग है। यह स्थापत्य विज्ञान और कला का अद्भुत संगम है। गुजरात का गिरनार पर्वत जैन तीर्थ अत्यंत प्राचीन और पवित्र स्थल है, जहाँ 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का संबंध माना जाता है। यहाँ लगभग 9999 सीढ़ियाँ हैं, जो साधना और आत्मअनुशासन का प्रतीक हैं। देशभर में जैन धर्म की प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों की बात करें, तो मथुरा का कंकाली टीला का विशेष महत्व है। यहाँ से प्राप्त अवशेष पहली शताब्दी ईसा पूर्व से गुप्तकाल तक के हैं। यहाँ से जैन स्तूप, आयागपट्ट, मूर्तियाँ और अभिलेख प्राप्त हुए हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि मथुरा प्राचीन काल में जैन धर्म का प्रमुख केंद्र था। कंकाली टीला जैन कला और मूर्तिकला के प्रारंभिक विकास का साक्षी है।</p>
<p><strong>गोपाचल पर्वत जैन प्रतिमाएँ जैन शिल्पकला अद्वितीय</strong></p>
<p>उड़ीसा में स्थित उदयगिरि खंडगिरि गुफाएँ जैन मुनियों की तपस्थली रही हैं। ये गुफाएँ दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में राजा खारवेल के समय निर्मित हुई थीं। इन गुफाओं में साधना और ध्यान के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। हाथीगुम्फा अभिलेख यहाँ का प्रमुख आकर्षण है, जो उस समय के इतिहास को स्पष्ट करता है। यह स्थल दर्शाता है कि जैन धर्म का विस्तार पूर्वी भारत तक व्यापक रूप से था। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्थित गोपाचल पर्वत जैन प्रतिमाएँ जैन शिल्पकला का अत्यंत भव्य उदाहरण हैं। यहाँ चट्टानों को काटकर 7वीं से 15वीं शताब्दी के बीच विशाल तीर्थंकर प्रतिमाएँ बनाई गई हैं। कुछ प्रतिमाएँ 50 फीट से भी अधिक ऊँची हैं। ये प्रतिमाएँ न केवल कला का अद्भुत उदाहरण हैं, बल्कि वे जैन धर्म के प्रभाव और विस्तार को भी दर्शाती हैं।</p>
<p><strong>विश्व धरोहर मानकों के अनुरूप</strong></p>
<p>मध्यप्रदेश का सोनागिरि जैन तीर्थ भी जैन सिद्ध क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध है, जहाँ लगभग 100 से अधिक मंदिर स्थित हैं। यह स्थान मोक्षभूमि के रूप में जाना जाता है।</p>
<p>इन सभी जैन धरोहरों का यदि समग्र रूप से अध्ययन किया जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि वे यूनेस्को के विश्व धरोहर मानकों के अनुरूप हैं। इनमें ऐतिहासिकता, स्थापत्य उत्कृष्टता, सांस्कृतिक निरंतरता और आध्यात्मिक महत्व जैसे सभी गुण मौजूद हैं। ये धरोहरें हजारों वर्षों से जीवित परंपरा का हिस्सा हैं, जहाँ आज भी लाखों लोग आस्था और श्रद्धा के साथ आते हैं।</p>
<p><strong>धरोहरों को उचित संरक्षण मिले</strong></p>
<p>भारतीय संदर्भ में जैन धरोहरों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि ये केवल धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि वे मानवता के लिए नैतिक और आध्यात्मिक संदेश भी देती हैं। अहिंसा और संयम जैसे सिद्धांत आज के वैश्विक समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। यदि इन धरोहरों को उचित संरक्षण और वैश्विक पहचान मिले, तो यह न केवल जैन धर्म बल्कि सम्पूर्ण मानव सभ्यता के लिए लाभकारी होगा। विश्व धरोहर दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझें, उसका सम्मान करें और उसे सुरक्षित रखने का संकल्प लें। जैन धरोहरों के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है कि सच्ची प्रगति केवल भौतिक विकास में नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक उन्नति में भी निहित है। यदि हम इन धरोहरों को सहेजकर रखेंगे, तो हम अपने अतीत का सम्मान करते हुए भविष्य को सशक्त बना सकेंगे। यही इस दिवस का वास्तविक संदेश है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/world_heritage_day_is_on_april_18/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विश्व धरोहर दिवस पर जैन तीर्थ संरक्षण का प्रेरक आयोजन सम्पन्न : राजवाड़ा पुरातत्व संग्रहालय में सम्मान समारोह और संरक्षण संकल्प के साथ कार्यक्रम </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/world_heritage_day_celebration_madhya_pradesh_tirth_surakshani/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/world_heritage_day_celebration_madhya_pradesh_tirth_surakshani/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Nov 2025 14:41:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA['Tirth Conservation]]></category>
		<category><![CDATA[Archaeology]]></category>
		<category><![CDATA[event]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Heritage]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[Preservation]]></category>
		<category><![CDATA[Rekha Jain]]></category>
		<category><![CDATA[world heritage day]]></category>
		<category><![CDATA[कार्यक्रम]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[तीर्थ संरक्षण]]></category>
		<category><![CDATA[पुरातत्व]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[रेखा जैन]]></category>
		<category><![CDATA[विश्व धरोहर दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[संरक्षण अभियान]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=95362</guid>

					<description><![CDATA[राजवाड़ा स्थित पुरातत्व संग्रहालय में विश्व धरोहर दिवस पर जैन तीर्थ संरक्षणी महासभा द्वारा शानदार कार्यक्रम आयोजित हुआ। पदाधिकारियों का सम्मान, प्रेरक वक्तव्य और संरक्षण हेतु सभी का संकल्प मुख्य आकर्षण रहे। — श्रीफल साथी टी. के. वेद की रिपोर्ट धरोहर वही बचती है, जिसे समाज संभालकर जीता है। इंदौर । राजवाड़ा स्थित पुरातत्व संग्रहालय [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>राजवाड़ा स्थित पुरातत्व संग्रहालय में विश्व धरोहर दिवस पर जैन तीर्थ संरक्षणी महासभा द्वारा शानदार कार्यक्रम आयोजित हुआ। पदाधिकारियों का सम्मान, प्रेरक वक्तव्य और संरक्षण हेतु सभी का संकल्प मुख्य आकर्षण रहे। — <span style="color: #ff0000">श्रीफल साथी टी. के. वेद की रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p style="text-align: center"><strong><span style="color: #ff0000">धरोहर वही बचती है, जिसे समाज संभालकर जीता है।</span></strong></p>
<p>इंदौर । राजवाड़ा स्थित पुरातत्व संग्रहालय में विश्व धरोहर दिवस का आयोजन बड़े उत्साह और संरक्षण की भावना के साथ संपन्न हुआ। भारत वर्षीय दिग जैन तीर्थ संरक्षणी महासभा के आह्वान पर यह कार्यक्रम म.प्र. तीर्थ संरक्षणी महासभा प्रदेश इकाई द्वारा रखा गया।</p>
<p><strong> मुख्य अतिथियों का सम्मान</strong></p>
<p>कार्यक्रम की शुरुआत प्रभारी अधिकारी श्री पुष्पेंद्रजी रोकड़ें, आशुतोष जी महाशब्दे और श्री योगेश जी पाल के सम्मान और स्वागत के साथ हुई। वक्ताओं ने धरोहर दिवस के महत्व और संरक्षण पर प्रभावशाली विचार साझा किए।</p>
<p><strong>पदाधिकारियों की सहभागिता</strong></p>
<p>स्थानीय पदाधिकारियों में प्रांतीय अध्यक्ष देवेंद्र सेठी, महामंत्री कैलाश लुहाड़िया, राकेश पाटनी, अमित जैन और फ़ोटोग्राफ़र अनिल जी की उपस्थिति रही। सभी ने पुरातत्व और जैन तीर्थ संरक्षण के लिए सक्रिय सहभागिता का संकल्प लिया।</p>
<p><strong>मीडिया टीम का योगदान</strong></p>
<p>कार्यक्रम में मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दु एवं रेखा जैन (Rekha Jain) का विशेष सहयोग उल्लेखनीय रहा, जिनके प्रयासों से कार्यक्रम की सूचनाएँ व्यापक रूप से प्रसारित हुईं।</p>
<p><strong> सफल समापन</strong></p>
<p>आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन सकारात्मक ऊर्जा और संरक्षण की प्रेरणा के साथ किया गया।</p>
<p style="text-align: center"><span style="color: #ff0000"><strong>धरोहर बचाओ — संस्कार बचेंगे, पहचान बचेगी, इतिहास बचेगा।</strong></span></p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/world_heritage_day_celebration_madhya_pradesh_tirth_surakshani/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विश्व विरासत दिवस विशेष : शांतिनाथ अतिशय क्षेत्र सिहोनिया को संरक्षण की जरूरत  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/shantinath_atishay_kshetra_sihoniya_needs_protection/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/shantinath_atishay_kshetra_sihoniya_needs_protection/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Apr 2023 17:28:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[conservation]]></category>
		<category><![CDATA[heritage श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain dharm]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[jain temple]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[Morena Ambah]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Sihoniyaji]]></category>
		<category><![CDATA[world heritage day]]></category>
		<category><![CDATA[जैन धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[धरोहर]]></category>
		<category><![CDATA[मुरैना अंबाह]]></category>
		<category><![CDATA[विश्व विरासत दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[संरक्षण]]></category>
		<category><![CDATA[सिहोनियाजी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=42485</guid>

					<description><![CDATA[आज भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुत सी ऐतिहासिक धरोहर और विरासत मौजूद हैं। जहां सरकार बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रही है। मुरैना जिले के अंबाह तहसील के अंतर्गत सिहोनिया गांव में 11वीं शताब्दी की बनी भगवान शांतिनाथजी (16 फीट), भगवान अरहनाथ जी (10 फीट), भगवान कुंथुनाथजी (10 फीट) की खड्गासन पत्थर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आज भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुत सी ऐतिहासिक धरोहर और विरासत मौजूद हैं। जहां सरकार बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रही है। मुरैना जिले के अंबाह तहसील के अंतर्गत सिहोनिया गांव में 11वीं शताब्दी की बनी भगवान शांतिनाथजी (16 फीट), भगवान अरहनाथ जी (10 फीट), भगवान कुंथुनाथजी (10 फीट) की खड्गासन पत्थर की मूर्तियां यहां स्थापित हैं। इनके भी संरक्षण की आवश्यकता है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अम्बाह।</strong> आज भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुत से ऐतिहासिक धरोहर और विरासत मौजूद हैं। जहां सरकार बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रही है। जिस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। सौरभ जैन वरेह वाले अंबाह वाले के मुताबिक मुरैना जिले के अंबाह तहसील के अंतर्गत सिहोनिया गांव में 11वीं शताब्दी की बनी भगवान शांतिनाथजी (16 फीट), भगवान अरहनाथ जी (10 फीट), भगवान कुंथुनाथजी (10 फीट) की खड्गासन पत्थर की मूर्तियां यहां स्थापित हैं। ये मूर्तियां ब्रह्मचारी गुमानी लाल के स्वप्न में आती थीं। तब उन्होंने यहां खुदाई कराई और अतिशय कारी प्रतिमा प्राप्त हुई। आज वर्तमान में भी गांवों में खुदाई के दौरान मूर्तियां प्राप्त होती रहती हैं। मंदिर में ऐसी मूर्तियों के लिए विशेष संग्रहालय है। हाल ही में पता चला कि चतुर्थ काल में 14 मंदिर थे। इसके अलावा खजुराहो पैटर्न पर बने शिव हनुमान दुर्गा के ककनमठ मंदिर भी हैं। 9 जुलाई 2006 को खुदाई के दौरान शिव मंदिर में जैन मूर्ति मिली थी। वार्षिक मेला क्वार वादी दोज और जेठ वादी 14 निर्वाण दिवस पर लगता है। समवशरण और चौबीसी का भव्य मंदिर है। जबकि मानस्तंभ का निर्माण कार्य प्रगति पर है। नया कमल के आकार का मंदिर बन के तैयार हो चुका है, जो जल्द ही पंचकल्याणक प्रतिष्ठा होने के बाद दर्शन के लिए खोल दिया जाएगा। मंदिरों की संख्या: 05 है। बड़ी धर्मशाला, भोजनशाला है। जहां पर पूजा विधान करने और रुकने की उचित व्यवस्था है।</p>
<p><strong>इसलिए मनाया जाता है विश्व विरासत दिवस</strong></p>
<p>विश्व विरासत दिवस को मनाने का उद्देश्य ग्रह पर सांस्कृतिक विरासत और विविधता के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाना है। दुनिया भर में कई ऐसे ऐतिहासिक धरोहरें हैं, जो सालों से अपने अंदर न जाने कितने किस्से और कहानियों को संजोए हुए हैं। इन स्मारकों और स्थलों को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। ऐसी विरासतों को संभाले रखने के लिए ही विश्व विरासत दिवस मनाया जाता है। हर साल 18 अप्रैल को आयोजित होने वाला यह एक अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षण है। दुनिया भर में इस दिन को स्मारकों और विरासत स्थलों की यात्रा करके, सम्मेलनों में शामिल होकर, राउंड टेबल और समाचार पत्रों के लेखों समेत कई अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। यह दिन पहली बार 1983 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा मनाया गया था। यूनेस्को के 22वें आम सम्मेलन के दौरान इसे विश्व आयोजन के रूप में मान्यता मिली थी। भारत में कुल 3691 ऐसे स्मारक और स्थल हैं, जिसमें से 40 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के रूप में नामित हैं। इसमें ताजमहल, अजंता की गुफाएं और एलोरा की गुफाएं शामिल हैं। विश्व धरोहर स्थलों में असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जैसे प्राकृतिक स्थल भी शामिल हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/shantinath_atishay_kshetra_sihoniya_needs_protection/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विश्व विरासत दिवस विशेष : सिद्धाचल पर्वत पर प्राचीन जैन प्रतिमा और मंदिर को संरक्षित करने की जरूरत </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/need_to_preserve_ancient_jain_statue_and_temple_on_siddhachal_mountain/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/need_to_preserve_ancient_jain_statue_and_temple_on_siddhachal_mountain/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Apr 2023 11:11:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Ambah]]></category>
		<category><![CDATA[conservation]]></category>
		<category><![CDATA[Gwalior]]></category>
		<category><![CDATA[heritage श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain dharm]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[jain temple]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[siddhachal mountain]]></category>
		<category><![CDATA[world heritage day]]></category>
		<category><![CDATA[अंबाह]]></category>
		<category><![CDATA[ग्वालियर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[धरोहर]]></category>
		<category><![CDATA[विश्व विरासत दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[संरक्षण]]></category>
		<category><![CDATA[सिद्धाचल पर्वत]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=42448</guid>

					<description><![CDATA[आज भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुत सी ऐतिहासिक धरोहर और विरासत मौजूद हैं। जहां सरकार बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रही है। ग्वालियर के कोटेश्वर रोड किला पर सिद्धाचल पर्वत पर प्राचीन अनेक जैन प्रतिमा और मंदिर हैं। इसके भी संरक्षण की आवश्यकता है। पढ़िए ये विशेष रिपोर्ट&#8230; ग्वालियर। आज भी बहुत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आज भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुत सी ऐतिहासिक धरोहर और विरासत मौजूद हैं। जहां सरकार बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रही है। ग्वालियर के कोटेश्वर रोड किला पर सिद्धाचल पर्वत पर प्राचीन अनेक जैन प्रतिमा और मंदिर हैं। इसके भी संरक्षण की आवश्यकता है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए ये विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ग्वालियर।</strong> आज भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुत सी ऐतिहासिक धरोहर और विरासत मौजूद हैं। जहां सरकार बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रही है। जिस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। सौरभ जैन वरेह वाले अंबाह ने बताया कि ग्वालियर के कोटेश्वर रोड किला पर सिद्धाचल पर्वत पर प्राचीन अनेक जैन प्रतिमा और मंदिर हैं। जिस मे सिद्धाचल गुफाओं और गोपाचल रॉक कट स्मारकों (ग्वालियर) में सैकड़ों जैन मूर्तियों को इस्लामिक आक्रमणरियों ने नष्ट कर दिया।</p>
<p>अधिकांश जैन मूर्तियां 15 वी शताब्दी के दौरान की हैं, हालांकि कुछ सातवीं शताब्दी की भी हैं। 15 वी शताब्दी के दौरान नक्काशी की गई मूर्तियां तोमर राजा डूंगर सिंह और उनके बेटे कीर्ति सिंह के शासनकाल के दौरान बनाई गई थी। गोपाचल रॉक कट स्मारकों में जैन तीर्थंकरों की लगभग 1500 मूर्तियां हैं और सिद्धाचल गुफाओं में लगभग 31 जैन मंदिर हैं। गोपाचल रॉक कट स्मारकों को सिद्धाचल गुफाओं की तुलना में पहले दिनांकित किया गया है।</p>
<p>स्मारकों के पास पाए गए शिलालेख उन्हें 1440 से 1453 ईस्वी तक तोमर राजाओं को श्रेय देते हैं। 1527 के आसपास बाबर (मुगल सम्राट) ने उनके विनाश का आदेश दिया और इन दोनों स्मारकों को हटा दिया गया। विश्व की सबसे बड़ी अद्वितीय प्रतिमा 21 वे तीर्थंकर भगवान नमिनाथ की अतिशयकारी पद्मासन अवस्था में गुफा नंबर 2 में है। जिसकी अवगाहना लगभग 6 मीटर है।</p>
<p>सिद्धाचल पर्वत ग्वालियर रेलवे स्टेशन से लगभग 5 किलोमीटर दूर और गोपाचल पर्वत (भगवान पार्श्वनाथ की 42 फुट ऊंची प्रतिमा, एक पत्थर की बावडी) फूलबाग से लगभग 3 किलोमीटर दूर है। शिंदे की छावनी होते हुए उरवाई गेट से आगे ढोडापुर गेट की ओर कोटेश्वर रोड पर कोटेश्वर महादेव मंदिर के सामने से रास्ता हैं। उरवाई गेट पर भी त्रिशलागिरी पर्वत है। जिस पर माता त्रिशला और भगवान महावीर के पांच कल्याणक को दर्शाती प्रतिमाएं सहित अनेक तीर्थंकर प्रतिमाएं विराजमान हैं।</p>
<p><strong>इसलिए मनाया जाता है विश्व विरासत दिवस</strong></p>
<p>विश्व विरासत दिवस को मनाने का उद्देश्य ग्रह पर सांस्कृतिक विरासत और विविधता के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाना है। दुनिया भर में कई ऐसे ऐतिहासिक धरोहरें हैं, जो सालों से अपने अंदर न जाने कितने किस्से और कहानियों को संजोए हुए हैं। इन स्मारकों और स्थलों को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। ऐसी विरासतों को संभाले रखने के लिए ही विश्व विरासत दिवस मनाया जाता है। हर साल 18 अप्रैल को आयोजित होने वाला यह एक अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षण है।</p>
<p>दुनिया भर में इस दिन को स्मारकों और विरासत स्थलों की यात्रा करके, सम्मेलनों में शामिल होकर, राउंड टेबल और समाचार पत्रों के लेखों समेत कई अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। यह दिन पहली बार 1983 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा मनाया गया था। यूनेस्को के 22वें आम सम्मेलन के दौरान इसे विश्व आयोजन के रूप में मान्यता मिली थी।</p>
<p>भारत में कुल 3691 ऐसे स्मारक और स्थल हैं, जिसमें से 40 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के रूप में नामित हैं। इसमें ताजमहल, अजंता की गुफाएं और एलोरा की गुफाएं शामिल हैं। विश्व धरोहर स्थलों में असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जैसे प्राकृतिक स्थल भी शामिल हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/need_to_preserve_ancient_jain_statue_and_temple_on_siddhachal_mountain/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
