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	<title>World Environment Day &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>World Environment Day &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>विश्व पर्यावरण दिवस पर सुरसुंदरी शाखा ने किया पौधरोपण: शहीद राजेंद्र शुक्ल पार्क में लगाए पौधे, पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति का दिया संदेश </title>
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		<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 06:44:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय महिला परिषद की सुरसुंदरी शाखा द्वारा नगर स्थित शहीद राजेंद्र शुक्ल पार्क में पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व संभागीय अध्यक्ष रश्मि मलैया ने किया। इस दौरान महिलाओं ने छायादार एवं फलदार पौधे रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। महरौनी से पढ़िए, यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय महिला परिषद की सुरसुंदरी शाखा द्वारा नगर स्थित शहीद राजेंद्र शुक्ल पार्क में पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व संभागीय अध्यक्ष रश्मि मलैया ने किया। इस दौरान महिलाओं ने छायादार एवं फलदार पौधे रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। <span style="color: #ff0000">महरौनी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी।</strong> विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय महिला परिषद की सुरसुंदरी शाखा द्वारा नगर स्थित शहीद राजेंद्र शुक्ल पार्क में पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व संभागीय अध्यक्ष रश्मि मलैया ने किया। इस दौरान महिलाओं ने छायादार एवं फलदार पौधे रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाखा अध्यक्ष ममता सराफ ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए पौधरोपण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी नियमित देखभाल का संकल्प भी लेना चाहिए। शाखा की मीडिया प्रभारी राशि सिंघई ने विश्व पर्यावरण दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। वृक्ष पृथ्वी के फेफड़े हैं और इनके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित और हरित वातावरण देने के लिए अधिक से अधिक पौधरोपण किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>जल संरक्षण करें प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाएं </strong></p>
<p>इस अवसर पर अखिल भारतीय महिला परिषद द्वारा तंबाकू निषेध एवं नशामुक्ति अभियान भी चलाया गया। उपस्थित महिलाओं को तंबाकू, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट तथा अन्य नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई तथा स्वस्थ एवं नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प दिलाया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाने तथा पौधों की नियमित देखभाल करने की शपथ ली। साथ ही लोगों से प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने और पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील की गई। कार्यक्रम में सुनीता चौधरी, अमृता, मीनल, मंजू, प्रीति स्वामी, लवली शास्त्री, आरती बुखारिया, अंजली, राखी सिंघई, सुमी, संगीता, रिमी, प्राची, कीर्ति सहित सुरसुंदरी शाखा की अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।</p>
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		<title>टीएमयू में एक पेड़ मां के नाम, फ्रूट्स के पौधे रोपित : विश्व पर्यावरण दिवस पर मिशन लाइफ अभियान के तहत पौधरोपण </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 15:08:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में उप्र सरकार के निर्देशानुसार विश्व पर्यावरण दिवस पर मिशन लाइफ अभियान के तहत पौधरोपण किया गया। टीएमयू स्टूडेंट्स ने पौधे लगाकर देखभाल का संकल्प लिया। कैंपस में आम, जामुन, आंवला, अशोक आदि के पौधे लगाए। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230; मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में उत्तर प्रदेश सरकार [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में उप्र सरकार के निर्देशानुसार विश्व पर्यावरण दिवस पर मिशन लाइफ अभियान के तहत पौधरोपण किया गया। टीएमयू स्टूडेंट्स ने पौधे लगाकर देखभाल का संकल्प लिया। कैंपस में आम, जामुन, आंवला, अशोक आदि के पौधे लगाए। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद</strong>। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार विश्व पर्यावरण दिवस पर मिशन लाइफ एवं एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधरोपण हुआ। पौधरोपण अभियान के दौरान आम, जामुन, आंवला, अशोक सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। इस मौके पर टीएमयू के वीसी प्रो. वीके जैन ने बतौर मुख्य अतिथि और डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. एमपी सिंह ने पौधरोपण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। साथ ही स्टूडेंट्स ने भी पौधरोपण करके उनकी देखभाल का संकल्प लिया। वीसी प्रो. वीके जैन ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संदेश देते हुए कहा, वृक्ष केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और स्वस्थ भविष्य की आधारशिला भी हैं। प्रो. एमपी सिंह ने कहा, पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का विषय नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली जिम्मेदारी है। उन्होंने स्टूडेंट्स से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया। कार्यक्रम जरिए स्टूडेंट्स को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने और सतत विकास के लक्ष्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर एनवायरनमेंट क्लब के सलाहकार डॉ. विनोद कुमार जैन, उपेन्द्र मलिक, डॉ रंजीत सिंह, श्री दीपक मलिक के संग-संग विभिन्न कॉलेजों के एनएसएस कोऑर्डिनेटर्स, टीचर्स और स्टूडेंट्स मौजूद रहे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना-एनएसएस इकाई और एनवायरनमेंट क्लब की उल्लेखनीय भूमिका रही।</p>
<p><strong>पर्यावरण संरक्षण दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं</strong></p>
<p>तीर्थंकर महावीर कॉलेज ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज़ में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल, यूनिवर्सिटी के पूर्व लॉ एचओडी प्रो. सुभाष चंद्र गुप्ता ने पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी माता के सम्मान में कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए। उन्होंने कहा, वृक्ष पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रो. गुप्ता पर्यावरण संरक्षण एवम् वृक्षारोपण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर आयोजित विशेष व्याख्यान एवम् जागरूकता कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इस अवसर पर लॉ कॉलेज प्राचार्य प्रो. सुशील कुमार सिंह ने स्टुडेंट्स से पर्यावरण संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और वृक्षारोपण अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में डॉ. राकेश कुमार, श्री रविंदर शर्मा, डॉ. डालचंद गौतम के संग-संग लॉ कॉलेज के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।</p>
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		<title>शुद्ध हवा के लिए पर्यावरण की रक्षा जरूरी : आयिका सिद्धश्री मति माताजी के सानिध्य में मनाया विश्व पर्यावरण दिवस  </title>
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		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 11:55:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व पर्यावरण दिवस पर आर्यिका सिद्धश्री मति माताजी के सानिध्य में पर्यावरण गोष्ठी रखी गई। इसमें पर्यावरण का महत्व बताते हुए अधिक से अधिक पौधों का रोपण करने के लिए समाजजनों से आह्वान किया गया। नौगामा से पढ़िए, सुरेश चंद्र गांधी की रिपोर्ट&#8230; नौगामा। आचार्यश्री विभव सागर जी महाराज की शिष्या आयिका सिद्धश्री मति माताजी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विश्व पर्यावरण दिवस पर आर्यिका सिद्धश्री मति माताजी के सानिध्य में पर्यावरण गोष्ठी रखी गई। इसमें पर्यावरण का महत्व बताते हुए अधिक से अधिक पौधों का रोपण करने के लिए समाजजनों से आह्वान किया गया। <span style="color: #ff0000">नौगामा से पढ़िए, सुरेश चंद्र गांधी की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नौगामा।</strong> आचार्यश्री विभव सागर जी महाराज की शिष्या आयिका सिद्धश्री मति माताजी के सानिध्य में शुक्रवार को महावीर इंटरनेशनल शाखा की ओर से मुख्य अतिथि डॉ.निखिल जैन, महावीर इंटरनेशनल अध्यक्ष सुरेश गांधी, शाखा सचिव कैलाश पंचोली, भरत पंचोली, नितेश जैन के सानिध्य में विश्व पर्यावरण दिवस की संगोष्ठी हुई। इसमें उपस्थित सभी धर्म प्रेमी बंधुओं का महावीर इंटरनेशनल शाखा की ओर से दुपट्टा उड़ा कर स्वागत अभिनंदन किया गया। महावीर इंटरनेशनल की ओर से एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसमें संपूर्ण भारत वर्ष में पर्यावरण शुद्ध रहे, सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद हो, पर्यावरण शुद्ध रहे इसलिए अधिक से अधिक पौधरोपण करने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर सिद्धश्री माताजी ने कहा कि हमें पर्यावरण को शुद्ध रखना है। जिससे पृथ्वी पर विचरण करने वाले सभी जीव जंतु अपना जीवन अच्छी तरह से जी सकें एवं आजकल पर्यावरण खराब होने से आए दिन प्राकृतिक आपदा आ रही है। इसलिए हमें पर्यावरण का संतुलन बनाना है। हमारे गुरु आचार्यश्री विभव सागर जी महाराज ने वर्ष 2021 में नौगामा रहकर पर्यावरण संरक्षण की बात कही थी। पर्यावरण संरक्षण की रचनाएं लिखी थी। वह पर्यावरण की रचनाएं आज इस पुस्तक के माध्यम से प्रकाशित की जा रही है। पर्यावरण को स्वच्छ बनाने के लिए माताजी ने अपने मुखारविंद से पर्यावरण की कविता के माध्यम से जन जागरण को जागने की बात कही।</p>
<p><strong>मोबाइल टावर की किरणों से पक्षियों के विलुप्त होने का खतरा </strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि महावीर इंटरनेशनल शाखा द्वारा सराहनीय कार्य किया जा रहे हैं। हमारी ओर से शाखा को बहुत-बहुत आशीर्वाद। इस अवसर पर डॉ. निखिल जैन ने कहा कि हमें पर्यावरण को शुद्ध बनाना है कल कारखाने के दूषित गैसों से वातावरण दूषित होता जा रहा है। मोबाइल टावर की किरणों से पक्षियों के विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। हमें इसे बचाने के लिए प्रयास करना है। कार्यक्रम में सभी बंधुओ से निवेदन किया गया कि हमें अपने जन्मदिन अपने वर्षगांठ या अन्य धार्मिक कार्य सामाजिक कार्यों पर एक पौधा धरती के नाम पर लगाना है। कार्यक्रम में चुन्नू मुन्नू गांधी, मौलिक, आशीष पंचोली, जैन पाठशाला की छात्रा में उपस्थित थे।</p>
<p><strong>सिंगल यूज़ प्लास्टिक को अलविदा कहें </strong></p>
<p>आज 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस है यह दिन हमें याद दिलाता है कि यह धरती हमारा इकलौता घर है और इसकी सुरक्षा करना हम सबकी ज़िम्मेदारी है। हर साल इस दिन की एक विशेष थीम होती है, जो पर्यावरण से जुड़ी किसी बड़ी चुनौती पर हमारा ध्यान खींचती है। आज के दिन हम छोटे-छोटे बदलावों से बड़ा योगदान दे सकते हैं। एक पौधा लगाना है। अगर जगह हो, तो आज एक नया पौधा ज़रूर लगाएं। प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करना, सिंगल यूज़ प्लास्टिक को अलविदा कहें और कपड़े के थैलों का इस्तेमाल करें। पानी और बिजली बचाना, ज़रूरत न होने पर नल और लाइटें बंद रखें। धरती हमारी ज़रूरतों को पूरा कर सकती है, आज इस मौके पर पर्यावरण के लिए कुछ खास करने का सोचा है।</p>
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		<title>5 जून विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष आलेख : पर्यावरण के प्रति प्राचीन भारतीय सांस्कृतिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 13:17:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आकाश की अनंतता, पर्वतों की निस्तब्धता, नदियों की कलध्वनि, वृक्षों की हरित छाया और वायु की जीवनदायिनी स्पर्श-स्मृति ने उसके भीतर यह अनुभूति अवश्य जगाई होगी कि वह इस सृष्टि का स्वामी नहीं, अपितु उसका एक अत्यंत छोटा सहभागी मात्र है। विश्व पर्यावरण दिवस पर पढ़िए, आज सुनील सुधाकर शास्त्री द्रोणगिरि सागर का यह विशेष [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आकाश की अनंतता, पर्वतों की निस्तब्धता, नदियों की कलध्वनि, वृक्षों की हरित छाया और वायु की जीवनदायिनी स्पर्श-स्मृति ने उसके भीतर यह अनुभूति अवश्य जगाई होगी कि वह इस सृष्टि का स्वामी नहीं, अपितु उसका एक अत्यंत छोटा सहभागी मात्र है। <span style="color: #ff0000">विश्व पर्यावरण दिवस पर पढ़िए, आज सुनील सुधाकर शास्त्री द्रोणगिरि सागर का यह विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>मनुष्य ने जब पहली बार पृथ्वी पर आँखें खोली होंगी, तब उसने स्वयं को प्रकृति की विराट गोद में पाया होगा। आकाश की अनंतता, पर्वतों की निस्तब्धता, नदियों की कलध्वनि, वृक्षों की हरित छाया और वायु की जीवनदायिनी स्पर्श-स्मृति ने उसके भीतर यह अनुभूति अवश्य जगाई होगी कि वह इस सृष्टि का स्वामी नहीं, अपितु उसका एक अत्यंत छोटा सहभागी मात्र है। भारतीय संस्कृति का समूचा आध्यात्मिक चिंतन इसी विनम्र अनुभूति से जन्म लेता है। यहाँ प्रकृति केवल भौतिक संसाधन नहीं रही; वह संवेदना, श्रद्धा और सह-अस्तित्व की जीवंत अभिव्यक्ति रही है।</p>
<p>आज जब पृथ्वी का हृदय प्रदूषण से आहत है, नदियाँ विषाक्त हो रही हैं, वनों का हरापन मशीनों के शोर में विलीन होता जा रहा है, वायु जीवनदायिनी के स्थान पर रोगवाहिनी बनती जा रही है और मनुष्य अपनी ही सभ्यता के धुएँ में भविष्य खोजने को विवश है, तब यह प्रश्न अत्यंत प्रासंगिक हो उठता है कि क्या आधुनिकता की अंधी दौड़ में हमने अपनी सांस्कृतिक दृष्टि खो दी है? क्या विकास के नाम पर हमने उस प्रकृति को ही नष्ट करना आरंभ कर दिया है, जिसके बिना हमारा अस्तित्व असंभव है?</p>
<p>प्राचीन भारतीय संस्कृति का सबसे अद्भुत पक्ष यह रहा कि उसने प्रकृति को उपभोग का विषय नहीं, बल्कि उपासना का विषय बनाया। यही कारण है कि यहाँ पृथ्वी माता है, गंगा केवल नदी नहीं बल्कि जीवनधारा है, वटवृक्ष केवल वनस्पति नहीं बल्कि दीर्घायु चेतना का प्रतीक है, पर्वत देवत्व के प्रतीक हैं और अग्नि, वायु, जल तथा सूर्य तक पूजनीय माने गए। यह दृष्टिकोण किसी अंधविश्वास का परिणाम नहीं था; यह प्रकृति-संरक्षण का अत्यंत सूक्ष्म सांस्कृतिक विज्ञान था।</p>
<p><strong>ऋग्वेद का उद्घोष-</strong></p>
<p>“माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः”</p>
<p>अर्थात् पृथ्वी मेरी माता है और मैं उसका पुत्र हूँ-</p>
<p>मानव और प्रकृति के बीच के उसी आत्मीय संबंध को व्यक्त करता है, जिसमें शोषण की नहीं, संरक्षण की भावना निहित है। कोई भी पुत्र अपनी माता का विनाश नहीं कर सकता। भारतीय मनीषा ने संभवतः बहुत पहले समझ लिया था कि जिन वस्तुओं के प्रति मनुष्य के भीतर श्रद्धा होगी, उनका विनाश वह सहज रूप से नहीं करेगा। इसलिए नदियों को देवी कहा गया, वृक्षों को देववृक्ष कहा गया, पशुओं को पूज्य माना गया और वनस्पतियों तक में जीवन का स्पंदन अनुभव किया गया।</p>
<p>जैन दर्शन ने तो इस दृष्टि को और भी अधिक व्यापकता प्रदान की। उसने संसार के सूक्ष्मतम जीवन को भी अस्तित्व का सम्माननीय भाग माना। पृथ्वीकायिक, जलकायिक, वायुकायिक और वनस्पतिक जीवों की कल्पना केवल दार्शनिक प्रतीक नहीं थी, बल्कि वह जीवन के प्रत्येक रूप के प्रति संवेदनशीलता का अनुपम उदाहरण थी। जहाँ सामान्य दृष्टि केवल मिट्टी देखती है, वहाँ जैन दृष्टि असंख्य जीवों की उपस्थिति देखती है। जहाँ मनुष्य केवल जल देखता है, वहाँ चेतना की सूक्ष्म तरंगों का संसार विद्यमान माना जाता है। यही कारण है कि अहिंसा केवल सामाजिक व्यवहार का सिद्धांत नहीं रही, बल्कि पर्यावरणीय अनुशासन का भी आधार बनी।</p>
<p>भारतीय संस्कृति की “कण-कण में भगवान” की अवधारणा वस्तुतः पर्यावरणीय नैतिकता की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति है। यदि प्रत्येक कण में ईश्वर का अंश है, यदि प्रत्येक जीव में परमात्मा बनने की संभावना है, यदि प्रत्येक स्थान किसी न किसी तप, साधना या चेतना का स्पर्श पा चुका है, तब इस सृष्टि का कोई भी अंश तिरस्कार योग्य कैसे हो सकता है? तब वृक्ष काटना केवल लकड़ी काटना नहीं रह जाता, वह जीवन की संभावना पर प्रहार बन जाता है। नदी को प्रदूषित करना केवल जल को गंदा करना नहीं रह जाता, वह अस्तित्व की धारा को विषाक्त करना बन जाता है।</p>
<p>वर्तमान समय की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि मनुष्य ने प्रकृति के साथ संबंध खो दिया है। आधुनिक सभ्यता ने मनुष्य को सुविधाएँ तो दीं, किंतु संवेदनाएँ छीन लीं। मशीनों ने गति दी, परंतु मन की शांति छीन ली। महानगरों की चमक ने तारों भरे आकाश को निगल लिया। विकास की अट्टालिकाओं ने वृक्षों की हरियाली को विस्थापित कर दिया। परिणामस्वरूप पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, ऋतुओं का संतुलन बिगड़ रहा है, जैव विविधता समाप्त हो रही है और मनुष्य स्वयं अपने अस्तित्व के संकट के सामने खड़ा है।</p>
<p>आज आवश्यकता केवल पर्यावरणीय कानूनों की नहीं है; आवश्यकता पर्यावरणीय संस्कारों की है। कानून भय पैदा कर सकते हैं, किंतु संरक्षण का स्थायी भाव केवल संस्कृति ही उत्पन्न कर सकती है। यदि बचपन से ही मनुष्य को यह सिखाया जाए कि वृक्ष केवल ऑक्सीजन के स्रोत नहीं, बल्कि जीवन के सहचर हैं; नदियाँ केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि सभ्यता की धमनियाँ हैं; पृथ्वी केवल भूमि नहीं, बल्कि जीवनदायिनी माता हैकृतो पर्यावरण संरक्षण कोई सरकारी अभियान नहीं रहेगा, बल्कि जीवन का स्वाभाविक आचरण बन जाएगा।</p>
<p>समाधान बाहरी व्यवस्थाओं से पहले भीतर की चेतना में परिवर्तन से आरंभ होगा। हमें पुनः उस सांस्कृतिक दृष्टि की ओर लौटना होगा जहाँ प्रकृति के प्रति श्रद्धा थी। वृक्षारोपण केवल औपचारिक कार्यक्रम न रहे, बल्कि जीवन का उत्सव बने। जल संरक्षण केवल नारा न रहे, बल्कि सामाजिक अनुशासन बने। धार्मिक अनुष्ठानों को भी पर्यावरण-सम्मत स्वरूप दिया जाए। नदियों को श्रद्धा से पूजने के साथ-साथ उन्हें प्रदूषण से मुक्त रखना भी धार्मिक कर्तव्य माना जाए। नगरों के विस्तार के साथ-साथ हरित क्षेत्र अनिवार्य हों। विद्यालयों में पर्यावरण केवल विषय न रहे, बल्कि संस्कार बने।</p>
<p>यह भी आवश्यक है कि हम उपभोग की अंधी संस्कृति से बाहर निकलें। प्रकृति की सबसे बड़ी शत्रु मनुष्य की अतृप्त इच्छाएँ हैं। भारतीय दर्शन का अपरिग्रह सिद्धांत आज के पर्यावरण संकट का अत्यंत प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है। जितनी आवश्यकता हो उतना ही उपभोग, जितना चाहिए उतना ही संग्रह और जितना संभव हो उतना संरक्षणकृयदि यह जीवनशैली बन जाए तो पृथ्वी पर पड़ने वाला असंतुलित दबाव स्वतः कम हो सकता है।</p>
<p>विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं होना चाहिए; यह आत्ममंथन का दिवस होना चाहिए। यह दिन हमें स्मरण कराए कि यदि पृथ्वी सुरक्षित नहीं रहेगी तो कोई भी प्रगति अर्थपूर्ण नहीं रह जाएगी। मानव सभ्यता का भविष्य तकनीकी चमत्कारों से अधिक प्रकृति के संतुलन पर निर्भर है। हमें यह समझना होगा कि पृथ्वी हमारे पूर्वजों की संपत्ति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है, जिसे हमने केवल कुछ समय के लिए संरक्षण हेतु प्राप्त किया है।</p>
<p>भारतीय संस्कृति की प्राचीन दृष्टि आज भी हमें यही सिखाती है कि प्रकृति पर अधिकार नहीं, उसके साथ सह-अस्तित्व ही मानवता का वास्तविक पथ है। जब मनुष्य पुनः यह अनुभव करने लगेगा कि वायु में जीवन का स्पर्श है, जल में चेतना की धारा है, वृक्षों में मौन करुणा है और पृथ्वी के प्रत्येक कण में दिव्यता का अंश विद्यमान है, तभी पर्यावरण संरक्षण केवल नीतियों का विषय नहीं रहेगा, बल्कि मानव हृदय की सहज संवेदना बन जाएगा।</p>
<p>और संभवतः उसी दिन यह पृथ्वी फिर से साँस ले।</p>
<p>पंच भूतों में समाहित, सृष्टि का नव गान है,</p>
<p>चहचहाते नभचरों में, शांति स्वर की तन है।</p>
<p>नदी,पर्वत,पेड़,सगर, जीव,सब सहचर हमारे,</p>
<p>समन्वित हो रहे सारे, आज यह धरती पुकारे।।</p>
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		<title>5 जून विश्व पर्यावरण दिवस अब जलवायु के लिए : जलवायु परिवर्तन भविष्य की नहीं बल्कि वर्तमान की चुनौती  </title>
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		<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 05:01:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व पर्यावरण दिवस प्रत्येक वर्ष 5 जून को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आयोजित स्टॉकहोम सम्मेलन के बाद हुई थी। वर्ष 1973 से यह दिवस नियमित रूप से मनाया जाने लगा। विश्व पर्यावरण दिवस पर आज पढ़िए, डॉ. यतीश जैन का यह विशेष आलेख&#8230; विश्व पर्यावरण दिवस प्रत्येक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विश्व पर्यावरण दिवस प्रत्येक वर्ष 5 जून को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आयोजित स्टॉकहोम सम्मेलन के बाद हुई थी। वर्ष 1973 से यह दिवस नियमित रूप से मनाया जाने लगा। <span style="color: #ff0000">विश्व पर्यावरण दिवस पर आज पढ़िए, डॉ. यतीश जैन का यह विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>विश्व पर्यावरण दिवस प्रत्येक वर्ष 5 जून को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आयोजित स्टॉकहोम सम्मेलन के बाद हुई थी। वर्ष 1973 से यह दिवस नियमित रूप से मनाया जाने लगा। इसका उद्देश्य विश्वभर में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए जनभागीदारी बढ़ाना तथा सरकारों, संस्थाओं और नागरिकों को पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के प्रति प्रेरित करना है। आज यह विश्व का सबसे बड़ा पर्यावरण जनजागरण अभियान बन चुका है जिसमें 150 से अधिक देश भाग लेते हैं।</p>
<p>विश्व पर्यावरण दिवस 2026 का वैश्विक केंद्र जलवायु परिवर्तन को बनाया गया है। वर्ष 2026 की थीम “नाउ फार क्लाइमेट&#8221; अर्थात “अब जलवायु के लिए” मानी जा रही है। इसका मूल संदेश यह है कि जलवायु परिवर्तन भविष्य की नहीं बल्कि वर्तमान की चुनौती है और अब तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। इस अभियान में यह बताया जा रहा है कि पृथ्वी लगातार संकेत दे रही है—बढ़ता तापमान, ग्लेशियरों का पिघलना, जंगलों में आग, समुद्र स्तर में वृद्धि, सूखा और बाढ़ जैसी घटनाएँ मानव सभ्यता के लिए चेतावनी हैं। इसलिए केवल चर्चा नहीं बल्कि त्वरित और सामूहिक कार्यवाही आवश्यक है। वर्ष 2026 के लिए मेजबान देश अजरबैजान (Azerbaijan) को बनाया गया है।</p>
<p>विश्व स्तर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अब केवल वृक्षारोपण या प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित प्रयास नहीं हो रहे, बल्कि “सतत विकास” की अवधारणा पर बल दिया जा रहा है। सतत विकास का अर्थ है कि वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति इस प्रकार करे कि भविष्य की पीढ़ियों के संसाधन प्रभावित न हों। इसी उद्देश्य से जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी, नवीकरणीय ऊर्जा, प्लास्टिक प्रदूषण नियंत्रण और जल संरक्षण पर वैश्विक अभियान चलाए जा रहे हैं।</p>
<p>भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश के लिए पर्यावरण संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। भारत में हिमालय, वन, नदियाँ, रेगिस्तान, समुद्री तट और जैव विविधता के विशाल क्षेत्र हैं। लेकिन बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, औद्योगिकीकरण तथा प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण पर्यावरणीय चुनौतियाँ भी तेजी से बढ़ी हैं। वायु प्रदूषण, जल संकट, प्लास्टिक कचरा, वन विनाश और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। यही कारण है कि भारत सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को राष्ट्रीय नीति और विकास मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।</p>
<p>भारत सरकार द्वारा “मिशन लाइफ” अर्थात Lifestyle for Environment अभियान प्रारंभ किया गया है। यह अभियान प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसका उद्देश्य लोगों की जीवनशैली को पर्यावरण अनुकूल बनाना है। इसमें जल बचाना, बिजली की बचत, प्लास्टिक का कम उपयोग, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण तथा पुनर्चक्रण जैसी आदतों को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह अभियान इस विचार पर आधारित है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों का कार्य नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।</p>
<p>भारत सरकार ने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान भी प्रारंभ किया है, जिसके अंतर्गत नागरिकों को अपनी माता के सम्मान में एक पौधा लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को भावनात्मक और सामाजिक आंदोलन का रूप दिया है। देशभर में लाखों पौधे लगाए जा रहे हैं और स्कूलों, पंचायतों तथा सामाजिक संस्थाओं को इससे जोड़ा गया है।</p>
<p>भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जलवायु नेतृत्व प्रदर्शित किया है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस की स्थापना भारत और फ्रांस के सहयोग से की गई। इसका उद्देश्य सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाना तथा जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना है। आज अनेक देश इस पहल से जुड़े हुए हैं। भारत ने वर्ष 2070 तक “नेट जीरो” कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य घोषित किया है। इसका अर्थ है कि जितना कार्बन उत्सर्जन होगा उतना ही अवशोषण या संतुलन भी किया जाएगा।</p>
<p>भारत सरकार द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा दिया जा रहा है। राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में विशाल सौर ऊर्जा परियोजनाएँ स्थापित की गई हैं। भारत विश्व के सबसे बड़े सौर ऊर्जा उत्पादक देशों में तेजी से उभर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी सोलर पंप और सौर ऊर्जा आधारित योजनाओं का विस्तार किया जा रहा है।</p>
<p>स्वच्छ भारत अभियान भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस अभियान के अंतर्गत खुले में शौच से मुक्ति, ठोस कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक अपशिष्ट नियंत्रण और स्वच्छता पर विशेष बल दिया गया है। शहरी क्षेत्रों में कचरे के पृथक्करण तथा पुनर्चक्रण को बढ़ावा दिया जा रहा है। नगर निकायों को “गार्बेज फ्री सिटी” बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।</p>
<p>भारत सरकार ने एकल उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्लास्टिक प्रदूषण आज विश्व की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। नदियों, समुद्रों और भूमि में प्लास्टिक कचरा पर्यावरण और जीव-जंतुओं के लिए खतरा बन चुका है। भारत में प्लास्टिक बैग, प्लास्टिक स्ट्रॉ, प्लास्टिक कटलरी और कई अन्य सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध लागू किया गया है। लोगों को कपड़े और जूट के बैग उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।</p>
<p>नमामि गंगे कार्यक्रम भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय परियोजना है। इसका उद्देश्य गंगा नदी की स्वच्छता और संरक्षण है। इसके अंतर्गत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, घाट विकास, जैव विविधता संरक्षण और नदी प्रदूषण नियंत्रण पर कार्य किए जा रहे हैं। गंगा के साथ-साथ अन्य नदियों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।</p>
<p>वन संरक्षण और जैव विविधता बचाने के लिए भी अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। भारत में प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट एलीफेंट तथा राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों का विस्तार किया गया है। बाघों की संख्या में वृद्धि भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है। भारत विश्व के उन देशों में है जहाँ जैव विविधता अत्यंत समृद्ध है। इसलिए वन्य जीवों और प्राकृतिक आवासों की रक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।</p>
<p>जल संरक्षण के क्षेत्र में “जल शक्ति अभियान”, “अटल भूजल योजना” तथा अमृत सरोवर जैसी योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। वर्षा जल संचयन, तालाब पुनर्जीवन, भू-जल संरक्षण तथा पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्निर्माण पर बल दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<p>पर्यावरण शिक्षा को भी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में महत्व दिया गया है। विद्यालयों और महाविद्यालयों में पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण पर्यावरण संबंधी मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप कर रहा है और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण सुनिश्चित कर रहा है।</p>
<p>भारत सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को भी बढ़ावा दे रही है ताकि पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम हो तथा वायु प्रदूषण नियंत्रित किया जा सके। फेम (FAME) योजना के अंतर्गत इलेक्ट्रिक वाहनों पर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। अनेक शहरों में इलेक्ट्रिक बसों और चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार हो रहा है।</p>
<p>विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के संदर्भ में नवाचार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आज पर्यावरण संरक्षण केवल पारंपरिक उपायों तक सीमित नहीं है, बल्कि विज्ञान और तकनीक के माध्यम से नए समाधान विकसित किए जा रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से जलवायु पूर्वानुमान, ड्रोन द्वारा वृक्षारोपण, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली, कार्बन कैप्चर तकनीक, जैविक पैकेजिंग और हरित भवन जैसी अवधारणाएँ तेजी से विकसित हो रही हैं। भारत में भी स्टार्टअप और वैज्ञानिक संस्थाएँ पर्यावरण अनुकूल तकनीकों पर कार्य कर रही हैं।</p>
<p>आज आवश्यकता इस बात की है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम न रहकर जन आंदोलन बने। यदि प्रत्येक नागरिक जल बचाए, बिजली बचाए, प्लास्टिक का उपयोग कम करे, वृक्ष लगाए और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करे तो पर्यावरण संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि पृथ्वी केवल मानव की नहीं बल्कि सभी जीवों की साझा धरोहर है। प्रकृति के बिना मानव जीवन संभव नहीं है। इसलिए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना ही मानव सभ्यता के सुरक्षित भविष्य का आधार है।</p>
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		<title>सन्मति स्कूल में रोपित किए 51 पौधे:  नीम और नारियल के पौधों के संरक्षण का संकल्प </title>
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		<pubDate>Thu, 05 Jun 2025 10:29:38 +0000</pubDate>
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<p><strong>विश्व पर्यावरण दिवस पर दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण माह मनाया जा रहा है। इंदौर रीजन ने पर्यावरण माह का शुभारंभ गुरुवार को महावीर कीर्ति स्तंभ पर मुनिश्री निष्पक्ष सागर जी एवं मुनि श्री निस्पृह सागर जी के मंगल सानिध्य में किया गया। गुरुवार को सन्मति स्कूल में प्रतीकात्मक 51 पौधों का रोपण किया गया। इनमें प्रमुख रूप से नीम और नारियल लगाए गए। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, सतीश जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> विश्व पर्यावरण दिवस पर दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण माह मनाया जा रहा है। इसके मद्देनजर इंदौर रीजन ने पर्यावरण माह का शुभारंभ गुरुवार को महावीर कीर्ति स्तंभ पर मुनिश्री निष्पक्ष सागर जी एवं मुनि श्री निस्पृह सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में किया। इस श्रृंखला में गुरुवार को सन्मति स्कूल में 51 पौधों का रोपण प्रतीकात्मक किया गया। इनमें प्रमुख रूप से नीम और नारियल लगाए गए। राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोहर झांझरी, निवर्तमान अध्यक्ष राकेश विनायका, पूर्व अध्यक्ष टीके वेद, कमलेश कासलीवाल, सामाजिक संसद के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी, महावीर ट्रस्ट अध्यक्ष अमित कासलीवाल, रीजन अध्यक्ष प्रदीप चौधरी, कार्याध्यक्ष सुशील पांड्या, परामर्शदाता बाहुबली पांड्या, विपुल बांझल, सचिन जैन उद्योगपति, दिलीप पाटनी, राहुल जैन स्पोर्ट्स, मुकेश बाकलीवाल, संजय जैन अहिंसा द्वारा पर्यावरण माह का शुभारंभ किया गया। कार्यकम का संचालन रीजन सचिव संजय पापड़ीवाल ने किया। अतिथि सम्मान मयंक काला, रितेश जैन, अंशुल जैन, ऋषभ जैन ,जेके जैन फारेस्ट, सनत गंगवाल ,गिरीश रारा, डॉ.संगीता विनायका, सुनीता सेठी आदि ने किया। पूरे माह में पौधरोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त शहर जैसे पर्यावरण हितैषी कार्य किए जाएंगे।</p>
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		<title>देश के घर और देश के घाट, देश के वन और देश के बाट:  बालिका छात्रावास परिसर में किया पौधरोपण </title>
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		<pubDate>Thu, 05 Jun 2025 10:28:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महावीर इंटरनेशनल सिटी और बरगद संरक्षण फाउंडेशन खारिया के संयुक्त तत्वावधान में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग अधिकारी रजनीश चौधरी और टीम के सानिध्य में विश्व पर्यावरण दिवस पर गुरुवार सुबह 8 बजे सावित्रीबाई फूले अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास परिसर में पौधरोपण कार्यक्रम रखा गया। कुचामन सिटी से पढ़िए, यह खबर&#8230; कुचामनसिटी। महावीर इंटरनेशनल सिटी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>महावीर इंटरनेशनल सिटी और बरगद संरक्षण फाउंडेशन खारिया के संयुक्त तत्वावधान में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग अधिकारी रजनीश चौधरी और टीम के सानिध्य में विश्व पर्यावरण दिवस पर गुरुवार सुबह 8 बजे सावित्रीबाई फूले अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास परिसर में पौधरोपण कार्यक्रम रखा गया।<span style="color: #ff0000"> कुचामन सिटी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुचामनसिटी।</strong> महावीर इंटरनेशनल सिटी और बरगद संरक्षण फाउंडेशन खारिया के संयुक्त तत्वाधान में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग अधिकारी रजनीश चौधरी और टीम के सानिध्य में विश्व पर्यावरण दिवस पर गुरुवार सुबह 8 बजे सावित्रीबाई फूले अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास परिसर में पौधरोपण कार्यक्रम रखा गया। राष्ट्र कवि रविंद्रनाथ ठाकुर की इन पंक्तियों ‘देश के घर और देश के घाट, देश के वन और देश के बाट’ तथा आओ अपना फर्ज निभाएं प्रकृति का कुछ कर्ज चुकाएं, पेड़ लगाओ जीवन बचाओ, जल ही जीवन है जल है तो कल है’ को सार्थक करते हुए पौधरोपण किया गया।</p>
<p><strong>इन्होंने कार्यक्रम में हिस्सा ले किया जनजागरण </strong><br />
पर्यावरण जागृति अभियान में संस्था के वीर रामावतार गोयल, कोषाध्यक्ष वीर सुरेश जैन, वीर रतनलाल मेघवाल, वीर संदीप पांडया, वीर राजकुमार सोनी, अध्यापक वीरेंद्रसिंह, वीर दिनेश लाडना, वीर संपत बगड़िया, वीर आनंद आशा, वीर विकास नीतू, वीर आशीष दीप्ति, नेहा जैन बरगद संरक्षण फाउंडेशन, जीएसटी अधिकारी राजेश कुमावत, नेताराम कुमावत, डारू प्रदीप चौधरी, लायंन्स क्लब कुचामन फोर्ट के राम काबरा ने भाग लिया।</p>
<p><strong>बैनरों से दिया जागरूकता का संदेश </strong><br />
संस्था ने पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता के लिए ‘कपडे की थैली मेरी सहेली’ का उपयोग और सिंगल यूज प्लास्टिक का दैनिक जीवन में उपयोग कम कर स्टील और कांच के बर्तनों का उपयोग करने के संदेश लिखे बैनर जगह-जगह लगाकर जागरूकता का संदेश दिया। वीर सुभाष पहाडिया ने आभार माना।</p>
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		<title>प्रकृति में विकृति नहीं संस्कृति लाएं : विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को  </title>
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		<pubDate>Wed, 04 Jun 2025 14:28:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस है। इस दिन पूरे विश्व में पर्यावरण के रक्षार्थ संकल्प और धारणा के आयोजन होते हैं। पौधों से लेकर हर जीव मात्र की रक्षा की शपथ ली जाती है। इस दिवस विशेष पर कोटा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर&#8230; कोटा। हम विश्व पर्यावरण दिवस गुरुवार को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस है। इस दिन पूरे विश्व में पर्यावरण के रक्षार्थ संकल्प और धारणा के आयोजन होते हैं। पौधों से लेकर हर जीव मात्र की रक्षा की शपथ ली जाती है। <span style="color: #ff0000">इस दिवस विशेष पर कोटा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong> हम विश्व पर्यावरण दिवस गुरुवार को मनाएंगे। इस भरत के भारत में पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का सबसे बड़ा संदेश यदि दिया है श्री रामचरित्र मानस के अंतर्गत सीता माता ने। वनवास के दौरान सीता मां ने जब लव-कुश से कहा कि जंगल जाओ और लकड़ी लेकर आओ। लव-कुश गीली लड़कियां लेकर आ गए। सीता मां ने कहा कि जब सूखी लकड़ियों से काम चल सकता है तो फिर गीली लकड़ियां क्यों लाए हो। प्रकृति में जितने भी जीव चींटी से लेकर हाथी तक जो तुम्हें दिखाई दे रहे हैं। ये पर्वत, वन, उपवन नदी झरना प्रकृति की हर विरासत आपकी अपनी है। आपका परिवार है। उसको आपने ही परिवार की तरह से मानो। सृष्टि के समस्त जीव को आप अपना मानो।</p>
<p>सच ही कहा सीता माता जी ने कि दृष्टि अपनी बदलो सृष्टि बदल जाएगी। सबको अपना मानो सब आपके हो जाएंगे। खेल मात्र दृष्टि का सोच का चिंतन का है बस। जीवन में सदैव सोच सकारात्मक रखे। सोच के अनुसार ही जीवन बनता है। आज वर्तमान समय में जल जंगल और जमीन का भरपूर दोहन किया जा रहा है। धरती मां का जल स्तर नीचे जाता जा रहा। प्रकृति में विकृति पैदा नहीं करे। प्रकृति के साथ रहे। जब जब मानव ने प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया है उसकी विकृति के रूप में अतिवृष्टि, अनावृष्टि, सुनामी, ओलावृष्टि, भूकंप, कोरोना फ्लैग जैसी महामारियों का सामना करना पड़ा।जल है तो कल है पानी को प्रदूषण से बचाना है ।</p>
<p>महात्मा गांधी ने कहा था कि पृथ्वी हर व्यक्ति की आवश्यकता को पूरा कर सकती है परंतु लालच को नहीं। वेदों में कहा गया है कि पृथ्वी हमारी मां है हम उसके बेटे हैं।पर्यावरण संकट मात्र सरकारी योजनाओं से कदापि सम्भव नहीं होगा बल्कि जन जन के सहयोग से हो सम्भव हो पाएगा। आज जितने भी हाई वे है उन सब के आप पास आवासीय कॉलोनियों बनाई जा रही है।पर्यावरण हमें सांस लेने के लिए हवा, पीने के लिए पानी और खाने के लिए भोजन देता है। लेकिन औद्योगीकरण, वनों की कटाई और प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग के कारण पृथ्वी को नुकसान हो रहा है।</p>
<p>प्रदूषण बढ़ रहा है, वन्यजीव गायब हो रहे हैं और जलवायु तेजी से बदल रही है। परी और आवरण से मिलकर पर्यावरण शब्द बना है जिसका अर्थ होता है चारों ओर से घिरा हुआ। यानि आस पास। नदी, तालाब, भूमि, वायु, पौधे, पशु-पक्षी आदि पर्यावरण मिलकर पर्यावरण का निर्माण करते हैं। पर्यावरण मनुष्यों के साथ-साथ धरती के सभी जीवों के जीवन को प्रभावित करता है।यदि हमें पर्यावरण को संरक्षित करना है तो खूब पेड़ लगाए पानी बचाए कचरा न फैलाए । चारों ओर हरियाली हो जीवन की आन बान शान हरियाली है । प्रकृति में विकृति नहीं लाएं प्रकृति में संस्कृति लाएं।</p>
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		<title>विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2025 पर विशेष : पर्यावरण पुकारे&#8230;अब भी समय है! </title>
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		<pubDate>Wed, 04 Jun 2025 09:12:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व पर्यावरण दिवस हमें एक सतत और संतुलित जीवन जीने का संदेश देता है। इसकी शुरुआत हमारे घर की चौखट से होती है। यह एक स्मरण है – प्रकृति हमें जीवन देती है, अब हमारा कर्तव्य है कि हम उसे बचाएं। हमें आज ही यह प्रतिज्ञा लेनी चाहिए कि हम व्यक्तिगत, सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>विश्व पर्यावरण दिवस हमें एक सतत और संतुलित जीवन जीने का संदेश देता है। इसकी शुरुआत हमारे घर की चौखट से होती है। यह एक स्मरण है – प्रकृति हमें जीवन देती है, अब हमारा कर्तव्य है कि हम उसे बचाएं। हमें आज ही यह प्रतिज्ञा लेनी चाहिए कि हम व्यक्तिगत, सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण के रक्षक बनेंगे। <span style="color: #ff0000">इस अवसर पर पढ़िए डॉ. सुनील जैन &#8216;संचय&#8217; का विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। यह दिवस पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उसके संरक्षण हेतु सामूहिक प्रयासों को प्रेरित करने का एक वैश्विक अवसर है। 2025 में, जब हम इस दिवस को मना रहे हैं, तब पर्यावरणीय संकट पहले से कहीं अधिक गंभीर रूप ले चुका है। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जैव विविधता की क्षति और संसाधनों का अत्यधिक दोहन मानवता के सामने खड़ी प्रमुख चुनौतियाँ हैं। यह दिन हमें न केवल इन संकटों की याद दिलाता है, बल्कि यह भी प्रेरित करता है कि हम धरती माता की रक्षा के लिए कौन-कौन से कदम उठा सकते हैं।</p>
<p>इस वर्ष, विश्व पर्यावरण दिवस 2025 की थीम है: “विश्व स्तर पर प्लास्टिक प्रदूषण का अंत”। यह प्लास्टिक कचरे की गंभीर समस्या से निपटने का एक वैश्विक संकल्प है। हर साल 430 मिलियन टन से अधिक प्लास्टिक का उत्पादन होता है, जिसमें से लगभग दो-तिहाई केवल एक बार उपयोग के लिए होते हैं और शीघ्र ही कचरे में बदल जाते हैं। ये अल्पकालिक उपयोग की वस्तुएं नदियों और महासागरों को प्रदूषित करती हैं, हमारी खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर जाती हैं, और माइक्रोप्लास्टिक के रूप में हमारे शरीर में जमा हो जाती हैं।</p>
<p>5 जून – यह दिन हर वर्ष हमें प्रकृति के साथ हमारे संबंध की स्मृति कराता है। यह केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि चेतना का एक विस्तार है – एक सामूहिक प्रतिज्ञा कि हम अपनी धरती के साथ हिंसा नहीं, सह-अस्तित्व का संबंध बनाएँ।</p>
<p><strong>महात्मा गांधी ने कहा था:</strong></p>
<p>“पृथ्वी हर व्यक्ति की आवश्यकता को पूरा कर सकती है, लेकिन हर व्यक्ति के लालच को नहीं।”</p>
<p>ऋग्वेद में वर्णित है: &#8220;पृथ्वी हमारी माता है, हम इसके पुत्र हैं।&#8221;</p>
<p>थॉमस फुलर ने कहा: “हम तब तक पानी की कीमत नहीं समझते, जब तक कुआँ सूख न जाए।”</p>
<p>जैन दर्शन में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है: “पर्यावरण की रक्षा करना अहिंसा की सबसे सच्ची साधना है।”</p>
<p>वर्तमान पर्यावरणीय परिदृश्य: संकट की आहटहम जिस तथाकथित विकास की दौड़ में शामिल हैं, वह कहीं न कहीं प्रकृति के विनाश से जुड़ी हुई है। उदाहरण स्वरूप: वनों की अंधाधुंध कटाई से वर्षा चक्र असंतुलित हो गया है। औद्योगीकरण और वाहन उत्सर्जन ने वायु को विषैला बना दिया है।</p>
<p>प्लास्टिक कचरा और रासायनिक अपशिष्टों ने नदियों और समुद्रों को दूषित कर दिया है।</p>
<p>तेज़ी से होते शहरीकरण ने भूमि उपयोग का संतुलन बिगाड़ दिया है।</p>
<p>परिणामस्वरूप – प्राकृतिक आपदाएँ, जल संकट, तापमान वृद्धि, जैव विविधता का विनाश और महामारी जैसी स्थितियाँ लगातार बढ़ रही हैं।</p>
<p><strong>एक काव्यांश में ये भाव कुछ यूँ व्यक्त होते हैं:</strong></p>
<p>नदियाँ भी अब बहते-बहते थक गईं,</p>
<p>जंगलों की चीखें भी अब चुप रह गईं।</p>
<p>कृत्रिम विकास की अंधी इस दौड़ में,</p>
<p>हम अपनी जड़ें ही खुद से काट गए हैं कहीं।।</p>
<p><strong> समाधान की दिशा में व्यावहारिक पहल</strong></p>
<p>पर्यावरणीय संकट का समाधान केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, जन-सहयोग से ही संभव है। प्रत्येक व्यक्ति निम्नलिखित प्रयास कर सकता है:</p>
<p><strong>&#8211; व्यक्तिगत स्तर पर:</strong></p>
<p>घर के आसपास कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएँ और उसे जीवित रखें।</p>
<p>बिजली और पानी की बर्बादी को रोकें।</p>
<p>एकल-प्रयोग प्लास्टिक (Single-use plastic) से परहेज़ करें।</p>
<p>निजी वाहन का प्रयोग सीमित करें, कारपूल या सार्वजनिक परिवहन को अपनाएँ।</p>
<p><strong>➤ सामाजिक स्तर पर:</strong></p>
<p>सामूहिक सफाई अभियान और वृक्षारोपण कार्यक्रमों में भाग लें।</p>
<p>स्कूलों और समाज में पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा दें।</p>
<p>बच्चों को प्रकृति प्रेम की प्रेरणा दें – उन्हें “प्रकृति मित्र” बनाएँ।</p>
<p>प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के स्तर पर:</p>
<p>सौर, पवन और जैविक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ाएँ।</p>
<p>जल पुनर्चक्रण और वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करें।</p>
<p>पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों में निवेश करें।</p>
<p><strong>भारतीय ज्ञान परंपरा में पर्यावरण संरक्षण</strong></p>
<p>भारत की प्राचीन परंपरा में प्रकृति को ईश्वरतुल्य माना गया है – ‘वृक्ष देवता’ से लेकर ‘नदी माँ’ तक की अवधारणाएँ इसकी पुष्टि करती हैं।</p>
<p>वेदों, उपनिषदों, जैन और बौद्ध साहित्य में प्रकृति के प्रति करुणा और सह-अस्तित्व का स्पष्ट वर्णन मिलता है।</p>
<p>पंचमहाभूतों – पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु और आकाश – की पूजा भारतीय संस्कृति में होती आई है।</p>
<p>जैन दर्शन के अनुसार जल, वायु, पृथ्वी और वनस्पति सभी में जीवन है; इसलिए इनका दुरुपयोग पाप है।</p>
<p>संयमित और संतुलित जीवनशैली ही पर्यावरण की रक्षा कर सकती है।</p>
<p>&#8216;अहिंसा परमो धर्म:&#8217; का सिद्धांत हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ हिंसा नहीं, सहजीवन आवश्यक है।</p>
<p>तीर्थंकरों और बुद्ध ने वृक्षों के नीचे ध्यान कर प्रकृति के संरक्षण का संदेश दिया।</p>
<p>जैन मुनि अपने आचरण से पर्यावरण रक्षा के आदर्श प्रस्तुत करते हैं।</p>
<p>“परिग्रह परिमाण” की अवधारणा उपभोग को सीमित कर संतुलन की प्रेरणा देती है।</p>
<p><strong> धर्म और पर्यावरण – एक अभिन्न संबंध</strong></p>
<p>भारतीय पूजा-पद्धतियों में तुलसी, पीपल, नीम, गंगा जल आदि का धार्मिक महत्व प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।</p>
<p>जैन मुनियों की पदयात्रा, मौन, अपरिग्रह और भोजन में चयनशीलता – पर्यावरण संरक्षण के उत्कृष्ट उपाय हैं।</p>
<p>प्रेरक तथ्य (2025 के परिप्रेक्ष्य में)</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, हर वर्ष लगभग 10 मिलियन हेक्टेयर वन क्षेत्र नष्ट हो रहा है।</p>
<p>प्रति मिनट एक ट्रक प्लास्टिक समुद्र में गिराया जा रहा है।</p>
<p>वर्ष 2025 तक लगभग 2 अरब लोगों को स्वच्छ जल की कमी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>निष्कर्ष:</strong></p>
<p>अब नहीं, तो कभी नहीं।</p>
<p>पृथ्वी हमसे कुछ नहीं माँगती – वह केवल संरक्षण चाहती है। अब समय है कि हम अपनी प्राथमिकताओं को पुनः परिभाषित करें। प्रगति का अर्थ विनाश नहीं, सतत विकास है।</p>
<p>विश्व पर्यावरण दिवस हमें एक सतत और संतुलित जीवन जीने का संदेश देता है। इसकी शुरुआत हमारे घर की चौखट से होती है।</p>
<p>यह एक स्मरण है – प्रकृति हमें जीवन देती है, अब हमारा कर्तव्य है कि हम उसे बचाएँ।</p>
<p>हमें आज ही यह प्रतिज्ञा लेनी चाहिए कि हम व्यक्तिगत, सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण के रक्षक बनेंगे।</p>
<p>क्योंकि स्वस्थ पर्यावरण ही, स्वस्थ जीवन की कुंजी है।</p>
<p>विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक दिन नहीं, बल्कि एक संकल्प दिवस होना चाहिए।</p>
<p>&#8220;धरती है धरोहर, न इसे करो बर्बाद,</p>
<p>संरक्षण में ही है इसका असली संवाद।&#8221;</p>
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		<title>विश्व पर्यावरण दिवस पर 10 नीम के पौधे लगाए जाएंगे: मोक्ष धाम डडूका में महावीर इंटरनेशनल करेगा पौधारोपण  </title>
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		<pubDate>Tue, 03 Jun 2025 14:18:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महावीर इंटरनेशनल द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस पर 5 जून से मोक्ष धाम डडूका में 10 नीम के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। हर पौधे को महावीर इंटरनेशनल के तीन-तीन सदस्यों द्वारा गोद लेकर उन्हें पानी पिलाने, सुरक्षा देने और पौधे से पेड़ बनने तक तीन वर्ष तक देखभाल करने का संकल्प [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>महावीर इंटरनेशनल द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस पर 5 जून से मोक्ष धाम डडूका में 10 नीम के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। हर पौधे को महावीर इंटरनेशनल के तीन-तीन सदस्यों द्वारा गोद लेकर उन्हें पानी पिलाने, सुरक्षा देने और पौधे से पेड़ बनने तक तीन वर्ष तक देखभाल करने का संकल्प लिया जाएगा। <span style="color: #ff0000">डडूका से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>डडूका।</strong> महावीर इंटरनेशनल द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस पर 5 जून से मोक्ष धाम डडूका में 10नीम के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। हर पौधे को महावीर इंटरनेशनल के तीन-तीन सदस्यों द्वारा गोद लेकर उन्हें पानी पिलाने, सुरक्षा देने और पौधे से पेड़ बनने तक तीन वर्ष तक देखभाल करने का संकल्प लिया जाएगा। केंद्र की जून माह की मासिक बैठक जनार्दन राय नागर के निवास पर सुंदरलाल पटेल की अध्यक्षता, मणिलाल सूत्रधार के मुख्य आतिथ्य, गवर्निंग काउंसिल सदस्य अजीत कोठिया, उपाध्यक्ष रणजीत सिंह सोलंकी तथा जीवन राम पाटीदार के विशिष्ट आतिथ्य में आयोजित की गई। प्रारंभ में प्रार्थना भावना ‘दिन रात मेरी सब सुखी संसार हो’ से प्रारंभ बैठक में अजीत कोठिया ने गोल्डन जुबली आयोजनों और पर्यावरण संरक्षण सप्ताह पर सूचनाएं दी।</p>
<p>सुंदर लाल पटेल ने पर्यावरण सप्ताह आयोजनों में पौधरोपण और अन्य सभी व्यवस्थाओं के लिए राजेंद्र कोठिया एवं अशोक रावल को प्रभारी मनोनीत किया। उन्होंने आगामी समारोहों में सभी सदस्यों से शत प्रतिशत उपस्थित होने आग्रह किया। पेमजी पाटीदार ने अपने परिजनों की स्मृति में दो नीम पौधों का रोपण करने की घोषणा की। कोई भी आमजन निर्धारित व्यय एक हजार मात्र भेंटकर अपने परिजनों की स्मृति में ट्रीगार्ड सहित पौधरोपण की घोषणा मोक्षधाम के लिए कर सकता है।</p>
<p>बैठक को अशोक माली, अरविंद डेंडोर, सूरजमल अहारी, राजेंद्र कोठिया, मणिलाल सूत्रधार, सुंदरलाल पटेल, जीवन राम पाटीदार, अशोक रावल, अजीत कोठिया, जनार्दन राय नागर, रणजीतसिंह सोलंकी एवं विजय पाल गहलोत ने संबोधित किया। आगामी बैठक 2जुलाई को सूरजमल अहारी के निवास पर रखी गई है। संचालन अजीत कोठिया ने किया, आभार अध्यक्ष सुंदरलाल पटेल एवं सचिव सूरजमल अहारी ने व्यक्त किया।</p>
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