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	<title>Vishwa Shanti Mahayajna श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>श्री मुनिसुव्रत नाथ दिगंबर जैन मंदिर तुलसी नगर में आयोजन : भव्य सिद्धचक्र महा विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ शुरू  </title>
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		<pubDate>Fri, 26 Jul 2024 04:57:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री मुनिसव्रत नाथ दिगंबर जैन मंदिर, तुलसीनगर में मंदिर जी की स्थापना के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में वृहद सिद्धचक्र महा आराधना (विधान) का आयोजन 26 जुलाई से 3 अगस्त 2024 तक किया जा रहा है। पढ़िए सतीश जैन की रिपोर्ट..  इंदौर। श्री मुनिसव्रत नाथ दिगंबर जैन मंदिर, तुलसीनगर में मंदिर जी की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री मुनिसव्रत नाथ दिगंबर जैन मंदिर, तुलसीनगर में मंदिर जी की स्थापना के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में वृहद सिद्धचक्र महा आराधना (विधान) का आयोजन 26 जुलाई से 3 अगस्त 2024 तक किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सतीश जैन की रिपोर्ट..</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> इंदौर।</strong> श्री मुनिसव्रत नाथ दिगंबर जैन मंदिर, तुलसीनगर में मंदिर जी की स्थापना के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में वृहद सिद्धचक्र महा आराधना (विधान) का आयोजन 26 जुलाई से 3 अगस्त 2024 तक किया जा रहा है। दिगंबर जैन समाज, सामाजिक संसद , इंदौर के प्रचार प्रमुख सतीश जैन एवं ट्रस्ट कमेटी के महामंत्री श्री दिनेश कुमार जैन ने बताया कि विधान के सारे कार्यक्रम पूज्य गुरुवर मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विनम्र सागर जी ससंघ के आशीर्वाद से ब्रह्मचारी श्री नितिन भैया जी के निर्देशन में संपन्न होंगे! कार्यक्रम की शुरुआत में 26 जुलाई 2024 को इंद्र प्रतिष्ठा, सकलीकरण, ध्वजारोहण आदि क्रियाओं साथ होगी। सुबह 7:00 बजे घट यात्रा मंदिर जी से प्रारंभ होकर विभिन्न मार्गों से होती हुई पुनः मंदिर जी पहुंचेगी एवं विधान आरंभ होगा। श्री मुनिसुव्रत नाथ महिला मंडल एवं श्री ज्ञानोदय पाठशाला परिवार तुलसी नगर द्वारा रोजाना रात्रि में मंगल आरती के पश्चात धार्मिक,सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।</p>
<p>विधान के अंतिम दिवस 3 अगस्त 2024 को हवन एवं विश्व शांति महायज्ञ एवं भव्य रथ यात्रा संपन्न होगी। ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष आरके जैन एवं सभी ट्रस्टियों द्वारा समाज जनों से आयोजन के सभी कार्यक्रमों में उत्साह पूर्वक भाग लेने हेतु निवेदन किया गया है।</p>
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		<title>सिद्ध चक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन : इंद्र-इंद्राणियों ने समर्पित किए 256 अर्घ्य  </title>
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		<pubDate>Fri, 19 Jul 2024 06:33:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर शालीमार एंक्लेव, कमला नगर मे चल रहे सिद्ध चक्र महमण्डल विधान में छठे दिन श्री शान्तिनाथ भगवान जी का अभिषेक हुआ और आज 256 अर्घ्य समर्पित किये गए। विधान के अंतर्गत बाल. ब्र श्री सुनील भैया जी इंदौर के द्वारा बताया गया कि कर्म सहित संसारी जीव हम सभी शुभ अशुभ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर शालीमार एंक्लेव, कमला नगर मे चल रहे सिद्ध चक्र महमण्डल विधान में छठे दिन श्री शान्तिनाथ भगवान जी का अभिषेक हुआ और आज 256 अर्घ्य समर्पित किये गए। विधान के अंतर्गत बाल. ब्र श्री सुनील भैया जी इंदौर के द्वारा बताया गया कि कर्म सहित संसारी जीव हम सभी शुभ अशुभ कर्मो के अधीन है शुभ और अशुभ कर्म भी हमारे द्वारा उपार्जित किए जाते हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राहुल जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर शालीमार एंक्लेव, कमला नगर मे चल रहे सिद्ध चक्र महमण्डल विधान में छठे दिन श्री शान्तिनाथ भगवान जी का अभिषेक हुआ और आज 256 अर्घ्य समर्पित किये गए। विधान के अंतर्गत बाल. ब्र श्री सुनील भैया जी इंदौर के द्वारा बताया गया कि कर्म सहित संसारी जीव हम सभी शुभ अशुभ कर्मो के अधीन है शुभ और अशुभ कर्म भी हमारे द्वारा उपार्जित किए जाते हैं। हम जैसे जैसे भाव करते हैं वैसे-वैसे कर्मों का आगमन होता है। कर्मों का आना जाना हमारे भावों पर ही आधारित है। यदि हम घर में दुकान अच्छे भाव करते हैं तो वह हमारे अच्छे कर्मों को आने का सहारा बन जाते हैं और यदि हम मंदिर में गुरु चरणों में बैठकर भाव करते हैं तो वह भाव हमारे पाप कर्मों को इकत्रित करते है। जैसे कर्म हम करते उसका वेसा ही फल हमें भोगना पड़ता है।</p>
<p>आप किसी से डरे या नहीं पर कर्मों से हमेशा डरना क्योंकि कर्मों के दरबार में पक्षपात नहीं होता l कर्म कभी छोटे बड़े जा भेद नहीं करते जब कर्म उदय में आते है तो गरीब-अमीर को नहीं देखते l श्री राम भगवान के जब कर्म उदय में आये तो राजपाठ को छोड़ चौदह वर्ष का वनवास भोगना पड़ा। जंगल जंगल भटकना पड़ा। कितनी यातनाएं सहन करनी पड़ींl जैन धर्म में ऐसा आता है कि भगवान प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ प्रभु ने पूर्व भव में खेत में हल चलाते समय छह घड़ी के लिए बैलों के मुख में रस्सी बांध दी थी ताकि वह हरि घास खेत की फसल ना खा पाये जब कर्म बधा तो तीर्थंकर पर्याय में उन्हें भी छह महीने भोजन नसीब नहीं हुआ l</p>
<p>राजा श्रीपाल ने और सात सौ उप राजाओं ने एक मुनि का अनादर कर उनके शरीर पर थूक दिया था जब वह कर्म उदय में आया तो सात सौ साथियों के साथ श्रीपाल को शरीर में कुष्ठ निकल आया उन्होंने एक मुनि पर थूका था। सारी दुनिया ने उन सभी पर थूका। हमेशा अच्छे कर्म करते रहो भगवान पल पल आपका साथ देगा आपके साथ रहेगा l आज पूजन में सामूहिक रूप से सभी इंद्र इंद्राणियो ने अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त किया l</p>
<p>विधान मे सहयोगी जगदीश प्रसाद पीयूष कुमार अभिषेक कुमार, मुकेश रपरिया, राजू गोधा, संजीव गोधा, राजकुमार गुड्डू, मीडिया प्रभारी राहुल जैन आदि रहे l मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि कल श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शान्ति महायज्ञ सुबह अभिषेक एवं विधान एवं शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।</p>
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		<title>साधना और सेवा का पर्व चातुर्मास 20 जुलाई से शुरू : 10 किलोमीटर के दायरे से बाहर नहीं जा सकेंगे </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/chaturmas_the_festival_of_sadhna_and_seva_begins_on_july_20/</link>
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		<pubDate>Fri, 19 Jul 2024 06:24:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज में चातुर्मास 20 जुलाई से प्रारंभ होगा। इस दौरान जैन साधु-साध्वी चार माह तक एक ही स्थान पर निवास कर आत्मसाधना करेंगे और करवाएंगे। प्रवचनों और त्याग-तपस्याओं का वातावरण बनेगा। जैन संतों के लिए यह आगमिक विधान है कि वे चातुर्मास काल में चार कोस अर्थात् शहर के प्राचीन चुंगी नाका की सीमा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज में चातुर्मास 20 जुलाई से प्रारंभ होगा। इस दौरान जैन साधु-साध्वी चार माह तक एक ही स्थान पर निवास कर आत्मसाधना करेंगे और करवाएंगे। प्रवचनों और त्याग-तपस्याओं का वातावरण बनेगा। जैन संतों के लिए यह आगमिक विधान है कि वे चातुर्मास काल में चार कोस अर्थात् शहर के प्राचीन चुंगी नाका की सीमा से 10 किलोमीटर के दायरे से बाहर नहीं जा सकेंगे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>जैन समाज में चातुर्मास 20 जुलाई से प्रारंभ होगा। इस दौरान जैन साधु-साध्वी चार माह तक एक ही स्थान पर निवास कर आत्मसाधना करेंगे और करवाएंगे। प्रवचनों और त्याग-तपस्याओं का वातावरण बनेगा। जैन संतों के लिए यह आगमिक विधान है कि वे चातुर्मास काल में चार कोस अर्थात् शहर के प्राचीन चुंगी नाका की सीमा से 10 किलोमीटर के दायरे से बाहर नहीं जा सकेंगे। उल्लेखनीय है कि पक्खी पर्व होने के कारण चातुर्मास का शुभारंभ 20 जुलाई से है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-63644" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240719-WA0003.jpg" alt="" width="700" height="500" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240719-WA0003.jpg 700w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240719-WA0003-300x214.jpg 300w" sizes="(max-width: 700px) 100vw, 700px" />श्रमण डॉ पुष्पेंद्र ने बताया कि चातुर्मास के दौरान संस्कार, संस्कृति, सदाचार और संयम पालन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। श्रद्धालुओं एवं अनुयायियों को व्रत नियमों पर चलने के लिए प्रेरित किया जाता है। चातुर्मास की उपयोगिता इसलिए अहम है कि इस दौरान संत लोगों को नियमित प्रवचन और प्रेरणा देते हैं। इतिहासविज्ञ डॉ. दिलीप धींग ने बताया कि विभिन्न आध्यात्मिक साधनाओं से व्यक्तित्व विकास एवं सामाजिक परिवर्तन की दृष्टि से चातुर्मास का विशेष महत्व है। चातुर्मास में जैन समाज में आश्चर्यजनक तपस्याएं की जाती हैं।</p>
<p><strong>चातुर्मास के दौरान सादा व संतुलित भोजन किया जाता है</strong></p>
<p>खाने में सादा भोजन, गरिष्ठ भोजन का त्याग किया जाता है। जमीकंद (आलू, प्याज, लहसुन, अदरक) का उपयोग नहीं करते। बीज, पंचमी, अष्टमी, एकादशी, चतुर्दशी तिथि पर श्रावक-श्राविका हरी सब्जी-फलों का पूर्ण त्याग करते हैं। अधिकतर तौर पर बाजार की वस्तुओं का भी त्याग होता है। एकासन: दिन में एक स्थान पर बैठकर एक बार भोजन करते हैं। उपवास: एक दिन उपवास के दौरान खाना नहीं खाते, सिर्फ गर्म पानी का उपयोग करते हैं। अगले दिन नवकारशी आने के बाद पारणा करते हैं। आयंबिल: नमक-मिर्च-हल्दी-घी-तेल-मिर्च मसाले रहित भोजन करते हैं।</p>
<p><strong>चातुर्मास दौरान प्रमुख पर्व </strong></p>
<p>20 जुलाई को चातुर्मास प्रारंभ से लेकर जप, तप, त्याग, सामायिक, प्रतिक्रमण, संत दर्शन आदि के साथ ही श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर होता है। इसी क्रम में 21 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जाएगा। श्वेतांबर समुदाय तीनांे घटक इस बार सामूहिक रूप से 1 सितंबर को पर्यूषण पर्व, 8 सितंबर को संवत्सरी महापर्व की आराधना करेगा व दिगंबर समुदाय के दस लक्षण पर्व का शुभारंभ 8 सितंबर को होगा जिसका समापन 17 सितंबर अनंत चतुर्दशी के रूप में होगा। 9 अक्टूबर को नवपद आयंबिल ओली पर्व, 1 नवंबर को तीर्थंकर भगवान महावीर 2551वां निर्वाण कल्याणक, 2 नवंबर को गणधर गौतम प्रतिपदा व वीर निर्वाण संवत् 2551वां शुभारंभ, 6 नवंबर ज्ञान पंचमी व 15 नवंबर को चातुर्मास पूर्णाहुति होगी। चातुर्मास के चार माह के दौरान समय समय पर अनेक सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम, संतों की जयंतियां, पुण्यतिथियां आदि आयोजन होंगे।</p>
<p><strong>देश में कुल 18 हजार से अधिक साधु-साध्वी</strong></p>
<p>श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ की वर्ष 2024 की जारी सूची अनुसार इस वर्ष श्रमण संघ साधुओं के कुल 84 चातुर्मास है एवं श्रमण संघीय साध्वियों के कुल 280 चातुर्मास है। इस प्रकार कुल मिलाकर श्रमण संघीय चतुर्थ आचार्य डॉ श्री शिव मुनि जी के दिशा निर्देश व आज्ञा से श्रमण संघ के 364 चातुर्मास है। वहीं श्रमण संघीय में साधुवृन्द की संख्या 221 और साध्वीवृन्दों की संख्या 960 है। पूरे भारत में जैन धर्म की चारों संप्रदायों, स्थानकवासी &#8211; पाँच हजार, मंदिरमार्गी &#8211; ग्यारह हजार, तेरापंथ आठ सो व दिगंबर समुदाय 1600 साधु-साध्वियों की गणना होती है जोकि कुल संख्या लगभग अठारह हजार के ऊपर है।</p>
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		<title>सिद्ध चक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन :  प्रभु को पाने के लिए अपना अहंकार खोना पड़ेगा </title>
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		<pubDate>Thu, 18 Jul 2024 04:53:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर शालीमार एंक्लेव, कमला नगर में सिद्ध चक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के पांचवे दिन के श्री आदिनाथ भगवान जी का अभिषेक हुआ l सिद्ध चक्र विधान के अंतर्गत बाल ब्र. सुनील भैया जी (इंदौर) ने बताया कि सिद्धचक्र विधान में विशेष रूप से सिद्धों की आराधना की जाती [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर शालीमार एंक्लेव, कमला नगर में सिद्ध चक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के पांचवे दिन के श्री आदिनाथ भगवान जी का अभिषेक हुआ l सिद्ध चक्र विधान के अंतर्गत बाल ब्र. सुनील भैया जी (इंदौर) ने बताया कि सिद्धचक्र विधान में विशेष रूप से सिद्धों की आराधना की जाती है। सिद्ध भगवान आठ कर्मों से रहित होते हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>आगरा।</strong> श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर शालीमार एंक्लेव, कमला नगर में सिद्ध चक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के पांचवे दिन के श्री आदिनाथ भगवान जी का अभिषेक हुआ l सिद्ध चक्र विधान के अंतर्गत बाल ब्र. सुनील भैया जी (इंदौर) ने बताया कि सिद्धचक्र विधान में विशेष रूप से सिद्धों की आराधना की जाती है। सिद्ध भगवान आठ कर्मों से रहित होते हैं। संसारी जीव कर्मों के चक्र में फंसकर दुखी होता है और वह संसार में भटकता रहता है। प्रभु की आराधना प्रभु बनने के लिए की जाती है। भगवान की भक्ति कभी बेकार नहीं जाती। यदि नारकी जीव भी भगवान की भक्ति करता पशु पक्षी भी करते हैं देवता भी करते हैं किसकी भक्ति कभी निष्फल नहीं जाती।</p>
<p>भक्ति में श्रद्धा जयादा और प्रर्दशन कम होना चाहिये। श्रद्धा हनुमान जी की तरह होनी चाहिये। श्री राम के प्रति पूरा जीवन ही समर्पित कर दिया था। समर्पण का नाम ही श्रृद्धा है, कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। प्रभु को पाने के लिए अपना अहंकार खोना पड़ेगा। भक्ति करते रहो एक ना एक दिन प्रभु ज़रूर मिलेंगे l</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-63610" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/WhatsApp-Image-2024-07-18-at-9.43.15-AM.jpeg" alt="" width="1280" height="853" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/WhatsApp-Image-2024-07-18-at-9.43.15-AM.jpeg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/WhatsApp-Image-2024-07-18-at-9.43.15-AM-300x200.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/WhatsApp-Image-2024-07-18-at-9.43.15-AM-1024x682.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/WhatsApp-Image-2024-07-18-at-9.43.15-AM-768x512.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/WhatsApp-Image-2024-07-18-at-9.43.15-AM-414x276.jpeg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/WhatsApp-Image-2024-07-18-at-9.43.15-AM-470x313.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/WhatsApp-Image-2024-07-18-at-9.43.15-AM-640x426.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/WhatsApp-Image-2024-07-18-at-9.43.15-AM-130x86.jpeg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/WhatsApp-Image-2024-07-18-at-9.43.15-AM-187x124.jpeg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/WhatsApp-Image-2024-07-18-at-9.43.15-AM-990x660.jpeg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />आज विधान में 128 अर्घ्य चढ़ाये गए l ये अर्घ्य 128 अर्घ्य कर्म दोष रहित करने के लिए चढ़ाये जाते हैं l आज पूजन में सामूहिक रूप से सभी इंद्र-इंद्राणियों ने अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त किया l संगीतमय विधान में रामकुमार पार्टी भोपाल से पधारे संगीतकार ने साथी कलाकारों द्वारा संगीतमय पूजन और विधान कराया जा रहा है और वो अपनी मनमोहक आवाज से पूजन और विधान में इन्द्रों और इन्द्रणियों को झूमने पर मजबूर कर देते हैं।</p>
<p>विधान मे बैठने वाले जगदीश प्रसाद, अभिषेक जैन सुभाष जैन, दिनेश जैन, अमित जैन, मुकेश रपरिया, मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित सहित व्यवस्था समिति शालीमार सहयोग दे रही है l मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि कल श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शान्ति महायज्ञ सुबह 7 बजे से अभिषेक एवं विधान एवं शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे l</p>
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