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	<title>Uttar Pradesh latest news &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>Uttar Pradesh latest news &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जीवन में स्वच्छन्दता को नकारता है धर्म &#8211; मुनि सुधासागर जी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 29 Sep 2022 13:59:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री ने कहा, ऐसा कार्य नहीं करना जिसको करते समय धर्मगुरु से डर लगे ललितपुर। श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र क्षेत्रपाल मंदिर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि सुधासागर महाराज ने कहा कि धर्म, जीवन में स्वच्छन्दता को नकारता है। प्रकृति ने जो कुछ दिया है, वह देखने के लिए है। जो देखने लायक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुनि श्री ने कहा, ऐसा कार्य नहीं करना जिसको करते समय धर्मगुरु से डर लगे</strong></p>
<p><strong>ललितपुर।</strong> श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र क्षेत्रपाल मंदिर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि सुधासागर महाराज ने कहा कि धर्म, जीवन में स्वच्छन्दता को नकारता है। प्रकृति ने जो कुछ दिया है, वह देखने के लिए है। जो देखने लायक नहीं है उसे तुम लोग छिपकर देख रहे हो, आखिर किस लिए? किसका डर है अपने धर्मगुरु का या माता- पिता का? जीवन में वह कार्य नहीं करना जिसको करने से डर लगे और जिसे धर्म और गुरु रोकते हैं। माता-पिता का अभिशाप कभी नहीं लेना। जीवन में कानून से खिलवाड़ नहीं करना और न ही यह कहना कि हमें कानून का डर नहीं। जिसने कानून को तोड़ा, वह राष्टद्रोही है, उसे देश में रहने का अधिकार नहीं है। इसके अभिशाप से बचो। कई जन्मों के पुण्य से भारत जैसे देश में जन्म मिला है। इससे वंचित रह जाओगे और भारत में जन्म लेने के लिए तरस जाओगे।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-27446 size-full" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-29-at-7.28.05-PM-1.jpeg" alt="" width="727" height="343" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-29-at-7.28.05-PM-1.jpeg 727w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-29-at-7.28.05-PM-1-300x142.jpeg 300w" sizes="(max-width: 727px) 100vw, 727px" /><br />
मुनि श्री ने आगे कहा कि धर्म ही जीवन में श्रेष्ठ है। इसको समझो और अपने जीवन में उतारो। यह जो नर जन्म मिला है, उसे सार्थक करो। इसी में कल्याण है। उल्लेखनीय है कि मुनि श्री इन दिनों जीवन को श्रेष्ठ कर्मों के माध्यम से आनंदपूर्वक व्यतीत करने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। गुरुवार को प्रातःकाल मूलनायक अभिनंदनोदय अतिशय तीर्थ पर मूलनायक अभिनंदननाथ भगवान का अभिषेक भक्तजनों ने किया। इसके उपरान्त मुनि सुधासागर महाराज के मुखारविन्द शान्तिधारा पुर्ण्याजक परिवार द्वारा हुई। तदुपरान्त धर्मसभा का शुभारम्भ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के अनावरण के साथ श्रेष्ठीजनों ने किया। महिला मण्डल ने मुनि श्री को शास्त्र भेंट का पुर्ण्याजन किया। धर्मसभा का संचालन महामंत्री डा. अक्षय टडैया ने किया।</p>
<p>आज निर्यापक मुनि श्री सुधासागर महाराज को आहारदान का सौभाग्य वीरमति जैन भोले जैन धनगौल परिवार एवं मुनि पूज्य सागर महाराज को आहारदान राजीव जैन नायक परिवार, एलक धैर्यसागर महाराज को आहारदान नरेन्द्र जैन राज श्री परिवार एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज को आहार दान वीरेन्द्र जैन जिजयावन परिवार को मिला। सायंकाल जिज्ञासा समाधान के लिए श्रावकों ने मुनि श्री सुधासागर महाराज के सम्मुख अपनी जिज्ञासाएं की जिसका संचालन पं. आलोक मोदी द्वारा किया गया। इसके उपरान्त गुरुभक्ति एवं संगीतमय आरती पुर्ण्याजक परिवार के साथ श्रद्धालु कर लाभान्वित हो रहे हैं। मुनि श्री एवं संघस्थ मुनि पूज्यसागर महाराज, एलक धेर्यसागर महाराज क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज के प्रवास से इन दिनों अभिनंदनोदय तीर्थ में अपूर्व धर्म प्रभावना हो रही हेै। चातुर्मास की व्यवस्थाओं में दिगम्बर जैन पंचायत सहित स्वयंसेवी संस्थाएं- वीर व्यायाम शाला, स्याद्वाद बर्द्धमान सेवा संघ, वीर क्लव, जैन मिलन, महिला मण्डल आदि सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।</p>
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		<title>अर्हचक्र समवशरण विधान में महाआरती में झूमे श्रद्धालु</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/lalitpur-uttar-pradesh-4/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 29 Sep 2022 13:20:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ललितपुर. राजीव सिंघई। वर्णीनगर मडावरा में आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज के मंगल आशीर्वाद से अष्टम निर्यापक श्रमण मुनिश्री अभय सागर महाराज, श्रमण मुनिश्री प्रभात सागर महाराज, श्रवण मुनिश्री निरीह सागर महाराज के पावन अमृत वर्षायोग 2022 के अन्तर्गत 26 सितंबर से 5 अक्टूबर तक श्री महावीर विद्या विहार के विशाल परिसर में आयोजित हो रहे [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ललितपुर. राजीव सिंघई।</strong> वर्णीनगर मडावरा में आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज के मंगल आशीर्वाद से अष्टम निर्यापक श्रमण मुनिश्री अभय सागर महाराज, श्रमण मुनिश्री प्रभात सागर महाराज, श्रवण मुनिश्री निरीह सागर महाराज के पावन अमृत वर्षायोग 2022 के अन्तर्गत 26 सितंबर से 5 अक्टूबर तक श्री महावीर विद्या विहार के विशाल परिसर में आयोजित हो रहे अर्हचक्र चौबीसी समवशरण महामंडल विधान के चतुर्थ दिन श्रीजी का अभिषेक व शांतिधारा करने का सौभाग्य विमल कुमार, राकेश कुमार, अभिषेक मलैया परिवार, संतोष कुमार, आदीश बजाज परिवार, डॉ. बिरधीचंद्र जैन, डॉ. विकास जैन, डॉ. विशाल जैन, मुकेश जैन मामा सौंरया परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p>मुनिश्री ससंघ को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य महायज्ञ नायक निर्मल कुमार, दीपक जैन दुकान वाले परिवार को प्राप्त हुआ। चौबीस समवशरण अर्हचक्र महामंडल विधान आयोजन के दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए श्रमण मुनि अभय सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन के हर समय में भगवान की भक्ति करनी चाहिए। भक्ति में कठिनाइयां भी आती हैं, जिनसे विचलित हुए बिना प्रभु की आराधना करनी चाहिए। अतः जीवन में ईश्वर भक्ति को सर्वोपरि बनाएं। बताते चलें कि चौबीस समोशरण विधान ब्र. प्रदीप जैन सुयश अशोकनगर के निर्देशन में चल रहा है।</p>
<p>इंद्र-इंद्राणी भक्ति-भाव पूर्वक विधान में अर्घ्य समर्पित कर रहे हैं। विधान के उपरांत धर्मालुजन समोवशरण मंडप की परिक्रमा के माध्यम से अपने शुभ भावों का संचय कर रहे हैं। सायंकाल में मंगलमय महाआरती करने का सौभाग्य अखिल भारतीय दिगंबर जैन स्वस्ति महिला मंडल मडावरा को प्राप्त हुआ। रात्रि में सत्येंद्र शर्मा पार्टी कंठस्थ कला केंद्र दिल्ली द्वारा &#8220;हास्य से वैराग्य&#8221; और &#8220;सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र&#8221; नाटिका का मंचन किया गया। विगत दिनों अभिनंदनोदय अतिशय क्षेत्र ललितपुर में पाठशाला के राष्ट्रीय अधिवेशन में आचार्य विद्यासागर संस्कार वर्णी पाठशाला के सम्मानित होने पर ब्र. प्रदीप भैया सुयश ने पाठशाला समिति के अध्यक्ष डाॉ. बिरधीचंद्र जैन को सम्मान पत्र सौंपते हुए विशेष सम्मान किया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone wp-image-27430 size-large" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-29-at-6.35.15-PM-1024x678.jpeg" alt="" width="1024" height="678" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-29-at-6.35.15-PM-1024x678.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-29-at-6.35.15-PM-300x200.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-29-at-6.35.15-PM-768x508.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-29-at-6.35.15-PM-1536x1017.jpeg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-29-at-6.35.15-PM-130x86.jpeg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-29-at-6.35.15-PM-187x124.jpeg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-29-at-6.35.15-PM-990x655.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-29-at-6.35.15-PM-1320x874.jpeg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-29-at-6.35.15-PM.jpeg 1600w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p><strong>ये बने भोजन पुण्यार्जक </strong><br />
भोजन पुण्यार्जक बनने का सौभाग्य नगर गौरव चातुर्मास समिति के अध्यक्ष डॉ. बिरधीचंद्र, डॉ. विकास जैन, डॉ. विशाल जैन, मुकेश जैन मामा परिवार एवं ऋषभ विहार दिल्ली निवासी राजकुमार जैन, इंदु जैन, मनोज जैन, अजय जैन, रूबी, पायल जैन ने प्राप्त किया।</p>
<p><strong>इन संस्थाओं का मिल रहा विशेष सहयोग</strong><br />
पावन अमृत वर्षायोग समिति के महामंत्री डॉ. राकेश जैन सिंघई एवं मंत्री राजेश जैन सौंरया ने बताया कि आयोजन की व्यवस्थाओं में भोजन व्यवस्था समिति में जैन युवा जागृति सेवा समिति, श्री वर्णी व्यायाम शाला, विद्या आदर्श बालिका मंडल का विशेष सहयोग मिल रहा है। नवयुवक मंडल के सदस्यों सजल जैन वैद्य, साहिल जैन बजाज, हनी जैन द्ददी, वीरू जैन, अजय जैन अज्जू, पारस जैन रजौला, दीपक जैन बाजा, आकाश जैन बजाज, प्रवीण जैन रजौला, अमन जैन, आश्रय जैन, सुनील जैन, चेतन जैन ने मुनिश्री से रात्रि में पंडाल में विराजित श्रीजी की सुरक्षा करने के लिए विशेष सहयोग प्रदान करने हेतु आर्शीर्वाद प्राप्त किया।</p>
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		<title>गलती को कबूल कर प्रायश्चित अवश्य करें &#8211; मुनि सुधासागर जी महाराज</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/lalitpur-uttar-pradesh-3/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 29 Sep 2022 13:07:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[ललितपुर. राजीव सिंघई। धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए निर्यापक संत सुधासागर जी महाराज ने कहा कि संसार में तीन तरह के लोग हैं। एक वह जिसे सारी दुनिया बुरी लगती है, यहां तक कि भगवान और गुरु भी उसे बुरे ही लगते हैं। दूसरा, यह कहता है कि दुनिया तो ठीक है मगर मैं [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ललितपुर. राजीव सिंघई।</strong> धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए निर्यापक संत सुधासागर जी महाराज ने कहा कि संसार में तीन तरह के लोग हैं। एक वह जिसे सारी दुनिया बुरी लगती है, यहां तक कि भगवान और गुरु भी उसे बुरे ही लगते हैं। दूसरा, यह कहता है कि दुनिया तो ठीक है मगर मैं बुरा हूं। तीसरा यह मानता है कि दुनिया बहुत अच्छी है लेकिन मैं बुरे निमित्तों को पाते ही बुरा हो जाता हूं।</p>
<p>तब इनमें से सबसे खतरनाक को चुनें तो पहिला व्यक्ति ही बुरा लगता है। अब ऐसे व्यक्ति के कल्याण के विषय पर चर्चा करनी है। लोगों के मतानुसार तो ऐसे लोग कभी अच्छे नहीं बन सकते। मुनि श्री ने कहा कि जैन दर्शन के अनुसार बुराई में से भी अच्छी वस्तु निकाली जा सकती है। आचार्यो के अनुसार पहले व्यक्ति से यह पूछना चाहिए कि जो वह कह रहा है, वह ठीक है क्या यदि उसने हां कहा तो फिर उसके सुधरने की गुंजाइश हमारे पास से तो खत्म हो गयी।</p>
<p>अब उसके कल्याण की संभावना कर्म की कचहरी से संभव है। जैसे अपराधी कोतवाली में अपराध भले न कबूले मगर कचहरी में जाकर वह कबूल लेता है क्योंकि उसे विश्वास है कि शायद सजा कम मिले और शेष जीवन बच जाए। देश की विडम्बना देखिये जो लोग सरासर अपराध करते हैं, बड़े-बड़े नेताओं और प्रसिद्ध व्यक्तियों की सरेआम हत्या करते हैं, फिर भी उसका केस वकील लड़ता है।</p>
<p>इस बात पर चिंता व्यक्त करते हुए गुरुदेव ने कहा कि एक कानून ऐसा भी बनाया जाए, जिसमें अपराधी को बचाने वाले वकील को भी अपराधी के साथ जेल में भेजा जाए ताकि वकील किसी अपराधी का केस लड़े ही नहीं। उन्होंने कहा कि जानबूझकर अदालत को गुमराह करने वाले वकील को सजा इसलिये नहीं दी जाती क्योंकि कानून अंधा होता है। उसे तो केवल गवाह और तर्कों के आधार पर सजा दी जाती है, जिन्हें वकील जोड़कर लाता है।</p>
<p>दुनिया में अपराधी को शरण देने वाला सबसे बड़ा अपराधी कहा गया है, जबकि वकील एक अपराधी को बचाने के लिये पूरा प्रयास करता है, वर्षों समय निकाल देता है। न्यायालय में बैठा हुआ जज मुकदमे से बिल्कुल अनजान होता है और वकील के दिये तर्कों और साक्ष्यों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि कोतवाली एक ऐसा स्थान है, जहां पिटते ही अपराधी अपना अपराध कबूल कर लेते हैं। वह अपराधी सिद्ध हो गया लेकिन यदि कोई अपराधी अपने अपराध को स्वयं कबूल कर लेता है, सजा भोग रहा है तो उसे प्रायश्चित कहा जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>केवल त्याग में है सुख &#8211; मुनि श्री सुधासागर महाराज</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/sudhasagar-maharaj-lalitpur/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 Sep 2022 15:19:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ललितपुर. राजीव सिंघई। मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने दैनिक प्रवचनों के माध्यम से उपदेश देते हुए कहा कि संसार मे पूर्णता किसी को भी प्राप्त नही है बल्कि यूं कहे कि ऐसा कोई भी व्यक्ति नही है, जो यह कह सके कि सारे काम मेरे मन के हो रहे हैं और मुझे जिंदगी का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ललितपुर. राजीव सिंघई।</strong> मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने दैनिक प्रवचनों के माध्यम से उपदेश देते हुए कहा कि संसार मे पूर्णता किसी को भी प्राप्त नही है बल्कि यूं कहे कि ऐसा कोई भी व्यक्ति नही है, जो यह कह सके कि सारे काम मेरे मन के हो रहे हैं और मुझे जिंदगी का बहुत मजा आ रहा है।</p>
<p>यहां तक कि भगवान भी इसी गिनती में आएंगे क्योंकि उनकी जिंदगी में भी ऐसे कई काम हुए हैं, जो वे नहीं जानते थे। सीता का अपहरण और रावण से युद्ध एक उदाहरण देते हुए कहा कि एक व्यक्ति ज्योतिष पढ़ लौट कर घर जा रहा था। रास्ते में उसे नदी किनारे पैर के निशान दिखाई दिए, जिन्हें देखकर उसने कहा कि मुझे लगता है यह पैर के निशान जिस व्यक्ति के भी हैं, वह व्यक्ति इस संसार का सबसे बड़ा आदमी होगा।</p>
<p>बहुत बड़ा राजा चक्रवर्ती से कम नहीं होगा। वह व्यक्ति अपने ज्ञान की परीक्षा करने के लिये वह उस व्यक्ति की खोज करते-करते उस स्थान पर पहुंच गया जहां चरणों के निशान उसे ले जा रहे थे। जब वह वहां पहुंचा तो उसने माथा फोड़ लिया देखा तो वहां एक संत विराजमान थे। संत ने जब उसे ऐसी अवस्था में देखा तो उससे पूछा कि क्या हुआ।</p>
<p>उसने बताया, मैं ज्योतिषी बन कर लौटा हूं और आपके पैरों के निशान के आधार पर समझा हूं कि यह चक्रवर्ती के पैर हैं मगर मुझे लगता है कि मैं फेल हो गया हूं। तब संत बोले, मैं चक्रवर्ती ही हू मगर इतना सुख मुझे तब नहीं मिला, जब मेरे पास धन वैभव और बड़ा परिवार था, जितना अब मिल रहा है।</p>
<p>जैसे ही मैंने सब त्यागा और संततत्व धारण कर लिया, मैं बहुत सुखी हो गया। इसका मतलब तो यह है कि संसार में सुख केवल त्याग में है। दूसरे प्रसंग में गुरुदेव ने कहा कि एक महिला नास्तिक थी। अपने आस्तिक पति के कहने पर मन्दिर पहुंची और पति के साथ पूजन में खड़ी हो गयी।</p>
<p>जब उसने पूजन की पंक्तियों को पढ़ा तो घर आकर बोली, अब खाना और मेरी तो तुम्हें कोई आवश्यकता नही होनी चाहिये क्योंकि तुम पूजा कर रहे थे और उस पूजा में लिखा था, क्षुधा रोग विनाशनाय, काम वाण विनाशनाय, इसे गुरुदेव ने स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि आप मन्दिर में पूजा करते हैं और घर में रोटी खाते हैं तो दुनिया की नजर में /नास्तिक की नजर में परस्पर विरोधी कार्य कर रहे हैं।</p>
<p>समन्तभद्र आचार्य कहते हैं कि तुमने जो नियम ले लिया है और तुम्हारे दोस्त नियम से रिक्त हैं और अवसर आने पर एक साथ खड़े होकर तुम्हें चिढ़ा रहे हैं, हंसी उड़ा रहे हैं तो उस समय तुम्हारे नियम के प्रति तुम्हारे क्या भाव आ रहे हैं, बस वही तुम्हारे नियम का पुण्य है। यदि रात्रि भोजन का त्याग है और तुम्हें देखकर कोई दूसरा त्याग कर देता है तो तुम्हारे त्याग में अतिशय है। आज की दुनिया में ऐसे तो कई लोग हैं जो बुराई की ओर जल्दी झुक जाते हैं जबकि ऐसे लोगों की गिनती उंगलियों पर हैं, जिन्हें देखकर दूसरा व्यक्ति नियम ले सके।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि आज हमारी श्रद्धा बहुत कमजोर हो गयी है। हम दूसरों की बुराई देखकर अपनी अच्छाई को छोड़ने तैयार हो जाते हैं। जैसे रात में होटल पहुंचे, सभी खाना खा रहे थे सो हम भी खाने लगे जबकि त्याग था।</p>
<p>दोस्त झरने पर नहाने जा रहे थे तो हम भी चले गए जबकि वह समय अभिषेक करने जाने का था यानी अभिषेक छोड़ दिया। जब तक हम अपना श्रद्धा भाव मजबूत नहीं करेंगे, अपने नियम से च्युत होते रहेंगे, गुरु और भगवान को झूठा करार देते रहेंगे। अतिशय चमत्कार को झूठा कहने लगेंगे।</p>
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