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	<title>Uttam Satya Dharma &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>मुनि श्री गुरुदत्त सागर जी ने कहा सत्य आत्मा की अभिव्यक्ति : उत्तम सत्य धर्म पर मुनियों का मिला मार्गदर्शन और ज्ञान   </title>
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		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 16:08:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन सोमवार को उत्तम सत्य धर्म पर मुनिश्री गुरुदत्त सागर ने कहा कि सत्य का अर्थ है, हमेशा सच बोलना, सत्य के मार्ग पर चलना और ऐसे शब्दों से बचना जो दूसरों को ठेस पहुंचाएं। महरौनी। श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन सोमवार को उत्तम सत्य धर्म पर मुनिश्री गुरुदत्त सागर ने कहा कि सत्य का अर्थ है, हमेशा सच बोलना, सत्य के मार्ग पर चलना और ऐसे शब्दों से बचना जो दूसरों को ठेस पहुंचाएं।</strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी।</strong> श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन सोमवार को उत्तम सत्य धर्म पर हुई धर्मसभा में मुनिश्री गुरुदत्त सागर ने श्रद्धालुओं से कहा कि सत्य का अर्थ है, हमेशा सच बोलना, सत्य के मार्ग पर चलना और ऐसे शब्दों से बचना जो दूसरों को ठेस पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि जो साधक अपनी वाणी पर संयम रखते हुए सत्य धर्म का पालन करता है, उसे न केवल मानसिक शांति और आनंद मिलता है, बल्कि उसे समाज और परलोक दोनों में ही राजा हरिश्चंद्र के समान सम्मान प्राप्त होता है। सत्यनिष्ठ व्यक्ति कभी दुखी नहीं होता, जबकि झूठ बोलने वाले की सदा निंदा होती है।</p>
<p><strong>सत्य केवल शब्द नहीं</strong></p>
<p>मुनिश्री मेघदत्त सागरजी ने कहा कि सत्य केवल शब्द नहीं है, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति है। सत्य में वह शक्ति है जो मन को शांत करता है, संबंधों को मजबूत करता है और आत्मा को ईश्वर के समीप लाता है। उन्होंने बताया कि हमें कठोर वचनों से बचना चाहिए और प्रिय एवं सत्य वचन बोलना चाहिए। पराई निंदा और असत्य से सदैव वचन बचना आवश्यक है, क्योंकि जब विचार, वाणी और कर्म में एकरूपता आती है, तभी वास्तविक सत्य धर्म का पालन होता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>उपस्थित प्रमुख जनों में यह थे</strong></p>
<p>इस अवसर पर कोमलचंद सिंघई, अनिल मिठया, प्रमोद सिंघई, प्रकाशचंद्र सिंघई, प्रसन्न कुमार सिंघई, ऋषभ कठरया, पवन मोदी, ऋषभ सिंघई, प्रदीप चौधरी, प्रशांत सिंघई, प्रवीण सिंघई, हेमंत सिंघई, जिनेश्वर बुखारिया, शिखरचंद मिठया, सुनील मोदी, प्रमोद चौधरी, अजित कठरया, पुष्पेंद्र चौधरी, आशीष मोदी, अक्षय खजांची, अभिनंदन सिंघई, पवन जैन (पार्षद), सत्येंद्र सिंघई, ऋषभ मैगुंवा, अभिषेक सिंघई, महेंद्र बाबा, शैलेंद्र गुढ़ा, आमोद चौधरी, राकेश सतभैया, नीलेश सराफ, आकरष बड़कुल, राजू कठरया, रमेश भायजी, अंकुर कठरया, नमन लौंडुआ, अर्पित बड़कुल, वीर मिठया, अनुपम सिंघई, सुनील सतभैया, अनिल लौंडुआ, शानू, अजय बड़कुल आदि शामिल रहे।</p>
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		<title>दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म मनाया: सनावद के संत निलय में भक्ति और आराधना की बही धारा  </title>
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		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 10:51:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा जैन मंदिर एवं संत निलय में दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन सोमवार को उत्तम सत्य धर्म मनाया गया। जिसके तहत संत निलय में पंचामृत अभिषेक किया गया। मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा का उच्चारण किया गया। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा जैन मंदिर एवं संत निलय में दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन सोमवार को उत्तम सत्य धर्म मनाया गया। जिसके तहत संत निलय में पंचामृत अभिषेक किया गया। मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा का उच्चारण किया गया। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा जैन मंदिर एवं संत निलय में दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन सोमवार को उत्तम सत्य धर्म मनाया गया। जिसके तहत संत निलय में पंचामृत अभिषेक किया गया। मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा का उच्चारण किया गया। शांतिधारा करने का सौभाग्य निमिष, नितिन मूलचंद जैन परिवार को मिला। उसके बाद सामूहिक पूजन, दशलक्षण धर्म पूजन ,उत्तम सत्य धर्म पूजन कर मनाया। मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज ने उत्तम सत्य धर्म के बारे में कहा कि जीवन में असत्य कभी नहीं बोलना चाहिए।</p>
<p>बल्कि जो सत्य है, उसे धारण करना चाहिए। गीता में भी कहा गया है कि जब सत्य की असत्य से लड़ाई होगी तो सत्य अकेला खड़ा होगा और असत्य की फौज लंबी होगी क्योंकि, असत्य के पीछे मूर्खों का झुंड होगा। वक्त के साथ चलना कोई जरूरी नहीं, सच के साथ चलिए। एक दिन वक्त आपके साथ चलेगा। एक असत्य शब्द नर को नारकीय बना सकता है। हमें जीवन में असत्य नहीं बोलना चाहिए क्योंकि, झूठे व्यक्ति का कोई मोल नहीं होता है। उस पर कोई विश्वास नहीं करता है।</p>
<p><strong>अहिंसा सत्य को सौंदर्य प्रदान करती है</strong></p>
<p>मुनि विश्व सूर्य सागर जी महाराज ने कहा कि अहिंसा सत्य को सौंदर्य प्रदान करती है और सत्य अहिंसा की सुरक्षा करता है। अहिंसा रहित सत्य कुरूप है और सत्य रहित अहिंसा क्षणस्थायी है। सत्य बोलो और धर्म का आचरण करो। क्रोध, लोभ, भय और हँसी-मजाक आदि के कारण ही झूठ बोला जाता है। जहाँ न झूठ बोला जाता है, न ही झूठा व्यवहार किया जाता है वही लोकहित का साधक सत्यधर्म होता है। शाम को आचार्य भक्ति आरती भक्ति सभी समाजजनों के द्वारा की गई।</p>
<p><strong>प्रतिभागियों को पुरस्कार का किया वितरण </strong></p>
<p>एक दिन पूर्व मुनि श्री विश्वसुर्य सागर जी महाराज के द्वारा निरन्तर ज्ञान को अभिवृद्धि के लिए बड़े मंदिर जी में प्रतिदिन ज्ञानमयी क्लास छह ढाला, तत्वार्थ सूत्र की ली जा रही है। जिसके प्रथम भाग की परीक्षाएं ली गई थी। जिसके परिणाम मुनि श्री द्वारा बताए गए। जिसमें प्रतिभागियों को कुटुम्ब आश्रय समिति द्वारा पुरस्कार वितरित किए गए। अश्विनी चौधरी ने आभार माना।</p>
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		<title>भारतवर्षीय दिगंबर तीर्थ क्षेत्र कमेटी का हुआ विस्तार : भारतवर्षीय दिगंबर तीर्थ क्षेत्र कमेटी, सुनील जैन </title>
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		<pubDate>Fri, 13 Sep 2024 16:48:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ भारतवर्षीय दिगंबर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जम्बू प्रसाद प्रसाद जैन एवं दिल्ली अंचल के अध्यक्ष प्रद्युम्न जैन दिल्ली ने सुनील कुमार जैन मोना जनरेटर दिल्ली को भारतवर्षीय दिगंबर तीर्थ क्षेत्र कमेटी का महामंत्री नियुक्त किया है। पढ़िए मोहित जैन नंदू की रिपोर्ट   नई दिल्ली। भारतवर्षीय दिगंबर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> भारतवर्षीय दिगंबर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जम्बू प्रसाद प्रसाद जैन एवं दिल्ली अंचल के अध्यक्ष प्रद्युम्न जैन दिल्ली ने सुनील कुमार जैन मोना जनरेटर दिल्ली को भारतवर्षीय दिगंबर तीर्थ क्षेत्र कमेटी का महामंत्री नियुक्त किया है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मोहित जैन नंदू की रिपोर्ट </span></strong></p>
<hr />
<p><strong> नई दिल्ली।</strong> भारतवर्षीय दिगंबर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जम्बू प्रसाद प्रसाद जैन एवं दिल्ली अंचल के अध्यक्ष प्रद्युम्न जैन दिल्ली ने सुनील कुमार जैन मोना जनरेटर दिल्ली को भारतवर्षीय दिगंबर तीर्थ क्षेत्र कमेटी का महामंत्री नियुक्त किया है। सुनील जैन श्री दिगंबर जैसवाल जैन धर्मशाला महावीर जी के अध्यक्ष हैं वह समाज की धरोहरों को विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।</p>
<p>जैन अखिल भारतीय ज्ञानार्ष भक्त परिवार के भी अध्यक्ष हैं जिससे वो प्रतिवर्ष अखिल भारतीय आचार्य ज्ञानसागर प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन कर‌ समाज के होनहार बच्चों को आंगे बढ़ने की‌ प्रेरणा देते हैं। इस मौके पर जैन समाज ने उन्हें बधाई दी है।</p>
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		<title>14 सितंबर, हिन्दी दिवस पर प्रासंगिक आलेख : राष्ट्रभाषा हिंदी और मातृभाषा में शिक्षा समय की मांग &#8211; मुनि श्री अक्षयसागर जी महाराज </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/education_in_national_language_hindi_and_mother_tongue_is_the_need_of_the_hour_muni_shri_akshaysagar_maharaj/</link>
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		<pubDate>Fri, 13 Sep 2024 08:19:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रीय हिंदी दिवस का इतिहास 14 सितंबर, 1949 से शुरू होता है। इस दिन, भारत की संविधान सभा ने देवनागरी लिपि को आधिकारिक भाषाओं में से एक के रूप में अपनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। हिंदी दिवस को मनाने के पीछे एक कारण यह है कि देश में अंग्रेजी भाषा के बढ़ते चलन और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>राष्ट्रीय हिंदी दिवस का इतिहास 14 सितंबर, 1949 से शुरू होता है। इस दिन, भारत की संविधान सभा ने देवनागरी लिपि को आधिकारिक भाषाओं में से एक के रूप में अपनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। हिंदी दिवस को मनाने के पीछे एक कारण यह है कि देश में अंग्रेजी भाषा के बढ़ते चलन और हिंदी की उपेक्षा को रोकना है। आपको बता दें कि महात्मा गांधी ने हिंदी को जन-जन की भाषा भी कहा था।<span style="color: #ff0000"> पढ़िए मुनि श्री अक्षयसागर जी महाराज का विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>राष्ट्रीय हिंदी दिवस का इतिहास 14 सितंबर, 1949 से शुरू होता है। इस दिन, भारत की संविधान सभा ने देवनागरी लिपि को आधिकारिक भाषाओं में से एक के रूप में अपनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। हिंदी दिवस को मनाने के पीछे एक कारण यह है कि देश में अंग्रेजी भाषा के बढ़ते चलन और हिंदी की उपेक्षा को रोकना है। आपको बता दें कि महात्मा गांधी ने हिंदी को जन-जन की भाषा भी कहा था।</p>
<p>जॉर्ज ऑखेरू, प्रसिद्ध ब्रिटिश लेखक ने लिखा है- किसी राष्ट्र की संस्कृति और पहचान को नष्ट करने का सुनिश्चित तरीका है , उसकी भाषा को हीन बना देना। जयप्रकाश नारायण ने लिखा था कि- मेरा सुनिश्चित मत है कि विदेशी भाषा अनिवार्य रहते हमारे शिक्षार्थियों में स्वाभिमान का विकास नहीं हो सकता। स्वतंत्र भारत में अंग्रेजी को अनिवार्य रखना राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतिकूल है। सुप्रसिद्ध पत्रकार और लेखक डॉ वेदप्रताप वैदिक ने अपने एक लेख में लिखा कि- स्वतंत्र भारत में अंग्रेजी के एकाधिकार शाही को छोड़कर अन्य विदेशी भाषाओं का सम्मान किया होता तो हमारा व्यापार कम से कम दस गुना अधिक होता, देशी भाषा को योग्य सम्मान मिला होता तो अपना देश सही मायने में एक आधुनिक, शक्तिशाली, समृद्ध और सही-सही लोकशाही राष्ट्र बना रहता और आजतक जो नुकसान हुआ उससे कई गुना कम नुकसान हुआ होता।</p>
<p><strong>संस्कृति के मूल मूल्यों की पहचान कराती है हिंदी :</strong></p>
<p>हिंदी दिवस के मौके पर, हमें यह याद दिलाना चाहिए कि हमारी भाषा हमारी संस्कृति, गाथाएं, और इतिहास का प्रतीक है। हिंदी का सही ज्ञान हमें हमारे देश की धरोहर को समझने में मदद करता है और हमारे बच्चों को हमारे संस्कृति के मूल मूल्यों को सीखने में मदद करता है।</p>
<p><strong>मातृभाषा</strong> <strong>में हो शिक्षा :  </strong></p>
<p>जन्म भाषा में शिक्षा प्राप्त करना प्रत्येक नागरिक का जन्म सिद्ध अधिकार है। नवीनतम शोध में पाया गया है कि जिस भाषा में मां गर्भकाल में गर्भस्थ शिशु से बात करती है, जिस भाषा में बच्चा सोचता है, जिस भाषा में सपने देखता है , जिस भाषा में वह जन्म से संवाद करना सीखता है, यदि उसी भाषा में शैशव और किशोर अवस्था में बच्चे की शिक्षा हो तो उसका मानसिक विकास इतना अच्छा होता है कि वह उच्च शिक्षा के सभी विषय ज्यादा अच्छी तरह से ग्रहण करने में सक्षम होता है। तब उसे ज्ञान को रटना नहीं होता है। वह सही मायने में ज्ञान को ग्रहण करता है जो कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य है।</p>
<p>मातृभाषा से भिन्न भाषा को शिक्षा का माध्यम बनाने पर बच्चों की अधिकांश ऊर्जा और समय उस भाषा को सीखने में व्यय होता है। समय और शक्ति के अभाव में वह अन्य विषयों में स्वाभाविक रुचि नहीं ले पाता, परिणामस्वरूप थकान और तनाव हो जाता है, उसका स्वाभाविक और सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता है। इसलिए आज मातृभाषा में शिक्षा सबसे पहली आवश्यकता है।</p>
<p>किसी भी भाषा को शिक्षा के माध्यम के रूप में चयन के तीन आधार होते हैं /</p>
<p>1. जिस भाषा में विद्यार्थी सरलता से ज्ञान ग्रहण कर सके।</p>
<p>2. जिस भाषा में विद्यार्थी बारीकी के साथ वस्तु के यथार्थ स्वरूप का चिंतन कर सके।</p>
<p>3. जिस भाषा में विद्यार्थी अपने विचारों को सरलता से अभिव्यक्त कर सके।</p>
<p>हमें सोचना है कि यह तो केवल मातृभाषा में ही संभव है। विदेशी भाषा तो बिल्कुल भी इन मापदंडों पर खरी नहीं उतर सकती है।</p>
<p>भाषा की समृद्धता : हमारी राजभाषा हिंदी 770000 स्वयं के शब्दों से समृद्ध है। हिंदी सिर्फ़ एक भाषा नहीं है; यह एक सांस्कृतिक खजाना है जो हमें हमारी जड़ों और परंपराओं से जोड़ता है। यह एक ऐसी भाषा है जो सदियों से विकसित हुई है और जिसने विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के प्रभावों को आत्मसात किया है। यह एक ऐसी भाषा है जिसकी साहित्यिक विरासत समृद्ध और विविध है, जो प्राचीन महाकाव्यों और भक्ति कविताओं से लेकर आधुनिक उपन्यासों और उत्तर आधुनिक लेखन तक फैली हुई है। यह एक ऐसी भाषा है जो भारतीय लोगों के इतिहास, संस्कृति और मूल्यों और अन्य सभ्यताओं के साथ उनके संबंधों को दर्शाती है।</p>
<p>अंग्रेजी भाषा का विरोध क्यों?- अंग्रेजी या किसी भी भाषा का विरोध नहीं है पर वह शिक्षा का माध्यम न होकर एक विषय के रूप में पढ़ाई जानी चाहिए। जो भाषा मात्र तीन महीने में सीखी जा सकती है। उसके लिए बच्चे का बचपन छीन लेना कहाँ की बुद्धिमानी है। उसके लिए इतना बड़ा और इतना महंगा तंत्र खड़ा करने का अपव्यय क्यों? अपनी भाषा और संस्कृति की कीमत पर अंग्रेजी का विकास क्यों?</p>
<p>एक आधुनिक समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र की उन्नति में मातृभाषा की क्या भूमिका हो सकती है इसकी जानकारी हमारे नेताओं को आज भी नहीं है। उनकी अज्ञानता के कारण स्वतंत्रता के 76 वर्ष वर्ष उपरांत भी हमारी शिक्षण पद्धति, नौकरशाही , संचार माध्यम, न्यायालय और संसद में अंग्रेजी का ही वर्चस्व है। अंग्रेजी के वर्चस्व से देश का प्रचंड नुकसान हुआ है</p>
<p>परायी भाषा के पीछे घूमते रहने से देश महाशक्ति कैसे बन सकता है? आज तक जितने भी राष्ट्र महाशक्ति बने हैं वे मातृभाषा के द्वार खोले हुए हैं, उन्होंने एक नहीं अपितु अनेक विदेशी भाषाओं की खिड़कियां खोली हैं।</p>
<p>यह एक भ्रांत धारणा है कि अंग्रेजी भाषा के बिना तकनीकी विषय नहीं पढ़ाए जा सकते। चीन, जर्मनी , फ्रांस, सोवियत रूस में शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी न होकर वहां की मातृभाषाएं हैं। लेकिन तकनीकी विकास में किसी तरह से इंग्लैंड, अमेरिका से कम नहीं हैं। विश्व के ७७ देश कभी अंग्रजों के गुलाम थे, आज वे सभी स्वतंत्र हो चुके हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत सभी ने शिक्षा के माध्यम के रूप में अंग्रेजी को नहीं अपनी मातृभाषा को ही अपनाया है। तो क्या अंग्रेजी के अभाव में इन देशों में सब बेरोजगार ही रह जाते हैं?</p>
<p>जिस देश की युवा आबादी में विदेशी भाषा के माध्यम से किसी का नौकर हो जाने की ख्वाहिश हो, अपना व्यवसाय करके मालिक बनने की चाहत ही न हो, उद्यमशीलता ही न हो, तो क्या वह देश कभी वास्तविक विकास कर सकता है?</p>
<p>आज विश्व के सभी देश अपने देश में अंग्रेजी के प्रभाव कम करने के लिए प्रयत्नशील हैं लेकिन हम हैं अंग्रेजी के दीवाने, पाश्चात्य सभ्यता के नशे में डूबे हुए हैं, इस भाषा के साथ आने वाली गुलामी को नहीं देख पा रहे हैं और जानबूझकर इस भाषा के प्रभाव को बढ़ाते ही चले जा रहे हैं।</p>
<p>यदि आपके बच्चे अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ रहे हैं और स्कूल में आपस में हिंदी, मराठी, कन्नड़ में बातचीत करने पर उन्हें दंडित किया जाता है तो ऐसे दंड का जोरदार विरोध होना चाहिए। जब तक अगली पीढ़ी को शिक्षण संवाद में अंग्रेजी शब्दों के प्रयोग से पढ़ाते रहेंगे, यह समस्या खत्म न होगी। हिंदी और अन्य प्रांतीय भाषाओं को विकृत करने में अंग्रेजी का निर्णायक योगदान रहा है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-66150" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240913-WA0016.jpg" alt="" width="1000" height="1500" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240913-WA0016.jpg 1000w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240913-WA0016-200x300.jpg 200w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240913-WA0016-683x1024.jpg 683w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240913-WA0016-768x1152.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240913-WA0016-990x1485.jpg 990w" sizes="(max-width: 1000px) 100vw, 1000px" />जीवन निर्वाह नहीं, निर्माण हो शिक्षा का उद्देश्य :</strong></p>
<p>नई शिक्षा नीति में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने शिक्षा का ध्येय बताया कि- हित का सृजन और अहित का विसर्जन यही शिक्षा का ध्येय है, शिक्षा का उद्देश्य जीवन निर्वाह नहीं, जीवन निर्माण है। विद्या अर्थकारी नहीं, पर्मार्थकारी होना चाहिए। शिक्षा का कार्य संस्कारों के संरक्षण के साथ भविष्य का विकास करना है। ज्ञान भाषात्मक नहीं, भावनात्मक होना चाहिए।</p>
<p>हिंदी राष्ट्र की रीढ़ है : हिंदी हमारे राष्ट्र की रीढ़ है। हर नागरिक को अपनी दुकान नाम हिंदीं या मातृभाषा में लिखना चाहिए। अंकों के स्वरूप भी भारतीय हो। प्रत्येक कार्यालयों में हिंदी भाषा में ही कामकाज हो। संवाद भी हिंदी भाषा में हो।</p>
<p>हिंदी एक भाषा से कहीं बढ़कर है; यह भारत की समृद्ध और विविध संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह एक ऐसा पुल है जो अतीत और वर्तमान, स्थानीय और वैश्विक, प्राचीन और आधुनिक को जोड़ता है।</p>
<p>हिंदी न केवल एक राष्ट्रीय भाषा है, बल्कि एक रचनात्मक भाषा भी है जो लोगों को अपने विचारों, भावनाओं और सपनों को व्यक्त करने के लिए प्रेरित करती है। हिंदी भारत की भाषा है और दुनिया की भाषा है।</p>
<p><strong>हिन्दी जन -जन की भाषा :</strong></p>
<p>नई शिक्षा का माध्यम हिन्दी बना दिया जाय तो देश में हिंदी को नए आयाम स्थापित करते देर नहीं लगेगी। हिन्दी के प्रचार प्रसार में सरकारी व निजी शिक्षा संस्थाओं, गैर सरकारी संगठनों तथा आम जनता का सहयोग अपेक्षित होगा। हिन्दी दिवस मनाने से राष्ट्रभाषा संवृद्ध होगी। हिन्दी जन जन की भाषा बनेगी। और हिन्दी को अपना स्थान मिल सकेगा। देश में राष्ट्रीय भावना का संचार होगा। और देश निश्चित दिशा की ओर अग्रसर होगा।परन्तु देखने में आता है कि हर साल सितम्बर का महीना हिन्दी के नाम होता है और बाकि के 11 महीने अंग्रेजी को समर्पित। ऐसे में हिन्दी को जनभाषा के रूप में प्रतिष्ठापित किये जाने की जो कवायद है, वह आयोजनों तक ही रह गई है। स्वतंत्र राष्ट्र में राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय वेश तो प्रतीकात्मक रूप से राष्ट्र की पहचान हैं। वास्तव में राष्ट्रभाषा ही राष्ट्र की धमनियों में संचारित होने वाली राष्ट्रीयता की जीवंत धारा, रुधिर धारा है। राष्ट्रभाषा के बिना जन-जन का न तो पारस्परिक सम्पर्क संभव है और न देशवासियों में एकता की भावना ही पनप सकती है। विदेशी भाषा के माध्यम से स्वदेशी भावना का प्रचार आकाश कुसुम सूंघने का प्रयास करना है।</p>
<p>हिंदी के महत्व को समझकर हमें इसे बचाने और बढ़ावा देने का प्रतिबद्ध रहना चाहिए. हमें विद्यालयों, कार्यालयों, न्यायालयों और समाज में हिंदी का उचित प्रयोग करना चाहिए ताकि यह भाषा हमें हमेशा जोड़े रहे और हमारी राष्ट्रीय भाषा के रूप में आगे बढ़ सके.इसी तरह, हिंदी दिवस हमें हमारे देश के सांस्कृतिक धरोहर के प्रति समर्पित और जागरूक बनाता है, और हमें यह याद दिलाता है कि हमारी मातृभाषा हमारी गर्व और पहचान का प्रतीक है।</p>
<p>(लेखक प्रखर वाणी के धनी और संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य हैं। वर्तमान में मड़ावरा जिला ललितपुर में चातुर्मासरत हैं)</p>
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		<title>जैन मंदिरों में धार्मिक प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों का उत्साहपूर्वक प्रदर्शन : सत्य पर सारे तप निर्भर हैं, इससे ही पवित्र होती है वाणी &#8211; मुनि श्री अविचल सागर महाराज </title>
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					<description><![CDATA[सत्य ही जीवन का यथार्थ है जिस पल तुम अपने इस सत्य को जान लोगे तो तुम्हारा सारा भय समाप्त हो जाएगा। सत्य को जानते हुए भी असत्य में जीते हैं यदि जीते जी तुमने सत्य को जान लिया कि ये शरीर भी मेरा नहीं जो इस सत्य को जान लेते हैं वह ही सत्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सत्य ही जीवन का यथार्थ है जिस पल तुम अपने इस सत्य को जान लोगे तो तुम्हारा सारा भय समाप्त हो जाएगा। सत्य को जानते हुए भी असत्य में जीते हैं यदि जीते जी तुमने सत्य को जान लिया कि ये शरीर भी मेरा नहीं जो इस सत्य को जान लेते हैं वह ही सत्य को जी पाते हैं। सत्य को जो ध्याता है वही सत्य को पा सकता है। उक्त विचार अभिनंदनोदय तीर्थ में आचार्य विद्यासागर महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि अविचल सागर महाराज ने पर्युषण पर्व में सत्य धर्म पर व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघाई की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> सत्य ही जीवन का यथार्थ है जिस पल तुम अपने इस सत्य को जान लोगे तो तुम्हारा सारा भय समाप्त हो जाएगा। सत्य को जानते हुए भी असत्य में जीते हैं यदि जीते जी तुमने सत्य को जान लिया कि ये शरीर भी मेरा नहीं जो इस सत्य को जान लेते हैं वह ही सत्य को जी पाते हैं। सत्य को जो ध्याता है वही सत्य को पा सकता है। उक्त विचार अभिनंदनोदय तीर्थ में आचार्य विद्यासागर महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि अविचल सागर महाराज ने पर्युषण पर्व में सत्य धर्म पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नम्रता और प्रिय वचन मनुष्य के आभूषण हैं जिनके हृदय में सत्य का वास है उसके हृदय में परमात्मा का वास रहता है। सत्य को सहन करना बहुत कठिन है सत्य को समझने की जरूरत है सत्य की उपासना कर असत्य को त्यागना ही सत्य बताया।</p>
<p>धर्म सभा के प्रारम्भ में तत्वार्थसूत्र का वाचन नरेन्द्र जैन राजश्री द्वारा किया गया जबकि अर्ध श्रीमति सुलोचना पदमचंद जैन बानपुर परिवार द्वारा समर्पित किए गए। जैन धर्मालुओं के पयूषण पर्व नगर में के सानिध्य में शुरू हो गए हैं प्रातःकाल जैन मंदिरों में पूजन अर्चन विधान और श्री जी के अभिषेक शान्तिधारा कर श्रावक पुण्यजन कर रहे हैं। नगर के जैन अटामंदिर नया मंदिर, बडा मंदिर बहुवलि नगर नईवस्ती आदिनाथ मंदिर चन्द्रप्रभु मंदिर डोढाघाट, शान्तिनगर मदिर गांधीनगर इलाइट जैन मंदिर आदिनाथ सिविल लाइन, पार्श्वनाथ कालौनी, ज्ञानोदय कालौनी जैन मंदिर में इन दिनों धर्म की अपूर्व धर्मप्रभावना हो रही है जहां श्रावक पहुचकर पूजन अर्चन कर धर्मलाभ ले रहे हैं पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर में तत्वार्थसूत्र का वाचन अंकिता जैन बबीना द्वारा किया गया।</p>
<p>इसके उपरान्त सागानेर जयपुर के विद्वान पं. पंकज जैन शास्त्री ने कहा कि नीतिकारों ने सत्य को गले का आभूषण बताया सत्य से वाणी पवित्र होती है। सत्य पर सारे तप निर्भर हैं जिन्होंने सत्य का पालन किया वह इस संसार से पार हो गए सत्य ही संसार में श्रेष्ठ है। दिगम्बर जैन आदिनाथ मंदिर सिविल लाइन में ब्रह्मचारिणी सीमा दीदी ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि सत्य में जीने वाला व्यक्ति कभी दुखी नहीं होता वह जब सत्य को प्राप्त कर लेता है तो सब कुछ पा लेता है।</p>
<p>सायंकाल आरती के उपरान्त जैन अटामंदिर में भक्ति और भाग्य विषयक व्याख्यान प्रतियोगिता अंशिका जैन गुगरवारा के संयोजन में हुई जिसमें विजेता प्रतिभागी पुरुष्कृत किए गए। मंदिर परिसर में बच्चों द्वारा धार्मिक झांकियां लगाई गई जिनको देकर आवक उन्हें प्रोत्साहित कर रहे हैं। इन दिनों मंदिरों में धर्म की अपूर्व प्रभावना में सम्मलित होकर श्रावक पुण्यार्जन कर रहे हैं।</p>
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		<title>उत्तम सत्य धर्म पर दिए प्रवचन : जैन धर्म सत्यमेव जयते पर विश्वास करता है </title>
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					<description><![CDATA[ जैन धर्म का महापर्व 10 लक्षण पर्युषण महापर्व का पांचवा दिन उत्तम सत्य धर्म के रूप में मनाया गया, जिसमें आचार्य विद्यासागर जी की शिष्या ब्रह्मचारिणी गुणमाला दीदी व चंदा दीदी ने सत्य धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैन धर्म सत्यमेव जयते पर विश्वास करता है। सत्य की हमेशा जीत होती है उसे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> जैन धर्म का महापर्व 10 लक्षण पर्युषण महापर्व का पांचवा दिन उत्तम सत्य धर्म के रूप में मनाया गया, जिसमें आचार्य विद्यासागर जी की शिष्या ब्रह्मचारिणी गुणमाला दीदी व चंदा दीदी ने सत्य धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैन धर्म सत्यमेव जयते पर विश्वास करता है। सत्य की हमेशा जीत होती है उसे परेशान तो किया जा सकता है परंतु पराजित नहीं किया जा सकता। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राज कुमार अजमेरा, नविन जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोडरमा-झुमरीतिलैया</strong>। जैन धर्म का महापर्व 10 लक्षण पर्युषण महापर्व का पांचवा दिन उत्तम सत्य धर्म के रूप में मनाया गया, जिसमें आचार्य विद्यासागर जी की शिष्या ब्रह्मचारिणी गुणमाला दीदी व चंदा दीदी ने सत्य धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैन धर्म सत्यमेव जयते पर विश्वास करता है। सत्य की हमेशा जीत होती है उसे परेशान तो किया जा सकता है परंतु पराजित नहीं किया जा सकता। सत्य शब्दों में नहीं अनुभूति में होता है।</p>
<p>शब्दों के माध्यम से जो कहा जाता है वह पूर्ण सत्य नहीं होता, लेकिन जब तक व्यक्ति सत्य से परिचित नहीं होता तब तक अंदर के सत्य को भी नहीं पा सकता। आज व्यक्ति सत्य को भूलकर प्रत्येक समय प्रतिक्षण झूठ बोलता है मकान हो या दुकान, घर हो या ऑफिस, पत्नी हो या बच्चे, मित्र हो या पड़ोसी, सबके बीच में झूठा सत्य बोलता है। यही संस्कार बच्चों पर पड़ते हैं। सत्य की अनुभूति शब्द से नहीं सदाचरण से होती है अपने जीवन में परिवार में समाज में सत्य की आस्था पर ही अपने भविष्य को स्थापित किया जा सकता है।</p>
<p>आज शहर के दोनों मंदिरों में प्रातः विश्व शांति मत्रों से अभिषेक शांतिधारा किया गया, जिसमें बड़े मंदिर के मूल वेदी पर 1008 श्री पारसनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक बिनोद-संजय जैन गंगवाल, श्री विहार और प्रथम अभिषेक ललित-सिद्धार्थ जैन सेठी, दूसरी ओर से स्वर्ण झारी से शशि-रीता जैन सेठी</p>
<p>ओर 1008 आदिनाथ भगवान की वेदी में 1008 आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर प्रथम अभिषेक और शांतिधारा सुभाष-कुणाल ठोल्या एवं नया मंदिर जी मे 1008 शांतिनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक ओर शांतिधारा प्रदीप-पीयूष-राहुल जैन छाबडा परिवार को प्राप्त हुआ। तत्पश्चात विधान की पूजन की गई, जिसमें आज अजय-अमित गंगवाल के परिवर के द्वारा मंडप पर श्री फल चढ़ाया गया। मंदिर में ब्रह्मचारी दीदी के द्वारा जैन धर्म के सबसे बड़े ग्रंथ तत्त्वार्थसूत्र का वाचन दोनों मंदिर जी में हुआ। संध्या में भव्य भजन आरती का कार्यक्रम मंदिर में किया गया, रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम सब खेलो सब जीतो मनोरंजन कार्यक्रम हुआ, जिसमें समाज के सैकड़ों लोगों ने भाग लिया, विजेताओं को पुण्यार्जक परिवार एवं समाज के पदाधिकारी राज छाबड़ा, सुरेंद्र काला, सुशील छाबड़ा, कमल सेठी, नविन-बबिता जैन सेठी के द्वारा पुरस्कृत किया गया।</p>
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		<title>उत्तम धर्म पर दिए प्रवचन : सत्य प्रताड़ित हो सकता है मगर कभी पराजित नहीं हो सकता है- पवित्रमति माताजी </title>
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					<description><![CDATA[उत्तम सत्य धर्म के पांचवें दिन प्रातः 1008 आदिनाथ मंदिर की 1008 भगवान महावीर समवशरण सुखोदय तीर्थ नसिया जी में विशेष शांति धारा अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद चातुर्मास परिसर में सिंहासन पर विराजमान श्रीजी की प्रतिमा का अभिषेक शांति धारा पवित्रमति माताजी, करणमती माताजी, गरिमामति माताजी के सानिध्य में किया गया। पढ़िए सुरेश [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>उत्तम सत्य धर्म के पांचवें दिन प्रातः 1008 आदिनाथ मंदिर की 1008 भगवान महावीर समवशरण सुखोदय तीर्थ नसिया जी में विशेष शांति धारा अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद चातुर्मास परिसर में सिंहासन पर विराजमान श्रीजी की प्रतिमा का अभिषेक शांति धारा पवित्रमति माताजी, करणमती माताजी, गरिमामति माताजी के सानिध्य में किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सुरेश चंद्र गांधी की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नौगामा</strong>। उत्तम सत्य धर्म के पांचवें दिन प्रातः 1008 आदिनाथ मंदिर की 1008 भगवान महावीर समवशरण सुखोदय तीर्थ नसिया जी में विशेष शांति धारा अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद चातुर्मास परिसर में सिंहासन पर विराजमान श्रीजी की प्रतिमा का अभिषेक शांति धारा पवित्रमति माताजी, करणमती माताजी, गरिमामति माताजी के सानिध्य में किया गया। अभिषेक करने का प्रथम सौभाग्य साध्य कपिल पंचोरी को प्राप्त हुआ एवं उपस्थित संस्कार शिविर में भाग लेने वाले शिविरार्थियों द्वारा अभिषेक किया गया।</p>
<p>अभिषेक के बाद पंडित रमेश चंद्र गांधी, मोनू भैया मुंगावली मध्य प्रदेश, वीणा दीदी के दिशा निर्देशन में पंच मेरु विधान के अर्घ्य बड़े भक्ति भाव से वाद्य यंत्रों की मधुर स्वरों के साथ बारी-बारी से चढ़ाए गए। इस अवसर पर 10 लक्षण पूजन, 16 कारण पूजन, पंचमेरु पूजन किया गया। इस अवसर पर अष्ट द्रव्य के थाल सजाकर महिलाओं द्वारा गरबा नृत्य करते हुए अर्घ्य चढ़ाए गए। आज के विधान के पुण्यार्जक नरेंद्र कुमार नथमल जी थे। विधान में सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य पिंडारमिया मेहुल कैलाश को प्राप्त हुआ। भक्तामर विधान के पुण्यार्जक पंचोरी भरत कुमार अमृतलाल होंगे। दोपहर में तत्वार्थ सूत्र का वाचन किया गया।</p>
<p>शाम को प्रतिक्रमण महाआरती के बाद राशि दीदी द्वारा प्रवचन किया गया एवं मोनू भैया की दिशा निर्देशन में 48 दीप विधान के दीप प्रज्वलित किए गए। इस अवसर चातुर्मास कमेटी अध्यक्ष निलेश जैन, राजेंद्र गांधी, नरेश जैन ने बताया कि अभी संस्कार शिविर में शिविरार्थियों के व्रत उपवास चल रहे हैं। प्रातः 5:00 बजे प्रार्थना प्रतिक्रमण स्वाध्याय राशि दीदी द्वारा करवाया जाता है। 12 तारीख को धूप दशमी का पर्व बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया। आदिनाथ मंदिर संमवशरण मंदिर नसिया जी में दोपहर को धूप चढ़ाई गई।</p>
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		<title>उत्तम धर्म पर हुई भगवान की आराधना : बुरा बोलने से वास्तु दोष होता है- आचार्य पुलक सागर  </title>
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		<pubDate>Fri, 13 Sep 2024 07:54:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पर्युषण पर्व के उपलक्ष में चल रहे शिविर में दिगंबर जैन दशा नरसिंह पूरा समाज के भट्टारक यश कीर्ति गुरुकुल सभागार में आज पांचवे दिन राजकीय अतिथि गुरुदेव आचार्य पुलक सागर जी के सानिध्य में उत्तम सत्य पर्व मनाया गया। श्री दिगम्बर जैन समाज और पुलक मंच सदस्य राकेश कुमार वानावत और हेमंत कुमार अकोत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पर्युषण पर्व के उपलक्ष में चल रहे शिविर में दिगंबर जैन दशा नरसिंह पूरा समाज के भट्टारक यश कीर्ति गुरुकुल सभागार में आज पांचवे दिन राजकीय अतिथि गुरुदेव आचार्य पुलक सागर जी के सानिध्य में उत्तम सत्य पर्व मनाया गया। श्री दिगम्बर जैन समाज और पुलक मंच सदस्य राकेश कुमार वानावत और हेमंत कुमार अकोत ने बताया कि गुरुकुल प्रांगण में चल रहे दस दिवसीय पाप नाशनम शिविर में शिविरार्थियों ने श्रद्धा पूर्वक संगीतकार उमेश जैन के भक्तिमय माहौल में पूजा- अर्चना एवं महा शांतिधारा कर परिवार के सुख की कामना की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सचिन गंगावत की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ऋषभदेव।</strong> पर्युषण पर्व के उपलक्ष में चल रहे शिविर में दिगंबर जैन दशा नरसिंह पूरा समाज के भट्टारक यश कीर्ति गुरुकुल सभागार में आज पांचवे दिन राजकीय अतिथि गुरुदेव आचार्य पुलक सागर जी के सानिध्य में उत्तम सत्य पर्व मनाया गया। श्री दिगम्बर जैन समाज और पुलक मंच सदस्य राकेश कुमार वानावत और हेमंत कुमार अकोत ने बताया कि गुरुकुल प्रांगण में चल रहे दस दिवसीय पाप नाशनम शिविर में शिविरार्थियों ने श्रद्धा पूर्वक संगीतकार उमेश जैन के भक्तिमय माहौल में पूजा- अर्चना एवं महा शांतिधारा कर परिवार के सुख की कामना की।</p>
<p>आज के राजा भरत चक्रवर्ती एवं महाशांतिधारा करने का सौभाग्य मंजू अशोक गंगवाल परिवार को प्राप्त हुआ। श्री दिगंबर जैन तीर्थ रक्षा कमेटी के उपाध्यक्ष पवन कुमार गंगावत एवं कमेटी के सदस्य पवन कुमार शाह ने बताया कि सांयकाल में बड़े मंदिर जी में ऊपर व नीचे दोनों वेदियों पर सातिया मंडप भरा जाता है। सुबह हुमड़ समाज द्वारा नेमीनाथ मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं एवं सकल जैन समाज शांतिनाथ मंदिर में भक्तिभाव से समाजजन पूजा अर्चना करते हैं। सांयकाल में हुमड समाज की तरफ से शास्त्र स्वाध्याय किया जाता है।</p>
<p>पुलक मंच के ख्याति प्राप्त कवि बलवंत बल्लू ने बताया कि गुरुकुल सभागार में चल रहे शिविर में भगवान पार्श्वनाथ पर सुमेश वानावत एवं पुष्पदंत भवरा ने अभिषेक किया। सभी शिविरार्थियों ने भक्तिभाव से पूजा अर्चना की। उसके पश्चात गुरुदेव आचार्य पुलक सागर जी महाराज को जिनवाणी और गुरुदेव पुलक सागर को अर्घ्य चढ़ाया, जिनवाणी और शास्त्र भेंट किया। इसका सौभाग्य भी अशोक गंगवाल परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-66128" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240911-WA0043.jpg" alt="" width="576" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240911-WA0043.jpg 576w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240911-WA0043-135x300.jpg 135w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240911-WA0043-461x1024.jpg 461w" sizes="(max-width: 576px) 100vw, 576px" />भावों की साधना करें</strong></p>
<p>इस पर आचार्य श्री पुलक सागर ने कहा कि आज उत्तम सत्य धर्म है। पूजन-आराधना के भाव चार होते हैं. उत्तम क्षमा, मांर्दव, आर्जव , शौच। सभी भाव हैं, ये क्रिया नहीं हैं, परिणाम हैं। ये सभी पवित्र भाव ही सच बोलोगे तो क्षमा, मार्दव, आर्जव और शौचधर्म आएगा। इनके उपायों से भावों को प्राप्त कर लिया जाता है। तो आकिंचन ब्रह्मचर्य जीवन का सार मिलता है। हमने चार भावों की साधना कर ली। उन्हें प्राप्त करने के लिए चार उपाय आज से शुरू होंगे। सत्य को जानने के लिए मौन रहो लोग कहते ही की दिशाओं में वास्तु दोष होता है लेकिन बुरा बोलने से वास्तु दोष होता है। भगवान महावीर ने कहा की सत्य को जानना हो तो मोन रहे यदि किसी को उपवास की अनुमोदना करनी हो तो कहो कि इस साल इन्होंने उपवास किए हैं। अगले साल मैं साधना करूंगा।</p>
<p>भगवान महावीर ने जैसा तप किया वैसा हम भी करेंगे तो ये अनुमोदना होगी। नवयुवक मंडल एवं जैन महिला मंडल की सांस्कृतिक मंत्री पलाश भवरा और नीलम किकवत ने बताया कि शिविर की कक्षाएं ठीक 4 बजे शुरू की गईं। 6,30 बजे भगवान की आरती की गई। सांयकालीन आरती का लाभ भी अशोक गंगवाल परिवार को प्राप्त हुआ। उसके पश्चात पारस से कैसे बने पुलक सागर नाटक का आयोजन किया गया। साथ ही पयुर्षण महापर्व पर जो जो महानुभाव उपवास कर रहे हैं, उनका समस्त समाज जनों द्वारा रात्रि को आरती के बाद गुरुकुल परिसर में अनुमोदना की गई।</p>
<p>इस अवसर पर तरुण क्रांति मंच, आदिनाथ एकता मंच, जैन युवा परिषद, पुलक मंच के सदस्य समाज के वरिष्ठ सदस्य नवयुवक मंडल के साथी दीक्षांत किकावत, अभिषेक दोवडिया, सुदर्शन भवरा, लव भवरा, दीपक भवरा, महिला मंडल की लता भानावत, आभा किकावत, मंच की सीमा किकावत रेवती मेहता और भी सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे।</p>
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		<title>उत्तम सत्य धर्म पर दिए प्रवचन : सत्य जीवन का श्रृंगार का है- आचार्य विशुद्ध सागर जी  </title>
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		<pubDate>Fri, 13 Sep 2024 07:35:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पर्वराज पर्युषण महापर्व पर आयोजित &#8220;श्रावक संयम संस्कार शिविर&#8221; में सम्बोधन करते हुए आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि &#8220;सत्य धर्म है, सत्य सौन्दर्य है, सत्य श्रृंगार है, सत्य शिव है, सत्य सुन्दर है, सत्य मंगल है, सत्य उत्तम है, सत्य शरण है, सत्य व्रत है, सत्य महाव्रत है। सत्य सज्जनों का श्रृंगार [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पर्वराज पर्युषण महापर्व पर आयोजित &#8220;श्रावक संयम संस्कार शिविर&#8221; में सम्बोधन करते हुए आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि &#8220;सत्य धर्म है, सत्य सौन्दर्य है, सत्य श्रृंगार है, सत्य शिव है, सत्य सुन्दर है, सत्य मंगल है, सत्य उत्तम है, सत्य शरण है, सत्य व्रत है, सत्य महाव्रत है। सत्य सज्जनों का श्रृंगार है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230; </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांदणी मठ (महाराष्ट्र)।</strong> पर्वराज पर्युषण महापर्व पर आयोजित &#8220;श्रावक संयम संस्कार शिविर&#8221; में सम्बोधन करते हुए आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि &#8220;सत्य धर्म है, सत्य सौन्दर्य है, सत्य श्रृंगार है, सत्य शिव है, सत्य सुन्दर है, सत्य मंगल है, सत्य उत्तम है, सत्य शरण है, सत्य व्रत है, सत्य महाव्रत है। सत्य सज्जनों का श्रृंगार है। सत्य सज्जनों, कुलीन पुरुषों की कुल विद्या है। सत्य में शान्ति है, सत्य में आनन्द है, सत्य में सुख है, सत्य में यश है। सत्य में उमंग होती है। सत्य स्तुत्य होता है। सत्य वंदनीय है। सत्य धर्म का मूल है।असत्य अनर्थकारी है। असत्य अधर्म है। असत्य विनाशकारी है। असत्य हिंसक है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-66114" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240913-WA0002.jpg" alt="" width="1280" height="591" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240913-WA0002.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240913-WA0002-300x139.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240913-WA0002-1024x473.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240913-WA0002-768x355.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240913-WA0002-990x457.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />असत्य अवनति का कारण है। असत्य दुःख-दाता है। असत्य अपयश का कारण है। असत्य अविश्वास को जन्म देता है। असत्य कुलहीनों की पहचान है। असत्य दण्डनीय है। असत्य पाप है। असत्य दुर्गति का कारण है। सत्य जानो, सत्य मानो सत्य स्वरूप में बोलना सीखो । सत्य ब्रह्म, सत्य प्राण, सत्य शून्य शब्द मृत, सत्य बोलना सत्य पर चलना, सत्य विचार वही है भविष्य का भगवान् । सत्यवादी का सर्वत्र सम्मान होना है। सत्यवादी सिद्धियों को शीघ्र ही साध लेता है। सैन्य संकट में आ सकता है, परन्तु सत्य की ही विजय होती है।</p>
<p>सत्य संयमियों का मूलगुण है। सत्य वह चक्र है जिसके बल पर सर्व-संकटों पर विजय प्राप्त की जा सकती है। सत्य का जीवन जीने के लिए सत्य को जानना पड़ेगा। सत्य जाने बिना सत्य पूर्ण जी नहीं सकते। जीवन में अशांति असत्य से ही प्रारम्भ होती है। एक झूठ को छुपाने के लिए कषायी पाँचों पाप में प्रवृत्त हो जाता है। असत्य प्रकट न हो जाय, इसलिए व्यक्ति मायाचारी के साथ सैंकड़ों झूठ बोलकर भी बचना चाहता है।</p>
<p>झूठ वचन, झूठा दिखावा इंसान को हैवान बना देता है।सुख, शान्ति की चाह है, तो ढोंग का जीवन छोड़ो, ढंग से जीवन जीना प्रारम्भ करो। ढोंग का जीवन कृतिम फूल वत् होता है। झूठे दांगी घुने अन्न के समान होता है। दिखाना दिवाला निकाल देता है। असत्य से प्रारम्भ कार्य असफलता पर पूर्ण होता है।</p>
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		<title> उत्तम सत्य धर्म पर दिए प्रवचन :  ऐसा सत्य भी असत्य है, जो किसी को विपत्ति में लाकर खड़ा कर दे &#8211; मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Fri, 13 Sep 2024 06:06:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जहां क्षमा ,मार्दव, आर्जव, शौच आत्मा का स्वभाव है, वही सत्य, संयम, तप, त्याग इन गुणों को प्रकट करने के उपाय हैं। आप दान देते हैं, धर्म के लिए, लेकिन साथ खड़े नहीं होते। हम भावना रखते हैं धर्म की जीत हो। किंतु आप हर वक्त साथ देते हैं ,पाप का और पापी का। सत्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जहां क्षमा ,मार्दव, आर्जव, शौच आत्मा का स्वभाव है, वही सत्य, संयम, तप, त्याग इन गुणों को प्रकट करने के उपाय हैं। आप दान देते हैं, धर्म के लिए, लेकिन साथ खड़े नहीं होते। हम भावना रखते हैं धर्म की जीत हो। किंतु आप हर वक्त साथ देते हैं ,पाप का और पापी का। सत्य उपाय है जीवन का। बिना अपाय की अनुपस्थिति के उपाय काम नहीं करता। क्रोध, मान, माया,लोभ ये चार कषाय, हमें परेशान करती रहतीं हैं।उक्त उदगार छत्रपति नगर के दलाल बाग में मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने व्यक्त किये। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सतीश जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>इंदौर।</strong> आज उत्तम सत्य धर्म का दिन है। जहां क्षमा ,मार्दव, आर्जव, शौच आत्मा का स्वभाव है, वही सत्य, संयम, तप, त्याग इन गुणों को प्रकट करने के उपाय हैं। आप दान देते हैं, धर्म के लिए, लेकिन साथ खड़े नहीं होते। हम भावना रखते हैं धर्म की जीत हो। किंतु आप हर वक्त साथ देते हैं ,पाप का और पापी का। सत्य उपाय है जीवन का। बिना अपाय की अनुपस्थिति के उपाय काम नहीं करता। क्रोध, मान, माया,लोभ ये चार कषाय, हमें परेशान करती रहतीं हैं।उक्त उदगार छत्रपति नगर के दलाल बाग में मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि सत्य को समझने के पहले हमें अनंतानुबंधी कषाय को देखने का प्रयास करना होगा।</p>
<p>मंदिर में धर्म दिखाई नहीं देता। तुमने साधुओं को तो शुद्ध आहार करा दिया लेकिन खुद ने अशुद्ध भोजन किया। अनंतानुबंधी कषाय धर्मात्मा में धर्म नहीं देखने दे रही। आपने कहा कि आज सत्य धर्म की चर्चा है, उत्तम सत्य धर्म अलग होता है। अपने जीवन का सत्य जान लो, उत्तम सत्य धर्म बहुत दूर है। तुम्हें विश्वास तो झूठ पर ही है। आपका हर गणित उल्टा है। तुम पुरानी याददास्तो के मसीहा बन गए। सत्य समझना ठीक वैसा ही है , जैसा आंख में पट्टी बांधकर गाड़ी चलाना। मुनिवर कहते हैं कि आज के दिन अपना चिंतन करो, परिवार का मत करो । जीवन का वास्तविक यथार्थ देखो कि तुम संसार से कुछ नहीं ले जा सकते।</p>
<p>अपने शरीर तक को तो ले जा नहीं सकते। अपनी आंखें खोलो, अपना सत्य खुद देखो। लोभ कितना दौड़ाता है तुम्हें, बिना हमले की मौत है तुम्हारी। *ऐसा सत्य भी असत्य है जो किसी को विपत्ति में लाकर खड़ा कर दें।*सत्य बोलने की चीज नहीं है , सत्य समझने की चीज है। अब मुझको मेरा सत्य समझ में आ रहा है, हमारे अंदर अनंतानुबंधी कषाय नहीं पाओगे। राग, द्वेष करने का समय नहीं बचा, पुरुषार्थ करो। आपने कहा कि गुरु के साथ तुम भी तर जाओगे और हम भी। बाकी धरती पर सब धरा का धरा रह जाएगा।</p>
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<strong>ये कार्यक्रम भी हुए</strong></p>
<p>इंदौर में बन रहे सर्वतोभद्र जिनालय के विश्व प्रसिद्ध आर्किटेक्ट विपुल त्रिवेदी, अहमदाबाद से और मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज के ग्रहस्थ जीवन के भाई यहां पधारे , कमेटी ने उनका सम्मान किया। सचिन जैन उद्योगपति ने जिनालय की विस्तृत जानकारी समाज को दी और सभी से निवेदन किया कि इसमें मुक्त हस्त दान दें। प्रातः गुरुदेव के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के बाद गुरुदेव की आठ द्रव्यों से सभी शिविरार्थियों ने पूजन की। प्रातः 5:00 बजे से ही मांगलिक क्रियाएं प्रारंभ हो गई थीं।</p>
<p>दोपहर 2:15 बजे से तत्वार्थ &#8211; सूत्र का वाचन हुआ। रात्रि 7:00 बजे से संगीतमय आरती हुई। इस अवसर पर राकेश सिंघई, अखिलेश सोधिया, मनीष नायक, सतीश डबडेरा, सतीश जैन, आनंद जैन,कमल अग्रवाल, अमित जैन, शिरीष अजमेरा, आलोक बंडा के साथ ही बहुत अधिक संख्या में समाजजन मौजूद थे। पूज्य मुनि श्री निस्वार्थ सागरजी ,निसर्ग सागर जी एवं क्षुल्लक श्री हीरक सागर जी भी मंच पर विराजित थे। आचार्य श्री जी की पूजन के पश्चात , 9:00 बजे से मुनि श्री जी के प्रवचन हुए। धर्म सभा का संचालन ब्रह्मचारी मनोज भैया ने किया।</p>
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