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	<title>up &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>आचार्य श्री सन्मतिसागर जी की त्रिलोक तीर्थ धाम में होगी मूर्ति स्थापित : 23 नवंबर को भव्य संस्कार दिवस महोत्सव का होगा दिव्य समागम </title>
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		<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 12:31:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मतिसागर जी की पावन स्मृति में 23 नवंबर रविवार को विश्व प्रसिद्ध त्रिलोकतीर्थ धाम बड़ागांव बागपत, उप्र में उनकी गुरुमूर्ति स्थापना एवं जन्म जयंती संस्कार दिवस महोत्सव का आयोजन ऐतिहासिक अध्यात्म पर्व के रूप में किया जाएगा। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर&#8230; अंबाह। अंबाह की पावन भूमि, जिसने अनेक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मतिसागर जी की पावन स्मृति में 23 नवंबर रविवार को विश्व प्रसिद्ध त्रिलोकतीर्थ धाम बड़ागांव बागपत, उप्र में उनकी गुरुमूर्ति स्थापना एवं जन्म जयंती संस्कार दिवस महोत्सव का आयोजन ऐतिहासिक अध्यात्म पर्व के रूप में किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> अंबाह की पावन भूमि, जिसने अनेक संतों को जन्म दिया। उसी भूमि के वरवाई गांव के गौरव, समाधिस्थ संत राष्ट्रऋषि, सिंहस्थ प्रवर्तक, पंचम पट्टाचार्य आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मतिसागर जी की पावन स्मृति में 23 नवंबर रविवार को विश्व प्रसिद्ध त्रिलोकतीर्थ धाम बड़ागांव बागपत, उप्र में उनकी गुरुमूर्ति स्थापना एवं जन्म जयंती संस्कार दिवस महोत्सव का आयोजन ऐतिहासिक अध्यात्म पर्व के रूप में किया जाएगा।</p>
<p>समाजसेवी महेंद्र जैन ने बताया कि यह अवसर केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि वह क्षण होगा, जब भक्ति की भावनाएं, साधना की सुगंध और सेवा का संकल्प एक साथ गूंजेंगे। यह आयोजन धर्म, संयम और समर्पण की अद्भुत मिसाल बनकर युगों तक स्मरणीय रहेगा। महोत्सव में स्याद्वाद जैन अकादमी में गुरुदेव की गुरु मूर्ति स्थापना, समाधिस्थ साधु-संतों के चरण प्रतिष्ठा समारोह और अन्नपूर्णा भोजनशाला भवन का शिलान्यास जैसे पवित्र आयोजन होंगे।</p>
<p><strong>इनका मिलेगा पावन सान्निध्य </strong></p>
<p>इस समूचे आयोजन का पावन निर्देशन गणिनी आर्यिका श्री दृष्टिभूषण माताजी के करकमलों से हो रहा है। इस भव्य पर्व में गणिनी आर्यिका श्री चंद्रमती माताजी, गणिनी आर्यिका श्री मुक्तिभूषण माताजी, ऐलाचार्य श्री त्रिलोकभूषण जी महाराज, गणिनी आर्यिका श्री दृष्टिभूषण माताजी एवं गणिनी आर्यिका श्री अनुभूतिषण माताजी अपने दिव्य सान्निध्य से धर्म और संयम की दीपशिखा प्रज्वलित करेंगी। उनके प्रवचन श्रद्धालुओं के अंतर्मन में साधना और शांति का आलोक फैलाएंगे।</p>
<p><strong>यह होंगे अतिथि और इनका रहेगा सहयोग </strong></p>
<p>इस विराट आयोजन के मुख्य अतिथि आशीष अग्रवाल (मीडिया प्रभारी, भाजपा मध्यप्रदेश) रहेंगे। आयोजन समिति के अध्यक्ष राजेंद्रप्रसाद जैन, महामंत्री गजराज जैन गंगवाल, संयुक्त महामंत्री महेंद्रकुमार जैन, कोषाध्यक्ष प्रवीणकुमार जैन और सहयोगी केसी जैन इस आयोजन को पूर्ण श्रद्धा और समर्पण से संपन्न कराने में जुटे हैं।</p>
<p><strong>इन स्थानों से आएंगे समाजजन श्रद्धालु </strong></p>
<p>इस अवसर पर अंबाह, पोरसा, मुरैना, ग्वालियर, दिल्ली, आगरा सहित अनेक नगरों से हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहेंगे। त्रिलोकतीर्थ धाम इन पावन क्षणों में भक्ति, भजन और मंगल ध्वनियों से गूंज उठेगा। श्रद्धालुओं के आगमन, आवास, भोजन और दर्शन की संपूर्ण व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि प्रत्येक सहभागी भक्ति का पूर्ण आनंद प्राप्त कर सके। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से विनम्र निवेदन किया है कि वे समय पर पहुंचकर गुरुदेव की पावन स्मृति को नमन करें और इस दिव्य पर्व का हिस्सा बनें।</p>
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		<title>केवल त्याग में है सुख &#8211; मुनि श्री सुधासागर महाराज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 Sep 2022 15:19:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Lalitpur]]></category>
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					<description><![CDATA[ललितपुर. राजीव सिंघई। मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने दैनिक प्रवचनों के माध्यम से उपदेश देते हुए कहा कि संसार मे पूर्णता किसी को भी प्राप्त नही है बल्कि यूं कहे कि ऐसा कोई भी व्यक्ति नही है, जो यह कह सके कि सारे काम मेरे मन के हो रहे हैं और मुझे जिंदगी का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ललितपुर. राजीव सिंघई।</strong> मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने दैनिक प्रवचनों के माध्यम से उपदेश देते हुए कहा कि संसार मे पूर्णता किसी को भी प्राप्त नही है बल्कि यूं कहे कि ऐसा कोई भी व्यक्ति नही है, जो यह कह सके कि सारे काम मेरे मन के हो रहे हैं और मुझे जिंदगी का बहुत मजा आ रहा है।</p>
<p>यहां तक कि भगवान भी इसी गिनती में आएंगे क्योंकि उनकी जिंदगी में भी ऐसे कई काम हुए हैं, जो वे नहीं जानते थे। सीता का अपहरण और रावण से युद्ध एक उदाहरण देते हुए कहा कि एक व्यक्ति ज्योतिष पढ़ लौट कर घर जा रहा था। रास्ते में उसे नदी किनारे पैर के निशान दिखाई दिए, जिन्हें देखकर उसने कहा कि मुझे लगता है यह पैर के निशान जिस व्यक्ति के भी हैं, वह व्यक्ति इस संसार का सबसे बड़ा आदमी होगा।</p>
<p>बहुत बड़ा राजा चक्रवर्ती से कम नहीं होगा। वह व्यक्ति अपने ज्ञान की परीक्षा करने के लिये वह उस व्यक्ति की खोज करते-करते उस स्थान पर पहुंच गया जहां चरणों के निशान उसे ले जा रहे थे। जब वह वहां पहुंचा तो उसने माथा फोड़ लिया देखा तो वहां एक संत विराजमान थे। संत ने जब उसे ऐसी अवस्था में देखा तो उससे पूछा कि क्या हुआ।</p>
<p>उसने बताया, मैं ज्योतिषी बन कर लौटा हूं और आपके पैरों के निशान के आधार पर समझा हूं कि यह चक्रवर्ती के पैर हैं मगर मुझे लगता है कि मैं फेल हो गया हूं। तब संत बोले, मैं चक्रवर्ती ही हू मगर इतना सुख मुझे तब नहीं मिला, जब मेरे पास धन वैभव और बड़ा परिवार था, जितना अब मिल रहा है।</p>
<p>जैसे ही मैंने सब त्यागा और संततत्व धारण कर लिया, मैं बहुत सुखी हो गया। इसका मतलब तो यह है कि संसार में सुख केवल त्याग में है। दूसरे प्रसंग में गुरुदेव ने कहा कि एक महिला नास्तिक थी। अपने आस्तिक पति के कहने पर मन्दिर पहुंची और पति के साथ पूजन में खड़ी हो गयी।</p>
<p>जब उसने पूजन की पंक्तियों को पढ़ा तो घर आकर बोली, अब खाना और मेरी तो तुम्हें कोई आवश्यकता नही होनी चाहिये क्योंकि तुम पूजा कर रहे थे और उस पूजा में लिखा था, क्षुधा रोग विनाशनाय, काम वाण विनाशनाय, इसे गुरुदेव ने स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि आप मन्दिर में पूजा करते हैं और घर में रोटी खाते हैं तो दुनिया की नजर में /नास्तिक की नजर में परस्पर विरोधी कार्य कर रहे हैं।</p>
<p>समन्तभद्र आचार्य कहते हैं कि तुमने जो नियम ले लिया है और तुम्हारे दोस्त नियम से रिक्त हैं और अवसर आने पर एक साथ खड़े होकर तुम्हें चिढ़ा रहे हैं, हंसी उड़ा रहे हैं तो उस समय तुम्हारे नियम के प्रति तुम्हारे क्या भाव आ रहे हैं, बस वही तुम्हारे नियम का पुण्य है। यदि रात्रि भोजन का त्याग है और तुम्हें देखकर कोई दूसरा त्याग कर देता है तो तुम्हारे त्याग में अतिशय है। आज की दुनिया में ऐसे तो कई लोग हैं जो बुराई की ओर जल्दी झुक जाते हैं जबकि ऐसे लोगों की गिनती उंगलियों पर हैं, जिन्हें देखकर दूसरा व्यक्ति नियम ले सके।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि आज हमारी श्रद्धा बहुत कमजोर हो गयी है। हम दूसरों की बुराई देखकर अपनी अच्छाई को छोड़ने तैयार हो जाते हैं। जैसे रात में होटल पहुंचे, सभी खाना खा रहे थे सो हम भी खाने लगे जबकि त्याग था।</p>
<p>दोस्त झरने पर नहाने जा रहे थे तो हम भी चले गए जबकि वह समय अभिषेक करने जाने का था यानी अभिषेक छोड़ दिया। जब तक हम अपना श्रद्धा भाव मजबूत नहीं करेंगे, अपने नियम से च्युत होते रहेंगे, गुरु और भगवान को झूठा करार देते रहेंगे। अतिशय चमत्कार को झूठा कहने लगेंगे।</p>
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