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	<title>Udasin Ashram &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Udasin Ashram &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>ब्रह्मचारी उत्तमचंद जी ने समता के साथ किया समाधि मरण: इंदौर के उदासीन आश्रम में धर्म साधना करते हुए शांतिपूर्वक ली अंतिम सांस, समाज ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 10:56:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर के ब्रह्मचारी उत्तमचंद जी (85) ने उदासीन आश्रम में समता और शांति के साथ समाधि मरण किया। 18 वर्षों से धर्म साधना में लीन रहे। समाजजनों और परिवार की उपस्थिति में अंतिम संस्कार हुआ। श्रद्धांजलि सभा में अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। राजेश जैन की रिपोर्ट  इंदौर । इंदौर में दिगंबर जैन समाज के धर्मनिष्ठ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>इंदौर के ब्रह्मचारी उत्तमचंद जी (85) ने उदासीन आश्रम में समता और शांति के साथ समाधि मरण किया। 18 वर्षों से धर्म साधना में लीन रहे। समाजजनों और परिवार की उपस्थिति में अंतिम संस्कार हुआ। श्रद्धांजलि सभा में अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। <span style="color: #ff0000">राजेश जैन की रिपोर्ट </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर ।</strong> इंदौर में दिगंबर जैन समाज के धर्मनिष्ठ ब्रह्मचारी श्री उत्तमचंद जी (85) ने आज प्रातः 6:45 बजे उदासीन आश्रम, एमजी रोड में समता और शांतिपूर्वक समाधि मरण किया। उन्होंने अपने जीवन का अंतिम क्षण भी धर्ममय बनाते हुए मरण को मांगलिक बना लिया।</p>
<p><strong> धर्म साधना में बीते 18 वर्ष</strong></p>
<p>ब्रह्मचारी उत्तमचंद जी पिछले 18 वर्षों से उदासीन आश्रम में रहकर आत्म साधना और धर्म साधना में लीन थे। उनका जीवन पूरी तरह संयम, साधना और आत्मकल्याण के लिए समर्पित रहा।</p>
<p><strong> संतों के सानिध्य में अंतिम क्षण</strong></p>
<p>अपने अंतिम समय में वे अनेक ब्रह्मचारी भाइयों के सानिध्य में थे और वंदनीय आर्यिका विज्ञानमति माताजी के मुखारविंद से धर्म उपदेश सुनते हुए शांतिपूर्वक देह का त्याग किया।</p>
<p><strong>अंतिम यात्रा और संस्कार</strong></p>
<p>सुबह 7:30 बजे उदासीन आश्रम से उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जो जूनी इंदौर मुक्तिधाम पहुंची। वहां परिवारजनों, ब्रह्मचारीगण और समाज के प्रमुख लोगों की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।</p>
<p><strong> श्रद्धांजलि सभा में उमड़ा समाज</strong></p>
<p>शोक सभा में उदासीन आश्रम के अधिष्ठाता ब्रह्मचारी अनिल भैया, सुनील भैया, जिनेश भैया, मुकेश भैया, हरीश भैया सहित समाज के कई प्रमुख व्यक्तियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
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		<title>लघु सम्मेद शिखर के उदासीन आश्रम में सहस्त्रकूट जिनालय: सात करोड़ रुपए की लागत से हो रहा निर्माण, जिनालय की ऊंचाई 100 फीट होगी </title>
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		<pubDate>Wed, 10 Dec 2025 13:35:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में सहस्त्रकूट जिनालय का भूमिपूजन हुआ था। छतरपुर जिले के द्रोणागिरी (लघु सम्मेद शिखर) के उदासीन आश्रम में सहस्त्रकूट जिनालय का निर्माण चल रहा है। करीब 7 करोड़ रुपए से 7 मंजिल, 100 फीट ऊंचाई का सहस्त्रकूट जिनालय बनाया जा रहा है। सागर से पढ़िए, मनीष [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में सहस्त्रकूट जिनालय का भूमिपूजन हुआ था। छतरपुर जिले के द्रोणागिरी (लघु सम्मेद शिखर) के उदासीन आश्रम में सहस्त्रकूट जिनालय का निर्माण चल रहा है। करीब 7 करोड़ रुपए से 7 मंजिल, 100 फीट ऊंचाई का सहस्त्रकूट जिनालय बनाया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">सागर से पढ़िए, मनीष जैन विद्यार्थी की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में सहस्त्रकूट जिनालय का भूमिपूजन हुआ था। छतरपुर जिले के द्रोणागिरी (लघु सम्मेद शिखर) के उदासीन आश्रम में सहस्त्रकूट जिनालय का निर्माण चल रहा है। करीब 7 करोड़ रुपए से 7 मंजिल, 100 फीट ऊंचाई का सहस्त्रकूट जिनालय बनाया जा रहा है। दर्शन के लिए लिफ्ट सुविधा उपलब्ध कराई गई है। बुंदेलखंड के लघु सम्मेद शिखर तीर्थधाम स्थित उदासीन आश्रम में सभी के सहयोग से जैन समाज के श्रद्धालुओं द्वारा सबसे ऊंचा जिन सहस्त्रकूट जिनालय का निर्माण करवा रहे हैं। आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज के सान्निध्य में पंचकल्याणक महोत्सव होगा। आश्रम के प्रचार मंत्री मनीष विद्यार्थी, प्रकाश अदावन ने बताया कि निर्माणाधीन जिनालय के लिए 60 बाई 60 फीट का फाउंडेशन तैयार कर 12 फीट जमीन में खुदाई की गई। इसके बाद खुदाई लेबल से 11फीट ऊंचा फाउंडेशन बनाया गया। सात मंजिला सहत्रकूट जिनालय का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद जिनालय के सभी सातों तल पर वेदियां पर 1008 प्रतिमाएं पदमासन मुद्रा में चारों दिशाओं में स्थापित होंगी।</p>
<p><strong>गुरुदत्तादि मुनिराजों की निर्वाण एवं साधना स्थल है यह तीर्थ</strong></p>
<p>श्यामरी नदी के तट स्थित गुरुदत्तादि साढ़े आठ करोड़ मुनिराजों की निर्वाण एवं साधना स्थली पर 1972 से उदासीन आश्रम संचालित है। पूज्य गणेश प्रसाद वर्णी के शब्दों में वर्णित सिद्धक्षेत्र लघु सम्मेद शिखरश् तीर्थ के इस उदासीन आश्रम में साधु संत, त्यागी व्रती, वृद्धजन जो घर से उदासीन हो गए हैं। अपना कल्याण करने यहां पर साधना में निरंतर लीन रहते हैं। आचार्य श्री कहते हैं कि अपने जीवन काल मे कम से कम चावल बराबर मूर्ति विराजमान करने का सौभाग्य अवश्य ही प्राप्त करना चाहिए। पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के आशीर्वाद से 7 मंजिला (शिखर सहित) सहस्त्रकूट जिनालय का भव्य निर्माण पूर्णताः की ओर है। इसका पंचकल्याणक महा महोत्सव आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के मंगल सान्निध्य होगा। पंचकल्याणक महोत्सव तारीख तय के लिए ट्रस्ट,प्रबंध समिति की बैठक हुई। जिसमें तेदुखेडा में विराजमान आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज को 14 दिसंबर रविवार को श्रीफल अर्पित कर महोत्सव के लिए सान्निध्य का आशीर्वाद लेंगे।</p>
<p><strong>उदासीन आश्रम में जैन धर्म की होती हैं कई गतिविधियां </strong></p>
<p>समिति के मंत्री गजेंद्र जैन बड़ा मलहरा ने बताया कि इस जिनालय का निर्माण कुशल कारीगर कर रहे हैं। तीर्थ क्षेत्र के उदासीन आश्रम में जैन धर्म की अनेक गतिविधियां संचालित होती हैं। बुंदेलखंड की इस धरा पर यह बहुत बड़ा एवं प्राचीन धार्मिक सिद्ध तीर्थ है। आचार्य श्री बताते हैं कि सहस्त्रकूट जिनालय में तीर्थंकर भगवान के 1008 सार्थक नामों के प्रतीक जिनबिम्ब निर्मित होते हैं। जिनके दर्शन पूजन से अनंतगुण स्वरुप आत्मा का बोध होता है। वहीं अनेक संकट बाधाएं दूर हो जाती हैं। आपको बता दें कि इस सहत्रकूट जिनालय के बन जाने से तीर्थ क्षेत्र जैन समाज के बड़े तीर्थ में शुमार हो जाएगा।</p>
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		<title>गणिनी आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माता जी का हुआ विहार: मंदिरों के दर्शन कर दिए प्रवचन  </title>
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		<pubDate>Fri, 25 Apr 2025 04:04:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गणिनी आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माता जी का 24 अप्रैल को प्रातः पंचबालयति दिगंबर जिनालय विजयनगर से मंगल विहार हुआ। आपने समवशरण दिगंबर जैन मंदिर के लिए मंगल विहार के दौरान अपने एलआईजी मंदिर, जावरा वाला मंदिर , उदासीन आश्रम, इंद्र भवन, अनूप भवन तथा समवशरण मंदिर में स्थित नंदीश्वर जिनालय, सहस्त्रकूट प्रतिमाओं मानस्तंभ के दर्शन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गणिनी आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माता जी का 24 अप्रैल को प्रातः पंचबालयति दिगंबर जिनालय विजयनगर से मंगल विहार हुआ। आपने समवशरण दिगंबर जैन मंदिर के लिए मंगल विहार के दौरान अपने एलआईजी मंदिर, जावरा वाला मंदिर , उदासीन आश्रम, इंद्र भवन, अनूप भवन तथा समवशरण मंदिर में स्थित नंदीश्वर जिनालय, सहस्त्रकूट प्रतिमाओं मानस्तंभ के दर्शन किए। <span style="color: #ff0000">उन्होंने प्रवचन भी दिए। इंदौर से पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> गणिनी आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माता जी का 24 अप्रैल को प्रातः पंचबालयति दिगंबर जिनालय विजयनगर से मंगल विहार हुआ। आपने समवशरण दिगंबर जैन मंदिर के लिए मंगल विहार के दौरान अपने एलआईजी मंदिर, जावरा वाला मंदिर , उदासीन आश्रम, इंद्र भवन, अनूप भवन तथा समवशरण मंदिर में स्थित नंदीश्वर जिनालय, सहस्त्रकूट प्रतिमाओं मानस्तंभ के दर्शन किए। आर्यिका माताजी को शास्त्र जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य चिन्मय,राजेश पंचोलिया को प्राप्त हुआ। आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी ने अपने प्रवचन में बताया कि सभी को ब्रह्म मुहूर्त में उठना जागना चाहिए,क्योंकि, पापी का सोते रहना अच्छा है पुण्य आत्मा जीव ही जाग जाते हैं।</p>
<p><strong>जिन्हें हमने गिनती सिखाई वह हमारी गलती बताते है</strong></p>
<p>परिवारों में विसंगति टेंशन के बारे में माताजी ने कटाक्ष कर बोला कि 14 वर्ष की उम्र के बाद जवानी उर्ध्वगामी ऊर्जावान होती है। आज जिन बच्चों को हम बोलना सिखाते हैं। वह हमें चुप रखते हैं। जिन्हें हमने गिनती सिखाई वह हमारी गलती बताते हैं। जिनके जन्म के लिए हमने सजदे किए थे। प्रार्थना की थी वह आज सदमे देते हैं। जिन्हें कंधे पर लिटा कर सुलाते थे। वह आज हमें कंडों पर सुलाते हैं। अग्नि संस्कार करते हैं। जिनके लिए खून पसीना बहाया था। वह आज हमें पानी में बहाते हैं। इसलिए जन्म से मृत्यु तक की यात्रा में जीवन का मूल्यांकन करना जरूरी है कि हमारी आत्मा का उद्धार किससे कैसे होगा?</p>
<p><strong>देव गुरु जिनवाणी की शरण उपकारी</strong></p>
<p>देव गुरु जिनवाणी की शरण उपकारी है। आदि सृष्टि मंगलम के भक्त राजेश पंचोलिया अनुसार विहार के दौरान अनेक स्थानों पर पूज्य माताजी के चरण प्रक्षालन किए गए। शाम को श्री सृष्टिभूषण माताजी का श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन बीस पंथी मंदिर मल्हारगंज के दर्शन कर रात्रि विश्राम किया।</p>
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		<title>पूर्व पदाधिकारियों का सम्मान एवं शपथ ग्रहण: महावीर प्रार्थना से वातावरण मंगलमय  </title>
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		<pubDate>Thu, 24 Apr 2025 07:24:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सागर क्षेत्र क्रमांक 10 महिला जैन मिलन नगर शाखा का शपथ ग्रहण समारोह एवं पूर्व पदाधिकारियों का सम्मान समारोह कार्यक्रम उदासीन आश्रम में हुआ। सर्वप्रथम दीप प्रज्वलन राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतिवीर कमलेंद्र, क्षेत्रीय अध्यक्ष अतिवीर अरुण चंदेरिया ने किया। सागर से मनीष विधार्थी की पढ़िए यह खबर&#8230; सागर। सागर क्षेत्र क्रमांक 10 महिला जैन मिलन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सागर क्षेत्र क्रमांक 10 महिला जैन मिलन नगर शाखा का शपथ ग्रहण समारोह एवं पूर्व पदाधिकारियों का सम्मान समारोह कार्यक्रम उदासीन आश्रम में हुआ। सर्वप्रथम दीप प्रज्वलन राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतिवीर कमलेंद्र, क्षेत्रीय अध्यक्ष अतिवीर अरुण चंदेरिया ने किया। <span style="color: #ff0000">सागर से मनीष विधार्थी की पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> सागर क्षेत्र क्रमांक 10 महिला जैन मिलन नगर शाखा का शपथ ग्रहण समारोह एवं पूर्व पदाधिकारियों का सम्मान समारोह कार्यक्रम उदासीन आश्रम में हुआ। सर्वप्रथम दीप प्रज्वलन राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतिवीर कमलेंद्र, क्षेत्रीय अध्यक्ष अतिवीर अरुण चंदेरिया ने किया। महावीर प्रार्थना कर वातावरण को मंगलमय बनाया और मंगलाचरण के द्वितीय चरण में वीरांगना पिंकी जैन ने सुंदर से भजन क प्रस्तुत किए गए। मंचासीन अतिथियों का स्वागत सम्मान किया गया। अतिथियों ने अपना उद्बोधन दिया। नवीन कार्यकारिणी एवं सदस्यों को क्षेत्रीय अध्यक्ष अतिवीर अरुण चंदेरिया ने शपथ दिलाई। जिसमें राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतिवीर कमलेंद्र जैन, क्षेत्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय शक्कर, क्षेत्रीय चेयरपर्सन अति वीरांगना मंजू सतभैया, क्षेत्रीय प्रचार मंत्री मनीष जैन विद्यार्थी, राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य शशि सतभैया, क्षेत्रीय संयोजिका हिमांशी जैन एवं अन्य शाखाओं के अध्यक्ष और मंत्री उपस्थित रहे। सभी ने नवीन पदाधिकारियों को बधाइयां एवं शुभकामनाएं दीं। नवीन कार्यकारिणी के रूप में शाखा की अध्यक्ष वीरांगना पिंकी जैन, मंत्री सारिका जैन, कोषाध्यक्ष प्रभा जैन एवं प्रचार मंत्री दिव्या जैन को बनाया गया।</p>
<p><strong>शील्ड देकर सम्मान किया </strong></p>
<p>पूर्व पदाधिकारी थे उनका शील्ड देकर सम्मान किया गया और शाखा की सभी सदस्य बहनों का सम्मान किया एवं महावीर जयंती पर चंदन वाला झांकी बनाई गई। जिसमें जिन बच्चों ने भाग लिया था उनको भी शील्ड देकर पुरस्कृत किया गया। इस कार्यक्रम में हमारी शाखा की नीतू, संजना, अर्चना,प्रतीक्षा, सुनीता, विनीता, खुशबू आदि समस्त बहनें उपस्थिति रही। संचालन वीरांगना पिंकी जैन ने किया और पंच परमेष्ठी स्तुति से कार्यक्रम का समापन किया गया।</p>
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		<title>मनाई गयी अक्षय तृतीया : उदासीन आश्रम द्रोणगिरि में अक्षय तृतीया को हुई महापारणा </title>
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		<pubDate>Fri, 10 May 2024 10:20:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुविख्यात उदासीन आश्रम में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान को मुनि अवस्था में प्रथम बार इक्षु रस से हुए आहार दिवस अक्षय तृतीया के महापर्व पर उपाध्याय मुनि श्री आदिश सागर जी महाराज की अहार महापारणा हुई। इस अवसर पर अनेक महानुभावों को सौभाग्य प्राप्त हुआ। पढ़िए रत्नेश जैन रागी बकस्वाहा की रिपोर्ट&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुविख्यात उदासीन आश्रम में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान को मुनि अवस्था में प्रथम बार इक्षु रस से हुए आहार दिवस अक्षय तृतीया के महापर्व पर उपाध्याय मुनि श्री आदिश सागर जी महाराज की अहार महापारणा हुई। इस अवसर पर अनेक महानुभावों को सौभाग्य प्राप्त हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए रत्नेश जैन रागी बकस्वाहा की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>द्रोणगिरि सेंधपा।</strong> यहां के सुविख्यात उदासीन आश्रम में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान को मुनि अवस्था में प्रथम बार इक्षु रस से हुए आहार दिवस अक्षय तृतीया के महापर्व पर उपाध्याय मुनि श्री आदिश सागर जी महाराज की अहार महापारणा हुई। इस अवसर पर अनेक महानुभावों को सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसी अवसर पर आज की शांति धारा का सौभाग्य इंदु , विहान जैन सपरिवार वसुंधरा गाजियाबाद उप्र, पल्लव जैन सपरिवार कलकत्ता, ओमप्रकाश जैन, अंशुल जैन सपरिवार तिजारा, चंद्र कुमार अरुणा पीयूष सपना कृष पर्ल जैन सपरिवार हैदराबाद को प्राप्त हुआ। महापारणा आहार दान आहारचर्या के पुण्यार्जक परिवार आदीश्वर प्रसाद जैन सपरिवार तिजारा, ओमप्रकाश ,अंशुल जैन सपरिवार तिजारा, अखिलेश जैन सपरिवार नोएडा , मौजीलाल जैन सपरिवार नागपुर , चंद्र कुमार अरुणा पियूष सपना कृष पर्ल जैन सपरिवार हैदराबाद, चेतन दोषी सपरिवार अकलूज, सुनील प्रखर सपरिवार चेन्नई , नेमिचन्द दगड़ा सपरिवार असम, राजेश रागी रत्नेश जैन पत्रकार सपरिवार बकस्वाहा रहे।</p>
<p><strong>साधना, ध्यान, तप के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान</strong></p>
<p>श्री गुरुदत्त दि. जैन उदासीन आश्रम द्रोणगिरि के अधिष्ठाता भागचंद्र जैन पीली दुकान ने बताया कि श्री गुरुदत्तादि सहित साढ़े आठ करोड़ मुनिराजों की निर्वाण स्थली लघु सम्मेद शिखरजी श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र द्रोणगिरि प्रकृति की अदभुत छठा सुरम्य वातावरण शयामरी नदी के तट पर स्थित श्री गुरुदत्त दिगम्बर जैन उदासीन आश्रम साधना, ध्यान, तप के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान है। त्यागी वृति आत्म साधना के लिए अग्रसर उदासीन एकल एवं गृहस्थ युगल दंपति सभी के लिए यहां आवास सात्विक शुद्ध आहार औषधि उपचार वैयावृत्ति की श्रेष्ठतम व्यवस्था नि:शुल्क रहती है। यहां सभी आत्मसाधना कर आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यहां भव्य सहस्त्रकूट जिनालय भी निर्माणाधीन है। दान की महिमा अचिंत्य बताई है दानों में दान महादान आहार दान है, वह भी महाव्रती त्यागी आत्मसाधना में रत श्रावकों को दिया गया आहार दान का महाफल होता है। कमेटी ने अपील की है कि आप स्वयं आश्रम में पधार कर अपने कर कमलों से आहार दान देकर सौभाग्य प्राप्त करें।आप यदि नहीं आ सकते तो विभिन्न प्रकार से दान देकर तथा अति चमत्कारी सहस्त्रफणी पारसनाथ भगवान की शांतिधारा करवाकर पुन्य प्राप्त करें।</p>
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