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	<title>udaipur &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>udaipur &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुख्य शीर्षक : जैन सोशल ग्रुप सिटी भिंड की 5 दिवसीय माउंट आबू-उदयपुर धार्मिक व सांस्कृतिक यात्रा सानंद संपन्न </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 05:00:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन सोशल ग्रुप सिटी, भिंड द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय माउंट आबू-उदयपुर धार्मिक एवं सांस्कृतिक यात्रा श्रद्धा, पर्यटन और सामाजिक सरोकार का प्रेरक संगम बनी। यात्रा में तीर्थ दर्शन, सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण एवं जीव दया का संदेश दिया गया। पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट। भिंड। दिगंबर जैन सोशल ग्रुप सिटी, भिंड [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दिगंबर जैन सोशल ग्रुप सिटी, भिंड द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय माउंट आबू-उदयपुर धार्मिक एवं सांस्कृतिक यात्रा श्रद्धा, पर्यटन और सामाजिक सरोकार का प्रेरक संगम बनी। यात्रा में तीर्थ दर्शन, सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण एवं जीव दया का संदेश दिया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भिंड।</strong> दिगंबर जैन सोशल ग्रुप सिटी, भिंड द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय राजस्थान (माउंट आबू-उदयपुर) धार्मिक एवं सांस्कृतिक यात्रा उत्साह, उल्लास और धार्मिक वातावरण के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यात्रा के दौरान सदस्यों ने प्रमुख जैन तीर्थों के दर्शन कर धर्मलाभ अर्जित किया तथा राजस्थान की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों का अवलोकन किया।</p>
<p><strong>प्रथम दिवस की शुरुआत</strong></p>
<p>यात्रा के प्रथम दिन श्रद्धालुओं ने केसरियाजी जैन मंदिर एवं नागफणी पार्श्वनाथ जैन मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद उदयपुर की प्रसिद्ध पिछोला झील में नौकाविहार, नेहरू गार्डन भ्रमण तथा अंडरवाटर एक्वेरियम का अवलोकन किया।</p>
<p><strong>माउंट आबू और ऐतिहासिक धरोहरों का भ्रमण</strong></p>
<p>दूसरे दिन यात्रा दल ने विश्वविख्यात दिलवाड़ा जैन मंदिर के दर्शन कर उसकी अद्भुत स्थापत्य कला का अवलोकन किया। इसके बाद माउंट आबू की मनोरम वादियों एवं सनसेट पॉइंट का आनंद लिया। तीसरे दिन कुंभलगढ़ दुर्ग, विश्व की दूसरी सबसे लंबी दीवार, कुंभलगढ़ रिजर्व सफारी, हल्दीघाटी संग्रहालय तथा नाथद्वारा का भ्रमण किया गया।</p>
<p><strong>मुनिश्री के दर्शन बने यात्रा का आकर्षण</strong></p>
<p>यात्रा के अंतिम चरण में सदस्यों ने उदयपुर के सिटी पैलेस एवं सहेलियों की बाड़ी का भ्रमण किया तथा राजस्थान की लोक संस्कृति से परिचित हुए। यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण मुनि श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज ससंघ के दर्शन एवं मंगल आशीर्वाद प्राप्त करना रहा।</p>
<p><strong>जीव दया का दिया संदेश</strong></p>
<p>दिगंबर जैन सोशल ग्रुप सिटी, भिंड ने अपने जीव दया एवं मानव सेवा अभियान के अंतर्गत विभिन्न तीर्थ एवं सार्वजनिक स्थलों पर &#8220;Mind Your Step – कृपया देखकर चलें&#8221; संदेश वाले पोस्टर लगाकर जीव संरक्षण एवं जागरूकता का संदेश भी दिया।</p>
<p><strong>आयोजकों का सराहनीय योगदान</strong></p>
<p>यात्रा की विस्तृत जानकारी सचिव अंशुल–आयशा जैन ने दी। आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष शैलेंद्र–पूनम जैन, सचिव अंशुल–आयशा जैन, कोषाध्यक्ष रविंद्र–सुधा जैन, शिरोमणि संरक्षक अशोक–जया जैन सर्राफ सहित समस्त पदाधिकारियों एवं सदस्यगण का विशेष योगदान रहा।</p>
<p><strong>सामाजिक संदेश</strong></p>
<p>यह यात्रा केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रही, बल्कि धर्म, संस्कृति, सेवा, जीव दया और सामाजिक एकता का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई। इस आयोजन ने सदस्यों में धार्मिक आस्था के साथ पारिवारिक एवं सामाजिक सौहार्द को भी सुदृढ़ किया।</p>
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		<title>बच्चों को सुविधाएं ही नहीं, समय भी दीजिए : गणिनी आर्यिका सुभूषणमति माताजी ने संस्कार, संस्कृति और जिनेंद्र भक्ति का दिया संदेश </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Jul 2026 13:37:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[देबारी पार्श्वनाथ में आयोजित धर्मसभा में गणिनी आर्यिका श्री सुभूषणमति माताजी ने बच्चों को सुविधाओं के साथ समय देने, जिनेंद्र भक्ति अपनाने तथा करियर के साथ संस्कृति और संस्कारों को भी जीवन में महत्व देने का प्रेरक संदेश दिया। पढ़िए श्रीफल साथी अजीत कोठिया डडूका की यह रिपोर्ट। देबारी। देबारी पार्श्वनाथ में ससंघ विराजमान गुरु [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>देबारी पार्श्वनाथ में आयोजित धर्मसभा में गणिनी आर्यिका श्री सुभूषणमति माताजी ने बच्चों को सुविधाओं के साथ समय देने, जिनेंद्र भक्ति अपनाने तथा करियर के साथ संस्कृति और संस्कारों को भी जीवन में महत्व देने का प्रेरक संदेश दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी अजीत कोठिया डडूका की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>देबारी।</strong> देबारी पार्श्वनाथ में ससंघ विराजमान गुरु परंपरा गौरव, आगमिक प्रखर वक्ता एवं चर्या शिरोमणि गणिनी आर्यिका रत्न श्री सुभूषणमति माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिस प्रकार स्वस्थ शरीर के लिए सभी पोषक तत्व आवश्यक होते हैं, उसी प्रकार स्वस्थ विचार, श्रेष्ठ आचरण और सकारात्मक चिंतन के लिए आध्यात्मिक संस्कार आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि जीवन का सबसे महत्वपूर्ण तत्व जिनेंद्र भक्ति है।</p>
<p><strong>बच्चों को समय देना सबसे बड़ा संस्कार</strong></p>
<p>आर्यिका माताजी ने कहा कि आज माता-पिता बच्चों को हर सुविधा तो उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन उनके साथ समय नहीं बिता पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल भौतिक सुख-सुविधाएं ही नहीं, बल्कि संस्कार, स्नेह और परिवार का समय भी मिलना चाहिए। यही उनके उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है।</p>
<p><strong>करियर के साथ संस्कृति भी जरूरी</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि करियर बनाना आवश्यक है, लेकिन उसके लिए अपनी संस्कृति और मूल्यों को नहीं खोना चाहिए। अच्छे विचार, अच्छी वाणी और श्रेष्ठ चिंतन बाजार में नहीं मिलते, बल्कि परिवार, गुरु और धर्म से प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि विचार स्वस्थ होंगे तो जीवन भी स्वस्थ बनेगा।</p>
<p><strong>पुण्य की पूंजी बढ़ाने का आह्वान</strong></p>
<p>माताजी ने कहा कि मनुष्य जन्म और जैन कुल की प्राप्ति अत्यंत दुर्लभ है। इसलिए इस अवसर का सदुपयोग करते हुए अधिक से अधिक पुण्य अर्जित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाप का त्याग विवेकपूर्वक करना चाहिए तथा आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए पुण्य की पूंजी में निरंतर वृद्धि करनी चाहिए।</p>
<p><strong>गुरु और जिनवाणी का बताया महत्व</strong></p>
<p>धर्मसभा में माताजी ने गुरु और जिनवाणी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि माता जीवन देती है, लेकिन जिनवाणी आत्मज्ञान का मार्ग दिखाती है और गुरु उस ज्ञान को जीवन में उतारना सिखाते हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से जिनवाणी के अध्ययन और गुरुजनों के प्रति श्रद्धा बनाए रखने का आह्वान किया।</p>
<p><strong>जानकारी दी</strong></p>
<p>कार्यक्रम की जानकारी अंजली जैन, हथौली (मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश) ने दी।</p>
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		<title>उदयपुर जिले के कई कस्बों में दिगंबर जैन युवा महासभा का गठन : युवाओं को नेतृत्व और समाजसेवा से जोड़ने की पहल </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:02:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन युवा महासभा द्वारा राजस्थान के विभिन्न जिलों एवं कस्बों में संगठन विस्तार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में कोटड़ा (उदयपुर) की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। पढ़िए श्रीफल साथी सुरेश चंद्र गांधी की यह रिपोर्ट। उदयपुर। दिगंबर जैन युवा महासभा द्वारा राजस्थान में संगठन विस्तार अभियान के तहत विभिन्न जिलों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दिगंबर जैन युवा महासभा द्वारा राजस्थान के विभिन्न जिलों एवं कस्बों में संगठन विस्तार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में कोटड़ा (उदयपुर) की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सुरेश चंद्र गांधी की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>उदयपुर।</strong> दिगंबर जैन युवा महासभा द्वारा राजस्थान में संगठन विस्तार अभियान के तहत विभिन्न जिलों एवं कस्बों में नई कार्यकारिणियों का गठन किया जा रहा है। इसी कड़ी में उदयपुर जिले के कोटड़ा कस्बे की कार्यकारिणी का गठन राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष विकेश मेहता के नेतृत्व में किया गया।</p>
<p><strong>नई कार्यकारिणी की घोषणा</strong></p>
<p>राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष विकेश मेहता ने कोटड़ा इकाई के अध्यक्ष पद पर विमल कोठारी, महामंत्री पद पर जिग्नेश जैन तथा महिला शाखा अध्यक्ष पद पर हेमलता जैन को मनोनीत किया। नव नियुक्त पदाधिकारियों का समाजजनों ने स्वागत करते हुए शुभकामनाएं दीं।</p>
<p><strong>युवाओं को मिलेगा नेतृत्व का अवसर</strong></p>
<p>दिगंबर जैन युवा महासभा के भानु कुमार जैन ने बताया कि संगठन का उद्देश्य प्रतिभावान युवाओं को आगे लाना तथा उन्हें समाजहित के कार्यों से जोड़ना है। विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं को जिम्मेदारियां देकर समाज में नेतृत्व क्षमता विकसित की जा रही है।</p>
<p><strong>संगठन विस्तार पर विशेष जोर</strong></p>
<p>विकेश मेहता ने बताया कि महासभा द्वारा पूरे देश के लगभग 600 जिलों एवं जैन बाहुल्य कस्बों में कार्यकारिणियों का गठन करने की योजना है। इसके माध्यम से युवा प्रतिभाओं को नया मंच प्रदान किया जाएगा तथा उन्हें साधु सेवा, समाज सेवा और धार्मिक गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।</p>
<p><strong>जैन समाज की एकता को मिलेगा बल</strong></p>
<p>महासभा का मानना है कि संगठित युवा शक्ति समाज की प्रगति का आधार है। संगठन के माध्यम से युवाओं में सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा तथा जैन समाज की एकता को नई मजबूती मिलेगी।</p>
<p><strong>बधाइयों का लगा तांता</strong></p>
<p>मेवाड़ क्षेत्र में कोटड़ा कार्यकारिणी के गठन पर दिगंबर जैन महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गजराज गंगवाल, पवन गोधा, शरद कासलीवाल, सुमित जैन सहित अनेक पदाधिकारियों एवं समाजजनों ने नव नियुक्त टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं।</p>
<p><strong>युवा शक्ति को मिलेगा नया मंच</strong></p>
<p>संगठन पदाधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि नई कार्यकारिणी समाज में सकारात्मक कार्यों को गति देगी तथा युवाओं को धर्म, संस्कार और समाज सेवा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।</p>
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		<title>उदयपुर में गूंजी प्राकृत वाणी ने शिविरार्थियों को दिया अकूत ज्ञान : 20 मंदिरों के प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में हुआ समापन समारोह  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:32:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में उदयपुर के 20 मंदिरों में आयोजित प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का सामूहिक समापन एवं सम्मान समारोह विश्वविद्यालय के बप्पा रावल सभागार में आचार्यश्री सुनीलसागर जी के पावन आशीर्वाद से हुआ। उदयपुर से पढ़िए, रत्नेश जैन /राजेश रागी बकस्वाहा की यह रिपोर्ट&#8230; उदयपुर। प्राकृत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में उदयपुर के 20 मंदिरों में आयोजित प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का सामूहिक समापन एवं सम्मान समारोह विश्वविद्यालय के बप्पा रावल सभागार में आचार्यश्री सुनीलसागर जी के पावन आशीर्वाद से हुआ। <span style="color: #ff0000">उदयपुर से पढ़िए, रत्नेश जैन /राजेश रागी बकस्वाहा की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>उदयपुर</strong>। प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में उदयपुर के 20 मंदिरों में आयोजित प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का सामूहिक समापन एवं सम्मान समारोह विश्वविद्यालय के बप्पा रावल सभागार में आचार्यश्री सुनीलसागर जी के पावन आशीर्वाद से हुआ। समारोह का शुभारंभ विश्वविद्यालय के डीन प्रो. नीरज शर्मा, सकल दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारियों एवं विशिष्ट अतिथियों के दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। विभिन्न जैन पाठशालाओं के विद्यार्थियों ने प्राकृत भाषा आधारित मंगलाचरण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं नाट्य मंचन कर उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। मुख्य अतिथि प्रो. नीरज शर्मा ने अपने उद्बोधन में प्राकृत भाषा को भारतीय भाषाओं की आधारशिला बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर ऐसे आयोजन भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>
<p><strong>देश के 108 स्थानों पर प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर किए जाने की घोषणा</strong></p>
<p>शिविर के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. आशीष जैन आचार्य ने बताया कि शिविर के माध्यम से प्राकृत भाषा, जैन संस्कार, नीति ग्रंथों एवं भारतीय संस्कृति का शिक्षण प्रदान किया गया, जिसमें उदयपुर के लगभग 1100 शिविरार्थियों ने सहभागिता की। शिविर संयोजक रितेश जैन ने बताया कि समारोह का शुभारंभ सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत, महामंत्री सुरेश पद्मावत, विश्वविद्यालय के डीन प्रोफेसर नीरज शर्मा, डॉ. जिनेंद्र जैन, डॉ. ज्योति बाबू शास्त्री, डॉ. सुमत जैन, डॅा. शैलेष जैन, धरणेन्द्र जैन शास्त्री, कमलकुमार जैन एवं बी.एल. गोदावत सहित आमंत्रित अतिथियों ने किया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट शिविरार्थियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया तथा स्थानीय संयोजकों एवं शिक्षकों का अभिनंदन भी किया गया। आगामी वर्ष देशभर के 108 स्थानों पर प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर किए जाने की घोषणा भी की गई।</p>
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		<title>उदयपुर में गूंजी प्राकृत वाणी ने शिविरार्थियों को दिया अकूत ज्ञान : 20 मंदिरों के प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में हुआ समापन समारोह  </title>
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		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:02:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में उदयपुर के 20 मंदिरों में आयोजित प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का सामूहिक समापन एवं सम्मान समारोह विश्वविद्यालय के बप्पा रावल सभागार में आचार्यश्री सुनीलसागर जी के पावन आशीर्वाद से हुआ। उदयपुर से पढ़िए, रत्नेश जैन /राजेश रागी बकस्वाहा की यह रिपोर्ट&#8230; उदयपुर। प्राकृत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में उदयपुर के 20 मंदिरों में आयोजित प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का सामूहिक समापन एवं सम्मान समारोह विश्वविद्यालय के बप्पा रावल सभागार में आचार्यश्री सुनीलसागर जी के पावन आशीर्वाद से हुआ। <span style="color: #ff0000">उदयपुर से पढ़िए, रत्नेश जैन /राजेश रागी बकस्वाहा की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>उदयपुर।</strong> प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में उदयपुर के 20 मंदिरों में आयोजित प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का सामूहिक समापन एवं सम्मान समारोह विश्वविद्यालय के बप्पा रावल सभागार में आचार्यश्री सुनीलसागर जी के पावन आशीर्वाद से हुआ। समारोह का शुभारंभ विश्वविद्यालय के डीन प्रो. नीरज शर्मा, सकल दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारियों एवं विशिष्ट अतिथियों के दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। विभिन्न जैन पाठशालाओं के विद्यार्थियों ने प्राकृत भाषा आधारित मंगलाचरण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं नाट्य मंचन कर उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। मुख्य अतिथि प्रो. नीरज शर्मा ने अपने उद्बोधन में प्राकृत भाषा को भारतीय भाषाओं की आधारशिला बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर ऐसे आयोजन भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>
<p><strong>देश के 108 स्थानों पर प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर किए जाने की घोषणा</strong></p>
<p>शिविर के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. आशीष जैन आचार्य ने बताया कि शिविर के माध्यम से प्राकृत भाषा, जैन संस्कार, नीति ग्रंथों एवं भारतीय संस्कृति का शिक्षण प्रदान किया गया, जिसमें उदयपुर के लगभग 1100 शिविरार्थियों ने सहभागिता की। शिविर संयोजक रितेश जैन ने बताया कि समारोह का शुभारंभ सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत, महामंत्री सुरेश पद्मावत, विश्वविद्यालय के डीन प्रोफेसर नीरज शर्मा, डॉ. जिनेंद्र जैन, डॉ. ज्योति बाबू शास्त्री, डॉ. सुमत जैन, डॅा. शैलेष जैन, धरणेन्द्र जैन शास्त्री, कमलकुमार जैन एवं बी.एल. गोदावत सहित आमंत्रित अतिथियों ने किया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट शिविरार्थियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया तथा स्थानीय संयोजकों एवं शिक्षकों का अभिनंदन भी किया गया। आगामी वर्ष देशभर के 108 स्थानों पर प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर किए जाने की घोषणा भी की गई।</p>
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		<title>मुनि श्री आदित्यसागर जी का 40वां अवतरण दिवस 24 को मनाया जाएगा : देश-विदेश से जुटेंगे गुरुभक्त </title>
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		<pubDate>Sat, 23 May 2026 17:10:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के संसघ के विशुद्धकुल गौरव मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज का 40वां अवतरण दिवस 24 मई रविवार को नरसिंह वाटिका, एरोड्रम रोड पर बड़े ही श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के संसघ के विशुद्धकुल गौरव मुनि श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के संसघ के विशुद्धकुल गौरव मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज का 40वां अवतरण दिवस 24 मई रविवार को नरसिंह वाटिका, एरोड्रम रोड पर बड़े ही श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के संसघ के विशुद्धकुल गौरव मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज का 40वां अवतरण दिवस 24 मई रविवार को नरसिंह वाटिका, एरोड्रम रोड पर बड़े ही श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस भव्य धार्मिक महोत्सव का आयोजन गुरु भक्तों एवं अंजनी नगर जैन समाज के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम को मुनि श्री अप्रमित सागर जी, मुनि श्री सहज सागर जी एवं छुल्लक श्री श्रेयस सागर जी का मंगलमय सानिध्य प्राप्त होगा।</p>
<p>समाज प्रवक्ता राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनि श्री के 40वें पावन अवतरण दिवस पर देशभर के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। इस उत्सव में सम्मिलित होने के लिए जयपुर, भीलवाड़ा, कोटा, भोपाल, बेंगलुरु, उज्जैन, उदयपुर और जबलपुर सहित देश के विभिन्न कोनों से गुरु भक्त इंदौर आ रहे हैं। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महामुनिराज की परंपरा के मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज ने अल्प आयु में ही जैनेश्वरी दीक्षा अंगीकार कर ली थी और उनका सम्पूर्ण जीवन जिनशासन की प्रभावना, शास्त्र स्वाध्याय एवं जन-कल्याण हेतु समर्पित है।</p>
<p>वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र ने मुनि श्री के गुणों की प्रशंसा करते हुए कहा कि तप, त्याग, संयम एवं शास्त्र साधना की साक्षात प्रतिमूर्ति गुरुदेव के मुखारविंद से निःसृत जिनवाणी का प्रत्येक शब्द भव्य जीवों को मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर करता है। मुनि श्री की सरल-सहज मुस्कान, परम उपकारी व्यक्तित्व, करुणा भाव, गहन तत्त्वज्ञान और नीति बोध लाखों श्रद्धालुओं के लिए अनंत प्रेरणा, मार्गदर्शन और आत्म-कल्याण का अमूल्य उपहार है। सकल जैन समाज इस पावन अवसर को बड़े ही हर्षोल्लास और उत्सव के रूप में मनाने की तैयारियों में जुटा है।</p>
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		<title>तीर्थंकर दिवस जन कल्याण और अध्यात्म मय करने में सहभागी : ऋषभदेव दिवस भारतीय संस्कृति सभ्यता-संस्कार का शंखनाद </title>
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		<pubDate>Fri, 27 Mar 2026 09:02:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राजस्थान सरकार की महत्त्वपूर्ण पहल तीर्थंकर दिवस(ऋषभ नवमी) के अवसर पर जैन विद्या एवं प्राकृत विभाग,सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय, मोहनलाल सुखाड़िया, विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा ‘‘जीवन निर्वाह एवं जीवन निर्माण के सूत्रधार तीर्थंकर ऋषभदेव‘‘ पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया। उदयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; उदयपुर। राजस्थान सरकार की महत्त्वपूर्ण पहल तीर्थंकर दिवस(ऋषभ नवमी) के अवसर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राजस्थान सरकार की महत्त्वपूर्ण पहल तीर्थंकर दिवस(ऋषभ नवमी) के अवसर पर जैन विद्या एवं प्राकृत विभाग,सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय, मोहनलाल सुखाड़िया, विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा ‘‘जीवन निर्वाह एवं जीवन निर्माण के सूत्रधार तीर्थंकर ऋषभदेव‘‘ पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया। <span style="color: #ff0000">उदयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>उदयपुर।</strong> राजस्थान सरकार की महत्त्वपूर्ण पहल तीर्थंकर दिवस(ऋषभ नवमी) के अवसर पर जैन विद्या एवं प्राकृत विभाग,सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय, मोहनलाल सुखाड़िया, विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा ‘‘जीवन निर्वाह एवं जीवन निर्माण के सूत्रधार तीर्थंकर ऋषभदेव‘‘ पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के लिए प्रो. बी.पी. सारस्वत, कुलगुरु मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर ने अपना संरक्षण तथा प्रो. एम.एस राठौड, अधिष्ठाता आर्ट्स महाविद्यालय ने अपना मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम का प्रारम्भ तीर्थंकर ऋषभदेव के मधुर मंगलगान से हुआ। इसके बाद प्रभारी अध्यक्ष डॉ. सुमतकुमार जैन ने समागत अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह तीर्थंकर ऋषभदेव दिवस भारतीय संस्कृति-सभ्यता-संस्कार का शंखनाद है,जिससे आज जन-जन प्रभावित हो रहा है क्योंकि, तीर्थंकर ऋषभदेव ने समाज को निर्वाह करने के साथ अपने सम्यक् जीवन-विकास की प्रेरणा प्रदान कर अध्यात्म की ओर सन्मुख होने का मार्गदर्शन किया। मुख्य वक्ता प्रो.प्रेम सुमन जैन ने अपने वक्तव्य में कहा कि जैनधर्म के प्रवर्त्तक तीर्थंकर ऋषभदेव रहे और उसके व्याख्याकार भगवान् महावीर थे,न कि प्रवर्त्तक।</p>
<p><strong>नारी-शिक्षा का सर्व प्रथम सूत्रपात किया</strong></p>
<p>मुख्य अतिथि डॉ.देव कोठारी ने कहा कि ऋषभदेव ने प्राचीनता और ऐतिहासिक दृष्टि से ब्रह्मी और सुन्दरी के माध्यम से नारी-शिक्षा का सर्व प्रथम सूत्रपात किया था। विशिष्ट अतिथि डा. नवीन नंदवाना ने सारगर्भित वक्तव्य में कहा कि तीर्थंकर महापुरुषों ने आत्मानुशासन, इन्द्रिय संयम,रिश्तों में सामंजस्य जैसे महत्त्वपूर्ण पक्षों को जीवन-निर्वाह के लिए अनिवार्य बताया है। प्रो. पारसमल अग्रवाल ने अपने वक्तव्य देते हुए विवेचित किया कि तीर्थंकर ऋषभदेव द्वारा स्थापित क्षमा व्यक्ति और समाज के सम्यक् जीवन-निर्वाह और जीवन-निर्माण में महत्त्वपूर्ण है। उपस्थित सभी वरिष्ठ मनीषियों ने राजस्थान सरकार के प्रति हार्दिक धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया और कहा कि सरकार की इस पहल से विद्यार्थी, शोधार्थी एवं जन-सामान्य निश्चित ही लाभान्वित हुए हैं और होगें,इस तरह के समाज हितकारी आयोजन सरकार के माध्यम से होते रहना चाहिए। साथ ही सभी उपस्थित विद्वानों ने भी राजस्थान सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया कि सरकार ने तीर्थंकर दिवस प्रदेश भर में आयोजन करने का महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है और सुखाडिया विश्वविद्यालय ने इस तीर्थंकर ऋषभदेव जन्म एवं दीक्षा कल्याणक मना कर उस आदेश की परिपालना की है।</p>
<p><strong>यह मौजूद रहे</strong></p>
<p>अंत में डॉ. ज्योतिबाबू जैन ने सभी अतिथियों का धन्यवाद किया एवं संचालन धर्णेन्द्र जैन किया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के संकाय सदस्य डॉ.सतीश अग्रवाल, डॉ. सुरेश सालवी,डॉ.मुकेश मीणा, डॉ.मनीष मलयकेतु डॉ.सरोज जैन आदि उपस्थित रहे तथा विभाग के शोधार्थी डा.पुष्पा कोठारी, डॉ.रेखा जैन, डॉ.सीमा जैन, डॉ.निर्मला बैनाडा आदि के साथ अनेक विद्यार्थी एवं गणमान्य नागरिकों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को सफल बनाया।</p>
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		<title>उदयपुर में संध्या नाहर का किया देहदान: देहदान की यह प्रक्रिया समाज के लिए बनी मिसाल </title>
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		<pubDate>Wed, 14 Jan 2026 09:02:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उदयपुर की जानी-मानी समाजसेविका स्व. संध्या नाहर (धर्मपत्नी-स्व. चंद्रसिंह नाहर) का 12 जनवरी को निधन हो गया था। उनके जीवन के अंतिम संकल्प के अनुसार 13 जनवरी को उनकी पार्थिव देह का दान आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर में किया गया। उदयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; उदयपुर। उदयपुर की जानी-मानी समाजसेविका स्व. संध्या नाहर (धर्मपत्नी-स्व. चंद्रसिंह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>उदयपुर की जानी-मानी समाजसेविका स्व. संध्या नाहर (धर्मपत्नी-स्व. चंद्रसिंह नाहर) का 12 जनवरी को निधन हो गया था। उनके जीवन के अंतिम संकल्प के अनुसार 13 जनवरी को उनकी पार्थिव देह का दान आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर में किया गया। <span style="color: #ff0000">उदयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>उदयपुर</strong>। उदयपुर की जानी-मानी समाजसेविका स्व. संध्या नाहर (धर्मपत्नी-स्व. चंद्रसिंह नाहर) का 12 जनवरी को निधन हो गया था। उनके जीवन के अंतिम संकल्प के अनुसार 13 जनवरी को उनकी पार्थिव देह का दान आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर में किया गया। परिजनों के अनुसार, उनकी पार्थिव देह को उनके निवास से मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। जहां चिकित्सा शिक्षा और शोध कार्य के लिए उनका देहदान किया गया। स्व. संध्या नाहर का यह निर्णय समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण माना जा रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इस देहदान से भविष्य के डॉक्टरों को अध्ययन का अवसर मिलेगा और इससे आने वाले समय में कई रोगियों के जीवन को बचाने में मदद मिलेगी। शोक संतप्त परिवार में राजकुमारी नाहर (चाची), मोहित रिया नाहर (पुत्र एवं पुत्रवधू), यामिनी वरुण, वन्या, वयांश सुराणा (पुत्री परिवार) सहित नाहर, भूरट, भंडारी, खाब्या एवं सांखला परिवार शामिल हैं। परिवारजनों ने आमजन से अपील की है कि स्व. संध्या नाहर के इस पुण्य कार्य से प्रेरणा लेकर देहदान जैसे मानवीय संकल्प को अपनाएं।</p>
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		<title>राज्यपाल कटारिया ने किया जैन कैलेंडर का लोकार्पण : विशिष्ट जैन कैलेंडर का प्रकाशन तारक गुरु जैन ग्रंथालय, उदयपुर ने किया है </title>
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		<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 11:33:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रमण संस्कृति के गौरव, आध्यात्मिक चेतना और कालबोध की वैज्ञानिक परंपरा को समर्पित ‘गुरु पुष्कर देवेंद्र जैन कैलेंडर 2026’ का लोकार्पण रविवार को चंडीगढ़ स्थित राजभवन (लोक भवन) में हुआ। इस विशिष्ट जैन कैलेंडर का प्रकाशन तारक गुरु जैन ग्रंथालय, उदयपुर ने किया है। उदयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; उदयपुर। श्रमण संस्कृति के गौरव, आध्यात्मिक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्रमण संस्कृति के गौरव, आध्यात्मिक चेतना और कालबोध की वैज्ञानिक परंपरा को समर्पित ‘गुरु पुष्कर देवेंद्र जैन कैलेंडर 2026’ का लोकार्पण रविवार को चंडीगढ़ स्थित राजभवन (लोक भवन) में हुआ। इस विशिष्ट जैन कैलेंडर का प्रकाशन तारक गुरु जैन ग्रंथालय, उदयपुर ने किया है। <span style="color: #ff0000">उदयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>उदयपुर।</strong> श्रमण संस्कृति के गौरव, आध्यात्मिक चेतना और कालबोध की वैज्ञानिक परंपरा को समर्पित ‘गुरु पुष्कर देवेंद्र जैन कैलेंडर 2026’ का लोकार्पण रविवार को चंडीगढ़ स्थित राजभवन (लोक भवन) में गरिमामय वातावरण में हुआ। इस विशिष्ट जैन कैलेंडर का प्रकाशन तारक गुरु जैन ग्रंथालय, उदयपुर द्वारा किया गया। जिसका लोकार्पण श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनि महाराज, डॉ. द्वीपेंद्र मुनि महाराज एवं डॉ. पुष्पेंद्र मुनि महाराज के सान्निध्य में पंजाब के राज्यपाल चंडीगढ़ प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने किया। राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय के इस प्रयास की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे प्रकाशन केवल धार्मिक उपयोग तक सीमित नहीं रहते, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपरा और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उपाध्याय पुष्कर मुनि और आचार्य देवेंद्र मुनि जी के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने की यह पहल अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि संस्कृति, संस्कार और समय-चेतना—इन तीनों का संतुलन ही समाज को सुदृढ़ बनाता है। इस अवसर पर सलाहकार दिनेश मुनि ने कहा कि काल की शुद्ध गणना, संयमित जीवन और पर्वों का अनुशासित पालन ही जैन जीवनशैली की आत्मा है और यह कैलेंडर उसी अनुशासन का सशक्त माध्यम है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-97671" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260104-WA0002-300x224.jpg" alt="" width="300" height="224" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260104-WA0002-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260104-WA0002-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260104-WA0002-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260104-WA0002-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260104-WA0002.jpg 642w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>सांस्कृतिक और वैज्ञानिक मार्गदर्शिका है</strong></p>
<p>समारोह में डॉ. द्वीपेंद्र मुनि महाराज ने कैलेंडर की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह प्रकाशन केवल तिथियों का संकलन नहीं, बल्कि जैन श्रावक-श्राविकाओं के लिए एक संपूर्ण धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक मार्गदर्शिका है। कैलेंडर में भगवान महावीर निर्वाण संवत, विक्रम संवत, शक संवत आदि के साथ ही दैनिक तिथि, जैन पंचकल्याणक पर्व, श्रमण संघ पर्व, लौकिक एवं राष्ट्रीय पर्व की तिथियों आदि की जानकारी है। पाक्षिक पक्खी पर्व, पच्चखान मार्गदर्शिका सहित विभिन्न जानकारी समाहित है।</p>
<p><strong>बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे</strong></p>
<p>इस अवसर पर शिवकुमार बागरेचा, मुकेश सांड (जैन) सहित अनेक गणमान्य अतिथि, श्रावक-श्राविकाएं एवं सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने इस उपयोगी, तथ्यपरक और आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्ध कैलेंडर के प्रकाशन पर हर्ष व्यक्त किया तथा इसे समाज के लिए मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ बताया।</p>
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		<title>पांचवीं स्नातकोत्तर उपाधि पर हुआ प्राप्त : डॉ. सोनल कुमार जैन को जैनागम एवं प्राकृत साहित्य में स्वर्ण पदक </title>
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		<pubDate>Wed, 24 Dec 2025 12:33:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय,उदयपुर के 33वें दीक्षांत समारोह में जैन दर्शन एवं प्राकृत साहित्य विषय में एम.ए. परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रीपरिषद् के राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री एवं युवा मनीषी डॉ. सोनल कुमार जैन को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। पढ़िए मनीष विद्यार्थी सागर की विशेष रिपोर्ट&#8230; सागर। मोहनलाल सुखाड़िया [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय,उदयपुर के 33वें दीक्षांत समारोह में जैन दर्शन एवं प्राकृत साहित्य विषय में एम.ए. परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रीपरिषद् के राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री एवं युवा मनीषी डॉ. सोनल कुमार जैन को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनीष विद्यार्थी सागर की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>सागर</strong>। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय,उदयपुर के 33वें दीक्षांत समारोह में जैन दर्शन एवं प्राकृत साहित्य विषय में एम.ए. परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रीपरिषद् के राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री एवं युवा मनीषी डॉ. सोनल कुमार जैन को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय से 202 महाविद्यालय संबद्ध हैं। इस दीक्षांत समारोह में कुल 254 शोधोपाधियां तथा 109 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।</p>
<p>समारोह में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, राजस्थान सरकार के उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा तथा राज्य मंत्री डॉ. मंजू बाघमार सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। स्वर्ण पदक का वितरण इन विशिष्ट अतिथियों द्वारा किया गया। दीक्षांत समारोह का मुख्य दीक्षांत भाषण पंजाब के राज्यपाल एवं केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने दिया।</p>
<p>डॉ. सोनल कुमार जैन को यह स्वर्ण पदक उनकी पांचवीं स्नातकोत्तर उपाधि पर प्राप्त हुआ है। यह अब तक उन्हें मिलने वाला सातवां स्वर्ण पदक है। उनकी इस उल्लेखनीय शैक्षणिक उपलब्धि पर अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रिपरिषद् सहित देशभर के विद्वानों, शिक्षाविदों, मनीषी विद्यार्थियों, सागर परिजनों एवं समाजजनों ने उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।</p>
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