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	<title>Tribute श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>Tribute श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के मुख्य प्रबंधक उमानाथ दुबे का आकस्मिक निधन: छाया शोक, राष्ट्रीय कमेटी के साथ ही मध्यांचल कमेटी ने दी श्रद्धांजली  </title>
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		<pubDate>Fri, 29 May 2026 12:57:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रमण संस्कृति और दिगंबर जैन तीर्थों के संरक्षण संवर्धन में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले, भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी प्रधान कार्यालय मुंबई के मुख्य प्रबंधक एवं श्री बीसपंथी कोठी मधुवन, सम्मेद शिखर जी के प्रधान कार्यालय के महाप्रबंधक उमानाथ दुबे का शुक्रवार को प्रातः काल आकस्मिक निधन हो जाने से कमेटी में शोक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्रमण संस्कृति और दिगंबर जैन तीर्थों के संरक्षण संवर्धन में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले, भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी प्रधान कार्यालय मुंबई के मुख्य प्रबंधक एवं श्री बीसपंथी कोठी मधुवन, सम्मेद शिखर जी के प्रधान कार्यालय के महाप्रबंधक उमानाथ दुबे का शुक्रवार को प्रातः काल आकस्मिक निधन हो जाने से कमेटी में शोक छा गया। <span style="color: #ff0000">बकस्वाहा से रत्नेश जैन रागी की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बकस्वाहा।</strong> श्रमण संस्कृति और दिगंबर जैन तीर्थों के संरक्षण संवर्धन में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले, भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी प्रधान कार्यालय मुंबई के मुख्य प्रबंधक एवं श्री बीसपंथी कोठी मधुवन, सम्मेद शिखर जी के प्रधान कार्यालय के महाप्रबंधक उमानाथ दुबे का शुक्रवार को प्रातः काल आकस्मिक निधन हो जाने से कमेटी और देश के संपूर्ण जैन समाज तथा जैन तीर्थ क्षेत्र की कमेटियों में शोक छा गया। दुबे ने लगभग 59 वर्षों तक कमेटी के मुंबई मुख्य कार्यालय में अत्यन्त निष्ठा, निष्पक्षता, समर्पण एवं निस्पृह भाव से अपनी सेवाएँ प्रदान की। उनका संपूर्ण जीवन जैन तीर्थों की सेवा, संरक्षण तथा संगठन के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण रहा है।</p>
<p>उनके निधन से तीर्थक्षेत्र कमेटी एवं तीर्थक्षेत्र व्यवस्था को अपूरणीय क्षति हुई है। उनकी कर्मनिष्ठा, सरलता एवं सेवाभाव, वात्सल्य और मिलनसार व्यक्तित्व, समाज के प्रति समर्पण सदैव जीवंत और स्मरणीय रहेगा। भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बूप्रसाद जैन, राष्ट्रीय महामंत्री संतोष पेंडारी, राष्ट्रीय मंत्री वीरेश सेठ, हसमुख गांधी तथा मध्यांचल कमेटी के अध्यक्ष डीके जैन, कार्यकारी अध्यक्ष तथा बुंदेलखंड प्रभारी संतोषकुमार जैन घड़ी, महामंत्री राजकुमार जैन घाटे, प्रचार प्रमुख, प्रवक्ता राजेश जैन रागी सहित पूरे भारतवर्ष के 9 अंचलों के अध्यक्ष सहित मध्यांचल कमेटी के पदाधिकारी व सदस्यों ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भगवान जिनेंद्र देव से प्रार्थना की है कि उनकी आत्मा को शाश्वत चिरस्थाई शांति एवं सद्गति प्राप्त हो तथा शोकाकुल परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।</p>
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		<title>पंडित रतनलाल जी शास्त्री को श्रद्धांजलि :  जैनिज्म की लंबी लकीर खींच गए पंडित जी </title>
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		<pubDate>Sun, 06 Apr 2025 12:03:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[&#8220;आत्म विजयी होना विश्व विजेता होने से भी बड़ा है,&#8221; यह महावीर का महान संदेश है। इस संदेश को आत्मसात करते हुए परम पूज्य पंडित रतनलाल जी शास्त्री, जिन्हें आत्मानंद जी महाराज के नाम से भी जाना जाता है, आत्म विजयी होकर आत्मा को परमात्मा में विलीन हो गए। पढ़िए नकुल पाटोदी की विशेष रिपोर्ट&#8230; [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>&#8220;आत्म विजयी होना विश्व विजेता होने से भी बड़ा है,&#8221; यह महावीर का महान संदेश है। इस संदेश को आत्मसात करते हुए परम पूज्य पंडित रतनलाल जी शास्त्री, जिन्हें आत्मानंद जी महाराज के नाम से भी जाना जाता है, आत्म विजयी होकर आत्मा को परमात्मा में विलीन हो गए। पढ़िए नकुल पाटोदी की विशेष रिपोर्ट&#8230;</strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> &#8220;आत्म विजयी होना विश्व विजेता होने से भी बड़ा है,&#8221; यह महावीर का महान संदेश है। इस संदेश को आत्मसात करते हुए परम पूज्य पंडित रतनलाल जी शास्त्री, जिन्हें आत्मानंद जी महाराज के नाम से भी जाना जाता है, आत्म विजयी होकर आत्मा को परमात्मा में विलीन हो गए। भगवान महावीर के आत्मधर्म के प्रति अडिग श्रद्धा ने पंडित जी को आत्मा की पहचान पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने 14 दिनों तक संयम और साधना के साथ आत्मा की यात्रा की। पंडित जी ने जीवन को इस प्रकार जिया कि वे देह के बंधन से मुक्त हो गए।</p>
<p>उनका यह दिन मृत्यु नहीं, बल्कि मुक्ति का पर्व था। आत्मजयी पंडित जी ने भगवान महावीर की विराट विरासत को अपनाकर &#8220;बाहर से छूटो और भीतर जाओ&#8221; की साधना की। संयम, तप और कठिन पुरुषार्थ से उन्होंने जैनिज़्म की एक लंबी लकीर खींची और बिना किसी असुविधा के मुक्ति को प्राप्त किया। वे महावीर की मुक्ति के हिमायती और मोक्ष मार्ग के साधक थे। दिगंबर जैन समाज, विशेषकर सामाजिक संसद शीशमहल के अध्यक्ष नरेंद्र वेद, महामंत्री डीके जैन, कोषाध्यक्ष पिंकी टोग्या, युवा अध्यक्ष महावीर जैन, अनामिका मनोज बाकलीवाल और सम्पूर्ण जैन समाज की ओर से परम पूज्य पंडित रतनलाल जी शास्त्री (आत्मानंद जी महाराज) को श्रद्धांजलि अर्पित की है।</p>
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		<title>कार्यशाला में 40 शाखायें हुईं शामिल : बड़े बाबा मंदिर प्रांगण में किया वृक्षारोपण </title>
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		<pubDate>Tue, 09 Jul 2024 10:15:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन मिलन क्षेत्र क्र.10 की प्रथम कार्यकारिणी की बैठक राष्ट्रीय मंत्री अतिवीर एड. कमलेंद्र जैन के मुख्यअतिथित्व एवं क्षेत्रीय अध्यक्ष अतिवीर अरुण चंदेरिया की अध्यक्षता में बड़े बाबा जैन मिलन पटेरा के तत्वावधान में श्री दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर जिला दमोह में संपन्न हुई। बड़े बाबा मंदिर परिषद में वृक्षारोपण सभी आई हुई शाखों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन मिलन क्षेत्र क्र.10 की प्रथम कार्यकारिणी की बैठक राष्ट्रीय मंत्री अतिवीर एड. कमलेंद्र जैन के मुख्यअतिथित्व एवं क्षेत्रीय अध्यक्ष अतिवीर अरुण चंदेरिया की अध्यक्षता में बड़े बाबा जैन मिलन पटेरा के तत्वावधान में श्री दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर जिला दमोह में संपन्न हुई। बड़े बाबा मंदिर परिषद में वृक्षारोपण सभी आई हुई शाखों द्वारा किया गया, जिसमें 100 नीम के वृक्ष लगाये गये। क्षेत्रीय अध्यक्ष की अनुमति से समाधिस्थ गणाचार्य परम् पूज्य आचार्य विराग सागर जी महाराज को श्रद्धांजलि दी गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनीष सागर विद्यार्थी की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> कुंडलपुर।</strong> जैन मिलन क्षेत्र क्र.10 की प्रथम कार्यकारिणी की बैठक राष्ट्रीय मंत्री अतिवीर एड. कमलेंद्र जैन के मुख्यअतिथित्व एवं क्षेत्रीय अध्यक्ष अतिवीर अरुण चंदेरिया की अध्यक्षता में बड़े बाबा जैन मिलन पटेरा के तत्वावधान में श्री दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर जिला दमोह में संपन्न हुई। कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अतिवीर नेमकुमार सराफ़, अति वीर इंजी. आर के जैन, वीर संजय जैन शक्कर, प्रमोद भाईजी, सुधीर जैन डवलू,दिलेश चौधरी, ललित सराफ, जिनेश बहरोल, मनीष जैन विधार्थी, वीरांगना अर्चना जैन, ममता जैन , कल्पना सेठ, संगीता चन्देरिया, मंन्जु सतभैया, आदि रहे। कार्यक्रम की शुरुआत महावीर वंदना बंसुधरा नगर एवं टंडन बगीचा की बहनों द्वारा किया गया एवं मंगलाचरण डॉ रवि जैन बांसा तारखेड़ा के साथ अनिल जैन पटेरा द्वारा किया गया, मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-63189" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0019.jpg" alt="" width="1600" height="720" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0019.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0019-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0019-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0019-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0019-1536x691.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0019-990x446.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0019-1320x594.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /> मंचासीन अतिथियों एवं सभी उपस्थित शाखों के सम्मान के साथ प्रथम सत्र के प्रारंभ में सर्वप्रथम स्वागत भाषण क्षेत्रीय अध्यक्ष द्वारा प्रस्तुत कर सभी का अभिनंदन किया गया। जैन मिलन की क्षेत्रीय कार्यकारी परिषद की बैठक का महत्व बतलाते हुए क्षेत्रीय अध्यक्ष ने कहा सत्र के प्रारंभ की यह बैठक पूरे साल भर क्षेत्र की गतिविधियों को तय करती है और ऊर्जा देती है पटेरा शाखा को शुभकामनाएं दी जिन्होंने यह बैठक आयोजित कराई,इसके बाद क्षेत्रीय मंत्री श्रीमती कविता जैन ने 3 माह का प्रतिवेदन पढ़कर सुनाया उन्होंने बताया की क्षेत्र क्रमांक 10 में 32 स्थानों पर स्थापना दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया था, वहीं 35 स्थानों पर अक्षय तृतिया का कार्यक्रम आयोजित किया गया।</p>
<p>38 स्थानों पर श्रुत पंचमी का आयोजन एवं 31स्थानो पर योग दिवस में शिविर का आयोजन किया गया है, इसके अलावा विभिन्न शाखाओं द्वारा पांच हजार से अधिक पौधे रौपड किये जा चुके हैं, तद् पश्चात सभी शाखाओं से प्रतिनिधि के रूप में आए मंत्रीयों ने तीन माह का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, साथ में आगे आयोजित करने वाले कार्यक्रमों पर भी प्रकाश डाला। पटेरा शाखा द्वारा स्थानीय प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान किया गया।</p>
<p>द्वितीय सत्र में भारतीय जैन मिलन द्वारा आयोजित कार्यशाला में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों एवं जैन मिलन के उद्देश्य और जैन मिलन क्षेत्र 10 द्वारा आयोजित कार्यक्रम युवा संसद के संबंध में सभी को जानकारी प्रदान की गई, उन्होंने बताया समाज के युवाओं में नेतृत्व करने एवं संगठित हो समाज के लिए आवाज उठाने का हौसला देने के लिए यह आयोजन किया जायेगा। जिसमें क्षेत्र क्रमांक 10 के प्रत्येक मंदिर जी से युवा सांसद का चुनाव किया जायेगा साथ ही राज्य सभा में मनोनयन किया जायेगा यह एक अद्वितीय कार्यक्रम होगा, साथ ही समाज में समरसता के साथ कार्य करने के विषय पर एड. अतिवीर कमलेंद्र जैन ने एवं शाखाओं को एक अच्छा आयोजन कैसे करना चाहिए इस विषय पर,वीर दिलेश जैन चौधरी ने एवं शाखा संचालन में अध्यक्ष मंत्री की भूमिका विषय पर वीरांगना श्रीमती कविता जैन ने अपने वक्तव्य के द्वारा सभी को प्रशिक्षित किया।</p>
<p>वर्तमान समय में जैन मिलन की समाज को क्यों आवश्यकता है एवं हम छोटे-छोटे आयोजनों के माध्यम से समाज का सहयोग कैसे कर सकते हैं, इस विषय पर भी वक्ताओं ने अपनी बात रखी। कार्यक्रमों को हमें किस प्रकार से आयोजित करना है, कार्यक्रम का समाज में क्या संदेश जाएगा, यह सारी बातें कार्यशाला के दौरान बताई गई। भारतीय जैन मिलन क्षेत्र क्रमांक 10 द्वारा वार्षिक शुल्क जमा करने वाली सभी शाखाओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मान किया गया। भारतीय जैन मिलन स्थापना दिवस 2 मई पर आयोजित प्रतियोगिता भगवान महावीर स्वामी पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का ड्रा निकाल कर प्रथम, द्वितीय,तृतीय प्रतियोगियों का सम्मान किया गया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-63190" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018.jpg" alt="" width="1280" height="960" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018-990x743.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />कार्यक्रम का संचालन वीर जिनेश जैन बहरोल एवं वीर नरेंद्र जैन बजाज पटेरा आभार क्षेत्रीय अध्यक्ष श्री अरुण चंदेरिया जी ने माना। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि जुलाई माह में संभाग स्तरीय पोस्टर टप्रतियोगिता एवं अगस्त माह में निबंध लेखन प्रतियोगिता के साथ ही अन्य आयोजन भगवान महावीर स्वामी पच्चीस सौ पचास निर्वाण महोत्सव अंतर्गत किये जायेंगे। अंत में बड़े बाबा मंदिर परिषद में वृक्षारोपण सभी आई हुई शाखों द्वारा किया गया, जिसमें 100 नीम के वृक्ष लगाये गये। सभी उपस्थित सदस्यों की स्वीकृति उपरांत क्षेत्रीय अध्यक्ष की अनुमति से समाधिस्थ गणाचार्य परम् पूज्य आचार्य विराग सागर जी महाराज को श्रद्धांजलि करते हुए बैठक की समाप्ति की गई।</p>
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		<title>आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का समाधिमरण :  कांग्रेसजनों ने दी श्रद्धांजलि </title>
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		<pubDate>Sun, 25 Feb 2024 07:54:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज के महान संत पूज्य श्री गुरुदेव 108 विद्यासागर जी महाराज के समाधिमरण पर कांग्रेसजनों ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय, इंदिरा भवन के राजीव गांधी सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उनके चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; भोपाल।। जैन समाज के महान संत पूज्य श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज के महान संत पूज्य श्री गुरुदेव 108 विद्यासागर जी महाराज के समाधिमरण पर कांग्रेसजनों ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय, इंदिरा भवन के राजीव गांधी सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उनके चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।<span style="color: #ff0000"> पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।।</strong> जैन समाज के महान संत पूज्य श्री गुरुदेव 108 विद्यासागर जी महाराज के समाधिमरण पर कांग्रेसजनों ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय, इंदिरा भवन के राजीव गांधी सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उनके चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ने विद्यासागर महाराज का स्मरण करते हुए कहा कि वे एक सौम्य, सहज और सहज व्यक्तित्व थे। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह सहित सभी वरिष्ठ नेताओं ने उनके सानिध्य में पहुंचकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p>उन्होंने देश ही नहीं, विश्व के कई देशों में अपने श्रीमुख से जनता को आशीर्वचन दिये। अनेकों गौशालाएं खोलीं और गौसेवा की। जैन समाज के लिए वे महानता के शिरोमणि रहे। वहीं प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष राजीव सिंह और श्री पंचायत ट्रस्ट कमेटी के ट्रस्टी पब्लिसर्स सुनील जैन ने विद्यासागर महाराज के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनकी दिनचर्चा के बारे में संक्षिप्त में अपनी बात रखी।</p>
<p>कार्यक्रम का संचालन करते हुए श्री तारण तरण दिगंबर जैन राष्ट्रीय महासभा के अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता और कार्यक्रम समन्वयक आनंद तारण ने कहा कि विद्यासागर महाराज के एक-एक शब्दों का सार मनुष्य के जीवन को आनंदित और प्रफुल्लित करने वाला था। हम सभी को ऐसे महान व्यक्तित्व से प्रेरणा लेना चाहिए। इस अवसर पर कांग्रेस पदाधिकारी कैलाश मिश्रा, के.के. मिश्रा, दीपचंद यादव, जे.पी. धनोपिया, विभा पटेल, डॉ. महेन्द्र सिंह चौहान, चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी, किशन पंत, भूपेन्द्र गुप्ता, पुनीत टंडन, राजलक्ष्मी नायक, सीताशरण सूर्यवंशी, उमेश झा, उदयवीर सिंह, सुनील जैन, सोनू भाभा, अजय सोगानी, राकेश कठनेरा, कमल स्वेता, सुरेश जैन, राजेश जैन, ईशान जैन सहित अन्य कांग्रेसजन उपस्थित थे।</p>
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		<title>आर्यिका सुवर्ण श्री माताजी का गांव गनोड़ा नगरी में समाधि मरण : जैन समाज भीलूड़ा ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि  </title>
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		<pubDate>Sun, 16 Jul 2023 11:56:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री आज्ञा सागर जी गुरुदेव की संगत आर्यिका सुवर्ण श्री माताजी का गांव गनोड़ा नगरी में समाधि मरण बीते 14 जुलाई को हो गया था। सुवर्ण श्री माताजी मूलतः भीलूड़ा गांव के रहने वाली थीं। जैन समाज भीलूड़ा द्वारा जैनमंदिर भीलूड़ा में 105 श्री सुवर्ण श्री माताजी का संल्लेखना पूर्वक समाधि मरण होने के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री आज्ञा सागर जी गुरुदेव की संगत आर्यिका सुवर्ण श्री माताजी का गांव गनोड़ा नगरी में समाधि मरण बीते 14 जुलाई को हो गया था। सुवर्ण श्री माताजी मूलतः भीलूड़ा गांव के रहने वाली थीं। जैन समाज भीलूड़ा द्वारा जैनमंदिर भीलूड़ा में 105 श्री सुवर्ण श्री माताजी का संल्लेखना पूर्वक समाधि मरण होने के उपलक्ष्य में उन्हें विनयांजलि देने के लिए सभी समाज के पुरुष, महिलाएं, बच्चे, धर्म सभा में उपस्थित हुए। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए धर्मेंद्र जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p style="padding-left: 40px;">
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-48792" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230716-WA0010-1.jpg" alt="" width="1280" height="576" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230716-WA0010-1.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230716-WA0010-1-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230716-WA0010-1-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230716-WA0010-1-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230716-WA0010-1-990x446.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p><strong>भीलूड़ा।</strong> मुनि श्री आज्ञा सागर जी गुरुदेव की संगत आर्यिका सुवर्ण श्री माताजी का गांव गनोड़ा नगरी में समाधि मरण बीते 14 जुलाई को हो गया था। सुवर्ण श्री माताजी मूलतः भीलूड़ा गांव के रहने वाली थीं। जैन समाज भीलूड़ा द्वारा रात्रि 8:00 बजे जैनमंदिर भीलूड़ा में 105 श्री सुवर्ण श्री माताजी का संल्लेखना पूर्वक समाधि मरण होने के उपलक्ष्य में उन्हें विनयांजलि देने के लिए सभी समाज के पुरुष, महिलाएं, बच्चे, धर्म सभा में उपस्थित हुए और धर्म प्रभावना की अनुमोदना की।</p>
<p>सर्वप्रथम उनके सांसारिक जीवन के परिवार जनों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। जैन समाज अध्यक्ष अरविंद शाह ने बताया कि माताजी भीलूड़ा का गौरव थीं। माता जी का धर्म के रास्ते पर चलकर मोक्ष प्राप्त करना हमारे सबके लिए बहुत ही खुशी का विषय है। इसी क्रम में उनके सांसारिक जीवन के बड़े बेटे ओमप्रकाश भरड़ा ने अपने माता जी के जीवन काल की साधना और तप के बारे में विस्तृत रूप से बताया। इसके साथ ही उनके छोटे पुत्र हितेश भरड़ा द्वारा माता जी के द्वारा शुरू से ही धर्म के प्रति आकर्षण और उनके द्वारा परिवार में किए गए संकल्प व विधान व्रत के बारे में विस्तृत जानकारी दी।</p>
<p>मेघा जैन, टीना जैन, उनकी पुत्री निर्मला जैन द्वारा भी शब्द सुमन द्वारा विनयांजलि अर्पित की गई। श्रीपाल जैन द्वारा भी माता जी के जीवनकाल पर प्रकाश डाला गया। इसके साथ ही पंडित धनपाल जी शाह ने कहा कि धर्म का यह रास्ता श्रेष्ठ है और माताजी को हमेशा याद रखा जाएगा। परिवार द्वारा दान राशि निकाली गई। कार्यक्रम के प्रारंभ में सर्वप्रथम मंगलाचरण सुषमा जैन द्वारा किया गया। संचालन धर्मेंद्र जैन ने किया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-48794" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230716-WA0008-1.jpg" alt="" width="1280" height="576" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230716-WA0008-1.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230716-WA0008-1-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230716-WA0008-1-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230716-WA0008-1-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230716-WA0008-1-990x446.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
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		<title>कड़वे प्रवचन के लिए रहे हैं विख्यात : आचार्य श्री तरुण सागर महाराज को दी श्रद्धांजलि </title>
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		<pubDate>Mon, 26 Jun 2023 17:00:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर (राजेश जैन दद्दू)। कड़वे प्रवचन के लिए जन-जन में विश्व प्रसिद्ध जैन समाज के सर्वोच्च संत परम पूज्य समाधिस्थ आचार्य श्री तरुण सागर जी महाराज की जन्म जयंती पर दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद की ओर से भावांजलि प्रेषित की गई। राजकुमार पाटोदी, डॉ जैनेन्द्र जैन, सुशील पांड्या, हंसमुख गांधी, संजीव जैन संजीवनी, राजेश [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर (राजेश जैन दद्दू)।</strong> कड़वे प्रवचन के लिए जन-जन में विश्व प्रसिद्ध जैन समाज के सर्वोच्च संत परम पूज्य समाधिस्थ आचार्य श्री तरुण सागर जी महाराज की जन्म जयंती पर दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद की ओर से भावांजलि प्रेषित की गई।</p>
<p>राजकुमार पाटोदी, डॉ जैनेन्द्र जैन, सुशील पांड्या, हंसमुख गांधी, संजीव जैन संजीवनी, राजेश जैन दद्दू, राजीव जैन बंटी एवं परवार महिला संगठन की ओर से मुक्ता जैन, सारिका जैन, अंजलि जैन आदि ने नमन किया।</p>
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		<title>स्वामी जी ने दिया था महामस्तकाभिषेक में मंगलाचरण गाने का मौका : भजन सम्राट रूपेश जैन ने दी स्वामी चारूकीर्ति जी को श्रद्धांजलि </title>
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		<pubDate>Mon, 15 May 2023 11:22:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रख्यात जैन भजन गायक रूपेश जैन में स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी के जन्मदिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भावभीना भजन प्रस्तुत किया है। इस मौके पर श्रीफल जैन न्यूज ने उनसे बातचीत की है। प्रस्तुत हैं उसी के कुछ खास अंश&#8230; टीकमगढ़। प्रख्यात जैन भजन गायक रूपेश जैन में स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी के जन्मदिवस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>प्रख्यात जैन भजन गायक रूपेश जैन में स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी के जन्मदिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भावभीना भजन प्रस्तुत किया है। इस मौके पर श्रीफल जैन न्यूज ने उनसे बातचीत की है। <span style="color: #ff0000;">प्रस्तुत हैं उसी के कुछ खास अंश&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टीकमगढ़।</strong> प्रख्यात जैन भजन गायक रूपेश जैन में स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी के जन्मदिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भावभीना भजन प्रस्तुत किया है। स्वामीजी के करीबी रहे रूपेश इसे स्वामीजी के प्रति अपनी छोटी सी विनयाजंलि मानते हैं। इस अवसर पर श्रीफल जैन न्यूज ने उनसे बात की है। प्रस्तुत हैं उसी बातचीत के प्रमुख अंश&#8230;.</p>
<p><strong>आपको स्वामीजी पर भजन गाने की प्रेरणा कहां से मिली?</strong></p>
<p>मेरे तो स्वयं के भाव भी यही थे। स्वामीजी का इतना आशीर्वाद मिला है मुझे जीवन में, तो मुझे लगा कि मैं बतौर श्रद्धांजलि कुछ पंक्तियां उनके लिए अर्पित करूं। इसके अलावा सरिता अम्मा की प्रेरणा भी थी, जो श्रवणबेलगोला में दो पंचकल्याणकों में सौधर्म इंद्राणी बनी थीं। वह 2018 में हुए महामस्तकाभिषेक की कमेटी की अध्यक्ष भी थीं। स्वामी जी से जुड़े और आचार्य देव नंदी जी के शिष्य मुनि श्री अमोघ कीर्ति जी का भी आशीर्वाद था।</p>
<p><strong>स्वामीजी के लिए बनाए इस गीत के बोल किसने लिखे हैं, इसे संगीतबद्ध किसने किया है?</strong></p>
<p>इस गीत को लिखा भी मैंने है, इसका संगीत दादू रवींद्र जैन का है। मैंने उनकी धुन इसलिए ली है क्योंकि उनका भी स्वामीजी के साथ बहुत बड़ा जुड़ाव था और स्वामीजी भी उन्हें बहुत मानते थे। मैं चाहता था कि प्रत्यक्ष नहीं, परोक्ष रूप से उनकी भी श्रद्धांजलि स्वामीजी के चरणों में पहुंचे।</p>
<p><strong>स्वामीजी के असमय समाधिलीन होने से जैन समाज को कितनी बड़ी क्षति हुई है?</strong></p>
<p>स्वामीजी को जो भी जरा सा नजदीक से जानता था, वह बता सकता है कि समाज ने क्या खोया है। बहुत बड़े-बड़े संस्थान हैं, जहां से लोग मैनेजमेंट सीखते हैं, लेकिन वह अपने आप में संपूर्ण रूप से एक संस्थान थे, जहां से आप मैनेजमेंट सीख सकते हैं, चरित्र-अनुशासन सीख सकते हैं। आप उनसे धर्म सीख सकते हैं और उसे व्यावहारिक रूप से जीवन में कैसे उतारना है, यह भी सीख सकते हैं। वह कहने को वस्त्रधारी थे लेकिन मुनि चर्या का पालन करते थे। उनकी खासियतें गिनाई नहीं जा सकतीं। कितने ही स्कूल, कॉलेज, चिकित्सालय उनके द्वारा खोले गए, यह उनका समाज के प्रति बहुत बड़ा उपकार है। ऐसे महान व्यक्तित्व का फिर से इस धरती पर आना मुश्किल है।</p>
<p><strong>उनसे जुड़ा कोई संस्मरण जो इस अवसर पर बताना चाहते हैं?</strong></p>
<p>वह एक ऐसा व्यक्तित्व थे, जिनसे मिलने के लिए बड़े-बडे़ मंत्रियों, अधिकारियों को समय लेना पड़ता था लेकिन उनकी मुझ पर विशेष कृपा था। उन्होंने वर्ष 2018 के महामस्तकाभिषेक से पहले मुझे बुलाया और कहा कि इसकी शुरुआत आपके मंगलाचरण से होगी। कर्नाटक सरकार से उन्होंने मेरा वह कार्यक्रम अनुमोदित कराया। मैं उनकी सहजता देखकर हैरान था। उन्होंने महामस्तकाभिषेक के दौरान खुद मेरा परिचय कर्नाटक सरकार के मंत्रियों और वहां मौजूद जानी-मानी हस्तियों से कराया। वह मुझसे हमेशा कहा करते थे कि आप रवींद्र जैन जी के बाद दूसरे कलाकार हैं, जिनका गीत हमारे यहां शहनाई वाले, छोटी-छोटी भजन मंडली वाले सुनाया-बजाया करते हैं।</p>
<p><strong>स्वामीजी के जन्मदिन पर कुछ विशेष संदेश आप देना चाहते हैं?</strong></p>
<p>हम सभी आयु कर्म से जुड़े हुए हैं लेकिन हम चाहते हैं कि स्वामी जी जैसा ही व्यक्तित्व उस बागडोर को संभाले रहे। तो स्वामीजी के बाद नए स्वामीजी बने हैं, मैं चाहता हूं कि आज बड़े स्वामीजी के जन्मदिन पर उनका सारा आशीर्वाद नए चारूकीर्ति स्वामीजी को मिले। और स्वामीजी भी शायद यही चाहते होंगे। उनका ज्ञान और अनुभव भी नए स्वामीजी को मिले सके, यही कामना है। मैं यह भी कहना चाहता हूं कि जब हम श्रवणबेलगोला जाएं तो स्वामीजी के सिद्धांतों का मनन करें। समाज को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें।</p>
<p><strong>भजन में बताया है स्वामीजी को दक्षिण का सूर्य</strong></p>
<p>स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामी के व्यक्तित्व के बारे में गायक रूपेश जैन ने अपने भजन के जरिए गुणगान किया है। उन्होंने स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामी को दक्षिण का सूर्य बताया है जिनकी कीर्ति चारों दिशाओं में फैली। अपने कार्यों से वे जगत में पूजनीय बने। भजन में उनकी महिमा के बारे में बताया है कि वे महातपस्वी, अतुलित ज्ञानी और ऐसे भट्टारक थे जिन्होंने विश्वव्यापी महामस्तकाभिषेक कराया। भक्ति में अपना पूरा जीवन बिताया और प्रभु को अपना सर्वस्व समर्पण किया। उन्होंने शिक्षा, सेवा और संस्कारों से लाखों लोगों का जीवन बदल दिया। अधीर को धीर बनाया।</p>
<p><strong>कौन हैं रूपेश जैन</strong></p>
<p>मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ में जन्मे रूपेश जैन जाने-माने भजन गायक हैं। जाने-माने संगीतकार और गायक रवींद्र जैन के बाद जैन भजन गायकों के बीच इनकी अपनी अलग पहचान है। यूट्यूब पर इनके 45 हजार से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं और यूट्यूब हजारों,लाखों बार इनकी रचनाएं सुनी जा चुकी हैं। इनके कई भजनों को एक लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं।</p>
<p><strong>इस भजन को यहां सुनें</strong></p>
<p><iframe loading="lazy" title="kahan ho swami ji || shree charukeerthi bhattarak swami ji shraddhanjali geet || roopesh jain 2023" width="1320" height="743" src="https://www.youtube.com/embed/3o-eHiWlNxo?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" allowfullscreen></iframe></p>
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		<title>अमिट परंपरा छोड़ कर गए हैं : चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर के समाधि दिवस पर श्रद्धांजलि </title>
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		<pubDate>Fri, 05 May 2023 11:30:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी गुरुदेव की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी का वैशाख शुक्ल पूर्णिमा, 5 मई को 34वां समाधि दिवस है। पढ़िए वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार के राजेश पंचोलिया का विशेष आलेख&#8230; इंदौर। प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी गुरुदेव की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी का वैशाख शुक्ल पूर्णिमा, 5 मई को 34वां समाधि दिवस है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार के राजेश पंचोलिया का विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी गुरुदेव की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी का वैशाख शुक्ल पूर्णिमा, 5 मई को 34वां समाधि दिवस है। आचार्य श्री का जन्म फागुन शुक्ल 7 सप्तमी विक्रम संवत 1982 (वर्ष 1925) को श्रीचंद्र नाथप्रभु के मोक्ष कल्याणक पर मध्यप्रदेश आष्टा नगर के समीप भौरा ग्राम में श्रीमती रूपा देवी-श्री जवर चंद जी के चतुर्थ पुत्र के रूप में हुआ था। उनका लौकिक नाम राजमल रखा गया।</p>
<p><strong>प्रथम गुरु दर्शन</strong></p>
<p>18 वर्ष की अल्प आयु में उन्होंने वर्ष1943 में गुरुदेव श्री वीर सागर जी के दर्शन किये तथा संघ में प्रवेश की अनुमति लेकर संघ में प्रवेश किया। दो वर्ष में शास्त्रों का स्वाध्याय निरंतर चलता रहा।</p>
<p><strong>व्रत प्रतिमा</strong></p>
<p>झालरापाटन राजस्थान में 20 वर्ष की उम्र में 7 प्रतिमा तथा ब्रह्मचर्य व्रत के नियम आचार्य कल्प श्री वीर सागर जी से ग्रहण किये।</p>
<p><strong>मुनि दीक्षा</strong></p>
<p>आचार्य श्री वीर सागर जी की समाधि होने के कारण द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिव सागर जी से मुनि दीक्षा हेतु श्रीफल भेंट कर निवेदन किया। विक्रम संवत 2018 कार्तिक सुदी ( वर्ष 1961) को सीकर, राजस्थान में मुनि दीक्षा ग्रहण कर श्री राजमल जी से मुनि श्री अजित सागर जी बन गए। मुनि श्री अजित सागर जी आचार्य श्री शिव सागर जी के साथ ही रहे।</p>
<p><strong>आचार्य पद</strong></p>
<p>तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी की समाधि के पश्चात ज्येष्ठ शुक्ल,10 संवत 2044 (7 जून, 1987) उदयपुर में आपको चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य पद दिया गया।</p>
<p><strong>आचार्य पद का आज्ञा पत्र</strong></p>
<p>आचार्य श्री अजित सागर जी ने स्वास्थ्य प्रतिकूल होने के कारण 31 जनवरी, 1990 को संघस्थ मुनि श्री वर्द्धमान सागर जी को अपने बाद परम्परा के आचार्य पद का संस्कृत में आज्ञा पत्र लिखा।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-43446" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230505-WA0008.jpg" alt="" width="1024" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230505-WA0008.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230505-WA0008-240x300.jpg 240w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230505-WA0008-819x1024.jpg 819w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230505-WA0008-768x960.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230505-WA0008-990x1238.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p><strong>संल्लेखना</strong></p>
<p>वैशाख शुक्ल पूर्णिमा संवत 2047 (वर्ष 1990) को आपकी समाधि हो गई।</p>
<p>मुनि शिष्यों की संख्या &#8211; 8</p>
<p>1. मुनि श्री हित सागर जी</p>
<p>2. मुनि श्री पुण्य सागर जी</p>
<p>3. मुनि श्री सौम्य सागर जी</p>
<p>4. मुनि श्री हेमंत सागर जी</p>
<p>5. मुनि श्री विराग सागर जी</p>
<p>6. मुनि श्री चिन्मय सागर जी</p>
<p>7. मुनि श्री कीर्ति सागर जी</p>
<p><strong>आर्यिका की संख्या- 7</strong></p>
<p>1. आर्यिका श्री अनंत मति जी</p>
<p>2. आर्यिका श्री सौम्य मति जी</p>
<p>3. आर्यिका श्री दक्ष मति जी</p>
<p>4. आर्यिका श्री सौरभ मति जी</p>
<p>5. आर्यिका श्री चैत्य मति जी</p>
<p><strong>क्षुल्लकों की संख्या- 2</strong></p>
<p>वर्षायोग &#8211; 29</p>
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		<title>कविता के जरिए दी श्रद्धांजलि : स्वस्ति श्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी स्मृति भावांजलि व गीतांजलि  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Mar 2023 11:46:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Charukirti Bhattarak Swami Samadhi]]></category>
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		<category><![CDATA[श्रवणबेलगोला]]></category>
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					<description><![CDATA[रचयिता &#8211; गौतमचन्द ओस्तवाल &#8221; धर्म रत्न विषारद प्रधान संपादक-&#8220;मोक्षद्वार&#8221; पत्रिका, बेंगलुरु (कर्नाटक) [तर्ज- श्री महावीर भगवान, तुमको लाखों प्रणाम&#8230;&#8230; । जिनशासन की शान, तुमको लाखों प्रणाम ! जैन जगत विद्वान, तुमको लाखों प्रणाम ।। टेर् ।। श्री चन्द्रराज के नन्दन प्यारे, माता श्रीकांते नमन दुलारे। श्री रत्नवर्मा नाम, तुमको लाखों प्रणाम ।।1।। सिद्ध क्षेत्र [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>रचयिता &#8211; गौतमचन्द ओस्तवाल &#8221; धर्म रत्न विषारद</p>
<p>प्रधान संपादक-&#8220;मोक्षद्वार&#8221; पत्रिका, बेंगलुरु (कर्नाटक)</p>
[तर्ज- श्री महावीर भगवान, तुमको लाखों प्रणाम&#8230;&#8230; ।</p>
<p>जिनशासन की शान, तुमको लाखों प्रणाम !</p>
<p>जैन जगत विद्वान, तुमको लाखों प्रणाम ।। टेर् ।।</p>
<p>श्री चन्द्रराज के नन्दन प्यारे, माता श्रीकांते नमन दुलारे।</p>
<p>श्री रत्नवर्मा नाम, तुमको लाखों प्रणाम ।।1।।</p>
<p>सिद्ध क्षेत्र वारंगा जनम्यां, तीन मई उन्नीसो उनपचास चमक्या।</p>
<p>श्री जैन मठ प्रमुख, तुमको लाखों प्रणाम ।।2।।</p>
<p>कोई पूत पग पालणे पिछाण्या, सौलह वर्ष में दुमचा पढ़ाया।</p>
<p>कोई बुद्धि में तेज तर्रार, तुमको लाखों प्रणाम ।।3।।</p>
<p>श्रवणबेलगोला भट्टारक की नयन निरखी, श्री भट्टाकलंक स्वामी ने पारख परखी।</p>
<p>देख हस्त रेख प्रमाण, तुमको लाखों प्रणाम ।।4।।</p>
<p>शारीरिक लक्षण देख बुद्धि परीक्षण, स्वाध्याय ज्ञान जान निरीक्षण।</p>
<p>त्या कुल निर्दोष महान्, तुमको लाखों प्रणाम ।।5।।</p>
<p>मन निर्दोष आचरण आयु, परखा निरखा मनने मायुं ।</p>
<p>दिगम्बर मठ के प्राण, तुमको लाखों प्रणाम।।6।।</p>
<p>महाकलंक जी ने होनहार परखा, पाया जान रतन अनमोला।</p>
<p>किया &#8220;भावी भट्टारक&#8221; चयन, तुमको लाखों प्रणाम ।।7।।</p>
<p>&#8220;श्रवणबेलगोला&#8221; का भाग्य सवाया, जैन मठ सरताज संभलाया।</p>
<p>घोषित &#8220;भट्टारकजी&#8221; तुमको लाखों प्रणाम ।।8।।</p>
<p>श्री चारुकीर्ति नाम दीपाया, बारह दिसम्बर उन्नी सौ उनसितर आया।</p>
<p>दिया कर्नाटक शासन ने भी मान, तुमको लाखों प्रणाम 11911</p>
<p>चार माह बाद किया अनुमोदन, प्रथम पट्टाभिषेक गुण अभिनन्दन।</p>
<p>उन्नीस अप्रैल सन् सितर, तुमको लाखों प्रणाम।।10।।</p>
<p>श्री शंकर महावीर शुभ जन्म कल्याणक, गुरुवर द्वारा नियुक्त कर अभिषेकम्</p>
<p>ऐसे परम विद्वान, तुमको लाखों प्रणाम ।।11।।</p>
<p>देश-विदेश में धर्म फैलाया, खूब प्रचार कर जिनधर्म दीपाया।</p>
<p>सिंगापुर- अमेरिका आदि जान, तुमको लाखों प्रणाम ।।12।।</p>
<p>भाषा कन्नड हिन्दी अंग्रेजी सीखी, संस्कृत-प्राकृत के बने पारखी।</p>
<p>हुए उद्भट्ट विद्वान, तुमको लाखों प्रणाम ।।13।।</p>
<p>जिनधर्म की ध्वजा फहराई, दिगम्बर शासन दिया चमकाई।</p>
<p>ऐसे सरलमना भट्टारक, तुमको लाखों प्रणाम ।।14।।</p>
<p>सन् 981 में बाहुबली प्रतिमा उद्घाटित, सन् 1981 में 1000 वर्ष पूर्ण प्रतिष्ठित</p>
<p>बारह वर्षीय मस्तकाभिषेक, तुमको लाखों प्रणाम ।।15।।</p>
<p>1981 में महामस्तकाभिषेक कराया, सून् 1993 में फिर दोहराया।</p>
<p>सन् 2006 में चमके महान, तुमको लाखों प्रणाम ।।16।।</p>
<p>सन् 2018 में महामस्तकाभिषेक कराया, देश प्रधाने नगरे आया।</p>
<p>&#8220;कर्मयोगी &#8220;श्री स्वस्ति महान्, तुमको लाखों प्रणाम ।।17।।</p>
<p>वय 74 वर्ष है पाया, प्रात: काल ब्रह्म मुहूर्त आया।</p>
<p>23 मार्च सन् 23 को स्वर्ग सिधाये, तुमको लाखों प्रणाम ।।18।।</p>
<p>आगम कीर्ति तस, शिष्य बनाया, श्रवणबेलगोला नाम चमकाया।</p>
<p>जैन मठ महासंत, तुमको लाखों प्रणाम ।।19।।</p>
<p>27 मार्च को पट्टधर बनाया, पट्टाभिषेक कर भार संभलाया।</p>
<p>&#8220;गौतम&#8221; के श्रद्धास्पद, तुमको लाखों प्रणाम ।।20।।</p>
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