<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Tap Kalyanak &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/tap-kalyanak/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Sat, 11 Jul 2026 08:32:22 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.0.2</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>Tap Kalyanak &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>कामवन में भगवान नमिनाथ का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव श्रद्धाभाव से मनाया गया : सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भक्ति से गुंजायमान हुआ मंदिर परिसर </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/kamvan_me_bhagwan_naminath_janma_tap_kalyanak_mahotsav_ayojit/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/kamvan_me_bhagwan_naminath_janma_tap_kalyanak_mahotsav_ayojit/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Jul 2026 08:32:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Gyan Vijaya Mahila Mandal]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Janma Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[Kaman]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Naminath]]></category>
		<category><![CDATA[Rekha Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Tap Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[कामां]]></category>
		<category><![CDATA[जन्म कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[ज्ञान विजया महिला मंडल English Tags Shreephal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[तप कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान नमिनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[रेखा जैन]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=109262</guid>

					<description><![CDATA[कामवन स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में 21वें तीर्थंकर भगवान श्री 1008 नमिनाथ के जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ किया गया। श्रद्धालुओं ने पालना झुलाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। पढ़िए श्रीफल साथी उदयभान जैन की यह रिपोर्ट। कामां। श्री 1008 शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>कामवन स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में 21वें तीर्थंकर भगवान श्री 1008 नमिनाथ के जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ किया गया। श्रद्धालुओं ने पालना झुलाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी उदयभान जैन की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कामां।</strong> श्री 1008 शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, कामवन में ज्ञान विजया महिला मंडल के तत्वावधान में 21वें तीर्थंकर भगवान श्री 1008 नमिनाथ के जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम 10 जुलाई की रात्रि 8 बजे भक्ति एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ आयोजित किया गया।</p>
<p><strong>सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां</strong></p>
<p>महिला मंडल की मंत्री शोभा बड़जात्या ने बताया कि इस अवसर पर भगवान नमिनाथ के जन्मोत्सव का मनोहारी मंचन किया गया। मिथिलापुरी के राजा विजय एवं रानी सुभद्रा का पात्र जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। रानी सुभद्रा की भूमिका में अनिता बड़जात्या (जयपुर) ने भक्ति नृत्य प्रस्तुत करते हुए बालक नमि कुमार को पालने में झुलाया।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं ने झुलाया पालना</strong></p>
<p>महिला मंडल की अध्यक्ष इन्द्रा बड़जात्या के कुशल नेतृत्व में उपस्थित महिलाओं ने मंगल बधाई गीत गाकर भगवान के जन्मोत्सव को उल्लासपूर्वक मनाया। सभी श्रद्धालुओं ने भगवान नमिनाथ के पालने को झुलाकर धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय महामंत्री ने भी लिया धर्मलाभ</strong></p>
<p>अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन (जयपुर) ने भी माता सुभद्रा के साथ बालक नमि कुमार का श्रद्धापूर्वक पालना झुलाकर भक्ति भाव प्रकट किया।</p>
<p><strong>आभार व्यक्त</strong></p>
<p>कार्यक्रम के समापन पर महिला मंडल की अध्यक्ष इन्द्रा बड़जात्या ने सभी उपस्थित श्रद्धालुओं, अतिथियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/kamvan_me_bhagwan_naminath_janma_tap_kalyanak_mahotsav_ayojit/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भगवान सुमतिनाथ जी का तप कल्याणक 25 अप्रैल को: वैराग्य और आत्म-साधना का पावन पर्व </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/lord_sumatinaths_tap_kalyanak_on_25th_april/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/lord_sumatinaths_tap_kalyanak_on_25th_april/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 12:22:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Akshat]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Fifth Tirthankara]]></category>
		<category><![CDATA[Flowers]]></category>
		<category><![CDATA[Incense]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Lamp]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Sumatinath Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Naivedya]]></category>
		<category><![CDATA[Sandalwood]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Tap Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[Vaishakh Shukla Paksha Navami]]></category>
		<category><![CDATA[Water]]></category>
		<category><![CDATA[अक्षत]]></category>
		<category><![CDATA[चंदन]]></category>
		<category><![CDATA[जल]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[तप कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[दीप]]></category>
		<category><![CDATA[धूप]]></category>
		<category><![CDATA[नैवेद्य]]></category>
		<category><![CDATA[पांचवें तीर्थंकर]]></category>
		<category><![CDATA[पुष्प]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान सुमतिनाथ जी]]></category>
		<category><![CDATA[वैशाख शुक्ल पक्ष नवमी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=105444</guid>

					<description><![CDATA[आगामी 25 अप्रैल को जैन धर्म के पांचवें तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथ जी का पावन तप कल्याणक है। पंचांग के अनुसार यह शुभ दिन प्रतिवर्ष वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आता है। दिगंबर जैन समाज में इस दिन का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष शृंखला में आज पढ़िए, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आगामी 25 अप्रैल को जैन धर्म के पांचवें तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथ जी का पावन तप कल्याणक है। पंचांग के अनुसार यह शुभ दिन प्रतिवर्ष वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आता है। दिगंबर जैन समाज में इस दिन का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष शृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल का यह संकलित-संयोजित आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> आगामी 25 अप्रैल को जैन धर्म के पांचवें तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथ जी का पावन तप कल्याणक है। पंचांग के अनुसार यह शुभ दिन प्रतिवर्ष वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आता है। दिगंबर जैन समाज में इस दिन का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इस अवसर पर देशभर के दिगंबर जैन मंदिरों में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। भगवान के तप कल्याणक को चिरस्थायी बनाने और उनके प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए मंदिरों में विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। प्रातःकाल से ही भगवान की मनोहारी प्रतिमा का संगीतमय अभिषेक और विश्व-शांतिधारा की जाती है। इसके पश्चात जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप और फल-इन अष्टद्रव्यों से भगवान की विशेष पूजा-अर्चना होती है। समाज के श्रद्धालु भगवान की नित्य नियम पूजन के साथ-साथ विविध विधानादि संपन्न कर अपने कर्मों की निर्जरा का मार्ग प्रशस्त करते हैं।</p>
<p><strong>तप कल्याणक की रोचक कथा: राजमहल से तपोवन की ओर</strong></p>
<p>तीर्थंकर भगवान का जीवन जन्म से ही चमत्कारों और पुण्यों से भरा होता है, लेकिन उनका तप कल्याणक हमें त्याग की सबसे बड़ी सीख देता है। भगवान सुमतिनाथ जी का जन्म अयोध्या नगरी में महाराजा मेघरथ और माता मंगलावती के यहां हुआ था। युवावस्था में उन्होंने राजपाट संभाला और न्यायपूर्वक प्रजा का पालन किया। कथाओं के अनुसार एक दिन जब वे अपनी राजसभा में विराजमान थे तभी उन्होंने अपने अवधिज्ञान (अथवा जातिस्मरण ज्ञान) से संसार की नश्वरता और क्षणभंगुरता का गहराई से अनुभव किया। उन्हें यह बोध हुआ कि यह राजसी वैभव, धन-संपत्ति और शारीरिक सुख सभी अस्थायी हैं। आत्मा का सच्चा सुख इन भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि वीतरागता में है। इसी वैराग्य भाव के साथ उन्होंने उसी क्षण राजपाट का त्याग कर दिया। वैशाख शुक्ल नवमी के शुभ दिन, भगवान सुमतिनाथ ने लौकिक वस्त्रों और आभूषणों का त्याग कर सहेतुक वन (या सहेतुक उद्यान) में जाकर दिगंबर जैनेश्वरी दीक्षा धारण की। उन्होंने केशलोंच किया और मौन धारण कर कठोर तपस्या में लीन हो गए। यही वह महान दिन है, जिसे हम तप कल्याणक के रूप में मनाते हैं।</p>
<p><strong>भगवान सुमतिनाथ के दिव्य संदेश और सीख</strong></p>
<p>भगवान का नाम ‘सुमति’ है, जिसका अर्थ है-सच्ची और श्रेष्ठ बुद्धि। उनका तप कल्याणक हमें जीवन को सार्थक बनाने के लिए कई दिव्य संदेश देता है।</p>
<p>सच्ची सुमति (सम्यक् ज्ञान)- भौतिक ज्ञान आजीविका के लिए हो सकता है, लेकिन सच्ची ‘सुमति’ वही है, जो हमें आत्मा और परमात्मा का भेद समझाए। भगवान का जीवन हमें सम्यक् दर्शन और सम्यक् ज्ञान की ओर प्रेरित करता है।</p>
<p>मोह का त्याग- चाहे कितनी भी बड़ी सत्ता क्यों न हो, एक दिन उसे छोड़ना ही पड़ता है। भगवान ने राजपाट त्याग कर सिखाया कि वस्तुओं से नहीं, बल्कि वस्तुओं के प्रति ‘मोह’ से दुःख उत्पन्न होता है।</p>
<p>तप की महत्ता- बिना तपस्या के कर्मों की निर्जरा संभव नहीं है। जीवन में संयम और अनुशासन ही वह तप है,जो हमें मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।</p>
<p><strong>जैन धर्म को अक्षुण्ण रखने की हिदायतें और हमारा कर्तव्य</strong></p>
<p>आज के इस आधुनिक और भौतिकवादी युग में भगवान सुमतिनाथ जी का तप कल्याणक जैन समाज और युवा पीढ़ी के लिए एक कड़ा संदेश भी लेकर आता है। जैन धर्म के मूल सिद्धांतों को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए हमें इन बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।</p>
<p>संस्कारों का संरक्षण- नई पीढ़ी को केवल भौतिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि धार्मिक और नैतिक संस्कार भी दें। उन्हें मंदिरों से जोड़ें और जैन धर्म के गौरवशाली इतिहास से अवगत कराएं।</p>
<p>स्वाध्याय और आगम का पठन- भगवान की वाणी जिनवाणी में समाहित है। प्रतिदिन स्वाध्याय करने की आदत डालें ताकि धर्म का सच्चा स्वरूप विकृत न होने पाए।</p>
<p>अहिंसा और अपरिग्रह का पालन- अपनी आवश्यकताओं को सीमित रखें (अपरिग्रह) और मन, वचन तथा कर्म से किसी जीव को कष्ट न पहुंचाएं (अहिंसा)। यही जैन धर्म का मूल आधार है।</p>
<p>वीतरागता का सम्मान- दिगंबर मुनिराजों और संतों का आदर-सत्कार करें तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रयास करें।</p>
<p><strong>तप कल्याणक का सार यह है कि&#8230;</strong></p>
<p>25 अप्रैल (वैशाख शुक्ल नवमी) का यह तप कल्याणक केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि आत्म-मंथन का दिन है। आइए, इस पावन अवसर पर हम दिगंबर जैन मंदिरों में जाकर भगवान सुमतिनाथ जी के चरणों में अष्टद्रव्य अर्पित करें और यह संकल्प लें कि हम उनके बताए ‘सुमति’ और ‘संयम’ के मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सार्थक बनाएंगे। जय जिनेंद्र!</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/lord_sumatinaths_tap_kalyanak_on_25th_april/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>राजसी वैभव छोड वैराग्य पथ पर चले युवराज आदिकुमार : आत्मशुद्धि और संयम ही जीवन का आधार-मुनिश्री सुधासागरजी </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/leaving_behind_the_royal_splendor_prince_adikumar_walked_on_the_path_of_renunciation/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/leaving_behind_the_royal_splendor_prince_adikumar_walked_on_the_path_of_renunciation/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 16:58:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Ayodhyapuri city]]></category>
		<category><![CDATA[Crown Prince Adikumar]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Munishri Sudhasagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Satodaya Tirtha Seron Panch Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Tap Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री सुधासागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सतोदय तीर्थ सेरोन पंचकल्याणक]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=101344</guid>

					<description><![CDATA[सतोदय तीर्थ सेरोन पंचकल्याणक में मुनि श्री सुधासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में तप कल्याणक में युवराज आदिकुमार ने जय राजसी वैभव त्याग कर वैराग्य की ओर कदम बढ़ाए तो उपस्थित धर्मालुजनों ने जयजयकारों के बीच अनुमोदना की। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। सतोदय तीर्थ सेरोन पंचकल्याणक में मुनि श्री सुधासागर महाराज के ससंघ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सतोदय तीर्थ सेरोन पंचकल्याणक में मुनि श्री सुधासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में तप कल्याणक में युवराज आदिकुमार ने जय राजसी वैभव त्याग कर वैराग्य की ओर कदम बढ़ाए तो उपस्थित धर्मालुजनों ने जयजयकारों के बीच अनुमोदना की। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> सतोदय तीर्थ सेरोन पंचकल्याणक में मुनि श्री सुधासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में तपकल्याणक में युवराज आदिकुमार ने जय राजसी वैभव त्याग कर वैराग्य की ओर कदम बढ़ाए तो उपस्थित धर्मालुजनों ने जयजयकारों के बीच अनुमोदना की। मुनि श्री ने उपस्थित धर्मालुजनों को तप कल्याणक की महिमा बताते हुए कहा आत्मशुद्धि और संयम को जीवन का आधार है। जीवन में अपने भावों को निर्मल बनाते हुए अच्छे कार्यों में में की ओर बढ़ो और संकल्पित हो कि बुरे आचरणों से बचेंगे। शनिवार को प्रातःकाल पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रातःकाल प्रभु अभिषेक, शांतिधाराध के उपरान्त जन्म कल्याणक पूजन हुई। मध्यान्ह में महोत्सव स्थल अयोध्यापुरी नगरी में महाराज नाभिराय के आंगन में युवराज आदिकुमार की भव्य बारात निकाली गई। जिसमें इन्द्र इन्द्राणी और श्रद्धालु झूम उठे। सत्येन्द्र शर्मा एण्ड पार्टी के भक्तिमय भजनों ने वातावरण को पूर्णतः धर्ममय बना दिया मुकुटवद्ध राजाओं द्वारा भेंट दी गई। इसी दौरान नीलांजना नृत्य के दौरान वैराग्य के भाव पूर्ण क्षण उस समय आया जब तपकल्याणक के दौरान दीक्षा विधि सम्पन्न हुई। जिसमें राजसी वैभव का त्याग कर जब वालक तीर्थंकर ने दिगम्बर दीक्षा हेतु वैराग्य पथ पर कदम बढ़ाए और अपना राजपाट सौंपते हुए दीक्षा हेतु वन को प्रस्थान कर गए। इस दौरान पूरा पाण्डाल वैराग्य की जय के उ‌द्घोष से गूंज उठा। इस दौरान प्रमुख रूप से महाराजा नाभिराय मरूदेवी मालती महेन्द्र सर्राफ, सौधर्म इन्द्र अनुपमा सतीश जैन बजाज, कुवेर सीमा सिंघई मनोज जैन, महायज्ञनायक सुमन विमल जैन, ममता अमित जैन वल्ली डोंगरा भरत चक्रवर्ती, विजय जैन लागौन वाहूवलि, नीतेश जैन विलौआ जखौरा राजा सोम, देवेन्द्र कुमार मंजू जैन राजा श्रयांस, पवन जैन बाबा मार्वल ईशान इन्द, समता जैन आनंद जैन साइकिल सानत,इन्द्र ब्राहमेन्द्र रूवी संजय मोदी, विधियज्ञनायक राजू जैन मड़वरा, महामण्डलेश्वर राजीव जैन पीहर साढी आदि प्रमुख भूमिका में रहे।</p>
<p><strong>इनका मिल रहा है सहयोग</strong></p>
<p>आयोजन की व्यवस्थाओं में दिगम्बर जैन पंचायत समिति, आचार्य विद्यासागर व्यायामशाला, वीर सेवा संघ, जैन मिलन मुख्य शाखा सुधा कलश महिला मण्डल के अतिरिका सतोदय तीर्थ अध्यक्ष सतीश जैन बजाज, महामंत्री सिंघई मनोज जैन बबीना, विजय जैन लागौन, अजय जैन जखौरा, आनंद जैन साइकिल, संजय रसिया, नीतेश विलौआ, अमितेश जैन, अभय जैन ग्राफिक्स, अनंत सराफ, श्रयांस जैन गदयाना, राजेन्द्र जैन मिठया, पं. जयकुमार जैन, अभय जैन, प्रदीपजैन बौदा, अवध किशोर जैन, प्रदीप जैन बरोदा, सौरभ जैन पीलू, मुकेश जैन नेता आदि का सकिय सहयोग मिल रहा है।</p>
<p><strong>ज्ञान कल्याणक 8 मार्च को</strong></p>
<p>मीडिया प्रभारी अक्षय अलया के अनुसार सत्तोदय तीर्थ सेरोन में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के ज्ञान कल्याणक में आज 8 मार्चको प्रातः नित्यमह सामूहिक पूजन, शान्ति हवन, मुनिश्री की मंगल देशना के उपरान्त महामुनिराज वृषभसागर महाराज की आहारचर्या, मध्यान्ह में ज्ञानकलयाणक की आन्तरिक कियाए श्रीजी की स्थानपना, नेत्रोन्मीलन, प्राणप्रतिष्ठा सूरिमंत्र समोवशरण की रचना एवं सायंकाल सांस्कृतिक कार्यकम होगा।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/leaving_behind_the_royal_splendor_prince_adikumar_walked_on_the_path_of_renunciation/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भगवान पार्श्वनाथ और भगवान चंद्रप्रभ का जन्म, तप कल्याणक इस बार 15 दिसंबर को: दोनों तीर्थंकरों ने मोक्ष का मार्ग दिखाया </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/birth_of_lord_parshvanath_and_chandraprabha_tap_kalyanak_this_time_on_15th_december/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/birth_of_lord_parshvanath_and_chandraprabha_tap_kalyanak_this_time_on_15th_december/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Dec 2025 12:49:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[15 December]]></category>
		<category><![CDATA[15 दिसंबर]]></category>
		<category><![CDATA[Birth]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Chandraprabha]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Parshvanath]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Tap Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[जन्म]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[तप कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान चंद्रप्रभ]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान पार्श्वनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=96303</guid>

					<description><![CDATA[पार्श्वनाथ (23वें तीर्थंकर) और चंद्रप्रभु (8वें तीर्थंकर) दोनों के जीवन में वैराग्य, तपस्या और आध्यात्मिक ज्ञान की यात्रा है। पौष कृष्ण एकादशी को जन्म और तप कल्याणक आता है। अंबाह से पढ़िए, इंजीनियर सौरभ जैन की यह संकलित प्रस्तुति&#8230; अंबाह। पार्श्वनाथ (23वें तीर्थंकर) और चंद्रप्रभु (8वें तीर्थंकर) दोनों के जीवन में वैराग्य, तपस्या और आध्यात्मिक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>पार्श्वनाथ (23वें तीर्थंकर) और चंद्रप्रभु (8वें तीर्थंकर) दोनों के जीवन में वैराग्य, तपस्या और आध्यात्मिक ज्ञान की यात्रा है। पौष कृष्ण एकादशी को जन्म और तप कल्याणक आता है। <span style="color: #ff0000">अंबाह से पढ़िए, इंजीनियर सौरभ जैन की यह संकलित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> पार्श्वनाथ (23वें तीर्थंकर) और चंद्रप्रभु (8वें तीर्थंकर) दोनों के जीवन में वैराग्य, तपस्या और आध्यात्मिक ज्ञान की यात्रा है। पौष कृष्ण एकादशी को जन्म और तप कल्याणक आता है। जहां पार्श्वनाथ ने सर्प के उद्धार से ज्ञान पाया और कमठ के प्रतिशोध से मुक्ति पाई जबकि, चंद्रप्रभु ने राजसी सुख त्याग कर केवल ज्ञान प्राप्त किया और शांति और अहिंसा का मार्ग दिखाया। दोनों के निर्वाण स्थल सम्मेद शिखर (पारसनाथ पहाड़ी) हैं, जो जैन धर्म के महत्वपूर्ण तीर्थस्थल हैं।</p>
<p><strong>पार्श्वनाथ भगवान की कहानी</strong></p>
<p>जन्म और दीक्षा- पार्श्वनाथ का जन्म वाराणसी में हुआ था। उन्होंने 30 वर्ष की आयु तक सांसारिक जीवन बिताया और दीक्षा लेने के 84 दिन बाद ही केवल ज्ञान प्राप्त किया।</p>
<p>प्रमुख घटना: एक बार उन्होंने एक तपस्वी की अग्नि से एक नाग (जो बाद में कमठ बना) को बचाया, जिसने बाद में तूफान से उनकी रक्षा की थी।</p>
<p>प्रतिशोध- उनका मुख्य संघर्ष कमठ से था, जो नौ जन्मों तक उनके पीछे रहा और उन्हें परेशान करता रहा। अंततः, पूर्ण वैराग्य प्राप्त करने के बाद यह प्रतिशोध समाप्त हुआ।</p>
<p>निर्वाण- उन्होंने सम्मेद शिखर (पारसनाथ पहाड़ी) पर निर्वाण प्राप्त किया।</p>
<p><strong>चंद्रप्रभु भगवान की कहानी</strong></p>
<p>जन्म और दीक्षा- चंद्रप्रभु का जन्म चंद्रपुरी (काशी) में राजा महासेन और रानी लक्ष्मणा के यहां हुआ। उनका रंग चंद्रमा जैसा सफेद था, इसलिए नाम चंद्रप्रभु पड़ा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>ज्ञान प्राप्ति- 25 वर्ष की आयु में राजसी सुख त्याग कर उन्होंने तपस्या की और पारिजात वृक्ष के नीचे केवल ज्ञान (सर्वज्ञता) प्राप्त किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>शिक्षा- उन्होंने सत्य, अहिंसा और संयम का उपदेश दिया और मोक्ष का मार्ग दिखाया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>निर्वाण- उन्होंने भी सम्मेद शिखर पर निर्वाण प्राप्त किया।</p>
<p><strong>दोनों के बीच संबंध</strong></p>
<p>तीर्थंकर- दोनों जैन धर्म के महत्वपूर्ण तीर्थंकर हैं, जिन्होंने आध्यात्मिक मार्ग दिखाया।</p>
<p>सम्मेद शिखर- दोनों का निर्वाण स्थल एक ही है, जो जैन धर्म का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।</p>
<p>सांसारिक जीवन से वैराग्य- दोनों ने सांसारिक सुखों को त्याग कर आत्म-ज्ञान और मोक्ष प्राप्त किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/birth_of_lord_parshvanath_and_chandraprabha_tap_kalyanak_this_time_on_15th_december/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भगवान श्री संभवनाथ जी का तप कल्याणक 4 दिसंबर को: तिथि के अनुसार तप कल्याणक मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा के दिन है  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/lord_shri_sambhavnaths_tap_kalyanak_on_4th_december/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/lord_shri_sambhavnaths_tap_kalyanak_on_4th_december/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 11:55:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Abhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Arghya]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Shri Sambhavnath Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Margashirsha Shukla Purnima]]></category>
		<category><![CDATA[Shantidhara]]></category>
		<category><![CDATA[Shravasti City]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Tap Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[Worship]]></category>
		<category><![CDATA[अभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[अर्घ्य]]></category>
		<category><![CDATA[आराधना]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[तप कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान श्री संभवनाथ जी]]></category>
		<category><![CDATA[मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा]]></category>
		<category><![CDATA[शांतिधारा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रावस्ती नगरी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=95832</guid>

					<description><![CDATA[जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर भगवान श्री संभवनाथ का तप कल्याणक 4 दिसंबर को है। तिथि के अनुसार उनका तप कल्याणक मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा को है। इस दिन भगवान के मंदिरों में आराधना, अभिषेक, शांतिधारा, अर्घ्य आदि किए जाते हैं। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्र्ंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर भगवान श्री संभवनाथ का तप कल्याणक 4 दिसंबर को है। तिथि के अनुसार उनका तप कल्याणक मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा को है। इस दिन भगवान के मंदिरों में आराधना, अभिषेक, शांतिधारा, अर्घ्य आदि किए जाते हैं। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्र्ंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर भगवान श्री संभवनाथ का तप कल्याणक 4 दिसंबर को है। तिथि के अनुसार उनका तप कल्याणक मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा को है। इस दिन भगवान के मंदिरों में आराधना, अभिषेक, शांतिधारा, अर्घ्य आदि किए जाते हैं। जैन धर्म के ग्रंथों में वर्णित जानकारी के अनुसार भगवान संभवनाथ भगवान का गर्भाधान हुआ और फिर उनका जन्म राजा जितारी और रानी सेना देवी के घर मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भरत क्षेत्र में स्थित श्रावस्ती नगरी में हुआ। जब भगवान संभवनाथ रानी सेना देवी के गर्भ में थे, उस साल राज्य में सांभा, यानी मूंगफली की खूब फसल हुई। इसी से भगवान का नाम संभवनाथ पड़ा। जन्म से ही भगवान को तीन तरह का ज्ञान था, श्रुत, मति और अवधि। राजकुमार संभवनाथ शाही सुख-सुविधाओं के बीच बड़े हुए लेकिन, उन्हें दिखावे वाली जीवन शैली में बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं थी। कर्म के फल और अपने माता-पिता की आज्ञा (आज्ञा) के अनुसार राजकुमार संभवनाथ की शादी हुई और सही उम्र में उनका राज्याभिषेक हुआ। बहुत लंबे और शांतिपूर्ण राज के बाद देवताओं के कहने पर भगवान संभवनाथ ने दीक्षा ली। दीक्षा लेने के बाद, भगवान ने एक साल तक बहुत सारा दान (वर्षदान) किया और बाद में उनका दीक्षा समारोह मनाया गया। तीर्थंकर भगवान के दीक्षा समारोह का पूरा ध्यान देवताओं ने रखा। राजा संभवनाथ के साथ, 20 हजार दूसरे राजाओं ने भी दीक्षा ली। 14 साल की दीक्षा के बाद राजा संभवनाथ ने अपने संज्वलन कर्म पूरे किए और कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की पंचमी को केवलज्ञान प्राप्त किया। केवलज्ञान प्राप्त करने के बाद ही तीर्थंकर देशना देते हैं, तब तक वे चुप रहते हैं।</p>
<p>तीर्थंकर भगवान के सर्वज्ञान प्राप्त करने के बाद देवता समवशरण दिव्य सभा बनाते हैं। तीर्थंकर भगवान के केवल ज्ञान पाने के बाद, गणधर (तीर्थंकर के मुख्य शिष्य) स्थापित हो जाते हैं और वे सभी भगवान के समवशरण में बैठ जाते हैं। भगवान संभवनाथ के मुख्य गणधर चारु थे। उन्होंने संभवनाथ भगवान से पूरा ज्ञान लिया और फिर लोगों को उपदेश दिए, वे लोगों के जीवन में मोक्ष के बीज बो रहे थे। बहुत से लोगों को सिर्फ़ भगवान के दर्शन से ज्ञान मिल गया और वे सभी दुखों से मुक्त हो गए।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/lord_shri_sambhavnaths_tap_kalyanak_on_4th_december/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भगवान अरहनाथ जी का तप कल्याणक 30 नवंबर को : तिथि के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी को मनाया जाएगा भगवान का तप कल्याणक  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/lord_arahnaths_tap_kalyanak_on_30th_november/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/lord_arahnaths_tap_kalyanak_on_30th_november/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 29 Nov 2025 11:57:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[18th Tirthankara]]></category>
		<category><![CDATA[18वें तीर्थंकर]]></category>
		<category><![CDATA[Chakrapur Nagar]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Arhanatha]]></category>
		<category><![CDATA[Margashirsha Shukla Dashami]]></category>
		<category><![CDATA[Samavasarana]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Tap Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[चक्रपुर नगर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[तप कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान अरहनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[समवशरण]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=95604</guid>

					<description><![CDATA[जैन धर्म के 18वें तीर्थंकर भगवान अरहनाथ का तप कल्याणक 30 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों, चैत्यालयों में भगवान का विशेष पूजन, आराधना और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। तिथि के अनुसार भगवान अरहनाथ का तप कल्याणक मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी के दिन आता है। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्र्ंखला [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म के 18वें तीर्थंकर भगवान अरहनाथ का तप कल्याणक 30 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों, चैत्यालयों में भगवान का विशेष पूजन, आराधना और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। तिथि के अनुसार भगवान अरहनाथ का तप कल्याणक मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी के दिन आता है। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्र्ंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के 18वें तीर्थंकर भगवान अरहनाथ का तप कल्याणक 30 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों, चैत्यालयों में भगवान का विशेष पूजन, आराधना और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। तिथि के अनुसार भगवान अरहनाथ का तपकल्याणक मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी के दिन आता है। तप कल्याणक के बारे में जैन धर्म ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि तप कल्याणक वह अवसर है जब उन्होंने 21 हजार वर्ष तक राज्य करने के बाद 42 हजार वर्ष की आयु पूरी कर सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया था। उन्होंने आम्र वृक्ष के नीचे रेवती नक्षत्र में दीक्षा ली और 12 सभाओं से घिरे हुए समवशरण में 20 हजार 984 वर्ष तक केवली के रूप में रहे। भगवान अरनाथ ने राज-पाट का त्याग करके दीक्षा धारण की। उन्होंने आम्र वृक्ष के नीचे रेवती नक्षत्र में जैन दीक्षा धारण की। दीक्षा लेने से पहले उन्होंने एक माह तक तेला का नियम (तीन दिन उपवास) का पालन किया।</p>
<p>भगवान अरनाथ के दीक्षा धारण करने पर चक्रपुर नगर के राजा अपराजित को आहारदान देने से पंचाश्चर्य प्राप्त हुए। यह भगवान अरहनाथ जी के पांच कल्याणकों में से एक है, जिसमें वह सांसारिक मोह-माया का त्याग कर आत्म-साधना के पथ पर अग्रसर हुए थे। तप कल्याणक के बाद भगवान अरहनाथ केवली ने अवस्था के दौरान छद्मस्थ अवस्था के 16 वर्ष पूरे होने के बाद आम्रवन के नीचे केवल ज्ञान प्राप्त किया। उनके समवशरण में 30 गणधर, 50 हजार मुनि, 60 हजार आर्यिकाएं, 1 लाख 60 हजार श्रावक, 3 लाख श्राविकाएं, असंख्यात देव-देवियां और संख्यात तिर्यंच शामिल थे। केवल ज्ञान के बाद उन्होंने 20 हजार 984 वर्ष तक केवली अवस्था में व्यतीत किए। चैत्र कृष्ण अमावस्या के दिन रेवती नक्षत्र में रात्रि के पूर्व भाग में सम्मेदशिखर पर सिद्धपद को प्राप्त हुए।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/lord_arahnaths_tap_kalyanak_on_30th_november/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बड़ागांव धसान में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियां पूरी, 23 से 30 नवंबर तक भव्य आयोजन : 25 नवंबर को तरुण मित्र परिषद दिल्ली द्वारा दिव्यांग शिविर, कृत्रिम अंग और श्रवण यंत्र दिए जाएंगे </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/panchkalyanak_pratishtha_mahotsav_preparations_completed/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/panchkalyanak_pratishtha_mahotsav_preparations_completed/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 15:48:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Udar Sagar]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Limbs Camp]]></category>
		<category><![CDATA[Badagaon Dhasan]]></category>
		<category><![CDATA[Bhajan Sandhya]]></category>
		<category><![CDATA[Cultural Event]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi Tarun Mitra Parishad]]></category>
		<category><![CDATA[Divyang Camp]]></category>
		<category><![CDATA[Gajrath]]></category>
		<category><![CDATA[Garbh Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[gyan kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Culture जैन न्यूज़]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Event]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Teerth]]></category>
		<category><![CDATA[Janakalyan Teerth]]></category>
		<category><![CDATA[Janma Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[Kalyanak Utsav]]></category>
		<category><![CDATA[Kavi Sammelan]]></category>
		<category><![CDATA[Kerala Magician Show]]></category>
		<category><![CDATA[Moksha Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Upashant Sagar]]></category>
		<category><![CDATA[Padmasan Idol]]></category>
		<category><![CDATA[Panchkalyanak Mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[Philanthropy]]></category>
		<category><![CDATA[Pratishtha Mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[religion news]]></category>
		<category><![CDATA[Sahastrakoot Jinalaya]]></category>
		<category><![CDATA[shrifal news]]></category>
		<category><![CDATA[Social Welfare Camp]]></category>
		<category><![CDATA[Spiritual Event]]></category>
		<category><![CDATA[Suvratnath Bhagwan]]></category>
		<category><![CDATA[Tap Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[tirth kshetra]]></category>
		<category><![CDATA[Vishva Shanti Mahayagya]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य उदार सागर]]></category>
		<category><![CDATA[कल्याणक उत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[कवि सम्मेलन]]></category>
		<category><![CDATA[कृत्रिम अंग वितरण]]></category>
		<category><![CDATA[गजरथ महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[गर्भ कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[जनकल्याण तीर्थ]]></category>
		<category><![CDATA[जन्म कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[जैन कार्यक्रम]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[ज्ञान कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[तप कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली तरुण मित्र परिषद]]></category>
		<category><![CDATA[दिव्यांग शिविर]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक आयोजन]]></category>
		<category><![CDATA[पंचकल्याणक महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[पद्मासन प्रतिमा]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतिष्ठा महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ागांव धसान]]></category>
		<category><![CDATA[भजन संध्या]]></category>
		<category><![CDATA[मायाजाल कार्यक्रम]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि उपशांत सागर]]></category>
		<category><![CDATA[मोक्ष कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[विश्व शांति महायज्ञ]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सहस्त्रकूट जिनालय]]></category>
		<category><![CDATA[सामाजिक सेवा कैंप]]></category>
		<category><![CDATA[सांस्कृतिक कार्यक्रम]]></category>
		<category><![CDATA[सुव्रतनाथ भगवान]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=94963</guid>

					<description><![CDATA[बड़ागांव धसान स्थित जनकल्याण तीर्थ में 23 से 30 नवंबर तक आचार्य श्री उदार सागर महाराज और मुनि उपशांत सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित होगा। 25 नवंबर को दिव्यांगों हेतु विशेष सेवा शिविर भी रखा जाएगा। पढ़िए मुकेश जैन लार की रिपोर्ट… बड़ागांव धसान—जनकल्याण तीर्थ, टीकमगढ़ रोड बड़ागांव में आयोजित [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बड़ागांव धसान स्थित जनकल्याण तीर्थ में 23 से 30 नवंबर तक आचार्य श्री उदार सागर महाराज और मुनि उपशांत सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित होगा। 25 नवंबर को दिव्यांगों हेतु विशेष सेवा शिविर भी रखा जाएगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मुकेश जैन लार की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>बड़ागांव धसान—जनकल्याण तीर्थ, टीकमगढ़ रोड बड़ागांव में आयोजित होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियां पूर्ण हो चुकी हैं। यह भव्य आयोजन आचार्य श्री उदार सागर महाराज एवं मुनि श्री उपशांत सागर महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में 23 नवंबर से 30 नवंबर तक संपन्न होगा।</p>
<p>जनकल्याण क्षेत्र में सहस्त्रकूट जिनालय एवं मुनि श्री सुव्रतनाथ भगवान की 21 फीट ऊंची पाषाण पद्मासन प्रतिमा स्थापित है। इसी दिव्य परिसर में प्राण प्रतिष्ठा, गजरथ महोत्सव और विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें बाल ब्रह्मचारी पंडित जय निशांत जी, पंडित सनत कुमार जी, पंडित विनोद कुमार जी, पंडित संजय सरस जी और पंडित मनीष जैन खरगापुर द्वारा सभी धार्मिक क्रियाएं संपादित की जाएंगी।</p>
<p><strong>एडवोकेट प्रभात जैन के अनुसार आयोजन क्रम इस प्रकार रहेगा—</strong></p>
<p>23 नवंबर: घट यात्रा एवं गर्भ कल्याणक</p>
<p>24 नवंबर: गर्भ कल्याणक एवं राजा नाभिराय दरबार</p>
<p>25 नवंबर: जन्म कल्याणक एवं आदि कुमार का पालना</p>
<p>26 नवंबर: तप कल्याणक</p>
<p>27 नवंबर: तप कल्याणक रात्रि एवं विल्सन जादूगर (केरल) का मायाजाल</p>
<p>28 नवंबर: ज्ञान कल्याणक एवं रात्रि भजन संध्या</p>
<p>29 नवंबर: ज्ञान कल्याणक एवं रात्रि विराट कवि सम्मेलन</p>
<p>30 नवंबर: मोक्ष कल्याणक एवं मुनी सुव्रतनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक</p>
<p><strong>25 नवंबर को दिव्यांग शिविर</strong></p>
<p>तरुण मित्र परिषद दिल्ली द्वारा दिव्यांगों के लिए विशेष कैंप आयोजित किया जा रहा है। इस शिविर में दिव्यांगजन को कृत्रिम अंग, पोलियोग्रस्त बच्चों को कैलिपर्स और आर्थोशूज़, वहीं श्रवणहीन बुजुर्गों को श्रवण यंत्र प्रदान किए जाएंगे। यह परिषद का 62वां दिव्यांग सेवा शिविर है, जो समाज सेवा की अनूठी मिसाल प्रस्तुत करता है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/panchkalyanak_pratishtha_mahotsav_preparations_completed/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रतियोगिताओं में अव्वल विद्यार्थियों को मिले मेडल: भगवान महावीर स्वामी के तप कल्याणक पर हुए कार्यक्रम  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/medals_were_awarded_to_top_students_in_competitions/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/medals_were_awarded_to_top_students_in_competitions/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 13:45:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Children's Day]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[First Prime Minister Pandit Jawaharlal Nehru]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Mahavir Swami]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Tap Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[तप कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू]]></category>
		<category><![CDATA[बाल दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान महावीर स्वामी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=94513</guid>

					<description><![CDATA[देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में तथा भगवान महावीर स्वामी के तप कल्याणक महोत्सव विद्यालय में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पिपलाई से पढ़िए, एकता जैन की यह खबर&#8230; पिपलाई। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में तथा भगवान महावीर स्वामी के तप कल्याणक महोत्सव विद्यालय में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। <span style="color: #ff0000">पिपलाई से पढ़िए, एकता जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पिपलाई।</strong> देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में तथा भगवान महावीर स्वामी के तप कल्याणक महोत्सव विद्यालय में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस अवसर पर शिक्षकों द्वारा नेहरू के बाल प्रेम, आदर्शाे और देश निर्माण में उनके योगदानों पर प्रकाश डालते हुए भगवान महावीर के तप कल्याणक के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई और उनके प्रेरणादाई संदेशों को जीवन में अनुसरण करने का संदेश प्रदान किया गया। इस अवसर पर ज्योति शिक्षण संस्थान के निदेशक अखलेश गुर्जर ने बताया कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिन उनका बच्चों के प्रति विशेष प्यार और स्नेह को प्रदर्शित करता है।</p>
<p>एक शिक्षक सदैव बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए प्रयासरत रहता है। जिससे बच्चे अपने सपनों को पूरा कर समाज,राज्य और देश का उज्ज्वल भविष्य बना सके। वर्धमान कोचिंग सेंटर की निदेशक एकता जैन ने महावीर स्वामी के तप कल्याणक महोत्सव के बारे में बताया कि भगवान महावीर स्वामी ने 30 वर्ष की आयु में संन्यास लेकर राज वैभव का त्याग किया और कठोर तपस्या शुरू की थी। आज का यह दिन भगवान महावीर के द्वारा अपनाई गई तपस्या और त्याग की भावना को याद दिलाता है। उनके द्वारा प्रतिपादित जिओ और जीने दो के सिद्धांत को हमें अपने जीवन में उतरना चाहिए। इस अवसर पर राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के अनुरोध पर राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग के द्वारा जारी निर्देशों की अनुपालना में ज्योति शिक्षण संस्थान उच्च माध्यमिक विद्यालय पिपलाई तथा वर्धमान कोचिंग संस्थान द्वारा जैन धर्म के प्रवर्तक देवाधिदेव भगवान ऋषभदेव के जन्म एवं दीक्षा कल्याणक के उपलक्ष्य में की गई विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित कर ज्योति शिक्षण संस्थान के निदेशक अखलेश गुर्जर और वर्धमान कोचिंग की निदेशक एकता जैन द्वारा बालक बालिकाओं को बाल दिवस एवं भगवान महावीर के तप कल्याणक महोत्सव के अवसर पर मेडल प्रदान कर उत्साहवर्धन किया गया।</p>
<p>जिसमें चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान राधिका गौड़ एवं अजय मीना, द्वितीय स्थान सागर महावर,तृतीय स्थान जोयब खांन और शिवानी खटाना ने प्राप्त किया। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान अंजू मीणा, द्वितीय स्थान नैतिक गौड़ एवं आमनाबानो तृतीय स्थान विशाल मीना एवं कृष्णा गुर्जर ने प्राप्त किया। निबंध प्रतियोगिता में प्रथम स्थान यनु जांगिड़, द्वितीय स्थान तेजस्वनी सिसोदिया, तृतीय स्थान आरिश खांन ने प्राप्त किया। इस अवसर पर पांचवीं बोर्ड में विद्यालय स्तर पर सर्वाेच्च स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी गुंजन गौड़, कपिल गौड़, असद गौड़ को भी शील्ड प्रदान कर उनका सम्मान किया गया। मेडल पाकर सभी बच्चों के चेहरे खिल उठे। इस अवसर पर प्रधानाध्यापिका कृपा गुर्जर, गणेश योगी, गायत्री गौड़, करण गुर्जर, मुकेश मीणा, सुशीला सैनी, संगीता सैनी, मालती गौड़, अभिनंदन जैन अध्यापक-अध्यापिका तथा सीमा राय उपस्थित रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/medals_were_awarded_to_top_students_in_competitions/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भगवान महावीर का तप कल्याणक 14 नवंबर को: तिथि के अनुसार मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी को मनाया जाता है तप कल्याणक </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/lord_mahavirs_tap_kalyanak_on_14th_november/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/lord_mahavirs_tap_kalyanak_on_14th_november/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 12:11:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[14 november]]></category>
		<category><![CDATA[14 नवंबर]]></category>
		<category><![CDATA[24th Tirthankara]]></category>
		<category><![CDATA[24वें तीर्थंकर]]></category>
		<category><![CDATA[Atmadharma Jagat]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Mahavir]]></category>
		<category><![CDATA[Margashirsha Krishna Dashami]]></category>
		<category><![CDATA[Samavasarana]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Tap Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[आत्मधर्म जगत]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[तप कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान महावीर]]></category>
		<category><![CDATA[मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[समवशरण]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=94338</guid>

					<description><![CDATA[जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का तप कल्याण 14 नवंबर को मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी के दिन पूरे धार्मिक उल्लास और पारंपरिक भक्ति के अनुसार मनाया जाएगा। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संशोधित प्रस्तुति&#8230; इंदौर। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का तप कल्याण 14 नवंबर को मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी के दिन पूरे धार्मिक उल्लास और पारंपरिक भक्ति के अनुसार मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संशोधित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का तप कल्याण 14 नवंबर को मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी के दिन पूरे धार्मिक उल्लास और पारंपरिक भक्ति के अनुसार मनाया जाएगा। मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी के दिन भगवान महावीर ने दीक्षा ग्रहण कर तप आरंभ किया था। इस दिन देश और विदेश के दिगंबर जैन मंदिरों में भगवान महावीर की विशेष आराधना, पूजन, विधान, अभिषेक, शांतिधारा, पाठ सहित अन्य धार्मिक क्रियाएं की जाएंगी। इंदौर शहर के भी सभी प्रमुख दिगंबर जैन मंदिरों तथा चैत्यालयों में भी तप कल्याणक पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। भगवान महावीर का जन्म करीब ढाई हजार वर्ष पहले (ईसा से 599 वर्ष पूर्व), वैशाली गणराज्य के क्षत्रिय कुंड में क्षत्रिय परिवार हुआ था। 30 वर्ष की आयु में महावीर ने संसार से विरक्त होकर राज वैभव का त्याग कर दिया और संन्यास धारण कर आत्म कल्याण के पथ पर निकल पड़े। 12 वर्षाें की कठिन तपस्या के बाद उन्हें मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी के दिन केवल ज्ञान प्राप्त हुआ। इसके बाद भगवान महावीर ने समवशरण में ज्ञान का प्रकाश प्रसारित किया।</p>
<p>72 वर्ष की आयु में उन्हें पावापुरी से मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस दौरान महावीर स्वामी के कई अनुयायी भी बने। जिसमें उस समय के प्रमुख राजा बिम्बिसार, कुणिक और चेटक भी शामिल थे। जैन समाज महावीर स्वामी के जन्म दिवस को महावीर जयंती तथा उनके मोक्ष दिवस को दीपावली के रूप में धूमधाम से मनाता है। कार्तिक शुक्ल एकम को निर्वाण लाडू चढ़ाया जाता हैं।</p>
<p><strong>तीर्थंकर सभी जीवों को बताते हैं आत्मिक सुख का उपाय </strong></p>
<p>जैन ग्रंथों के अनुसार समय-समय पर धर्म तीर्थ के प्रवर्तन के लिए तीर्थंकरों का जन्म होता है। जो सभी जीवों को आत्मिक सुख प्राप्ति का उपाय बताते हैं। तीर्थंकरों की संख्या चौबीस ही कही गयी है। भगवान महावीर वर्तमान अवसर्पिणी काल की चौबीसी के अंतिम तीर्थंकर थे और हिंसा, पशु बलि, जात-पात का भेद-भाव जिस युग में बढ़ गया, उसी युग में भगवान महावीर का जन्म हुआ। उन्होंने दुनिया को सत्य, अहिंसा का पाठ पढ़ाया। तीर्थंकर महावीर स्वामी ने अहिंसा को सबसे उच्चतम नैतिक गुण बताया। उन्होंने दुनिया को जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत बताए। इनमें अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य (अस्तेय),ब्रह्मचर्य हैं। उन्होंने अनेकांतवाद, स्यादवाद और अपरिग्रह जैसे अद्भुत महाव्रती सिद्धांत दिए।</p>
<p><strong>महावीर का आत्मधर्म जगत की प्रत्येक आत्मा के लिए समान </strong></p>
<p>महावीर के सर्वाेदयी तीर्थों में क्षेत्र, काल, समय या जाति की सीमाएं नहीं थीं। भगवान महावीर का आत्मधर्म जगत की प्रत्येक आत्मा के लिए समान था। दुनिया की सभी आत्मा एक-सी हैं, इसलिए हम दूसरों के प्रति वही विचार एवं व्यवहार रखें जो हमें पसंद हो। यही महावीर का ‘जियो और जीने दो’ का सिद्धांत है।</p>
<p><strong>12 वर्ष तक किया था भगवान महावीर ने तप </strong></p>
<p>भगवान महावीर का साधना काल 12 वर्ष का था। दीक्षा लेने के बाद भगवान महावीर ने जिन कल्पी श्रमण की कठिन चर्या को अंगीकार किया। उन्होंने केवल ज्ञान की प्राप्ति भी जिनकल्पी अवस्था में ही की। अपने पूरे साधना काल के दौरान महावीर ने कठिन तपस्या की और मौन रहे। इन वर्षों में उन पर कई उपसर्ग भी हुए, जिनका उल्लेख कई प्राचीन जैन ग्रंथों में मिलता है। जैन ग्रंथों के अनुसार केवल ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान महावीर ने उपदेश दिया। उनके 11 गणधर (मुख्य शिष्य) थे, जिनमें प्रथम इंद्रभूति थे।</p>
<p><strong>भगवान महावीर ने बताए पांच व्रत</strong></p>
<p>सत्य― सत्य के बारे में भगवान महावीर स्वामी कहते हैं, हे पुरुष! तू सत्य को ही सच्चा तत्व समझ। जो बुद्धिमान सत्य की ही आज्ञा में रहता है, वह मृत्यु को तैरकर पार कर जाता है।</p>
<p>अहिंसा- इस लोक में जितने भी त्रस जीव (एक, दो, तीन, चार और पांच इंद्री वाले जीव) है, उनकी हिंसा मत कर, उनको उनके पथ पर जाने से न रोको। उनके प्रति अपने मन में दया का भाव रखो। उनकी रक्षा करो। यही अहिंसा का संदेश भगवान महावीर अपने उपदेशों से हमें देते हैं।</p>
<p>अचौर्य- दूसरे की वस्तु बिना उसके दिए हुए ग्रहण करना जैन ग्रंथों में चोरी कहा गया है।</p>
<p>अपरिग्रह- आवश्यक चीजों का उपयोग ही किया जाए।</p>
<p>ब्रह्मचर्य- महावीर स्वामी ब्रह्मचर्य के बारे में अपने बहुत ही अमूल्य उपदेश देते हैं कि ब्रह्मचर्य उत्तम तपस्या, नियम, ज्ञान, दर्शन, चारित्र, संयम और विनय की जड़ है। तपस्या में ब्रह्मचर्य श्रेष्ठ तपस्या है। जैन मुनि, जैन साध्वी इन्हें पूर्ण रूप से पालन करते हैं, इसलिए उनके महाव्रत होते हैं और श्रावक, श्राविका इनका एक देश पालन करते हैं, इसलिए उनके अणुव्रत कहे जाते हैं।</p>
<p>क्षमा- क्षमा के बारे में भगवान महावीर कहते हैं-मैं सब जीवों से क्षमा चाहता हूं। जगत के सभी जीवों के प्रति मेरा मैत्री भाव है। मेरा किसी से बैर नहीं है। मैं सच्चे हृदय से धर्म में स्थिर हुआ हूं। सब जीवों से मैं सारे अपराधों की क्षमा मांगता हूं। सब जीवों ने मेरे प्रति जो अपराध किए हैं, उन्हें मैं क्षमा करता हूँ। वे यह भी कहते हैं ‘मैंने अपने मन में जिन-जिन पाप की वृत्तियों का संकल्प किया हो, वचन से जो-जो पाप वृत्तियां प्रकट की हों और शरीर से जो-जो पापवृत्तियां की हों, मेरी वे सभी पापवृत्तियाँ विफल हों। मेरे वे सारे पाप मिथ्या हों।श्</p>
<p>धर्म- धर्म सबसे उत्तम मंगल है। अहिंसा, संयम और तप ही धर्म है। भगवान महावीर जी कहते हैं जो धर्मात्मा है, जिसके मन में सदा धर्म रहता है। उसे देवता भी नमस्कार करते हैं। भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, क्षमा पर सबसे अधिक जोर दिया। त्याग और संयम, प्रेम और करुणा, शील और सदाचार ही उनके प्रवचनों का सार था।</p>
<p><strong>‘समाजवाद’ तब तक सार्थक नहीं होगा, जब तक है आर्थिक विषमता </strong></p>
<p>महावीर की अहिंसा केवल सीधे वध को ही हिंसा नहीं मानती है, अपितु मन में किसी के प्रति बुरा विचार भी हिंसा है। वर्तमान युग में प्रचलित नारा ‘समाजवाद’ तब तक सार्थक नहीं होगा, जब तक आर्थिक विषमता रहेगी। एक ओर अथाह पैसा, दूसरी ओर अभाव। इस असमानता की खाई को केवल भगवान महावीर का श्अपरिग्रहश् का सिद्धांत भर सकता है। अपरिग्रह का सिद्धांत कम साधनों में अधिक संतुष्टि पर बल देता है। यह आवश्यकता से ज्यादा रखने की सहमति नहीं देता है।</p>
<p><strong>मुक्ति की सरल और सच्ची राह भी दिखाई</strong></p>
<p>भगवान महावीर के अनुयायी उनके नाम का स्मरण श्रद्धा और भक्ति से करते हैं। उनका यह मानना है कि महावीर ने इस जगत को न केवल मुक्ति का संदेश दिया, अपितु मुक्ति की सरल और सच्ची राह भी दिखाई। भगवान महावीर ने आत्मिक और शाश्वत सुख की प्राप्ति के लिए अहिंसा धर्म का संदेश दिया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/lord_mahavirs_tap_kalyanak_on_14th_november/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्यश्री ने कहा-कोई भी कार्य करने से पहले अभ्यास जरूरी : पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में मना तप कल्याणक </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharyashree_said_that_practice_is_necessary_before_doing_any_work/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharyashree_said_that_practice_is_necessary_before_doing_any_work/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Nov 2025 11:12:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vinishchay Sagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Panch Kalyanak Pratishtha Mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Tap Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री विनिश्चय सागर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[तप कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=94130</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में पंच कल्याणक महोत्सव के तृतीय दिवस तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इसमें सर्वप्रथम श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा की गई। इसके बाद पूजन किया गया। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में पंच कल्याणक महोत्सव के तृतीय दिवस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में पंच कल्याणक महोत्सव के तृतीय दिवस तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इसमें सर्वप्रथम श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा की गई। इसके बाद पूजन किया गया। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में पंच कल्याणक महोत्सव के तृतीय दिवस तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इसमें सर्वप्रथम श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा की गई। इसके बाद पूजन किया गया। जन्म कल्याणक का हवन आदि किया गया। आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी का प्रवचन हुआ। आचार्य श्री ने कहा कि कोई भी कार्य करने से पहले अभ्यास करना होता है। अभ्यास बहुत जरूरी है, व्यक्ति चतुर तो बनता है लेकिन अभ्यास नहीं करता है तो वह फेल हो जाता है। फेल हो जाने के बाद वह परेशान और पछताता है। आचार्य श्री ने कहा कि कोई कार्य में कार्य से ज्यादा अभ्यास में परिश्रम होता है। यदि अभ्यास होता है तो कार्य में परेशानी नहीं आती। उन्होंने कहा कि दिगंबर मुद्रा का अभ्यास केशलोच से शुरू होता है। शरीर टेंपरेरी व्यवस्था है। आज है वह कल नहीं रहेगा। दिगंबर मुद्रा में सबसे पहले अभ्यास कराया जाता है और सबसे पहले केशलोच कराया जाता है।</p>
<p><strong>हमें आध्यात्मिकता की ओर भी अभ्यास शुरू करना चाहिए</strong></p>
<p>उन्होंने मनुष्य के विषय में कहा कि मनुष्य में विशेषता होती है कि वह जैसा चाहे वैसा परिवर्तन कर सकता है। अच्छे को बुरा कर सकता है और बुरे को अच्छा कर सकता है। अभ्यास से कुछ भी संभव हो सकता है। उन्होंने कहा की लौकिक कार्यों का तो भरपूर अभ्यास करते हैं लेकिन, हमें आध्यात्मिकता की ओर भी अभ्यास शुरू करना चाहिए। पूजा पाठ अनुष्ठान से धर्म और अध्यात्म का विकास है। अध्यात्म में हमें वस्तु स्वरूप को जानना होगा और उसमें आनंद उठाना होगा अध्यात्म को समझते हुए यदि हम वस्तु स्वरूप को नहीं समझेंगे तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।</p>
<p><strong>संस्कार और संस्कृति अच्छी तो पड़ाव भी अच्छा </strong></p>
<p>धर्म में जिसकी जितनी आस्था और ताकत है, वह उसे उतना ही लूट सकता है। धार्मिक अनुष्ठानों में लूटोगे तो पुण्य होगा। संस्कार और संस्कृति के विषय में बोलते हुए गुरुदेव ने कहा कि संस्कार और संस्कृति अच्छी होती है तो पड़ाव भी अच्छा होता है। यदि यह अच्छा नहीं है तो पड़ाव भी अच्छा नहीं होगा, थोड़ा सा बदलना है अध्यात्म से जुड़े महामंत्र से जोड़े मंत्र वाक्य से जोड़ेंगे तो मैं लिख कर देता हूं कि अपन स्वर्ग में मिलेंगे।</p>
<p><strong>ब्रह्मचारी नमन भैया के निर्देशन हुआ पूजन </strong></p>
<p>ब्रह्मचारी नमन भैया के निर्देशन में विनायक यंत्र पूजन किया गया। राजकुमार आदिकुमार का विवाह हुआ। जिसमें आदिकुमार की बारात निकाली गई। जिसमें उत्साह भरपूर दिखा। बग्गी में भगवान के माता-पिता बने सुधा जयकुमार डूंगरवाल, सौधर्म इंद्र-इंद्राणी मयंक विजया सांवला, कुबेर इंद्र मनीष सिंघल बैठे हुए थे। 32 हजार मुकुटबद्ध राजाओं द्वारा भेंट समर्पण, राज्याभिषेक आदि हुआ। साथ ही भरत बाहुबली संवाद हुआ। राज्यसभा में भगवान आदिनाथ ने सभी को आसि मसी कृषि का संदेश दिया अपनी दोनों पुत्री ब्राह्मी सुंदरी को शिक्षा प्रदान की।</p>
<p><strong>तीर्थंकर आदिनाथ का राज्याभिषेक हुआ </strong></p>
<p>तीर्थंकर आदिनाथ का राज्याभिषेक हुआ। राज्य सभा में जैसे ही नीलांजना नृत्य हुआ। राजकुमार आदिनाथ को वैराग्य हो गया और वह दीक्षा लेने चले गए। उस समय का क्षण काफी भावुक था। इसी क्रम में आचार्य श्री के सानिध्य में दीक्षाभिषेक दीक्षा विधि हुई और प्रतिमाओं पर दीक्षा विधि के संस्कार किए गए। आचार्य श्री ने भी तप कल्याणक का महत्व समझाया। एक दिन पूर्व जन्म कल्याणक की रात्रि में बेला में तीर्थंकर बालक का जन्म कल्याणक मनाते हुए पालना झुलाया गया एवं बाल क्रीड़ा की गई।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharyashree_said_that_practice_is_necessary_before_doing_any_work/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
