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	<title>Tags-पद्मावती &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>जैन शासन के देवी देवताओं का सम्मान पर्व नवरात्रि</title>
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		<pubDate>Sun, 18 Oct 2020 08:07:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म में नवरात्रि नवरात्रि….नौ दिन तक मनाया जाने वाला दैविय अनुष्ठानों का पर्व। यह पर्व जैन दर्शन में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है और देवी देवताओं के सम्मान स्वरूप उनकी आराधना कर मनाया जाता है। जहां पर्यूषण पर्व आध्यात्मिक उर्जा वाला पर्व है, वहीं नवरात्रि दैवीय उर्जा वाला पर्व है। जैन दर्शन में नवरात्रि का [&#8230;]]]></description>
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<h2 class="wp-block-heading">जैन धर्म में नवरात्रि</h2>



<p class="wp-block-paragraph">नवरात्रि….नौ दिन तक मनाया जाने वाला दैविय अनुष्ठानों का पर्व। यह पर्व जैन दर्शन में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है और देवी देवताओं के सम्मान स्वरूप उनकी आराधना कर मनाया जाता है। जहां पर्यूषण पर्व आध्यात्मिक उर्जा वाला पर्व है, वहीं नवरात्रि दैवीय उर्जा वाला पर्व है। जैन दर्शन में नवरात्रि का प्रादुर्भाव भरत चक्रवर्ती के काल से होता है। इसका प्रमाण आदि पुराण और भरतेश वैभव में मिलता है।<br> भरत चक्रवर्ती जब छह खण्ड का राज्य विजय कर लौटे तो इस दिग्विजय के काल में उनके राज्य, चक्ररत्नों व निधियों की रक्षा करने वाले अधिष्ठाता देवी देवताओं की सम्मानपूर्वक पूजा की गई। नवनिधि के रक्षकों के सम्मान का क्रम नौ दिन तक चला। तभी से जैन परम्परा में नवरात्रि का पर्व अनवरत मनाया गया है।<br> </p>



<h2 class="wp-block-heading">यह सम्मान है मिथ्यात्व नहीं।</h2>



<p class="wp-block-paragraph"> क्षणिक सम्यकदृष्टि भरत चक्रवर्ती जब चक्ररत्नों की पूजा कर अधिष्ठाता देवी देवताओ की पूजा कर सकते है।  जो उस भव से मोक्षगामी हुए और जिनके पिता वर्तमान चैबीसी के प्रथम तीर्थंकर हुए तो हम क्यों नहीं। यह कैसे मिथ्यात्व हो सकता है, क्योंकि अगर वे मिथ्यादृष्टि होते तो मोक्ष के अधिकारी भी नहीं होते।<br> नचरात्रि के इन नौ दिनों में चैबीस तीर्थंकरों के यक्ष यक्षणियों व अन्य देवी देचताओं की पूजा कर उनका यथायोग्य सम्मान करते हैं। तीर्थंकर तो वीतरागी हैं। वे तो आपकी मनोकामना पूर्ण नहीं करते। आपकी मनोकामना तो केवल उनके यक्ष यक्षणी ही पूर्ण करते हैं। नवरात्रि में विभिन्न अनुष्ठान होते है, क्योंकि इस समय उनकी उर्जा का प्रभाव अत्यधिक होता है और इसीलिए यह फलदायी होता है। संकट के समय आप जिनेन्द्र भगवान के आगे स्तुति कर संकट दूर करने की गुहार लगाते हैं, वह संकट भी यही देवी देवता दूर करते हैं। जो संसार के निर्वहन और सांसरिक सुखों की प्राप्ति में आपका सहयोग कर रहे हैं उनका सम्मान मिथ्यात्व कैसे हो सकता है। मिथ्यात्व तो जिनेन्द्र भगवान से की गई सांसारिक याचनाएं हैं।<br> </p>



<h2 class="wp-block-heading">कैसे हो अनुष्ठान और पूजा<br> </h2>



<p class="wp-block-paragraph">जैन धर्म में नवरात्रि धर्म सम्मत थी, है और रहेगी। किसी भी अनुष्ठान से पूर्व जिनेन्द्र भगवान की नित्य नियम की पूजा के बाद जैन शासन के देवी देवताओं की पूजा होती है। इन्हीं का नवरात्रि अधिक महत्व है। देवी देवताओं की आराधना के बाद विघान भी अलग अलग प्रकार के किए जा सकते हैं। अलग- अलग देवी देवताओ की पूजा और आराधना में अलग-अलग रंग, माला आसन का प्रयोग कर जाप या अनुष्ठान किए जाते हैं।<br> </p>



<h2 class="wp-block-heading">पद्मावति का महत्व<br> </h2>



<p class="wp-block-paragraph">नवरात्रि में देवी पद्मावती की आराधना समान्य तौर पर होती है,  क्योंकि उनकी पूजा की सारी विधि सहजता से उपलब्ध होती है और मंदिरों में कई स्थानों पर वे विराजमान भी हैं। पदमावती के 108 नामों में एक नाम दुर्गा भी है। कर्नाटक के हुमचा, दिल्ली के लालमंदिर, मालेगांव, गुवाहटी, पुष्पगिरी, बांसवाडा, आणिंदा पाश्र्वनाथ, कुंथगिरी, इंदौर, गुजरात, राजस्थान के कई शहरों में पद्मावती की पूर्जा अर्चना प्रमुखता से होती है।<br> उत्साह के साथ नवरात्रि का त्योंहार मनाएं ओैर जैन शासन के देवी देवताओं को सम्मान दें जो तीर्थंकरों के यक्ष यक्षिणी है।</p>
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