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	<title>T &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>18 अप्रैल को है विश्व धरोहर दिवस : विश्व धरोहर सूची में जैन धरोहरों को भी स्थान मिले </title>
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		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 05:51:39 +0000</pubDate>
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<p><strong>विश्व धरोहर दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस कहा जाता है, प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट एंड साइट की ओर से 1982 में की गई और बाद में यूनेस्को ने इसे वैश्विक मान्यता दी। <span style="color: #ff0000">विश्व धरोहर दिवस पर डॉ यतीश जैन, जबलपुर का पढ़िए, विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जबलपुर।</strong> विश्व धरोहर दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस कहा जाता है, प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट एंड साइट की ओर से 1982 में की गई और बाद में यूनेस्को ने इसे वैश्विक मान्यता दी। इस दिवस का उद्देश्य मानव सभ्यता की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। आज विश्व में लगभग 1200 के आसपास धरोहर स्थल सूचीबद्ध हैं, जबकि भारत में वर्तमान में 42 विश्व धरोहर स्थल हैं, जो हमारे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।भारत की धरोहरों में जैन परंपरा का विशेष स्थान है। जैन धर्म अत्यंत प्राचीन है और इसके सिद्धांत- अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मसंयम, न केवल धार्मिक जीवन को बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को भी दिशा देते हैं। जैन धरोहर स्थल केवल पूजा के स्थान नहीं हैं, बल्कि वे तप, त्याग, ज्ञान और कला के केंद्र हैं। इन स्थलों की विशेषता यह है कि यहाँ आध्यात्मिकता और स्थापत्य कला का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। संपूर्ण देश में प्रत्येक राज्य में अति प्राचीन जैन तीर्थ स्थल एवं जैन धरोहर है जिन्हें विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित किया जा सकता है। इसके लिए सार्थक प्रयास किया जाना आवश्यक है। उदाहरण स्वरूप कुछ ही स्थलों के बारे में जानकारी दे रहा हूं जिन्हें आसानी से यूनेस्को के मापदंड में लिया जा सकता है।</p>
<p><strong>श्रवणबेलगोला जैन धरोहरों में अत्यंत महत्वपूर्ण</strong></p>
<p>कर्नाटक में स्थित श्रवणबेलगोला जैन धरोहरों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ भगवान बाहुबली की 57 फीट ऊँची एकाश्म प्रतिमा स्थित है, जिसका निर्माण 981 ईस्वी में हुआ था। यह प्रतिमा पूरी तरह एक ही पत्थर से बनी है और यह त्याग, वैराग्य और आत्मविजय का प्रतीक है। हर 12 वर्ष में यहाँ महामस्तकाभिषेक का भव्य आयोजन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। राजस्थान के दिलवाड़ा जैन मंदिर जैन स्थापत्य कला के सर्वोत्तम उदाहरणों में से एक हैं। 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच निर्मित इन मंदिरों की संगमरमर की नक्काशी इतनी सूक्ष्म और सुंदर है कि पत्थर भी जीवंत प्रतीत होता है।</p>
<p><strong>विश्व का सबसे बड़ा जैन मंदिर समूह पालिताना</strong></p>
<p>गुजरात का शत्रुंजय पहाड़ी (पालिताना) जैन धर्म का अत्यंत पवित्र स्थल है। यहाँ लगभग 863 से अधिक मंदिर एक ही पर्वत पर स्थित हैं। यह विश्व का सबसे बड़ा जैन मंदिर समूह माना जाता है। इन मंदिरों का निर्माण विभिन्न कालों में हुआ, विशेष रूप से 11वीं से 19वीं शताब्दी के बीच। यहाँ तक पहुँचने के लिए लगभग 3800 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, जो एक प्रकार की साधना का अनुभव कराती हैं। यह स्थल यह दर्शाता है कि जैन धर्म में तप और श्रम का कितना महत्व है।</p>
<p><strong>मथुरा का कंकाली टीला का विशेष महत्व</strong></p>
<p>इसी प्रकार रणकपुर जैन मंदिर में 1444 स्तंभ हैं, और प्रत्येक स्तंभ की बनावट अलग-अलग है। यह स्थापत्य विज्ञान और कला का अद्भुत संगम है। गुजरात का गिरनार पर्वत जैन तीर्थ अत्यंत प्राचीन और पवित्र स्थल है, जहाँ 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का संबंध माना जाता है। यहाँ लगभग 9999 सीढ़ियाँ हैं, जो साधना और आत्मअनुशासन का प्रतीक हैं। देशभर में जैन धर्म की प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों की बात करें, तो मथुरा का कंकाली टीला का विशेष महत्व है। यहाँ से प्राप्त अवशेष पहली शताब्दी ईसा पूर्व से गुप्तकाल तक के हैं। यहाँ से जैन स्तूप, आयागपट्ट, मूर्तियाँ और अभिलेख प्राप्त हुए हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि मथुरा प्राचीन काल में जैन धर्म का प्रमुख केंद्र था। कंकाली टीला जैन कला और मूर्तिकला के प्रारंभिक विकास का साक्षी है।</p>
<p><strong>गोपाचल पर्वत जैन प्रतिमाएँ जैन शिल्पकला अद्वितीय</strong></p>
<p>उड़ीसा में स्थित उदयगिरि खंडगिरि गुफाएँ जैन मुनियों की तपस्थली रही हैं। ये गुफाएँ दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में राजा खारवेल के समय निर्मित हुई थीं। इन गुफाओं में साधना और ध्यान के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। हाथीगुम्फा अभिलेख यहाँ का प्रमुख आकर्षण है, जो उस समय के इतिहास को स्पष्ट करता है। यह स्थल दर्शाता है कि जैन धर्म का विस्तार पूर्वी भारत तक व्यापक रूप से था। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्थित गोपाचल पर्वत जैन प्रतिमाएँ जैन शिल्पकला का अत्यंत भव्य उदाहरण हैं। यहाँ चट्टानों को काटकर 7वीं से 15वीं शताब्दी के बीच विशाल तीर्थंकर प्रतिमाएँ बनाई गई हैं। कुछ प्रतिमाएँ 50 फीट से भी अधिक ऊँची हैं। ये प्रतिमाएँ न केवल कला का अद्भुत उदाहरण हैं, बल्कि वे जैन धर्म के प्रभाव और विस्तार को भी दर्शाती हैं।</p>
<p><strong>विश्व धरोहर मानकों के अनुरूप</strong></p>
<p>मध्यप्रदेश का सोनागिरि जैन तीर्थ भी जैन सिद्ध क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध है, जहाँ लगभग 100 से अधिक मंदिर स्थित हैं। यह स्थान मोक्षभूमि के रूप में जाना जाता है।</p>
<p>इन सभी जैन धरोहरों का यदि समग्र रूप से अध्ययन किया जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि वे यूनेस्को के विश्व धरोहर मानकों के अनुरूप हैं। इनमें ऐतिहासिकता, स्थापत्य उत्कृष्टता, सांस्कृतिक निरंतरता और आध्यात्मिक महत्व जैसे सभी गुण मौजूद हैं। ये धरोहरें हजारों वर्षों से जीवित परंपरा का हिस्सा हैं, जहाँ आज भी लाखों लोग आस्था और श्रद्धा के साथ आते हैं।</p>
<p><strong>धरोहरों को उचित संरक्षण मिले</strong></p>
<p>भारतीय संदर्भ में जैन धरोहरों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि ये केवल धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि वे मानवता के लिए नैतिक और आध्यात्मिक संदेश भी देती हैं। अहिंसा और संयम जैसे सिद्धांत आज के वैश्विक समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। यदि इन धरोहरों को उचित संरक्षण और वैश्विक पहचान मिले, तो यह न केवल जैन धर्म बल्कि सम्पूर्ण मानव सभ्यता के लिए लाभकारी होगा। विश्व धरोहर दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझें, उसका सम्मान करें और उसे सुरक्षित रखने का संकल्प लें। जैन धरोहरों के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है कि सच्ची प्रगति केवल भौतिक विकास में नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक उन्नति में भी निहित है। यदि हम इन धरोहरों को सहेजकर रखेंगे, तो हम अपने अतीत का सम्मान करते हुए भविष्य को सशक्त बना सकेंगे। यही इस दिवस का वास्तविक संदेश है।</p>
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		<title>मुरैना में 26 अक्टूबर को भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह : दिगंबर जैन साधु संतों की पहचान है पिच्छिका और कमंडल </title>
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		<pubDate>Thu, 16 Oct 2025 12:43:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुरैना में 26 अक्टूबर को दिगंबर जैन साधु संतों के लिए पिच्छिका परिवर्तन समारोह का आयोजन होगा। यह धार्मिक अनुष्ठान संयम, अहिंसा और त्याग का प्रतीक है। समारोह में युगल मुनिराज मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज की उपस्थिति रहेगी। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट… मुरैना। जैन संत जैनेश्वरी दिगंबरी मुनि दीक्षा लेने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुरैना में 26 अक्टूबर को दिगंबर जैन साधु संतों के लिए पिच्छिका परिवर्तन समारोह का आयोजन होगा। यह धार्मिक अनुष्ठान संयम, अहिंसा और त्याग का प्रतीक है। समारोह में युगल मुनिराज मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज की उपस्थिति रहेगी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जैन संत जैनेश्वरी दिगंबरी मुनि दीक्षा लेने पर सभी सांसारिक वस्तुओं, सुख सुविधाओं, वाहन आदि का त्याग कर देते हैं। वे केवल मोर पंखों से बनी पिच्छिका, कमंडल और शास्त्र रखते हैं, जो दिगंबर जैन साधु साध्वियों की पहचान भी हैं।</p>
<p>दिगंबर साधु केवल ज्ञान उपकरण के रूप में शास्त्र, शौच उपकरण के रूप में कमंडल, और संयम उपकरण के रूप में पिच्छिका रखते हैं। पिच्छिका का प्रयोग दैनिक क्रियाओं में निरंतर परिमार्जन हेतु किया जाता है। पिच्छिका का महत्व इतना है कि बिना इसके साधु सात कदम भी नहीं चल सकते।</p>
<p>मोर पंखों की कोमलता घटने पर पिच्छिका को परिवर्तित किया जाता है, और यह समारोह अधिकांशतः वर्षायोग के समापन पर किया जाता है। मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बताया कि यह अनुष्ठान संयम, त्याग और अहिंसा का प्रतीक है।</p>
<p>भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह 26 अक्टूबर को होगा। प्रातः 07 बजे श्री जिनेन्द्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं अष्टदृव्य से पूजन होगा। 07.30 बजे से श्री भक्तामर महामंडल विधान एवं युगल मुनिराजों के प्रवचन होंगे। दोपहर 01 बजे पिच्छिका परिवर्तन समारोह होगा और वर्षायोग कलशों का वितरण भी किया जाएगा।</p>
<p>चातुर्मास के चार महीने पूर्ण होने पर युगल मुनिराज श्री सिद्ध परमेष्ठि की भक्तियां एवं स्तुति कर चातुर्मास निष्ठापन करेंगे। समारोह के पश्चात 26/27 अक्टूबर को युगल मुनिराज मुरैना से पोरसा के लिए मंगल पद बिहार कर सकते हैं। पोरसा में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ 29 अक्टूबर से 06 नवंबर तक आयोजित होगा।</p>
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		<title>राजस्थान सरकार ने आचार्य वर्धमान सागर जी को बनाया राजकीय अतिथि : टोंक में चातुर्मासरत आचार्य श्री के सम्मान से जैन समाज में उल्लास </title>
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		<pubDate>Thu, 07 Aug 2025 11:50:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राजस्थान सरकार ने आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज को राजकीय अतिथि घोषित किया है। टोंक में चातुर्मासरत आचार्य श्री के इस सम्मान से जैन समाज में उत्सव का माहौल है। संयम, तप और सेवा के प्रतीक आचार्य श्री को यह मान्यता उनकी आध्यात्मिक साधना के लिए मिली। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… टोंक में चातुर्मासरत जैनाचार्य श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राजस्थान सरकार ने आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज को राजकीय अतिथि घोषित किया है। टोंक में चातुर्मासरत आचार्य श्री के इस सम्मान से जैन समाज में उत्सव का माहौल है। संयम, तप और सेवा के प्रतीक आचार्य श्री को यह मान्यता उनकी आध्यात्मिक साधना के लिए मिली। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>टोंक में चातुर्मासरत जैनाचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज को राजस्थान सरकार द्वारा राजकीय अतिथि घोषित किए जाने पर जैन समाज में हर्ष की लहर दौड़ गई। संयम साधना के 57वें वर्ष में प्रवेश कर चुके आचार्य श्री, आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज परंपरा के पंचम पट्टाचार्य हैं।</p>
<p>आचार्य श्री के सान्निध्य में 117 से अधिक भव्य जीवों को संयम दीक्षा प्राप्त हो चुकी है। वे देशभर में धार्मिक चेतना, संयम जीवन और सामाजिक समरसता के लिए विख्यात हैं। वर्ष 1969 में उन्होंने संयम मार्ग पर पदार्पण किया और 1990 में आचार्य पद पर प्रतिष्ठित हुए।</p>
<p><strong>वर्ष 2022 में भी उन्हें यह मान्यता प्राप्त हुई </strong></p>
<p>राजस्थान सरकार की ओर से 4 अगस्त 2025 को जारी पत्र द्वारा उन्हें यह विशेष सम्मान प्रदान किया गया। इससे पूर्व वर्ष 2022 में भी उन्हें यह मान्यता प्राप्त हुई थी। टोंक में वर्तमान में 35 साधुओं के संघ के साथ चातुर्मास कर रहे आचार्य श्री के सान्निध्य में बाहुबली के 3 महामस्तकाभिषेक (1993, 2006, 2018) और महावीर स्वामी जी का मस्तकाभिषेक (2022) जैसे कई भव्य आयोजन हो चुके हैं।</p>
<p><strong>राजस्थान सरकार का आभार जताया</strong></p>
<p>यह पत्र निवाई-पीपलू विधायक राम साहू वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष चंद्रवीर सिंह चौहान, टोंक जिला प्रमुख सरोज बंसल, समाजसेवी बीना जैन, अमित छामुनिया आदि द्वारा उन्हें भेंट किया गया। सनावद नगर के समस्त जैन समाज ने इस सम्मान पर गौरव अनुभव करते हुए राजस्थान सरकार का आभार जताया है। इस अवसर पर मनोज जैन, मुकेश जैन, संतोष बाकलीवाल, आशीष झांझरी, सुरेश पंचोलिया, सौभाग्य चंद जैन, संदीप चौधरी, सुनील पांवणा सहित अनेक जैन श्रद्धालु उपस्थित थे।</p>
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		<title>अहमदाबाद के दिवंगतों की आत्मशांति के लिए सुंदरकांड पाठ: अन्नपूर्णा रोगी सेवा संस्था और अन्य संस्थाएं भी करेगी सहयोग </title>
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		<pubDate>Fri, 20 Jun 2025 06:20:24 +0000</pubDate>
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<p><strong>विगत 12 जून को बेहद दर्दनाक विमान हादसे में दिवंगत हुए विमान यात्री, चालक दल, मेडिकल स्टूडेंट एवं नागरिकों की आत्मा की शांति के लिए नगर के अग्रणी सामाजिक संगठन मां अन्नपूर्णा रोगी सेवा एवं पारमार्थिक संस्था धामनोद की ओर से सुंदरकांड पाठ 21 जून रात 8 बजे इच्छापूर्ति हनुमान मंदिर, पुराना अस्पताल परिसर में किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> विगत 12 जून को बेहद दर्दनाक विमान हादसे में दिवंगत हुए विमान यात्री, चालक दल, मेडिकल स्टूडेंट एवं नागरिकों की आत्मा की शांति के लिए नगर के अग्रणी सामाजिक संगठन मां अन्नपूर्णा रोगी सेवा एवं पारमार्थिक संस्था धामनोद की ओर से सुंदरकांड पाठ 21 जून रात 8 बजे इच्छापूर्ति हनुमान मंदिर, पुराना अस्पताल परिसर में किया जाएगा। अध्यक्ष दीपक प्रधान ने बताया कि आयोजन में सभी धर्मप्रेमी, सनातनी, विप्रजन, समाजसेवी बंधु, संवेदनशील नागरिक सादर आमंत्रित हैं। इस मार्मिक संवेदनशील कार्य के लिए नगर की अन्य संस्थाओं ने भी इसमें निःशुल्क सहृदय सहयोग की पेशकश की है। सुंदरकांड पाठ कुशवाह एवं टीम, जल सेवा मां उमिया एवं मां नर्मदा चिल्ड वाटर, चाय सेवा मुनि सेवा समिति जैन समाज, टेंट व्यवस्था नर्मदा टेंट हाउस, प्रचार सहयोग माधुरी शॉपिंग सेंटर की ओर से किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त अन्य कई धर्मप्रेमी समाजसेवी इसमें अपना योगदान दे रहे हैं।</p>
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		<title>गुरु आज्ञा का पालन सिखाया ज्ञानमती माताजी ने: इसलिए परम श्रेष्ठ आर्यिकाओं में प्रथम हैं ज्ञानमति माताजी  </title>
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		<pubDate>Fri, 23 May 2025 10:28:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनिश्री जयंत सागर जी महाराज, मुनिश्री सिद्ध सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्रुत सागर महाराज जी का मागितुंगी में 25 मई को मंगल प्रवेश होगा। गुरु आज्ञा का पालन करते हुए पूज्य आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी जो कि प्रथम बालब्रह्मचारिणी, इन्होंने आर्यिका परंपरा को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनिश्री जयंत सागर जी महाराज, मुनिश्री सिद्ध सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्रुत सागर महाराज जी का मागितुंगी में 25 मई को मंगल प्रवेश होगा। गुरु आज्ञा का पालन करते हुए पूज्य आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी जो कि प्रथम बालब्रह्मचारिणी, इन्होंने आर्यिका परंपरा को जीवंत किया। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक पाटील की यह खबर&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे।</strong> पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनिश्री जयंत सागर जी महाराज, मुनिश्री सिद्ध सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्रुत सागर महाराज जी का मागितुंगी में 25 मई को मंगल प्रवेश होगा। मुनिश्री सारस्वत सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि ज्ञानमती माताजी देश की नंबर वन सबसे ज्ञानी आर्यिका हैं। प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान जी ने युग की आदि में जीवन जीने की कला सिखाया। गुरु आज्ञा का पालन करते हुए पूज्य आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी जो कि प्रथम बालब्रह्मचारिणी, इन्होंने आर्यिका परंपरा को जीवंत किया।</p>
<p><strong>108 फीट ऊंची जैन तीर्थंकर की मूर्ति गिनीज बुक में शामिल </strong></p>
<p>जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की 108 फीट ऊंची प्रतिमा को ‘गिनीज वर्ल्ड रिकार्डस’ में सबसे विशाल जैन प्रतिमा के रूप में शामिल किया गया है। इस प्रतिमा को एक ही पत्थर को तराशकर बनाया गया है। गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी जहां उन्होंने संपूर्ण भारत की पदयात्रा कर शताधिक आत्माओं में वैराग्य की ज्योति जगाई है, वहीं हस्तिनापुर में दिगंबर जैन त्रिलोक शोध संस्थान के प्रबंधकों को प्रेरणा देकर जम्बूद्वीप की प्रतिकृति के रूप में न केवल जैन समाज अपितु संपूर्ण विश्व को एक अद्वितीय उपहार दिया है। खुले आकाश के नीचे वलयाकार लवण समुद्र से वेष्ठित 101 फीट उत्तुंग सुमेरु के चारों ओर बनी जम्बूद्वीप की भव्य रचना को देखकर तिलोयपण्णत्ति, जम्बूद्वीवपण्णत्तिसंगहों में निहित भूगोल विषयक सामग्री को सहज ही हृदयंगम किया जा सकता है। वर्तमान में ‘जम्बूद्वीप’ के नाम से विख्यात इस परिसर में स्थित कमलमंदिर, ध्यान मंदिर, त्रिमूर्ति मंदिर, सहस्रकूट जिनालय, ॐ मंदिर, भगवान वासुपूज्य मंदिर, तेरहद्वीप जिनालय, जम्बूद्वीप पुस्तकालय, विस्तृत उद्यान समग्र रूप से इसकी शोभा में अभिवृद्धि करते हैं। नांद्रे नगरी का परम सौभाग्य है कि वर्ष 2025 के वर्षायोग के लिए पट्टाचार्य श्री 108 श्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, श्रमण मुनिश्री सिद्ध सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्री श्रुत सागर महाराज का विहार इंदौर से हुआ है।</p>
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		<title>भोपाल में स्थापित होगा विद्यासागर शोध संस्थान : संस्थान के पदाधिकारियों की नियुक्ति की  </title>
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		<pubDate>Wed, 09 Apr 2025 17:27:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री विद्यासागर शोध संस्थान भोपाल में स्थापित करने का फैसला किया है। इसका विधिवत पंजीयन हो गया है। आचार्यश्री के व्यक्तित्व पर लगातार शोध के लिए संस्थान भवन का निर्माण करने जा रहा है।-शोध कार्य में संस्थान की ओर से हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। भोपाल से मनोज जैन नायक की पढ़िए यह खबर&#8230; भोपाल। आचार्यश्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री विद्यासागर शोध संस्थान भोपाल में स्थापित करने का फैसला किया है। इसका विधिवत पंजीयन हो गया है। आचार्यश्री के व्यक्तित्व पर लगातार शोध के लिए संस्थान भवन का निर्माण करने जा रहा है।-शोध कार्य में संस्थान की ओर से हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। <span style="color: #ff0000">भोपाल से मनोज जैन नायक की पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> आचार्यश्री विद्यासागर शोध संस्थान स्थापित करने का फैसला किया गया है। इसका विधिवत पंजीयन हो गया है। पत्रकार रवींद्र जैन भोपाल ने बताया कि संस्थान के अध्यक्ष मनोहरलाल टोंग्या, उपाध्यक्ष नरेन्द्र जैन वंदना, सचिव रवीन्द्र जैन पत्रकार व कोषाध्यक्ष पदमकुमार सेठी को बनाया गया है। नेमीचन्द जैन नेहरु नगर संस्थान के सह सचिव होंगे। प्रदीप जैन नंदा और वंश जैन वंदना सदस्य बनाए गए हैं। संस्थान की औपचारिक शुरुआत गुरुवार को महावीर जयंती के अवसर पर मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज और मुनिश्री विमलसागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में सुबह 8.45 बजे श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर प्रोफेसर काॅलोनी में अभिषेक और शांतिधारा के साथ होगी।</p>
<p><strong>20 हजार वर्ग फीट भूमि देने की घोषणा</strong></p>
<p>आचार्यश्री के व्यक्तित्व पर लगातार शोध के लिए संस्थान एक भवन का निर्माण करने जा रहा है। इस भवन के लिए नरेन्द्र जैन वंदना परिवार ने 20 हजार वर्ग फीट भूमि परवलिया सड़क पर जय जिनेंद्र फार्म्स में देने की घोषणा की है। इस परिसर में संस्थान भवन के अलावा भोपाल में पहला देव शास्त्र गुरु मंदिर बनाने की भी योजना है।</p>
<p><strong>51 हजार रुपए की राशि दी जाएगी</strong></p>
<p>संस्थान के अध्यक्ष मनोहरलाल टोंग्या ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल के बाद देशभर में कोई भी व्यक्ति यदि आचार्यश्री के व्यक्तित्व या कृतित्व पर पीएचडी के लिए रजिस्ट्रेशन कराता है तो उन्हें शोध प्रबंधन में सहयोग के रूप में तत्काल 51 हजार रुपए की राशि दी जाएगी। इसके शोध कार्य में संस्थान की ओर से हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। संस्थान आचार्यश्री के जीवन प्रसंगों को सहेजने और उन पर निरंतर शोध को प्रोत्साहित करेगा।</p>
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		<title>दोहों का रहस्य - 20 गुरु के प्रति भक्ति, श्रद्धा और समर्पण ही सच्ची धार्मिकता है : गुरु दिखाते हैं आत्मज्ञान और ईश्वर तक पहुंचने का रास्ता </title>
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		<pubDate>Sun, 02 Feb 2025 01:30:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाहित होती हैं। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाहित होती हैं। यह संक्षिप्तता के साथ गहरे विचारों को व्यक्त करने का एक अद्भुत तरीका है। <span style="color: #ff0000">दोहों का रहस्य कॉलम की बीसवीं कड़ी में पढ़ें मंजू अजमेरा का लेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><span style="color: #ff0000"><strong>&#8220;कबीर ते नर अंध है, गुरु को कहते और।</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर।&#8221;</strong></span></p>
<hr />
<p>कबीर दास जी इस दोहे में गुरु की महिमा को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं और गुरु को ईश्वर से भी ऊपर स्थान देते हैं। उनका मानना है कि यदि ईश्वर (हरि) आपसे रूठ जाएं, तो गुरु के माध्यम से उन्हें मनाया जा सकता है, क्योंकि गुरु ही वह मार्गदर्शक होते हैं जो आत्मज्ञान और ईश्वर तक पहुंचने का रास्ता दिखाते हैं। लेकिन यदि गुरु आपसे नाराज हो जाएं, तो आपको कोई ठिकाना नहीं मिलेगा, क्योंकि गुरु के बिना आत्मा का कल्याण असंभव है।</p>
<p>कबीर जी कहते हैं कि जो लोग गुरु की महिमा को नहीं समझते और उन्हें तुच्छ समझते हैं, वे आध्यात्मिक रूप से अंधे हैं। गुरु ही वह दिव्य प्रकाश होते हैं जो व्यक्ति को अज्ञान के अंधकार से बाहर निकालते हैं। वे ईश्वर तक पहुंचने के लिए एक सेतु का काम करते हैं।</p>
<p>गुरु के प्रति भक्ति, श्रद्धा और समर्पण ही सच्ची धार्मिकता है, जो ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। इसलिए, जो व्यक्ति सच्चे गुरु के मार्गदर्शन में रहता है, वह आसानी से ईश्वर को प्राप्त कर सकता है। कबीर का यह संदेश हमें गुरु की महिमा और उनके मार्गदर्शन की अहमियत को समझने की प्रेरणा देता है।</p>
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		<title>12 से 17 नवंबर के बीच होगा पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं चौबीसी मानस्तम्भ प्रतिष्ठा महा महोत्सव : हरी पर्वत में संपन्न हुई आगरा नगर की महिला मंडलों के प्रतिनिधियों की बैठक </title>
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		<pubDate>Sun, 27 Oct 2024 07:31:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शमशाबाद रोड स्थित बरौली अहीर में श्री 1008 भगवान चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर के नवीन जिनालय में 12 से 17 नवंबर के बीच मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में श्री 1008 मज्जिनेन्द्र चंद्रप्रभु जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं चौबीसी मानस्तम्भ प्रतिष्ठा महा महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। पढ़िए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शमशाबाद रोड स्थित बरौली अहीर में श्री 1008 भगवान चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर के नवीन जिनालय में 12 से 17 नवंबर के बीच मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में श्री 1008 मज्जिनेन्द्र चंद्रप्रभु जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं चौबीसी मानस्तम्भ प्रतिष्ठा महा महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अनंत कुमार जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> शमशाबाद रोड स्थित बरौली अहीर में श्री 1008 भगवान चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर के नवीन जिनालय में 12 से 17 नवंबर के बीच मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में श्री 1008 मज्जिनेन्द्र चंद्रप्रभु जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं चौबीसी मानस्तम्भ प्रतिष्ठा महा महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। इस महामहोत्सव को सफल बनाने हेतु आगरा जैन समाज की समस्त महिला मंडलों की एक महत्वपूर्ण बैठक 26 अक्टूबर को हरिपर्वत के श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के नारायण भवन में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता भारत जैन समाज गौरव मनोज जैन बाकलीवाल जी ने की। बैठक की शुरुआत हेमलता जैन ने मंगलाचरण के साथ की। इस बैठक में 400 महिला सदस्यों ने बगदा में आयोजित होने वाले छह दिवसीय पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव की सभी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी ली। बैठक के समापन पर पंचकल्याणक समिति ने सभी महिला मंडलों का हृदय से आभार व्यक्त किया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-68933" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241027-WA0016.jpg" alt="" width="1364" height="761" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241027-WA0016.jpg 1364w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241027-WA0016-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241027-WA0016-1024x571.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241027-WA0016-768x428.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241027-WA0016-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241027-WA0016-414x232.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241027-WA0016-990x552.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241027-WA0016-1320x736.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1364px) 100vw, 1364px" />इस अवसर पर उपस्थित थे पंचकल्याणक महोत्सव के महामंत्री अनंत जैन एवं अध्यक्ष सुधीर कुमार जैन, प्रदीप कुमार जैन, मनोज कुमार जैन, विशाल जैन, राकेश जैन बजाज, नरेश जैन, अनिल जैन, सुमन जैन, माधवी जैन, वंदना जैन, ज्योति नगर की मीरा जैन, शशि जैन सेठी, प्रगति जैन, रोशनी जैन, बबिता जैन, कुमकुम जैन, करण जैन, मधु जैन, और ज्योति नगर के कई वरिष्ठ नागरिक। अर्पितमय पावन वर्षायोग समिति के पदाधिकारी भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।</p>
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		<title>अमिताभ बच्चन की आवाज में हुआ कार्यक्रम : कौन बनेगा धर्म शिरोमणि में रूपाली और नेहा जैन रहीं प्रथम </title>
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		<pubDate>Tue, 17 Sep 2024 08:40:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पर्वराज पर्युषण पर्व के अंतर्गत छत्रपति नगर स्थित दलाल बाग में ज्ञानवर्धक प्रतियोगिता कौन बनेगा धर्म शिरोमणि संपन्न हुई, जिसे राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आकाशवाणी उद्घोषक अनुराग जैन ने अमिताभ बच्चन की दमदार जानदार और शानदार आवाज में प्रस्तुत किया । प्रतियोगिता में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आई टीमों के 70 प्रतिभागियों ने भाग लिया [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पर्वराज पर्युषण पर्व के अंतर्गत छत्रपति नगर स्थित दलाल बाग में ज्ञानवर्धक प्रतियोगिता कौन बनेगा धर्म शिरोमणि संपन्न हुई, जिसे राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आकाशवाणी उद्घोषक अनुराग जैन ने अमिताभ बच्चन की दमदार जानदार और शानदार आवाज में प्रस्तुत किया । प्रतियोगिता में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आई टीमों के 70 प्रतिभागियों ने भाग लिया और एंकर अनुराग द्वारा अमिताभ बच्चन की आवाज में धर्म समाज संस्कृति और संतों के व्यक्तित्व और कृतित्व पर पूछे गए सवालों के जवाब दिए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> इंदौर।</strong> पर्वराज पर्युषण पर्व के अंतर्गत छत्रपति नगर स्थित दलाल बाग में ज्ञानवर्धक प्रतियोगिता कौन बनेगा धर्म शिरोमणि संपन्न हुई, जिसे राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आकाशवाणी उद्घोषक अनुराग जैन ने अमिताभ बच्चन की दमदार जानदार और शानदार आवाज में प्रस्तुत किया । प्रतियोगिता में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आई टीमों के 70 प्रतिभागियों ने भाग लिया और एंकर अनुराग द्वारा अमिताभ बच्चन की आवाज में धर्म समाज संस्कृति और संतों के व्यक्तित्व और कृतित्व पर पूछे गए सवालों के जवाब दिए।</p>
<p>कार्यक्रम के प्रारंभ मे गायक संजय जैन ने मुकेश की आवाज में मंगलाचरण गीत प्रस्तुत किया, सांस्कृतिक समिति प्रमुख पवन की अगुवाई में, अरविंद जैन, सुनील जैन जिनेश जैन और आकाश जैन की टीम ने कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की प्रतियोगिता में विजेता टीम रही</p>
<p>1. प्रथम रुपाली जैन और नेहा जैन संगम नगर</p>
<p>2. द्वितीय अनुभव जैन सुदीप जैन उदयनगर</p>
<p>3. तृतीय झीनी जैन कुमुद जैन</p>
<p>4. चतुर्थ रिया कालला और उनकी टीम।</p>
<p>विजेता टीम सहित सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। पर्यवेक्षक मुक्ता जैन, अभिषेक जैन, संयोजक विद्या वधु मंडल की टीम और सामन्वयक वैशाली जैन और सोनाली बगड़िया ने भी संचालन मे सहयोग प्रदान किया एवं छत्रपति नगर ट्रस्ट, दयोदय चेरिटेबल ट्रस्ट, विनम्रवाणी परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर ट्रस्ट अध्यक्ष भूपेंद्र जैन, डॉ जैनेंद्र जैन, रमेश चंद जैन एमपीईवी, सतीश डबबेरा, अरविंद अखिलेश सोधिया राजेश जैन दद्दू इंजीनियर डी एल जैन आदि गणमान्य उपस्थित थे।</p>
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		<title>5 से 7 जुलाई तक 35वां आचार्य पदारोहण बांसवाड़ा में : देव शास्त्र गुरु के प्रति भक्ति से पुण्य अर्जित कर मनुष्य जीवन को सार्थक करें &#8211; आचार्य श्री वर्धमान सागर  </title>
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		<pubDate>Sun, 23 Jun 2024 13:52:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी बांसवाड़ा की खांदू कॉलोनी में 1008 श्री श्रेयांशनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। आज मुनि श्री पुण्यसागर जी का 18 साधु सहित गुरु चरण वंदना हेतु 17 वर्षों के बाद मिलन हुआ। इस [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी बांसवाड़ा की खांदू कॉलोनी में 1008 श्री श्रेयांशनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। आज मुनि श्री पुण्यसागर जी का 18 साधु सहित गुरु चरण वंदना हेतु 17 वर्षों के बाद मिलन हुआ। इस धर्म के अवसर को देखने के लिए बांसवाड़ा राजस्थान के अनेक नगर, मध्य प्रदेश, असम, कोलकाता, महाराष्ट्र, गुजरात आदि विभिन्न नगरों से हजारों भक्त उपस्थित थे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बांसवाड़ा।</strong> प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी बांसवाड़ा की खांदू कॉलोनी में 1008 श्री श्रेयांशनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। आज मुनि श्री पुण्यसागर जी का 18 साधु सहित गुरु चरण वंदना हेतु 17 वर्षों के बाद मिलन हुआ। इस धर्म के अवसर को देखने के लिए बांसवाड़ा राजस्थान के अनेक नगर, मध्य प्रदेश, असम, कोलकाता, महाराष्ट्र, गुजरात आदि विभिन्न नगरों से हजारों भक्त उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में देश के प्रसिद्ध भामाशाह आर के मार्बल ग्रुप के अशोक पाटनी, सुरेश पाटनी, कटारिया ग्रुप अहमदाबाद के सौभाग्य मल कटारिया, राकेश सेठी कोलकाता, दिनेश खोड़निया सागवाड़ा सहित हजारों भक्त इस अवसर पर उपस्थित थे।</p>
<p><strong>निकाली गई शोभायात्रा</strong></p>
<p>दिन की शुरुआत 1008 श्री श्रेयांश नाथ भगवान के अभिषेक बाद श्री जी की शांतिधारा का सौभाग्य आर के मार्बल ग्रुप के अशोक, सुरेश पाटनी परिवार, किशनगढ़ को प्राप्त हुआ। अन्य पुण्यार्जक परिवारों द्वारा भी शांतिधारा की गई। इसके बाद सिंटेक्स गेट पर संघ के सभी 28 साधु आचार्य श्री अजीत सागर जी के शिष्य मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज की अगवानी हेतु उपस्थित हुए। इस अवसर पर सुबह से ही भक्तों का तांता स्वागत और अगवानी करने के लिए लगा था।मुनि हितेंद्र सागर जी सहित सभी साधुओं ने मुनि पुण्यसागर जी की अगवानी की। शोभायात्रा का समापन श्री श्रेयांसनाथ जिनालय में हुआ, जहां पर विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की चरणवंदना चरणाभिषेक पंचामृत द्रव्यों से की। इस के पश्चात संघ के सभी साधुओं ने आचार्य श्री की वन्दना की। आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण आर के मार्बल ग्रुप के अशोक, सुरेश, सुशीला, तारिका पाटनी एवं परिवार के सदस्यों द्वारा किया गया। उनके साथ में बाहर से पधारे अतिथि सौभाग्यमल कटारिया अहमदाबाद, राकेश सेठी कोलकाता सहित सुरेश खोड़निया सागवाड़ा ,सुरेश सबलावत, वीणा दीदी, गज्जू भैया तथा आचार्य श्री के गृहस्थ अवस्था के भतीजे पारस पंचोलिया, अखिलेश जैन इंदौर ने किया। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन आरके मार्बल परिवार द्वारा किया गया। जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य सौभाग्य मलजी कटारिया अहमदाबाद को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>पुण्य का अर्जन करें</strong></p>
<p>श्रीमद् जैन धर्म की व्याख्या करते हुए आचार्य श्री ने बताया कि हमारा धर्म लक्ष्य लक्ष्मी वान है। हमारा आशय भौतिक लक्ष्मी से नहीं होकर केवल ज्ञान मोक्ष रूपी लक्ष्मी से है जो विनाश को प्राप्त नहीं होती। प्रथमाचार्य आचार्य शांति सागर जी की कृपा हुई कि उन्होंने लुप्त होते मुनि धर्म को संबल अपनी क्रियायो से दिया उन्होंने अपने जीवन को प्रयोगशाला बनाया। चारित्र के सभी अंगों का पालन किया। आज जो स्वतंत्र मुनियों का विहार हो रहा है। यह आचार्य शांति सागर जी की देन है। समाज सेठ अमृतलाल अनुसार आचार्य श्री ने बताया कि आप लौकिक लोगों को परिवार के रिश्तेदारों से मिलने पर खुशी होती है। हम साधुओं को भी साधुओं से मिलने में प्रसन्नता होती है। आचार्य अजीत सागर जी के शिष्य मुनि पुण्य सागर जी अपने संघ सहित 17 वर्षों के बाद हमारे दर्शन चरण वंदना हेतु पधारे हैं आप संघ परंपरा के शिष्य मुनि है जब संघ के साधु मिलते हैं तब हृदय में प्रसन्नता होती है और मुनि श्री पुण्य सागर जी संघ की वृद्धि करके आए हैं स्वयं के साथ शिष्यों को भी दर्शन कराए हैं। आचार्य अजीत सागर जी ने हमें आचार्य पद का भार सौंपा। हर परिवार का मुखिया चाहता है कि परिवार से दूर सदस्य वापस परिवार में रहे ऐसे ही संघ नायक भी चाहते हैं कि उनकी परंपरा की उनके साधु साथ में रहे। अभी आचार्य शांति सागर जी महाराज का आचार्य शताब्दी महोत्सव की शुरुआत अक्टूबर 2024 से अक्टूबर 2025 तक चलेगी इस विशाल संघ सानिध्य में प्रभावना पूर्वक मनाने की हमारी भावना है। आज के शुभ अवसर पर यही आशीर्वाद हम देना चाहते हैं कि आप सभी देव शास्त्र गुरु के प्रति भक्ति और श्रद्धा रखकर पुण्य का अर्जन करें पुण्य अर्जन करने से मनुष्य जीवन सार्थकता को प्राप्त होगा।</p>
<p><strong>आचार्य श्री में अनुपम वात्सल्य</strong></p>
<p>राजेश पंचोलिया इंदौर, अक्षय डांगरा अनुसार आपके पूर्व मुनि श्री पुण्य सागर जी ने गुरु वर्धमान सागर जी के प्रति अपनी भावांजलि में बताया कि हमारे दीक्षा गुरु आचार्य श्री अजीत सागर जी का सानिध्य हमें केवल 3 वर्ष मिला किंतु हमारे दीर्घकालीन संयम दीक्षा अवधि में हमें आचार्य वर्धमान सागर जी का सहारा मिला आज उनके आशीर्वाद से हम चारित्र मार्ग है।आचार्य श्री के हम प्रतिदिन परोक्ष गुरु वंदना करते थे अब हमें साक्षात में गुरु वंदना करने का अवसर मिला। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी में अनुपम वात्सल्य है ,करुणा है ,प्रेम है ,ज्ञान है हमें उनका मार्गदर्शन हमेशा मिलता है गुरु की कृपा से अंधेरे में भी टकराने का डर नहीं लगता है, गुरु की कृपा से हमारी गाड़ी निरंतर चल रही है। पंडित हसमुख जी शास्त्री ने कहा कि गुरु का गुणानुवाद सुमेरु पर्वत के समान पत्ते रुपी कागज पर हो सारे विश्व के समुद्र की स्याही बना ली जाए और विश्व के वृक्षों की टहनी रूपी कलम से गुरु का गुणानुवाद नहीं कर सकते हैं। आचार्य श्री शांति सागर जी एवम आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की पूजन थांदला ,धरियावद, पारसोला,बांसवाड़ा सहित अन्य नगर की समाज ने की।पूजन आर्यिका श्री महायश मति माताजी और वीणा दीदी ने कराई। पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 35 वा आचार्य पदारोहण बांसवाड़ा की बाहुबली कालोनी में 3 दिवसीय कार्यक्रम के पोस्टर का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। कमल सारगिया ने बताया कि आगामी जुलाई माह की 5 से 7 जुलाई आषाढ़ शुक्ल 2 दूज को 35 वा आचार्य पदारोहण विभिन्न कार्यक्रमो के साथ मनाया जाएगा। वैसे अंग्रेजी दिनांक अनुसार 24 जून 1990 आषाढ़ सुदी 2 को आचार्य पद मिला। खांदू कालोनी समाज द्वारा 24 जून को विशेष गुणानुवाद सभा रखी गई हैं जिसमे श्रावकों के साथ साधुगण भी भावांजलि अर्पित करेंगे</p>
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