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	<title>Sumatidham &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>Sumatidham &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जीवन रूपी जल बूंद यमराज के प्रचंड से सूखे उससे पहले मुस्करा लो : नव पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर ने देशना में जल की महत्ता बताई </title>
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		<pubDate>Fri, 02 May 2025 04:37:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गांधी नगर गोधा एस्टेट के सुमतिधाम पर आयोजित पट्टाचार्य महोत्सव के मुख्य आयोजन में लाखों श्रद्धालु के पहुंचने के बाद गुरुवार को पांचवे दिन विद्वानों के बीच जल बिंदु महाकाव्य संगोष्ठी हुई। राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी के बाद नव पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने जल और जल बिंदु की महत्ता प्रतिपादित [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>गांधी नगर गोधा एस्टेट के सुमतिधाम पर आयोजित पट्टाचार्य महोत्सव के मुख्य आयोजन में लाखों श्रद्धालु के पहुंचने के बाद गुरुवार को पांचवे दिन विद्वानों के बीच जल बिंदु महाकाव्य संगोष्ठी हुई। राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी के बाद नव पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने जल और जल बिंदु की महत्ता प्रतिपादित की। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, श्रीफल जैन न्यूज की संपादक रेखा संजय जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> गांधी नगर गोधा एस्टेट के सुमतिधाम पर आयोजित पट्टाचार्य महोत्सव में मुख्य आयोजन में लाखों श्रद्धालु के पहुंचने के बाद गुरुवार को पांचवे दिन विद्वानों के बीच सफल जल बिंदु महाकाव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। दो सत्रों में हुई संगोष्ठी में दक्षिण, उत्तर, पश्चिम और पूर्व से आए विद्वावानाचार्यों ने अपने-अपने वक्तव्य रखें। राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी के बाद नव पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने मंगल प्रवचन में कहा कि आचार्य विराग सागर ने जल बिंदु महाकाव्य की रचना की थी, बिंदु एक उत्कृष्ट शब्द है। पशु, पक्षी, मनुष्य सभी की उत्पत्ति बिंदु से हुई है। जल की बूंद ही नहीं जल से उत्पन्न होने वाले वीर का बोध भी बिंदु है, जो उत्कृष्ट साधना की ऊंचाई पर पहुंचाता है और सिद्ध परमात्मा बना देता है। इसलिए जल की रक्षा करो और शरीर रूपी इस बूंद की भी रक्षा करो। इससे प्राणों की रक्षा होगी और प्रण की भी रक्षा होगी और दोनों की रक्षा तुम्हें भगवान बना देगा। आचार्यश्री ने दृष्टांत के माध्यम से बताया कि एक घास पर ओंस की बूंद सूर्य की रोशनी में चमक उठती है। वहीं बूंद प्रचंड गर्मी से सूखकर खत्म हो जाती है। उसी तरह मित्रों जीवन जल की बूंद है। जब यमराज का प्रचंड तेज आएगा यह भी सूखकर खत्म हो जाएगी। जब तक बूंद पर ओस की चमक है। मुस्कुरा लो, अभी जीवन मोतियों सा चमक रहा है। इस चमकती बूंद के पानी को भगवान के चरणों में चढ़ा दो और स्वयं भगवान हो जाओ। उन्होंने एक अन्य दृष्टांत देकर बताया कि एक व्यक्ति एक पानी की बूंद छत पर डालता है तो वह भाप बनकर उड़ जाती है और वहीं बूंद जमीन पर पढ़ती है तो बीज को अंकुरित कर देती है। इसलिए कुल के वृद्धि कारक बनना, नाशक मत बनना। संगोष्ठी में पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने सभी विद्वानों के उद्गारों की सराहना भी की।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-full wp-image-80180" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095106-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1474" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095106-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095106-300x173.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095106-1024x590.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095106-768x442.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095106-1536x884.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095106-2048x1179.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095106-990x570.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095106-1320x760.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p><strong>धार्मिक क्रियाओं के साक्षी बने श्रावक श्राविकाएं</strong></p>
<p>श्री सुमतिनाथ दिगंबर जिनालय गोधा एस्टेट, पट्टाचार्य महोत्सव समिति, गुरु भक्त परिवार एवं मनीष-सपना गोधा ने बताया कि सुबह के सत्र में विधानाचार्य धर्मचन्द्र शास्त्री, चन्द्रकांत ईडी, नितिन झांझरी के निर्देशन में सुबह स्तुति, देव स्तवन, आचार्य वंदना, स्वाध्याय के बाद सुबह 6 बजे अभिषेक और शांतिधारा की विधियां हुई। 7.30 बजे से चित्र अनावरण, दीप प्रज्जवलन के साथ ही इंदौर सहित अन्य राज्यों से आए विद्ववत जनों का बहुमान भी किया गया। इसके बाद 12 आचार्य, 8 उपाध्याय और 140 मुनि महाराजों और आर्यिका मााताजी की आहाराचर्या संपन्न हुई। दो सत्रों में आयोजित संगोष्ठी की पट्टाचार्य, आचार्य और अन्य मुनिराजों तथा आर्यिका माताजी ने सराहना की।</p>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-80181" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095054-scaled.jpg" alt="" width="1661" height="2560" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095054-scaled.jpg 1661w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095054-195x300.jpg 195w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095054-664x1024.jpg 664w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095054-768x1184.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095054-997x1536.jpg 997w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095054-1329x2048.jpg 1329w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095054-990x1526.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095054-1320x2034.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1661px) 100vw, 1661px" /></p>
<p><strong>देशभक्ति और जिन शासन की आकृतियों से आसमान जगमग</strong></p>
<p>गुरु भक्त परिवार ने बताया कि जैन महाकुंभ के महोत्सव में बुधवार देर शाम आंधी तूफान भी सुमतिधाम में पहुंचे भक्तों की आस्था को डिगा नहीं पाया। देर शाम प्रोजेक्शन मेपिंग, लेजर शो के बाद रात 9 बजे मुंबई के कलाकारों ने सम्राट खारवेल नाटिका का मंचन किया। जिसे देख धर्मावलंबी भाव-विभोर हो उठे। इसके पश्चात 2100 ड्रोन के माध्यम से एक दर्जन से ज्यादा आकृतियां आसमान में उकेरी गई। सुस्वागतम और अतिथि देवो भव की परंपरा को चरितार्थ करते हुए ड्रोन शो ने सबसे पहले अतिथियों का सत्कार किया और इसके बाद देश को सलाम करते हुए आसमान में तिरंगों से वंदे मातरम लिखा। जिसके बाद परिसर में भारत माता का जयघोष गूंजा। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की आकृतियां ड्रोन संचालकों ने हुबहू आसमान में प्रदर्शित की। जिसे देख हर कोई अपने मोबाइल के कैमरों में कैद करता नजर आया। अयोध्या की तर्ज पर बने सुमतिधाम जिनालय की आकृति भी उकेरी गई और इसके बाद भगवान सुमतिनाथ की प्रतिमा का साक्षात दर्शन हुआ। पांच किमी के दायरे में यह आकृतियां जैनत्व के दर्शन को बयां कर रही थी। णमोकार महामंत्र के पांच काव्यों को भी आसमान में प्रदर्शित किया गया। ड्रोन शो में आचार्य विद्या सागर, विराग सागर, पट्टाचार्य विशुद्ध सागर, पुष्पदंत सागर, ज्ञानमती माताजी की आकृतियां भी उकेरी गई। इससे आसमान तारों से भरा महसूस हो रहा था। परिसर में मौजूद दर्शकों के साथ-साथ कई किमी के दायरे से देख रहे दर्शक अचंभित हुए बिना नहीं रह सके।</p>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-80182" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095041-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1614" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095041-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095041-300x189.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095041-1024x646.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095041-768x484.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095041-1536x968.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095041-2048x1291.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095041-990x624.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095041-1320x832.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p><strong>सर्वसुविधायुक्त टेंट सिटी अतिथियों को भाई</strong></p>
<p>भारतीय परंपरा अतिथि देवो भव: को चरितार्थ करते हुए सुमतिधाम में मेहमानों के लिए कई एकड़ में टेंट सिटी बनाई गई। छोटे-छोटे गुंबजनुमा टेंट में एयर कंडीशनर सहित सर्वसुविधाओं का इंतजाम किया गया। आचार्य आदित्य सागर महाराज के गृहस्थ जीवन के परिवारजन जबलपुर से बड़ी संख्या में पधारे। वहीं अन्य आचार्यों व महाराजों के गृहस्थी परिजन भी इस आयोजन के साक्षी बने और उन्हें इन सर्वसुविधायुक्त टेंट सिटी में ठहराया गया। गुरु भक्त परिवार और मनीष-सपना गोधा ने बताया कि सर्वसुविधायुक्त टेंट सिटी को सम्मेद शिखर और साकेत नगर के रूप में बसाया गया। गांधी नगर क्षेत्र में स्थित सभी जैन जिनालय, उपाश्रय, आश्रयगृहों सहित पूरे क्षेत्र के होटल, लॉज और अतिथि निवास गृह एक माह पहले ही बुक हो चुके थे।</p>
<figure id="attachment_80183" aria-describedby="caption-attachment-80183" style="width: 2560px" class="wp-caption alignnone"><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-80183" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095024-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1666" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095024-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095024-300x195.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095024-1024x666.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095024-768x500.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095024-1536x1000.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095024-2048x1333.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095024-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095024-990x644.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG_20250502_095024-1320x859.jpg 1320w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /><figcaption id="caption-attachment-80183" class="wp-caption-text">Oplus_16908288</figcaption></figure>
<p><strong>वो आसमा हो जाए मां-बाप जो साथ निभाए</strong></p>
<p>सुमतिधाम में प्रतिदिन आयोजित हो रहे सांस्कृतिक आयोजनों की झड़ी में एक से एक आयोजन हो रहे हैं। 28 राज्यों सहित विदेशों से पहुंचे जैन धर्मावलंबियों को महोत्सव के आयोजनों के साथ-साथ सांस्कृतिक आयोजन अपना कायल बना रहे हैं। विभिन्न तीर्थकरों की जीवन गाथा नाटिकाओं के प्रसंग के साथ-साथ वर्तमान परिस्थितियों से रूबरू कराने वाले आयोजन भी करवाए जा रहे हैं। हाल ही में हुई स्वस्ति मेहुल की भजन संध्या में माता-पिता और बेटी के बीच के नाजुक लेकिन, मजबूत बंधन को विभिन्न काव्यों के माध्यम से वर्णित किया गया। वो आसमां हो जाए मां-बाप जो साथ निभाएं&#8230; दो कुल को रोशन कर दे जब बेटी नाम कमाए&#8230; जैसे गीतों की प्रस्तुति दे मेहुल श्रोताओं की खास बन गई। बेटियों की महिमा का गुणगाण कर उन्होंने स्वरचित गीत छन-छन करती जब नन्हीं परी गाया तो जहां नन्ही परियों का दिल जीत लिया तो वहीं कई माता-पिता की आंखे भर आई</p>
<p><strong>आज होगा समापन</strong></p>
<p>गुरु भक्त परिवार ने बताया कि शुक्रवार 2 मई को सुबह 5 बजे से नित्य पूजन, अभिषेक और शांतिधारा के साथ गणाचार्य श्री विराग सागर गुरुदेव का 62 वां जन्म जयंती समारोह मनाया जाएगा। जिसके अंतर्गत महापूजा, आरती और गुणानुवाद सभा होगी। आहाराचर्या के बाद कई विशेषांकों का विमोचन भी किया जाएगा और देर रात आचार्य विराग सागर महाराज के जीवन पर आधारित नाटिका का मंचन भी होगा।</p>
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		<title>भगवान ऋषभनाथ जी ने अक्षय तृतीया पर ही किया था पारणा: इस बार अक्षय तृतीया तिथि अनुसार 30 अप्रैल को </title>
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		<pubDate>Tue, 29 Apr 2025 13:22:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज के साथ हिन्दु समाज में अक्षय तृतीया का धार्मिक उल्लास है। इस बार अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को आ रही है। इस दिन भगवान ऋषभनाथ जी को लगभग एक वर्ष के बाद आहार मिला था। उन्होंने इक्षु रस से पारणा किया था। यह इंदौर वासियों के लिए भी सौभाग्य की बात है कि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज के साथ हिन्दु समाज में अक्षय तृतीया का धार्मिक उल्लास है। इस बार अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को आ रही है। इस दिन भगवान ऋषभनाथ जी को लगभग एक वर्ष के बाद आहार मिला था। उन्होंने इक्षु रस से पारणा किया था। यह इंदौर वासियों के लिए भी सौभाग्य की बात है कि इसी दिन 30 अप्रैल को आचार्यश्री विशुद्धसागरजी महाराज को पट्टाचार्य की पदवी से विभूषित किया जाएगा। यह सुसंयोग सुमतिधाम की धरा पर बन रहा है। अक्षय तृतीया को लेकर वैसे तो असंख्य मान्यताएं हैं, लेकिन इनमें से प्रमुख मान्यताओं के बारे में <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में उपसंपादक प्रीतम लखवाल की कलम से जानिए&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन समाज के साथ हिन्दु समाज में अक्षय तृृतीया का धार्मिक उल्लास है। इस बार अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को आ रही है। जब भगवान ऋषभदेव संसार, शरीर और भोगों से विरक्त हो तप और मौन साधना करने के बाद आहार के लिए नगर और ग्रामों में विहार करने लगे, कोई भी अज्ञानता के कारण विधि पूर्वक उन्हें आहार नहीं देता था। छह माह बाद जब पुनः आहार के लिए हस्तिनापुर पहुंचे तब वहां के राजा श्रेयांस ने उन्हें इक्षु रस प्रदान किया। इससे उन्होंने आहार प्राप्त किया। जिस दिन यह आहार प्राप्त किया। उस दिन वैशाख मास की अक्षय तृतीया थी। इधर, यह इंदौर वासियों के लिए भी सौभाग्य की बात है कि इसी दिन 30 अप्रैल को आचार्यश्री विशुद्धसागरजी महाराज को पट्टाचार्य की पदवी से विभूषित किया जाएगा। यह सुसंयोग सुमतिधाम की धरा पर बन रहा है। अक्षय यानि कभी जिसका क्षय न हो, इस तिथि का जैन धर्म से गहरा संबंध है। हिन्दु धर्म में यह अति पुण्यकारी तिथि के रूप में वर्णित है। यह भी मान्यता है कि इस तिथि पर होने वाले विवाह भी अक्षय होते हैं। हिन्दू धर्म में अक्षय तृतीया पर्व का बहुत अधिक महत्व है। अक्षय तृतीया का पर्व इस वर्ष अत्यंत विशिष्ट संयोगों के साथ मनाया जाएगा। 30 वर्षों बाद इस पावन दिन पर बुधवार का दिन रोहिणी नक्षत्र, शोभन योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग एक साथ बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के इस दुर्लभ संयोग में किया गया हर पुण्यकर्म अक्षय फल देने वाला होगा और जीवन में सुख, समृद्धि तथा उन्नति के द्वार खोलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया को युगादि तिथि भी कहा जाता है। इसी दिन त्रेता युग का प्रारंभ हुआ था। इस दिन दान, जप, तप, हवन आदि कर्मों का फल अनंत गुना हो जाता है। जैन धर्म के अनुसार भगवान ऋषभदेव ने पारणा इसी दिन राजा श्रेयांश द्वारा इक्षुरस (गन्ने के रस) से किया था। इसलिए आहार दान, जलदान और औषधि दान का विशेष महत्व है। जैन धर्म में अक्षय तृतीया को इक्षु तृतीया भी कहा जाता है।</p>
<p><strong>जैन धर्म में अक्षय तृतीया का महत्व</strong></p>
<p>प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ ने 6 महीने आहार और 6 महीने बिना आहार व्रत ले रखा था। जब वे आहार के लिए विहार करते तो उन्हें विधि-विधान से आहार नहीं मिला। ऐेसे में उन्हें आहार मिले एक वर्ष बीत गया। एक वर्ष बाद जब उन्हें विधि अनुसार आहार मिला उस दिन अक्षय तृतीया थी। हस्तिनापुर के राजा श्रेयांस ने आहार दान किया था। इसलिए इस दिन दान का महत्व भी बहुत अधिक है। अक्षय तृतीया पर जैन समाजजन दान करते हैं, क्योंकि यह माना जाता है कि भगवान ऋषभनाथ ने सबसे पहले समाज में दान का महत्व समझाया था। जैन धर्म में अक्षय तृतीया को इक्षु तृतीया भी कहा जाता है। अक्षय तृतीया पर दान में जैन धर्म के लोग आहार दान, ज्ञान दान, औषधि दान या मंदिरों में दान करते हैं।</p>
<p><strong>अक्षय तृतीया पर यह भी जानें</strong></p>
<p>अक्षय तृतीया के दिन नए युग की शुरूआत हुई थी। इस दिन से त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। मान्यता यह भी है कि इसी दिन भगवान विष्णु के छटवें अवतार के रूप में भगवान परशुराम का प्रकटीकरण हुआ था। अक्षय तृतीया के दिन से ही महर्षि वेद व्यास ने भगवान श्रीगणेश की सहायता से महाभारत का लेखन आरंभ करवाया था। एक अन्य मान्यता है कि इसी दिन लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने अग्नि परीक्षा लेकर माता सीता को दुबारा अपनाया था। एक और किवदंती है कि पांडवों को इसी दिन अक्षय पात्र प्राप्त हुआ था, जिसमें कभी भोजन समाप्त नहीं होता था।</p>
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		<title>कोटा से सुमतिधाम की बस यात्रा सानंद संपन्न: संतों की एक साथ आहार चर्या अविस्मरणीय     </title>
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		<pubDate>Tue, 29 Apr 2025 10:47:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गुरु आस्था परिवार के बैनर तले कोटा से सुमतिधाम यात्रा हर्षाेल्लास से संपन्न हुई। सुमतिधाम इंदौर के लिए लगभग 100 यात्री कोटा से दो बसों से रवाना हुए। गुरु आस्था परिवार कोटा के बैनर तले इस यात्रा को जैन ध्वज दिखाकर रवाना किया। यात्रा संयोजकों एवं पदाधिकारियों का भावभीना अभिनंदन किया गया। कोटा से पढ़िए, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गुरु आस्था परिवार के बैनर तले कोटा से सुमतिधाम यात्रा हर्षाेल्लास से संपन्न हुई। सुमतिधाम इंदौर के लिए लगभग 100 यात्री कोटा से दो बसों से रवाना हुए। गुरु आस्था परिवार कोटा के बैनर तले इस यात्रा को जैन ध्वज दिखाकर रवाना किया। यात्रा संयोजकों एवं पदाधिकारियों का भावभीना अभिनंदन किया गया। <span style="color: #ff0000">कोटा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong> गुरु आस्था परिवार के बैनर तले कोटा से सुमतिधाम यात्रा हर्षाेल्लास से संपन्न हुई। सुमतिधाम इंदौर के लिए लगभग 100 यात्री कोटा से दो बसों से रवाना हुए। गुरु आस्था परिवार कोटा के बैनर तले इस यात्रा को जैन ध्वज दिखाकर रवाना करने के लिए सकल दिगंबर जैन समाज के महामंत्री पदम बड़ला, कोषाध्यक्ष जितेंद्र हरसौरा एवं मंदिर समिति महावीर नगर विस्तार योजना के अध्यक्ष सिद्धार्थ जैन(बंटी), महामंत्री पारस, पत्रिका गुरु आस्था परिवार कोटा के अध्यक्ष लोकेश, सीसवाली महामंत्री नवीन दौराया उपस्थित थे। यात्रा और कार्यक्रम संयोजक पवन ठोला, अनिल दौराया, मुकेश कोटिया, आशीष टोंग्या, प्रमोद ठग ने यात्रा संपन्न करवाई। सर्वप्रथम यात्रा संयोजकों एवं पदाधिकारियों का भावभीना अभिनंदन किया गया। 27 अप्रैल को रात्रि 9 बजे बस रवाना होकर अतिशय क्षेत्र पुष्पगिरी प्रातः काल पहुंची। जहां सभी श्रद्धालुओं ने दैनिक नित्य कर्म से निवृत्त होकर भक्ति भाव पूर्वक सभी जिनालयों के दर्शन किए। देवी अहिल्या की नगरी इंदौर सुमतिधाम तीर्थ पहुंचे। वहां पर पट्टाचार्य महा महोत्सव में धर्मसभा हुई। एक साथ इतने संतों की आहार चर्या देखते ही बनती थी।</p>
<p>वास्तव में देव शास्त्र गुरु के परम भक्त दानवीर मनीष गोधा सपना गोधा परिवार पट्टाचार्य महोत्सव अपने आप में एक चमत्कार से कम नहीं है। उनके बारे में लिखने के लिए मेरे शब्द कोष में शब्द नहीं। कई जन्मों का पुण्य सिमटकर जब झोली में आता है तब जाकर पंचम काल में ऐसा अद्भुत अपूर्व नजारा जीवन में मानव देख पाता है। कुल मिलाकर ये यात्रा अविस्मरणीय यादगार रही। इसको कोई भी कभी नहीं भूल पाएंगे। उधर, आरके पुरम से भी एक बस जिसमें 50 अधिक श्रद्धालुगण ने इंदौर सुमतिधाम की सुखद यात्रा संपन्न की।</p>
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		<title>आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज का पट्टाचार्य महोत्सव 27 अप्रैल से: 450 पिच्छी की उपस्थिति में होगा यह महोत्सव </title>
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		<pubDate>Wed, 09 Apr 2025 06:20:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर के इतिहास में पहली बार विशाल पट्टाचार्य महोत्सव होने जा रहा है। 27 अप्रैल से आरंभ होकर यह पांच दिवसीय कार्यक्रम 2 मई को पूर्ण होगा। इसमें देशभर के करीब 450 साधु-संत, साध्वियां और करीब 15 लाख श्रद्धालुुगण शामिल होंगे। इसके लिए तैयारियां की जा रही है। व्यवस्थाएं जुटाई जा रही हैं। इंदौर से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इंदौर के इतिहास में पहली बार विशाल पट्टाचार्य महोत्सव होने जा रहा है। 27 अप्रैल से आरंभ होकर यह पांच दिवसीय कार्यक्रम 2 मई को पूर्ण होगा। इसमें देशभर के करीब 450 साधु-संत, साध्वियां और करीब 15 लाख श्रद्धालुुगण शामिल होंगे। इसके लिए तैयारियां की जा रही है। व्यवस्थाएं जुटाई जा रही हैं। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए टीके वेद की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> आचार्यश्री आदिसागर जी महाराज की परंपरा में आचार्य श्री महावीर कीर्ति जी महाराज, आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज, आचार्य श्री सन्मतिसागर जी महाराज एवं आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज हुए। 3 जून 2024 को जालना महाराष्ट्र में पूर्ण चैतन्य अवस्था में आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज ने अपने शिष्य आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के लिए यह कहा कि हम चाहते हैं कि विशुद्धसागर जी महाराज का अपनी निःस्वार्थ भावना से, साधुओं में बिना राग द्वेष, प्रेम, वात्सल्य के साथ सभी का यथोचित ध्यान रखें। चर्या सभी श्रेष्ठ हों। बिना किसी जल्दबाजी के यह कार्यक्रम लगभग एक वर्ष बाद किया जा रहा है। इंदौर एवं जैन समाज में वात्सल्य और सेवा का कीर्तिमान बनाने वाले श्रेष्ठ श्रावक दंपत्ति ने स्व प्रेरणा से यह कार्यक्रम करने की भावना व्यक्त की। जिसे आचार्यश्री ने सहज स्वीकार कर यह दायित्व मनीष सपना गोधा गांधीनगर इंदौर को सौंपा। तभी से इस महोत्सव की तैयारियां की जा रही है तथा मनीष सपना गोधा दंपत्ति ने पूरे भारत वर्ष के सभी प्रमुख आचार्यों, श्रमणों को लगभग दो माह भ्रमण कर व्यक्तिगत निवेदन किया। इसमें देश भर के सभी संघों को बिना किसी भेदभाव के आमंत्रित किया गया। इसकी जो आमंत्रण पत्रिका बनी वह भी अविस्मरणीय और संग्रहणीय हो गई है। यह तय है कि समूचे भारत के इतिहास में इतने श्रमण और साध्वियां इसके पूर्व कभी एकत्रित नहीं हुए। लगभग 450 पिच्छी की उपस्थिति संभावित है।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-78625" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250409-WA0008.jpg" alt="" width="503" height="634" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250409-WA0008.jpg 503w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250409-WA0008-238x300.jpg 238w" sizes="auto, (max-width: 503px) 100vw, 503px" />विशाल पांडाल में 25 हजार एक साथ बैठ सकेंगे</strong></p>
<p>इस कार्यक्रम के लिए जो मुख्य पांडाल बना है। उसे देशना मंडपम नाम दिया गया है। यह पूर्णतः वातानुकूलित होगा। इसमें एक साथ 25 हजार व्यक्तियों की बैठने की व्यवस्था रहेगी। श्रावकों के लिए 4 वातानुकूलित भोजनशाला होंगी। इसमें वीआइपी, सामान्य श्रावक, त्यागी वृत्ति, सोले के भोजन की अलग-अलग व्यवस्था रहेगी। श्रमणों और साध्वियों के लिए लगभग 400 चौकों की व्यवस्था की गई है। इच्छुक श्रावकों को ये चौके दिए गए है। अशुद्धि में जो माताजी रहेंगी, उनके लिए प्रथक व्यवस्था की गई हैं।</p>
<p><strong>सभी की ठहरने की अलग-अलग रहेगी व्यवस्था </strong></p>
<p>लगभग 40 एकड़ का विशाल पार्किंग होगा और 200 एकड़ भूमि में यह पूर्ण कार्यक्रम होगा। महोत्सव स्थल पर देश भी सभी प्रमुख सामाजिक संस्थाओं के वरिष्ठों को आमंत्रित किया गया है तथा उनके लिए पूर्ण व्यवस्थाएं की गई हैं। आचार्यो को सौभाग्य सदन में, मुनिसंघ आचार्य विमलसागर भवन में, आर्यिका माताजी आचार्य विराग सागर भवन में ठहरेंगे। इसके अलावा आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज एवं आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के प्रकाशित ग्रंथों की भव्य प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है। साथ ही बाल संस्कार शिविर, प्लेजोन, इमर्सिव जोन, समवशरण की रचना आदि भी रहेगी। प्रोजेक्शन मेपिंग के माध्यम से जैन आगम की सुंदर कहानियां, आदिनाथ गाथा, महावीर गाथा, सम्राट खारवेल गाथा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, आधुनिक लेजर शो, ड्रोन शो भी दिखाया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय व्यक्ति प्राप्त स्वस्ति मेहुल जैन की भजन संध्या भी रखी गई है। इन कलाकारो की ख्याति इसलिए भी है कि देश के विश्वस्तरीय कार्यक्रम में यह अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं।</p>
<p><strong>कार्यक्रम इस प्रकार रहेंगे</strong></p>
<p>27 अप्रैल को सुबह 6 बजे महावीर बाग से सुमतिधाम मंगल प्रवेश, सुबह 9 बजे प्रवचन देशना मंडपम में, आहारचर्या, सुबह 10.30 बजे, स्वाध्याय दोपहर 2.30बजे वात्सल्य मंडपम में, आचार्य भक्ति शाम 6 बजे आरती मंडपम में, आरती शाम 7.30 बजे आरती मंडपम में, प्रेजेक्शन मेपिंग 8 बजे आरती मंडपम में, लेजर शो, 8.30 बजे, सांस्कृतिक कार्यक्रम 9 बजे देशना मंडपम में होंगे। प्रोजेक्शन मेपिंग रात 11 बजे आरती मंडपम में होंगे। यह कार्यक्रम प्रतिदिन होंगे। इसके अलावा विशेष कार्यक्रमों में 27 अप्रैल को पत्रकार सम्मेलन, 28 अप्रैल को पूत्य गणाचार्य जी का पूजन, 29 अप्रैल को पूज्य आचार्यों को शास्त्र, सिंहासन और कमंडल भेंट, 30 अप्रैल को पट्टाचार्य महोत्सव, 1 मई को राष्ट्रीय संगोष्ठी तथा 2 मई को पूज्य गणाचार्य का जन्म जयंती समारोह किया जाएगा। इसके अलावा प्रतिदिन दोपहर में एक-एक सामाजिक संस्थाओं का गुरुदेव के सामने चर्चा, प्रतिनिधियों की सभा होगी। प्रवेश रजिस्ट्रेशन के आधार पर ही होगा। अभी तक लगभग 80 हजार लोग पंजीयन करवा चुके हैं। पांच दिवसीय कार्यक्रम में लगभग 15 लाख लोग शामिल होंगे।</p>
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		<title>आपके शब्द अमृत का काम करें : मुनि श्री आदित्यसागर जी का सानिध्य पारस मणि के समान </title>
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		<pubDate>Sun, 16 Mar 2025 12:05:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री आदित्यसागर जी ससंघ इंदौर विराजित हैं। उनके सानिध्य में भक्तजन धर्मसभा का लाभ ले रहे हैं। मुनि श्री के मार्गदर्शन में सुमतिधाम में पट्टाचार्य महा महोत्सव होगा। इसकी तैयारियां जारी हैं। इंदौर से पढ़िए अभिषेक पाटिल की यह खबर&#8230; इंदौर। मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज, मुनि श्री अप्रमितसागर जी महाराज, मुनि श्री सहजसागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री आदित्यसागर जी ससंघ इंदौर विराजित हैं। उनके सानिध्य में भक्तजन धर्मसभा का लाभ ले रहे हैं। मुनि श्री के मार्गदर्शन में सुमतिधाम में पट्टाचार्य महा महोत्सव होगा। इसकी तैयारियां जारी हैं। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए अभिषेक पाटिल की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज, मुनि श्री अप्रमितसागर जी महाराज, मुनि श्री सहजसागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्रेयससागर जी महाराज यहां विराजमान है। मुनि श्री आदित्य सागर महाराज जी ने कहा कि आपके शब्द हमेशा अमृत का काम करें। जहर का नहीं, क्योंकि कुछ लोगों के शब्द कांटों से भी ज्यादा नुकीले होते हैं। सही बात है-कांटों का तो नाम ही बदनाम है। वरना चुभती तो निगाहें भी हैं। काटती तो जुभानें भी हैं। मुनि श्री आदित्यसागर जी का सानिध्य पारस मणि के स्पर्श के समान हैं।</p>
<p><strong>गुरु के प्रति समर्पण बने आदित्य</strong></p>
<p>उन्होंने MBA (Gold Medalist) जैसी शैक्षिक योग्यता, संपन्न एवं समृद्ध परिवार, स्वर्ण-आभूषणों के प्रतिष्ठित व्यापार और सुकुमारिता से भरे भविष्य की कामनाओं को एक पल में किसी तृण के समान छोड़ देने का साहस किया। जिसके पास विलासितापूर्ण जीवन जीने के अनेकों विकल्प मौजूद थे, जिसकी प्रखर दैहिक आभा, अप्रतिम सुंदरता, अद्वितीय बुद्धिलब्धि और पुण्य-शक्ति के आगे सभी सांसारिक सुख किसी चरण चंचरिक की तरह उसके सामने नतमस्तक होने को तैयार बैठे थे। परंतु इन सब मोह और सुखों के आगे तो भोगी झुका करते हैं। योगी नहीं, सन्मति भैया ने जो पथ चुना था। वह इन सब से ऊपर था। निर्ग्रंथ पथ और फिर सन्मति भैया ने 8 नवम्बर 2011 को गुरु के प्रति समर्पण विशुद्ध-सागर में ऐसी डुबकी लगाई कि सागर के अंदर जो गए वह थे “सन्मति”, पर जो बाहर आए वह थे &#8216;आदित्य&#8217;।</p>
<p><strong>पट्टाचार्य महा महोत्सव 25 अप्रैल से</strong></p>
<p>मुनि श्री आदित्य सागर महाराज जी के निर्देशन में आचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज का पट्टाचार्य महा महोत्सव 25 अप्रैल से 2 मई तक सुमतिधाम में होगा।</p>
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		<title>आचार्य विशुद्ध सागरजी का पट्टाचार्य पदारोहण 30 अप्रैल को इंदौर मेंः 400 से अधिक साधु एवं लाखों गुरुभक्त सम्मिलित होंगे। </title>
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		<pubDate>Thu, 13 Mar 2025 09:17:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विराग सागरजी द्वारा समाधि पूर्व दी गई अंतिम देशना अनुसार अपने शिष्य आचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज को अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए उन्हें पट्टाचार्य पद प्रदान किए जाने की जो घोषणा की थी उसे मूर्त रूप देने के लिए इंदौर के तीर्थ स्वरूप जिनालय सुमति धाम में पट्टाचार्य पदारोहण महोत्सव होगा। अक्षय तृतीया के दिन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विराग सागरजी द्वारा समाधि पूर्व दी गई अंतिम देशना अनुसार अपने शिष्य आचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज को अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए उन्हें पट्टाचार्य पद प्रदान किए जाने की जो घोषणा की थी उसे मूर्त रूप देने के लिए इंदौर के तीर्थ स्वरूप जिनालय सुमति धाम में पट्टाचार्य पदारोहण महोत्सव होगा। अक्षय तृतीया के दिन लगभग 400 से अधिक संत- साध्वियों के सानिध्य एवं महोत्सव में देशभर से आने वाले लाखों गुरु भक्तों की उपस्थिति में आचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज को पट्टाचार्य पद से सुशोभित किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर से राजेश जैन दद्दू की पूरी खबर&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> गणाचार्य विराग सागरजी द्वारा समाधि पूर्व दी गई अंतिम देशना अनुसार उन्होंने अपने शिष्य आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज को अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए उन्हें पट्टाचार्य पद प्रदान किए जाने की जो घोषणा की थी उसे मूर्त रूप देने के लिए आगामी 27 अप्रैल से 2 मई 20025 तक इंदौर के तीर्थ स्वरूप जिनालय सुमति धाम गोधा स्टेट में पट्टाचार्य पदारोहण महोत्सव होगा।</p>
<p><strong>विस्तृत विचार-विमर्श हेतु बैठक सम्पन्न</strong></p>
<p>महोत्सव की तैयारियों और उसकी रूपरेखा पर विस्तृत विचार-विमर्श हेतु बुधवार को गुरु भक्त परिवार द्वारा मुनिश्री आदित्य सागर जी के सानिध्य में नगर के आमंत्रित सभी दिगंबर जैन मंदिरों के पदाधिकारी एवं समाज की वरिष्ठजनों की बैठक संपन्न हुई। बैठक में उपस्थित सर्वश्री नरेंद्र वेद, राजकुमार पाटोदी, कैलाश वेद, हंसमुख गांधी, आजाद जैन, डॉ जैनेंद्र जैन, टी के वेद, अशोक खासगीवाला, प्रदीप बड़जात्या, डीके जैन, नकुल पाटोदी, जैनेश झांझरी, इंदर सेठी, राजेंद्र महावीर, अनिल गंगवाल उषा पाटनी, साधना दगडे आदि वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।</p>
<p><strong>जैन समाज के इतिहास में पहली बार </strong></p>
<p>सुमति धाम एवं गुरु भक्त परिवार के प्रमुख महादानी व निरभिमानी मनीष सपना गोधा के सौजन्य और उनके पुण्य से इंदौर में होने जा रहा पट्टाचार्य पदारोहण महोत्सव इंदौर की जैन समाज के इतिहास में पहली बार अब तक का सबसे बड़ा ऐतिहासिक आयोजन होगा। जिसे हम जैन धर्म और इंदौर की गरिमा के अनुरूप एकता, संयम और समर्पण से सफल बनाएंगे।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-76523" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0026.jpg" alt="" width="900" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0026.jpg 900w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0026-169x300.jpg 169w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0026-576x1024.jpg 576w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0026-768x1365.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0026-864x1536.jpg 864w" sizes="auto, (max-width: 900px) 100vw, 900px" />साधुओं की चर्या में सहभागिता निभाएं</strong></p>
<p>श्रुत संवेगी मुनिश्री आदित्य सागरजी महाराज ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पट्टाचार्य महोत्सव पूरे इंदौर नगर की जैन समाज का है महोत्सव में सभी संघ एवं पथ के साधु आएंगे इसलिए आवश्यक है कि आप सब पंथवाद और संतवाद से मुक्त होकर णमो लोए सब्ब साहूणं को ध्यान में रखकर सभी संघ एवं पंथ के साधुओं की चर्या (आहार, निहार और विहार) मैं चढ़कर सहभागिता निभाएं। अपनी सेवा का भाव जागृत करने और व्यवस्था में अव्यवस्था ना हो इस बात का ध्यान रखने की प्रेरणा देते हुए कहा कि महोत्सव आपकी एकता, समर्पण और प्रभावना से ही सफल होगा।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-76522" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0027.jpg" alt="" width="1280" height="577" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0027.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0027-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0027-1024x462.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0027-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0027-990x446.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />महोत्सव की रूपरेखा से अवगत कराया</strong></p>
<p>इस अवसर पर सुमति धाम न्यासी सपना मनीष गोधा ने बैठक का संचालन करते हुए महोत्सव की रूपरेखा से सभी को अवगत किया और कहा कि 65 एकड़ भूमि पर महोत्सव के लिए सभी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। महोत्सव में अनेकों आचार्य, उपाध्याय, मुनि, आर्यिका माताजी आदि लगभग 400 से अधिक पिच्छियां एवं 200 से अधिक ब्रह्मचारी भाई, बहने उपस्थित रहेंगे।</p>
<p><strong>शोभा यात्रा के साथ मंगल प्रवेश</strong></p>
<p>27 अप्रैल रविवार को आचार्य विशुद्ध सागरजी सहित एक साथ सभी संघों के साधु साध्वियों का शोभा यात्रा के साथ सुमति धाम में मंगल प्रवेश होगा। महोत्सव स्थल पर प्रवेश के लिए ऑनलाइन पंजीयन अनिवार्य किया गया है, बिना बारकोड स्कैनिंग प्रवेश नहीं होगा। महोत्सव के दौरान आचार्य विशुद्ध सागरजी द्वारा कुछ जैनेश्वरी दीक्षाएं भी प्रदान की जाएंगी एवं 2 मई को समाधिस्थ गणाचार्य विराग सागर जी की 61वीं जन्म जयंती भी मनाई जाएगी। आभार मनीष गोधा एवं ब्रह्मचारी पियूष भैया ने माना।</p>
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		<title>सुमतीधाम में आदित्योदयः वीर बने, डरफोक न बने-आदित्य सागरजी </title>
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		<pubDate>Tue, 11 Mar 2025 07:35:06 +0000</pubDate>
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<p><strong>मुनित्रय की चरण धूलि से पावन हो रही है इंदौर की वसुधा। श्रुत संवेगी आदित्य सागरजी ने इंदौर में कहा कि ‘जों परिवर्तन से डरते हैं और संघर्ष से कतराते हैं, वो लोग मनुष्यों में सबसे बडे कायर हैं। वीर बने, डरफोक न बने। मनुष्य बने, कायर न बने। मुनिश्री आदित्य सागरजी के निर्देशन में विशुद्ध सागरजी का पट्टाचार्य महामहोत्सव सुमतिधाम, इंदौर में संपन्न होने वाला है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर से अभिषेक अशोक पाटील की यह पूरी खबर&#8230; </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> श्रुतसंवेगी आदित्य सागरजी महाराज, श्रुतप्रिय अप्रमित सागरजी, श्रमण श्री सहज सागरजी महाराज एवं क्षुल्लक श्रेयस सागरजी महाराज सुमतीधाम इंदौर में विराजमान है। मुनित्रय की चरण धूलि से पावन हो रही है इंदौर की वसुधा। श्रुत संवेगी आदित्य सागरजी ने इंदौर में कहा कि ‘जों परिवर्तन से डरते हैं और संघर्ष से कतराते हैं, वो लोग मनुष्यों में सबसे बडे कायर हैं। वीर बने, डरफोक न बने। मनुष्य बने, कायर न बने। सही बात है-परिवर्तन और संघर्ष से मत भागो, उसे स्वीकारो, उसमे खुद को ढालों। जब तुम दूसरों को हराओगे, तब तुम खुद भी मुस्कुराओगे।</p>
<p>अच्छा काम करोगे तो नाम और शोहरत जरूर पाओगे। सही बात है इत्र छिडकने वाले के हाथ महकते हैं, मैला उठाने वाले के हाथ बदबू देते हैं। मुनिश्री आदित्य सागरजी के निर्देशन में आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी का पट्टाचार्य महा महोत्सव 25 अप्रैल 2025 में 2 मई 2025 तक सुमतिधाम, इंदौर में संपन्न होने वाला है।</p>
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		<title>जैनाचार्य विशुद्ध सागरजी का इंदौर में होगा 30 अप्रैल को पट्टाचार्य पदारोहण महामहोत्सवः कार्यक्रम में एंट्री बारकोड से होगी  </title>
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		<pubDate>Tue, 11 Mar 2025 07:30:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[500 से अधिक आचार्य परमेष्ठी, उपाध्याय परमेष्ठी साधू परमेष्ठि, ऐलक, क्षुल्लक, गणनी आर्यिका क्षुल्लिका माता, ब्रह्मचारी भैया, ब्रह्मचारिणी बहने एवं इस महामहोत्सव में लाखों लोगों का समागम होने जा रहा है। जिसमें श्री विशुद्ध सागरजी को मिलने वाला पट्टाचार्य पदारोहण महामहोत्सव में सभी सम्मिलित होंगे। यह कार्यक्रम इंदौर के तीर्थ स्वरूप सुमति धाम, जिनालय में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>500 से अधिक आचार्य परमेष्ठी, उपाध्याय परमेष्ठी साधू परमेष्ठि, ऐलक, क्षुल्लक, गणनी आर्यिका क्षुल्लिका माता, ब्रह्मचारी भैया, ब्रह्मचारिणी बहने एवं इस महामहोत्सव में लाखों लोगों का समागम होने जा रहा है। जिसमें श्री विशुद्ध सागरजी को मिलने वाला पट्टाचार्य पदारोहण महामहोत्सव में सभी सम्मिलित होंगे। यह कार्यक्रम इंदौर के तीर्थ स्वरूप सुमति धाम, जिनालय में होगा। इस कार्यक्रम में पहुंचने के लिए बारकोड दिखाकर ही महोत्सव में एंट्री होगी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर से राजेश जैन दद्दू की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> इंदौर होने वाले 27 अप्रैल को श्री विशुद्ध सागरजी को मिलने वाला पट्टाचार्य पदारोहण महामहोत्सव में सम्मिलित होंगे 500 से अधिक आचार्य परमेष्ठी, उपाध्याय परमेष्ठी साधू परमेष्ठी, ऐलक, क्षुल्लक, गणनी आर्यिका क्षुल्लिका माता, ब्रह्मचारी भैया, ब्रह्मचारिणी बहनें एवं इस महामहोत्सव में लाखों लोगों का समागम होने जा रहा है।</p>
<p><strong>कार्यक्रम में एंट्री बारकोड से होगी </strong></p>
<p>गणाचार्य श्री विराग सागरजी के अंतिम उपदेशानुसार, श्री विशुद्ध सागरजी का पट्टाचार्य पद महामहोत्सव का आयोजन 27 अप्रैल से 2 मई 2025 तक इंदौर के तीर्थ स्वरूप सुमति धाम, जिनालय में होगा। इसमें जैनाचार्य श्री विशुद्ध सागरजी को पट्टाचार्य पद पदारोहण के संस्कार प्रदान किए जाएंगे। इस कार्यक्रम में पहुंचने से पहले ऑनलाइन एंट्री करें बारकोड दिखाकर ही महोत्सव में एंट्री होगी ।</p>
<p><strong>गुरु-भक्त परिवार की उपस्थिति</strong></p>
<p>यह भव्य आयोजन लगभग 65 एकड़ भूमि में आयोजित किया जाएगा, जिसमें देशभर के विभिन्न राज्यों से गुरु-भक्त परिवार की उपस्थिति रहेंगी। 27 अप्रैल 2025, रविवार को सभी संघों का एक साथ प्रवेश होगा। आयोजन में लगभग 500 संत-साध्वियाँ और 300 से अधिक त्यागी-वृत्ति श्रावक-श्राविकाएं शामिल होंगी।</p>
<p><strong>पट्टाचार्य पद से सुशोभित </strong></p>
<p>30 अप्रैल 2025, अक्षय तृतीया के दिन प्रातःकाल में चर्या शिरोमणि, शताब्दी देशनाचार्य आचार्य विशुद्ध सागरजी पट्टाचार्य-पद से सुशोभित किया जाएगा। 2 मई 2025 को श्रमण संस्कृति के समाधिस्थ गणाचार्य श्री विराग सागरजी की 61वें जन्म जयंती बड़े धूमधाम से मनाई जाएगी।</p>
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		<title>मौन आपका रक्षाकवच मुस्कुराहट स्वागत द्वार : आदित्यसागर जी ने किया धर्मसभा को संबोधित </title>
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		<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 13:42:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री आदित्य सागर महाराज जी ने कहा कि अपने व्यक्तित्व में मौन और मुस्कुराहट दोनों का प्रयोग करें। मौन आपका रक्षाकवच है। मुस्कुराहट स्वागत द्वार है। वे धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। मुनि श्री आदित्य सागर महाराज जी के निर्देशन में आचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज का पट्टाचार्य महा महोत्सव 25 अप्रैल से 2 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री आदित्य सागर महाराज जी ने कहा कि अपने व्यक्तित्व में मौन और मुस्कुराहट दोनों का प्रयोग करें। मौन आपका रक्षाकवच है। मुस्कुराहट स्वागत द्वार है। वे धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। मुनि श्री आदित्य सागर महाराज जी के निर्देशन में आचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज का पट्टाचार्य महा महोत्सव 25 अप्रैल से 2 मई तक सुमतिधाम इंदौर में होगा। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए अभिषेक पाटिल की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> मुनिश्री आदित्यसागर जी महाराज, मुनि श्री अप्रमितसागर जी महाराज, मुनि सहजानंदी, सहजसागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्री श्रेयससागर जी महाराज इंदौर में विराजमान है। मुनित्रय की चरण धूलि से इंदौर धरती पावन हो रही है। मुनि श्री आदित्य सागर महाराज जी ने कहा कि अपने व्यक्तित्व में मौन और मुस्कुराहट दोनों का प्रयोग करें। मौन आपका रक्षाकवच है। मुस्कुराहट स्वागत द्वार है। सही बात है- समय पर मौन और मुस्कुराहट आपके लिए परम औषधि है। बुरा व्यवहार आपकी बुरी संगत और बुरी सोच की उपज है।</p>
<p><strong>अपना नजरिया बदलने का प्रयास करें</strong></p>
<p>हमेशा अपना व्यवहार अच्छा और अपना लक्ष्य बड़ा रखें। सही बात है राम की तरह अमर होना हो तो रावण की तरह व्यवहार छोड दें। जिसका नजरिया सही होता है। उसे हर चीज सही लगती है। इसलिए चीजों या लोगों को बदलने की अपेक्षा अपना नजरिया बदलने का प्रयास करें। सही बात है-गंदगी देखने वालों की नजरों में है वरना कचरा उठानेवाले को उसमें भी रोटी ही दिखती है। मुनि श्री आदित्य सागर महाराज जी के निर्देशन में आचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज का पट्टाचार्य महा महोत्सव 25 अप्रैल से 2 मई तक सुमतिधाम इंदौर में होगा।</p>
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		<title>कम बोलना, काम का बोलना सबसे बड़ा गुण: मुनिश्री आदित्यसागर के निर्देशन में पट्टाचार्य महोत्सव होगा इंदौर में </title>
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		<pubDate>Wed, 05 Mar 2025 09:32:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री आदित्य सागर जी ससंघ इन दिनों इंदौर में विराजित है। इनके सानिध्य में आचार्यश्री विशुद्धसागर जी का पट्टाचार्य भी इसी धरती पर होने जा रहा है। 25 अप्रैल से 2 मई तक यह आयोजन सुमतिधाम में होने वाला है। मुनिश्री आदित्यसागर के बारे में जानकारी जुटाकर यहां दी जा रही है। इंदौर से पढ़िए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री आदित्य सागर जी ससंघ इन दिनों इंदौर में विराजित है। इनके सानिध्य में आचार्यश्री विशुद्धसागर जी का पट्टाचार्य भी इसी धरती पर होने जा रहा है। 25 अप्रैल से 2 मई तक यह आयोजन सुमतिधाम में होने वाला है। मुनिश्री आदित्यसागर के बारे में जानकारी जुटाकर यहां दी जा रही है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए अभिषेक पाटील की यह प्रस्तुति</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> मुनिश्री आदित्यसागर जी महाराज, मुनिश्री अप्रमितसागर जी महाराज, मुनिश्री सहजसागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्री श्रेयससागर जी महाराज यहां विराजमान हैं। मुनिश्री आदित्य सागर जी महाराज ने कहा कि कम बोलने का गुण बहुत दुर्लभ है। अधिकतर लोग ज्यादा बोलते हैं। मगर करते काम ही हैं। अल्प शब्दों में बहुत कहना सर्वश्रेष्ठ कला है। सही बात है कम बोलना, काम का बोलना, सबसे बड़ा गुण है। मुनिश्री आदित्यसागर जी महाराज धरातल पर प्रत्यक्ष दर्शन देने वाली उन भव्य आत्माओं में से एक हैं। जिनका सानिध्य पारस मणि के स्पर्श के समान है।</p>
<p>संस्कार धानी जबलपुर के मस्तक पटल पर गौरव का चंदन तो उसी दिन लग चुका था। जब 24 मई 1986 के दिन पिता राजेश और मां वीणा की कोख में जन्म हुआ था। ‘सौभाग्य’ का। वैसे तो इस पुत्र का नाम सन्मति रखा गया था पर कोई नहीं जानता था कि यही सन्मति एक दिन जिन शासन के यश आकाश को प्रकाशित करने वाला अद्वितीय आदित्य बन कर उदित होगा। एक दिन अपनी साधना और वात्सल्य के बल पर सहस्रों लोगों के जीवन में ‘सौभाग्य’ बन कर प्रवेश कर जाएगा।</p>
<p>हम ने उनके चमत्कारों पर या लाखों लोगों द्वारा हो रहे उनके जय-जयकारों के सामने अपना मस्तक नहीं टेका, हम ने किसी भय या स्वार्थ से उन्हें अपना गुरु नहीं माना। हमने तो बहुत गहराई से समझा उस व्यक्ति को जिसने एमबीए (गोल्ड मेडलिस्ट) और बीबीए। जैसी शैक्षिक योग्यता, संपन्न एवं समृद्ध परिवार, स्वर्ण-आभूषणों के प्रतिष्ठित व्यापार और सुकुमारिता से भरे भविष्य की कामनाओं को एक पल में किसी तृण के समान छोड़ देने का साहस किया। जिसके पास विलासितापूर्ण जीवन जीने के अनेकों विकल्प मौजूद थे।</p>
<p>जिसकी प्रखर दैहिक आभा, अप्रतिम सुंदरता, अद्वितीय बुद्धिलब्धि और पुण्य-शक्ति के आगे सभी सांसारिक सुख किसी चरण चंचरिक की तरह उसके सामने नतमस्तक होने को तैयार बैठे थे। इन सब मोह और सुखों के आगे तो भोगी झुका करते हैं। योगी नहीं, सन्मति भैया ने जो पथ चुना था। वह इन सब से ऊपर था- निर्ग्रंथ पथ और फिर सन्मति भैया ने 8 नवंबर 2011 को गुरु के प्रति समर्पण के ‘विशुद्ध-सागर’ में ऐसी डुबकी लगाई कि सागर के अंदर जो गया वह थे ‘सन्मति’ पर जो बाहर आये वह थे ‘आदित्य।</p>
<p>जिन्होंने हम जैसे अनेकों को सत्पथ दिखाया। हम जब-जब गिरने लगे उनके शब्दों ने हमें वापस उठाया। उन्होंने हमें कला सिखाई कि जीवन कैसे जिया जाता है। उन्होंने हमें बताया कि व्यक्ति को व्यक्तित्व कैसे बनाया जाता है। उन्हें शब्दों में बयां कर पाना संभव नहीं है। मुनि श्री आदित्य सागर महाराज जी के निर्देशन में आचार्य श्री विशुद्धसागरजी का पट्टाचार्य महा महोत्सव 25 अप्रैल से 2 मई तक सुमतिधाम इंदौर में होनेवाला है।</p>
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