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	<title>Subhashganj Ground &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Subhashganj Ground &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>हम अपनी गलतियां नहीं देखते दूसरों की गलतियां दिख जाती है : विश्व शांति महायज्ञ गजरथ महोत्सव का ध्वजारोहण के साथ होगा शुभारंभ </title>
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		<pubDate>Mon, 08 Dec 2025 16:22:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दूसरों की छोटी-छोटी गलतियां दिख जाती हैं। हम अपनी ग़लतीया नहीं देखते। अपने जीवन को अच्छा बनाने के लिए सबसे पहले हमें अपनी गलती को देखने की कला सिखाना होगी। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230; अशोकनगर। दूसरों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दूसरों की छोटी-छोटी गलतियां दिख जाती हैं। हम अपनी ग़लतीया नहीं देखते। अपने जीवन को अच्छा बनाने के लिए सबसे पहले हमें अपनी गलती को देखने की कला सिखाना होगी। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> दूसरों की छोटी-छोटी गलतियां दिख जाती हैं। हम अपनी ग़लतीया नहीं देखते। अपने जीवन को अच्छा बनाने के लिए सबसे पहले हमें अपनी गलती को देखने की कला सिखाना होगी। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमसे दूसरे लोगों को बहुत लाभ हो रहा है लेकिन, स्वयं का कुछ नहीं हो पा रहा। ये जितने ज्योतिष होते हैं वह दूसरों के भविष्य को बता रहे हैं। डॉक्टर दुनिया की चिकित्सा कर रहे हैं लेकिन, स्वयं का उनसे इलाज होता ही नहीं है। मुनिश्री ने कहा कि जब-जब ज्ञान करने का उद्देश्य आजीविका रहेगा तो आप स्वयं के लिए कुछ नहीं कर पाए। जब-जब भी पूर्व कर्म कर उसके बदले दुनिया की सुख सुविधा ख्यति लाभ पूजा मांग और वस्तुता उसे स्वयं के किये कर्म से उसे सब कुछ मिला लेकिन, उसके धर्म करने के भाव नहीं होंग।े रावण ने रहने को सोने के लंका चाहीं और मिली। रावण ने पूर्व भव में बहुत सेवा की इसके कारण उसे बज वृषभ नारायण सिंहासन मिला। रावण जैसी भक्ति आज तक संसार में किसी ने नहीं की। वह भक्ति करते समय शीश काट-काट कर चढ़ा देता है। भक्ति करते समय अपने हाथ की नश को बीड़ा पर चढ़ा देता है। सब जानते हैं मनुष्य पर्याय मिली है, दान पुण्य करना अच्छी चीज है।</p>
<p><strong>अमृत का गिलास भरा पड़ा है फिर भी नहीं पी रहा </strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि अमृत का गिलास भरा पड़ा है फिर भी नहीं पी रहे। सब कुछ जान कर भी अमृत से दूर हैं। तू जान रहा हैं फिर भी नहीं कर पा रहा। गुटखा तंबाकू बहुत ख़राब है, ये नुकसान करता है। शराब बहुत गंदी है। ये व्यक्ति को बर्बाद कर देगी। घर परिवार उजड़ जाते हैं बाल बच्चे अनाथ हो जायेंगे। फिर भी शराब पीये जा रहा है। रावण जैसा ज्ञानी गलती किये जा रहा है। उस समय रावण बराबर ज्ञानी कोई नहीं था। रावण बराबर धनी शक्तिशाली कोई नहीं था जिसके घर में सैकड़ों अप्सरा जैसी रानीया बैठी हैं फिर भी रावण के परिणाम बिगड गये। अर्धचक्री की रानी या परम धर्मात्मा सुशील होती है। बहुत ही सुंदर है रूपवान होती है। मंदोदरी कहती हैं फिर भी आपके परिणाम बिगड रहे हैं। रावण कहता है मंदोदरी क्या ये मैं नहीं समझ रहा। फिर भी खिंचा चला जा रहा। पूर्व भव में भगवान की भक्ति करते समय धन दौलत सुख भोग विलास के लिए मांगी। इसलिए आज उनके भाव धर्म करने के नहीं हो रहे। ऐसे ही हमारी स्थिति है। यहां आपके पास धन दौलत सब कुछ है। फिर भी आपके भाव धर्म करने के नहीं होते चाहिए।</p>
<p><strong>’भगवान से दूर रहने के कारणों को आप स्वयं जांचे</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि आप लोग भी किन कारणों से अधर्म कर रहे हो। किस-किस के कारण आप धर्म छोड़ रहे हो। धन के लिए यही धन आपके लिए बर्बादी का कारण बनेगा। जो-जो कार्य आपने बड़ांे के मना करने पर किया भी आप कर रहे हैं। यही कारण आपको जगत में पीछे ले जायेंगे, जिन-जिन कार्यों के कारण आप भगवान से दूर हो रहे।</p>
<p><strong>इन्द्र प्रतिष्ठा के साथ होंगी पात्र शुद्धि मंडल शुद्धि</strong></p>
<p>जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि मंगलवार अशोक नगर के लिए बहुत ही पावन पवित्र दिवस होगा। जब हम शहरवासी मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भैया के मंत्रोच्चार के बीच बैठकर जगत कल्याण की कामना के लिए विश्व शांति महायज्ञ करने जा रहे हैं। महा महोत्सव का शुभारंभ ध्वजा रोहण सभा मंडप के उद्घाटन के साथ होगा। मंगलवार सुबह श्री जी को रजत रथ यात्रा पालकी विमान जी के साथ घटयात्रा सुबह सात बजे सुभाष गंज मैदान से प्रारंभ होकर विद्या सागर द्वार, भगवान महावीर मार्ग, गांधी पार्क मंडी रोड होते हुए जो मंडी स्थित अयोध्या नगरी में धर्म सभा में बदलेगी। जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी, संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, श्रेयांस घैला थूवोनजी, अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास, विपिन सिंघई ने सभी से सदा रथयात्रा बढ़ चढ़ कर भाग लेने का निवेदन किया है।</p>
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		<title>प्रतिष्ठा महा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ का होगा शुभारंभ : मुनि श्रीसुधासागरजी ने कर्तव्य और कर्म को श्रेष्ठ बताया </title>
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		<pubDate>Sun, 07 Dec 2025 15:17:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ मुनि श्री श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भैया के निर्देशन होने जा रहे श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ तथा गजरथ महोत्सव का शुभारंभ मंगलमय घटयात्रा के साथ होगा। अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; अशोक नगर। कई लोग अपनी जिंदगी दूसरों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> मुनि श्री श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भैया के निर्देशन होने जा रहे श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ तथा गजरथ महोत्सव का शुभारंभ मंगलमय घटयात्रा के साथ होगा। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोक नगर</strong>। कई लोग अपनी जिंदगी दूसरों पर न्यौछावर कर अपने आप को धन्य मानते हैं। ऐसे लोग भी हैं, जो जगत में अपने प्राण न्यौछावर कर भी दूसरे को बचाना चाहते हैं। आगम में आया है कि जंगल में मुनि राज तपस्या कर रहे हैं। उसी समय एक शेर मुनि राज की ओर झपटा मारकर आगे बढ़ा तब उपस्थित एक सुकर मुनिराज को बचाने कूद पड़ा। सवाल ये कि मेरे मरने से कोई लाभ नहीं महाराज जी के जिंदा रहने से कितने लोगों का कल्याण होगा। ऐसे लोग भी दुनिया में हैं ये लोग इतना पुण्य कमा लेते हैं। जिसका पराबार नहीं है। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किए।</p>
<p><strong>जब कोई साथ नहीं देता तो व्यक्ति टूट जाता है</strong></p>
<p>जिसे अपना संगा मानता है, जबवहीं साथ नहीं देता तो व्यक्ति पचास प्रतिशत टूट जाता है और जब किस्मत साथ नहीं देती तो व्यक्ति निराशा में चला जाता है और अपने आप की जीवन लीला समाप्त करने पर उतारू हो जाता है। जो दुःख से घबराकर आत्महत्या करने चले जाते हैं। कर्म के कारण उन्हें इससे भी ख़तरनाक दुःख मिलते हैं। जैसे जेल में पचास प्रतिशत से अधिक अपराधी मरना चाहते हैं लेकिन, मर नहीं पाते वहां ऐसी व्यवस्था बनाई गई है कि मरना चाहाने वाले मर भी नहीं सकता। ऐसे ही कर्म ने ऐसी व्यवस्था बनाई है कि नरक घनघोर दुःख है। वहां जीव मरना चहता है लेकिन, मर नहीं सकता दुनिया में वे लोग हैं जिसे लोग मारना चाहते हैंज़वह भी मरना चाहते हैं। दुनिया में ऐसे लोग भी हैं।</p>
<p><strong>घटयात्रा के साथ होगा पंच कल्याणक महोत्सव का शुभारंभ</strong></p>
<p>इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भैया के निर्देशन होने जा रहे श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ तथा गजरथ महोत्सव का शुभारंभ मंगलमय घटयात्रा के साथ होगा। इस भव्य शोभायात्रा में भगवान जिनेन्द्र देव के रथयात्रा रजत विमान एवं पालकी यात्रा के साथ सुबह सात बजे सुभाष गंज मैदान से निकलेगा। यह भव्य शोभायात्रा आचार्य श्री विद्यासागर द्वार, भगवान महावीर मार्ग रेस्ट हाउस, गांधी पार्क एफओवी पुल, पछाडीखैडा रोड होते हुए पुरानी अनाज मंडी स्थित अयोध्या नगरी पहुंचकर धर्म सभा में बदल जाएगी। जहां मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज के मंगल प्रवचन होंगे। जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई राजेन्द्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी, संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, श्रेयांस घैला, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास, विपिन सिंघई समन्वय ग्रुप के साथियों सहित अन्य प्रमुख जनो ने सभी से अनुरोध किया है इस सभी कार्यक्रमों में भाग लें।</p>
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		<title>मुनिश्री सुधासागरजी का अशोकनगर में मंगल प्रवेश :  शांतिनाथ त्रिकाल चौबीस की वर्ष गांठ पर हुआ महा मस्तिकाभिषेक </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 15:59:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री सुधाकरसागर जी ने कहा कि भारतीय दर्शन की सबसे बड़ी विशेषता है। ये सबको अपने में समाहित कर लेता है। अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; अशोकनगर। भारतीय दर्शन की सबसे बड़ी विशेषता है कि भक्त को निर्णय करना है, उसका भगवान कैसा हो। कल्पना आती है कि हमारा बेटा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनि श्री सुधाकरसागर जी ने कहा कि भारतीय दर्शन की सबसे बड़ी विशेषता है। ये सबको अपने में समाहित कर लेता है। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> भारतीय दर्शन की सबसे बड़ी विशेषता है कि भक्त को निर्णय करना है, उसका भगवान कैसा हो। कल्पना आती है कि हमारा बेटा हो, आपके मन में विचार आता है कि आपकी बहूं कैसी है। आप मकान खरीदने पर विचार करते हैं। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मेरे पड़ोसी कैसा हो ऐसा ही आपको विचार करना है कि मेरा गुरु कैसा हो जो गुण तुम्हारे अंदर नहीं है वो गुरु होना चाहिए। मात्र संत शब्द से गुरु नहीं हो सकता आचारण देखा जाता है श्रीराम के नाम के साथ आचरण देखो सारी दुनिया श्री राम के आदर्श को अपनाने को तैयार रहते हैं एक प्रसंग आता है। सीता जी की कोई ग़लती नही थी मन से वचन से काय से किसी भी प्रकार से कहीं गलती हो ही नहीं सकती थी। महासति सीता कहती हैं कि गलती मेरी है। मैं इतनी सुंदर क्यों थी रावण की दृष्टि मेरे तरफ गई ये होती है। महान व्यक्तित्व की विशेष आपके परिणाम ख़राब होते ही नही कैसे होते हैं। महासति सीता जी गलती नहीं होने पर भी अपनी ग़लती मान रहे हैं।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-95816" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251202-WA0026.jpg" alt="" width="720" height="739" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251202-WA0026.jpg 720w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251202-WA0026-292x300.jpg 292w" sizes="(max-width: 720px) 100vw, 720px" /> शोभायात्रा के साथ एक मंच पर सोलह संत</strong></p>
<p>आज हम सब का एक माह के बाद सौभाग्य जगा। मुनि श्री सुधासागरजी महाराज का विशाल संघ 16 पिच्छिका के साथ चार गुना बढ़कर आए। हम सब को मुनि श्री के सान्निध्य में श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक महा महोत्सव विश्व शांति महायज्ञ एवं गजरथ महोत्सव प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया, मुकेश भैया के निर्देशन में मनाने जा रहे हैं। आइये हम सब अपने मन को अयोध्या की ओर ले चले।</p>
<p><strong>शोभायात्रा के साथ मुनि श्री का हुआ नगर प्रवेश</strong></p>
<p>एक माह के दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी के प्रवास के वाद परम पूज्य का दोपहर बाद नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जहां जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, आडिटर संजय केटी, संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, श्रेयांस घैला, थूवोन जी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास, विपिन सिंघई ने नगर के बाहर पहुंचकर श्रीफल भेंट किए। इसके बाद भव्य शोभायात्रा के साथ नगर प्रवेश कराया। जहां यह शोभायात्रा पार्श्वनाथ मंदिर, पछाड़ी खेड़ा रोड, बगीचा मंदिर, गांधी पार्क रेस्ट हाउस, भगवान महावीर स्वामी मार्ग, आचार्य श्री विद्यासागर दारा होते हुए सुभाष गंज पहुंचे। जहां भव्य धर्मसभा को संबोधित किया।</p>
<p><strong>व्यक्ति विफल क्यों हो जाता है समझें</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति विफल क्यों हो जाता है। समझें विफलता दिखा रही है कि आपने सही तरीके से पुरुषार्थ नहीं किया। अज्ञानी व्यक्ति का सबसे बड़ा लक्ष्य है। वह विफल होने पर निराश हो जाता है। वह हर किसी पर आरोप लगाने लगता है। आप जिस वस्तु को चाह रहे हैं वह नहीं मिली तो उसका आरोप किसी अन्य व्यक्ति पर लगा देते हैं तो आगे भी विफल होंगे यहां तक कि आप गाड़ी सावधानी से चला रहे थे। कोई सामने आकर टकरा जाए आपकी गाड़ी बड़ी थी। वह आप को गालियां देगा। आपकी ग़लती नही है फिर भी आपने शांति से सुन लिया तो शांति से सुनने का चमत्कार देखना आगे आपको ऐसी कठिनाई नहीं होगी।</p>
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		<title>राष्ट्र का उत्थान हो विश्व का कल्याण हो यही है भारत की विशेषता : मुनिश्री सुधासागरजी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी समारोह मनाया  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Oct 2025 07:52:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राष्ट्र का उत्थान हो विश्व का कल्याण हो यही है भारत की विशेषता है। इसीलिए तो भारत महान कहा जाता है। दुनिया के सारे देश अपने उत्थान के साथ दूसरे के उत्थान को दूर करते हैं। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह को सम्बोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राष्ट्र का उत्थान हो विश्व का कल्याण हो यही है भारत की विशेषता है। इसीलिए तो भारत महान कहा जाता है। दुनिया के सारे देश अपने उत्थान के साथ दूसरे के उत्थान को दूर करते हैं। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह को सम्बोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>अशोकनगर।</strong> राष्ट्र का उत्थान हो विश्व का कल्याण हो यही है भारत की विशेषता है। इसीलिए तो भारत महान कहा जाता है। दुनिया के सारे देश अपने उत्थान के साथ दूसरे के उत्थान को दूर करते हैं। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह को सम्बोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में संतों से जबपूछा गया कि हम किसे अपना कहे तो हमारे ऋषि मनीषियों ने कहा कि वसुदेव कुटुम्बकम हमारे लिए विश्व परिवार की तरह है। महावीर ने एक संकल्प दिया था, हमें किसी का विनाश नहीं करना है। उन्होंने संकल्पी हिंसा का त्याग कराया। मुनिश्री ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में हर दिन अपने आप को पांच मिनट का समय देना चाहिए सबसे पहले अपने एकाकी शक्ति को पहचानें मेरे साथ परमात्मा भी नहीं है। माता-पिता भाई-बंधु देश समाज कोई नहीं। तब विचार करें कि मुझे कुछ नहीं चाहिए। मुनिश्री ने आगे कहा कि मैं देश के लिए, समाज के लिए, घर परिवार के लिए क्या कर सकता हूं। कमजोर लोगों से संगठन नहीं चलता। बल जोर लोगों से संगठन चलता है। बजरंग बलि की तरह मैं भी भगवान की सेवा करूंगा। हम भगवान की रक्षा के लिए मर भी जाए तो शहीद माने जाएंगे।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-92380" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005.jpg" alt="" width="1280" height="716" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-1024x573.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-768x430.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-414x232.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0005-990x554.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />सहयोग देने के लिए चल पड़े उसका नाम है आरएसएस</strong></p>
<p>मैं इतना समर्थ हूं कि राष्ट्र की रक्षा कर सकता हूं। समाज की परिवार की रक्षा कर सकता हूं। दुनिया में सहयोग देने के लिए चल पड़े उसका नाम है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। चलो हम दो जन मिलकर तीसरे का सहयोग करें, तीन मिलकर चौथे-पांचवें। इस तरह सेवा का क्षेत्र बढ़ता चल गया, हम राष्ट्र के नाम पर एक हो सकते हैं।</p>
<p><strong>आचार्य भगवंत ने जो संदेश दिया है वह हमारे लिए प्रेरणा </strong></p>
<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक विद्या भारती प्रांत जागरण प्रमुख शिरोमणि दुबे ने कहा कि अभी आचार्य श्री का आशीर्वाद मिला। उन्होंने कहा कि हमें शिक्षा की पवित्रता को आगे बढ़ाना है, जो बहुत ही गहरा संदेश दिया है। हम इन्हें शीर्ष तक पहुंचाएंगे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सौ वर्ष का हो गया। हमारा देश उत्सवों और पर्वाें का देश है। जहां हर कार्य से लोग प्रेरणा लेते हैं। भगवान श्री राम, भगवान महावीर हमारे आराध्य हैं। हमारे मार्गदर्शक हैं। त्रेतायुग में श्री राम ने सोने की लंका को मिट्टी में मिलाकर हमारी संस्कृति सभ्यता को एक नई दिशा दी।</p>
<p><strong>जैन समाज ने किया आरएसएस के शताब्दी समारोह में अभिनंदन</strong></p>
<p>इसके पहले जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि आज हम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी समारोह मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में मना रहे हैं। हम सभी स्वयं सेवक का जैन समाज की ओर से हार्दिक अभिनन्दन करते हैं। इसके बाद भारत माता के चित्र का अनावरण किया और आचार्य भगवंत के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित किया। इस दौरान जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई सहित अन्य प्रमुखजनों ने सभी का अभिनंदन किया। इसके पहले ध्वज स्थापित किया। ध्वजारोहण किया गया। जिसने भारत में जन्म लिया है उसे मां भारतीय की सेवा करना होगी। हम हिंदुस्तानी हैं हमने भारत भूमि पर जन्म लिया। हम सब भारतीय हैं। हम उस देश के वासी हैं। जहां जन्म लेने वाली भूमि को माता कहा जाता है। हमारी संस्कृति में नदियों को भी माता कहा जाता है। यह संस्कृति, यह संस्कार हमें हर भारतीय संस्कृति से मिला है।</p>
<p><strong>ये भारत के सपूतों की संस्था </strong></p>
<p>आज जो हमारे देश का सबसे बड़ा कारण है। आज दुनिया में एनआरआई सबसे ज्यादा भारतीय है। जब कोई व्यक्ति विदेश में चला जाता है तो देश का विकास बाधित हो जाता है। अच्छे लोगों के साथ ही हमारे देश का दिमाग विदेश नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब-जब देश आयात बढ़ेगा, देश कमजोर होगा। आज हमारे शिशु मंदिर बंद हो रहे हैं। कांन्वेट स्कूल खुल रहे है। एजूकेशन की ओर कलिकाल में संगठन ही हमारी शक्ति है। राजनीति से ऊपर उठकर हम संगठन को मजबूत करें।</p>
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		<title>महान आत्माएं निंदा भी करते हैं तो बहुत संभलकर: मुनि श्री सुधासागरजी महाराज के सान्निध्य में नवीन वेदी पर हुई जगत कल्याण की कामना के लिए महाशांति धारा </title>
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		<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 13:54:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महान आत्माएं निंदा करते हुए भी सुधारने का भाव रखता है क्योंकि, निंदा का उद्देश्य कभी किसी को नीचे गिरना नहीं होता वल्कि उसे पुनः अपने मार्ग में स्थित करना होता है और होना ही चाहिए। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में चल रहे स्नातक सम्मेलन में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। अशोकनगर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>महान आत्माएं निंदा करते हुए भी सुधारने का भाव रखता है क्योंकि, निंदा का उद्देश्य कभी किसी को नीचे गिरना नहीं होता वल्कि उसे पुनः अपने मार्ग में स्थित करना होता है और होना ही चाहिए। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में चल रहे स्नातक सम्मेलन में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर..</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> महान आत्माएं निंदा भी करते हैं तो भी बहुत संभालकर और बहुत अच्छी भाषा में करते हैं निंदा कोई बुरी चीज नहीं है महान आत्माएं निंदा करते हुए भी सुधारने का भाव रखता है क्योंकि, निंदा का उद्देश्य कभी किसी को नीचे गिरना नहीं होता वल्कि उसे पुनः अपने मार्ग में स्थित करना होता है और होना ही चाहिए। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में चल रहे स्नातक सम्मेलन में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यदि निंदा का उद्देश्य किसी को मार्ग से भटकाना मार्ग से ही बेदखल करना हो गया तो वह कभी सुधर नहीं पाएगा।</p>
<p>शुद्ध भाव नहीं शुद्ध भोजन करना अनिवार्य कहा गया है। इसमें भी देने वाला शुद्ध हो और जिस स्थान पर भोजन दिया जा रहा है। जहां बन रहा है, वह भी शुद्ध होने का उल्लेख किया गया। ये सब चीजें तो अनादि अनंत से चल आ रही है इसलिए तो कहा गया है जैसा खावें अन्य वैसा होवे मन। अन्न से मन को जोड़ा गया है। मन की शुद्धि के लिए भी भोजन की शुद्धि अनिवार्य है।</p>
<p><strong>नवीन वेदी पर भगवान विराजते ही हुईं महा शांतिधारा</strong></p>
<p>आचार्य श्री विद्यासागर भवन में नवीन भव्य वेदी पर मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के साथ एवं प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के कुशल निर्देशन में गंज मंदिर से भगवान का श्री विहार हुआ और प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के मंत्रोच्चार के बीच भगवान को नवीन वेदी पर विराजमान किया गया। इस दौरान आज जगत कल्याण की कामना के लिए महा शांतिधारा की गई। जिसका सौभाग्य रिषभ कुमार, सिद्धार्थ कुमार सोगानी, जैन समाज कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री विजय धुर्रा देवेंद्र कुमार, पवनकुमार धुर्रा, बावा मेडिकल परिवार के साथ अन्य प्रमुखजनों को मिला। इस दौरान सैकड़ों भक्तों ने भगवान के अभिषेक का सौभाग्य प्राप्त किया। इस दौरान जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई राजेंद्र अमन, मंत्री शैलेंद्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारल्लिय, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार ऑडिटर संजय के टी थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन, टींगू मिल, महामंत्री मनोज भैसरवास सहित अन्य प्रमुख जन विशेष रूप से उपस्थित थे।</p>
<p><strong>खुले अधिवेशन में युवा मनीषियों रखेंगे अपने विचार</strong></p>
<p>इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि हम सब भारत वर्ष से पधारे युवा मनीषियों को सुन रहे हैं। इनके शोध परख लेखों को सुनकर सभी का मन गदगद हो रहा है। कल हम सब इन युवा मनीषियों को खुले अधिवेशन में सुन सकेंगे और इनके अंदर जो आने वाली चुनौतियां हैं। उनके समाधान का भाव है, उसे देखेंगे साथ ही श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी द्वारा सभी युवा विद्वानों और विदुषियों का बहुमान किया जाएगा। कई दौरान ये मनीषी अपने वर्षों तक किए गए गहन चिंतन मनन को मुनि पुंगव श्रीसुधासागर जी महाराज के सानिध्य में रखेंगे। ये गौरव भी हमारे नगर को मिलने जा रहा है।</p>
<p><strong>मन के भटकाव को रोकने के लिए ध्यान किया जाता है </strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि धर्म ध्यान के साथ ही आर्त ध्यान और रौद्र को भी ध्यान में लिया गया। वैसे आरत ध्यान, रोद्र ध्यान को अच्छा नहीं माना जा सकता। ज्ञान और ध्यान का प्रसंग है ज्ञान के साथ ध्यान किया जाता है तो वह परिणाम देता है। उन्होंने कहा कि धनको ही धनी नहीं कहा जा सकता। धनी धन के बिना भी हो सकता है। धन का नाम धनी ज्ञान के बिना ज्ञाता नहीं है। ध्यान चारित्र की पर्याय है ज्ञान नहीं है आनंद लेने वाला ज्ञान है या ज्ञानी छहडाला कार ने ज्ञानी के छिन माह विषय शब्द आया है। इस प्रकार ये आध्यात्मिक गुित्थयां कहलाती है। आध्यात्मिक एक पानक है सम्यक दर्शन ज्ञान चारित्र को ध्यान कहा गया है इसमें मात्र आनंद की अनुभूति होती है परम पूज्य आचार्य श्री कुंद कुंद स्वामी द्वारा विरचित श्री अष्टपाहुड जी ग्रान्थ मन के भटकाव को रोकने के लिए ध्यान किया जाता है योग जो हो रहें हैं वह मन को एकाग्र कराने का मार्ग है ध्यानाभाष है ध्यान अलग चीज नहीं है व्यक्ति को अनैतिकता से बचाने के लिए कोई कार्य करता है तो ठीक है।</p>
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