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	<title>Stress Management &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Stress Management &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>तनाव प्रबंधन के लिए बौद्धिकता के साथ भावनात्मकता भी जरूरीः एक्सपर्ट प्रेम सिंह ने बताए तनाव से निपटने के खास सूत्र </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 May 2026 06:06:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर टीचिंग, लर्निंग एंड डवलपमेंट- सीटीएलडी की ओर से ट्रांसफॉर्मिंग लर्निंग, लीडरशिप एंड डवलपमेंट इन अ रैपिडली चेंजिंग वर्ल्ड पर दो दिनी अंतर्राष्ट्रीय ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में तनाव प्रबंधन पर विचार मंथन हुआ। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्याम सुंदर भाटिया की यह रिपोर्ट&#8230; मुरादाबाद। जेके ऑर्गनाइजेशन के प्रेसिडेंट- ग्रुप सीएचआरओ प्रेमसिंह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर टीचिंग, लर्निंग एंड डवलपमेंट- सीटीएलडी की ओर से ट्रांसफॉर्मिंग लर्निंग, लीडरशिप एंड डवलपमेंट इन अ रैपिडली चेंजिंग वर्ल्ड पर दो दिनी अंतर्राष्ट्रीय ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में तनाव प्रबंधन पर विचार मंथन हुआ। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्याम सुंदर भाटिया की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद।</strong> जेके ऑर्गनाइजेशन के प्रेसिडेंट- ग्रुप सीएचआरओ प्रेमसिंह ने कहा कि आज के युवाओं के लिए तकनीकी दक्षता के साथ नेतृत्व, नैतिकता और भावनात्मक बुद्धिमत्ता भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मशीनों के पास डेटा हो सकता है, लेकिन उनके पास नैतिकता और सहानुभूति नहीं होती। नेतृत्व का अर्थ केवल पद नहीं, बल्कि जिम्मेदारी लेना और टीम को साथ लेकर चलना है। युवाओं को कॉलेज के दिनों से ही टीम वर्क और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा, तनाव प्रबंधन के लिए आईक्यू से ज्यादा ईक्यू जरूरी है। जो युवा दूसरों की भावनाओं को समझकर प्रतिक्रिया देते हैं, वे संकट के समय बेहतर प्रदर्शन करते हैं। कॉरपोरेट जगत में ईमानदारी और नैतिक मूल्यों के महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा, सफलता अगर गलत रास्तों से मिले तो वह स्थायी नहीं होती। श्री सिंह तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के सेंटर फॉर टीचिंग, लर्निंग एंड डवलपमेंट- सीटीएलडी की ओर से ट्रांसफॉर्मिंग लर्निंग, लीडरशिप एंड डवलपमेंट इन अ रैपिडली चेंजिंग वर्ल्ड पर दो दिनी अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। भारतीय सोसायटी फॉर ट्रेनिंग एंड डवलपमेंट-आईएसटीडी के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में भारत, अमेरिका और यूएई सहित विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं औद्योगिक संस्थानों से शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, शोधार्थियों और स्टूडेंट्स शामिल रहे।</p>
<p>बतौर गेस्ट ऑफ ऑनर एवं आईएसटीडी के नेशनल प्रेसिडेंट अतुल शाह ने प्रशिक्षण एवं विकास को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए कहा कि सतत अधिगम ही पेशेवर उत्कृष्टता की कुंजी है। सेकेंड गेस्ट ऑफ ऑनर आईआईएम अहमदाबाद के एल्युम्नस एवम् नयन पारिख एंड कंसल्टेंट्स के नयन पारिख ने कहा कि नेतृत्व का वास्तविक अर्थ दूसरों को उनकी क्षमता पहचानने और उसे साकार करने के लिए प्रेरित करना है। टीएमयू के कुलपति प्रो. वीके जैन ने कहा, भविष्य उन्हीं संस्थानों का उज्जवल है, जो शिक्षा को उद्योग, शोध और सामाजिक उत्तरदायित्व से प्रभावी रूप से जोड़ते हैं। डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन ने कहा, उच्च शिक्षा संस्थानों को बदलती वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण पद्धतियों में सतत सुधार करना होगा। सीटीएलडी के निदेशक प्रो. पंकजकुमार सिंह ने कहा, वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता, नवाचार और वैश्विक दृष्टिकोण का विकास करना भी है।</p>
<p><strong>डिजिटल दक्षताओं की उपयोगिता पर विचार साझा</strong></p>
<p>अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं में एएमडॉक्स यूएई/मिडिल ईस्ट रीजन में डायरेक्टर, पीजीएम, एआई इनोवेशन एंड ऑटोमेशन हिमांशु जेसी वाडिया ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऑटोमेशन की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया, तकनीक शिक्षा और उद्योग दोनों के स्वरूप को पुनर्परिभाषित कर रही है। यूनिवर्सिटी ऑफ कंबरलैंड्स, अमेरिका की डेटा सॉल्यूशन इंजीनियर भीमिका शाह ने डेटा एनालिटिक्स, वैश्विक शिक्षण मानकों और डिजिटल दक्षताओं की उपयोगिता पर विचार साझा किए। राष्ट्रीय वक्ताओं में रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलसचिव प्रो. सुरेन्द्रसिंह, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की डॉ. अपर्णा सिंह, कॉजेंट इन्फोटेक के सीनियर डायरेक्टर श्री अनंत अग्रवाल, इन्फिनिटी मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग कॉलेज की प्राचार्या डॉ. नवदीप कौर सलूजा, रिलायंस पावर एवम् कोल इंडिया लिमिटेड के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी सुधीरचंद्र जैन, आईएसटीडी (नॉर्थ) की रीजनल वाइस प्रेसिडेंट अंकिता शर्मा ने भी अपने अनुभव साझा किए।</p>
<p><strong>देश-विदेश से प्राप्त शोध-पत्रों की प्रस्तुतियों ने अनुसंधान निष्कर्ष दिए</strong></p>
<p>कॉन्फ्रेंस के चार तकनीकी सत्रों में टेक्नोलॉजी, इन्नोवेशन एंड रिसर्च, स्किल्स डवलपमेंट एंड एम्प्लॉयबिलिटी, ग्लोबल पर्सपेक्टिव्स एंड कोलैबोरेशन, लीडरशिप इन अ डिसरप्टिव एरा, लर्निंग एंड पेडागॉजिकल ट्रांसफॉर्मेशन और सस्टेनेबिलिटी एंड सोशल इम्पैक्ट जैसे समकालीन विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही देश-विदेश से प्राप्त शोध-पत्रों की प्रस्तुतियों ने अनुसंधान निष्कर्ष साझा करने, अकादमिक विमर्श को आगे बढ़ाने और वैश्विक विशेषज्ञों से सार्थक प्रतिपुष्टि प्राप्त करने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान किया। कॉन्फ्रेंस में एसएनजीएपी सिएम कॉलेज- मेघालय, इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट एंड फायर साइंस- चंडीगढ़, आईआईएलएम यूनिवर्सिटी- ग्रेटर नोएडा, एडोव सिस्टम्स इंडिया प्रा.लि., आईएमएस यूनिसन यूनिवर्सिटी- देहरादून, एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी- पुणे आदि के करीब 500 प्रतिभागी शामिल रहे। अंत में सीटीएलडी के उपनिदेशक एवं कन्वीनर डॉ. दिलीप दत्त वार्ष्णेय ने वोट ऑफ थैंक्स दिया। कॉन्फ्रेंस में सह-कन्वीनर एवं मास्टर ट्रेनर ऋतु राजन के अलावा सीटीएलडी के सभी ट्रेनर्स मौजूद रहे। संचालन निधि गुप्ता ने किया।</p>
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		<title>मानव को प्रतिदिन आते हैं 70 हजार विचार : स्ट्रेस मैनेजमेंट पर गेस्ट लेक्चर में स्टूडेंट्स को दिए तनाव से उबरने के टिप्स </title>
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		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:41:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ फार्मेसी में स्ट्रेस मैनेजमेंट पर गेस्ट लेक्चर में मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के प्रिंसिपल प्रो. एनके सिंह और कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग की एचओडी प्रो. साधना सिंह ने स्टूडेंट्स को तनाव से उबरने के टिप्स दिए। मुरादाबाद से आज पढ़िए, प्रो. श्यामसुंदर भाटिया की यह रिपोर्ट.. मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ फार्मेसी में स्ट्रेस मैनेजमेंट पर गेस्ट लेक्चर में मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के प्रिंसिपल प्रो. एनके सिंह और कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग की एचओडी प्रो. साधना सिंह ने स्टूडेंट्स को तनाव से उबरने के टिप्स दिए। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से आज पढ़िए, प्रो. श्यामसुंदर भाटिया की यह रिपोर्ट..</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद</strong>। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के प्रिंसिपल प्रो. एनके सिंह ने कहा, यूं तो स्ट्रेस अच्छा होता है। यह मोटिवेट करता है। उत्साहित करता है, जबकि डिस्ट्रेस सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। डिस्ट्रेस चिंता पैदा करता है। क्रोध लाता है। तनाव में बायोकेमिकल रिएक्शंस होती है। शरीर में और कई तरह के हार्माेन और न्यूरोट्रांसमीटर में बदलाव होता है। उन्होंने बताया, तनाव के स्रोत क्या-क्या हैं? सामाजिक तनाव, जैविक तनाव, पर्यावरणीय तनाव आदि पर बोलते हुए प्रो. सिंह ने कहा कि एंटीबायोटिक से रेजिस्टेंस बनने के कारण एक समय बाद एंटीबायोटिक भी असर हो जाएंगे। सिंपैथेटिक सिस्टम और पैरासिंपैथेटिक सिस्टम शरीर में दिन के साथ महत्वपूर्ण बदलाव लाते हैं। तनाव प्रबंधन में इनका बहुत बड़ा योगदान होता है। प्रो. सिंह तीर्थंकर महावीर कॉलेज ऑफ फार्मेसी की ओर से स्ट्रेस मैनेजमेंट पर हुए गेस्ट लेक्चर में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इससे पूर्व मुख्य अतिथि प्रो. एनके सिंह, डिपार्टमेंट ऑफ़ कम्यूनिटी मेडिसिन की एचओडी प्रो. साधना सिंह, फार्मेसी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आशु मित्तल, वाइस प्रिंसिपल प्रो. मयूर पोरवाल आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-104227" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260408-WA0053-300x188.jpg" alt="" width="300" height="188" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260408-WA0053-300x188.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260408-WA0053-768x481.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260408-WA0053-320x200.jpg 320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260408-WA0053.jpg 866w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>न्यूरोप्लास्टिसिटी एक बहुत महत्वपूर्ण शब्द</strong></p>
<p>प्रो. सिंह ने झूले का उदाहरण देते हुए कहा कि झूलने के दौरान तनाव प्रबंधन और तनाव का एक्सप्रेशन विभिन्न रूपों में होता है। तनाव के कारण जीन में आए बदलाव के अध्ययन को हैप्पी जेनेटिक चेंज कहते हैं, जब मनुष्य के बच्चे का विकास होता है तो सबसे पहले दिल आता है फिर दिमाग आता है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 70 हजार विचार मनुष्य को आते हैं। न्यूरोप्लास्टिसिटी एक बहुत महत्वपूर्ण शब्द है, जिस पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि ज्ञान की क्रिया से जो डीएनए और क्रोमोसोम के निर्माण में लगने वाले टीलोमर्स होते हैं, उनकी लंबाई बढ़ जाती है, अर्थात ध्यान हमारे शरीर को स्वस्थ करता है और ऊर्जावित्त करता है। दूसरी ओर एचओडी प्रो. साधना सिंह ने स्टूडेंट्स और फैकल्टीज़ को ध्यान और तनाव मुक्त रहने की विभिन्न विधि-सांसों पर ध्यान केंद्रित करना, डीप ब्रीदिंग करने की प्रैक्टिस कराई। इससे तनाव को कम करने और ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली। स्ट्रेस मैनेजमेंट कार्यक्रम में डॉ. फूलचंद, डॉ. आशीष सिंघई, डॉ. आदित्य विक्रम जैन, प्रीति यादव, अपूर्व रस्तोगी आदि मौजूद रहे।</p>
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		<title>स्ट्रेस मैनेजमेंट में परिवार का साथ होगा मददगार : योग प्रशिक्षक गौरव त्यागी ने स्टूडेंट्स को दिया योग का प्रशिक्षण </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Dec 2025 11:19:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर महावीर डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर में हर्टफुलनेस इंस्टिट्यूट की ओर से स्ट्रेस मैनेजमेंट प्रोग्राम में योग प्रशिक्षक गौरव त्यागी ने स्टूडेंट्स को योग का प्रशिक्षण दिया। हर्टफुलनेस इंस्टिट्यूट की ओर से आयोजित स्ट्रेस मैनेजमेंट प्रोग्राम में तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के प्राचार्य प्रो. एनके सिंह ने कहा कि योग जीवन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर महावीर डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर में हर्टफुलनेस इंस्टिट्यूट की ओर से स्ट्रेस मैनेजमेंट प्रोग्राम में योग प्रशिक्षक गौरव त्यागी ने स्टूडेंट्स को योग का प्रशिक्षण दिया। हर्टफुलनेस इंस्टिट्यूट की ओर से आयोजित स्ट्रेस मैनेजमेंट प्रोग्राम में तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के प्राचार्य प्रो. एनके सिंह ने कहा कि योग जीवन का मूल आधार है। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद।</strong> तीर्थंकर महावीर डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर में हर्टफुलनेस इंस्टिट्यूट की ओर से स्ट्रेस मैनेजमेंट प्रोग्राम में योग प्रशिक्षक गौरव त्यागी ने स्टूडेंट्स को योग का प्रशिक्षण दिया। हर्टफुलनेस इंस्टिट्यूट की ओर से आयोजित स्ट्रेस मैनेजमेंट प्रोग्राम में तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के प्राचार्य प्रो. एनके सिंह ने कहा कि योग जीवन का मूल आधार है। योग से हम रोग मुक्त रह सकते हैं। व्यस्त दिनचर्या और योग के बिना हम कम उम्र में ही गंभीर रोगों का शिकार बन रहे हैं। प्रो. सिंह ने कहा कि स्ट्रेस से उबरने के लिए परिवार के साथ समय बिताना जरूरी है। उन्होंने स्ट्रेस मैनेजमेंट के लिए योग और मेडिटेशन को अपनी दैनिक दिनचार्या में शामिल करने पर जोर दिया। साथ ही प्रकृति के संग समय बिताने के संग-संग डायरी लिखने और हेल्दी भोजन करने की सलाह दी।</p>
<p><strong>इनकी भी रही सराहनीय भागीदारी </strong></p>
<p>कार्यक्रम में हर्टफुलनेस इंस्टिट्यूट के योग प्रशिक्षक गौरव त्यागी ने डेंटल कॉलेज की फैकल्टीज़ और स्टुडेंट्स को योग का प्रशिक्षण भी दिया। प्रो. सिंह तीर्थंकर महावीर डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर में स्ट्रेस मैनेजमेंट पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस मौके पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एनके सिंह के साथ डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. एमपी सिंह बतौर मुख्य अतिथि, डेंटल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. प्रदीप तांगड़े, वाइस प्रिंसिपल डॉ. अंकिता जैन, डॉ. साधना सिंह, डॉ. उपेन्द्र मलिक, डॉ. तबिहा खान, प्रेमी पूर्णिमा, तैयबा बी., स्वर्णा कुमारी के संग-संग डेंटल कॉलेज के स्टूडेंट्स मौजूद रहे। संचालन काशवी वशिष्ठ ने किया।</p>
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		<title>घर परिवार हो या जीवन, भावना के अभाव में सभी रसहीन हैं – मुनिश्री प्रमाणसागर : भावनाओं का अनुशासन जीवन को कल्याणकारी बनाता है – मुनिश्री प्रमाणसागर </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Oct 2025 11:24:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भोपाल में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रमाणसागर ने भावनाओं के महत्व और अनुशासन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन में भावनाओं का नियंत्रण ही हमारी चेतना और कार्यक्षमता को ऊंचाई प्रदान करता है। भावनाओं का अनुशासन न होने पर जीवन में संघर्ष और तनाव उत्पन्न होता है। पढ़िए अविनाश जैन की रिपोर्ट… [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भोपाल में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रमाणसागर ने भावनाओं के महत्व और अनुशासन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन में भावनाओं का नियंत्रण ही हमारी चेतना और कार्यक्षमता को ऊंचाई प्रदान करता है। भावनाओं का अनुशासन न होने पर जीवन में संघर्ष और तनाव उत्पन्न होता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अविनाश जैन की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल (अवधपुरी)।</strong> धर्मसभा में मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि जीवन जब यांत्रिक और मशीनी बन जाता है, तो उसमें मानवीय संवेदनाएँ समाप्त हो जाती हैं। भावनाएँ जीवन को नई तरंग देती हैं और यदि प्रबल हों तो बड़े कार्य भी सरलता से संपन्न होते हैं।</p>
<p>मुनि श्री ने बताया कि जैसे नदी का नियंत्रित बहाव धरती को हरा-भरा करता है, वैसे ही नियंत्रित भावनाएँ जीवन को कल्याणकारी बनाती हैं। लेकिन अनियंत्रित भावनाएँ तनाव और विनाश उत्पन्न कर सकती हैं। उन्होंने भावनाओं पर अनुशासन और संयम की आवश्यकता पर जोर दिया।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि घर में बुजुर्गों का अनुशासन और भावनाओं का संतुलन जीवन को सुंदर और शांतिपूर्ण बनाता है, जबकि अनुशासन और भावनात्मक संतुलन न होने पर घर संघर्ष और तनाव का केंद्र बन जाता है।</p>
<p>उन्होंने क्रोध के उदाहरण से समझाया कि नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में परिवर्तित किया जा सकता है। क्रोध को अनुशासित कर क्षमा और साहस में बदला जा सकता है। मुनि श्री ने भावनाओं के नियंत्रण को जीवन रूपांतरण का माध्यम बताया।</p>
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