<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Station Jain Temple &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/station-jain-temple/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Thu, 26 Feb 2026 11:12:53 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>Station Jain Temple &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>जिनकी आशा गुरु पर टिकी होती है उनका जीवन कभी डगमगाता नहीं : मुनि श्री संभवसागरजी ने धर्मसभा में कर्मों के लेखेजोखे के बारे में बताया  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_life_of_those_whose_hope_is_fixed_on_the_guru_never_wavers/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_life_of_those_whose_hope_is_fixed_on_the_guru_never_wavers/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 11:12:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Sambhavsagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Shantinath Jinalaya]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Station Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री संभवसागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[श्री शांतिनाथ जिनालय]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[स्टेशन जैन मंदिर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=100755</guid>

					<description><![CDATA[मुनि श्री संभवसागर महाराज ने श्री शांतिनाथ जिनालय, स्टेशन जैन मंदिर में धर्मसभा में उद्बोधन देते हुए कहा कि मनुष्य संसार में अनेक प्रकार के मुखौटे पहन सकता है। दूसरों की आंखों में धूल झोंक सकता है। अपने दोषों को छिपा सकता है, किंतु कर्म की न्याय व्यवस्था को धोखा नहीं दे सकता। विदिशा से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनि श्री संभवसागर महाराज ने श्री शांतिनाथ जिनालय, स्टेशन जैन मंदिर में धर्मसभा में उद्बोधन देते हुए कहा कि मनुष्य संसार में अनेक प्रकार के मुखौटे पहन सकता है। दूसरों की आंखों में धूल झोंक सकता है। अपने दोषों को छिपा सकता है, किंतु कर्म की न्याय व्यवस्था को धोखा नहीं दे सकता। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> मुनि श्री संभवसागर महाराज ने श्री शांतिनाथ जिनालय, स्टेशन जैन मंदिर में धर्मसभा में उद्बोधन देते हुए कहा कि मनुष्य संसार में अनेक प्रकार के मुखौटे पहन सकता है। दूसरों की आंखों में धूल झोंक सकता है। अपने दोषों को छिपा सकता है, किंतु कर्म की न्याय व्यवस्था को धोखा नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि कर्म का सिद्धांत एआई सुपर कंप्यूटर की तरह है। जिसकी कोडिंग पूर्णतः निष्पक्ष है। उसमें हमारे प्रत्येक विचार, प्रत्येक शब्द और प्रत्येक कर्म निरंतर दर्ज होते रहते हैं। कर्म का लेख न मिटता है, न बदलता है और न ही किसी मुखौटे से प्रभावित होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुकान, घर या समाज की नजरों से आप अपने आपको छिपा सकते हैं, लेकिन कर्म से अपने आपको नहीं छुपा सकते। उन्होंने कहा कि बाहर के पाप को आप प्रभु और गुरु के सामने प्रायश्चित करके कम कर सकते है, परंतु धर्म क्षेत्र में, मंदिर में या पवित्र भावों के मध्य की गई असावधानी कर्म लेख में अमिट रूप से अंकित हो जाती है। दूसरों को धोखा दिया जा सकता है पर आत्मा और प्रकृति की न्याय व्यवस्था को धोखा नहीं दिया जा सकता है। मुनि श्री ने कहा कि जीवन में सजगता, संयम और सत्यनिष्ठा अत्यंत आवश्यक है, कर्मों की “कोडिंग” व्यक्तिगत होती है। अतः भीतर से तथा बाहर से सावधान रहने की आवश्यकता है,जिसने जो किया है, उसका फल उसी को भोगना पड़ेगा।</p>
<p><strong>बुरा लगना ही उपचार की शुरुआत </strong></p>
<p>उन्होंने लोकप्रसिद्ध उक्ति उद्धृत करते हुए कहा कि कोई लाख करे चतुराई, कर्म का लेखा मिटे न भाई। गुरु वाणी के संदर्भ में मुनि श्री ने कहा कि गुरु की वाणी कभी-कभी कड़वी दवा के समान प्रतीत होती है पर उसका उद्देश्य आत्मिक स्वास्थ्य को ठीक करना होता है। जैसे कड़वी दवा रोग को जड़ से समाप्त करती है और काँटा निकालते समय क्षणिक पीड़ा होती है पर बाद में राहत मिलती है वैसे ही गुरु की कठोर लगने वाली बातें हमारे भीतर के क्रोध, मान, माया और लोभ रूपी कांटों को निकालने के लिए होती हैं। बुरा लगना ही उपचार की शुरुआत है। इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज ने कहा कि यदि हम मन पर जमे कुसंस्कारों को बार-बार दोहराते रहेंगे तो आत्मा कभी निर्मल नहीं हो पाएगी। चौरासी लाख योनियों के चक्र के पश्चात यह मनुष्य जन्म अत्यंत दुर्लभता से मिला है। यदि अब भी नहीं संभले तो पुनः उसी चक्र में भटकना पड़ेगा।</p>
<p><strong> धर्म एक कदम आगे बढ़ाता है</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि जितनी बड़ी दुकान, उतना बड़ा फायदा या उतना ही बड़ा नुकसान। धर्म का अवसर जितना बड़ा है, जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है। यदि उत्तम विचारों की लीक नहीं पकड़ी, मन को संयम और साधना में स्थिर नहीं रखा तो पतन भी उतना ही गहरा होगा। धर्म एक कदम आगे बढ़ाता है तो अधर्म सौ कदम पीछे धकेल देता है।</p>
<p>दीक्षा काल के प्रसंग साझा करते हुए मुनि श्री ने बताया कि गुरुदेव जब सैकड़ों किलोमीटर दूर विहार का संकेत देते थे, तब प्रारंभ में मन में अनेक प्रश्न उठते थे। किंतु समय बीतने पर परिणाम देखकर समझ आता था कि गुरु का निर्णय कितना दूरदर्शी और जनकल्याणकारी था।</p>
<p><strong>गुरु जो कहें, आदेश का उल्लंघन मत करो</strong></p>
<p>गुरु का निर्णय व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और निष्पक्ष भावना से प्रेरित होता है। उन्होंने कहा, गुरु जो कहें, उनके आदेश का उल्लंघन मत करो। यदि यह मंत्र अपना लिया तो जीवन आनंदमय हो जाएगा। अंत में उन्होंने कहा कि कठिनाइयां जीवन का स्वाभाविक हिस्सा हैं, पर जिनकी श्रद्धा अटल है और जिनकी आशा गुरु पर टिकी है, उनका जीवन कभी डगमगाता नहीं। प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि मुनि श्री के आध्यात्मिक प्रवचन प्रतिदिन प्रातः 8.45 बजे से आयोजित हो रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_life_of_those_whose_hope_is_fixed_on_the_guru_never_wavers/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>संपत्ति से नहीं, संयम से आती है महानता विनम्रता से मिलती है ऊंचाई: मुनिश्री संभवसागरजी के प्रवचनों का रसास्वादन कर रहे धर्मप्राण समाजजन  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/greatness_comes_not_from_wealth_but_from_self_control_humility_is_the_way_to_achieve_greatness/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/greatness_comes_not_from_wealth_but_from_self_control_humility_is_the_way_to_achieve_greatness/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 12:19:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Barrao Wale Bade Baba Bhagwan Adinath]]></category>
		<category><![CDATA[Bharat Chakravarti]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Muktagiri Tirtha]]></category>
		<category><![CDATA[Munishree Sambhavasagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Shantinath Jinalaya]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Station Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[बर्राे वाले बड़े बाबा भगवान आदिनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[भरत चक्रवर्ती]]></category>
		<category><![CDATA[मुक्तागिरी तीर्थ]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री संभवसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[श्री शांतिनाथ जिनालय]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[स्टेशन जैन मंदिर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=100705</guid>

					<description><![CDATA[श्री शांतिनाथ जिनालय, स्टेशन जैन मंदिर में प्रातःकालीन धर्मसभा में मुनि श्री संभवसागर महाराज ने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि मनुष्य की वास्तविक महानता बाहरी संपत्ति या ऐश्वर्य से नहीं, बल्कि संयम और विनम्रता से प्रकट होती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बाहरी भोग-विलास कभी आत्मा को तृप्त नहीं कर सकते। विदिशा से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्री शांतिनाथ जिनालय, स्टेशन जैन मंदिर में प्रातःकालीन धर्मसभा में मुनि श्री संभवसागर महाराज ने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि मनुष्य की वास्तविक महानता बाहरी संपत्ति या ऐश्वर्य से नहीं, बल्कि संयम और विनम्रता से प्रकट होती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बाहरी भोग-विलास कभी आत्मा को तृप्त नहीं कर सकते। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर..</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> श्री शांतिनाथ जिनालय, स्टेशन जैन मंदिर में प्रातःकालीन धर्मसभा में मुनि श्री संभवसागर महाराज ने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि मनुष्य की वास्तविक महानता बाहरी संपत्ति या ऐश्वर्य से नहीं, बल्कि संयम और विनम्रता से प्रकट होती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बाहरी भोग-विलास कभी आत्मा को तृप्त नहीं कर सकते। संसार का सुख क्षणिक है जबकि, आत्मा का आनंद शाश्वत और अनंत है। मुनिश्री ने कहा कि आज जब पुण्य के प्रभाव से हमारे पास थोड़ी-सी संपत्ति, पद या मान-सम्मान आ जाता है तो हम दूसरों को छोटा दिखाने का प्रयास करने लगते हैं। जिस वैभव पर हमें विनम्र होना चाहिए। उसी पर हम अहंकार करने लगते हैं। स्मरण रखिए संपत्ति से नहीं, संयम से महानता आती है। वैभव से नहीं, विनम्रता से ऊंचाई मिलती है।</p>
<p><strong> भरत चक्रवर्ती के पास अथाह वैभव था</strong></p>
<p>अपने प्रवचन में मुनिश्री ने भगवान आदिनाथ के पुत्र भरत चक्रवर्ती का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भरत चक्रवर्ती के पास अथाह वैभव था। उनके महल सोने-चांदी से दमकते थे। राज्य असीम था और ऐश्वर्य अपार। पौराणिक वर्णनानुसार उनकी 96,000 रानियां थीं। 32,000 म्लेच्छ खंड की राजकुमारियां, 32,000 मुकुटबद्ध राजाओं की पुत्रियां तथा 32,000 विद्याधर राजाओं की कन्याएं। इतना अद्भुत वैभव और असाधारण सुख होने पर भी उन्हें वह सुख, वास्तविक सुख प्रतीत नहीं हुआ। मुनिश्री ने कहा कि इसका कारण यह था कि वे वैभव के मध्य भी वैराग्य की भावना को धारण किए हुए थे। यदि भरत चक्रवर्ती जैसे सम्राट वैराग्य की ओर मुड़ सकते हैं तो हम भी अपने जीवन का आत्मोद्धार क्यों नहीं कर सकते? इस विषय में प्रत्येक व्यक्ति को आत्मचिंतन अवश्य करना चाहिए। इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीम सागर जी महाराज एवं मुनि श्री संस्कार सागरजी महाराज मंचासीन रहे।</p>
<p><strong> मुनि संघ के प्रतिदिन प्रातः 8.45 बजे से प्रवचन </strong></p>
<p>सकल दिगंबर जैन समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि आगामी मार्च माह के द्वितीय सप्ताह में बर्राे वाले बड़े बाबा भगवान आदिनाथ को नवीन मंदिर में नई वेदी पर विराजमान कराने के लिए शीतलविहार न्यास के पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल मुक्तागिरी तीर्थ पर आचार्य श्री समयसागरजी महाराज से निवेदन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने गया था। आचार्यश्री ने आशीर्वाद प्रदान करते हुए संपूर्ण कार्यक्रम की जिम्मेदारी मुनिश्री संभवसागरजी महाराज को सौंप दी है। मुनि संघ के प्रतिदिन प्रातः 8.45 बजे से प्रवचन संपन्न हो रहे हैं। जिनमें श्रद्धालुजन बड़ी संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/greatness_comes_not_from_wealth_but_from_self_control_humility_is_the_way_to_achieve_greatness/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जब वैराग्य का मार्ग चुने तो वापस न लौटे: विदिशा में मुनिश्री के प्रवचनों से समाजजनों को मिल रही मंगल देशना  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/once_you_choose_the_path_of_renunciation_do_not_turn_back/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/once_you_choose_the_path_of_renunciation_do_not_turn_back/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Jan 2026 10:08:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[King Shrenik]]></category>
		<category><![CDATA[King Varisena]]></category>
		<category><![CDATA[Monastic Community]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Nissim Sagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Sambhav Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Pushpadal]]></category>
		<category><![CDATA[Queen Chelna]]></category>
		<category><![CDATA[Question and Answer Program]]></category>
		<category><![CDATA[Samyak Darshan]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Station Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पुष्पडाल]]></category>
		<category><![CDATA[प्रश्नमंच कार्यक्रम]]></category>
		<category><![CDATA[महारानी चेलना]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री संभवसागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिसंघ]]></category>
		<category><![CDATA[राजा वारिसेन]]></category>
		<category><![CDATA[राजा श्रैणिक]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सम्यक् दर्शन]]></category>
		<category><![CDATA[स्टेशन जैन मंदिर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=98549</guid>

					<description><![CDATA[बेटा जब वैराग्य की ओर बढ़ जाता है तो प्रत्येक माता-पिता की इच्छा रहती है कि उसके कदम वापस न हों। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने सम्यक् दर्शन के 8 अंगों में से उपगुहन और स्थिरीकरण अंग पर व्याख्यान देते हुए व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230; विदिशा। बेटा जब वैराग्य की ओर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बेटा जब वैराग्य की ओर बढ़ जाता है तो प्रत्येक माता-पिता की इच्छा रहती है कि उसके कदम वापस न हों। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने सम्यक् दर्शन के 8 अंगों में से उपगुहन और स्थिरीकरण अंग पर व्याख्यान देते हुए व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> बेटा जब वैराग्य की ओर बढ़ जाता है तो प्रत्येक माता-पिता की इच्छा रहती है कि उसके कदम वापस न हों। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने सम्यक् दर्शन के 8 अंगों में से उपगुहन और स्थिरीकरण अंग पर व्याख्यान देते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि राजगृही नगरी में राजा श्रैणिक और महारानी चेलना के पुत्र राजा वारिसेन को वैराग्य होता है और वह राजमहल के साथ अपनी बत्तीस सुंदर रानियों को छोड़कर वन की ओर प्रस्थान कर जाते हैं। समय बीतता है एक दिन मुनिराज वारिसेन का पुनः राजगृही नगरी में आगमन होता है और वह आहारचर्या के लिए निकलते हैं। वह बढ़े चले जा रहे है और उनका पड़गाहन अपने बाल सखा मित्र पुष्पडाल, जिसके विवाह को अभी एक ही दिन हुआ था, वहां होता है। उसकी पत्नी एकांक्षी थी। आहारचर्या के उपरांत पुष्पडाल मुनिराज का कमंडल अपने हाथ में लिए वन की ओर छोड़ने जाते हैं।</p>
<p><strong>पुष्पडाल भी वन में ही दीक्षा ले लेते हैं</strong></p>
<p>रास्ते में वारिसेन अपने मित्र को संसार की असारता का वर्णन से ओतप्रोत कथानक सुनाते हैं। जिससे प्रभावित होकर पुष्पडाल भी वन में ही दीक्षा ले लेते हैं। धीरे-धीरे 12 वर्ष बीत जाते हैं लेकिन, उनके मन में पत्नी के प्रति राग की कणिका विद्यमान रहती है। जिसे गुरु वारिसेन मुनिराज ताड़ लेते हैं और उनके स्थितिकरण के लिये वह राजागृही में राजा श्रैणिक और माता चेलना को संदेश भेजते हैं कि मैं राजमहल की ओर आ रहा हूं। आप सभी रानिओं को अच्छे से तैयार करके महल में हम दोनों मुनिराजों का पड़गाहन करें। यह संदेश सुनकर राजा श्रैणिक और माता चेलना के मन में संशय होता है कि कंही उनका बेटा मोक्षमार्ग से पथ भ्रष्ट तो नहीं हो गया? मन में उठते प्रश्नों के साथ दो चौकी लगाते हैं।</p>
<p><strong>नवधाभक्ति के साथ दोनों मुनिराजों का आहार होता है</strong></p>
<p>पूरा राजमहल दोनों मुनिराज का पड़गाहन करता है और नवधाभक्ति के साथ उनसे बैठने का अनुरोध करते हैं। मुनिराज वारिसेन जैसे ही काष्ट की चौकी पर बैठते हैं तो माता चेलना के मन में जो प्रश्न उठ रहे थे, उसका समाधान मिल जाता है। दूसरी स्वर्ण की चौकी पर साथी मुनिराज पुष्पडाल को इशारा किया और वह उस चौकी पर बैठते हैं नवधाभक्ति के साथ दोनों मुनिराजों का आहार होता है। सभी 32 रानियां एवं राजा श्रैणिक एवं रानी चेलना भी आहार देती है और आहार के उपरांत दोनों मुनिराज वापस लौटते हैं। इस पूरी घटना से पुष्पडाल मन ही मन सोचते है कि वारिसेन ने उन 32 रानियों की ओर एक नजर उठाकर भी नहीं देखा, वह समझ जाते हैं कि गुरु ने यह नाटक क्यों रचा? मेरे मन में जो अपनी पत्नी के प्रति राग की कणिका थी। उसका स्थितिकरण करने के लिये ही मेरे गुर यहां पर मुझे लेकर आए हैं और उनके मन में जो राग की कणिका आई थी वह समाप्त हो जाती है।</p>
<p><strong>तुम उसी मार्ग में रहना वापस मत आना</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जैसे बेटी को विदा करते समय प्रत्येक माता-पिता की यह भावना रहती है कि वह अपने घर-संसार में सुखी रहे। इसीलिए जब वह बेटी को विदा करता है तो वह कहता है कि अब तुम इस घर की ओर मत देखना, अब तुम्हारा घर तुम्हारी ससुराल है और सास-ससुर ही तुम्हारे माता-पिता हैं। उसी प्रकार जब बेटा वैराग्य की ओर जाता है तो माता-पिता उसे खूब समझाते हैं, फिर भी बेटा यदि नहीं मानता तो वह एक ही संदेश देते है कि अब तुम उसी मार्ग में रहना वापस मत आना।</p>
<p><strong>ध्यान रखना आपको अपना पेपर बनाना है </strong></p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज कहते है कि ‘सम्यक् दर्शन’ को सुरक्षित रखने के लिए कोई बहुत बड़ा पहाड़ नहीं तोडना पड़ता। यदि आपने दूसरों के दोषों पर मौन रखना शुरु कर दिया तो आप 101 प्रतिशत पास हो जाओगे। गुरुदेव हमेशा कहा करते थे कि आप लोगों को मोक्षमार्ग में मोक्षमार्गी की नकल करने की पूरी छूट है। ध्यान रखना आपको अपना पेपर बनाना है और स्वयं ही उसमें उत्तर लिखना है तथा खुद ही उसे चेक करके नंबर देना है। इस कार्य में पूरी ईमानदारी होना चाहिए। याद रखना कि कोई भी विद्यार्थी फेल नहीं होना चाहिए। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया मुनिसंघ स्टेशन जैन मंदिर में विराजमान हैं। प्रातः 8.45 से प्रवचन के बाद प्रश्नमंच कार्यक्रम होता है। सही उत्तर देने वालों को तुरंत पुरस्कार दिया जाता है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/once_you_choose_the_path_of_renunciation_do_not_turn_back/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अष्टदृव्यों से संगीतमय पूजन की जारी : आचार्य भक्ति एवं प्रश्नमंच का कार्यक्रम संपन्न </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/musical_worship_continues_with_eight_substances/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/musical_worship_continues_with_eight_substances/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Nov 2025 14:20:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Sambhavasagarji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Shantinath Jinalaya]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Station Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Winter Reading]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री संभवसागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[शांतिनाथ जिनालय]]></category>
		<category><![CDATA[शीतकालीन बाचना]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[स्टेशन जैन मंदिर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=95269</guid>

					<description><![CDATA[मुनि श्री संभवसागरजी महाराज की शीतकालीन बांचना श्री शांतिनाथ जिनालय स्टेशन जैन मंदिर में चल रही है। प्रतिदिन प्रातः 8:45 से आचार्य श्री की अष्टदृव्यों से संगीतमय पूजन की जा रही है। आज शीतल महिला मंडल शीतलधाम द्वारा गुरुदेव तथा मुनिसंघ की पूजन अष्टदृव्यों से की गई। विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनि श्री संभवसागरजी महाराज की शीतकालीन बांचना श्री शांतिनाथ जिनालय स्टेशन जैन मंदिर में चल रही है। प्रतिदिन प्रातः 8:45 से आचार्य श्री की अष्टदृव्यों से संगीतमय पूजन की जा रही है। आज शीतल महिला मंडल शीतलधाम द्वारा गुरुदेव तथा मुनिसंघ की पूजन अष्टदृव्यों से की गई। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> मुनि श्री संभवसागरजी महाराज की शीतकालीन बांचना श्री शांतिनाथ जिनालय स्टेशन जैन मंदिर में चल रही है। प्रतिदिन प्रातः 8:45 से आचार्य श्री की अष्टदृव्यों से संगीतमय पूजन की जा रही है। आज शीतल महिला मंडल शीतलधाम द्वारा गुरुदेव तथा मुनिसंघ की पूजन अष्टदृव्यों से की गयी एवं दौपहर में तीन बजे से स्वाध्याय हुआ। सायंकाल 5:30 बजे आचार्य भक्ति एवं प्रश्नमंच का कार्यक्रम संपन्न हुआ।</p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्री संभवसागर महाराज ने कहा कि कभी भगवान शीतलनाथ का समवशरण यहां आया होगा। वर्तमान में आचार्य गुरुदेव की आपकी विदिशा नगरी पर ऐसी कृपा हुई कि आपके नगर में ऐसा साक्षात न सही लेकिन, कृत्रिम समवशरण पूर्णता की ओर है और उसमें शीशम का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार का कुछ न कुछ दृव्य शीतलधाम के इस विशाल समवशरण में लगना चाहिये। उन्होंने तीन प्रकार की संल्लेखना का वर्णन करते हुये कहा कि वर्तमान में कायोत्सर्ग मरण तथा इंगनि मरण तो नहीं होता लेकिन, भक्त प्रत्याख्यान मरण किया जाता है, जिसमें क्षपकराज धीरे-धीरे क्रमशः चारों प्रकार के आहार का त्याग करते हुये अंत में प्राणों का त्याग करता है।</p>
<p><strong>वह तो अपने लिये स्वयं निर्यापक थे</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि श्री ने चंद्रगिरी पर आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज की समाधि सल्लेखना को उत्कृष्ट समाधि बताते हुए कहा कि उन्होंने भक्त प्रत्याख्यान समाधि सल्लेखना धारण कर स्वयं ही अपने आपको संघ से सीमित कर लिया था। डोंगरगढ़ के चंद्रगिरी पर जब वह समाधि सल्लेखना की ओर आगे बढ़ रहे थे तो मात्र तीन मुनिराज ही उन्होंने अपने पास रखे। वह तो अपने लिये स्वयं निर्यापक थे। उन्होंने धीरे-धीरे अपने शरीर को कृश करते हुये शरीर को छोड़ा तथा पूर्णतया सावधान थे।</p>
<p>उनके अंतिम समय में निर्यापक श्रमण श्री प्रसाद सागर जी तो थे ही वरिष्ठ निर्यापक श्रमण श्री योगसागर जी, निर्यापक श्रमण समतासागर जी सहित छह मुनिराज और पहुंच गये थे। इस प्रकार अंतिम समय में नौ मुनिराजों को सेवा करने का अवसर मिल गया था। जिसमें निस्सीम सागर महाराज भी उक्त समय पर थे। आचार्य श्री जानते थे कि अंतिम समय निकट है लेकिन उन्होंने सभी संघों को उधर आने से रोका वह जानते थे कि यदि खवर फैल गयी तो चंद्रगिरी पर इतनी जनता कैसे समाहित होगी। मुनि श्री ने विदिशा के 2014 का चार मुनिराजों की दीक्षा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि उस दिन कार्तिक कृष्ण अष्ठमी का दिन था यह शुभ तिथी थी।</p>
<p>आचार्य श्री बर्रो वाले बाबा भगवान आदिनाथ के दरबार से आहार चर्या को निकले हम भी उनके पीछे पीछे निकले तो पता लगा कि आज तो आचार्य श्री बहुत दूर गये है, कहां गये हैं। किला अंदर ऋषि सतभैया के यहां पर उनका पड़गाहन हुआ है। ब्रहम्चारी जी के यंहा से आहार के उपरांत लगभग 11:20 बजे तक गुरुदेव लौटे और उन्होंने मुझे बुलाया। भक्ति का समय था। ऋषि भैया का परिवार सामने थे। उन्होंने कहा कि ऋषि सामने खड़ा है उसकी बहुत भावना है और ऋषि को संकेत मिल गया और उसने गुरुदेव से निवेदन कर दिया। इस प्रकार लगभग 11:30 बजे यह सूचना बिजली की गति से आसपास पहुंची और इस प्रकार चार भैयाजी की दीक्षा का त्वरित निर्णय हो जाता है। आचार्य श्री कोई भी निर्णय पूर्व घोषणा नहीं करते थे। जब त्वरित निर्णय पर ही इतनी भीड़ हो गयी थी। यदि पूर्व सूचना हो जाए तो भीड़ सम्हाले नहीं सम्हलती।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/musical_worship_continues_with_eight_substances/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मुनि श्री संभवसागर जी ने कहा संयमी असंयमियों की बातों में नहीं आएं: धार्मिक क्रियाओं में व्यतीत हो रहा दिन, मुनिश्री की वाणी का ले रहे लाभ  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/muni_shri_sambhavsagar_ji_said_that_the_disciplined_should_not_be_influenced_by_the_words_of_the_undisciplined/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/muni_shri_sambhavsagar_ji_said_that_the_disciplined_should_not_be_influenced_by_the_words_of_the_undisciplined/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Nov 2025 12:03:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Abhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Samaysagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Sambhavsagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Musical Worship]]></category>
		<category><![CDATA[prize distribution]]></category>
		<category><![CDATA[Question Forum]]></category>
		<category><![CDATA[Shantidhara]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Station Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Vidisha]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=94993</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य एवं आचार्य श्री समयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती मुनि श्री संभवसागर महाराज ससंघ स्टेशन जैन मंदिर में विराजमान हैं। प्रवचन पर आधारित प्रश्नमंच आयोजित किया जा रहा है। तत्काल पुरस्कार वितरण भी किया जा रहा है। विदिशा से पढ़िए, अविनाश जैन की यह खबर&#8230; विदिशा। आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य एवं [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य एवं आचार्य श्री समयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती मुनि श्री संभवसागर महाराज ससंघ स्टेशन जैन मंदिर में विराजमान हैं। प्रवचन पर आधारित प्रश्नमंच आयोजित किया जा रहा है। तत्काल पुरस्कार वितरण भी किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, अविनाश जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य एवं आचार्य श्री समयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती मुनि श्री संभवसागर महाराज ससंघ स्टेशन जैन मंदिर में विराजमान हैं। यहां प्रतिदिन सुबह 6.15 बजे आचार्य भक्ति, 6.30 बजे से विशेष कक्षा युवाओं के लिए लग रही है। सुबह 7.15 बजे से अभिषेक एवं शांतिधारा तथा 8.30 बजे से मंचीय कार्यक्रम के अंतर्गत आचार्य श्री का संगीतमय पूजन, 8.45 बजे से मुनि श्री के प्रवचन, 9.30 बजे तक प्रवचन पर आधारित प्रश्नमंच आयोजित किया जा रहा है। तत्काल पुरस्कार वितरण भी किया जा रहा है। 9.45 से आहार चर्या एवं इसके बाद दोपहर 12 बजे सामायिक, अपरान्ह 3 बजे से भगवती आराधना का स्वाध्याय, संध्या 5.30 बजे आचार्य भक्ति एवं 6 बजे से खजाने के मोती के तहत मुनि श्री निस्सीम सागरजी महाराज की कक्षा लग रही है।</p>
<p><strong>इतिहास का वास्तविक बोध जरूरी </strong></p>
<p>प्रातःकालीन प्रवचन सभा में मुनिश्री संभवसागर महाराज ने जैन धर्म और इतिहास पर चर्चा करते हुए कहा कि जब तक हम जैनत्व के इतिहास का वास्तविक बोध नहीं होगा तब तक हम अपनी वास्तविक जड़ों तक नहीं पहुंच सकते। उन्होंने कहा कि जैनत्व की जड़ें जितनी अधिक मजबूत होंगी। उतनी ही मजबूती के साथ हम अपने धर्म के साथ खड़े रह सकते हैं। उन्होंने आचार्य भद्रबाहु से लेकर परंपराचार्य परंपरा तथा इतिहास की विस्तृत व्याख्या की एवं वर्तमान समय में दिगंबर जैन साधु परंपरा को जीवंत करने वाले आचार्य श्री शांतिसागर जी एवं आचार्य श्री विद्यासागरजी का उल्लेख करते हुए कहा कि संयमी साधुओं को कभी असंयमी श्रावकों की बातों में नहीं आना चाहिए।</p>
<p><strong>आचार्यश्री विद्यासागर जी ने इमरजेंसी में फिरोजाबाद में किया था चातुर्मास </strong></p>
<p>उन्होंने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि जब आचार्य श्री का विहार दिल्ली की ओर निश्चित था लेकिन, इमरजेंसी लग जाने से वह सुहाग नगरी फिरोजाबाद में रुक गए। उस समय आचार्य श्री की उम्र 25 से 27 के बीच थी एवं सभी युवा साधुओं के साथ वह लाला छिदामीलाल जैन के मंदिर में पहुंचे। मैनेजर ने मंदिर खोल दिया और सेठजी को खबर कर दी। सेठ जी ने सोचा आषाढ़ का महीना है, कहीं चातुर्मास के लिए साधु न रुक जाए, इसलिए असंमज में पड़ गए और उन्होंने आचार्यश्री नरेंद्र प्रकाश को यह सूचना दी और जब उनको यह जानकारी लगी कि यह कोई साधारण दिगंबर जैन साधु नहीं बल्कि चतुर्थ कालीन चर्या के धनी आचार्य विद्यासागर जी हैं तो उन्होंने खुद आकर पूज्य गुरुदेव की चर्या देखी और उनसे प्रभावित होकर चातुर्मास का निवेदन किया और इस प्रकार आचार्यश्री का चातुर्मास सुहाग नगरी फिरोजाबाद में कई अतिशयकारी घटनाओं के साथ हुआ।</p>
<p><strong>गौवंश के लिए किया आहार का बंदोबस्त </strong></p>
<p>मुनि श्री ने आचार्य श्री के व्यक्तित्व में दया और करुणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि घटना सन् 2000 की है। जब आचार्य श्री का चातुर्मास अमरकंटक में चल रहा था और उसी समय राजस्थान में पानी नहीं गिरने से भीषण अकाल पड़ा। जनमानस तो जैसे-तैसे अपना पेट भर रहा था लेकिन, पशुपालन बहूत दुर्लभ हो गया और जब यह खबर आचार्य श्री के पास आई तो उन्होंने सारे भारत को दया और करुणा का संदेश दिया। उनके आशीर्वाद से स्पेशल ट्रेन तथा टृकों से पशु आहार मध्यप्रदेश से राजस्थान के कई शहरों में भेजा तथा एक विशेष ट्रेन में कई अच्छी नस्ल की गायें अमरकंटक के पास पेंडरा रोड़ रेलवे स्टेशन पर आई तो दया और करुणा के मसीहा आचार्य श्री विद्यासागर जी संघ सहित उन गायों को लेने पेंडरा रोड़ पहुंचे और उनको अमरकंटक लेकर आए और उनके लिए गौ शाला में विशेष व्यवस्था कराई।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/muni_shri_sambhavsagar_ji_said_that_the_disciplined_should_not_be_influenced_by_the_words_of_the_undisciplined/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
