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	<title>State Guest &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>इंदौर प्रवेश से पूर्व मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज को मध्यप्रदेश शासन ने घोषित किया राजकीय अतिथि : 26 जुलाई को होगा भव्य मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:29:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर चातुर्मास 2026 से पूर्व मध्यप्रदेश शासन ने राष्ट्रसंत मुनि पुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज को राजकीय अतिथि घोषित किया। सुमित धाम गोधा स्टेट में धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने मानवीय मूल्यों और गुरु आज्ञा पालन का प्रेरक संदेश दिया। पढ़िए श्रीफल साथी राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट। इंदौर। इंदौर में 26 जुलाई [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इंदौर चातुर्मास 2026 से पूर्व मध्यप्रदेश शासन ने राष्ट्रसंत मुनि पुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज को राजकीय अतिथि घोषित किया। सुमित धाम गोधा स्टेट में धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने मानवीय मूल्यों और गुरु आज्ञा पालन का प्रेरक संदेश दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> इंदौर में 26 जुलाई को होने वाले भव्य मंगल प्रवेश से पूर्व राष्ट्रसंत, निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ को मध्यप्रदेश शासन द्वारा राजकीय अतिथि घोषित किए जाने की घोषणा से श्रद्धालुओं में हर्ष का वातावरण है। इस अवसर पर सुमित धाम गोधा स्टेट में आयोजित विशाल धर्मसभा में हजारों श्रद्धालुओं ने गुरुवर का मंगल सान्निध्य प्राप्त किया।</p>
<p><strong>मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का आह्वान</strong></p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि समाज में मानवीय मूल्यों को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने सूर्य का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे सूर्य बिना रुके सभी को प्रकाश देता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी सद्गुणों और सम्मान की भावना के साथ जीवन जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो दूसरों का सम्मान करता है, वही वास्तविक सम्मान का अधिकारी बनता है।</p>
<p><strong>राजकीय अतिथि घोषित होने पर हर्ष</strong></p>
<p>जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम में मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश शासन ने मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज को राजकीय अतिथि का दर्जा प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव का चिंतन सदैव राष्ट्र, समाज, संस्कृति और नैतिक मूल्यों के उत्थान के लिए समर्पित रहा है। यह सम्मान संत परंपरा और धर्म प्रभावना का भी सम्मान है।</p>
<p><strong>सुमित धाम गोधा स्टेट में हुआ भव्य मंगल प्रवेश</strong></p>
<p>सेटेलाइट नगर से मंगल विहार करते हुए मुनि संघ अठारह पिच्छिकाओं सहित सुमित धाम गोधा स्टेट पहुँचा, जहाँ सपना-मनीष गोधा ने श्रीफल अर्पित कर पाद प्रक्षालन के साथ भव्य अगवानी की। श्रद्धालुओं ने जयघोषों के बीच गुरुवर का स्वागत किया।</p>
<p><strong>&#8216;मेरे बस की बात नहीं&#8217; शब्द का करें त्याग</strong></p>
<p>अपने प्रेरक उद्बोधन में गुरुदेव ने कहा कि जीवन में कभी भी &#8220;मेरे बस की बात नहीं&#8221; जैसे नकारात्मक शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यदि गुरु की आज्ञा और विश्वास साथ हो तो प्रत्येक कार्य संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक संकल्प, गुरु भक्ति और आत्मविश्वास व्यक्ति के जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं।</p>
<p><strong>26 जुलाई को होगा इंदौर में मंगल प्रवेश</strong></p>
<p>इंदौर में वर्षायोग चातुर्मास 2026 के लिए मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश 26 जुलाई को होगा। धर्म प्रभावना समिति एवं सकल जैन समाज द्वारा इसकी व्यापक तैयारियाँ की जा रही हैं। विजय धुर्रा ने समाजजनों से आह्वान किया कि हर घर और हर हृदय में चातुर्मास की तैयारी हो, तभी इस महापर्व का आनंद कई गुना बढ़ेगा।</p>
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		<title>इंदौर प्रवेश के साथ मुनिपुंगव सुधासागर जी महाराज को मिली नई गौरवपूर्ण उपलब्धि : मध्यप्रदेश शासन ने दिया राजकीय अतिथि का दर्जा </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 16:20:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर में मुनिपुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के मंगल प्रवेश के साथ मध्यप्रदेश शासन ने उन्हें राजकीय अतिथि का दर्जा प्रदान किया है। जैन समाज ने इसे संत परंपरा और तप-संयम के सम्मान का ऐतिहासिक निर्णय बताया। पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन दद्दू की यह रिपोर्ट। इंदौर।बसर सेठ हुकुमचंद जी एवं लोकमाता देवी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इंदौर में मुनिपुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के मंगल प्रवेश के साथ मध्यप्रदेश शासन ने उन्हें राजकीय अतिथि का दर्जा प्रदान किया है। जैन समाज ने इसे संत परंपरा और तप-संयम के सम्मान का ऐतिहासिक निर्णय बताया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन दद्दू की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong>बसर सेठ हुकुमचंद जी एवं लोकमाता देवी अहिल्याबाई की धर्मनगरी इंदौर में निर्यापक तीर्थरक्षक मुनिपुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के मंगल प्रवेश के साथ एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन ने पूज्य गुरुदेव को राजकीय अतिथि का दर्जा प्रदान किया है।</p>
<p><strong>शासन ने दिया विशेष सम्मान</strong></p>
<p>मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार पूज्य मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज को राजकीय अतिथि का दर्जा प्रदान किया गया है। इसे संत परंपरा, तप, त्याग और संयममय जीवन के प्रति शासन की श्रद्धा एवं सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है।</p>
<p><strong>संत परंपरा का सम्मान</strong></p>
<p>सकल दिगम्बर जैन समाज धर्म प्रभावना समिति की अध्यक्ष सपना मनीष गोधा ने कहा कि यह सम्मान केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि राष्ट्रहित एवं समाजहित में समर्पित संत जीवन के प्रति सार्वजनिक सम्मान है। यह अभिनंदन संपूर्ण तपस्वी परंपरा का सम्मान है, जिसने सदैव समाज को संस्कार, सदाचार, संयम और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाया है।</p>
<p><strong>चातुर्मास की गरिमा हुई और बढ़ी</strong></p>
<p>धर्म प्रभावना समिति ने कहा कि वर्ष 2026 का पूज्य गुरुदेव का वर्षायोग चातुर्मास तीर्थ स्वरूप आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर स्थित दलालबाग, इंदौर में आयोजित होना है। ऐसे ऐतिहासिक अवसर पर राजकीय अतिथि का सम्मान इस चातुर्मास की गरिमा को और अधिक प्रतिष्ठित बनाता है तथा इंदौर के लिए भी गौरव का विषय है।</p>
<p><strong>सरकार के निर्णय का स्वागत</strong></p>
<p>समिति ने मध्यप्रदेश शासन के इस निर्णय पर हर्ष व्यक्त करते हुए साधुवाद ज्ञापित किया। समाजजनों ने इसे केवल पूज्य गुरुदेव का सम्मान नहीं, बल्कि संपूर्ण दिगम्बर जैन संत परंपरा, जैन समाज और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान बताया।</p>
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		<title>भक्ति की शक्ति से संयम धारण कर मनुष्य जीवन को सार्थक करे: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का धोद नगर में हुआ मंगल प्रवेश, शिक्षा और दीक्षा गुरु की स्थली का दर्शन करेंगे </title>
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		<pubDate>Tue, 14 Jul 2026 11:13:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर श्री आदिनाथ से लेकर महावीर स्वामी कुल में जन्म लेने के कारण आप हम सब सौभाग्यशाली हैं क्योंकि मंदिरों से उनकी पूजा अर्चना का हमें सौभाग्य मिलता है। धोद गांव में 52 वर्ष पहले आए थे। अब नगर हो गया है गांव या नगर छोटा नहीं होता है। यह प्रबोधन मंगलवार को धोद नगर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर श्री आदिनाथ से लेकर महावीर स्वामी कुल में जन्म लेने के कारण आप हम सब सौभाग्यशाली हैं क्योंकि मंदिरों से उनकी पूजा अर्चना का हमें सौभाग्य मिलता है। धोद गांव में 52 वर्ष पहले आए थे। अब नगर हो गया है गांव या नगर छोटा नहीं होता है। यह प्रबोधन मंगलवार को धोद नगर प्रवेश पर हुई धर्मसभा में राजकीय अतिथि वात्सल्य वारिधी 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दिया। <span style="color: #ff0000">धोद से पढ़िए, श्रीफल साथी डॉ.राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धोद</strong>। तीर्थंकर श्री आदिनाथ से लेकर महावीर स्वामी कुल में जन्म लेने के कारण आप हम सब सौभाग्यशाली हैं क्योंकि मंदिरों से उनकी पूजा अर्चना का हमें सौभाग्य मिलता है। धोद गांव में 52 वर्ष पहले आए थे। अब नगर हो गया है गांव या नगर छोटा नहीं होता है। यह प्रबोधन मंगलवार को धोद नगर प्रवेश पर हुई धर्मसभा में राजकीय अतिथि वात्सल्य वारिधी 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दिया। उन्होंने कहा कि जब मन बड़ा होता है तो नगर भी बड़ा हो जाता है। जन्मभूमि और जन्म देने वाली माता के प्रति प्रेम रखना चाहिए। भले ही जन्मभूमि से आप दूर हो जाए तो भी इसे भूलना नहीं चाहिए। असम मणिपुर के वाद्य और नृत्य दल ने अद्भुत प्रस्तुति दी। राजस्थान और मणिपुर को एक कर दिया यह भक्ति का प्रतिफल है। श्रावक देव शास्त्र और गुरु का भक्त होता है। श्रावक संघ का सानिध्य दीर्घकाल चाहता है। वैसे ही साधु भी दीक्षा गुरु, शिक्षा गुरु के प्रति भक्ति वंदना की भावना रखते हैं। जयपुर से बिहार के बाद हमने भावना प्रकट की कि हम शिक्षा गुरु और दीक्षा गुरु की समाधि स्थल के दर्शन करेंगे।</p>
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<p><strong>साधु भी दीक्षा गुरु, शिक्षा गुरु के प्रति भक्ति वंदना की भावना रखते हैं </strong></p>
<p>हितेश रारा मारोठ के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि श्रावक देव शास्त्र और गुरु का भक्त होता है। श्रावक संघ का सानिध्य दीर्घकाल चाहता है वैसे ही साधु भी दीक्षा गुरु, शिक्षा गुरु के प्रति भक्ति वंदना की भावना रखते हैं। जयपुर से विहार के बाद हमने भावना प्रकट की कि हम शिक्षा गुरु और दीक्षा गुरु की समाधि स्थल के दर्शन करेंगे।</p>
<p><strong>वाद्य और नृत्य दलों ने मन मोहक प्रस्तुति दी</strong></p>
<p>इसके पूर्व आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 10 मुनिराज 20 आर्यिका माताजी एक ऐलक, चार क्षुल्लक एवं एक क्षुल्लिका सहित 37 पिच्छी का धोद नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। समाज के पदाधिकारियों के अनुसार शोभायात्रा में आसाम और मणिपुर के वाद्य और नृत्य दलों ने मन मोहक प्रस्तुति दी। शोभायात्रा का समापन श्री चंद्रप्रभ जिनालय में हुआ।</p>
<p><strong>ध्वजारोहण पाटनी परिवार ने किया</strong></p>
<p>कार्यक्रम स्थल पर ध्वजारोहण मुख्य जजमान पाटनी परिवार कोलकाता ने मंडप उद्घाटन, चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन तथा आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य प्राप्त किया एवं जिनवाणी पुण्यार्जक परिवार ने भेंट की। इस अवसर पर अनेक नगरों से काफी संख्या में भक्त उपस्थित हुए। दोपहर को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की पूजन भक्ति नृत्य से हुई। शाम को श्री जी और आचार्य श्री की आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ</p>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी तीसरी बार राजकीय अतिथि के तौर पर सम्मानित : मुख्यमंत्री से दिगंबर जैन समाज के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य मुलाकात कर किया था निवेदन  </title>
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		<pubDate>Tue, 23 Jun 2026 09:27:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का मंगल विहार इन दिनों राजस्थान में चल रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस बारे में आदेश जारी कर दिए हैं। शासन के पत्र क्रमांक 42 में 16 जून के अनुसार आचार्यश्री को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का मंगल विहार इन दिनों राजस्थान में चल रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस बारे में आदेश जारी कर दिए हैं। शासन के पत्र क्रमांक 42 में 16 जून के अनुसार आचार्यश्री को राजस्थान प्रवास तक राजकीय अतिथि से सम्मानित किया है। <span style="color: #ff0000">फुलेरा से पढ़िए, डॉ.राजेश पंचोलिया की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>फुलेरा।</strong> आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का मंगल विहार इन दिनों राजस्थान में चल रहा है। विनोद मोदी कोलकाता प्रवासी सीकर ने बताया कि विगत दिनों राज्य के मुख्यमंत्री से दिगंबर जैन समाज के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य मुलाकात कर 76 वर्षीय 57 वर्षों से संयम साधना कर रहे, 36 वर्षों से आचार्य पद पर वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को राजस्थान का राजकीय अतिथि बनाने के लिए निवेदन किया था।</p>
<p><strong>सीएम शर्मा ने जारी किया आदेश</strong></p>
<p>संवेदनशील मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस बारे में आदेश जारी कर दिए हैं। शासन के पत्र क्रमांक 42 में 16 जून के अनुसार आचार्यश्री को राजस्थान प्रवास तक राजकीय अतिथि से सम्मानित किया है।</p>
<p><strong>यह प्रभु का चमत्कार </strong></p>
<p>गुरुभक्त डॉ. राजेश पंचोलिया के अनुसार इसके पूर्व भी राजस्थान सरकार ने वर्ष 2022 और वर्ष 2025 में राजकीय अतिथि बनाया था। यह संयोग है कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के 37 वें आचार्य पदारोहण 24 जून के पूर्व राजकीय अतिथि सम्मान फुलेरा में मिलना प्रभु का चमत्कार है।</p>
<p><strong>इनका सराहनीय योगदान रहा</strong></p>
<p>संतोष विनायका, महेश बाकलीवाल, शशि दीवान, सुनील पहाड़िया, किशोर सिंघई, आशीष जयपुरिया, सुमतिप्रकाश मोदी, विमल पाटनी, सुरेश पाटनी कोलकाता, महेश काला इंफाल, ज्ञान काला दिल्ली, कैलाश काला, मनोज पाटोदी सहित अन्य गुरुभक्तों का सराहनीय योगदान सहयोग रहा। आचार्य श्री के तप, त्याग, संयम, साधना, वैराग्य, समाज कल्याण के लिए अमूल्य योगदान का प्रतीक है। संपूर्ण राजस्थान के जैन समाज के लिए गर्व का विषय है।</p>
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		<title>आचार्य श्री दया सागर जी ससंघ असम सरकार के राजकीय अतिथि: गुरु भक्तों में हर्ष और उत्साह का वातावरण  </title>
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		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:34:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर समाज के लिए अत्यंत हर्ष, गौरव एवं श्रद्धा का विषय है और असम की समग्र जैन समाज को अवगत कराया जाता है कि वर्तमान में गुवाहाटी में विराजित आचार्य श्री दया सागर जी महाराज ससंघ को असम सरकार ने राजकीय अतिथि का सम्मान प्रदान किया है। गुवाहाटी से पढ़िए, प्रदीप झंझारी की यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर समाज के लिए अत्यंत हर्ष, गौरव एवं श्रद्धा का विषय है और असम की समग्र जैन समाज को अवगत कराया जाता है कि वर्तमान में गुवाहाटी में विराजित आचार्य श्री दया सागर जी महाराज ससंघ को असम सरकार ने राजकीय अतिथि का सम्मान प्रदान किया है। <span style="color: #ff0000">गुवाहाटी से पढ़िए, प्रदीप झंझारी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>गुवाहाटी।</strong> दिगंबर समाज के लिए अत्यंत हर्ष, गौरव एवं श्रद्धा का विषय है और असम की समग्र जैन समाज को अवगत कराया जाता है कि वर्तमान में गुवाहाटी में विराजित आचार्य श्री दया सागर जी महाराज ससंघ को असम सरकार ने राजकीय अतिथि का सम्मान प्रदान किया है।ताकि आचार्य श्री ससंघ के आहार-विहार में किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत न आए। यह सम्मान केवल आचार्य श्री के प्रति श्रद्धा एवं आदर का प्रतीक ही नहीं, बल्कि उनके द्वारा समाज में प्रसारित अहिंसा, सदाचार, नैतिकता एवं आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति सम्मान का भी परिचायक है। संपूर्ण सकल दिगंबर जैन समाज, असम सरकार के प्रति आभार एवं कृतज्ञता व्यक्त करता है तथा इस गौरवपूर्ण निर्णय का हृदय से स्वागत करता है। श्री दिगम्बर जैन पंचायत, गुवाहाटी (असम) ने बताया कि इससे समाजजनों ने अपार उत्साह और हर्ष का वातावरण है।</p>
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		<title>उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश एवं हरियाणा नें आर्यिका मां पूर्णमति माताजी राजकीय अतिथि घोषित : बद्रीनाथ अष्टापद में 22 अप्रैल को आर्यिका पूर्णमति माताजी ससंघ का मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 08:37:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा सरकार की राजकीय अतिथि एवं दिल्ली विधानसभा की ओर से अति विशिष्ट अतिथि सम्मान से विभूषित आर्यिका श्री 105 पूर्णमति माताजी ससंघ का ’बद्रीनाथ (अष्टापद) जैन धर्मशाला में 22 अप्रैल को मंगल प्रवेश होगा। बद्रीनाथ/देहरादून से पढ़िए, यह रिपोर्ट&#8230;  बद्रीनाथ/देहरादून। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा सरकार की राजकीय अतिथि एवं [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा सरकार की राजकीय अतिथि एवं दिल्ली विधानसभा की ओर से अति विशिष्ट अतिथि सम्मान से विभूषित आर्यिका श्री 105 पूर्णमति माताजी ससंघ का ’बद्रीनाथ (अष्टापद) जैन धर्मशाला में 22 अप्रैल को मंगल प्रवेश होगा। <span style="color: #ff0000">बद्रीनाथ/देहरादून से पढ़िए, यह रिपोर्ट&#8230; </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बद्रीनाथ/देहरादून।</strong> उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा सरकार की राजकीय अतिथि एवं दिल्ली विधानसभा की ओर से अति विशिष्ट अतिथि सम्मान से विभूषित आर्यिका श्री 105 पूर्णमति माताजी ससंघ का ’बद्रीनाथ (अष्टापद) जैन धर्मशाला में 22 अप्रैल को मंगल प्रवेश होगा। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि 24 अप्रैल को अष्टापद स्थित जैन धर्मशाला में माताजी के विशेष जीवन दर्शन का विशेष आयोजन किया गया है। बद्रीनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष आदित्य कासलीवाल एवं महामंत्री कीर्ति पांड्या, कोषाध्यक्ष अमित कासलीवाल, जिनेंद्र कासलीवाल ने कहा कि यह ऐतिहासिक यात्रा बद्रीनाथ (अष्टापद) की ओर बढ़ते कदम के संकल्प के साथ हो रही है।</p>
<p>दद्दू ने कहा कि इस पुण्य यात्रा को आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज का मंगल आशीर्वाद प्राप्त है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री पुष्करसिंह धामी’, विधायक सविता कपूर एवं भाजपा राष्ट्रीय महिला मोर्चा महामंत्री दीप्ति रावत ने भी इस घोषणा की अनुमोदना की है। संपूर्ण जैन समाज ने माताजी के इस कदम की बहुत-बहुत अनुमोदना की है।</p>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 34 साधुओं सहित मंगल प्रवेश : मुनि श्री विनम्र सागर जी ने चरण वंदना कर भव्य अगवानी की </title>
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		<pubDate>Sun, 08 Mar 2026 10:55:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान की प्रतिमा उपदेश देती है कि रत्नत्रय मार्ग से शाश्वत मोक्ष सुख प्राप्त होता है। जिन्होंने आत्मा को पहचान लिया वही आत्म साधक होते हैं। यह उद्गार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मालवीयनगर में प्रवेश के बाद व्यक्त किए। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान की प्रतिमा उपदेश देती है कि रत्नत्रय मार्ग से शाश्वत मोक्ष सुख प्राप्त होता है। जिन्होंने आत्मा को पहचान लिया वही आत्म साधक होते हैं। यह उद्गार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मालवीयनगर में प्रवेश के बाद व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 34 साधुओं सहित 8 मार्च को प्रातः मालवीय नगर प्रवेश हुआ। मुनि श्री विनम्र सागर जी द्वारा चरण वंदना मालवीय नगर चौराहे पर की गई। देश के वरिष्ठतम 76 वर्षीय 58 वर्ष का संयम दीक्षाकाल राजस्थान शासन के राजकीय अतिथि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने नगर प्रवेश पर आयोजित धर्मसभा में देशना में बताया कि मुनि श्री द्वारा चरण वंदना ,आचार्य भक्ति अन्य साधुओं से मिलन आदर्श अनुकरणीय वात्सल्य मिलन है। इसके पूर्व 1993 में मुनि श्री योगसागर भी पांच साधुओं सहित श्रवणबेलगोला हमारे साथ 8 माह रहे। अब इन साधुओं में आज दर्शन किए हैं। तीन और पांच का अंक महत्वपूर्ण है। तीन रत्नत्रय का प्रतीक है। पांच पंच परमेष्ठी का प्रतीक है। दोनों का योग 8 कर्मों को नाश करने का संदेश देता है। सुखी होने के लिए रत्नत्रय धर्म सम्यक दर्शन, सम्यकज्ञान और सम्यक चारित्र धारण करना होता है।संसारी प्राणी के जीवन में दु:ख ही दु:ख है। आप लोगों के दु:खी चेहरे देखकर हम साधु वैराग्य लेते हैं। संसारी प्राणी का जीवन धर्म के विपरीत होने के कारण होने के कारण शाश्वत मोक्ष रूपी लक्ष्य नहीं मिलता है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-101373" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0006-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0006-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0006-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0006-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0006-1536x1023.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0006-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0006-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0006-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0006-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0006-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0006-990x660.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0006-1320x879.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0006.jpg 1600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>इसके पूर्व आचार्य श्री ज्ञानसागर जी और आचार्य श्री धर्मसागर जी, मुनि विद्यासागर जी और हम मुनि अवस्था में 17 दिनों तक किशनगढ़ में सन 1971 में साथ में रहे। राजेश पंचोलिया ने बताया कि आचार्य श्री ने उपदेश में आगे बताया कि आचार्य का पद पंच परमेष्ठि का पद है आचार्य श्रावकों, साधुओं को शिक्षा ,दीक्षा, प्रायश्चित देते हैं। साधु आत्म साधना करते हैं, आत्मा को जिन्होंने पहचान लिया है, वही आत्मसाधक होते हैं। देव शास्त्र गुरु की विनय सभी को करना चाहिए। भगवान ने भी सम्यक दर्शन प्राप्त करने के बाद सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र को प्राप्त कर किया है। भगवान का चेहरा उपदेश देता है कि रत्न्त्रय धर्म का मार्ग भी शाश्वत सुख और मोक्ष मार्ग देता है। आज आचार्य श्री संघ की भव्य अगवानी में हाथी अश्व शामिल रहे और सैकड़ों महिलाओं ने मंगल कलश धारण किए। जगह-जगह पर आचार्य श्री की मंगल आरती हुई। धर्मसभा में प्रवचन के पूर्व श्रीजी का पंचामृत अभिषेक आचार्य श्री वर्धमान सागर जी और मुनि श्री विनम्रसागर जी संघ सानिध्य में हुआ। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री विनम्रसागर जी ने आचार्य श्री का गुणानुवाद कर बताया कि दीक्षा गुरु आचार्य श्री विद्यासागर जी के संघ में 20 वर्षों के सानिध्य में जो चरण वंदना करते थे। वहीं विशुद्धि वही भाव स्नेह सुखद अनुभूति आज हुई। इसी कारण आचार्य श्री आपका वात्सल्य वारिधी नाम सार्थक है। आचार्य निर्मल चारित्र के धारक होकर भगवान के प्रति रूप है। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन महावीर गोदिका परिवार और जिनवाणी भेंट दुलीचंद उत्तमचंद परिवार द्वारा की गई। चित्र अनावरण विधायक एवं मंदिर समिति ने किया।</p>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज को राजस्थान का राजकीय अतिथि किया घोषित : किए जाने पर जैन समाज में हर्ष की लहर </title>
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		<pubDate>Wed, 06 Aug 2025 07:20:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राजस्थान सरकार द्वारा टोंक में चातुर्मासरत जैनाचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज को राजकीय अतिथि घोषित किए जाने से जैन समाज में हर्ष का वातावरण है। संयम साधना के 57वें वर्ष में प्रविष्ट आचार्य श्री की यह मान्यता समाज के प्रति राज्य का सम्मान है। पढ़िए राजेश पंचोलिया इंदौर की खास रिपोर्ट… टोंक। प्रथमाचार्य चारित्र [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>राजस्थान सरकार द्वारा टोंक में चातुर्मासरत जैनाचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज को राजकीय अतिथि घोषित किए जाने से जैन समाज में हर्ष का वातावरण है। संयम साधना के 57वें वर्ष में प्रविष्ट आचार्य श्री की यह मान्यता समाज के प्रति राज्य का सम्मान है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया इंदौर की खास रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज वर्तमान में टोंक नगर में 35 साधुओं सहित चातुर्मास में प्रविष्ट हैं। संयम साधना जीवन का यह उनका 57वां वर्ष है।</p>
<p>आचार्य श्री का जन्म वर्ष 1950 में श्री यशवंत जी के रूप में हुआ था। उन्होंने 24 फरवरी 1969 को आचार्य श्री धर्मसागर जी से मुनि दीक्षा लेकर मुनि वर्धमान सागर जी के रूप में संयम जीवन प्रारंभ किया। तत्पश्चात, चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजीतसागर जी के आदेशानुसार 24 जून 1990 को उन्हें आचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया गया।</p>
<p>अब, राजस्थान शासन ने पत्र दिनांक 4 अगस्त 2025 के अनुसार उन्हें राजस्थान का राजकीय अतिथि घोषित कर दिया है, जिससे समाज में अपार हर्ष व्याप्त है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में भी उन्हें तत्कालीन सरकार द्वारा यही सम्मान प्रदान किया गया था।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-86940" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250806-WA0009.jpg" alt="" width="739" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250806-WA0009.jpg 739w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250806-WA0009-139x300.jpg 139w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250806-WA0009-473x1024.jpg 473w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250806-WA0009-709x1536.jpg 709w" sizes="(max-width: 739px) 100vw, 739px" />117 भव्य जीवों को संयम दीक्षा दे चुके हैं</strong></p>
<p>आचार्य श्री के पावन सानिध्य में कई ऐतिहासिक आयोजन संपन्न हुए हैं — जिनमें 1008 श्री बाहुबली भगवान के महामस्तकाभिषेक वर्ष 1993, 2006 और 2018 में तथा श्री महावीर स्वामी जी का महामस्तकाभिषेक वर्ष 2022 में महावीरजी क्षेत्र में प्रमुख हैं। आप अब तक 117 भव्य जीवों को संयम दीक्षा दे चुके हैं, जो आपकी साधना और प्रेरणा की अनुपम उपलब्धि है। इस ऐतिहासिक निर्णय पर जैन समाज के अध्यक्ष, महामंत्री एवं चातुर्मास समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री, सांसद, जिला पंचायत प्रमुख बंसल व अन्य जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार प्रकट किया है।</p>
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		<title>आचार्य विमर्श सागर जी ससंघ के चातुर्मास कलश की स्थापना : उत्तरप्रदेश सरकार शीघ्र देगी आचार्य श्री संघ को राज्य अतिथि का दर्जा </title>
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		<pubDate>Fri, 11 Jul 2025 13:28:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज का गुरुवार को 30 जैन संत और आर्यिकारत्न का श्री दिगंबर जैन मंदिर में चातुर्मास कलश स्थापना दिवस भव्यता से धार्मिक परंपराओं और रीतियों के अनुरूप हुआ। सहारनपुर धरा वैसे तो उस समय ही पावन हो उठी जब एक साथ 30 मयूर पिच्छिका का पदार्पण सहारनपुर में हुआ। सहारनपुर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज का गुरुवार को 30 जैन संत और आर्यिकारत्न का श्री दिगंबर जैन मंदिर में चातुर्मास कलश स्थापना दिवस भव्यता से धार्मिक परंपराओं और रीतियों के अनुरूप हुआ। सहारनपुर धरा वैसे तो उस समय ही पावन हो उठी जब एक साथ 30 मयूर पिच्छिका का पदार्पण सहारनपुर में हुआ। <span style="color: #ff0000">सहारनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सराहनपुर।</strong> आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज का गुरुवार को 30 जैन संत और आर्यिकारत्न का श्री दिगंबर जैन मंदिर में चातुर्मास कलश स्थापना दिवस भव्यता से धार्मिक परंपराओं और रीतियों के अनुरूप हुआ। सहारनपुर धरा वैसे तो उस समय ही पावन हो उठी जब एक साथ 30 मयूर पिच्छिका का पदार्पण सहारनपुर में हुआ। उनके दर्शनों का पुण्य अर्जन करने के लिए लाखों की संख्या में लोग उमड पड़े। हर कोई उनकी आरती कर पद प्रक्षालण कर पुण्य को अर्जन कर लेना चाहता था। महिलाओं ने तो नृत्य कर संतों का अभिनंदन किया। वहीं चातुर्मास कलश स्थापना दिवस पर श्रद्धालुओं की ही नहीं बल्कि नौ राज्यों से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी हुई थी। दिल्ली, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब आदि कई राज्यों से श्रद्धालु सुबह से ही आना शुरू हो गए थे और आचार्य श्री के जयकारों से वातावरण गूंजायमान हो उठा था। मुख्य कलश विमर्श सागर दिल्ली परिवार ने जबकि अन्य तीन कलश जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कुमार जैन, उपाध्यक्ष विपिन जैन और तीसरा कलश अविनाश जैन नाटी उपमंत्री ने लिया।</p>
<p>विधायक राजीव गुंबर, महापौर डॉ. अजयसिंह ने अपने पार्षदों के साथ कार्यक्रम में उपस्थिति दर्ज कराई और आचार्य श्री से आशीर्वाद लिया। बता दें कि सहारनपुर के इतिहास में यह पहली बार है जब 30 मयूर पिच्छिका एक साथ सहारनपुर के जैन मंदिर में विराजमान हैं। 30 जैन संत और आर्यिका रत्न का जैन बाग स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में चातुर्मास कलश स्थापना का भव्य कार्यक्रम का प्रारंभ जैन संत के अगवानी तथा ध्वजारोहण से हुआ। गुरु पूर्णिमा महापर्व के साथ सहारनपुर धर्मनगरी को विशाल संघ के साथ आचार्य श्री 108 विमरसागर जी (ससंघ 30 पिच्छी) का वर्ष 2025 का मंगलमय चातुर्मास कराने का महासौभाग्य प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>दो बालिकाओं ने त्याग तपस्या का संकल्प लिया</strong></p>
<p>जैनबाग प्रांगण में प्रातःकाल की मंगल बेला में गुरुपूर्णिमा महापर्व के साथ आचार्यसंघ के मंगलमय चातुर्मास की मंगलमय कलश स्थापना हुई। विशाल धर्म सभा के मध्य मंगलाचरण द्वारा सभा आरंभ हुई। चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन के साथ आचार्य गुरुवर के चरण कमलों का प्रक्षालन छिंदवाड़ा मप्र से पधारे ‘जिनागम पंथी यमन जैन’ द्वारा एवं शास्त्र भेंट दिल्ली से पधारे जिनागम पंथी टीनू जैन द्वारा किया गया। आचार्यश्री के संघ अनुशासन, वात्सल्य एवं निर्दाेष चर्या से प्रभावित होकर दिल्ली कृष्णा नगर के जैन परिवार मूलचंद जैन की सुपुत्री सिद्धि जैन एवं उपेन्द्र जैन की सुपुत्री ईशा जैन इन दोनों ने अपने घर-परिवार संसार से मोह त्यागकर आचार्य श्री की शरण में आत्म-समर्पण किया। गुरुपूर्णिमा महापर्व से ये दोनों ही बालिकाएं त्याग-साधना पूर्वक अपना आगामी जीवन सार्थक करते हुए आध्यात्मिक ऊंचाईयों को प्राप्त करेंगी।</p>
<p><strong>विधायक और मेयर ने की कलश स्थापना की अनुमोदना </strong></p>
<p>मंगल कलश स्थापना की अनुमोदना करने सहारनपुर नगर के मेयर डॉ. अजयसिंह एवं नगर विधायक राजीव गुंबर ने आचार्य श्री के चरणों में उपस्थित होकर गुरुवर के श्री चरणों में अपनी भावांजलि समर्पित की। आचार्य श्री ने दोनों ही राजनेताओं को अपना शुभाशीष प्रदान किया। नगर विधायक राजीव गुंबर ने कहा कि आचार्य श्री का आशीर्वाद मिलना ही अपने आप में बहुत बड़ा सौभाग्य है और वह इसके लिए अपने भाग्य को सराहते हैं। महापौर अजय सिंह ने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल भेंट करते हुए कहा कि आचार्य श्री अपने त्याग ज्ञान के साथ-साथ अहिंसा परमो धर्म के लिए पूरे विश्व में पूजनीय है। जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कुमार जैन ने कहा कि सहारनपुर के इतिहास में पहली बार जैन संतों का संघ सहारनपुर नगर मे आगमन हुआ है। यह निश्चित ही यहां के प्रत्येक व्यक्ति के पुण्य का फल है कि हमें अपने ज्ञान की पिपासा शांत करने का अवसर मिला है। उन्होंने बाहर से आए सभी व्यक्तियों का सभी श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया। जैन समाज के संरक्षक और भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष राकेश जैन ने कहा कि यह बहुत बड़ा सौभाग्य है कि हमें अपने चक्षुओं से जैन संतों का त्याग तपस्या उनकी जीवनचर्या देखने को मिलती है।</p>
<p><strong>महागुरु के रूप में तीर्थंकर प्रभु महावीर स्वामी को प्राप्त किया</strong></p>
<p>धर्मसभा में आचार्यश्री ने कहा कि आज गुरु पूर्णिमा महापर्व है। आज के दिन वर्तमान शासन नायक भगवान महावीर स्वामी को एक महान शिष्य इंद्रभूति गौतम की गणधर परमेष्ठी के रूप में प्राप्ति हुई थी। तीर्थकर भगवान की दिव्य वाणी मुख्य गणधर के नहीं खिरती है। वहीं दूसरी दृष्टि से देखें तो एक महा मिथ्यात्वी अज्ञानी जीव ने अपने अज्ञानता को छोड़कर, मिथ्यात्व को त्यागकर जगत् के महागुरु के रूप में तीर्थंकर प्रभु महावीर स्वामी को प्राप्त किया था। इसीलिए मैं कहता हूं कि आज तो यथार्थ में शिष्य पूर्णिमा है क्योंकि, श्आज एक भव्य प्राणी परमगुरु, महागुरु को पाकर पूर्णता को प्राप्त हुआ था। वे महागुरु महावीर स्वामी तो पूर्व से ही पूर्ण थे। आज तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी, गुरु एवं हमारे दीक्षा-शिक्षा प्रदाता आचार्यश्री विरागसागर जी के चरण कमलों में अनंत गुण भक्ति सहित वंदन आराधन करते हैं।</p>
<p><strong>इन्होंने लिया कलश स्थापना का सौभाग्य </strong></p>
<p>आचार्य संघ के मंगल चातुर्मास का मुख्य कलश राजधानी दिल्ली के अनुभव-अनुराग जैन ‘अहिंसा विमर्श परिवार’ ने एक बड़ी राशि दान में लेकर स्थापित करने का महासौभाग्य प्राप्त किया जबकि, अन्य तीन कलश पांच लाख पचपन हजार के हिसाब से जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कुमार जैन, उपाध्यक्ष विपिन जैन चांदी वाले और तीसरा कलश अविनाश जैन नाटी लेने वाले सौभाग्य शाली बने। जबकि अन्य 40 कलश 1 लाख 21 हजार के हिसाब से समाज के अन्य प्रमुख लोगों ने लिए। आचार्य श्री ने अपने चार माह के प्रवास की सीमा 50 किमी की निर्धारित की। आगामी चार माह में सहारनपुर के श्रावक-श्राविकाएं विभिन्न प्रकार से ज्ञान-तप-आराधना में संलग्न रहेंगे।</p>
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		<title>मुनि श्री शाश्वत सागर जी ट्रक की टक्कर से घायल:  साधु-संतों को राजकीय अतिथियों का दर्जा देकर उनकी सुरक्षा हो </title>
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		<pubDate>Thu, 26 Jun 2025 10:24:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री शाश्वत सागर जी महाराज का गुरुवार को सुबह 5.30 सुरेंद्रनगर से गिरनार की ओर विहार करते हुए सामने से आते हुए ट्रक से टक्कर लगने से काफी ज्यादा चोटिल हो गए हैं। दिगंबर जैन समाज ने विहार के दौरान होने वाली इस तरह की बढ़ती घटनाओं [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री शाश्वत सागर जी महाराज का गुरुवार को सुबह 5.30 सुरेंद्रनगर से गिरनार की ओर विहार करते हुए सामने से आते हुए ट्रक से टक्कर लगने से काफी ज्यादा चोटिल हो गए हैं। दिगंबर जैन समाज ने विहार के दौरान होने वाली इस तरह की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री शाश्वत सागर जी महाराज का गुरुवार को सुबह 5.30 सुरेंद्रनगर से गिरनार की ओर विहार करते हुए सामने से आते हुए ट्रक से टक्कर लगने से काफी ज्यादा चोटिल हो गए हैं। दिगंबर जैन समाज ने विहार के दौरान होने वाली इस तरह की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई है। पूर्व में भी मप्र में माताजी संघ के विहार के दौरान तेज गति से आ रहे वाहन की टक्कर से घायल हो गईं थीं।</p>
<p>मुनियों पर हमले की घटनाओं ने भी उनके विहार के लिए सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार साधु-संतों को राजकीय अतिथियों का दर्जा देकर उनकी सुरक्षा का पूर्ण बंदोबस्त करे। दिगंबर जैन समाज को भी केंद्र और राज्य सरकार से मुनिराजों और माताजी के विहार को पूर्ण सुरक्षित करवाने के लिए विशेष आग्रह करना चाहिए।</p>
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