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	<title>Shrifal Jain news &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>श्रुत पंचमी महापर्व पर इंदौर संभाग में सजेगी जिनवाणी: दिगंबर जैन महासंघ करा रहा है अनोखी प्रतियोगिताएं </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 06:42:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन श्रुत संवर्धिनी महासभा (इंदौर संभाग) द्वारा ज्ञान, सेवा और सृजनशीलता को अभिव्यक्त करने के लिए विशेष प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। द्वितीय ज्येष्ठ सुदी पंचमी 19 जून को आयोजित होने वाले इस महापर्व पर जिनवाणी माता के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए समाज के लोगों और मंदिरों को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन श्रुत संवर्धिनी महासभा (इंदौर संभाग) द्वारा ज्ञान, सेवा और सृजनशीलता को अभिव्यक्त करने के लिए विशेष प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। द्वितीय ज्येष्ठ सुदी पंचमी 19 जून को आयोजित होने वाले इस महापर्व पर जिनवाणी माता के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए समाज के लोगों और मंदिरों को एक मंच पर लाया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। जैन समाज के पावन पर्व ‘श्रुत पंचमी महापर्व’ के शुभ अवसर पर इस वर्ष कुछ बेहद अनूठा और सराहनीय होने जा रहा है। श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन श्रुत संवर्धिनी महासभा (इंदौर संभाग) द्वारा ज्ञान, सेवा और सृजनशीलता को अभिव्यक्त करने के लिए विशेष प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। द्वितीय ज्येष्ठ सुदी पंचमी 19 जून को आयोजित होने वाले इस महापर्व पर जिनवाणी माता के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए समाज के लोगों और मंदिरों को एक मंच पर लाया जा रहा है। संस्था की ओर से दो मुख्य प्रतियोगिताओं की घोषणा की गई है, जिनमें विजेताओं को नकद पुरस्कारों से नवाजा जाएगा। पहली है जिनवाणी सज्जा प्रतियोगिता जिसमें जीर्ण-शीर्ण शास्त्रों का कायाकल्प होगा। इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य पूजनीय जिनवाणी माता की सेवा करना है। इसके तहत किसी भी जीर्ण-शीर्ण (पुरानी या फटी हुई) जिनवाणी की सेवा कर, उन्हें अहिंसक एवं पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से सुंदर और सुसज्जित करना होगा। जिनवाणी सज्जा के पूर्व का फोटो, कार्य के दौरान का फोटो और कार्य पूरा होने के बाद का फोटो भेजना अनिवार्य है। साथ ही अधिकतम 2 मिनट का एक वीडियो, जिसमें जिनवाणी और उनके ग्रंथकार (आचार्य, मुनिराज) का संक्षिप्त परिचय हो। इस प्रतियोगिता के लिए प्रथम पुरस्कार 5001 रुपए, द्वितीय पुरस्कार 3001 तथा तृतीय पुरस्कार 2001 रुपए प्रदान किया जाएगा। दूसरी सुसज्जित शास्त्र भंडार प्रतियोगिता है।</p>
<p>यह प्रतियोगिता विशेष रूप से जैन मंदिरों के लिए है, जिसका उद्देश्य प्राचीन ग्रंथों, ग्रंथों और पुस्तकों के संरक्षण, सुव्यवस्था तथा स्वच्छता को प्रोत्साहित करना है।</p>
<p><strong>दोनों प्रमुख प्रतियोगिताओं के लिए आकर्षक पुरस्कार हैं </strong></p>
<p>सभी दिगंबर जैन मंदिरों को इसके लिए 5 ज़ोन में विभाजित किया गया है और प्रत्येक ज़ोन से विजेताओं का चयन होगा। मंदिरों को शास्त्र भंडार का नवीनतम फोटो, प्राचीन शास्त्रों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए किए गए कार्यों का संक्षिप्त विवरण और शास्त्र भंडार का लगभग 2 मिनट का वीडियो भेजना होगा। इस प्रतियोगिता के लिए भी प्रथम पुरस्कार 5001 (पांच पुरस्कार), द्वितीय पुरस्कार 3001रुपए (पांच पुरस्कार) के साथ ही सभी प्राप्त प्रविष्टियों को सांत्वना पुरस्कार भी दिया जाएगा। प्रतियोगिता में प्रविष्टि भेजने की अंतिम तिथि 19 जून (श्रुत पंचमी) है। वहीं जिनवाणी की मरम्मत और सजावट में केवल पर्यावरण-अनुकूल और पूरी तरह अहिंसक सामग्री का ही उपयोग अनिवार्य है। रिकॉर्डिंग के समय जिनवाणी के प्रति पूर्ण विनय और सम्मान का ध्यान रखना होगा। प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा और पुरस्कारों का वितरण आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के पावन चातुर्मास के दौरान आयोजित विशेष कार्यक्रम में किया जाएगा। इसमें शामिल होने के लिए सभी फोटो, वीडियो और प्रविष्टियां वॉट्सऐप ग्रुप के माध्यम से प्राप्त की जाएंगी। वॉट्सऐप ग्रुप से जुड़ने के लिए प्रतिभागी मुख्य संयोजकों अंजलि पंकज जैन मोदी तथा प्रीति मनीष सिंघई से से संपर्क कर सकते हैं।</p>
<p><strong>इन समाज श्रेष्ठियों ने कार्यक्रम की सफलता के लिए की अपील </strong></p>
<p>इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में कार्यक्रम अध्यक्ष इंद्रकुमार सेठी (प्रांतीय अध्यक्ष, महासभा म.प्र.), समारोह गौरव सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद गोधा, परम संरक्षक हसमुख जैन, टी.के. वेद, देवेंद्र जैन और अध्यक्ष एड. देवेंद्र जैन (डीके) सहित पूरी इंदौर संभाग की टीम जुटी हुई है। आयोजकों ने सभी समाजजनों और मंदिर कमेटियों से इस ज्ञान-भक्ति के महायज्ञ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए समाजसेवी नवीन गोधा, सामाजिक संसद के महामंत्री हर्ष जैन, सामाजिक संसद कोषाध्यक्ष विजय पाटोदी, परम संरक्षक देवेंद्र जैन जनता, कार्याध्यक्ष शरद पाणोत, कोषाध्यक्ष पंकज जैन पिंकी, महामंत्री रजनीकांत गांधी ने समाजजनों का आह्वान किया है।</p>
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		<title>ओमीषा जैन’ ने जेईई एडवांस की परीक्षा में बनाया खास मुकाम: विशेष स्थान प्राप्त करके पुष्प परिवार का गौरव बढ़ाया  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/omisha_jain_has_achieved_a_remarkable_milestone_in_the_jee_advanced_examination/</link>
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		<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 06:41:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[डॉ. अंकुर जैन एवं डॉ. मेघा जैन की सुपुत्री ओमीषा जैन’ ने जेईई एडवांस की प्रतियोगी परीक्षा में संपूर्ण महाराष्ट्र में द्वितीय स्थान एवं विदर्भ में छात्राओं में 99.99 अंक प्राप्त करके प्रथम स्थान प्राप्त करने का गौरव प्राप्त किया है। इसी प्रकार सुपुत्र आगम जैन’ ने 99.81 अंक प्राप्त करके विशेष स्थान प्राप्त करके [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>डॉ. अंकुर जैन एवं डॉ. मेघा जैन की सुपुत्री ओमीषा जैन’ ने जेईई एडवांस की प्रतियोगी परीक्षा में संपूर्ण महाराष्ट्र में द्वितीय स्थान एवं विदर्भ में छात्राओं में 99.99 अंक प्राप्त करके प्रथम स्थान प्राप्त करने का गौरव प्राप्त किया है। इसी प्रकार सुपुत्र आगम जैन’ ने 99.81 अंक प्राप्त करके विशेष स्थान प्राप्त करके पुष्प परिवार का गौरव बढ़ाया है। विगत दसवीं कक्षा में भी आप दोनों ने प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करके सभी का बहुमान बढ़ाया था। <span style="color: #ff0000">टीकमगढ़ से पढ़िए, यह विशेष खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> टीकमगढ़।</strong> डॉ. अंकुर जैन एवं डॉ. मेघा जैन की सुपुत्री ओमीषा जैन’ ने जेईई एडवांस की प्रतियोगी परीक्षा में संपूर्ण महाराष्ट्र में द्वितीय स्थान एवं विदर्भ में छात्राओं में 99.99 अंक प्राप्त करके प्रथम स्थान प्राप्त करने का गौरव प्राप्त किया है। इसी प्रकार सुपुत्र आगम जैन’ ने 99.81 अंक प्राप्त करके विशेष स्थान प्राप्त करके पुष्प परिवार का गौरव बढ़ाया है। विगत दसवीं कक्षा में भी आप दोनों ने प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करके सभी का बहुमान बढ़ाया था। उल्लेखनीय है कि प्रतिष्ठा पितामह पंडित गुलाबचंद्र पुष्प की ओर से समाज में विशेष धर्म प्रभावना के साथ नवीन मंदिर निर्माण पंचकल्याणक एवं गजरथ महोत्सव के माध्यम से इतिहास बनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। इसी परंपरा को आगे बढ़ते हुए प्रतिष्ठा चूड़ामणि ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत भैया जी ने भी नवीन जिनालय एवं पंच कल्याणक का इतिहास बनाया है। आपके परिवार जनों में इंजीनियर शिखरचंद्र, डॉ. उत्तमचंद्र, राजकुमार, डॉ. प्रदीप कुमार ने अपने पुष्प परिवार को समाज में विशेष स्थान दिलाया है। अगली पीढ़ी में सभी बच्चों ने विशेष गौरव में स्थान बनाते हुए अपने धार्मिक संस्कारों को संरक्षित किया है। देव दर्शन, पूजन, स्वाध्याय एवं महाव्रतियों के प्रति आप विशेष रूप से समर्पित हैं।</p>
<p><strong>आगामी योजना में आईआईटी में विशेष प्रोजेक्ट का टारगेट </strong></p>
<p>भविष्य में आप दोनों आईआईटी क्षेत्र में विशेष प्रोजेक्ट पर कार्य करने का विचार बना रहे हैं, जिससे इनकी पूरे विश्व में एक विशेष पहचान बने। आप दोनों जिन शासन की प्रभावना हेतु समर्पित हैं और प्रतिष्ठा पितामह पुष्पजी की गौरव गरिमा को बनाए रखते हुए निरंतर उन्नति को प्राप्त हो रहे हैं। पुष्प परिवार, श्री नवागढ़ गुरुकुलम, दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र नवागढ़ एवं सभी संस्थाओं की ओर से आप दोनों को हार्दिक बधाई शुभकामनाएं दी जा रही हैं। आप इसी प्रकार आगे बढ़ते हुए अपने धर्म,परिवार, समाज एवं देश का गौरव बढ़ाएं यही मंगल भावना है।</p>
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		<title>आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज का मिला आशीर्वाद: 25 दिवसीय 5100 किमी लंबी श्री नेमि गिरनार धर्म यात्रा को लेकर विश्व जैन संगठन का अभियान  </title>
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		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 11:53:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन तीर्थ वीरोदय, निर्माण विहार, दिल्ली में विराजमान आचार्यश्री सौरभ सागर जी महाराज के सानिध्य में 5 जून को आयोजित मंशा पूर्ण विधान में आचार्य श्री ने संगठन के पदाधिकारियों को गिरनार धर्म यात्रा की सफलता के लिए मंगल आशीर्वाद दिया और समस्त समाज से प्रतिदिन देव दर्शन और तीर्थंकरों के मोक्ष कल्याणक पर गिरनार [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन तीर्थ वीरोदय, निर्माण विहार, दिल्ली में विराजमान आचार्यश्री सौरभ सागर जी महाराज के सानिध्य में 5 जून को आयोजित मंशा पूर्ण विधान में आचार्य श्री ने संगठन के पदाधिकारियों को गिरनार धर्म यात्रा की सफलता के लिए मंगल आशीर्वाद दिया और समस्त समाज से प्रतिदिन देव दर्शन और तीर्थंकरों के मोक्ष कल्याणक पर गिरनार जी और शिखर जी वंदना के लिए मार्गदर्शन दिया। <span style="color: #ff0000">नईदिल्ली से पढ़िए, आकाश जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नईदिल्ली।</strong> जैन तीर्थ वीरोदय, निर्माण विहार, दिल्ली में विराजमान आचार्यश्री सौरभ सागर जी महाराज के सानिध्य में 5 जून को आयोजित मंशा पूर्ण विधान में आचार्य श्री ने संगठन के पदाधिकारियों को गिरनार धर्म यात्रा की सफलता के लिए मंगल आशीर्वाद दिया और समस्त समाज से प्रतिदिन देव दर्शन और तीर्थंकरों के मोक्ष कल्याणक पर गिरनार जी और शिखर जी वंदना के लिए मार्गदर्शन दिया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजय जैन ने लक्ष्मी नगर, शकरपुर एवं निर्माण विहार मंदिर कमेटियों से पूर्ववत गिरनार यात्रा से पूर्व जागरूकता के लिए रैली निकालने और समस्त समाज से आगामी 20 जुलाई को भगवान नेमीनाथ के मोक्ष कल्याणक पर गिरनार जी वंदना करने के लिए निवेदन किया।</p>
<p>भारतवर्षीय तीर्थ क्षेत्र कमेटी दिल्ली अंचल अध्यक्ष प्रद्युम्न जैन ने गुजरात तीर्थ क्षेत्र कमेटी द्वारा सभी जैन श्रद्धालुओं के गिरनार में रहने एवं भोजन आदि कीे पूर्ववत सुविधा दिए जाने की जानकारी दी। सभा में संगठन के सम्मानित सदस्य अनुज जैन (लक्ष्मी नगर), अभिषेक जैन पीएनबी, संगठन की लक्ष्मी नगर शाखा से अतुल जैन, अमित जैन उपस्थित रहें। प्रसिद्ध मंच संचालक सुरेंद्र जैन मिंटू ने संगठन द्वारा शिखर जी की पवित्रता के आंदोलन और गत वर्ष गिरनार धर्म पद यात्रा की जानकारी दी और सभी से यात्रा में सहयोग और सहभागिता करने की अपील की।</p>
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		<title>कमल पोखरी में पत्रकार सम्मेलन साहित्योत्सव में विद्वतजनों ने रखे विचार : नेपाल-भारत मैत्री यात्रा अंतरराष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी संपन्न  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/scholars_shared_their_views_at_the_literary_festival_held_at_kamal_pokhari/</link>
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		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 05:53:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अथाई मीडिया इंटरनेशनल और अखिल भारतीय जैन पत्र संपादक संघ की ओर से 10 दिवसीय नेपाल भारत मैत्री यात्रा के तहत 24 मई से 2 जून तक नेपाल जैन परिषद के तत्वावधान में कमल पोखरी स्थित भगवान महावीर जैन निकेतन में अंतरराष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी और पत्रकार सम्मेलन हुआ। इसमें बड़ी संख्या में विद्वानों ने भाग [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अथाई मीडिया इंटरनेशनल और अखिल भारतीय जैन पत्र संपादक संघ की ओर से 10 दिवसीय नेपाल भारत मैत्री यात्रा के तहत 24 मई से 2 जून तक नेपाल जैन परिषद के तत्वावधान में कमल पोखरी स्थित भगवान महावीर जैन निकेतन में अंतरराष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी और पत्रकार सम्मेलन हुआ। इसमें बड़ी संख्या में विद्वानों ने भाग लिया। <span style="color: #ff0000">काठमांडू से पढ़िए,राजीव सिंघई मोनू यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> काठमांडू।</strong> अथाई मीडिया इंटरनेशनल और अखिल भारतीय जैन पत्र संपादक संघ की ओर से 10 दिवसीय नेपाल भारत मैत्री यात्रा के तहत 24 मई से 2 जून तक नेपाल जैन परिषद के तत्वावधान में कमल पोखरी स्थित भगवान महावीर जैन निकेतन में अंतरराष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी और पत्रकार सम्मेलन नेपाल जैन परिषद के अध्यक्ष सुशील जैन की अध्यक्षता तथा आचार्य डॉ. लक्ष्मण पंथी, कार्यकारी निदेशक नेपाल सरकार संस्कृति पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुख्य आतिथ्य में हुआ। अभा पोस्ट संपादक संघ के मीडिया प्रभारी डॉ. जयेंद्र के अनुसार विशिष्ट अतिथि के रूप में भगवान महावीर जैन निकेतन के अध्यक्ष लोकमान्य गोलछा, ज्योतिकुमार बेगानी(पूर्व अध्यक्ष नेपाल जैन परिषद), दिनेशकुमार नौलख(अध्यक्ष नेपाल श्वेतांबर तेरापंथ सभा), फूलकुमार लालवानी (अध्यक्ष भगवान महावीर जैन निकेतन ) और ज्योतिषविद् पिनारका मिस्त्री-मुंबई की उपस्थिति ने समारोह में चार चांद लगा दिए। स्थानीय समाज सेवियों में सुभाष सेठी, पंकज जैन और सुमित जैन की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। समारोह में अथाई मीडिया इंटरनेशनल के अध्यक्ष डॉ. जयेंद्रकीर्ति स्वामी जी, संस्था के संस्थापक और निदेशक डॉ.अखिल बंसल, जैन पत्र संपादक संघ के अध्यक्ष जगदीशप्रसाद जैन एवं कार्याध्यक्ष अनिल जैन आईपीएस के साथ समागत अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। स्वागताध्यक्ष वीरेन्द्र सरावगी ने सभी आगत अतिथियों का रुद्राक्ष की माला पहनाकर और दुपट्टा उड़ाकर सम्मान किया। डॉ. अल्पना जैन ने सभी का परिचय प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ. जयेंद्र कीर्ति जी द्वारा नेपाली भाषा में अनूदित आचार्य श्री विद्यासागर जी की कृति ‘मूकमाटी’ व आचार्य विशुद्ध सागर जी की कृति ‘वस्तुत्व</p>
<p>महाकाव्य’ के साथ प्राकृत और संस्कृत के अध्येता विद्वान डॉ. श्रीयांशकुमार की कृति ‘जोग सारो सहज योग ख्याति संस्कृत टीका’ का विमोचन मंचासीन अतिथियों ने किया। डॉ. अखिल बंसल द्वारा संपादित पाक्षिक पत्र समन्वय वाणी के नेपाल यात्रा विशेषांक तथा जगदीशप्रसाद द्वारा संपादित जैसवाल जैन जागरण के नवीन अंक का विमोचन भी अतिथियों ने किया।</p>
<p><strong>अथाई मीडिया इंटरनेशनल का परिचय दिया</strong></p>
<p>विश्व के इतिहास में यह पहला अवसर होगा, जब भारत के बाहर अन्य देश में इस प्रकार की संगोष्ठी, पत्रकार सम्मेलन और साहित्योत्सव जैसा कार्यक्रम एक साथ कराया गया हो। नेपाल जैन परिषद के सुमित जैन ने कुशलता पूर्वक मंच संचालन किया। संगठन के संस्थापक और निदेशक डॉ. अखिल बंसल ने विस्तार से अथाई मीडिया इंटरनेशनल का परिचय दिया। संगोष्ठी में उपस्थित वक्ताओं ने दिए गए विषयों पर अपने सारगर्भित विचार रखे। विद्वत् संगोष्ठी का संचालन डॉ.र राजीव प्रचंडिया संपादक जय कल्याण श्री ने किया। डॉ. जयेंद्र कीर्ति स्वामी जी ने मूकमाटी एवं वस्तुत्व महाकाव्य पर प्रकाश डालते हुए अथाई मीडिया इंटरनेशनल से सभी को जुड़ने का आह्वान किया। समारोह में सभी को प्रशस्ति पत्र और पशुपतिनाथ मंदिर का सुंदर मोमेंटो भेंट किया गया।</p>
<p><strong>भगवान बुद्ध के जन्म स्थान पर श्रद्धा सुमन अर्पित </strong></p>
<p>27 मई की रात्रि में स्वामी जयेंद्र कीर्ति जी की अध्यक्षता तथा पंकज व सुमति के आतिथ्य में साहित्योत्सव आयोजित किया गया। जिसका संचालन स्वाति ‘सरू’ जैसलमेरिया जोधपुर ने किया। साहित्योत्सव में उपस्थित साहित्यकारों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया। समागत अतिथियों ने भाव-विभोर होकर सभा को संबोधित किया और इस प्रकार के कार्यक्रम के आयोजन के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। तीन दिन तक काठमांडू के दर्शनीय स्थलों का भ्रमण करते हुए दो दिवस पोखरा के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया। 31 मई को लुम्बनी में भगवान बुद्ध के जन्म स्थान पर जाकर सभी आगंतुकों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।</p>
<p><strong>पांच जैन तीर्थंकरों की जन्म भूमि पर किए प्रकट भाव </strong></p>
<p>1 और 2 जून को सभी ने यात्रा संघ के साथ अयोध्या में राम मंदिर, हनुमानगढी और पांच जैन तीर्थंकरों की जन्म भूमि पर जाकर श्रद्धा भाव प्रकट किए। रत्नपुरी और श्रावस्ती में भी भगवान धर्मनाथ व भ.संभवनाथ जी के जन्म कल्याणक क्षेत्र के दर्शन किए। स्मरण रहे कि 24 मई को भगवान मल्लिनाथ व भगवान नमिनाथ की जन्मभूमि मिथिलापुरी के साथ सभी ने सीतामढ़ी व जनकपुरी जाकर भगवान श्री राम वास सीता माता के प्रति श्रद्धा भाव प्रकट किया। इस प्रकार अथाई मीडिया इंटरनेशनल की ओर से 10 दिवसीय विदेश यात्रा का समापन हुआ। इस यात्रा का संयोजन संगठन के संस्थापक और निर्देशक डॉ. अखिल बंसल के नेतृत्व में किया गया। नेपाल से डॉ. लक्ष्मण पंथी को संगठन में कार्याध्यक्ष, सुमित जैन को विदेश प्रभार और सुशील सेठी को नेपाल का समन्वयक मनोनीत किया गया। दल में 44 सदस्य थे।</p>
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		<title>तीर्थ संरक्षिणी महासभा के विस्तार पर हुई लंबी चर्चा : जिला प्रभारियों की नियुक्ति की, समाजजनों ने दी बधाई </title>
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		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 10:30:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत वर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा मप्र की बैठक में जिला प्रभारी की नियुक्तियां हुई। इंदौर रीज़न के शेष जिलों के प्रभारी की नियुक्तियां भी शीघ्र की जाएगी। जिसमें खंडवा, नीमच, शाजापुर, रतलाम आदि जिलों को शामिल किया गया है। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। भारत वर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा जो [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारत वर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा मप्र की बैठक में जिला प्रभारी की नियुक्तियां हुई। इंदौर रीज़न के शेष जिलों के प्रभारी की नियुक्तियां भी शीघ्र की जाएगी। जिसमें खंडवा, नीमच, शाजापुर, रतलाम आदि जिलों को शामिल किया गया है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>इंदौर।</strong> भारत वर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा जो कि कई वर्षाे से जैन धर्म के प्राचीन तीर्थाे मंदिरों के जीर्णाेद्धार के कार्य को संपादित कर रही है। इसके प्रादेशिक पदाधिकारी की बैठक कार्याध्यक्ष तल्लीन बड़जात्या के निवास पर मंगलाचरण के साथ संपन्न हुई। निर्ग्रन्थ सेंटर आफ आर्कियोलॉजी इंदौर के पुरातत्व संयोजक एवं वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि इस बैठक में महासभा के विस्तार के संबंध में चर्चा हुई। जिसके तहत इंदौर रीज़न के अंतर्गत सभी जिलों के प्रभारी की नियुक्ति महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष टीके वेद की अनुशंसा एवं प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र सेठी की सहमति से की गई। जिसके अंतर्गत उज्जैन जिला प्रभारी के रूप में प्रदीप झांझरी, देवास से अरविंद पाणोत, मंदसौर से भरत कोठारी, धार से अजय लुहाड़िया, झाबुआ से रमेश डोसी, खरगोन से पंकज जटाले, बुरहानपुर से विमल पाटनी, बड़वानी से राजेश काला, राजगढ़ ब्यावरा से ओम जैन (सारंगपुर) को नियुक्त किया गया। शीघ्र ही सभी जिला प्रभारी की अनुशंसा से तहसील गांव स्तर पर भी नियुक्तियां की जाएगी।</p>
<p>सभी जिला प्रभारी की नियुक्ति पर महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष टीके वेद, प्रदेशाध्यक्ष देवेंद्र सेठी, कार्याध्यक्ष तल्लिन बड़जात्या, महामंत्री कैलाश लुहाड़िया, कोषाध्यक्ष राकेश पाटनी, ओम पाटोदी पुरातत्व संयोजक, पवन पाटोदी अध्यक्ष इंदौर रीज़न आदि पदाधिकारियों ने बधाई दी। इंदौर रीज़न के शेष जिलों के प्रभारी की नियुक्तियां भी शीघ्र की जाएगी। जिसमें खंडवा, नीमच, शाजापुर, रतलाम आदि जिलों को शामिल किया गया है।</p>
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		<title>उदयपुर में गूंजी प्राकृत वाणी ने शिविरार्थियों को दिया अकूत ज्ञान : 20 मंदिरों के प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में हुआ समापन समारोह  </title>
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		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:32:23 +0000</pubDate>
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<p><strong>प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में उदयपुर के 20 मंदिरों में आयोजित प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का सामूहिक समापन एवं सम्मान समारोह विश्वविद्यालय के बप्पा रावल सभागार में आचार्यश्री सुनीलसागर जी के पावन आशीर्वाद से हुआ। <span style="color: #ff0000">उदयपुर से पढ़िए, रत्नेश जैन /राजेश रागी बकस्वाहा की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>उदयपुर</strong>। प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में उदयपुर के 20 मंदिरों में आयोजित प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का सामूहिक समापन एवं सम्मान समारोह विश्वविद्यालय के बप्पा रावल सभागार में आचार्यश्री सुनीलसागर जी के पावन आशीर्वाद से हुआ। समारोह का शुभारंभ विश्वविद्यालय के डीन प्रो. नीरज शर्मा, सकल दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारियों एवं विशिष्ट अतिथियों के दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। विभिन्न जैन पाठशालाओं के विद्यार्थियों ने प्राकृत भाषा आधारित मंगलाचरण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं नाट्य मंचन कर उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। मुख्य अतिथि प्रो. नीरज शर्मा ने अपने उद्बोधन में प्राकृत भाषा को भारतीय भाषाओं की आधारशिला बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर ऐसे आयोजन भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>
<p><strong>देश के 108 स्थानों पर प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर किए जाने की घोषणा</strong></p>
<p>शिविर के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. आशीष जैन आचार्य ने बताया कि शिविर के माध्यम से प्राकृत भाषा, जैन संस्कार, नीति ग्रंथों एवं भारतीय संस्कृति का शिक्षण प्रदान किया गया, जिसमें उदयपुर के लगभग 1100 शिविरार्थियों ने सहभागिता की। शिविर संयोजक रितेश जैन ने बताया कि समारोह का शुभारंभ सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत, महामंत्री सुरेश पद्मावत, विश्वविद्यालय के डीन प्रोफेसर नीरज शर्मा, डॉ. जिनेंद्र जैन, डॉ. ज्योति बाबू शास्त्री, डॉ. सुमत जैन, डॅा. शैलेष जैन, धरणेन्द्र जैन शास्त्री, कमलकुमार जैन एवं बी.एल. गोदावत सहित आमंत्रित अतिथियों ने किया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट शिविरार्थियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया तथा स्थानीय संयोजकों एवं शिक्षकों का अभिनंदन भी किया गया। आगामी वर्ष देशभर के 108 स्थानों पर प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर किए जाने की घोषणा भी की गई।</p>
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		<title>श्रावक-श्राविकाओं को प्रतिदिन छह आवश्यक कर्म करना जरूरी : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्रावक के षट् आवश्यक कर्त्तव्य का किया विवेचन  </title>
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		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:29:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्वमति जी की समाधि स्थली श्री चंद्रप्रभ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधु सहित ग्रीष्म कालीन वाचना कर रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को श्रावक के षट् आवश्यक कर्त्तव्य में श्रावक की परिभाषा का विवेचन किया। जयपुर से पढ़िए, डॉ. राजेश पंचोलिया की खबर&#8230; जयपुर। गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्वमति जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्वमति जी की समाधि स्थली श्री चंद्रप्रभ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधु सहित ग्रीष्म कालीन वाचना कर रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को श्रावक के षट् आवश्यक कर्त्तव्य में श्रावक की परिभाषा का विवेचन किया। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, डॉ. राजेश पंचोलिया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्वमति जी की समाधि स्थली श्री चंद्रप्रभ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधु सहित ग्रीष्म कालीन वाचना कर रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को श्रावक के षट् आवश्यक कर्त्तव्य में श्रावक की परिभाषा का विवेचन किया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि श्रा अर्थात श्रद्धावान, व मतलब विवेकवान क से आशय क्रियावान होता हैं। देव पूजा गुरुपास्ति, स्वाध्यायः संयमस्तपः। दानं चेति गृहस्थानां, षट्‌कर्माणि दिने-दिने।। की विवेचना में बताया कि श्रावक-श्राविकाओं को प्रतिदिन देवपूजा, गुरु-उपासना, स्वाध्याय, संयम तप और दान के भेद से गृहस्थों के प्रतिदिन करने योग्य छह आवश्यक कर्म हैं। देवपूजा ,जिनेंद्र देव की भक्ति, स्तुति, वंदना और अष्टद्रव्यों से पूजन पूर्वक जो गुणानुवाद किया जाता है, उसे देवपूजा कहते हैं। यह देवपूजा नित्यमह पूजा, चतुर्मुख पूजा, सर्वतोभद्रपूजा, कल्पद्रुम पूजा और इन्द्रध्वज पूजा पांच प्रकार की होती हैं।</p>
<p><strong>स्वयं का स्वयं के द्वारा अध्ययन</strong></p>
<p>सुरेश सबलावत,श्री भागचंद चूड़ीवाल ने कहा कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने गुरु-उपासना की विवेचना में समझाया है। उन्होंने कहा कि निर्ग्रंथ मुद्राधारी दिगंबर गुरुओं की स्तुति, वंदना करना और अष्ठद्रव्य से उनकी पूजा करना, उनका धर्माेपदेश सुनना आदि गुरु उपासना है। मुनिराज को नवधाभक्ति से शुद्ध आहार दान, औषध दान, वसतिका दान और शास्त्र दानादि करना, उनकी वैय्यावृत्य करना, उनकी ज्ञान वृद्धि के साधन जुटाना और उनकी चर्चा में सहायक बनना ये सब गुरुपास्ति (गुरु उपासना) के अंग है। स्वाध्याय ‘स्व’ यानी स्वयं और ‘अध्याय’ यानी अध्ययन करना अर्थात् स्वयं का स्वयं के द्वारा अध्ययन।</p>
<p><strong>स्वाध्याय के पांच भेद कह गए </strong></p>
<p>आत्म स्वरूप को उपलब्ध कराने में सहायक शास्त्रों का अध्ययन भी स्वाध्याय है। अपनी बुद्धि (क्षयोपशम) अनुसार जिनेंद्र देव की स्याद्वादमय अनेकांत वाणी पढ़ना-पढ़ाना, सुनना सुनाना चिंतन मनन करना भी स्वाध्याय है। स्वाध्याय को तप भी कहा जाता है। स्वाध्याय के पांच भेद कह गए हैं। स्वाध्याय से ज्ञान का विकास, कषाय की मंदता ,वैराग्य में वृद्धि ,पुण्य की प्राप्ति ,कर्मों की निर्जरा ,धर्म की प्रभावना श्रुत परंपरा का विकास, संदेह का निवारण, सम्यकज्ञान की प्राप्ति और परिणाम में निर्मलता आती है।</p>
<p>प्रातः श्रीजी के अभिषेक के बाद ललिता चीना मयंक पाटनी परिवार ने आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर भव्य पूजन किया। दोपहर को श्री चंद्र प्रभ जिनालय में 64 रिद्धि विधान की पूजा हुई।</p>
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		<title>उदयपुर में गूंजी प्राकृत वाणी ने शिविरार्थियों को दिया अकूत ज्ञान : 20 मंदिरों के प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में हुआ समापन समारोह  </title>
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		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:02:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में उदयपुर के 20 मंदिरों में आयोजित प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का सामूहिक समापन एवं सम्मान समारोह विश्वविद्यालय के बप्पा रावल सभागार में आचार्यश्री सुनीलसागर जी के पावन आशीर्वाद से हुआ। उदयपुर से पढ़िए, रत्नेश जैन /राजेश रागी बकस्वाहा की यह रिपोर्ट&#8230; उदयपुर। प्राकृत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में उदयपुर के 20 मंदिरों में आयोजित प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का सामूहिक समापन एवं सम्मान समारोह विश्वविद्यालय के बप्पा रावल सभागार में आचार्यश्री सुनीलसागर जी के पावन आशीर्वाद से हुआ। <span style="color: #ff0000">उदयपुर से पढ़िए, रत्नेश जैन /राजेश रागी बकस्वाहा की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>उदयपुर।</strong> प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में उदयपुर के 20 मंदिरों में आयोजित प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर का सामूहिक समापन एवं सम्मान समारोह विश्वविद्यालय के बप्पा रावल सभागार में आचार्यश्री सुनीलसागर जी के पावन आशीर्वाद से हुआ। समारोह का शुभारंभ विश्वविद्यालय के डीन प्रो. नीरज शर्मा, सकल दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारियों एवं विशिष्ट अतिथियों के दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। विभिन्न जैन पाठशालाओं के विद्यार्थियों ने प्राकृत भाषा आधारित मंगलाचरण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं नाट्य मंचन कर उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। मुख्य अतिथि प्रो. नीरज शर्मा ने अपने उद्बोधन में प्राकृत भाषा को भारतीय भाषाओं की आधारशिला बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर ऐसे आयोजन भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>
<p><strong>देश के 108 स्थानों पर प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर किए जाने की घोषणा</strong></p>
<p>शिविर के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. आशीष जैन आचार्य ने बताया कि शिविर के माध्यम से प्राकृत भाषा, जैन संस्कार, नीति ग्रंथों एवं भारतीय संस्कृति का शिक्षण प्रदान किया गया, जिसमें उदयपुर के लगभग 1100 शिविरार्थियों ने सहभागिता की। शिविर संयोजक रितेश जैन ने बताया कि समारोह का शुभारंभ सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत, महामंत्री सुरेश पद्मावत, विश्वविद्यालय के डीन प्रोफेसर नीरज शर्मा, डॉ. जिनेंद्र जैन, डॉ. ज्योति बाबू शास्त्री, डॉ. सुमत जैन, डॅा. शैलेष जैन, धरणेन्द्र जैन शास्त्री, कमलकुमार जैन एवं बी.एल. गोदावत सहित आमंत्रित अतिथियों ने किया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट शिविरार्थियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया तथा स्थानीय संयोजकों एवं शिक्षकों का अभिनंदन भी किया गया। आगामी वर्ष देशभर के 108 स्थानों पर प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर किए जाने की घोषणा भी की गई।</p>
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		<title>वस्तुत्व महाकाव्य में जैन दर्शन पर ममता खासगीवाला को डॉक्टरेट उपाधि : पारसी कॉलेज मुंबई में 30 मई को हुआ दीक्षांत समारोह </title>
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		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 09:36:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वस्तुत्व महाकाव्य में जैन दर्शन पर नगर के कंचनबाग में निवासरत ममता खासगीवाला की अथक मेहनत रंग लाई और उन्हें इस शोध ग्रंथ पर डॉक्टरेट की मानद उपाधि से 30 मई को नवाजा गया है। जैन फिलॉसॉफी इन वस्तुत्व महाकाव्य की पूर्णता पर मुंबई के पारसी कॉलेज में भव्य दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इंदौर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वस्तुत्व महाकाव्य में जैन दर्शन पर नगर के कंचनबाग में निवासरत ममता खासगीवाला की अथक मेहनत रंग लाई और उन्हें इस शोध ग्रंथ पर डॉक्टरेट की मानद उपाधि से 30 मई को नवाजा गया है। जैन फिलॉसॉफी इन वस्तुत्व महाकाव्य की पूर्णता पर मुंबई के पारसी कॉलेज में भव्य दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। वस्तुत्व महाकाव्य में जैन दर्शन पर नगर के कंचनबाग में निवासरत ममता खासगीवाला की अथक मेहनत रंग लाई और उन्हें इस शोध ग्रंथ पर डॉक्टरेट की मानद उपाधि से 30 मई को नवाजा गया है। जैन फिलॉसॉफी इन वस्तुत्व महाकाव्य की पूर्णता पर मुंबई के पारसी कॉलेज में भव्य दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Ph.D.) की डिग्री के लिए ममता खासगीवाला को इसकी प्रेरणा आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज से मिली। उनके लिखे वस्तुत्व महाकाव्य को पढ़ा तो लगा कि इसमें कुछ विशेष किया जा सकता है। बस फिर क्या था और उन्हीं के आशीर्वाद, मुनि श्री सूरज सागर जी, मुनि श्री आदित्य सागर जी के परम आशीर्वाद और सहयोग से इस शोध ग्रंथ को देश के जाने-माने विद्वान गणितज्ञ डॉ. अनुपम जैन के सानिध्य में पूरा किया। डॉ. अनुपम जैन ने मेरा बहुत सहयोग किया। विषय के हर पहलुओं का विश्लेषण कर बताया। ममता ने श्रीफल जैन न्यूज को बताया कि इस ग्रंथ को तैयार करने में काफी मेहनत और सैकड़ों संदर्भित ग्रंथों का निचोड़ लिया गया। उन्होंने बताया कि पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूर्ण करते हुए वस्तुत्व महाकाव्य में जैन दर्शन शोध प्रबंध को बड़ी मेहनत से तैयार किया गया। जैन फिलॉसॉफी इन वस्तुत्व महाकाव्य ओपन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी फॉर कॉम्प्लीमेंट्री मेडिसिन में मार्च 2026 में कंप्लीट कर प्रस्तुत किया गया था। डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Ph.D.) की डिग्री के लिए पारसी कॉलेज (Zoroastrian College), मुंबई में इसे रखा गया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-107631" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-1536x1021.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-990x658.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-1320x878.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006.jpg 1600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>सामाजिक कार्य और सेवा प्रकल्पों के निमित्त पुरस्कार </strong></p>
<p>ऑल इंडिया शाह बेहराम बाग सोसाइटी के तत्वावधान में संचालित (वैज्ञानिक और शैक्षिक अनुसंधान के लिए) संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद के साथ विशेष सलाहकार स्थिति में एक गैर-सरकारी संगठन के माध्यम से यह ग्रंथ पूर्णता पा सका। उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से ही आध्यात्म की ओर रुझान था। नित्य मंदिर जाना और दर्शन पूजन किया जाता था। विवाह के बाद ससुराल में भी पति, बच्चों और बहुओं के प्रोत्साहन से ही मैं इस महती कार्य को कर पाई। आज खुशी है कि मैं इस शोध ग्रंथ को पूरा कर पाई। उन्होंने बताया कि बचपन से ही लेखन का भी शौक रहा। यहां इंदौर में उनके पति ने भी उनकी इस रुचि को आगे बढ़ाया और परिवार के सहयोग से ही लेखन की प्रक्रिया को निरंतर बनाए रखने के लिए हौसला मिला। इसी के चलते आज यह ग्रंथ तैयार हुआ और इस पर उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्राप्त हुई। उन्हें कई अवसरों पर सामाजिक कार्य और सेवा प्रकल्पों को करने के निमित्त पुरस्कार और सम्मानों से नवाजा गया है। उन्होंने बताया कि यह गर्भ संस्कार और दिन बुजुर्गों को धर्म ग्रंथों का श्रवण करवाने में भी पीछे नहीं रहती हैं। इसके लिए बाकायदा एक समूह तैयार किया गया है।</p>
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		<title>पवन घुवारा ने बनाए तीन विश्व रिकॉर्ड समाज ने सराहा : गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज, यूके से मिला सर्वश्रेष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता का खिताब </title>
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		<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:34:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सामाजिक जागरूकता और नागरिक सक्रियता के क्षेत्र में 24 वर्षों के निरंतर संघर्ष के बाद मप्र के टीकमगढ़ जिले के निवासी समाजसेवी पवन घुवारा भूमिपुत्र ने एक साथ तीन विश्व रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच दिया है। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज किया गया है। बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सामाजिक जागरूकता और नागरिक सक्रियता के क्षेत्र में 24 वर्षों के निरंतर संघर्ष के बाद मप्र के टीकमगढ़ जिले के निवासी समाजसेवी पवन घुवारा भूमिपुत्र ने एक साथ तीन विश्व रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच दिया है। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज किया गया है। <span style="color: #ff0000">बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बकस्वाहा।</strong> सामाजिक जागरूकता और नागरिक सक्रियता के क्षेत्र में 24 वर्षों के निरंतर संघर्ष के बाद मप्र के टीकमगढ़ जिले के निवासी समाजसेवी पवन घुवारा भूमिपुत्र ने एक साथ तीन विश्व रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच दिया है। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज किया गया है। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स एक विश्व रिकॉर्ड प्रमाणन संस्था है, जो असाधारण उपलब्धियों को दर्ज करती है। यह गौरवशाली उपलब्धि एक दो नही तीन विश्व रिकॉर्ड हैं। गोल्डन बुक द्वारा प्रमाणित रिकॉर्ड के अनुसार भूमिपुत्र ने सामाजिक मुद्दों की 8,988 कतरनें संग्रहित कीं और सार्वजनिक समस्याओं पर 3,287 पत्र अधिकारियों को भेजे तथा पत्राचार के जवाब में 1,021 पावती पत्र संग्रहित किए।</p>
<p>गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय सम्मान भूमिपुत्र पवन घुवारा का नाम लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज संस्था ने 15 अप्रैल को यूनाइटेड किंगडम द्वारा सर्वश्रेष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता के रिकॉर्ड से सम्मानित किया है। 24 साल के संघर्ष में कुल 13 हजार 296 दस्तावेज़ों का यह संग्रह दिखाता है कि पवन घुवारा भूमिपुत्र ने न केवल मुद्दे उठाए, बल्कि उनका प्रलेखन किया और शासन-प्रशासन से संवाद भी कायम रखा। यह संग्रह सामाजिक-राजनीतिक इतिहास का जीवंत दस्तावेज बन गया है।</p>
<p><strong>ज़मीनी हकीकत के बीच पुल बनाने की कोशिश </strong></p>
<p>स्याही से इंकलाब तक बेहतर कल का सपना देखने वाली आंखों का दस्तावेज़ हैं। ये पत्राचार किसी एक दफ्तर तक सीमित नहीं रहा। इसने सरकार की नीतियों और ज़मीनी हकीकत के बीच पुल बनाने की कोशिश की। हर पहलू पर सरकार का ध्यान खींचा गया। ये पत्र बताते हैं कि वित्तीय समावेशन की योजनाएं गांव तक पहुंचते-पहुंचते दम क्यों तोड़ देती रेलवे पर लिखे पत्र बताते हैं। ये पत्राचार फाइलों में बंद जवाबों का पुलिंदा नहीं है। ये सबूत है कि अगर नीयत हो तो एक आदमी भी सरकार से सवाल कर सकता है। समस्याएं आज भी जस की तस हैं, पर इतिहास जब लिखा जाएगा, तो ये दर्ज होगा कि किसी ने हार नहीं मानी थी, क्योंकि लोकतंत्र में एक कलम भी बदलाव ला सकती है। भूमिपुत्र पवन घुवारा ने विकास, कुपोषण उन्मूलन, शिक्षा अभियान, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, हैंडपंप का सूखना, नल-जल योजना का फेल होना ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन,पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग ,पर्यटन, बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज,सिस्टम को उसकी जिम्मेदारी याद दिलाना जैसे मुद्दों पर लगातार उच्चाधिकारियों से पत्राचार व संघर्ष किया।</p>
<p><strong>इतिहास याद रखेगा कि हमने चुप रहना मंजूर नहीं किया</strong></p>
<p>लोकपाल बिल पर केंद्रीय को सुझाव, मनरेगा व अन्य विभागों में भ्रष्टाचार के मामले लोकायुक्त में उठाने तथा कई जन आंदोलनों का नेतृत्व किया। इन कार्यों के लिए उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से मिलने का अवसर भी मिला। समस्याएं आज भी है फाइलों में बंद ये पत्र बताते हैं कि समस्याएं खत्म नहीं हुई। ये पत्र कब रंग लाएंगे पता नहीं, पर इतिहास याद रखेगा कि हमने चुप रहना मंजूर नहीं किया। भूमिपुत्र पवन घुवारा ने हर मंच पर जनता की आवाज़ बुलंद की। यह सम्मान अपने पिता लौह पुरुष, शेरे बुंदेलखंड मंत्री का दर्जा प्राप्त विधानसभा बड़ामलहरा के पूर्व विधायक स्व.कपूरचंद्र घुवारा और बुंदेलखंड की माटी को समर्पित किया है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त होने पर भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी मध्यांचल के संरक्षक सुरेश जैन आईएएस, अध्यक्ष डीके जैन, महामंत्री राजकुमार जैन ‘घाटे’, प्रचार प्रमुख और प्रवक्ता राजेश जैन रागी, छतरपुर टाइम्स के सम्पादक वरिष्ठ पत्रकार सनत जैन सहित अनेक संस्था संगठनों के पदाधिकारियों ने शुभकामनाएं दी हैं।</p>
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