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	<title>Shri Siddhachakra Mahamandal Vidhan &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Shri Siddhachakra Mahamandal Vidhan &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में तीसरे दिन भी उमड़ा आस्था का सैलाब : अष्ट द्रव्यों के साथ विधि विधानपूर्वक श्रीजी के समक्ष मंडल पर अर्घ्य अर्पित  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 12:21:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कमला नगर स्थित शालीमार एन्क्लेव के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व पर आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के वातावरण में चल रहा है। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230; आगरा। कमला नगर स्थित शालीमार एन्क्लेव के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व पर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कमला नगर स्थित शालीमार एन्क्लेव के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व पर आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के वातावरण में चल रहा है। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा</strong>। कमला नगर स्थित शालीमार एन्क्लेव के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व पर आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के वातावरण में चल रहा है। 23 फरवरी से 3 मार्च तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित कर रही है। यह कार्यक्रम उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी महाराज एवं मुनि श्री विश्वसाम्य सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में पुण्यशाली पारस जैन कंसल एवं मधु जैन कंसल परिवार के सौजन्य से किया जा रहा है। विधान के तीसरे दिन बुधवार को कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल भगवान आदिनाथ के अभिषेक एवं शांतिधारा से हुआ। बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया जी के निर्देशन में विधान के पात्रों द्वारा अष्ट द्रव्यों के साथ विधि-विधानपूर्वक श्रीजी के समक्ष मंडल पर अर्घ्य अर्पित किए गए।</p>
<p><strong>मंदिर आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित रहा </strong></p>
<p>भक्तों ने मंत्रोच्चार एवं मंगल ध्वनियों के बीच धार्मिक क्रियाओं में सहभागिता कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। सायंकालीन में मंदिर परिसर भक्ति भाव से सराबोर हो उठा। संगीतमय भजनों की मधुर प्रस्तुति के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान आदिनाथ की भव्य मंगल आरती एवं भक्तामर पाठ किया। दीपों की ज्योति और भक्तिमय वातावरण ने पूरे मंदिर को आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित कर दिया।</p>
<p><strong>विधान में यह रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस अवसर पर पारस जैन कंसल, मधु जैन कंसल, संभव जैन कंसल, विनीत जैन, अजीत जैन, सुमेर पांडया, राजकुमार ‘गुड्डू’, राजू गोधा, संजू गोधा, शैलेंद्र जैन, अंकेश जैन, मुकेश जैन, रूपचंद जैन, अनामिका जैन, अनुभूति जैन, कीर्ति जैन, शशि जैन, मिथलेश जैन सहित समस्त कमला नगर जैन समाज के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
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		<title>शालीमार एन्क्लेव जैन मंदिर में जारी है श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान: 3 मार्च तक उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी एवं मुनि श्री विश्वसाम्य सागर जी के सानिध्य में चलेगा विधान </title>
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		<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 13:54:16 +0000</pubDate>
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<p><strong>कमला नगर स्थित शालीमार एन्क्लेव के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व के पावन अवसर पर आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान धार्मिक उल्लास एवं भक्तिमय वातावरण में संपन्न हो रहा है। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> कमला नगर स्थित शालीमार एन्क्लेव के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व के पावन अवसर पर आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान धार्मिक उल्लास एवं भक्तिमय वातावरण में संपन्न हो रहा है। यह आयोजन 23 फरवरी से 3 मार्च तक उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी महाराज एवं मुनि श्री विश्वसाम्य सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में पुण्यशाली पारस जैन कंसल एवं मधु जैन कंसल परिवार के सौजन्य से आयोजित किया जा रहा है। विधान के दूसरे दिन मंगलवार को कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 8 बजे भगवान आदिनाथ के अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुआ।इसके पश्चात बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया जी के कुशल निर्देशन में विधान के पात्रों ने अष्ट द्रव्यों के साथ श्रीजी के समक्ष मंडल पर आठ अर्घ्य अर्पित कर सभी मांगलिक क्रियाएं विधि-विधानपूर्वक संपन्न कीं। सायंकालीन सत्र में मंदिर परिसर भक्ति रस से सराबोर हो उठा, जब उपस्थित श्रद्धालुओं ने संगीतमय वातावरण में प्रभु आदिनाथ की मंगल आरती कर धर्मलाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर पारस जैन कंसल, संभव जैन कंसल, गौरव जैन, विनीत जैन, अभिषेक जैन,अजीत जैन, महावीर प्रसाद जैन, राजकुमार ‘गुड्डू’ राजू गोधा, संजू गोधा,मधु जैन कंसल अनामिका जैन,अनुभूति जैन,कीर्ति जैन,संगीता जैन,वैशाली जैन,शशि जैन,मिथलेश जैन, सहित समग्र कमला नगर जैन समाज के अनेक श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>अष्टान्हिका पर्व में नंदीश्वर द्वीप के जिनालयों सिद्ध भगवंतों की आराधना का विधान: आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी संघ के सानिध्य में आरंभ हुआ पर्व  </title>
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		<pubDate>Thu, 30 Oct 2025 10:01:00 +0000</pubDate>
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<p><strong>दिगंबर जैन समाज में सिद्ध भगवंतों की आराधना के लिए अष्टान्हिका पर्व का बुधवार को शुभारंभ हुआ। कई लोगों ने आठ दिन के एकासना व्रत का संकल्प लिया। इस मौके पर मंगलवारा जैन मंदिर की धर्मशाला में आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी और उनके संघ का सानिध्य प्राप्त हुआ। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, यह साभार संकलित खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> दिगंबर जैन समाज में सिद्ध भगवंतों की आराधना के लिए अष्टान्हिका पर्व का बुधवार को शुभारंभ हुआ। कई लोगों ने आठ दिन के एकासना व्रत का संकल्प लिया। इस मौके पर मंगलवारा जैन मंदिर की धर्मशाला में आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी और उनके संघ के सानिध्य और उत्तरप्रदेश के संस्कृत के विद्वान प्रतिष्ठाचार्य नन्हे भैया के निर्देशन में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की शुरुआत हुई। राजस्थान की भजन गायिका प्रीति ने भजनों की प्रस्तुति से भक्ति रस बरसाया।</p>
<p>धर्म, संस्कृति, पर्यावरण शुद्धि, संयम तथा विश्व शांति एवं समाज की प्रगति की भावना से सिद्ध भगवंतों की आराधना की जाएगी। अष्टान्हिका पर्व आठ दिन का होता है। यह साल में तीन बार कार्तिक, फाल्गुन और आषाढ़ मास में आता है। इसमें नंदीश्वर द्वीप के जिनालयों व सिद्ध भगवंतों की आराधना का विधान है। यह अष्टमी से शुरू होकर पूर्णिमा तक चलता है।</p>
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		<title>श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन एवं रथयात्रा रविवार को: सभी जिन प्रतिमाएं अभिषेक के बाद श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में होंगी विराजमान  </title>
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		<pubDate>Fri, 10 Oct 2025 11:24:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री विद्याप्रमाण गुरु कुलम् अवधपुरी में संस्कृत भाषा में निबद्ध श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन रविवार को प्रातः कालीन बेला में होने जा रहा है। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया विगत 4 अक्टूबर से यहां श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रारंभ हुआ था। उसका समापन रविवार को होगा। अवधपुरी(भोपाल) से पढ़िए, यह खबर... अवधपुरी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री विद्याप्रमाण गुरु कुलम् अवधपुरी में संस्कृत भाषा में निबद्ध श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन रविवार को प्रातः कालीन बेला में होने जा रहा है। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया विगत 4 अक्टूबर से यहां श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रारंभ हुआ था। उसका समापन रविवार को होगा। <span style="color: #ff0000">अवधपुरी(भोपाल) से पढ़िए, यह खबर..</span>.</strong></p>
<hr />
<p><strong>अवधपुरी (भोपाल)।</strong> श्री विद्याप्रमाण गुरु कुलम् अवधपुरी में संस्कृत भाषा में निबद्ध श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन रविवार को प्रातः कालीन बेला में होने जा रहा है। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया विगत 4 अक्टूबर से यहां श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रारंभ हुआ था। उसका समापन रविवार को होगा। प्रात:6 बजे से अभिषेक एवं शांतिधारा नित्य नियम पूजन के पश्चात हवन एवं 9 बजे से रथयात्रा श्री विद्याप्रमाण गुरुकुलम् से मुनिसंघ के सानिध्य में प्रारंभ होगी, जो समन्वयनगर होती हुई वापस विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में आएगी। सभी जिन प्रतिमाओं का अभिषेक उपरांत श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान किया जाएगा। जैन ने बताया विधान के सातवें दिवस मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज एवं मुनि श्री संधान सागरजी महाराज ने अपने मुखारबिंद से पंच परमेष्ठी श्री अरहंतजी, सिद्धजी, आचार्यजी, उपाध्याय जी तथा सर्व साधुओं की आराधना करते हुए दोपहर 12 बजे तक 512 अर्घ्य पूर्ण भक्ति भाव के साथ चढ़ाए गए तथा शनिवार को भगवान के सहस्त्र नामों के साथ 1024 अर्घ्य चढ़ाए जाएंगे। इस मौके पर मुनि श्री ने पंच परमेष्ठी के 143 मूलगुणों की चर्चा करते हुए कहा कि इन्ही मूलगुणों के आधार पर इन परमेष्ठियों की पहचान हुआ करती है। मूलगुणों से ही उनके आचार-व्यवहार तथा चर्या को देखा जाता है।</p>
<p><strong>साधु परमेष्ठी में 28 मूल गुण समाहित होते हैं</strong></p>
<p>जब आचार्य परमेष्ठी के गुणों की चर्चा आई तो मुनि श्री ने कहा कि आचार्य गुरुदेव में वह सभी मूल गुण परिलक्षित होते थे। उनकी चर्या में मूलाचार समाया हुआ था। उन्होंने कहा कि अरिहंत भगवान में छियालीस, सिद्ध भगवान में आठ, आचार्य परमेष्ठी में छत्तीस, उपाध्याय परमेष्ठी में पच्चीस तथा साधु परमेष्ठी में 28 मूल गुण समाहित होते हैं। उन सभी मूल गुणों की आज आप लोगों ने बड़े ही भक्ति भाव के साथ आराधना की। इस अवसर पर समस्त क्षुल्लक आदरसागर जी, श्री समादर सागर जी, श्री चिद्रूप सागर जी, श्री स्वरूपसागर जी तथा श्री सुभग सागर जी महाराज एवं सभी ब्रह्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन बाल ब्र. अभय भैया आदित्य तथा अशोक भैया लिधोरा ने किया।</p>
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		<title>भोग आकांक्षा की चाहत जीवन को बर्बाद करती है : मुनि श्री प्रमाणसागर जी ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान प्रकट किए प्रभावी विचार  </title>
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		<pubDate>Wed, 08 Oct 2025 12:42:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैसे-जैसे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का क्रम आगे बढ़ रहा है। वैसे-वैसे भगवान की भक्ति और अर्घ्य उत्तरोत्तर बढ़ते जा रहे हैं। विधान के पांचवे दिवस 128 अर्घ्य चढ़ाए गए। तथा गुरुवार को 256 अर्घ्य चढ़ाए जाएंगे। भोपाल से पढ़िए, अविनाश जैन विद्यावाणी की यह खबर&#8230; भोपाल (अवधपुरी)। जैसे-जैसे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का क्रम [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैसे-जैसे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का क्रम आगे बढ़ रहा है। वैसे-वैसे भगवान की भक्ति और अर्घ्य उत्तरोत्तर बढ़ते जा रहे हैं। विधान के पांचवे दिवस 128 अर्घ्य चढ़ाए गए। तथा गुरुवार को 256 अर्घ्य चढ़ाए जाएंगे। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, अविनाश जैन विद्यावाणी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल (अवधपुरी)।</strong> जैसे-जैसे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का क्रम आगे बढ़ रहा है। वैसे-वैसे भगवान की भक्ति और अर्घ्य उत्तरोत्तर बढ़ते जा रहे हैं। विधान के पांचवे दिवस 128 अर्घ्य चढ़ाए गए। तथा गुरुवार को 256 अर्घ्य चढ़ाए जाएंगे। इसी प्रकार 512 तथा भगवान के सहस्त्र नाम के साथ 1024 अर्घ्य समर्पित होकर रविवार को विधान का समापन होगा। इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि जिसके हृदय में सम्यक्त्व का प्रकाश उदघाटित होता है वह तो मौका देखता है और भगवान की भक्ति में रम जाता है। उन्होंने सम्यक दृष्टि, धर्मी और अधर्मी तीनों में अंतर स्पस्ट करते हुए कहा कि धर्मी धर्म के लिये मौका देखता है, जबकि अधर्मी आए हुए मौका को छोड़ता है। एक सम्यक् दृष्टि संसार में कर्तव्य भाव से रहता लेकिन, उसमें रमता नहीं। भोगों से उदासीन होकर देव शास्त्र और गुरु की शरण को स्वीकार करते हुए एक ही भावना भाता है कि हे प्रभु में दुनिया में कहीं भी रहूं मेरी दृष्टि आपके चरणों की ओर रहे।</p>
<p><strong>जिसके</strong> अंदर विवेक नहीं है वह पूतना रूपी पंचेन्द्रिय की वासना से ग्रस्त</p>
<p>उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि पूतना ने नंदगांव के बच्चों को आकर्षित करने के लिए अपना आकृषण स्वरुप बनाया। जिससे बच्चे आकृषित होकर उसके आंचल में दुग्धपान करने हेतु चले गए और वह सभी मूर्क्षा को प्राप्त हुए लेकिन, बाल रूप के श्रीकृष्ण पूतना के उन मनोभावों को समझ गये और उन्होंने पूतना का ही काम तमाम कर दिया। इस दृष्टि से जब में तत्व का चिंतन करता हूं तो पाता हूं कि जिसके अंदर विवेक नहीं है। वह पूतना रूपी पंचेन्द्रिय की वासना से आकर्षित भोग आकांक्षा को ही अपनी शरण मान लेता है तथा वह अपने जीवन का सर्वनाश करता है तथा जिसके अंदर विवेक रूपी श्रीकृष्ण प्रकट हो जाते हैं। वह भोग आकांक्षा रूपी पूतना को नष्ट कर संसार से पार हो जाता है।</p>
<p><strong>भगवान</strong> के प्रति उमड़ने वाली भक्ति ही सम्यक् दर्शन का हेतु</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि विषयों में रमने वाले लोग बहुत हैं लेकिन, विषयों से हटकर भगवान की भक्ति करने वाले लोग विरले होते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया का आकर्षण बहुत तीव्र होता है,जो हमें विषय भोगों की ओर आकर्षित करता है, लेकिन जिन्हें परम पुण्य का शुभ संयोग मिलता है। वह अपने एक एक पल को भगवान की भक्ति में लगाता है। आचार्य कुंद कुंद कहते है कि अरिहंत भगवान के प्रति उमड़ने वाली भक्ति ही सम्यक् दर्शन का हेतु है। यदि वह भक्ति आपके अंदर प्रकट हो गई तो समझना बेड़ा पार हो गया। इस अवसर पर मुनि श्रीसंधानसागरजी महाराज सहित क्षुल्लक श्री आदर सागर जी, क्षुल्लक श्री समादरसागर जी, क्षुल्लक श्री चिद्रूप सागर जी, क्षुल्लक श्री स्वरुप सागर, क्षुल्लक श्री सुभग सागर महाराज सहित समस्त संघस्थ ब्रह्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन विधानाचार्य ब्र.अशोकभैया ब्र.अभयभैया ने किया एवं विधान में सहयोग अमित वास्तु इंदौर एवं पंडित सुदर्शन पिंडरई ने किया।</p>
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		<title>हृदय में गुरु भक्ति तथा आचरण में गुरु के आदर्श दिखना चाहिए : मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने करवाई शरद पूर्णिमा पर विशेष शांतिधारा  </title>
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		<pubDate>Tue, 07 Oct 2025 12:08:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के चतुर्थ दिवस श्री गणधर वलय विधान के 64 ऋद्धि मंत्रों से युक्त मंत्र मुनि श्री के मुखारविंद से समर्पित किए गए। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रातःकालीन बेला में शरदपूर्णिमा के विशेष अवसर पर 55 मिनट की विशेष शांतिधारा भगवान के श्री मस्तक पर की गई। भोपाल से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के चतुर्थ दिवस श्री गणधर वलय विधान के 64 ऋद्धि मंत्रों से युक्त मंत्र मुनि श्री के मुखारविंद से समर्पित किए गए। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रातःकालीन बेला में शरदपूर्णिमा के विशेष अवसर पर 55 मिनट की विशेष शांतिधारा भगवान के श्री मस्तक पर की गई। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल (अवधपुरी)</strong>। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के चतुर्थ दिवस श्री गणधर वलय विधान के 64 ऋद्धि मंत्रों से युक्त मंत्र मुनि श्री के मुखारविंद से समर्पित किए गए। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रातःकालीन बेला में शरदपूर्णिमा के विशेष अवसर पर 55 मिनट की विशेष शांतिधारा भगवान के श्री मस्तक पर की गई। इस अवसर जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने जैन श्रावक के रूप में भाग लिया। इसी के साथ विदिशा से समग्र पाठशालाओं से लगभग 120 बच्चे एवं शिक्षक तथा शिक्षिकाएं भी पहुंची तथा मुनि श्री से आशीर्वाद लिया। संपूर्ण भोपाल नगर में वाहनों के माध्यम से धर्म की प्रभावना करते हुए विद्योदय के कार्यकर्ता विधान के मध्य मुनि श्री का आशीर्वाद लेने पहुंचे। उनको संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि गुरुदेव के पक्के अनुयायी बनो हृदय में गुरु भक्ति तथा आचरण में गुरु के आदर्श दिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने कभी भौतिक और सांसारिक जन्मदिन को मनाने के लिये प्रोत्साहित नहीं किया। उन्होंने हमेशा दीक्षा दिवस मनाने की प्रेरणा दी क्योंकि, एक मुनि का जन्म ही दीक्षा के उपरांत होता है। इसलिये मैं भी कभी सांसारिक जन्म दिवस मनाने को प्रोत्साहित नहीं करता। आप लोगों ने इस बहाने गुरुदेव को याद किया तो उसमें कोई हांनि नहीं है। गुरुदेव ने जो आदर्श और प्रेरणा हम लोगों को दी। वह विचार,और उनके मार्गदर्शन को जन जन में फैलाएं तथा उनक ेआचरण को अपने जीवन में साकार करें।</p>
<p>उन्होंने विद्योदय का अर्थ बताते हुए कहा कि विद्या का उदय अर्थात आप सभी के जीवन में ष्विद्या का प्रकाश फैले और इसी प्रकार आप सभी गुरु की भक्ति करते रहे। इस अवसर पर मुनि श्री संधानसागर महाराज सहित समस्त क्षुल्लक मंचासीन थे। कार्यक्रम का संचालन बाल ब्र.अशोक भैया, ब्र.अभय भैया, सहायक अमित वास्तु,ने किया। इस अवसर पर विद्याप्रमाण गुरुकुलम् टीम सहित दि. जैन पंचायत भोपाल के समस्त पदाधिकारी उपस्थित थे।</p>
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		<title>संयम की साधना से आत्मबल की प्राप्ति होती है :  मंत्रोच्चारण के साथ चातुर्मास का संकल्प लेंगे मुनिराज </title>
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		<pubDate>Tue, 08 Jul 2025 09:59:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के छठे दिन कर्म दहन विधान का पूजन करते हुए 256 अर्घ्य समर्पित किए गए। जो कर्म हमारी आत्मा पर आवरण डाले हुए अनंत चतुष्टय को प्रगट नहीं होने देते हैं। ऐसे अष्टक्रमों से मुक्त होने के लिए ही पूजन, विधान आदि किए जाते हैं। यह कर्म हमें आत्मा का बोध [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के छठे दिन कर्म दहन विधान का पूजन करते हुए 256 अर्घ्य समर्पित किए गए। जो कर्म हमारी आत्मा पर आवरण डाले हुए अनंत चतुष्टय को प्रगट नहीं होने देते हैं। ऐसे अष्टक्रमों से मुक्त होने के लिए ही पूजन, विधान आदि किए जाते हैं। यह कर्म हमें आत्मा का बोध नहीं होने देते हैं। यह प्रबोधन मुनिश्री विलोकसागर जी ने दिया। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के छठे दिन कर्म दहन विधान का पूजन करते हुए 256 अर्घ्य समर्पित किए गए। जो कर्म हमारी आत्मा पर आवरण डाले हुए अनंत चतुष्टय को प्रगट नहीं होने देते हैं। ऐसे अष्टक्रमों से मुक्त होने के लिए ही पूजन, विधान आदि किए जाते हैं। यह कर्म हमें आत्मा का बोध नहीं होने देते हैं। हमारे अंदर अनंत बल है, अनंत ज्ञान है लेकिन, हम कर्मों के जाल में ऐसे उलझे हुए हैं कि अपनी शक्ति का अहसास नहीं कर पाते। शेर जैसा बल होते हुए भी हम स्वयं को बिल्ली जैसा कमजोर महसूस करते हैं। यह उद्गार मुनि श्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के छठें दिन धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुनिश्री ने कहा कि संयम की साधना से हमें आत्मबल की प्राप्ति होती है। हमें अपनी शक्तियों का भान होता है, अपनी ताकत का अहसास होता है। हम दृढ़ता के साथ संयम की साधना करते हैं, किसी नियम आदि का पालन करते हैं तो जड़ कर्म हमसे दूर भाग जाते है। बस हमें यह अहसास होना चाहिए कि हम भगवान आदिनाथ से लेकर भगवान महावीर स्वामी तक जिनेंद्र देव के कुल में पैदा हुए हैं।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-84681" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/WhatsApp-Image-2025-07-08-at-3.26.23-PM-1.jpeg" alt="" width="1599" height="899" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/WhatsApp-Image-2025-07-08-at-3.26.23-PM-1.jpeg 1599w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/WhatsApp-Image-2025-07-08-at-3.26.23-PM-1-300x168.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/WhatsApp-Image-2025-07-08-at-3.26.23-PM-1-1024x576.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/WhatsApp-Image-2025-07-08-at-3.26.23-PM-1-768x432.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/WhatsApp-Image-2025-07-08-at-3.26.23-PM-1-1536x864.jpeg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/WhatsApp-Image-2025-07-08-at-3.26.23-PM-1-990x557.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/WhatsApp-Image-2025-07-08-at-3.26.23-PM-1-1320x742.jpeg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/WhatsApp-Image-2025-07-08-at-3.26.23-PM-1-470x264.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/WhatsApp-Image-2025-07-08-at-3.26.23-PM-1-640x360.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/WhatsApp-Image-2025-07-08-at-3.26.23-PM-1-215x120.jpeg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/WhatsApp-Image-2025-07-08-at-3.26.23-PM-1-414x232.jpeg 414w" sizes="(max-width: 1599px) 100vw, 1599px" />ये कर्म हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते </strong><br />
मुनिश्री ने कहा कि हम भी जिनेंद्र प्रभु की तरह कठोर तप कर सकते हैं, ज्ञान की प्राप्ति कर सकते हैं। संयम रूपी व्रतों को धारण कर सकते हैं। यदि हमारा तपोबल मजबूत होगा तो ये कर्म हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। ये तो जड़ हैं और हम चैतन्य हैं। जिस दिन हमें अपनी चैतन्यता का अहसास हो जाएगा। उस दिन हम भी अरिहंत और सिद्धों की श्रेणी में आ जाएगा। हम भी इस असार संसार से, जन्म मरण के चक्र से मुक्त होकर सिद्धत्व को प्राप्त कर लेंगे। यह जैन संत मंत्रोच्चारण के साथ 9 जुलाई को लेंगे चातुर्मास का संकल्प।</p>
<p><strong>मुरैना के बड़े मंदिर में चातुर्मास की स्थापना होगी </strong><br />
प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी (मुरैना वाले) ने वर्षायोग के संदर्भ में बताया कि दिगंबर जैन आमनाय में जैन साधु सावन का महीना प्रारंभ होते ही अपना पद विहार (आवागमन) रोककर, एक ही स्थान पर रुककर वर्षाकाल के चार माह, आत्म साधना एवं धर्म प्रभावना करते हैं। दिगम्बर मुनिराज, आर्यिका माताजी, क्षुल्लक, क्षुल्लिका सभी साधु-साध्वियां अहिंसा धर्म का पूर्ण पालन करते हुए प्रकृति में उत्पन्न होने वाले जीवो की रक्षार्थ वे एक ही स्थान पर 4 महीने रुक कर साधना किया करते हैं। आषाढ़ मास की चतुर्दशी को सभी साधु गण भगवान के समक्ष उपवास करके भक्तियों का पाठ करते हुए मंत्रोच्चारण के साथ चातुर्मास का संकल्प करते हैं एवं प्रतिक्रमण और प्रायश्चित करते हैं। इसी तारतभ्य में बुधवार 9 जुलाई को संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के शिष्य आचार्यश्री आर्जवसागरजी महाराज के मंगल आशीर्वाद से उनसे दीक्षित मुनिश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विवोधसागरजी महाराज भक्ति करते हुए मुरैना के बड़े मंदिर में चातुर्मास की स्थापना करेंगे। 20 जुलाई रविवार को समाज के द्वारा कलश स्थापना करके वृहद रूप से कार्यक्रम होगा।</p>
<p><strong>बुधवार को सिद्धों की आराधना करते हुए 512 अर्घ्य होंगे समर्पित</strong><br />
बड़े जैन मंदिर में चल रहे आठ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान में जिन्होंने समस्त कर्मों को छेद करके सिद्ध अवस्था प्राप्त की। ऐसे सिद्धों की आराधना में 256 अर्घ्य चढ़ाए गए। बुधवार को सातवें दिन 512 अर्घ्य चढ़ाते हुए पंच परमेष्ठी की वृहद आराधना की जाएगी।</p>
<p><strong>चातुर्मास पत्रिका का होगा विमोचन</strong><br />
बड़ा जैन मंदिर कमेटी के मंत्री विनोद जैन (तार वाले) ने बताया कि बड़े जैन मंदिर में विराजमान मुनिश्री विलोकसागर महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर महाराज बुधवार को संकल्प पूर्वक चातुर्मास की स्थापना करेंगे। इस अवसर पर वर्षायोग के मांगलिक कार्यक्रमों की पत्रिका ‘पावन मंगल वर्षायोग 2025’ का विमोचन समाज के श्रावक-श्रेष्ठियों द्वारा किया जाएगा।</p>
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		<title>10 जुलाई तक होगी सिद्धों की आराधना : मुनिश्री के सानिध्य में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान आरंभ  </title>
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		<pubDate>Thu, 03 Jul 2025 13:03:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ का 8 दिवसीय आयोजन का शुभारंभ गुरुवार को हुआ। प्रातः पूज्य युगल मुनिराजों के पावन सान्निध्य में श्री जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन की यह खबर&#8230; मुरैना। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ का 8 दिवसीय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ का 8 दिवसीय आयोजन का शुभारंभ गुरुवार को हुआ। प्रातः पूज्य युगल मुनिराजों के पावन सान्निध्य में श्री जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>मुरैना।</strong> श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ का 8 दिवसीय आयोजन का शुभारंभ गुरुवार को हुआ। प्रातः पूज्य युगल मुनिराजों के पावन सान्निध्य में श्री जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी (मुरैना वाले) ने मंडप, विधान मांडना, पांडाल एवं सभी पात्रों की शुद्धि का कार्यक्रम मंत्रोचारण के साथ संपन्न कराया। 3 जुलाई से 10 जुलाई तक निरंतर 8 दिन सिद्धों की पूजा भक्ति करते हुए अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।</p>
<p><strong>पुण्य आपको मन की शांति और अपार वैभव देता है</strong></p>
<p>सांसारिक प्राणी मोह माया के चक्कर में अपना पूरा जीवन व्यर्थ ही बर्बाद कर देता है। वह धन का संचय तो करता है लेकिन पुण्य का संचय नहीं करता। धन केवल आपको इस भव में सांसारिक सुख तो दे सकता है लेकिन, पुण्य आपको मन की शांति और अपार वैभव देता है। यह उद्गार मुनिश्री विलोकसागर जी ने यहां धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हम सभी जीवन की वास्तविकता को जानकर भी गलतफहमी में जी रहे है। सारी जिंदगी सपनों की दुनिया में जीते हुए जो कुछ हम जुटाते हैं वो सब यही धरा रह जाना है। चक्रवर्ती सम्राटों के पास अपार वैभव था, लेकिन जब उन्हें वैराग्य हुआ तो सारा वैभव उन्होंने एक क्षण में त्याग दिया। हम और आप मोह माया में पढ़े हुए हैं।</p>
<p><strong>पुण्य का संचय हो और आपका परलोक भी सुधरेगा</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि आपका मस्तिष्क व्यवस्थित है तो आपको सारा संसार व्यवस्थित लगेगा। ज्ञान की बातें हम सब स्वीकार करते हैं पर उसे अंगीकार नहीं करते। जीवन की वास्तविकता को यदि हम श्रद्धा से स्वीकार करले, धर्म के सिद्धांतों को अंगीकार कर लें तो परिणति ही बदल जाएगी। हम सब को पता है कि अंतिम समय आने पर हम सबकुछ छोड़कर जाना है, कुछ भी साथ लेकर नहीं जाएंगे। फिर भी हम दिन रात कुछ न कुछ जोड़ने में ही लगे रहते है। बच्चों को उनके पाप पुण्य के अनुसार जो होगा वहीं मिलेगा, हमारा उनके लिए जोड़ना कुछ काम नहीं आएगा। आप धन का कितना भी संचय कर लें, लेकिन जब इस संसार से विदा होने का समय आएगा तब सब यहीं रखा रह जाएगा, केवल आपके अच्छे-बुरे कर्म ही साथ जाएंगे। हे! भव्य प्राणी अपनी इस चंचला लक्ष्मी का उपयोग अच्छे कार्यों में करो, प्रभु की भक्ति करो, ताकि पुण्य का संचय हो और आपका परलोक भी सुधरेगा।</p>
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		<title>विश्व कल्याण की कामना श्री सिद्धचक्र विधान का समापन: महायज्ञ कर निकाली श्रीजी पालकी शोभायात्रा </title>
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		<pubDate>Sun, 11 May 2025 10:11:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुरैना नगर के बड़े जैन मंदिर में विश्व शांति एवं कल्याण के लिए महायज्ञ के साथ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन हुआ। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के तहत सिद्धों की आराधना की जा रही थी। अंतिम आठवें दिन विश्व शांति महायज्ञ, श्रीजी भव्य शोभायात्रा, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुरैना नगर के बड़े जैन मंदिर में विश्व शांति एवं कल्याण के लिए महायज्ञ के साथ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन हुआ। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के तहत सिद्धों की आराधना की जा रही थी। अंतिम आठवें दिन विश्व शांति महायज्ञ, श्रीजी भव्य शोभायात्रा, सम्मान समारोह, वात्सल्य भोज, आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> नगर के बड़े जैन मंदिर में विश्व शांति एवं कल्याण के लिए महायज्ञ के साथ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन हुआ। आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के शिष्य आचार्यश्री आर्जवसागर महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोकसागर महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर महाराज के पावन सानिध्य में नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के तहत सिद्धों की आराधना की जा रही थी। जैन संस्कृत विद्यालय के पूर्व प्राचार्य पंडित महेंद्रकुमार शास्त्री के निर्देशन में विधानाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मगरौनी ने विधान की सभी क्रियाओं को संपन्न कराया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-80698" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015.jpg" alt="" width="1599" height="899" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015.jpg 1599w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-1536x864.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-1320x742.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1599px) 100vw, 1599px" />कार्यक्रम के दौरान 4 मई से 10 मई तक प्रतिदिन श्री जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन के बाद विधान के अर्घ्य समर्पित किए गए। विधान के मध्य पूज्य मुनिश्री के प्रवचन भी हुए। शाम को महाआरती, गुरु भक्ति, शास्त्रसभा के साथ स्वर लहरी सैंकी एंड पार्टी फिरोजाबाद ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। रविवार को विधान के अंतिम आठवें दिन विश्व शांति महायज्ञ, श्रीजी भव्य शोभायात्रा, सम्मान समारोह, वात्सल्य भोज, आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। विधान के पुण्यार्जक मुन्नालाल, राकेशकुमार, गौरव जैन, सौरभ जैन एवं समस्त चोरम्बार परिवार के पुण्य की सभी ने अनुमोदना की। विधान के समापन पर विराजमान युगल मुनिराजों ने सभी को धर्म वृद्धि का आशीर्वाद प्रदान किया।</p>
<p><strong>विश्व शांति महायज्ञ में दी आहुति</strong></p>
<p>श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन पर सम्पूर्ण विश्व में शांति हो, सम्पूर्ण विश्व का कल्याण हो। ऐसी पवित्र एवं पावन भावना के साथ विश्व शांति महायज्ञ किया गया। विधान के प्रतिष्ठा निर्देशक पंडित महेन्द्रकुमार शास्त्री एवं विधानाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मगरौनी ने मंत्रोच्चारण के साथ महायज्ञ की क्रियाओं को संपन्न कराया। महायज्ञ के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने श्री जिनेंद्र प्रभु से कामना की कि हे! प्रभु इस संसार के सभी जीव सुखी हों, संपूर्ण विश्व में सत्य अहिंसा का बोलबाला होकर शांति स्थापित हो। संसार के सभी जीवों का कल्याण हो। सभी साधर्मी बंधुओं, माताओं ने महायज्ञ में आहुति दी।</p>
<p><strong>श्री जिनेंद्र प्रभु की निकली भव्य पालकी शोभायात्रा</strong></p>
<p>विधान के अंतिम दिन आज श्री जिनेंद्र प्रभु की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। भगवान जी की प्रतिमा को चांदी की पालकी में विराजमान किया गया। चार इंद्र नालकी को अपने कंधों पर लेकर चल रहे थे । भव्य श्री जी शोभायात्रा बड़े जैन मंदिर से प्रारंभ होकर सदर बाजार, हनुमान चौराहा, झंडा चौक, सराफा बाजार, लोहिया बाजार होती हुई बड़ा जैन मंदिर पहुंची। शोभायात्रा में श्री जिनेंद्र प्रभु की आरती उतारकर साधर्मी बंधुओं ने अगवानी की। महिलाएं भक्ति भाव के साथ भक्तिपूर्ण नृत्य कर रही थीं और पुरुष वर्ग भगवान महावीर की जय जयकार करता हुआ चल रहा था। बड़े जैन मंदिर में श्री जिनेंद्र प्रभु को पांडुक शिला पर विराजमान कर जलाभिषेक किए गए। सौधर्म इंद्र ने कलश से जैसे ही जल धारा प्रभु के सिर पर ढारी, वैसे ही सम्पूर्ण पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सभी ने हर्ष ध्वनि के साथ जयकारा लगाते हुए अपनी खुशी का इजहार किया।</p>
<p><strong>युगल मुनिराजों के प्रतिदिन हुए प्रवचन</strong></p>
<p>विधान के दौरान निरंतर आठ दिन सिद्ध परमेष्ठि की पूजा भक्ति, आराधना की गई। इस दौरान प्रतिदिन युगल मुनिराजों के प्रवचन हुए । विराजमान दिगंबर जैन मुनिश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज ने अपने सारगर्भित प्रवचनों के माध्यम से उपस्थित जन समूह को जीवन जीने की कला सिखाते हुए, सत्य अहिंसा का उपदेश दिया।</p>
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		<title>प्राणी मात्र के सुख दुख का कारण अज्ञानता है: आज जैन मंदिर में होगा विश्व शांति महायज्ञ  </title>
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		<pubDate>Sat, 10 May 2025 13:02:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के सातवें दिन सिद्धों की आराधना, भक्ति करते हुए 1024 अर्घ समर्पित किए गए। आज अंतिम दिन विधान का समापन होगा। प्रातःकालीन वेला में विश्व शांति महायज्ञ होगा। सभी इंद्र इंद्राणी एवं अन्य लोग विश्व शांति एवं कल्याण की भावना के साथ आहुति देगें। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के सातवें दिन सिद्धों की आराधना, भक्ति करते हुए 1024 अर्घ समर्पित किए गए। आज अंतिम दिन विधान का समापन होगा। प्रातःकालीन वेला में विश्व शांति महायज्ञ होगा। सभी इंद्र इंद्राणी एवं अन्य लोग विश्व शांति एवं कल्याण की भावना के साथ आहुति देगें। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>मुरैना।</strong> इस असार संसार में करोड़ो की संख्या में प्राणी जीवनयापन करते हैं। हम देखते हैं कि कुछ व्यक्ति सुख का अनुभव करते हैं और कुछ व्यक्ति दुख का अनुभव करते हैं। कुछ की प्रशंसा होती है, कुछ की आलोचना होती है। ऐसा क्यों होता है, इसका कारक कौन है। दोनों की अनुभूति अंतर क्यों है। हम सोचते है कि एक को दुःखी और दूसरे को सुखी बनाने वाला कौन है। हमारे सुख और दुख का कारक कोई और नहीं बल्कि हम स्वयं हैं। यह उद्गार मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने बड़े जैन मंदिर जी में चल रहे श्री सिद्धचक्र विधान के सातवें दिन धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इसका कारण हमारी अज्ञानता है । हमारी अज्ञानता ही हमारे सुख और दुख का कारण हैं। अज्ञानता के कारण हम भटक गए हैं, हमने अपने जीवन में एक खाई पैदा करली है । प्राणी मात्र के जीवन में जितनी भी समस्याएं हैं, अज्ञानता के कारण ही हैं। यही कारण है कि हमें जीवन जटिल लगता है और मौत सस्ती लगती है। जब तक आप अज्ञानता में पड़े रहोगे, अपने अंदर शैतान को बैठाए रहोगे, तब तक आप सुखी जीवन यापन नहीं कर सकोगे।</p>
<p><strong>ज्ञान की प्राप्ति होने पर जंगल में मंगल होता है</strong></p>
<p>अज्ञानी व्यक्ति सभी जगह निंदा का पात्र बनता है और ज्ञानी व्यक्ति सभी जगह प्रशंसा का पात्र बनता है। ज्ञान की प्राप्ति होने पर जंगल में भी मंगल होता है, दुर्गति में भी सद्गति होती है। धर्मात्मा व्यक्ति के अंदर निर्मलता वास करती है। उसके अंदर श्रद्धा और विश्वास पनपता है। इसी श्रद्धा और विश्वास के बल पर वो इस संसार सागर से तिर जाता है। ईश्वर की आराधना हर कोई नहीं कर सकता। अपने इष्ट की आराधना एक धर्मात्मा प्राणी ही कर सकता है। ईश्वर की भक्ति, आराधना करने से हमारी अज्ञानता का नाश होता है और हमें ज्ञान की प्राप्ति होती है। अपने धर्म, अपने ईश्वर, अपने गुरुओं द्वारा दिए गए मंत्रों का जप करने से, उनके प्रति सच्ची आस्था, सच्ची श्रद्धा रखने से हमारे अंदर का शैतान नष्ट होता है और हमारे अंदर निर्मलता का वास होता है। श्रद्धा, भक्ति, ज्ञान के प्रभाव से आपदाएं टल जाती हैं और प्राणी मात्र का जीवन सुखमय हो जाता है। हमें मनुष्य पर्याय मिली है, हमें अपने जीवन का लक्ष्य तय करना है, लक्ष्य को सही दिशा में ले जाते हुए इस संसार रूपी भव सागर को पार करना है।</p>
<p><strong>श्री सिद्धचक्र विधान के अंतिम दिन होगा महायज्ञ</strong></p>
<p>युगल मुनिराज श्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज के पावन सानिध्य एवं प्रतिष्ठा निर्देशक महेंद्रकुमार शास्त्री, प्रतिष्ठाचार्य राजेंद्र शास्त्री मंगरोनी के आचार्यत्व में पुण्यार्जक परिवार मुनालाल, राकेशकुमार, रोबिन जैन, गौरव जैन, सौरभ जैन एवं समस्त चोरम्बार परिवार की ओर से चल रहे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के सातवें दिन सिद्धों की आराधना, भक्ति करते हुए 1024 अर्घ समर्पित किए गए। आज अंतिम दिन विधान का समापन होगा। प्रातःकालीन वेला में विश्व शांति महायज्ञ होगा। सभी इंद्र इंद्राणी एवं अन्य लोग विश्व शांति एवं कल्याण की भावना के साथ आहुति देगें। आहुति के पश्चात श्री जिनेंद्र प्रभु की भव्य शोभा यात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा के पश्चात श्री जिनेंद्र प्रभु को पांडुक शिला पर विराजमान कर कलशाभिषेक किए जाएंगे।</p>
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