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	<title>Shri Punya Sagarji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>82 वर्षीय मुनिश्री पूर्ण सागरजी का समाधि मरण हुआः 24 मार्च को विमान यात्रा डोला निकालकर आचार्य मुनि संघ सानिध्य में अग्नि संस्कार हुए </title>
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		<pubDate>Mon, 24 Mar 2025 12:47:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री अजीत सागरजी के शिष्य मुनिश्री पुण्य सागर से दीक्षित शिष्य 82 वर्षीय मुनिश्री पूर्ण सागरजी का दिनांक धरियावद, राजस्थान में समस्त संघ सानिध्य में समाधि मरण हो गया। पढ़िए धरियावद से राजेश पंचोलिया की यह पूरी खबर&#8230; धरियावद। दिन रात मेरे स्वामी, में भावना यह भावु। देहांत के समय मे तुमको न भूल जावू। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री अजीत सागरजी के शिष्य मुनिश्री पुण्य सागर से दीक्षित शिष्य 82 वर्षीय मुनिश्री पूर्ण सागरजी का दिनांक धरियावद, राजस्थान में समस्त संघ सानिध्य में समाधि मरण हो गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए धरियावद से राजेश पंचोलिया की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> दिन रात मेरे स्वामी, में भावना यह भावु। देहांत के समय मे तुमको न भूल जावू। मरण समय गुरु पाद मूल हो व्रत संयम पालू, पंडित पंडित मरण हो ऐसा अवसर दो। इन सार गर्भित भावनाओ को बिरले ही भव्य जीव अपने जीवन मे चरितार्थ करते है। आचार्यश्री अजीत सागरजी के शिष्य मुनिश्री पुण्य सागरजी से दीक्षित शिष्य 82 वर्षीय मुनिश्री पूर्ण सागरजी का दिनांक 24 मार्च 2025 को पूर्वाह्न 9.40 बजे धरियावद, राजस्थान में समस्त संघ सानिध्य में समाधि मरण हो गया।</p>
<p><strong>डोला विमान यात्रा हजारों की उपस्थिति में निकाला गया</strong></p>
<p>ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी, विकास भैया, लक्की रमावत ने बताया कि दोपहर 12.10 बजे समाधिस्थ 82 वर्षीय मुनिश्री पूर्ण सागरजी का डोला विमान यात्रा आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, मुनिश्री पुण्य सागरजी संघ सानिध्य और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में निकाला गया। मुनिश्री के डोले के आगे कमंडल लेकर भूमि शुद्धि का, मुनिश्री के डोले को कंधे लगाने का सौभाग्य महावीर, राजेंद्र मेहता थांदला एवं परिजनों को प्राप्त हुआ। नियत समाधि स्थल परिसर में पंडित हंसमुखजी के निर्देशन में मंत्रोचार से स्थल शुद्धि की गई। समाधिस्थ मुनिश्री की पूजन शांतिधारा और पंचामृत अभिषेक गृहस्थ अवस्था के परिजन पुत्र महावीर, राजेंद्र थांदला एवं परिवार द्वारा किया गया। परम पूज्य मुनिश्री की समाधि के कारण संघ के सभी साधुओं ने आज उपवास किया। अग्नि संस्कार के पश्चात उपस्थित आचार्य संघ, आर्यिका माताजी एवं समस्त समाज ने परिक्रमा देकर अपनी विनयाजंलि प्रस्तुत की।</p>
<p><strong>मुनिश्री पूर्ण सागरजी का सामान्य परिचय  </strong></p>
<p>थांदला मध्यप्रदेश के श्री रतनलाल मेहता 81 वर्षीय ने मुनिश्री पुण्य सागरजी संघ समक्ष दीक्षा हेतु श्रीफल अर्पित किया। आपकी क्षुल्लक दीक्षा चतुर्थ पट्टाधीश आचार्यश्री अजीत सागरजी के शिष्य परम पूज्य मुनिश्री पुण्य सागरजी के करकमलों से सिद्धक्षेत्र सोनागिर में 9/07/2023 को हुई। आपका नूतन नामकरणजी क्षुल्लक श्री पूर्ण सागर हुआ। आपने जन्म नगरी थांदला मध्यप्रदेश में गृहस्थ अवस्था के भतीजे मुनिश्री पुण्य सागरजी से 6/5/2024 को मुनि दीक्षा ग्रहण की। गृहस्थ अवस्था की पत्नी ने भी आर्यिका दीक्षा लेकर श्री पूर्णिमामति बनी। उनकी भी समाधि पूर्व में ही हो गई। कुछ दिन पूर्व आपके केश लोचन भी आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, मुनिश्री पुण्य सागरजी एवं अन्य साधुओं ने किए।</p>
<p><strong>52 साधुओं के संघसानिध्य में णमोकार मंत्र सुनते हुए हुआ </strong></p>
<p>22 मार्च 2025 को आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, मुनिश्री पुण्य सागरजी एवं संघ के सभी साधुओं से क्षमा याचना कर क्षमा भाव धारण कर चारो प्रकार के अन्न जल आदि का आजीवन त्यागकर यम संल्लेखना धारण कर सभी प्रकार के आहार का त्याग किया। आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, मुनि श्रीपुण्य सागरजी सहित संघ के साधु संबोधन करते रहे। यम संलेखना धारी मुनिश्री पूर्ण सागरजी का शांत परिणामो से निराकुलता सहित दिनांक 24 मार्च 2025 को पूर्वान्ह 9.50 बजे उत्कृष्ट समाधि मरण आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, दीक्षा गुरु मुनिश्री पुण्य सागरजी सहित 52 साधुओं के संघ सानिध्य में आचार्यश्री के श्रीमुख से अरिहंत सिद्ध णमोकार मंत्र सुनते हुए हुआ। क्षपक मुनि पूर्ण सागरजी की विमान डोलयात्रा चन्द्र प्रभु संतभवन, परिसर से रवाना होकर समाधि स्थल पहुंची।</p>
<p><strong>धार्मिक विधि विधानपूर्वक अंतिम संस्कार हुए</strong></p>
<p>राजस्थान प्रांत के अनेक नगरों पारसोला, बांसवाड़ा, थांदला रीछा ,धरियावद, नरवाली, मुंगाडा, गामड़ी, दाहोद के हजारों गुरुभक्तों ने भाग लिया समाधिस्थल पर पूर्ण विधि विधान से विमान यात्रा पूर्व नियत स्थल पर ले गए जहाँ पर पूर्ण विधि विधान से समाधिस्थ मुनिश्री के धार्मिक संस्कार कर पूजन पंचामृत अभिषेक किए गए। अग्नि संस्कार पूर्व गृहस्थ अवस्था के पुत्र महावीर, राजेंद्र मेहता एवं परिजनों द्वारा किये गए।</p>
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		<title>धरियावद के भंवरलाल सरिया 9 मार्च को धारण करेंगे जैनेश्वरी दीक्षाः पिता ने भी ली थी मुनि दीक्षा </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/bhanwarlal_sariya_of_dhariavad_will_take_jain_initiation_on_march_9/</link>
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		<pubDate>Thu, 06 Mar 2025 13:17:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धरियावद निवासी भंवरलाल सरिया आगामी 9 मार्च, रविवार को श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर सभागार में श्री वर्धमान सागरजी के सिद्धहस्त करकमलों से भव्य जैनेश्वरी दीक्षा धारण कर आत्म-कल्याण हेतु वैराग्य पथ पर अग्रसर होंगे। वैराग्य पथ पर अग्रसर होने की पुण्य प्रेरणा श्री पुण्य सागरजी एवं श्री हितेंद्र सागरजी से प्राप्त हुई और श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धरियावद निवासी भंवरलाल सरिया आगामी 9 मार्च, रविवार को श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर सभागार में श्री वर्धमान सागरजी के सिद्धहस्त करकमलों से भव्य जैनेश्वरी दीक्षा धारण कर आत्म-कल्याण हेतु वैराग्य पथ पर अग्रसर होंगे। वैराग्य पथ पर अग्रसर होने की पुण्य प्रेरणा श्री पुण्य सागरजी एवं श्री हितेंद्र सागरजी से प्राप्त हुई और श्री वर्धमान सागरजी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए धरियावद से अशोक कुमार जेतावत की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> धर्मनगरी धरियावद निवासी भंवरलाल सरिया उम्र 76 वर्ष आगामी 9 मार्च, रविवार को श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर सभागार में वात्सल्य वारिधि आचार्य शिरोमणि श्री वर्धमान सागरजी के सिद्धहस्त कर कमलों से भव्य जैनेश्वरी दीक्षा धारण कर आत्म-कल्याण हेतु वैराग्य पथ पर अग्रसर होंगे। भंवरलालजी सरिया को वैराग्य पथ पर अग्रसर होने की पुण्य प्रेरणा प्रज्ञा श्रमण श्री पुण्य सागर जी एवं श्री हितेंद्र सागरजी से प्राप्त हुई और आचार्य श्री वर्धमान सागरजी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>जीवन परिचय, लौकिक शिक्षा एवं विवाह  </strong></p>
<p>भंवरलाल 7 जुलाई 1949 को पिता झमकलालजी सरिया, माता साकर बाई की कुक्षि से जन्मे अपने माता-पिता की चौथी संतान हैं। कनकमलजी, प्रेम बाईजी, पारसमलजी, भंवरलालजी, गंभीरमलजी सहित कुल चार भाई और एक बहन परिवार में रहे हैं। आपने 10वीं कक्षा तक लौकिक शिक्षा ग्रहण की है। आपका सन 1969 में प्रतापगढ़ निवासी धर्म सहायिका शकुंतला देवी से विवाह हुआ। गृहस्थ जीवन में आपके एक पुत्र गजेंद्र तथा दो पुत्रियां नीलम और सोना हैं। पुत्र गजेंद्र, पुत्रवधु कैलाश देवी और चार पौत्रियां कोमल, दिव्या, खुशी एवं आस्था हैं।</p>
<p><strong>पिता ने भी ली थी मुनि दीक्षा</strong></p>
<p>भंवरलालजी सरिया के गृहस्थ पिता झमकलालजी ने दिगंबर जैन आचार्यश्री सुपार्श्व सागरजी महाराज से धरियावद में क्षुल्लक और फिर ऐलक दीक्षा धारण की थी। इसके बाद परसाद में मुनि दीक्षा ग्रहण करते हुए उदय सागर महाराज नाम धारण किया, 8 माह के अंतराल में ही उन्होंने चावंड में सन् 1980 में समाधिमरण प्राप्त किया था।</p>
<p><strong>दिनचर्चा एवं व्यवसाय</strong></p>
<p>नियमित देवदर्शन, अभिषेक-पूजन, नगर में दिगंबर जैन मुनि-आर्यिका संघ आने पर घर पर चौका लगाना, आहार दान देना, संघ की नियमित वैयावृति, नगर के सभी जिनालयों के नियमित दर्शन करना, आपकी नियमित दिनचर्या में शामिल है। उन्होंने व्यवसाय में कपड़ा कारोबार को अपनाया।</p>
<p><strong>नियम, व्रत ग्रहण</strong></p>
<p>आपने वैसे अभी तक कोई विशेष व्रत-नियम ग्रहण नहीं किया, लेकिन जब 10वीं कक्षा में अध्ययनरत थे, तभी से मुनि संघ की प्रेरणा से रात्रि भोजन का और 1977 से चाय पीने का आजीवन त्याग रहा है।</p>
<p><strong>दीक्षा लेने वाले 14वें पुण्यात्मा होंगे</strong></p>
<p>भंवरलालजी सरिया धर्म नगरी, धरियावद से जैनेश्वरी दीक्षा लेने वाले 14वें पुण्यात्मा होंगे। इनसे पहले अभी तक ज्ञात 13 नगर गौरव मुनि या आर्यिका दीक्षा ले चुके हैं। जो इस प्रकार है-श्री सुधर्म सागरजी (समाधिस्थ), श्री उदय सागरजी (समाधिस्थ), श्री समाधि सागरजी (समाधिस्थ), श्री प्रवेश सागरजी (समाधिस्थ), श्री श्रेयस सागरजी (समाधिस्थ), श्री वत्सलमति माताजी, आर्यिका श्री श्रेयमति माताजी (समाधिस्थ), श्री उदित सागरजी, आर्यिका श्री उत्साह मति माताजी, श्री पद्म कीर्ति सागरजी (समाधिस्थ), श्री मुमुक्षु सागरजी, आर्यिका श्री योगीमति माताजी (समाधिस्थ) और आर्यिका श्री प्रेक्षामति माताजी।</p>
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