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	<title>Shri Digambar Jain Shraman Sanskriti Sansthan श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>चार्तुमास में धर्म सभा का आयोजन : दूसरों की प्रशंसा करते-करते स्वयं के अस्तित्व को न भूलें -मुनि श्री सुधासागर </title>
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		<pubDate>Mon, 30 Oct 2023 17:36:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हरिपर्वत स्थित महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर में धर्मसभा का प्रारम्भ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर हुआ। इस अवसर पर निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि लोग कहते हैं कि अच्छा समय आएगा, हम अच्छे हो जाएंगे। नहीं, समय कभी अच्छा आता ही नहीं लेकिन यदि हम अच्छे [&#8230;]]]></description>
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<p><span style="color: #000000;">हरिपर्वत स्थित महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर में धर्मसभा का प्रारम्भ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर हुआ। इस अवसर पर निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि लोग कहते हैं कि अच्छा समय आएगा, हम अच्छे हो जाएंगे। नहीं, समय कभी अच्छा आता ही नहीं लेकिन यदि हम अच्छे हो गए तो सारा समय अच्छा ही होता है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राहुल जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></span></p>
<hr />
<p>आगरा। हरिपर्वत स्थित महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर में धर्मसभा का प्रारम्भ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर हुआ। जिसमें श्रावक परिवार ने मुनिश्री का पाद प्रक्षालन कर मुनिश्री को शास्त्र समर्पित किए। मंच का संचालन मनोज जैन ने किया l</p>
<p>अच्छे हो जाएं तो सब अच्छा हो जाएगा</p>
<p>इस अवसर पर निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि लोग कहते हैं कि अच्छा समय आएगा, हम अच्छे हो जाएंगे। नहीं, समय कभी अच्छा आता ही नहीं लेकिन यदि हम अच्छे हो गए तो सारा समय अच्छा ही होता है। संसार जैसा था वैसा ही रहेगा, उसे बदलने की नहीं, समझने की चेष्टा करना। सृष्टि हमारे अनुसार नहीं चलेगी, हमें सृष्टि के अनुसार चलना पड़ेगा। संसार मे जो कुछ भी पाप है वे पाप रहेंगे लेकिन हमे कुछ ऐसी कला सीखनी है कि पाप और पापियों के बीच मे रहकर भी हम पापी नहीं कहलाएं। न अष्टमी अच्छी है, न चतुर्दशी अच्छी है, न अष्टानिका अच्छी है, न दशलक्षण अच्छे हैं। यदि हम अच्छे हो गए तो अमावस्या भी अच्छी है, शुभ है। सबसे अशुभ तिथि है स्वभाव से अमावस्या लेकिन भगवान महावीर के अच्छे होने पर सबसे अशुभ तिथि भी शुभ बन गई। इस दुनिया का रिमोट कंट्रोल किसके हाथ में है, हमारे हाथ में है। पूज्यवर कहते हैं कि होगा वही जो आत्मा को मंजूर है। जो भी बिगड़ रहा है हमने बिगाड़ा है, जो भी बनेगा हमसे बनेगा। कोई दुनिया की ताकत मेरी जिंदगी को बिगाड़ नहीं सकती, किसी में ताकत नहीं। समयसार पढ़ते समय ये अनुभूति करें मैं दुनिया का सर्वशक्तिमान व्यक्तित्व हूं, द्रव्य हूं। दुनिया का सबसे पवित्र आदमी मैं हूँ, अपने को शाबाशी दो। हम दूसरों की प्रशंसा करते-करते स्वयं के अस्तित्व को भूल जाते है। जब व्यक्ति को असमर्थता की अनुभूति महसूस होती है तो नीति कहती है कि तुम्हें जो चाहिए है वो तुम्हारे पास नहीं है क्या, नहीं है तो फिर तुम्हारी सब कुछ स्वाधीनता खत्म हो गयी। हमारे पास दो तरीके हैं जीने को। पहला तरीका है कि जो तुम्हारे पास नहीं है और वो किसी के पास है तो तुम्हें कैसा लग रहा है। क्या एक अहोभाग्य, शगुन भाव आया। उसको देखते ही तुम्हारा रोम रोम पुलकित हो जाये और उसके वैभव को देखकर के तुम्हें जय जिनेंद्र का भाव आ जाए समझ लेना तुम्हारा भविष्य बहुत उज्ज्वल है। मैं हीरा नहीं हूं, मैं हीरा बन नही सकता, चारों तरफ से निर्णय हो गया है, अब आनंद लेना है, रोने नहीं बैठ जाना।</p>
<p>लेने का भाव मत रखो</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि पंचमकाल में कोई व्यक्ति हीरा नहीं बन सकता, भगवान नहीं बन सकता लेकिन आनंद लेना है तुम्हे अनुभूति हो जाये इतनी सी &#8211; मैं हीरा तो नही हूं लेकिन सौभाग्य है मेरा, मैं हीरा को पहचानता हूं, मैं वो शक्ति हूं जो हीरा का मूल्य आंकता हूँ, मैं वो शक्ति हूं। मेरे कथन पर हीरा बाजार में अनमोल हो जाता है। किसी समर्थवान व्यक्ति से कुछ लेने का भाव आना हमारी शक्तियों को समाप्त करना है। हमारा वीक पॉइंट है कि हम किसी भी व्यक्ति को अपनी चाहत की वस्तु देखकर के उससे लेने का भाव करते हैं, लेने का भाव करते ही हमारा पुण्य क्षय होगा। पर की वस्तु कभी फोकट में आने वाली नहीं है, उसका बिल लगता है। जिंदगी में एक ही बात का वरदान मांगो, एक साधना, एक ही तपस्या करो, मुझे जिंदगी में कभी किसी से कुछ भी लेने की जरूरत न पड़े, भाव भी न हो, भगवान से भी नहीं, गुरु से भी नहीं क्योंकि जैसे ही लेने का भाव आता है हमारा पुण्य क्षीण हो जाता है। उन्होंने कहा कि हम कितने भी अभाव में क्यों न हो जो मेरे पास चीज नहीं है वो किसी के पास है तो उससे हम लेने का भाव नहीं करेंगे। यदि लेने का भाव आ भी जाये तो, लेने का भाव तो है लेकिन मागूंगा नहीं। आशीर्वाद भी मांगकर नहीं लूंगा। यदि मांगकर लिया है तो कर्ज है और उसने दिया व तुमने ले लिया तो खर्च है।</p>
<p>धर्म सभा में ये रहे मौजूद</p>
<p>धर्म सभा में प्रदीप जैन पीएनसी, निर्मल मोठ्या, मनोज बाकलीवाल, नीरज जैन, पन्नालाल बैनाड़ा, हीरालाल बैनाड़ा, जगदीश प्रसाद जैन, राजेश सेठी, अमित जैन बॉबी, राजेश सेठी, विवेक बैनाड़ा, महेश जैन, अनिल जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन, राजेश बैनाड़ा, नरेश जैन, सुरेन्द्र पांडया, अंकेश जैन, राहुल जैन, समकित जैन, राजेश जैन सहित आगरा सकल जैन समाज के बडी़ संख्या में गुरुभक्त उपस्थित रहे।</p>
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		<title>सुधादेशना स्नातक परिषद संगोष्ठी का अंतिम सत्र :   बड़ों की कृपा होने से हो जाते हैं सारे काम- मुनि श्री सुधासागर महाराज </title>
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		<pubDate>Sun, 29 Oct 2023 09:33:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हरीपर्वत स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में तीन दिवसीय स्नातक परिषद अधिवेशन एवं युवा परिषद संगोष्ठी आयोजित हुई। इसके अंतिम दिन मुनिपुगंव श्री सुधासागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि बड़ों से कभी अपने कार्य नहीं कराना, हो [&#8230;]]]></description>
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<p><span style="color: #000000;">हरीपर्वत स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में तीन दिवसीय स्नातक परिषद अधिवेशन एवं युवा परिषद संगोष्ठी आयोजित हुई। इसके अंतिम दिन मुनिपुगंव श्री सुधासागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि बड़ों से कभी अपने कार्य नहीं कराना, हो सके तो बड़ों के सारे कार्य तुम्हें करना है ये शगुन है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए शुभम जैन की विशेष रिपोर्ट&#8230;.</span></span></p>
<hr />
<p>आगरा। हरीपर्वत स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में तीन दिवसीय स्नातक परिषद अधिवेशन एवं युवा परिषद संगोष्ठी के अंतिम दिन शरद पूर्णिमा के अवसर पर संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के अवतरण दिवस पर श्रमण संस्कृति संस्थान के युवा विद्वानों ने संगीतमय होकर भक्ति का समां बांध दिया। जैन धर्म की शान आचार्य़ श्री विद्यासागर जी महाराज के 77वें अवतरण दिवस पर आयोजित हुए तीन दिवसीय स्नातक सम्मेलन का समापन हुआ और इस पावन बेला में श्री दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति के पदाधिकारियों द्वारा सभी अतिथियों का सम्मान किया गया। भक्ति के इस क्रम में श्रमण संस्कृति संस्थान के वर्ष 1997 से लेकर वर्तमान तक के बैच के स्नातक विद्वानों ने श्रमण संस्कृति के जनक मुनिपुगंवश्री को अर्घ्य अर्पित कर वंदन किया। तत्पश्चात बाहर से आए हुए गुरुभक्तों ने मुनिश्री का पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-51025" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/af94535f-ea08-47fb-9224-2ba93f38d137-1024x683.jpeg" alt="" width="1024" height="683" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/af94535f-ea08-47fb-9224-2ba93f38d137-1024x683.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/af94535f-ea08-47fb-9224-2ba93f38d137-300x200.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/af94535f-ea08-47fb-9224-2ba93f38d137-768x512.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/af94535f-ea08-47fb-9224-2ba93f38d137-414x276.jpeg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/af94535f-ea08-47fb-9224-2ba93f38d137-470x313.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/af94535f-ea08-47fb-9224-2ba93f38d137-640x426.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/af94535f-ea08-47fb-9224-2ba93f38d137-130x86.jpeg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/af94535f-ea08-47fb-9224-2ba93f38d137-187x124.jpeg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/af94535f-ea08-47fb-9224-2ba93f38d137-990x660.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/af94535f-ea08-47fb-9224-2ba93f38d137-1320x880.jpeg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/af94535f-ea08-47fb-9224-2ba93f38d137.jpeg 1368w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" />पहले जिनवाणी है बाद में दुनिया</p>
<p>इस अवसर पर मुनिपुगंव श्री ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भाग्य की जब तुम्हारे अंदर तीन बातें आएं तो समझ लेना, तुम्हारा बहुत बड़ा अशुभ दिन शुरू हो गया है। पहला तो सबसे बड़ा अपशगुन है कार्य शुरू करने के पहले, जिंदगी शुरू करने के पहले, प्रातःकाल उठने के पहले, जन्मदिन मनाते समय, नववर्ष या जिसे आप माह का प्रारंभ मानते हैं, उस समय होगा वही जो होना है होगा, ऐसा विचार आ गया निश्चित आपकी जिंदगी का अपशगुन हो गया। सारे अपशगुन टाले जा सकते है लेकिन यदि ये परिणाम आ गया तो वह कार्य तुमसे होगा ही नहीं। दूसरा है भगवान भरोसे, बड़ो के भरोसे। बड़ों की कृपा हो जाये, भगवान की कृपा हो जाये तो ये कार्य हो सकते हैं, आपने खुद अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली, बड़े भी फेल हो जाएंगे। बड़ों से आशीर्वाद उनका नाम लेना अलग चीज है। बडे मेरा कार्य कर दें, वो भगवान, गुरु, मां-बाप कोई भी हो सकता है। किसी बालक को ये भाव आ गया- माता-पिता की वसीयत मुझे मिल जाए, बहुत सम्पत्ति है तो मेरी जिदंगी में सुख हो जाएगा समझ लेना तुम्हारी पूरी जिंदगी रोते हुए गुजरेगी। बड़ों से कभी कुछ भी कराने का भाव, ये कार्य मेरा बड़ा कर देगे तो हमारा कार्य हो जाएगा, ये दूसरा अपशगुन अपनी जिंदगी में कभी मत आने देना। बड़ों से कभी अपने कार्य नहीं कराना, हो सके तो बड़ों के सारे कार्य तुम्हें करना है ये शगुन है। आप भोजन करने जा रहे हो थोड़ा किसी बड़े को, अपने मां-बाप को एक ग्रास अपने हाथ से खिला देना, परोस देना वो प्रसाद बन जायेगा। जैनदर्शन में साधु को आहार देकर भोजन करने की परंपरा क्या है। जो कार्य भोजन के बाद करना है, वही भोजन तुम महाराज को देकर करोगे, तो तुम्हारा वह भोजन जो बाद में खाओगे वह प्रसाद के समान ऊर्जात्मक हो जाता है, उसकी एनर्जी बहुत बढ़ जाती है क्योंकि तुमने इसमें से पहले महाराज को दिया है। धर्म के लिए बड़ों के लिए बचा हुआ देना भिखारी को दिया जाता है और भोगने के पहले देना भिक्षुक को दिया जाता है। हर चीज में यही लगाना, समय बचेगा तो मन्दिर चले जायेंगे, समय बचेगा तो मां-बाप की सेवा कर लेंगे महानुभाव बहुत बड़ा दोष है समय बचेगा तो तुमने धर्म का सबसे बड़ा अपमान किया है। यानी दुनिया में सबसे बेकार चीज है धर्म जो समय बचेगा तो कर लेंगे। अरे धर्म वो अनमोल चीज है कि दुनिया के लिए समय बचेगा तो दे देंगे पहले हम धर्म करेंगे, ये धर्म का सम्मान है। पहले हम मन्दिर बनाएंगे, बचा रहेगा तो मकान बनाएंगे। पहले हम स्वाध्याय करेंगे, 5 मिनिट सही, 2 मिनिट, 1 मिनिट करेंगे, चलो कुछ नहीं करेगे तो जिनवाणी मां का दर्शन करेंगे, पहले जिनवाणी है बाद में दुनिया है। तीसरा अपशगुन कभी मत करना भाग्य भरोसे, मेरी किस्मत में जो लिखा है वही होगा। कब कार्य प्रारंभ के समय, सुबह उठते समय, शुभ कार्य के समय। पॉजिटिव नहीं पावर थिंकिंग- अब वही होगा जो मैं करूंगा, वही जीऊंगा जो जिंदगी मुझे जीना है, वही बनूंगा जो मुझे बनना है, वही देखूंगा जो मुझे देखना है, सब कुछ मेरे हाथ में है। भगवान के हाथ में नहीं, किस्मत के हाथ में नहीं, बड़ों के हाथ में नहीं। जैनी कभी बासा भाग्य नहीं खाता।</p>
<p>ये रहे मौजूद</p>
<p>परिषद अधिवेशन में प्रदीप जैन पीएनसी, निर्मल मोठ्या, मनोज बाकलीवाल, नीरज जैन, पन्नालाल बैनाड़ा, हीरालाल बैनाड़ा, जगदीश प्रसाद जैन, राजेश सेठी, अमित जैन बॉबी, राजेश सेठी, विवेक बैनाड़ा, महेश जैन, अनिल जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन, राजेश बैनाड़ा, नरेश जैन, सुरेन्द्र पांडया, अंकेश जैन, राहुल जैन, समकित जैन, राजेश जैन सहित आगरा सकल जैन समाज के बडी़ संख्या में गुरुभक्त उपस्थित रहे।</p>
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		<title> सुधादेशना स्नातक परिषद संगोष्ठी का तृतीय सत्र :  आजीविका के लिए ज्ञान न करें, धर्मिक जीवन के लिए करें &#8211; मुनि श्री सुधासागर महाराज </title>
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		<pubDate>Sat, 28 Oct 2023 11:13:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हरीपर्वत स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में तीन दिवसीय स्नातक परिषद अधिवेशन एवं युवा परिषद संगोष्ठी का आयोजन चल रहा है। जिसके दूसरे दिन मुनिपुगंव श्री सुधासागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि जिनेंद्र देव यह नहीं कहते [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><span style="color: #000000;">हरीपर्वत स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में तीन दिवसीय स्नातक परिषद अधिवेशन एवं युवा परिषद संगोष्ठी का आयोजन चल रहा है। जिसके दूसरे दिन मुनिपुगंव श्री सुधासागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि जिनेंद्र देव यह नहीं कहते हैं कि मैंने जान लिया तुम्हें कोई जरूरत नहीं। जिनेंद्र देव कहते हैं, मैंने जो जाना है उसे तुम भी जानो जिससे तुम यह न कह सको कि जिनेंद्र देव के जाने हुए ज्ञान से हमारी जिंदगी चल रही है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए शुभम जैन की विशेष रिपोर्ट&#8230;.</span></span></p>
<hr />
<p>आगरा। हरीपर्वत स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में तीन दिवसीय स्नातक परिषद अधिवेशन एवं युवा परिषद संगोष्ठी का आयोजन चल रहा है। जिसके दूसरे दिन बीते 27 अक्टूबर को अधिवेशन का शुभारंभ भक्तों ने श्रमण संस्कृति के युवा विद्वान ने संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं निर्य़ापक श्रमण मुनिपुगंव श्री को नमन करते हुए मंगलाचरण की प्रस्तुति के साथ किया। मंगलाचरण के बाद विशिष्ट अतिथियों ने चित्र अनावरण और दीप प्रज्वलन किया। सौभाग्यशाली भक्तों ने मुनिश्री का पादप्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p>भगवान हमारे सीनियर हैं</p>
<p>इस अवसर पर मुनिपुगंव श्री सुधासागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि जिनेंद्र देव यह नहीं कहते हैं कि मैंने जान लिया तुम्हें कोई जरूरत नहीं। जिनेंद्र देव कहते हैं, मैंने जो जाना है उसे तुम भी जानो जिससे तुम यह न कह सको कि जिनेंद्र देव के जाने हुए ज्ञान से हमारी जिंदगी चल रही है। तुम खुद जानो कि जिनेंद्र देव क्या जानते है। तुम खुद समझो कि जिनेंद्र देव ने जो कहा है वो कितना सत्य है और उस सत्यता को जब आत्मा से निकलने लगे जाता है, तब यह भगवान की जिनवाणी हमारे आत्मा का श्रुतज्ञान बन जाता है। कुन्दकुन्द भगवान ने शब्द दिए हैं ज्ञान नहीं दिया, जिनेंद्र भगवान शब्द दे सकते है ज्ञान नहीं क्योंकि ज्ञान का आत्मा के साथ समवाह सम्बंध है, तादात्म्य सम्बन्ध है। भगवान का जो ज्ञान है वो उनके पास रहेगा, हमारे पास नहीं आ सकता। जब ज्ञान दे ही नहीं सकते तो भगवान ने हमें ज्ञान नहीं दिया, शब्द दिए और शब्दों में ऐसा अर्थ निहित कर दिया कि उस अर्थ को हमें पकड़कर हमारी ज्ञान की पर्याय बन जाये। जो शब्द हमने सुने हैं, वो तो द्रव्य श्रुत हैं, उपचार से ज्ञान है। जो शब्द हमारे कानों में पड़े हैं वो शब्द हमारे श्रुतज्ञान को उत्पन्न होने में निमित्त बने और वो ज्ञान हमारा जो जाए। जिनगुण सम्पत्ति होऊ मज्झम जिनेंद्र भगवान का ज्ञान हमारा ज्ञान बने इसके लिए श्रमण संस्कृति ही समर्थ है। विश्व में ऐसा कोई भी दर्शन नहीं है जो भगवान के समान बने का अधिकार देता है और श्रमण संस्कृति का मुख्य उद्देश्य यही है कि भगवान जो जान रहे हैं, उससे ही नहीं मानना ये श्रमण संस्कृति नहीं है, ये तो भगवान संस्कृति है, ये तो श्रद्धा की संस्कृति है। श्रमण संस्कृति का अर्थ है जो भगवान जानते हैं उसे मैं भी जानूंगा, इसका नाम है श्रमण संस्कृति। भगवान हमारे मालिक नहीं है, भगवान हमारे सीनियर हैं और हम उनके जूनियर हैं, वो हमसे एक कदम आगे चले हैं, हम उनके कदमों पर चल रहे हैं लेकिन चल हम भी रहे हैं। आप आजीविका के लिए ज्ञान न करें धर्म का, जीवन के लिए करें, आजीविका की गारन्टी मेरी है, जिनवाणी मां की है, जिनेंद्र देव की है। जीवन यदि तुम्हारा लक्ष्य है तो आप कभी भी किताब पढ़ने के बाद भूलेंगे नहीं, शास्त्र पढ़ने के बाद वो तुम्हारी जिंदगी में रहेगा। यदि जीवन के लिए पढ़ा है तो जिंदगी भर आपका स्वाध्याय होना चाहिए।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-50866" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer-1024x682.jpeg" alt="" width="1024" height="682" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer-1024x682.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer-300x200.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer-768x512.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer-1536x1023.jpeg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer-414x276.jpeg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer-470x313.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer-640x426.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer-130x86.jpeg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer-187x124.jpeg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer-990x660.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer-1320x879.jpeg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer.jpeg 1600w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" />वाचन कर रहे आलेखों का</p>
<p>इस स्नातक परिषद अधिवेशन एवं युवा राष्टीय विद्वत संगोष्ठी के तीन दिवसीय आयोजन में पूज्यश्री कुंद-कुंद स्वामी द्वारा रचित पंचास्ती काय ग्रंथ पर अनेक विषयों पर आलेख लिखकर महान युवा विद्वान यहां पहुंचे हैं और निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में अपने द्वारा लिखित आलेखों का वाचन कर रहे हैं। स्नातक परिषद अधिवेशन एवं युवा परिषद संगोष्ठी का समापन 28 अक्टूबर को होगा। इस स्नातक परिषद अधिवेशन में प्रदीप जैन पीएनसी, निर्मल मोठ्या, मनोज बाकलीवाल, नीरज जैन, पन्नालाल बैनाड़ा, हीरालाल बैनाड़ा, जगदीश प्रसाद जैन, राजेश सेठी, अमित जैन बॉबी, राजेश सेठी, विवेक बैनाड़ा, महेश जैन, अनिल जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन, राजेश बैनाड़ा, नरेश जैन, सुरेन्द्र पांडया, अंकेश जैन, राहुल जैन, समकित जैन, राजेश जैन सहित आगरा सकल जैन समाज एवं कोटा, जयपुर, अजमेर,खातेगांव से बडी़ संख्या में गुरुभक्त उपस्थित रहे।</p>
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		<title> मुनि श्री सुधासागर महाराज का रहेगा सानिध्य : तीन दिवसीय स्नातक परिषद अधिवेशन एवं युवा परिषद संगोष्ठी का हुआ शुभारंभ </title>
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		<dc:creator><![CDATA[संपादक]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Oct 2023 16:07:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में तीन दिवसीय स्नातक परिषद अधिवेशन एवं युवा परिषद संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। इसके अन्तर्गत मुनिपुंगव श्री सुधासागर महाराज ने युवा विद्वानों के ज्ञान को और प्रकाशित किया। पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230; आगरा। हरीपर्वत [&#8230;]]]></description>
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<p>हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में तीन दिवसीय स्नातक परिषद अधिवेशन एवं युवा परिषद संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। इसके अन्तर्गत मुनिपुंगव श्री सुधासागर महाराज ने युवा विद्वानों के ज्ञान को और प्रकाशित किया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></p>
<hr />
<p>आगरा। हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में तीन दिवसीय स्नातक परिषद अधिवेशन एवं युवा परिषद संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। इसके अन्तर्गत मुनिपुंगव श्री सुधासागर महाराज ने युवा विद्वानों के ज्ञान को और प्रकाशित किया। अधिवेशन का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ किया, साथ ही बाहर से आए गुरु भक्तों ने संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया। तत्पश्चात सौभाग्यशाली भक्तों ने मुनि श्री का पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-50867" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer2-1024x682.jpeg" alt="" width="1024" height="682" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer2-1024x682.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer2-300x200.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer2-768x512.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer2-1536x1023.jpeg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer2-414x276.jpeg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer2-470x313.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer2-640x426.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer2-130x86.jpeg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer2-187x124.jpeg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer2-990x660.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer2-1320x879.jpeg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer2.jpeg 1600w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" />भगवान जो कहते हैं, सही कहते हैं<br />
इस अवसर पर मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि जिनेंद्र भगवान ने कहा है, इसलिए सही नहीं है। जो सही है वह भगवान ने कहा है। इसलिए मैं भगवान को मानता हूं क्योंकि वह सही कहते हैं। जीव की एक विशेषता होती है। वो खुद जानना चाहता है क्योंकि जीव का स्वभाव जानना है। हमारे आचार्यों ने कहा कि जैसा भगवान ने कहा, वैसा मान लो, मान लेता हूं लेकिन अंदर से आता है थोड़ा जान भी लेना चाहिए। जैन दर्शन और दुनिया के दर्शनों में यही अंतर है। दुनिया के दर्शन में मात्र और मात्र मानना है, कुछ तुम्हें जानना नहीं है। जानना भगवान के खिलाफ खड़े होना है। जानने की बात सोचना भगवान पर संदेह करना है। अन्य दर्शन कहते हैं कि अपने अस्तित्व को खोकर सम्पूर्ण रूप से उस महासत्ता के आधीन हो जाना, उसमे मिल जाना नहीं, मिल जाना अलग चीज है। यहीं से हटकर जैन दर्शन कहता है भगवान को स्वीकार करने का यह अर्थ नहीं है कि भगवान के आधीन हो जाएं बल्कि भगवान की सत्ता को स्वीकार करने का अर्थ है कि हम स्वाधीन हो जाएं। अच्छे मार्ग पर चलने वाले कमजोर क्यों होते है। इसलिए जैनाचार्यों ने कहा कि तुम कमजोर रहो या बलजोर रहो, हम तुम्हें अपने अधीन नहीं करेंगे कि तुम हमारे अनुसार चलो। पहला दर्शन है जैन दर्शन, जिसमें भगवान ने कहा यदि तुम मुझे मानते हो और यदि तुम्हें कुछ भी जानने की इच्छा नहीं है तो तुम जैनी नहीं हो सकते। जैन दर्शन की विशेषता है तुम मानो भी लेकिन अपनी शक्ति के प्रमाण जानो भी। जैनदर्शन में भगवानों को लेकर ग्रंथों की संख्या बहुत कम है, जिसे हम प्रथमानुयोग कहते हैं लेकिन तीन अनुयोगों में क्या है सृष्टि का स्वरूप तुम जानो। भगवान आपने तो जान लिया, नहीं, मेरे जानने से नहीं होगा तुम जानो। तीनों अनुयोगों का विषय हमारे ज्ञान गम्य नहीं है। प्रथमानुयोग का विषय हमारे ज्ञान का विषय है। हमें पता नहीं रत्नत्रय लेश्याएं, आत्मा क्या होती है, ये हमारे ज्ञान का विषय नहीं, हमें देखने में ही नहीं आ रहा। तिरेसठ सलाका पुरुष तो देखने में आ रहे हैं। जो हमारे ज्ञान का विषय नहीं है तो उसे हम क्यों जाने। सीधे कह दो कि भगवान ये सब विषय आपके हैं, आप प्रत्यक्ष देख रहे हैं,जान रहे हैं, हम आपको स्वीकार करते हैं, आपको मानते हैं। महावीर स्वामी कहते है नहीं, जो वस्तु तुम्हारे ज्ञान के प्रत्यक्ष नहीं है, उसे अनुमान से जानो, लक्षण से जनो, शब्द से जानो, नय से जानो, मत से जानो। तुम्हारे ज्ञान का विषय नहीं है तो भी जानो, पढ़ो। क्यों पढ़ूं, समय खराब करूं। बोले नहीं तुम्हें पढ़ना है। भगवान ने कहा, सो सत्य नहीं। तुम्हें ये घोषणा करनी है कि मैं दावा करता हूं जो सत्य है वही भगवान ने कहा है। भगवान को अपनी आस्था में रखो, श्रद्धा में रखो, अपने मन के संदेह मिटाने के लिए रखो, स्वयं को जब तत्व में संदेह हो जाए तो कहना- नहीं, भगवान ने कहा है लेकिन जब सामने वाला आए तो ये तत्व नहीं रखना कि भगवान ने कहा है, तुम ये रखना यही सत्य है। पंचास्तिकाय ग्रन्थ को पूज्यवर ने इसलिए लिखा कि तुम खुद स्वाध्याय करो तुम समझो सृष्टि को, भगवान ने कह दिया है तो चुपचाप मत बैठो तुम खुद समझो ज्ञान में। जो ज्ञानी होकर पढ़ सकता है, समझ सकता है, तर्क- वितर्क जान सकता है और वो स्वाध्याय नहीं करता है। ये सबसे बड़ा निन्हव है। अधिवेशन का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल ने किया|।</p>
<p>जैन समाज रहा मौजूद</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-50868" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer3-1024x682.jpeg" alt="" width="1024" height="682" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer3-1024x682.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer3-300x200.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer3-768x512.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer3-1536x1023.jpeg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer3-414x276.jpeg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer3-470x313.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer3-640x426.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer3-130x86.jpeg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer3-187x124.jpeg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer3-990x660.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer3-1320x879.jpeg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/10/sanganer3.jpeg 1600w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" />स्नातक परिषद अधिवेशन एवं युवा परिषद संगोष्ठी का समापन 28 अक्टूबर को होगा। तीन दिवसीय अधिवेशन से पूरे भारतवर्ष को पता चलेगा कि ज्ञान के मंथन के लिए होता है स्नातक सम्मेलन। इस धर्मसभा में प्रदीप जैन पीएनसी, निर्मल मोठ्या, मनोज जैन बाकलीवाल, नीरज जैन जिनवाणी, पन्नालाल बैनाड़ा, हीरालाल बैनाड़ा, जगदीश प्रसाद जैन, राजेश सेठी, अमित जैन बॉबी, राजेश जैन गया वाले, विवेक बैनाड़ा, शैलेंद्र जैन, अनिल जैन, नरेश जैन, दिलीप जैन, अंकेश जैन, मीडिया प्रभारी,शुभम जैन, राहुल जैन सहित आगरा सकल दिगंबर जैन समाज के लोग बडी़ संख्या में मौजूद रहे।</p>
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