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	<title>shreephaljainnews &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>चिंतन का विषय -4  धर्म की जगह व्यक्ति प्रभावना क्यों ?</title>
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		<pubDate>Mon, 28 Nov 2022 07:56:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हमारी धार्मिक और सामाजिक स्थिति इतने कमजोर होती जा रही है कि हम अपना अस्तित्व ही समाप्त करते जा रहे हैं। पंथ, संत और अहिंसा के नाम पर धर्मिक परम्पराओं, क्रियाओं और व्यवस्थाओं में श्रावक की श्रद्धा लुप्त होती जा रही है। इन सब का परिणाम यह हो रहा है जैन संस्कृति और संस्कारों को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हमारी धार्मिक और सामाजिक स्थिति इतने कमजोर होती जा रही है कि हम अपना अस्तित्व ही समाप्त करते जा रहे हैं। पंथ, संत और अहिंसा के नाम पर धर्मिक परम्पराओं, क्रियाओं और व्यवस्थाओं में श्रावक की श्रद्धा लुप्त होती जा रही है। इन सब का परिणाम यह हो रहा है जैन संस्कृति और संस्कारों को बताने वाले प्राचीन मंदिर, दिगम्बर साधु और शास्त्र इन सब की उपेक्षा होती जा रही है। जो मंदिर, शास्त्र और दिगम्बर संत अधिक लोकप्रिय या प्रसिद्ध हैं उनकी उप्रेक्षा तो नही हो रही है पर जो मंदिर, शास्त्र और दिगम्बर साधु मात्र साधना करते हैं पढ़ते और पढ़ाते हैं उनकी उपेक्षा हो रही है।</p>
<p>क्या समाज ने कभी उनके लिए चिंतन किया कि उनका आगे क्या होगा? ऐसा दिखता है कि वर्तमान में प्राचीन मंदिरों के इतिहास और दिगम्बर संतो के मूलगुणों से अधिक उपासना व्यक्ति विशेष की हो रही है। गुणों को तो गौण कर दिया गया है इसलिए धर्म की प्रभावना से अधिक व्यक्ति विशेष की प्रभावना हो रही है। आज स्थिति यह है कि हम किसी को बिना जाने, बिना उससे मिले, मात्र उसके बारे में सुनकर कर उस व्यक्ति, संत और मंदिर के प्रति धारण बना लेते हैं और फिर वहाँ जाते नही हैं ओर ना ही उसकी साधना में सहयोगी बनते हैं, बल्कि उसकी निंदा आलोचना करते हैं। हो सकता है किसी का पुराना व्यवहार ऐसा रहा हो या आचरण में कमी हो पर यदि उसने स्वयं को व्यवस्थित कर लिया हो तो पुरानी बातों को याद कर अभी भी उस से वैसा ही व्यवहार करना उचित नही है। अगर इसी विचार पर चलें तो रावण और महावीर को तीर्थंकर नही मान सकते है क्योंकि 365 मिथ्या मत की स्थापना महावीर ने अपने पूर्व भव में मरीचि के रूप में की थी और रावण ने सीता का हरण किया था।</p>
<p>जैन धर्म मे कहा है कि व्यक्ति की नही उसके अंदर की बुराइयों से घृणा करो। समाज ने पंथ और संत वाद में यही दृष्टि रखना बंद कर दिया है। उसके परिणाम भी हम देख रहे हैं कि समाज का स्तर कितना गिर रहा है। इस गिरावट के पीछे कारण है व्यक्ति विशेष की पूजा। सत्य है कि आज चाहे संत हो, मंदिर हो, श्रावक हो,यह सब गुणों को नही व्यक्ति को देख रहे हैं। उसका परिणाम यह है कि समाज मे कुरीतियां बढ़ रही हैं। किसी धनाढ्य, बड़े संत ने कोई कार्य धर्म के अनुसार नहीं किया तो कई कारण बताकर उस पर चर्चा नहीं की जाती है। पर वही गलती किसी कमजोर व्यक्ति से, साधक संत से हो जाए तो वह चर्चा का केन्द्र बन जाता है। उसकी उपेक्षा की जाती है। यह सब क्या है। वर्तमान में चिंतन का विषय पंचामृत अभिषेक, स्त्रियों द्वारा अभिषेक, छोटा बड़ा साधु आदि नहीं है। चिंतन का विषय यह है कि हम अपने पीढी को व्यसनों से, आधुनिक परम्परााओं से, भाषा संस्कृति से, मांसाहार करने से, धर्म और धर्मात्माओं के प्रति हो रही उपेक्षा भाव से कैसे बचा सकते हैं। इतिहास गवाह है कि जिस समाज के श्रावक का आचरण दूषित होता है उस समाज का इतिहास और अस्तित्व समाप्त होता जाता है।</p>
<p>आज यही हो रहा है। जैन धर्म के अहिंसा, अपरिग्रह आदि कई सिद्धांत समाप्ति की और जा रहे हैं। आज हम ही उनका पालन नही कर रहे हैं और ना ही हम आज धर्म का स्वाध्याय करना चाहते हैं। <span style="color: #0000ff;">तो आओ चलें&#8230;</span> एक बार अपनी धारण को बदलंे। धर्म और धर्मात्माओं को ग्राउंड लेवल से समझने के लिए तैयार रहें और एक ऐसी कडी बनाएं जिससे हमें वास्तविकता का परिचय हो सके कि आज हम कहां है और पहले कहां थे और यह सब अंतर क्यों आया इस पर चिंतन करें।</p>
<h1><strong>चिंतन का विषय की तीन कहानियां भी पढ़ लीजिए</strong></h1>
<p><a href="https://www.shreephaljainnews.com/chinta-ka-vishay/">चिंतन का विषय-3</a></p>
<p><a href="https://www.shreephaljainnews.com/jain-samaj-chintan/">चिंतन का विषय-2</a></p>
<p><a href="https://www.shreephaljainnews.com/vishay-news-jain/">चिंतन का विषय-1</a></p>
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		<title>गिरनार जी के संबंध में वाद दायर, अतिक्रमण हटाने की मांग</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/girnaar-ji-mandir/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Oct 2022 07:03:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर.राजेश जैन दद्दू । जूनागढ़ सिविल कोर्ट में सकल जैन समाज की ओर से खिल्लीमल जैन एडवोकेट अलवर एवं ग्वालियर निवासी सुभाष चंद जैन उर्फ दाऊ ने संयुक्त रूप से एक प्रतिनिधि वाद दायर किया है। इसमें जैन धर्म के पवित्र गिरनार तीर्थ क्षेत्र पर असामाजिक तत्वों द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने एवं 15 [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर.राजेश जैन दद्दू ।</strong> जूनागढ़ सिविल कोर्ट में सकल जैन समाज की ओर से खिल्लीमल जैन एडवोकेट अलवर एवं ग्वालियर निवासी सुभाष चंद जैन उर्फ दाऊ ने संयुक्त रूप से एक प्रतिनिधि वाद दायर किया है। इसमें जैन धर्म के पवित्र गिरनार तीर्थ क्षेत्र पर असामाजिक तत्वों द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने एवं 15 अगस्त, 1947 की स्थिति को बहाल करने की प्रार्थना की गई है।</p>
<p>इसके अलावा जैन तीर्थ यात्रियों को दर्शन पूजा में बाधा नहीं पहुंचाने की व्यवस्था करने के लिए सरकार व प्रशासन को पाबंद किए जाने की मांग की गई है। दिगंबर जैन युवा महासभा के प्रवक्ता राजेश जैन दद्दू ने बताया कि वाद में गुजरात सरकार, जिला कलेक्टर जूनागढ़ व केन्द्र सरकार, अल्पसंख्यक विभाग व पुरातत्व विभाग को पक्षकार बनाया गया है। जूनागढ़ सिविल कोर्ट में जैन समाज की ओर से किरीट भाई संघवी एवं मुकेश सी कामदार एडवोकेट पैरवी कर रहे हैं।</p>
<p>यह वाद दायर करने से पूर्व 25 जनवरी 2022 को मनोज कुमार जैन एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट ने दो माह का मियादी नोटिस राज्य एवं केंद्र सरकार को प्रेषित किया था, जिसका उत्तर केंद्र सरकार के गृह विभाग द्वारा मनोज कुमार जैन एडवोकेट को भेजा गया था।</p>
<p>उपरोक्त वाद दायर करने से पूर्व खिल्लीमल जैन व सुभाष चन्द्र ने पंडित विक्रम शास्त्री, अलवर पवन कुमार दीवान मुरैना आदि विद्वानों से सहयोग प्राप्त किया एवं यूनिवर्सल जैन लॉयर्स एसोसिएशन का इस कार्य में काफी सहयोग रहा है तथा वरिष्ठ अधिवक्ता सुधांशु कासलीवाल जयपुर, उजला के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार जैन, सीनियर एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट आदि से मार्गदर्शन लिया है तथा आचार्य श्री विद्यासागर जी, विशुद्ध सागर जी सुनील सागर जी, प्रज्ञसागर जी, आर्यिका ज्ञानमती, कुमुदमति माताजी से आशीर्वाद प्राप्त किया है। न्यायालय ने सारे वादपत्र के तथ्यों को पढ़ने के उपरांत एक समाचार पत्र में प्रतिनिधि वाद दायर किए जाने के नोटिस जारी करने के आदेश प्रदान किए हैं।</p>
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		<title>भोजन ही औषधि है, ऋतु के अनुसार हो भोजनचर्या &#8211; आचार्य कनकनन्दी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Oct 2022 17:02:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भीलूड़ा (राजस्था.).डॉ महेन्द्र जैन मनु । भोजन ही औषधि है। रासायनिक बदलाव के कारण ऋतु के अनुसार भोजन नहीं करने पर वह जहर बन जाता है। तुम्हारा शरीर वह है, जो तुम खाते हो ‘एज यू थिंक सो बिकम’- जैसा आप सोचते हैं, वैसा आप बन जाते हैं। यह बात आचार्य श्री कनकनंदी ने प्रवचन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भीलूड़ा (राजस्था.).डॉ महेन्द्र जैन मनु ।</strong> भोजन ही औषधि है। रासायनिक बदलाव के कारण ऋतु के अनुसार भोजन नहीं करने पर वह जहर बन जाता है। तुम्हारा शरीर वह है, जो तुम खाते हो ‘एज यू थिंक सो बिकम’- जैसा आप सोचते हैं, वैसा आप बन जाते हैं। यह बात आचार्य श्री कनकनंदी ने प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि शरीर विज्ञान के अनुसार शरीर रसायनिक संरचना डीएनए और आरएनए से बना है। भोजन भी रसायन है। दूध, दही, मट्ठा, घी का ही पर्याय है। दूध में दही डालने पर फट जाता है। आयुर्वेद में पथ्य भोजन ही औषधि है।</p>
<p>रसायनिक परिवर्तन के कारण ऋतु के अनुसार भोजन नहीं करने पर वह जहर बन जाता है। खट्टा दही नहीं खाना चाहिए। हम जिव्हा-लालसा नहीं छोड़ पाने के कारण अस्वस्थ रहते हैं। फल-ककड़ी आदि कच्चे खाने चाहिए। कुछ सब्जियां बनाकर उबालकर खाई जाती हैं। अनाज मोटा खाना चाहिए। आचार्य श्री ने कहा कि शरीर विज्ञान के अनुसार मनुष्य की संरचना अन्य जीवों से अलग हैं। हर मनुष्य की रात-दिन की, सुबह -शाम की अलग अलग प्रकृति होती है। भोजन का एक ग्रास 32 बार नहीं चबाने पर अनेक रोग हो जाते हैं तथा छोटी आंत, बड़ी आंत को अधिक मेहनत करनी पड़ती है।</p>
<p>मनुष्य की संरचना शाकाहारी भोजन के अनुसार ही बनी है। शरीर में मौजूद रसायनों के योग्य भोजन व पानी लेना चाहिए। घी बुद्धिवर्धक होता है। शरीर पुद्गल की उत्कृष्टतम संरचना है। भोजन के प्रारंभ में घृत मिश्रित मिष्ठान्न खाएं। जब शरीर की उष्णता बढ़ती है तो उस समय रसायनों का स्राव होता है। पेट में एसिड होता है, जो मीठे भोजन को जल्दी पचा लेता है। विजयलक्ष्मी जैन और अभिषेक जैन लुहाडिया ने डॉ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’ को जानकारी देते हुए बताया कि आचार्य श्री ने आगे कहा कि हमें भोजन में प्रारंभ में पानी नहीं पीना चाहिए। भोजन के अंत में भी कम ही पानी पीना चाहिए।</p>
<p>पानी को धीरे-धीरे पीना चाहिए। जिव्हा में अनेक प्रकार के रसायन होते हैं, जो भोजन को पचाते हैं। भोजन जिव्हा से पचना प्रारंभ होता है, छोटी आंत, बड़ी आंत आदि से होता हुआ लघुशंका, दीर्घशंका तक भोजन पचता है। गरम भोजन के बाद ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति का शरीर अलग-अलग होने से अलग-अलग प्रकार के भोजन की आवश्यकता रहती है। जिस प्रकार रॉकेट, कार, गाड़ी सब में अलग-अलग ईंधन की आवश्यकता होती है। आचार्य श्री ने कहा कि तुम्हें शांति और खुशी चाहिए तो प्रकृति की गोद में आओ। ये प्रवचन अन्तरराष्ट्रीय वेबीनार के रूप में भी प्रसारित हो रहे थे।</p>
<p>आचार्य श्री की शिष्या डॉ. रीता जैन मुंबई ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि रसायनिक जहर की वजह से अधिक रोग होते हैं। दूध के लिए जानवरों को ऑक्सीटोसीन इंजेक्शन लगाने के कारण हार्मोंस हमारे शरीर में जाते हैं, जिससे अनेक रोग होते हैं। शुद्ध गाय का दूध व घी खाना चाहिए, नहीं तो नहीं लेना चाहिए। जूस आदि में मिली हुई सफेद चीनी, सफेद जहर होती है। मीठा खाने के लिए देसी गुड़, लाल गुड़ खाना चाहिए। सीजनल फूड ही सुपाच्य रहता है। अलसी के बीज, बादाम, अखरोट, काजू का प्रयोग करना चाहिए। प्रोटीन में मूंग की दाल, तुवर की दाल लेनी चाहिए। जैविक खेती से बने चावल-दाल प्रयोग करना चाहिए।</p>
<p>ठंडी में ज्वार, बाजरा आदि अधिक प्रयोग करना चाहिए। नारियल तेल, तिल्ली का तेल अधिक प्रयोग करना चाहिए। लौकी व ककड़ी स्वास्थ्य के लिए अच्छी रहती है, एसिड कम करती है। टमाटर सहित भिन्न भिन्न रंगों की सब्जियां तथा फ्रूट्स खाने चाहिए। उन्होंने आचार्य श्री के लिए कहा आचार्य श्री तो मास्टर ऑफ ऑल हैं। उन्हें हर विषय का ज्ञान है।</p>
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		<title>पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के पात्रों का चयन होगा रविवार को</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/panch-kalyanak-pratishtha/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Oct 2022 09:54:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर.राजेश जैन दद्दू। नगर के प्रसिद्ध दिगंबर जैन समवशरण मंदिर, कंचन बाग की नूतन वेदी में विराजित होने वाली स्फटिक मणि और श्री शांतिनाथ भगवान की विश्व की सबसे बड़ी (4 फुट 3 इंच ऊ़ंची) मनोज्ञ एवं अतिशयकारी प्रतिमा का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव 30 नवंबर से 5 दिसंबर तक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर.राजेश जैन दद्दू।</strong> नगर के प्रसिद्ध दिगंबर जैन समवशरण मंदिर, कंचन बाग की नूतन वेदी में विराजित होने वाली स्फटिक मणि और श्री शांतिनाथ भगवान की विश्व की सबसे बड़ी (4 फुट 3 इंच ऊ़ंची) मनोज्ञ एवं अतिशयकारी प्रतिमा का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव 30 नवंबर से 5 दिसंबर तक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के आशीर्वाद एवं श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी, मुनि श्री अप्रमित सागर जी एवं मुनि श्री सहज सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में होगा। यह जानकारी महोत्सव प्रमुख आजाद जैन, अशोक खासगीवाला, अरुण सेठी एवं प्रचार प्रमुख राजेश जैन दद्दू ने देते हुए बताया कि महोत्सव के प्रमुख पात्रों का चयन मुनि संघ के सानिध्य में 16 अक्टूबर, रविवार को दोपहर 1:30 बजे समवशरण मंदिर, कंचन बाग में किया जाएगा।</p>
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		<title>गुरुदेव के अवतरण दिवस पर नेत्र शिविर का हुआ आयोजन</title>
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		<pubDate>Sun, 09 Oct 2022 15:27:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर. राजेश जैन दद्दू । संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के अवतरण दिवस पर आज शरद पूर्णिमा पर निशुल्क नेत्र शिविर, निशुल्क चश्मा एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन पंचवालयति मंदिर में किया गया। प्रचार संयोजक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि आयोजन में विशेष रूप से कासलीवाल परिवार, काला फाउंडेशन से विमला कासलीवाल, अनुपमा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर. राजेश जैन दद्दू ।</strong> संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के अवतरण दिवस पर आज शरद पूर्णिमा पर निशुल्क नेत्र शिविर, निशुल्क चश्मा एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन पंचवालयति मंदिर में किया गया। प्रचार संयोजक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि आयोजन में विशेष रूप से कासलीवाल परिवार, काला फाउंडेशन से विमला कासलीवाल, अनुपमा विकास एवं सामाजिक संसद कोषाध्यक्ष राजेन्द्र, शशि सोनी सहित विशेष जन उपस्थित हुए। शिविर में आंखों की जांच हुई एवं निशुल्क चश्मों का वितरण किया गया। विनोद चंद्रेश, सुधीर सिघंई, सुरेश चंद, घनश्याम, वीरेन्द्र, गौरव, राकेश, डॉ. पवार, डॉ. संदीप, डॉ. नीता बजाज, पंचवालयति मंदिर संघ समिति अहिंसा ग्रुप के साथी व अनेक समाज श्रेष्ठी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।</p>
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		<title>शरद पूर्णिमा की चांदनी समान आलौकिक हैं ज्ञानमती माताजी</title>
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		<pubDate>Fri, 07 Oct 2022 13:58:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज़ के लिए तुष्टि जैन की प्रस्तुति जैनसमाज की सर्वोच्च साध्वी के रूप में पूज्य हैं ज्ञानमती माताजी। आपका जन्म 22 अक्टूबर सन् 1934, शरद पूर्णिमा के दिन टिकैत नगर ग्राम (जि. बाराबंकी, उ.प्र.) के छोटेलाल जैन की धर्मपत्नी श्रीमती मोहिनी देवी के दांपत्य जीवन की प्रथम संतान के रूप में हुआ था। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>श्रीफल जैन न्यूज़ के लिए तुष्टि जैन की प्रस्तुति </strong></p>
<p>जैनसमाज की सर्वोच्च साध्वी के रूप में पूज्य हैं ज्ञानमती माताजी। आपका जन्म 22 अक्टूबर सन् 1934, शरद पूर्णिमा के दिन टिकैत नगर ग्राम (जि. बाराबंकी, उ.प्र.) के छोटेलाल जैन की धर्मपत्नी श्रीमती मोहिनी देवी के दांपत्य जीवन की प्रथम संतान के रूप में हुआ था। आपका बाल्यकाल में नाम मैना था। छोटी उम्र में आप मा को दहेज में प्राप्त ‘पद्मनंदिपंचविंशतिका’ ग्रन्थ का नियमित स्वाध्याय करती थीं। कहते हैं कि उन्होंने 11 वर्ष की आयु में अकलंक निकलंक नाटक के एक दृश्य को देखकर उसी क्षण आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत रखने जीवन में संकल्प कर लिया था। पूर्वजन्म से प्राप्त दृढ़ वैराग्य संस्कारों के बल पर मात्र 18 वर्ष की अल्प आयु में ही शरद पूर्णिमा के दिन मैना ने श्री महावीर जी में आचार्यरत्न श्री देशभूषण जी महाराज से सन् 1952 में आजन्म ब्रह्मचर्य व्रतरूप सप्तम् प्रतिमा एवं गृहत्याग के नियमों को धारण कर लिया। उसी दिन से उन्होंने जीवन भर 24 घंटे में एक बार भोजन करने के नियम भी ले लिया। इसी के साथ उनका नया नाम हुआ क्षुल्लिका वीरमती। सन् 1955 में चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की समाधि के समय कुंथलगिरी पर एक माह तक प्राप्त उनके सान्निध्य एवं आज्ञा द्वारा ‘क्षुल्लिका वीरमती’ ने आचार्य श्री के प्रथम पट्टाचार्य शिष्य-वीरसागर जी महाराज से सन् 1956 में ‘वैशाख कृष्णा दूज’ को माधोराजपुरा (जयपुर-राज.) में आर्यिका दीक्षा धारण करके ‘आर्यिका ज्ञानमती’ नाम प्राप्त किया।</p>
<p><strong>साहित्य सृजन</strong><br />
जैन समाज के इतिहास में किसी भी साध्वी ने इतने विपुल साहित्य का सृजन नहीं किया। आर्यिका ज्ञानमती माताजी की भले ही चौथी कक्षा तक हुई हो, लेकिन उन्होंने संस्कृत, मराठी, कन्नाड़, हिंदी सहित पांच भाषाओं में करीब 500 ग्रंथ लिखे हैं। इस उम्र में भी उनका लेखन का कार्य जारी है। पूज्य माताजी के द्वारा समयसार, नियमसार इत्यादि की हिन्दी-संस्कृत टीकाएं, जैनभारती, ज्ञानामृत, कातंत्र व्याकरण, त्रिलोक भास्कर, प्रवचन निर्देशिका इत्यादि स्वाध्याय ग्रंथ, प्रतिज्ञा, संस्कार, भक्ति, आदिब्रह्मा, आटे का मुर्गा, जीवनदान इत्यादि जैन उपन्यास लिखे हैं। आपने द्रव्यसंग्रह-रत्नकरण्ड श्रावकाचार इत्यादि के हिन्दी पद्यानुवाद व अर्थ, बाल विकास, बालभारती, नारी आलोक आदि का अध्ययन कर श्रद्धालुओं को ज्ञान के लिए उपलब्ध कराया है।</p>
<p><strong>मिली है डी लिट की मानद उपाधि</strong><br />
डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद द्वारा 05 फरवरी 1995 को डी.लिट्. की मानद् उपाधि से पूज्य माताजी को सम्मानित किया गया तथा दिगम्बर जैन साधु-साध्वी परम्परा में पूज्य माताजी यह उपाधि प्राप्त करने वाली प्रथम व्यक्तित्व बन गईं। इसके उपरांत 08 अप्रैल 2012 को पूज्य माताजी के 57वें आर्यिका दीक्षा दिवस के अवसर पर तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद में विश्वविद्यालय के प्रथम विशेष दीक्षांत समारोह में पूज्य माताजी को एक बार फिर डी. लिट्. की मानद उपाधि प्रदान की गई।</p>
<p><strong>प्रेरणा से विकसित तीर्थ</strong><br />
पूज्य माताजी की पावन प्रेरणा एवं आशीर्वाद से अनेक तीर्थ विकसित हुए हैं, जिनमें तीर्थंकर भगवन्तों की कल्याणक भूमियां मुख्य हैं। आपने उत्तर प्रदेश के हस्तिनापुर में जम्बूद्वीप जैन मंदिर और मांगी तुंगी में अहिंसा की प्रतिमा का निर्माण करवाया है।</p>
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		<item>
		<title>श्री अग्रवाल दिगबर जैन महासभा का क्षमावाणी पर्व एवं सम्मान समारोह</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/agarwal-digambe-jain/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Sep 2022 16:16:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[agarwal digamber jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[agra jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[digamber jain mahasabha]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal news]]></category>
		<category><![CDATA[shreephaljainnews]]></category>
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					<description><![CDATA[आगरा। श्री अग्रवाल दिगंबर जैन महासभा आगरा द्वारा क्षमावाणी पर्व एवं सम्मान समारोह शान्ति सागर सभागार एमडी जैन हरीपर्वत पर सोमवार को आचार्य श्री 108 चैत्यसागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अखिलेश जैन डिप्टी कमिश्नर ड्रग्स रहे। मुख्य अतिथि अखिलेश जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आगरा।</strong> श्री अग्रवाल दिगंबर जैन महासभा आगरा द्वारा <strong>क्षमावाणी पर्व एवं सम्मान समारोह</strong> शान्ति सागर सभागार एमडी जैन हरीपर्वत पर सोमवार को <strong>आचार्य श्री 108 चैत्यसागर महाराज ससंघ</strong> के सान्निध्य में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में <strong>मुख्य अतिथि अखिलेश जैन डिप्टी कमिश्नर ड्रग्स</strong> रहे। <strong>मुख्य अतिथि अखिलेश जैन एवं अध्यक्ष राकेश जैन</strong> पर्देवाले ने अपना उद्बोधन दिया। <strong>आर्यिका श्री 105 शाश्वती श्री माताजी एवं आचार्य श्री 108 चैत्यसागर जी का विशेष प्रवचन एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ।</strong> इस अवसर पर विवेक जैन,मुकेश विटुमिन,सुरेशचंद जैन,महावीर प्रसाद जैन,संजय जैन,पवन जैन राजकुमार जैन,राजीव जैन अजय जैन,विजय जैन,जितेन्द्र जैन सचिन जैन,शुभम जैन समेत श्री अग्रवाल दिगंबर जैन महासभा के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>विद्यार्थी वह जो, अपने कार्यों को कहकर नहीं, पूर्ण करके दिखाता है: मुनि श्री आदित्य सागर महाराज</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/muni-shri-aditya-sagar-maharaj/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Sep 2022 11:16:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[indore jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[muni shree aaditya sagar ji maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal]]></category>
		<category><![CDATA[shreephaljainnews]]></category>
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					<description><![CDATA[महान ग्रंथ &#8216;सिरि भूवलय&#8221; एवं प्राकृत भाषा विषक संगोष्ठी शास्त्रों की पांडुलिपि एवं ताम्रपत्र लेखन का विमोचन इंदौर@राजेश जैन दद्दू । अच्छा विद्यार्थी वह होता है जो शांत रहकर अपना कार्य करता रहता है। कार्य की पूर्णता, स्वयं ही शोर मचाती है। दुनिया को जवाब जीत के बारे में बोलकर नहीं, बल्कि जीत कर देना [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4>महान ग्रंथ &#8216;सिरि भूवलय&#8221; एवं प्राकृत भाषा विषक संगोष्ठी<br />
शास्त्रों की पांडुलिपि एवं ताम्रपत्र लेखन का विमोचन</h4>
<p><strong>इंदौर@राजेश जैन दद्दू</strong> । अच्छा विद्यार्थी वह होता है जो शांत रहकर अपना कार्य करता रहता है। कार्य की पूर्णता, स्वयं ही शोर मचाती है। दुनिया को जवाब जीत के बारे में बोलकर नहीं, बल्कि जीत कर देना चाहिए। यह बात मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने कुंदकुंद ज्ञानपीठ के अंतर्गत विश्व के आठवें आश्चर्य माने जाने वाले महान ग्रंथ<strong> &#8216;सिरि भूवलय&#8221;</strong> एवं प्राकृत भाषा के विकास के लिए आयोजित संगोष्ठी के दूसरे दिन, विद्वानों और शोधार्थियों के बीच, उदासीन आश्रम एमजी रोड, इंदौर में कही।<br />
उन्होंने कहा कि सीखने की उम्र नहीं, जुनून और जिद चाहिए। वृक्ष कभी नहीं सोचता कि उसके सुंदर पुष्पों को कौन देखेगा? कौन उसका उपयोग करेगा? वह सिर्फ अपना कार्य करता है और दुनिया उसकी दीवानी हो जाती है।<br />
कार्यक्रम में पधारे डॉक्टर केदारनारायण जोशी ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रकृति से जो उत्पन्न हो, वह प्राकृत है। प्राकृत जन भाषा है। विचार का दीपक तभी तक प्रज्जवलित रहता है जब तक हम उसमें आचार का पालन करते हैं।<br />
दोपहर के सत्र के मुख्य अतिथि पंडित मिथिला प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षक वह होता है जो शास्त्रों को घोलकर पी ले।<br />
जो दुख में कभी दुखी और सुख में कभी सुखी नहीं होता, वही साधु कहलाता है।<br />
समाज के संजीव जैन संजीवनी ने बताया कि कुंदकुंद ट्रस्ट इंदौर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में, शास्त्रों की पांडुलिपि एवं ताम्रपत्र लेखन का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में ट्रस्ट के अमित कासलीवाल, पुष्पा कासलीवाल, विमला कासलीवाल, इंजीनियर अनिल जैन, कुलपति रेनू जैन, नरेंद्र धाकड़, प्रोफेसर सरोज कुमार, डॉ शोभा जैन, अजीत जैन, दिलीप मेहता, आजाद जैन व अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।<br />
कार्यक्रम में देशभर से पधारे विद्वान एवं शोधार्थी मौजूद रहे। सभी शोधार्थियों एवं विद्वानों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संगीता मेहता एवं डॉ. अरविंद जैन ने किया।</p>
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		<item>
		<title>अतिशय क्षेत्र बरही मे धूमधाम से आयोजित हुआ वर्षिक मेला महोत्सव</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/atishya-shetra/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Sep 2022 15:14:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[itawa jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[palki yatra]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal]]></category>
		<category><![CDATA[shreephaljainnews]]></category>
		<category><![CDATA[Shreephalnews]]></category>
		<category><![CDATA[varshik mela]]></category>
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					<description><![CDATA[लखनऊ से पधारे डा ए के जैन को प्राप्त हुआ अभिषेक करने का सौभाग्य शांतिधारा करने का सौभाग्य अशोक जैन सुनील जैन पीपरी परिवार को प्राप्त इटावा@अभिनंदन जैन। इटावा भिंड मार्ग पर स्थित श्री अजितनाथ दिंगबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र बरही बल्लभपुर मे वार्षिक मेला महोत्सव बड़ी धूमधाम से आयोजित किया गया। प्रातःकाल श्री जी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लखनऊ से पधारे डा ए के जैन को प्राप्त हुआ अभिषेक करने का सौभाग्य</strong></p>
<p><strong>शांतिधारा करने का सौभाग्य अशोक जैन सुनील जैन पीपरी परिवार को प्राप्त</strong></p>
<p>इटावा@अभिनंदन जैन। इटावा भिंड मार्ग पर स्थित श्री अजितनाथ दिंगबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र बरही बल्लभपुर मे वार्षिक मेला महोत्सव बड़ी धूमधाम से आयोजित किया गया। प्रातःकाल श्री जी अभिषेक पूजन एंव विधान का आयोजन किया गया इसके उपरांत श्रीजी को पलकी पर विराजमान कर बैंड बाजो के साथ साथ पंडाल में पहुंचाया गया जहां पांडुक शिला पर श्रीजी को विराजमान किया गया।</p>
<p>श्रीजी के अभिषेक करने का सौभाग्य लखनऊ से पधारे डा ए के जैन परिवार को और शांतिधारा का सौभाग्य अशोक जैन सुनील जैन पीपरी निवासी परिवार को प्राप्त हुआ ।</p>
<p>विभिन्न प्रांतों नगरों जैसे फिरोजाबाद, दिल्ली, आगरा इटावा, जसंवतनगर, पोरसा, मुरैना आदि से संपूर्ण जैन समाज का सहयोग प्राप्त हुआ।</p>
<p>निः शुल्क बस व्यवस्था खरौआ समाज बरही कमेटी द्वारा की गई थी। भोजन व्यवस्था निर्मल चंद्र, खिलोनी जैन, रविंद्र कुमार सपना जैन, राशि जैन, रवि जैन और समस्त टकसारी परिवार द्वारा की गई।</p>
<p>अशोक जैन कक्का अध्यक्ष l, प्रदीप जैन गुड्डा उपाध्यक्ष, विनोद जैन (सहकारिता) सनत जैन, पी डी जैन पत्रकार ,महावीर प्रसाद जैन,अजय जैन, प्रदीप जैन ,विकास जैन, धीरज जैन और समस्त कार्यकारिणी बरही कमेटी सदस्य समारोह में मौजूद रहे। मीडिया प्रभारी विमल जैन, चौ अभिनंदन जैन(नंदू) को कमेटी के उपाध्यक्ष विनोद जैन ने प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। धीरज जैन धीरू ने इटावा से यातायात निशुल्क व्यवस्था देखी और बरही कमेटी उपाध्यक्ष विनोद जैन सहकारिता ने पटका व प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया</p>
<p>समस्त अतिथियों को प्रतीक चिन्ह पटका पहनाकर सम्मान किया गया मंच संचालन उमेश जैन शास्त्री ने किया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-27080 size-full aligncenter" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-18-at-19.52.49-2.jpeg" alt="" width="720" height="325" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-18-at-19.52.49-2.jpeg 720w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-18-at-19.52.49-2-300x135.jpeg 300w" sizes="(max-width: 720px) 100vw, 720px" /> <img decoding="async" class="alignnone wp-image-27081 size-large" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-18-at-19.52.49-1024x466.jpeg" alt="" width="1024" height="466" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-18-at-19.52.49-1024x466.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-18-at-19.52.49-300x136.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-18-at-19.52.49-768x349.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-18-at-19.52.49-990x450.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-18-at-19.52.49.jpeg 1152w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
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		<item>
		<title>आचार्य विमल सागर जी महाराज का 107वां जन्म जयंती महोत्सव मनाया</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/aacharya-vimal-sagarji-maharaj/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Sep 2022 16:33:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[aacharya vimal sagarji]]></category>
		<category><![CDATA[agra jain news]]></category>
		<category><![CDATA[janm jayanti]]></category>
		<category><![CDATA[shree phal news]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal]]></category>
		<category><![CDATA[shreephaljainnews]]></category>
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					<description><![CDATA[बैंड- बाजों के साथ निकाली गई पालकी यात्रा आगरा@शुभम कासलीवाल। मोती कटरा स्थित श्री 1008 पार्श्वनाथ खंडेलवाल दिगंबर जैन मंदिर, तार की गली मोती कटरा में आज शनिवार को वात्सल्य रत्नाकर आचार्य विमल सागर जी महाराज का 107वां जन्म जयंती महोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।भक्तों ने सर्वप्रथम श्री 1008 संभवनाथ दिगंबर जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बैंड- बाजों के साथ निकाली गई पालकी यात्रा</strong></p>
<p><strong>आगरा@शुभम कासलीवाल</strong>। मोती कटरा स्थित श्री 1008 पार्श्वनाथ खंडेलवाल दिगंबर जैन मंदिर, तार की गली मोती कटरा में आज शनिवार को वात्सल्य रत्नाकर आचार्य विमल सागर जी महाराज का 107वां जन्म जयंती महोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।भक्तों ने सर्वप्रथम श्री 1008 संभवनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, मोती कटरा से वात्सल्य रत्नाकर आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज की प्रतिमा को पालकी में विराजमान किया और बैंड बाजों के साथ पालकी यात्रा निकाली गई। मोती कटरा के स्कूली बच्चों के साथ सैकड़ों भक्त आचार्य श्री की पालकीयात्रा में नृत्य करते हुए चल रहे थे। पालकी यात्रा तार की गली मोती कटरा, जैन मंदिर पहुंची जहां भक्तों ने गुरुसंघ के सान्निध्य में आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज की प्रतिमा को पांडुक शिला पर विराजमान कर के पंचामृत से अभिषेक क्रिया। इसके बाद विनयांजलि सभा का आयोजन भी हुआ।<br />
<strong>इसके पश्चात आचार्य श्री 108 चैत्यसागर जी महाराज का मंगल उद्बोधन भी हुआ। कार्यक्रम का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल ने किया। इस दौरान राकेश जैन परदे वाले, अमित सेठी, राजेंद्र जैन, अजीत जैन, विवेक जैन,अनंत जैन,पंकज जैन,पवन जैन, नरेंद्र गोधा, हुकम जैन, अंकित जैन दीपक जैन, विजय जैन, शुभम जैन समेत समस्त सकल दिगंबर जैन</strong> समाज मोती कटरा के भक्त एवं आचार्य श्री चैत्यसागर जी महाराज के गुरुभक्त बड़ी संख्या में कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।|</p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-27059 size-large" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-17-at-21.30.51-1024x486.jpeg" alt="" width="1024" height="486" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-17-at-21.30.51-1024x486.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-17-at-21.30.51-300x142.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-17-at-21.30.51-768x365.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-17-at-21.30.51-990x470.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-17-at-21.30.51.jpeg 1036w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
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