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	<title>Sheetaldham Festival &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भक्ति की गर्मी से पौष की सर्दी भी घट जाती है : मुनिश्री संभवसागरजी ने विदिशा के वाशिंदों को भक्ति से जुट जाने को कहा  </title>
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		<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 11:17:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बर्राे वाले बाबा में आचार्य गुरुदेव की ऊर्जा विराजमान है। पौष मास की ठंड है चिंता मत करो भक्ति की गर्मी से पौष की सर्दी भी छू मंतर हो जाएगी। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने शुक्रवार को प्रातः धर्मसभा में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;  विदिशा। बर्राे वाले बाबा में आचार्य गुरुदेव [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बर्राे वाले बाबा में आचार्य गुरुदेव की ऊर्जा विराजमान है। पौष मास की ठंड है चिंता मत करो भक्ति की गर्मी से पौष की सर्दी भी छू मंतर हो जाएगी। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने शुक्रवार को प्रातः धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> विदिशा।</strong> बर्राे वाले बाबा में आचार्य गुरुदेव की ऊर्जा विराजमान है। पौष मास की ठंड है चिंता मत करो भक्ति की गर्मी से पौष की सर्दी भी छू मंतर हो जाएगी। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने शुक्रवार को प्रातः धर्मसभा में व्यक्त किए। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रतिदिन प्रातः 8.30 बजे से समग्र पाठशाला समिति एवं नगर के महिला मंडलों के आचार्य श्री विद्यासागर महामुनिराज का संगीतमय पूजन के साथ धर्मसभा प्रारंभ होती है। रविवार को भक्ति की इस गंगा में गुरु नाम, आचार्य श्री ज्ञानसागर महाराज पर लिखा विधान, जिसे मुनि श्री निस्सीम सागरजी महाराज ने लिखा है को 7.30 बजे से किया जा रहा है। जिसमें सभी महिला मंडलों तथा पुरुषों को शामिल होना है। मुनि श्री संभवसागरजी ने कहा कि पौष मास की ठंड है चिंता मत करो भक्ति की गर्मी से पौष की सर्दी भी छू मंतर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि आपके नगर के शीतलधाम में आपके इष्टदेव बर्राे वाले बाबा का नया मंदिर लगभग तैयार है। जैसे कुंडलपुर में जब बड़े बाबा को उच्चाशन पर विराजमान किया गया था तो कुंडलपुर महोत्सव मनाया गया था उसी तर्ज पर विदिशा वालों आप लोग भी कमर कसके तैयार हो जाओ। आप सभी को बर्राे बाले बाबा को पुराने स्थान से नए मंदिर जी में विराजमान करना है तो शीतलधाम महोत्सव मनाने के लिए विदिशा ही नहीं बल्कि समूचे भारत के श्रद्धालुओं को आमंत्रित करना होगा। जिससे हम सभी मिलकर आचार्य गुरुदेव के सानिध्य में यह महा महोत्सव मना सकें।</p>
<p><strong>आचार्यश्री समयसागर जी से निवेदन के लिए जबलपुर जाएंगे समाजजन</strong></p>
<p>आचार्य श्री समयसागर जी महाराज तिलवारा घाट जबलपुर में विराजमान हैं। उनसे निवेदन करने समाज तथा शीतलधाम के प्रतिनिधि जबलपुर जा रहे हैं। मुनि श्री ने सभी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि जैसे पूर्व में बर्रों वाले बाबा जब विदिशा आए थे तो उनकी मंगल अगवानी आचार्य श्री विद्यासागरजी ने की थी तो आपके नगर के इष्टदेव बर्राे वाले बाबा नए मंदिर जी में विराजमान हो रहे हैं। आचार्य श्री समयसागरजी महाराज उनकी अगवानी करें। ऐसा निवेदन आप लोगों को जाकर करना है। उन्होंने कहा कि अभी एक-डेढ़ माह का समय है, ऐसी भक्ति करो कि भक्ति की गर्मी से पूष की सर्दी भी घट जाए और आचार्यश्री जबलपुर से सीधे विदिशा चले आएं। मुनिश्री ने श्रमण श्रुतं ग्रंथ की वाचना प्रारंभ करते हुए कहा कि यह एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें जैन धर्म और दर्शन के सभी महत्वपूर्ण विषय सम्मिलित हैं। जिसे आचार्य विनोबा भावे ने जैन धर्म का सार मानते हुए अन्य धर्म के धार्मिक ग्रंथों के साथ सन 1974 में सम्मिलित किया था। जिसमें 756 गाथाएं हैं। जिसका पद्यानुवाद आचार्य श्री विद्यासागर जी ने जैन गीता के रूप में करके बहुत ही सरल और सुग्राह्य कर दिया है।</p>
<p><strong>प्रश्नमंच के माध्यम से सही जबाव देने वाले पुरस्कृत </strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि शीतलधाम में भगवान आदिनाथ स्वामी (बर्राे बाले बाबा) की प्रतिमा, जो हजारों वर्ष पुरानी है। उन्होंने इस प्रतिमा में खुद इतनी अधिक एनर्जी महसूस की है। उन्होंने कहा कि उसमें आचार्य गुरुदेव की ऊर्जा विराजमान है और वह आप सभी के इष्टदेव हैं। उनको जब नए मंदिर जी में विराजमान किया जाए तो पूरा विदिशा ही नहीं बल्कि समूचा बुंदेलखंड इसमें शामिल हो। ऐसी तैयारियां आप सभी लोगों को अभी से करना होगी। तभी आप इसे वृहद रूप प्रदान कर पाओगे। इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज ने प्रश्नों के माध्यम से प्रश्नमंच कार्यक्रम को संचालित किया एवं सही उत्तर देने वालों को समाज बंधुओं ने पुरस्कृत किया। इस अवसर पर मुनि श्री संस्कार सागरजी महाराज भी मंचासीन थे। संचालन मुकेश जैन बड़ाघर ने किया।</p>
<p><strong>प्रतिदिन पूजन में भाग ले रहे श्रद्धालु और महिला मंडल </strong></p>
<p>प्रतिदिन प्रातः 8.30 बजे से आचार्य श्री का संगीतमय पूजन विदिशा नगर के विभिन्न महिला मंडलों द्वारा किया जा रहा है। सकल दि. जैन समाज का आग्रह है कि सभी महानुभाव समय पर पधारें एवं भक्ति की इस गंगा में पुण्य लाभ अर्जित करें। शंका समाधान प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज की प्रेरणा से पंचकल्याणक कमेटी राहतगढ़ के द्वारा दयोदय महासंघ, मध्यभारत गुणायतन, तथा मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी का तिलक, पगड़ी एवं अंगवस्त्र पहनाकर सम्मान किया गया।</p>
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