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	<title>Shantinath Digambar Jain Temple &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>Shantinath Digambar Jain Temple &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्यश्री निर्भय सागर जी महाराज के मंगल प्रवचन में उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था : आत्मकल्याण, संयम और सदाचार का दिया संदेश </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:13:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा के जयपुर हाउस स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्यश्री निर्भय सागर जी महाराज के मंगल प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ प्राप्त किया। आचार्यश्री ने आत्मकल्याण, संयम और सदाचार को जीवन का आधार बताया। पढ़िए श्रीफल साथी की यह रिपोर्ट। आगरा। जयपुर हाउस स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, टीचर्स [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आगरा के जयपुर हाउस स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्यश्री निर्भय सागर जी महाराज के मंगल प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ प्राप्त किया। आचार्यश्री ने आत्मकल्याण, संयम और सदाचार को जीवन का आधार बताया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> जयपुर हाउस स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, टीचर्स कॉलोनी में विराजमान आचार्यश्री 108 निर्भय सागर जी महाराज ससंघ के मंगल प्रवचनों का सोमवार को भव्य आयोजन हुआ। प्रातः 8 बजे से 9:30 बजे तक आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्मोपदेश का लाभ प्राप्त किया।</p>
<p><strong>आत्मकल्याण का दिया संदेश</strong></p>
<p>अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में आचार्यश्री ने कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मकल्याण, संयम और सदाचार का पालन करना है। उन्होंने बताया कि धर्म केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने विचार, व्यवहार और आचरण को पवित्र बनाना ही सच्ची धर्म साधना है।</p>
<p><strong>अहिंसा, क्षमा और त्याग पर दिया बल</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को अहिंसा, क्षमा, त्याग एवं आत्मचिंतन को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि इन्हीं गुणों से व्यक्ति का जीवन सुखी, शांत और सार्थक बनता है। उन्होंने सभी से धर्म को व्यवहार में उतारने का आह्वान किया।</p>
<p><strong>भक्तिमय रहा मंदिर परिसर</strong></p>
<p>मंगल प्रवचन के दौरान मंदिर परिसर श्रद्धा और भक्ति से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री के श्रीचरणों में विनयपूर्वक श्रद्धा अर्पित कर उनके मंगल आशीर्वचन ग्रहण किए।</p>
<p><strong>समाजजनों की रही सहभागिता</strong></p>
<p>कार्यक्रम में श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति, जयपुर हाउस के पदाधिकारियों के साथ सकल दिगंबर जैन समाज के अनेक वरिष्ठजन, महिला-पुरुष एवं युवा श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>धर्म संस्कार शिविर में बच्चों ने सीखी जल अभिषेक और द्रव्य पूजा की विधि: श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़े मंदिर में तीसरे रविवार आयोजित हुआ विशेष प्रशिक्षण, बच्चों ने उत्साह से लिया भाग </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 06:04:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ अंबाह के श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़े मंदिर में आयोजित धर्म संस्कार शिविर में बच्चों को जल अभिषेक एवं द्रव्य पूजा की विधि सिखाई गई। विद्वानों ने पूजा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को धार्मिक संस्कारों से जोड़ने का संदेश दिया। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर  &#160; अंबाह। विनम्र [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> अंबाह के श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़े मंदिर में आयोजित धर्म संस्कार शिविर में बच्चों को जल अभिषेक एवं द्रव्य पूजा की विधि सिखाई गई। विद्वानों ने पूजा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को धार्मिक संस्कारों से जोड़ने का संदेश दिया। <span style="color: #ff0000">अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर </span></strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> विनम्र एकेडमी द्वारा संचालित धर्म संस्कार शिविर के अंतर्गत रविवार सुबह श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़े मंदिर में विशेष पूजन प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। लगातार तीसरे रविवार आयोजित इस शिविर में बच्चों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लिया तथा जैन धर्म की मूल पूजन विधियों को सीखा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>बच्चों को सिखाई गई पूजन की विधि</strong></p>
<p>शिविर में बाहर से पधारे विद्वान नमन जैन एवं स्थानीय प्रशिक्षक राजुल जैन ने बच्चों को भगवान श्री शांतिनाथ के समक्ष जल अभिषेक और द्रव्य पूजा की संपूर्ण विधि सिखाई। बच्चों को केवल प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे आध्यात्मिक महत्व की भी जानकारी दी गई।</p>
<p><strong>जल अभिषेक का बताया महत्व</strong></p>
<p>विद्वान नमन जैन ने बच्चों को बताया कि जल अभिषेक आत्मशुद्धि, मन की निर्मलता और पापकर्मों के क्षय का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने कहा कि विधिपूर्वक अभिषेक करने से मन में शांति आती है, सकारात्मक सोच विकसित होती है और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।</p>
<p><strong>द्रव्य पूजा से बढ़ती है भक्ति भावना</strong></p>
<p>राजुल जैन ने द्रव्य पूजा का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान के प्रति श्रद्धा और समर्पण भाव से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, सदाचार और नैतिक मूल्यों को मजबूत करती है। साथ ही यह व्यक्ति को अहंकार से दूर रखकर आत्मविकास की दिशा में आगे बढ़ाती है।</p>
<p><strong>बच्चों ने बड़े उत्साह से किया अभ्यास</strong></p>
<p>जैसे ही बच्चों ने कतारबद्ध होकर भगवान के समक्ष जल अभिषेक प्रारंभ किया, पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से भर गया। बच्चों ने पूरे अनुशासन और श्रद्धा के साथ अभिषेक किया तथा द्रव्य पूजा की विधि का अभ्यास भी किया। इससे उन्हें पूजा की संपूर्ण प्रक्रिया का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>धर्म के साथ संस्कारों की भी शिक्षा</strong></p>
<p>शिविर में बच्चों और युवाओं को जैन धर्म के मूल सिद्धांतों जैसे अहिंसा, सत्य, संयम और आत्मशुद्धि के महत्व से भी परिचित कराया गया। विद्वानों ने कहा कि यदि बचपन से ही अच्छे धार्मिक संस्कार दिए जाएं तो आने वाली पीढ़ी सुसंस्कारित और आदर्श बन सकती है।</p>
<p><strong>विश्व शांति और जनकल्याण की कामना</strong></p>
<p>इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्री शांतिनाथ की आराधना कर विश्व शांति, समाज के कल्याण और सुख-समृद्धि की मंगलकामना की। विद्वानों ने बताया कि नियमित पूजन और आराधना से आत्मा की शुद्धि होती है तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं</p>
<p><strong>बच्चों के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था</strong></p>
<p>कार्यक्रम के बाद मंदिर परिसर के बाहर चंदनबाला महिला मंडल द्वारा बच्चों को स्वल्पाहार वितरित किया गया। इससे बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला और सभी ने आनंदपूर्वक प्रसाद ग्रहण किया।</p>
<p><strong>शांतिपाठ के साथ हुआ समापन</strong></p>
<p>कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ के साथ हुआ। आयोजकों ने बताया कि धर्म संस्कार शिविर का उद्देश्य नई पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ना है, ताकि वे संस्कारवान और आदर्श जीवन की ओर आगे बढ़ सकें।</p>
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		<title>मार्ग भर श्रद्धालुओं ने गुरुसंघ के दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त किया : आचार्यश्री इंद्र नंदी जी एवं गणिनी आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी ससंघ का आगरा में भव्य मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 10:36:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री इंद्र नंदी जी महाराज, मुनिश्री उत्कर्षनंदी जी, मुनिश्री नाभिनंदी जी तथा गणिनी आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी एवं गणिनी आर्यिकाश्री विज्ञमति माता जी ससंघ के आगरा आगमन पर जैन समाज में विशेष उत्साह एवं श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230; आगरा। आचार्यश्री इंद्र नंदी जी महाराज, मुनिश्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री इंद्र नंदी जी महाराज, मुनिश्री उत्कर्षनंदी जी, मुनिश्री नाभिनंदी जी तथा गणिनी आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी एवं गणिनी आर्यिकाश्री विज्ञमति माता जी ससंघ के आगरा आगमन पर जैन समाज में विशेष उत्साह एवं श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> आचार्यश्री इंद्र नंदी जी महाराज, मुनिश्री उत्कर्षनंदी जी, मुनिश्री नाभिनंदी जी तथा गणिनी आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी एवं गणिनी आर्यिकाश्री विज्ञमति माता जी ससंघ के आगरा आगमन पर जैन समाज में विशेष उत्साह एवं श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। मंगलवार को जयपुर हाउस स्थित शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में आचार्यसंघ एवं गणिनी आर्यिकासंघ का भव्य मंगल प्रवेश श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ। प्रातःकाल श्री रामेश्वरी देवी कन्या विद्यालय नगला वसुआ पथोली से प्रारंभ हुए मंगल विहार के दौरान मार्ग भर श्रद्धालुओं ने गुरुसंघ के दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त किया। जयपुर हाउस पहुंचने पर श्री शांतिनाथ युवा मंडल,महिला मंडल एवं सकल जैन समाज द्वारा गुरुवर एवं गुरुमां ससंघ का भव्य स्वागत किया गया। बैंडबाजों, मंगल गीतों और जयघोषों के बीच श्रद्धालुओं ने अपनी अगाध श्रद्धा व्यक्त की। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं पदयात्रा में सम्मिलित हुईं। इस अवसर पर आचार्यश्री इंद्रनंदी जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचनों में कहा कि उत्तर प्रदेश की पावन भूमि पर उनका यह प्रथम आगमन है और यह सौभाग्य उन्हें माताजी ससंघ के साथ प्राप्त हुआ है। उन्होंने अपनी विशेष भावना व्यक्त करते हुए कहा कि जीवन के अंतिम समय में वे पवित्र सम्मेद शिखर जी की यात्रा करना चाहते हैं।</p>
<p>मंगल प्रवेश के उपरांत श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री ससंघ एवं गणिनी आर्यिकाश्री विशुद्धमति माताजी ससंघ के दर्शन कर धर्म आराधना का लाभ प्राप्त किया। समाजजनों ने आगामी शिकोहाबाद विहार की सफलता एवं धर्म प्रभावना के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं। विहार यात्रा एवं स्वागत व्यवस्था में राकेश जैन परदेवाले, दीपक जैन, विनोद रांवका, सुबोध पाटनी, अमित सेठिया, राजीव प्रकाश जैन, विमल जैन, अनुभव जैन, उदित जैन, अंकित जैन, तरुण जैन सहित अनेक युवा कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।</p>
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		<title>मोदीनगर में छाई खुशियां ही खुशियां : आचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी ससंघ पधारे, 2 मई को मनाया जा रहा जन्म महोत्सव  </title>
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		<pubDate>Sat, 02 May 2026 07:36:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज ससंघ (33 पिच्छी) पधारे । संपूर्ण समाज में अपूर्व उत्साह, आबाल-वृद्ध में अद्‌भुत उमंग, प्रत्येक मुख पर अपरिचित मुस्कान दिखाई दे रही है। पथरिया से पढ़िए,सोनल जैन की यह रिपोर्ट&#8230; पथरिया। मोदी नगर में श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज ससंघ (33 पिच्छी) पधारे । संपूर्ण समाज में अपूर्व [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज ससंघ (33 पिच्छी) पधारे । संपूर्ण समाज में अपूर्व उत्साह, आबाल-वृद्ध में अद्‌भुत उमंग, प्रत्येक मुख पर अपरिचित मुस्कान दिखाई दे रही है। <span style="color: #ff0000">पथरिया से पढ़िए,सोनल जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पथरिया।</strong> मोदी नगर में श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज ससंघ (33 पिच्छी) पधारे । संपूर्ण समाज में अपूर्व उत्साह, आबाल-वृद्ध में अद्‌भुत उमंग, प्रत्येक मुख पर अपरिचित मुस्कान दिखाई दे रही है। आखिर हो भी क्यों न हम सबके मार्गदर्शक, आदर्श, निर्गन्ध, वीतरागी, दिगम्बर महामुनिराज और उनका चतुर्विध संघ जो पधारा है। मोदीनगर के जैन समाज में ये खुशियाँ तब और भी वृद्धिगत हो गईं जब पता चला कि आचार्य श्री विमर्शसागर जी मुनिराज के शिक्षा-दीक्षा दाता समाधि सम्राट आचार्य 108 विरागसागर जी महामुनिराज का 64 वाँ जन्म -महोत्सव भी विशाल चतुर्विध संघ के साथ मोदीनगर वालों को मनाने को मिल रहा है। 2 मई का वह पावन पवित्र दिवस, जब बुंदेलखंड के पथरिया ग्राम में सन् 1963 में इस युग के महापुरुष का जन्म हुआ था और वही आगे चलकर मुनिराजों के शिरोमणि 500-550 शिष्य-प्रशिष्यों के नायक आचार्य श्री विरागसागर जी महामुनिराज के रूप में विश्व विख्यात हुए। 2 मई शनिवार को श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर में आचार्य संघ की पावन सन्निधि प्रातः काल जिनाभिषेक के बाद विधिवत जन्म महोत्सव की सभा प्रारंभ की जाएगी।न सर्वप्रथम दीप प्रज्वलन मंगलाचरण पाद-प्रक्षालन, शास्त्रभेंट, गुरुपूजन एवं विनयांजलि के माध्यम से गुरु -महिमा गुणगान किया जाएगा। संध्याबेला में 64 दीप थालों से गुरुवर की महाआरती की जाएगी।</p>
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		<title>हरि पर्वत में श्रद्धा और उल्लास से हुआ प्रतिमा प्रथम दर्शन एवं तिलक दान उत्सव : भक्ति भाव, मंगलाचरण और जयकारों से गुंजा परिसर </title>
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		<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 14:21:35 +0000</pubDate>
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<p><strong>धर्मनगरी में शुक्रवार को प्रातःकालीन बेला में श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, एम.डी. जैन इंटर कॉलेज परिसर, हरी पर्वत में प्रतिमा प्रथम दर्शन एवं तिलक दान उत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> धर्मनगरी में शुक्रवार को प्रातःकालीन बेला में श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, एम.डी. जैन इंटर कॉलेज परिसर, हरी पर्वत में प्रतिमा प्रथम दर्शन एवं तिलक दान उत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे और दिव्य वातावरण में धर्मलाभ प्राप्त किया। इस पावन अवसर पर सर्वतोभद्र जिनालय, न्यू आदर्श नगर, बल्केश्वर में विराजमान होने जा रही मूलनायक भगवान आदिनाथ सहित सभी पाषाण 11 प्रतिमाओं के प्रथम दर्शन कर श्रद्धालुओं ने स्वयं को धन्य महसूस किया। मंदिर परिसर में भक्ति भाव, मंगलाचरण और जयकारों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। निर्यापक मुनि श्री विलोक सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विबोध सागर जी मुनिराज के पावन सानिध्य में प्रथम तिलक दान की मंगलमयी क्रिया विधिपूर्वक सम्पन्न हुई। साथ ही पंडित संदीप जैन शास्त्री के निर्देशन में समस्त धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से तिलक अर्पित कर पुण्य अर्जित किया।संतों के आशीर्वचन से उपस्थित जनसमूह को धर्म, संयम और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली। कार्यक्रम के उपरांत सभी प्रतिमाएं गाड़ी के माध्यम से एमडी जैन इंटर कॉलेज से डी ब्लॉक कमला नगर, शालीमार एनक्लेव, कर्मयोगी एनक्लेव होते हुए सर्वतोभद्र जिनालय,बल्केश्वर पहुँचीं।</p>
<p>इस पूरे आयोजन का संचालन सुव्यवस्थित रूप से किया गया। आयोजन श्री आदिनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति,बल्केश्वर (आगरा) द्वारा किया गया। कार्यक्रम ने आगरा में धार्मिक आस्था, एकता और संस्कृति की भव्य झलक प्रस्तुत की। इस मौके पर प्रदीप जैन पीएनसी, रजत जैन, पंकज जैन, राजीव जैन, पारस जैन कांसल,पारसमल जैन,सुमेर पांडया,अंकेश जैन,शुभम जैन,सहित समस्त आगरा जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।</p>
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		<title>रामगंजमंडी में जैन समाज का उग्र प्रदर्शन, मंदिर जीर्णोद्धार और 6 लोगों को अभियुक्त बनाने का विरोध: 800 से अधिक समाज बंधुओं ने रैली निकालकर उप जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, कार्रवाई निरस्त करने की मांग </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 11:01:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रामगंजमंडी में सकल दिगंबर जैन समाज ने शांतिनाथ जैन मंदिर के जीर्णोद्धार और 6 समाजसेवियों को अभियुक्त बनाए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। समाज ने कार्रवाई को निराधार बताते हुए इसे तुरंत निरस्त करने की मांग की। अभिषेक लुहाड़िया की रिपोर्ट  रामगंजमंडी । रामगंजमंडी में सकल दिगंबर जैन समाज ने श्री शांतिनाथ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रामगंजमंडी में सकल दिगंबर जैन समाज ने शांतिनाथ जैन मंदिर के जीर्णोद्धार और 6 समाजसेवियों को अभियुक्त बनाए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। समाज ने कार्रवाई को निराधार बताते हुए इसे तुरंत निरस्त करने की मांग की। <span style="color: #ff0000">अभिषेक लुहाड़िया की रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> रामगंजमंडी ।</strong> रामगंजमंडी में सकल दिगंबर जैन समाज ने श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के जीर्णोद्धार और 6 प्रतिष्ठित लोगों को अभियुक्त बनाए जाने के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। समाज के लगभग 1200 सदस्यों में से 800 से अधिक लोगों की सक्रिय भागीदारी ने आक्रोश को स्पष्ट रूप से दर्शाया।</p>
<p><strong> जुलूस निकालकर सौंपा ज्ञापन</strong></p>
<p>समाज बंधु मंदिर से जुलूस के रूप में न्यायालय पहुंचे और उप जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान समाज में भारी रोष देखने को मिला।</p>
<p><strong>“अभियुक्त बनाए गए लोग समाजसेवी हैं”</strong></p>
<p>समाज के लोगों का कहना है कि जिन 6 व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया है, वे हमेशा समाज सेवा में आगे रहते हैं और धार्मिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।</p>
<p><strong> मंदिर की संपत्ति को लेकर स्पष्टता</strong></p>
<p>ज्ञापन में बताया गया कि बाजार नंबर 1 स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर का निर्माण फर्म श्री नाथूराम जोरजी और श्रीमती प्यार कुंवर बाई द्वारा किया गया था। बाद में यह मंदिर ट्रस्ट के अंतर्गत आ गया और यह किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है।</p>
<p><strong> ट्रस्ट और अधिकारों का विवरण</strong></p>
<p>मंदिर ट्रस्ट देवस्थान विभाग उदयपुर और कोटा में पंजीकृत है (संख्या 220, दिनांक 31-12-1975)। श्रीमती प्यार कुंवर बाई ने अपने जीवनकाल में ही सभी अधिकार ट्रस्ट को सौंप दिए थे।</p>
<p><strong> खंडित मूर्तियों के कारण जीर्णोद्धार आवश्यक</strong></p>
<p>मंदिर में विराजमान भगवान शांतिनाथ और कुंथुनाथ की प्रतिमाएं खंडित हो चुकी हैं। जैन धर्म अनुसार खंडित मूर्तियों का जीर्णोद्धार या नई प्रतिमा की प्रतिष्ठा आवश्यक होती है।</p>
<p><strong> मुनि श्री की प्रेरणा से लिया गया निर्णय</strong></p>
<p>मुनि श्री 108 निष्पक्ष सागर महाराज और मुनि श्री 108 निष्प्रह सागर महाराज की प्रेरणा से पूरे समाज ने जीर्णोद्धार का निर्णय लिया और लिखित सहमति दी।</p>
<p><strong> नमन रावका की भूमिका पर सवाल</strong></p>
<p>ज्ञापन में यह भी कहा गया कि नमन रावका रामगंजमंडी के निवासी नहीं हैं, फिर भी उन्होंने समाज के लोगों पर शांति भंग का आरोप लगाया, जिसके समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।</p>
<p><strong> कार्रवाई निरस्त करने की मांग</strong></p>
<p>समाज ने धारा 126/170 बीएनएसएस के तहत दर्ज प्रकरण संख्या 263/2026 को पूरी तरह निरस्त करने की मांग की है।</p>
<p><strong> 6 लोगों को अभियुक्त बनाए जाने का विरोध</strong></p>
<p>प्रकाश विनायका, चेतन बागड़ियां, धर्मेंद्र लुहाड़िया, राजीव बाकलीवाल, सुरेश बाबरिया और राकेश बाकलीवाल को अभियुक्त बनाए जाने पर समाज ने कड़ा विरोध जताया।</p>
<p>ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने भी इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि ये सभी व्यक्ति समाज के प्रतिष्ठित और सेवाभावी सदस्य हैं।</p>
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		<title>प्रत्येक जीव में आत्मा का वास, राग-द्वेष से बंधते हैं कर्म : मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने माधवगंज में दी धर्म देशना में बताई कर्मों की गति </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/soul_resides_in_every_living_being_karma_is_bound_by_love_and_hatred/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 09:58:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वनस्पति, जल, अग्नि, वायु और पृथ्वी—इन सभी में असंख्य जीव विद्यमान हैं। ये उद्गार मुनि श्री संभवसागर जी महाराज ने श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, माधवगंज में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। विदिशा से राजीव सिंघई की पढ़िए यह खबर&#8230; विदिशा। इस संसार में केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>वनस्पति, जल, अग्नि, वायु और पृथ्वी—इन सभी में असंख्य जीव विद्यमान हैं। ये उद्गार मुनि श्री संभवसागर जी महाराज ने श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, माधवगंज में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से राजीव सिंघई की पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> इस संसार में केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव में आत्मा का वास होता है। वनस्पति, जल, अग्नि, वायु और पृथ्वी—इन सभी में असंख्य जीव विद्यमान हैं। ये उद्गार मुनि श्री संभवसागर जी महाराज ने श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, माधवगंज में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुनि श्री ने एकेन्द्रिय से लेकर पंचेन्द्रिय जीवों की व्याख्या करते हुए कहा कि एक पत्ती में भी अनगिनत जीव होते हैं और जल की एक बूंद में भी असंख्य जीव निवास करते हैं। उन्होंने संसार चक्र की व्याख्या करते हुए बताया कि संसारी जीवों की अवस्था निरंतर बदलती रहती है। अधिकांश जीव एकेन्द्रिय होते हैं, इसलिए उनकी क्रियाएँ सीमित रहती हैं।मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य पंचेन्द्रिय प्राणी है। वह आँखों से देखता है,कानों से सुनता है,नाक से सूंघता है,जीभ से स्वाद लेता है और त्वचा से स्पर्श करता है। इन पाँच इन्द्रियों के माध्यम से ही मनुष्य के भीतर राग और द्वेष उत्पन्न होते हैं। जब कोई अच्छी वस्तु दिखाई देती है तो राग उत्पन्न होता है और अप्रिय बात सुनने पर द्वेष पैदा हो जाता है। उन्होंने इसे एक सुंदर उदाहरण से समझाते हुए कहा कि आज के समय में लोग बिना दुकान पर गए ऑनलाइन सामान मंगा लेते हैं। घर बैठे ऑर्डर किया और होम डिलीवरी हो गई। उसी प्रकार हमारे राग-द्वेष ही कर्मों का &#8216;ऑनलाइन ऑर्डर&#8217; है। जहाँ भी हम हैं और जैसे भी भाव करते हैं, उसी क्षण कर्म आकर आत्मा से चिपक जाते हैं।</p>
<p><strong>जीव जैसा कर्म करता है,वैसा ही अगला भव निश्चित होता है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जैनाचार्यों ने इसलिए सावधानीपूर्वक जीवन जीने की शिक्षा दी है, क्योंकि प्रत्येक क्षण हमारे भाव बन रहे हैं और उन्हीं भावों से कर्मों का बंध हो रहा है। जब तक जीव कर्मों का बंध करता रहता है, तब तक कर्मों की आवक निरंतर चलती रहती है। यदि जीव अपने भावों को शुद्ध कर लें और कर्मों के बंधन को रोक दे तो कर्मों की यह आवक भी रुक सकती है। यही अवस्था ‘संवर’ कहलाती है। उन्होंने कहा कि संसार में सभी जीव अपने-अपने कर्मों के अनुसार चार गतियों में जन्म लेते हैं—नरक गति, तिर्यंच गति (पशु-पक्षी, कीट आदि), मनुष्य गति और देव गति। जीव जैसा कर्म करता है,वैसा ही उसका अगला भव निश्चित हो जाता है।</p>
<p><strong>कर्मों का यह नियम अपने आप कार्य करता है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जब यह शरीर छूटता है, उससे पहले ही जीव अपने अगले भव की “टिकट” काट चुका होता है। संसार की यह व्यवस्था पूर्णतः न्यायपूर्ण और ईमानदार है। यहाँ ऐसा नहीं होता कि किसी ने कहीं और का टिकट लिया हो और कहीं और पहुँच जाए। यदि किसी जीव ने नरक गति के कर्म बाँध लिए हैं, तो उसे नियम से नरक में ही जाना पड़ेगा। कर्मों का यह नियम अपने आप कार्य करता है।</p>
<p><strong>मोक्षमार्ग अपनाएँ या सद्गृहस्थ बनें</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में हमें अत्यंत सावधानीपूर्वक ऐसे कर्म करने चाहिए,जिससे हमारा अगला भव उत्तम बने और हम मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हो सकें। मुनि श्री ने आचार्य श्री के हाइकु—&#8217;धर्म प्रभाव, प्रभावित हुआ क्या? &#8220;बिना विवाह&#8217;</p>
<p>का उल्लेख करते हुए गृहस्थों को उपदेश दिया कि दो ही मार्ग हैं—या तो मोक्षमार्ग अपनाएँ या सद्गृहस्थ बनें। गृहस्थ की जिम्मेदारी है कि वह संतानोत्पत्ति कर अपने कुल को आगे बढ़ाए, जिससे कुल की मर्यादा और समाज की वृद्धि हो सके।उन्होंने बताया कि पंचकल्याणक महामहोत्सव में सभी पात्रों के लिए समिति द्वारा हथकरघा के वस्त्रों की व्यवस्था की गई है। इन वस्त्रों में आचार्य गुरुदेव का आशीर्वाद और &#8216;अपनापन&#8217; है। ये वस्त्र अहिंसक धागों से दिल्ली की तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों द्वारा तैयार किए गए हैं।</p>
<p><strong>भगवान आदिनाथ की पाती सभी को भेजी गई है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने हथकरघा के वस्त्रों के उपयोग की सलाह देते हुए कहा कि ये वस्त्र इको-फ्रेंडली हैं,जो शरीर और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी हैं। इससे स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। उन्होंने कहा कि बर्रो वाले भगवान आदिनाथ की पाती सभी को भेजी गई है। विदिशा नगर का कोई भी परिवार इस महाअनुष्ठान से वंचित नहीं रहना चाहिए, समय कम है लेकिन आश्चर्य की बात है कि सभी कार्य अपने-आप बनते चले जा रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो बर्रो वाले भगवान आदिनाथ की कृपा और गुरुदेव के आशीर्वाद से सभी व्यवस्थाएँ स्वतः पूर्ण हो रही हैं। पंचकल्याणक महा महोत्सव के प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि जैन महाविद्यालय के विशाल प्रांगण में यह आयोजन अत्यंत भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। यहाँ देश और प्रदेश का सबसे सुंदर पंडाल बनाया जा रहा है, जिसमें बैठकर हजारों श्रद्धालु भगवान की अर्चना करेंगे।</p>
<p><strong>घर-घर पंचरंगा ध्वज </strong></p>
<p>समिति द्वारा सभी प्रमुख पात्रों के साथ-साथ सामान्य इंद्र एवं इंद्राणियों के लिए भी “अपनापन”हथकरघा वस्त्र और शुद्ध भोजन की व्यवस्था की गई है। बुकिंग हेतु महिलामंडल एवं कार्यकर्ता गण बर्रो वाले भगवान श्री आदिनाथ की पाती लेकर एवं जैन मिलन के कार्यकर्ता पचरंगा ध्वज लगाने के लिये घर-घर पहुंच रहे हैं, आप उनका स्वागत करें।</p>
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		<title>विश्व शांति महायज्ञ के समापन दिवस पर भक्ति आराधना का रहा दौर : इंद्र-इंद्राणियो ने विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना की </title>
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		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 00:27:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में गुरुवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के समापन दिवस की शुरुआत प्रातःकाल भगवान जिनेंद्र देव के अभिषेक, शांतिधारा हुई। आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह खबर&#8230; आगरा। नगर में श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नगर में श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में गुरुवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के समापन दिवस की शुरुआत प्रातःकाल भगवान जिनेंद्र देव के अभिषेक, शांतिधारा हुई। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> नगर में श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में गुरुवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के समापन दिवस की शुरुआत प्रातःकाल भगवान जिनेंद्र देव के अभिषेक, शांतिधारा हुई। समापन दिवस श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ संपन्न हुआ। जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय एवं उल्लासमय बन गया। बाल ब्रह्मचारी पीयूष शास्त्री एवं पंडित आशुतोष शास्त्री ने विधान पूजन और विधान के पूर्णाहुति अवसर पर श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, समाज की उन्नति एवं मानव कल्याण की मंगल कामना की। सामूहिक रूप से सभी इंद्र-इंद्राणियो ने विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना कर धर्मलाभ प्राप्त किया। मंत्रोच्चार, भक्ति गीतों एवं स्तुति वंदनाओं से मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। इसके पश्चात आयोजित होली मिलन समारोह में आपसी प्रेम, सौहार्द एवं भाईचारे का संदेश देते हुए एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के अंतर्गत समाज के वरिष्ठजनों, सहयोगकर्ताओं एवं आयोजन में विशेष योगदान देने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत एवं सम्मान भी किया गया।</p>
<p><strong>यह समाज श्रेष्ठिजन मौजूद रहे</strong></p>
<p>इस मौके संयोजक अशोक कुमार जैन, अध्यक्ष राजेश बैनाड़ा, मंत्री विजय जैन निमोरब, मगन कुमार जैन, अरुण जैन, महेश चंद जैन, सुशील जैन, अनिल आदर्श जैन, सतेंद्र जैन, राकेश जैन, रामप्रकाश जैन, अतुल जैन, प्रमोद जैन, विवेक जैन, अंकित जैन, संजीव जैन मीडिया प्रभारी राहुल जैन और सकल जैन समाज मौजूद था।</p>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का शिवदासपुरा में हुआ प्रवेश : 6 मार्च को आचार्य संघ की आहार चर्या बिलवा दिगंबर जैन मंदिर में होगी </title>
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		<pubDate>Thu, 05 Mar 2026 14:04:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पदमपुरा से 5 मार्च को शिवदासपुरा प्रवेश हुआ। आहार के बाद दोपहर को विहार कर 1008 श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर विमल परिसर नांगलिया बिलवा गांव में मंगल प्रवेश हुआ। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पदमपुरा से 5 मार्च [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पदमपुरा से 5 मार्च को शिवदासपुरा प्रवेश हुआ। आहार के बाद दोपहर को विहार कर 1008 श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर विमल परिसर नांगलिया बिलवा गांव में मंगल प्रवेश हुआ। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर</strong>। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पदमपुरा से 5 मार्च को शिवदासपुरा प्रवेश हुआ। आहार के बाद दोपहर को विहार कर 1008 श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर विमल परिसर नांगलिया बिलवा गांव में मंगल प्रवेश हुआ। 6 मार्च को आचार्य संघ की आहार चर्या बिलवा दिगंबर जैन मंदिर में होगी। 5 मार्च को प्रातः श्रीजी के अभिषेक के बाद जयपुर के अनेक मंदिरों के समाज जनों ने आचार्य श्री के दर्शन कर अपनी अपनी कॉलोनी मंदिर पधार कर धर्मलाभ देने के लिए निवेदन किया। ग्राम चंदलाई के सुमति, निर्मल छाबड़ा ने समाधिस्थ मुनि शिष्य देवेश सागर जी की जन्म नगरी पधारने का निमंत्रण दिया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-101168" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029-300x223.jpg" alt="" width="300" height="223" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029-300x223.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029-1024x762.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029-768x572.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029-990x737.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260305-WA0029.jpg 1240w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong> इंजीनियर युवा ने लिया शुद्ध जल ग्रहण का नियम</strong></p>
<p>गुरुभक्त राजेश पंचोलिया इंदौर के अनुसार सनावद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित 19 महाव्रती की जन्मभूमि है। त्याग वैराग्य, संयम की गौरव शाली परम्परा में सनावद के 33 वर्षीय नवयुवक इंजीनियर शानिल सुपुत्र संगीता श्रीमंदर जैन (बडूद )सनावद ने शिवदासपुरा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से यज्ञोपवीत जनेऊ धारण कर आजीवन शुद्ध जल ग्रहण करने का नियम लेकर आचार्य श्री को आहार भी दिया।</p>
<p><strong>जब तक ममता है तब तक संसार है </strong></p>
<p>इस अवसर पर श्रीमंदर( पापा), राजा (चाचा), संगीता (मम्मी) सपना ( चाची) भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। ब्रह्मचारी लोकेश गजराज ने बताया कि दोपहर को प्रवचन सार ग्रन्थ के स्वाध्याय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि संसारी प्राणी मोह के वशीभूत होकर संसार में परिभ्रमण करता है। यह मेरी माता,पत्नी, घर भाई,पुत्र, पिता,मेरी धन दौलत है। मेरा सुख है, इस प्रकार ममता, मोह,राग रूपी अंधेरे के वश में होकर ऐसा प्राणी सुख प्राप्ति के कारण रूप अपने हित से दूर रहता है। संसारी प्राणी अपनी आत्मा के कल्याण से विमुख होकर रागद्वेष के भीतर पड़ा रहता है और मुक्ति के कारण विकार रहित होकर जिनेंद्र के वचनों में रमन नहीं करता है। इस तरह जब तक ममता है तब तक संसार है संसार के दु:खों को भ्रमण का कारण जानकार इससे ममता छोड़कर अपने शुद्ध आत्मा स्वरूप में स्थित होकर निजानंद का लाभ करना चाहिए।</p>
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		<title>मोह मिथ्यात्व और अज्ञान ही जीव के भटकाव का मूल कारण : मुनि श्री प्रमाण सागरजी ने बताया सम्यक दर्शन धर्म का मूल आधार </title>
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		<pubDate>Sun, 01 Mar 2026 14:11:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नव-निर्मित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के 5वें दिवस मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने भगवान के कैवल्य ज्ञान के बाद समवसरण की गणधर पीठिका से अत्यंत मार्मिक एवं आध्यात्मिक उद्बोधन दिया। बुढ़ार से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230; बुढ़ार। नव-निर्मित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नव-निर्मित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के 5वें दिवस मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने भगवान के कैवल्य ज्ञान के बाद समवसरण की गणधर पीठिका से अत्यंत मार्मिक एवं आध्यात्मिक उद्बोधन दिया। <span style="color: #ff0000">बुढ़ार से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बुढ़ार।</strong> नव-निर्मित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के 5वें दिवस मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने भगवान के कैवल्य ज्ञान के बाद समवसरण की गणधर पीठिका से अत्यंत मार्मिक एवं आध्यात्मिक उद्बोधन दिया। मुनि श्री ने कहा कि इस अनादि संसार में जीव चारों गतियों और 84 लाख योनियों में निरंतर भटक रहा है,उसके इस भटकाव का मूल कारण उसके अंतर में पलने वाला मोह, मिथ्यात्व और अज्ञान है। उन्होंने नरक गति का वर्णन करते हुए कहा कि वहाँ जीव को असहनीय यातनाएं सहनी पड़ती हैं। कभी उसे कड़ाही में डाला जाता है तो कभी तलवार की तीक्ष्ण धार का सामना करना पड़ता है, मानो हजारों बिच्छुओं ने एक साथ डंक मार दिए हों। नरक से निकलकर जीव कभी एक इंद्रिय, कभी द्वि-इंद्रिय, फिर तिर्यंच गति में भ्रमण करता हुआ मनुष्य जन्म प्राप्त करता है किंतु, मनुष्य जीवन में भी वह कभी भिखारी बनकर कष्ट भोगता है। मुनि श्री ने कहा कि मोह, मिथ्यात्व और अज्ञान आत्मा के प्रबल शत्रु हैं। इन्हीं के कारण जीव अपने आत्मस्वरूप से दूर होकर पंचेंद्रिय विषयों तथा क्रोध, मान, माया, लोभ जैसी कषायों में फँसकर पाप और दुर्गतियों का भागी बनता है।</p>
<p><strong>सम्यक दर्शन ही धर्म का मूल</strong></p>
<p>समवसरण में विराजमान मुनि श्री प्रसाद सागरजी, मुनि श्री शीतलसागर जी, मुनि श्री संधानसागर जी तथा</p>
<p>क्षुल्लक श्री समादर सागर जी महाराज, बाल ब्रह्मचारी अशोक भैया,बाल ब्रह्मचारी अभय भैया</p>
<p>ने भी धार्मिक प्रश्न प्रस्तुत किए। जिनका समाधान मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने औंकार ध्वनि के साथ किया। उन्होंने कहा कि जब तक जीव अपने आत्मस्वरूप को नहीं समझेगा तब तक उसे सम्यक दर्शन की प्राप्ति नहीं हो सकती। भव-बन्धन से मुक्ति का एकमात्र उपाय सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र रूपी रत्नत्रय की पूर्णता है। दर्शन मूलो धम्मो का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि सम्यक दर्शन धर्म का मूल आधार है। बिना सम्यक्त्व के न ज्ञान शुद्ध होता है और न चरित्र।</p>
<p><strong>‘भगवान महावीर द्वार’ का ऐतिहासिक शिलान्यास</strong></p>
<p>पंचकल्याणक महोत्सव के पावन अवसर पर एक और ऐतिहासिक क्षण जुड़ा जब प्रातःकाल मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ससंघ की मंगलमय उपस्थिति में भगवान महावीर द्वार का विधिवत शिलान्यास हुआ। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक जय सिंह मरावी, नगर परिषद अध्यक्षा शालिनी सरावगी एवं परिषद सदस्यों ने श्रद्धा-भक्ति के साथ शिलान्यास किया। धर्ममय वातावरण में जयघोष गूँज उठा। मुनि श्री ने कहा कि</p>
<p>जब कोई नगर में भगवान के नाम के साथ प्रवेश करता है तो उसके सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं। ‘भगवान महावीर द्वार’ केवल निर्माण नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति का प्रतीक बनेगा। इस अवसर पर राज्यमंत्री दिलीप जयसवाल, कलेक्टर केदार सिंह तथा अन्य गणमान्य जनों ने समवसरण में श्रीफल समर्पित किया। भागवत कथा वाचक डॉ. मदनमोहन मिश्र (चित्रकूट धाम) भी उपस्थित रहे।</p>
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