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	<title>Shanti Dhara &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भक्ति और इतिहास का संगम गोयल नगर जिनालय में गूंजे मंगल नाद : आचार्य सुनीलसागरजी महाराज ससंघ की निश्रा में सम्पन्न हुआ भव्य मानस्तम्भ शिलान्यास  </title>
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		<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 08:17:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर के गोयल नगर स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर की पावन धरा पर सोमवार को धर्म, श्रद्धा और इतिहास का अद्भुत संगम देखने को मिला। राष्ट्र गौरव, अध्यात्मयोगी, चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य 108 श्री सुनीलसागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में भव्य मंगल प्रवेश&#8221; एवं &#8220;भव्य मानस्तम्भ शिलान्यास&#8221; कार्यक्रम भक्तिभाव और उल्लास के साथ सम्पन्न [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इंदौर के गोयल नगर स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर की पावन धरा पर सोमवार को धर्म, श्रद्धा और इतिहास का अद्भुत संगम देखने को मिला। राष्ट्र गौरव, अध्यात्मयोगी, चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य 108 श्री सुनीलसागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में भव्य मंगल प्रवेश&#8221; एवं &#8220;भव्य मानस्तम्भ शिलान्यास&#8221; कार्यक्रम भक्तिभाव और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> इंदौर के गोयल नगर स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर की पावन धरा पर सोमवार को धर्म, श्रद्धा और इतिहास का अद्भुत संगम देखने को मिला। राष्ट्र गौरव, अध्यात्मयोगी, चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य 108 श्री सुनीलसागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में भव्य मंगल प्रवेश&#8221; एवं &#8220;भव्य मानस्तम्भ शिलान्यास&#8221; कार्यक्रम भक्तिभाव और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। आचार्य श्री सुनील सागर जी ने कहा कि 11 से 15 नवंबर के बीच में स्तंभ की प्रतिष्ठा और पंचकल्याणक किया जाना प्रस्तावित हैं। इस अवसर पर अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज का भी मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ।</p>
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<p>कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः भव्य मंगल प्रवेश के साथ हुई। इसके पश्चात आचार्य श्री के सानिध्य में श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा और पात्र चयन की धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न की गईं। मुख्य आयोजन प्रातः 9:00 बजे मानस्तम्भ शिलान्यास हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालु उपस्थित होकर पुण्य के भागी बने। इसके लाभार्थी जेके वंदना जैन रहे। जिन्होंने शिलान्यास में स्वर्ण शिला रखी। मुनि संघों की आहारचर्या के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।</p>
<p><strong>नमोकार मंत्र&#8221; के घोष से भक्तिमय माहौल</strong></p>
<p>इस पावन अवसर पर अक्षुण्ण आचार्य पट्ट परम्परा के वर्तमान चतुर्थ पट्टाधीश प्राकृताचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज की मंगल प्रेरणा से सम्पूर्ण जैन समाज में भक्ति की लहर देखी गई। गोयल नगर जिनालय परिसर &#8220;जयकारों&#8221; और &#8220;नमोकार मंत्र&#8221; के घोष से गूंज उठा।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-109627" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260720-WA0020-235x300.jpg" alt="" width="235" height="300" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260720-WA0020-235x300.jpg 235w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260720-WA0020-801x1024.jpg 801w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260720-WA0020-768x981.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260720-WA0020-1202x1536.jpg 1202w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260720-WA0020-990x1265.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260720-WA0020.jpg 1252w" sizes="(max-width: 235px) 100vw, 235px" /></p>
<p>कार्यक्रम का आयोजन श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैनालय ट्रस्ट, अध्यक्ष दिलीप प्रमिला पाटनी, श्री शांतिनाथ महिला मंडल एवं सकल दिगंबर जैन समाज गोयल नगर, इंदौर के तत्वावधान में हुआ। कार्यक्रम के संरक्षक एड. वीरकुमार जैन, उपाध्यक्ष नरेन्द्र रांका रहे, जबकि कोषाध्यक्ष चन्द्रकान्त बन्डी और सह सचिव मधुबाला बन्डी ने व्यवस्थाओं को सफल बनाया।</p>
<p><strong>इनकी उपस्थिति और सहयोग की हुई सराहना</strong></p>
<p>ट्रस्ट अध्यक्ष दिलीप प्रमिला पाटनी, सुशील पतंग्या, ललित बन्डी, राजेश जैन, अनिल जैन सहित समाज के गणमान्य जनों की उपस्थिति रही। इस अवसर पर दिलीप प्रमिला पाटनी, अमित कासलीवाल, मुकेश जैन, रिटायर्ड डीएसपी डीके जैन, श्रीफल जैन न्यूज मीडिया समूह की संपादक रेखा संजय जैन, राजेश जैन, उपस्थित रहे। दि. सामाजिक संसद कीर्ति स्तंभ के अध्यक्ष आनंद गोधा, अजय जैन, अखिलेश जैन, लक्ष्मीचंद जैन, विजय जैन, नवीन गोधा, मुकेश जैन, दीपक जैन सहित सैकड़ों समाजसेवियों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग किया। कार्यक्रम का सौजन्य अजय जैन, अखिलेश जैन मित्र मण्डल एवं ऐरावत बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, गोयल नगर द्वारा किया गया।</p>
<p><strong>सदाचार और एकता का संकल्प लेने का आह्वान</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि मानस्तम्भ केवल पत्थर का स्तम्भ नहीं, बल्कि आत्मा को ऊंचा उठाने और अहंकार को मिटाने का प्रतीक है। उन्होंने सभी से संयम, सदाचार और एकता का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मान स्तंभ से चार प्रकार की कषाय नष्ट होती है और मनुष्य का मान भी स्तंभित होता है। आचार्य श्री ने कहा कि यह गोयलनगर वालों का पुण्य जाग्रत हुआ है जो यहां मान स्तंभ का शिलान्यास किया जा रहा है। सम्पूर्ण आयोजन में अनुशासन, भक्ति और समाज की एकजुटता ने यह सिद्ध कर दिया कि गोयल नगर की यह धरा आने वाले समय में धर्म और संस्कृति का एक नया केंद्र बनेगी।</p>
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		<title>भगवान महावीर स्वामी का गर्भ कल्याणक 19 जुलाई को: तिथि आषाढ़ शुक्ल षष्ठी के दिन आता है, जानिए गर्भ कल्याणक का महत्व और उनके दिव्य संदेश </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 04:47:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन परंपरा में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के पंच कल्याणकों में गर्भ कल्याणक प्रथम कल्याणक है। जैन आगमों के अनुसार आज से 2624 वर्ष पूर्व आषाढ़ शुक्ल षष्ठी की रात्रि को अंतिम केवली तीर्थंकर भगवान महावीर का जीव देवलोक से च्युत होकर माता त्रिशला देवी के गर्भ में अवतरित हुआ था। श्रीफल जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन परंपरा में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के पंच कल्याणकों में गर्भ कल्याणक प्रथम कल्याणक है। जैन आगमों के अनुसार आज से 2624 वर्ष पूर्व आषाढ़ शुक्ल षष्ठी की रात्रि को अंतिम केवली तीर्थंकर भगवान महावीर का जीव देवलोक से च्युत होकर माता त्रिशला देवी के गर्भ में अवतरित हुआ था। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। दिगंबर जैन परंपरा में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के पंच कल्याणकों में गर्भ कल्याणक प्रथम कल्याणक है। जैन आगमों के अनुसार आज से 2624 वर्ष पूर्व आषाढ़ शुक्ल षष्ठी की रात्रि को अंतिम केवली तीर्थंकर भगवान महावीर का जीव देवलोक से च्युत होकर माता त्रिशला देवी के गर्भ में अवतरित हुआ था। इसी दिन से छह मास पूर्व कुबेर द्वारा रत्नवर्षा और नगर की समृद्धि का दौर प्रारंभ हुआ, जिसे ‘गर्भान्वय’ कहा जाता है।</p>
<p><strong>गर्भ कल्याणक से जुड़ी मान्यताएं और आयोजन</strong></p>
<p>गर्भ में आने से पूर्व माता त्रिशला ने 16 मांगलिक स्वप्न देखे थे, जिनमें ऐरावत हाथी, वृषभ, सिंह, लक्ष्मी, पुष्पमाला आदि शामिल थे और ये सभी तीर्थंकर के जन्म के सूचक माने जाते हैं। इंद्र ने आकर स्वप्न फल बताया कि आपके गर्भ से त्रिलोक पूज्य तीर्थंकर जन्म लेंगे। गर्भ कल्याणक से छह माह पूर्व से ही देवों द्वारा प्रतिदिन सवा करोड़ रत्नों की वर्षा की गई, जिससे वैशाली नगरी की दरिद्रता दूर हुई। इस पुण्य तिथि पर दिगंबर जैन मंदिरों में प्रातः महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा, नित्य पूजा, विधान, गर्भ कल्याणक पाठ, 16 स्वप्न के अर्घ्य, पालना झुलाना और शाम को दीप सज्जा, भजन और प्रवचन होते हैं। श्रावक इस दिन उपवास, जाप और दान करते हैं और इंदौर सहित सभी तीर्थ स्थलों पर विशेष महोत्सव मनाए जाएंगे।</p>
<p><strong>भगवान महावीर के मूल सिद्धांत</strong></p>
<p>भगवान महावीर ने आत्म-कल्याण और विश्व-शांति के लिए पांच मुख्य सिद्धांत दिए, जिन्हें ‘पंच महाव्रत’ कहा गया। पहला सिद्धांत अहिंसा है, जिसका अर्थ मन-वचन-काय से किसी भी जीव को कष्ट न देना है और यही परम धर्म माना गया है। दूसरा सत्य है, जिसमें हित-मित-प्रिय वचन बोलने पर बल दिया गया। तीसरा अस्तेय है अर्थात बिना दी हुई वस्तु को ग्रहण न करना। चौथा ब्रह्मचर्य है जो मन और इंद्रियों पर पूर्ण संयम सिखाता है। पांचवां अपरिग्रह है, जिसमें आवश्यकता से अधिक संग्रह न करने और ममत्व त्याग का उपदेश है। इनके साथ अनेकांतवाद का सिद्धांत जुड़ा है, जिसके अनुसार सत्य के अनेक पहलू हो सकते हैं और स्याद्वाद सापेक्ष कथन की शैली है, जो उनके दर्शन का आधार बनी।</p>
<p><strong>उनकी अंतिम वाणी: उत्तराध्ययन सूत्र का दिव्य वचनामृत</strong></p>
<p>कार्तिक कृष्ण अमावस्या को पावापुरी में निर्वाण से पूर्व भगवान ने अंतिम देशना दी। उनके अंतिम उपदेशों का सार यह है कि ‘अप्पा सो परमप्पा’, यानी आत्मा ही परमात्मा है, इसलिए बाह्य आडंबर छोड़कर स्वयं को जानना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘जो इरियावहियं सूत्रं’, अर्थात चलते-फिरते भी जीवों की विराधना न हो, इतनी जागृति रखनी चाहिए। ‘समता भाव’ का उपदेश देते हुए उन्होंने सुख-दुख, लाभ-अलाभ, जीवन-मरण में सम रहने को ही मोक्ष का मार्ग बताया। सबसे करुणामयी संदेश ‘खामेमि सव्वे जीवा’ में दिया, जिसका अर्थ है कि मैं सभी जीवों से क्षमा चाहता हूं और सभी जीव मुझे क्षमा करें। यह क्षमा-भाव ही जैन धर्म का प्राण माना गया है।</p>
<p><strong>दिगंबर जैन समाज के लिए संयम, मोक्ष और दिव्यता का मार्ग </strong></p>
<p>दिगंबर साधु-साध्वी ‘दिग्$अम्बर’ कहलाते हैं, यानी दिशाएं ही जिनके वस्त्र हैं और वे पूर्ण अपरिग्रह व्रत का पालन करते हैं। उनके पास मात्र पिच्छी, कमंडल और शास्त्र होते हैं। भगवान महावीर का जीवन बताता है कि मोक्ष बाहरी क्रियाकांड से नहीं, बल्कि रत्नत्रय यानी सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चारित्र से मिलता है। सच्चा संयम पांच इंद्रिय, मन और कषायों पर नियंत्रण से आता है और पिच्छी इसी अहिंसा-संयम का प्रतीक है, जिससे साधु सूक्ष्म जीवों की रक्षा करते हैं। मोक्ष का मार्ग महाव्रत, समिति, गुप्ति, धर्म, अनुप्रेक्षा, परीषह जय और चारित्र से होकर जाता है। जिनसे कर्मों का क्षय कर आत्मा सिद्ध बनती है। बाहरी त्याग से भी बड़ा अंतरंग त्याग है, जिसमें राग-द्वेष-मोह को छोड़ना होता है। भगवान का संदेश है कि स्वयं से युद्ध करो, दूसरों से नहीं। क्षमा, मैत्री, करुणा और मध्यस्थ भाव ही वास्तविक दिव्यता है।</p>
<p><strong>आज के संदर्भ में संदेश</strong></p>
<p>हिंसा, पर्यावरण संकट और भौतिक दौड़ के युग में महावीर का ‘जियो और जीने दो’ का सिद्धांत सबसे प्रासंगिक है। अपरिग्रह हमें उपभोक्तावाद से बचाता है, अहिंसा हमें शाकाहार और दया की ओर ले जाती है और अनेकांत हमें सहिष्णु बनाता है। गर्भ कल्याणक हमें याद दिलाता है कि महान आत्माएं भी मां के गर्भ से ही आती हैं, अतः नारी, मातृत्व और जीवन का सम्मान परम धर्म है। 19 जुलाई को इंदौर सहित देशभर के दिगंबर जैन मंदिरों में होने वाले अनुष्ठान केवल परंपरा नहीं, बल्कि महावीर की करुणा, संयम और मोक्ष-मार्ग को जीवन में उतारने का संकल्प पर्व हैं।</p>
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		<title>भगवान विमलनाथ जी का मोक्ष कल्याणक 8 जुलाई को: तप, संयम और अपरिग्रह के प्रतीक भगवान के निर्वाण आषाढ़ कृष्ण अष्टमी के दिन देशभर में होंगे भव्य आयोजन  </title>
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		<pubDate>Tue, 07 Jul 2026 06:02:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 13वें तीर्थंकर भगवान श्री विमलनाथ जी का मोक्ष कल्याणक इस वर्ष 8 जुलाई, आषाढ़ कृष्ण अष्टमी को श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर इंदौर सहित देशभर के दिगंबर जैन मंदिरों, चैत्यालयों और तीर्थ स्थलों पर महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा, शांतिपाठ, निर्वाण पाठ एवं निर्वाण लाडू अर्पण सहित विविध पूजन-विधान होंगे। श्रीफल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 13वें तीर्थंकर भगवान श्री विमलनाथ जी का मोक्ष कल्याणक इस वर्ष 8 जुलाई, आषाढ़ कृष्ण अष्टमी को श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर इंदौर सहित देशभर के दिगंबर जैन मंदिरों, चैत्यालयों और तीर्थ स्थलों पर महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा, शांतिपाठ, निर्वाण पाठ एवं निर्वाण लाडू अर्पण सहित विविध पूजन-विधान होंगे। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल का संकलित और संपादित आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के 13वें तीर्थंकर भगवान श्री विमलनाथ जी का मोक्ष कल्याणक इस वर्ष 8 जुलाई, आषाढ़ कृष्ण अष्टमी को श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर इंदौर सहित देशभर के दिगंबर जैन मंदिरों, चैत्यालयों और तीर्थ स्थलों पर महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा, शांतिपाठ, निर्वाण पाठ एवं निर्वाण लाडू अर्पण सहित विविध पूजन-विधान होंगे। भक्तगण पूरे मनोयोग से अपने आराध्य के प्रति आस्था व्यक्त करेंगे।</p>
<p><strong>जन्म से मोक्ष तक का दिव्य जीवन  </strong></p>
<p>भगवान विमलनाथ का जन्म अयोध्या में इक्ष्वाकु वंश के राजा कृतवर्मा और रानी श्यामा देवी के घर माघ शुक्ल तृतीया को हुआ। इनका शरीर स्वर्ण वर्ण और चिह्न सूअर था। युवा होने पर इनका विवाह हुआ और कुछ समय राज्य संचालन किया। सांसारिक भोगों की नश्वरता को समझकर आषाढ़ कृष्ण अष्टमी को इन्होंने दीक्षा ली। 2 माह के कठोर तप के बाद माघ कृष्ण चतुर्थी को इन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ। अंततः सम्मेद शिखर जी के सुवर्णभद्र कूट से आषाढ़ कृष्ण अष्टमी को ही इन्होंने मोक्ष प्राप्त किया। इनकी आयु 60 लाख वर्ष पूर्व थी।</p>
<p><strong>भगवान की दिव्य देशना, सिद्धांत और संदेश </strong></p>
<p>भगवान विमलनाथ जी की देशना का केंद्र ‘आत्मा की निर्मलता’ था। उन्होंने बताया कि बाहरी कर्मकांड से नहीं, बल्कि अंतरंग की शुद्धि से ही मोक्ष संभव है। उनके उपदेशों में अपरिग्रह और संतोष को प्रमुख स्थान मिला, जिसके अनुसार जीवन में संग्रह की प्रवृत्ति ही दुखों का मूल है और इच्छाओं पर नियंत्रण ही सच्चा सुख है। उन्होंने मन, वचन, काय से किसी भी जीव को कष्ट न देने को अहिंसा और हितकारी वाणी को ही सत्य बताया। भगवान ने इंद्रियों पर नियंत्रण तथा आत्म-केंद्रित तप से कर्मों का क्षय होना समझाया और स्वयं 2 माह तक निराहार रहकर तप की महिमा बताई। सुख-दुख, लाभ-हानि, निंदा-स्तुति में सम रहना ही वीतरागता की ओर पहला कदम है, यह उनका समता भाव का संदेश था। आज भौतिकता और उपभोक्तावाद के युग में उनका ‘अपरिग्रह’ सिद्धांत बेहद प्रासंगिक है, जो सिखाता है कि बाहरी चमक-दमक से मन मलिन होता है, जबकि त्याग से आत्मा निर्मल होती है। डिजिटल युग में भी उनकी देशना विचारों के प्रदूषण को रोकने और मोबाइल-सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करने को ही सच्चा ‘डिजिटल अनुशासन’ बताती है। क्रोध, मान, माया, लोभ जैसे कषायों को जीतकर ही व्यक्ति विमल यानी निर्मल बन सकता है।</p>
<p><strong>मोक्ष कल्याणक का महत्व </strong></p>
<p>मोक्ष कल्याणक जैन धर्म का सबसे बड़ा उत्सव है क्योंकि, यह आत्मा की पूर्ण मुक्ति का प्रतीक है। इस दिन निर्वाण लाडू चढ़ाने की परंपरा यह दर्शाती है कि जैसे लाडू बंधनमुक्त होता है, वैसे ही आत्मा भी कर्मों के बंधन से मुक्त हो जाती है। महामस्तकाभिषेक आत्मा के अभिषेक का प्रतीक है, जो हमें अपने दोषों को धोकर निर्मल बनने की प्रेरणा देता है। भगवान विमलनाथ जी का जीवन हमें सिखाता है कि निर्मलता सिर्फ नाम में नहीं, आचरण में होनी चाहिए। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं।</p>
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		<title>तीर्थ केवल दर्शन का स्थान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का केंद्र: आहू तीर्थ में आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी संघ का भव्य मंगल प्रवेश, श्रद्धा और भक्ति से गूंजा तीर्थ परिसर </title>
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		<pubDate>Sat, 04 Jul 2026 15:49:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज ससंघ का पावन आहू अतिशय क्षेत्र में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। मंगल प्रवेश के अवसर पर श्रद्धालुओं ने बैंड-बाजों, जयघोष एवं मंगलगीतों के साथ आचार्य श्री का भव्य एवं विनयपूर्ण स्वागत किया। आहू से पढ़िए, श्रीफल साथी की यह रिपोर्ट&#8230; आहू। आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज ससंघ का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज ससंघ का पावन आहू अतिशय क्षेत्र में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। मंगल प्रवेश के अवसर पर श्रद्धालुओं ने बैंड-बाजों, जयघोष एवं मंगलगीतों के साथ आचार्य श्री का भव्य एवं विनयपूर्ण स्वागत किया। <span style="color: #ff0000">आहू से पढ़िए, श्रीफल साथी की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आहू।</strong> आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज ससंघ का पावन आहू अतिशय क्षेत्र में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। मंगल प्रवेश के अवसर पर श्रद्धालुओं ने बैंड-बाजों, जयघोष एवं मंगलगीतों के साथ आचार्य श्री का भव्य एवं विनयपूर्ण स्वागत किया। संपूर्ण तीर्थ परिसर धर्ममय वातावरण से गुंजायमान हो उठा। यह पावन तीर्थ संकटमोचन श्री आहू पार्श्वनाथ भगवान की दिव्य एवं अतिशयकारी प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन एवं वंदन के लिए पहुंचते हैं। आचार्य श्री ससंघ के आगमन से तीर्थ का आध्यात्मिक वातावरण और अधिक पावन एवं ऊर्जामय हो गया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-108933" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260704-WA0017-225x300.jpg" alt="" width="225" height="300" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260704-WA0017-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260704-WA0017-768x1024.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260704-WA0017-1152x1536.jpg 1152w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260704-WA0017-990x1320.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260704-WA0017.jpg 1200w" sizes="(max-width: 225px) 100vw, 225px" /></p>
<p><strong>जलाभिषेक एवं शांतिधारा की </strong></p>
<p>मंगल प्रवेश के बाद आचार्य श्री ससंघ मंदिर में विराजमान हुए, जहां श्री आहू पार्श्वनाथ भगवान का भक्तिभाव से जलाभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। तत्पश्चात आचार्य श्री ने मंगल प्रवचन प्रदान करते हुए कहा कि तीर्थ केवल दर्शन का स्थान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, स्वाध्याय और धर्म आराधना का केंद्र है। उन्होंने धर्म को जीवन में उतारने, सदाचार अपनाने तथा आत्मकल्याण की दिशा में निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया। प्रवचन के बाद आचार्य श्री ससंघ की आहारचर्या विधिपूर्वक संपन्न हुई। दोपहर में स्वाध्याय आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर जिनवाणी का श्रवण किया।</p>
<p><strong>पदविहार करते हुए इंदौर की ओर अग्रसर </strong></p>
<p>इस अवसर पर धार से पधारे श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री को श्रीफल भेंट कर धार नगर में मंगल प्रवेश के लिए विनम्र निवेदन किया। वहीं इंदौर से भी अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 का चातुर्मास इंदौर में होने जा रहा है। आचार्य श्री ससंघ निरंतर पदविहार करते हुए इंदौर की ओर अग्रसर हैं। भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनका निरंतर विहार संयम, तप एवं त्याग की अद्भुत साधना का प्रेरणादायी उदाहरण है। आचार्य श्री के मंगल आगमन से आहू तीर्थ पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह एवं हर्ष का वातावरण देखने को मिला। सभी ने आचार्य श्री से आशीर्वाद प्राप्त कर धर्म आराधना का संकल्प लिया।</p>
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		<title>आर्यिका विभा माताजी ने में जिन सहस्त्रनाम विधान कराया : निर्माण नगर पार्श्वनाथ कॉलोनी के जिनालय में जिन सहस्त्रनाम धारा का आयोजन  </title>
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		<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 11:50:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विराग सागर जी, पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज की शिष्या गणिनी आर्यिका विभा श्री माताजी संघ के सानिध्य में प्रतिदिन निर्माण नगर पार्श्वनाथ कॉलोनी के जिनालय में जिन सहस्त्रनाम धारा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति एवं समर्पण भाव से 10 दिवस से किया जा रहा है। जयपुर से पढ़िए, सुभाष पहाड़िया की खबर&#8230; जयपुर। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विराग सागर जी, पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज की शिष्या गणिनी आर्यिका विभा श्री माताजी संघ के सानिध्य में प्रतिदिन निर्माण नगर पार्श्वनाथ कॉलोनी के जिनालय में जिन सहस्त्रनाम धारा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति एवं समर्पण भाव से 10 दिवस से किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, सुभाष पहाड़िया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> आचार्य श्री विराग सागर जी, पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज की शिष्या गणिनी आर्यिका विभा श्री माताजी संघ के सानिध्य में प्रतिदिन निर्माण नगर पार्श्वनाथ कॉलोनी के जिनालय में जिन सहस्त्रनाम धारा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति एवं समर्पण भाव से 10 दिवस से किया जा रहा है। इसमें भगवान जिनेंद्र देव के 1008 पवित्र नामों का उच्चारण किया जाता है। अध्यक्ष मुकेश नागैसरिया, सचिव पदमचंद गंगवाल मीठडी ने बताया कि माताजी के सानिध्य में सुबह कलशाभिषेक, शांतिधारा, जिन सहस्त्रनाम धारा, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, जिनवाणी भेंट, पाद प्रक्षालन, प्रवचन आदि हो रहे हैं। दोपहर में धार्मिक कलश, सायंकाल आरती, प्रश्नमंच और आनंद यात्रा में श्रावक-श्राविकाएं बढ़-चढकर धर्म लाभ ले रहे हैं।</p>
<p><strong>विधान के पात्रों का चयन किया </strong></p>
<p>रमेशचंद गोधा ने बताया कि माताजी के सानिध्य में जून रविवार को संगीतमय (माताजी द्वारा रचित 1008 अर्घ्यों वाला) जिन सहस्त्रनाम विधान आयोजित किया जाएगा। जिसके पात्रों का चयन हुआ। जिसमें सौधर्म चक्रवर्ती, यज्ञनायक कुबेर मुख्य कलशों के पुण्यार्जक और दीप प्रज्वलन के पात्रों का चयन हुआ। जिसमें सभी श्रावक श्राविकाओं ने धार्मिक लाभ लेने के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान की। मंच संचालन रमेशचन्द गंगवाल ने किया।</p>
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		<title>आर्यिका विभा माताजी ने में जिन सहस्त्रनाम विधान कराया : निर्माण नगर पार्श्वनाथ कॉलोनी के जिनालय में जिन सहस्त्रनाम धारा का आयोजन  </title>
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		<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 09:21:37 +0000</pubDate>
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<p><strong>आचार्य श्री विराग सागर जी, पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज की शिष्या गणिनी आर्यिका विभा श्री माताजी संघ के सानिध्य में प्रतिदिन निर्माण नगर पार्श्वनाथ कॉलोनी के जिनालय में जिन सहस्त्रनाम धारा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति एवं समर्पण भाव से 10 दिवस से किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, सुभाष पहाड़िया की खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>जयपुर</strong>। आचार्य श्री विराग सागर जी, पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज की शिष्या गणिनी आर्यिका विभा श्री माताजी संघ के सानिध्य में प्रतिदिन निर्माण नगर पार्श्वनाथ कॉलोनी के जिनालय में जिन सहस्त्रनाम धारा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति एवं समर्पण भाव से 10 दिवस से किया जा रहा है। इसमें भगवान जिनेंद्र देव के 1008 पवित्र नामों का उच्चारण किया जाता है। अध्यक्ष मुकेश नागैसरिया, सचिव पदमचंद गंगवाल मीठडी ने बताया कि माताजी के सानिध्य में सुबह कलशाभिषेक, शांतिधारा, जिन सहस्त्रनाम धारा, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, जिनवाणी भेंट, पाद प्रक्षालन, प्रवचन आदि हो रहे हैं। दोपहर में धार्मिक कलश, सायंकाल आरती, प्रश्नमंच और आनंद यात्रा में श्रावक-श्राविकाएं बढ़-चढकर धर्म लाभ ले रहे हैं।</p>
<p><strong>विधान के पात्रों का चयन किया </strong></p>
<p>रमेशचंद गोधा ने बताया कि माताजी के सानिध्य में जून रविवार को संगीतमय (माताजी द्वारा रचित 1008 अर्घ्यों वाला) जिन सहस्त्रनाम विधान आयोजित किया जाएगा। जिसके पात्रों का चयन हुआ। जिसमें सौधर्म चक्रवर्ती, यज्ञनायक कुबेर मुख्य कलशों के पुण्यार्जक और दीप प्रज्वलन के पात्रों का चयन हुआ। जिसमें सभी श्रावक श्राविकाओं ने धार्मिक लाभ लेने के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान की। मंच संचालन रमेशचन्द गंगवाल ने किया।</p>
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		<title>ध्वजारोहण और मंगलकलश स्थापना कर अखंड भक्तामर पाठ का आगाज चार दिवसीय कल्याणोत्सव तथा वार्षिकोत्सव को लेकर उत्साह से परिपूर्ण हैं श्रद्धालुजन  </title>
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		<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 07:20:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कालानी नगर स्थित गुप्तिसदन चैत्यालय में शुक्रवार को सुबह अभिषेक, शांतिधारा और नित्य पूजन के बाद ध्वजारोहण, कलश स्थापना के साथ अखंड भक्तामर पाठ का शुभारंभ किया गया। बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुष श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भक्तामर पाठ किया जा रहा है। यह पाठ 24 घंटे तक निर्बाध चलेगा। इंदौर से पढ़िए, रेखा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कालानी नगर स्थित गुप्तिसदन चैत्यालय में शुक्रवार को सुबह अभिषेक, शांतिधारा और नित्य पूजन के बाद ध्वजारोहण, कलश स्थापना के साथ अखंड भक्तामर पाठ का शुभारंभ किया गया। बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुष श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भक्तामर पाठ किया जा रहा है। यह पाठ 24 घंटे तक निर्बाध चलेगा। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, रेखा संजय जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> कालानी नगर स्थित गुप्तिसदन चैत्यालय में शुक्रवार को सुबह अभिषेक, शांतिधारा और नित्य पूजन के बाद ध्वजारोहण, कलश स्थापना के साथ अखंड भक्तामर पाठ का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर ध्वज स्थापना अभिषेक प्रीति जैन रानीपुर वालों ने की। मुख्य कलश की स्थापना सुनील, मंजू मूंगावली वाला परिवार की ओर से की गई। इस मौके पर दीप प्रज्वलन का सौभाग्य और पुण्यार्जन शिखरचंद, अनिता जैन को प्राप्त हुआ। शुक्रवार को अखंड भक्तामर पाठ में बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुष श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भक्तामर पाठ किया जा रहा है। यह पाठ 24 घंटे तक निर्बाध चलेगा। गुप्तिसदन में चल रहे भक्तामर पाठ में पूरे भक्ति भाव और श्रद्धा के साथ श्रद्धालुजन भाग ले रहे हैं। इस कार्यक्रम को लेकर ऊषा पाटनी ने बताया कि 15 जून तक चलने वाले इस चार दिवसीय भव्य कल्याणोत्सव और वार्षिकोत्सव को लेकर भक्तों में अपार उत्साह का माहौल है। सभी महिला और पुरुष भक्त में भक्तिरस में डूबकर पुण्य का अर्जन कर रहे हैं। इस चार दिवसीय भव्य धार्मिक महोत्सव के मंगलमय शुभारंभ के साथ ही अखंड भक्तामर पाठ जारी है। इस चार दिवसीय महोत्सव में आकर्षक मण्डलजी की रचना सोनू जैन और उषा पाटनी ने की।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-107987" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260612-WA0008-136x300.jpg" alt="" width="136" height="300" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260612-WA0008-136x300.jpg 136w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260612-WA0008-465x1024.jpg 465w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260612-WA0008-698x1536.jpg 698w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260612-WA0008.jpg 727w" sizes="(max-width: 136px) 100vw, 136px" /></p>
<p><strong>आनंद रस और भक्ति नृत्य से सराबोर रहेगा शनिवार</strong></p>
<p>ऊषा पाटनी ने बताया कि शनिवार को प्रातःकाल पंडित नितिन जी के सानिध्य में विशेष विधान पूजन और हवन का आयोजन किया जाएगा। इसमें मंत्रोच्चार के बीच विश्व शांति के लिए आहुतियां दी जाएंगी। शनिवार शाम को भव्य ‘इंद्र दरबार’ सजाया जाएगा, जिसमें आनंद रस की रसधार बहेगी और श्रद्धालु भक्ति नृत्य का आनंद लेंगे।</p>
<p><strong>प्रभु शांतिनाथ जी की पालकी यात्रा 14 जून को </strong></p>
<p>महोत्सव में 14 जून का दिन बेहद विशेष और ऐतिहासिक रहेगा क्योंकि, इस दिन रविवार के साथ-साथ पावन कल्याणोत्सव का महायोग बन रहा है। इस विशेष दिवस पर प्रातःकाल श्री जी का भव्य अभिषेक और शांतिधारा की जाएगी। जिसके बाद प्रभु शांतिनाथ जी की पालकी यात्रा भगवान के जयकारों और बैंडबाजों के साथ निकाली जाएगी। इस दौरान शांति भक्ति विधान पूजा रचकर भगवान शांतिनाथ से विश्व शांति की कामना करने के लिए सभी भक्त मंदिर में एकजुट होंगे और प्रभु के चरणों में विशेष लाडू समर्पित किया जाएगा।</p>
<p><strong>माता-पिता के चरणों की वंदना होगी </strong></p>
<p>इसी दिन शाम को एक भावुक और गरिमामयी कार्यक्रम होगा, जिसमें माता-पिता के चरणों में नमन करते हुए पारिवारिक मंगल गान करने के लिए समाजजन एकत्र होंगे और विशिष्ट जनों का अभिनंदन गुप्तिसदन की ओर से किया जाएगा। चार दिवसीय इस महामहोत्सव का समापन 15 जून को पंचमेरु स्थापन अनुष्ठान के साथ होगा।</p>
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		<title>भगवान श्री चंद्रप्रभ का अभिषेक शांतिधारा में जुटा चूड़ीवाल परिवार: भक्ति, नृत्य और श्रद्धा के साथ आचार्यश्री वर्धमानसागर जी के सानिध्य में हुआ विधान  </title>
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		<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 11:19:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[21 वीं सदी के भौतिकवादी युग में अपने द्रव्य का उपयोग गुरु सानिध्य में भगवान के पूजन और पंचामृत धार्मिक अनुष्ठान तथा आराध्य गुरु आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सान्निध्य में करते हैं। जयपुर से पढ़िए, डॉ. राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; जयपुर। 21 वीं सदी के भौतिकवादी युग में अपने द्रव्य का उपयोग [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>21 वीं सदी के भौतिकवादी युग में अपने द्रव्य का उपयोग गुरु सानिध्य में भगवान के पूजन और पंचामृत धार्मिक अनुष्ठान तथा आराध्य गुरु आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सान्निध्य में करते हैं। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, डॉ. राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> 21 वीं सदी के भौतिकवादी युग में अपने द्रव्य का उपयोग गुरु सानिध्य में भगवान के पूजन और पंचामृत धार्मिक अनुष्ठान तथा आराध्य गुरु आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सान्निध्य में करते हैं। असम गुवहाटी के भागचंद, सुनीता चूड़ीवाल सहित समस्त चूड़़ीवाल परिवार ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में जयपुर बड़ के बालाजी चंद्रपुरी में 9 जून को श्री चंद्रप्रभ भगवान का पंचामृत अभिषेक और पूजन अष्ट द्रव्यों विभिन्न फलों, नैवेद्य, पुष्प, सूखे मेवे से भक्ति नृत्य पूर्वक किया। दोपहर को मंडल विधान का पूजन हुआ।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-107902" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260609-WA0007-169x300.jpg" alt="" width="169" height="300" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260609-WA0007-169x300.jpg 169w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260609-WA0007-576x1024.jpg 576w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260609-WA0007-768x1366.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260609-WA0007-864x1536.jpg 864w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260609-WA0007.jpg 899w" sizes="auto, (max-width: 169px) 100vw, 169px" /></p>
<p>आचार्य संघ सनिध्य में प्रातः काल भगवान श्री चंद्रप्रभ का भव्य पंचामृत अभिषेक जल, नारियल पानी, शर्करा, विभिन्न फलों और सुखे मेवों के रसों, दूध, घी, दही, सर्वाेषधि, विभिन्न पुष्प केशर, सुगंधित जल, चार कलश से किया गया एवं शांतिधारा की। यहां यह उल्लेखनीय है कि प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के प्रथम पट्टाचार्य श्री वीरसागर जी महाराज से दीक्षित गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्व मतीजी चूड़ीवाल परिवार की हैं। गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्व मति जी की समाधि इसी स्थान पर हुई है। भव्य मंदिर के साथ वैराग्य का दिग्दर्शन प्रतीक समाधिस्थल भी बनाया गया हैं।</p>
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		<title>भक्ति की बहेगी रसधार गुप्तिसदन में सजेगा प्रभु का दरबार: भव्य वार्षिकोत्सव का शंखनाद 12 जून से  </title>
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		<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:36:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धार्मिाक एवं आध्यात्मिक चेतना के प्रमुख केंद्र गुप्तिसदन में महोत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और मंदिर जी को पूरी तरह सजाया जा रहा है। 12 लेकर 15 जून तक चलने वाले इस चार दिवसीय भव्य कल्याणोत्सव और वार्षिकोत्सव में भक्तिरस की ऐसी धारा बहेगी, जिसमें डूबकर श्रद्धालु अपार पुण्य का अर्जन करेंगे। आयोजकों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>धार्मिाक एवं आध्यात्मिक चेतना के प्रमुख केंद्र गुप्तिसदन में महोत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और मंदिर जी को पूरी तरह सजाया जा रहा है। 12 लेकर 15 जून तक चलने वाले इस चार दिवसीय भव्य कल्याणोत्सव और वार्षिकोत्सव में भक्तिरस की ऐसी धारा बहेगी, जिसमें डूबकर श्रद्धालु अपार पुण्य का अर्जन करेंगे। आयोजकों ने सभी धर्मानुरागी भाई-बहनों से सपरिवार इस पावन उत्सव में सम्मिलित होकर धर्म लाभ लेने और गुप्तिसदन की गरिमा बढ़ाने की अपील की है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> धार्मिाक एवं आध्यात्मिक चेतना के प्रमुख केंद्र गुप्तिसदन में महोत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और मंदिर जी को पूरी तरह सजाया जा रहा है। 12 लेकर 15 जून तक चलने वाले इस चार दिवसीय भव्य कल्याणोत्सव और वार्षिकोत्सव में भक्तिरस की ऐसी धारा बहेगी, जिसमें डूबकर श्रद्धालु अपार पुण्य का अर्जन करेंगे। आयोजकों ने सभी धर्मानुरागी भाई-बहनों से सपरिवार इस पावन उत्सव में सम्मिलित होकर धर्म लाभ लेने और गुप्तिसदन की गरिमा बढ़ाने की अपील की है।</p>
<p>इस चार दिवसीय भव्य धार्मिक महोत्सव का मंगलमय शुभारंभ 12 जून को अखंड भक्तामर पाठ के साथ होगा। इसके अगले दिन यानी 13 जून को प्रातःकाल विद्वान पंडित नितिन जी के सानिध्य में विशेष विधान पूजन और हवन किया जाएगा, जहां मंत्रोच्चार के बीच विश्व शांति के लिए आहुतियां दी जाएंगी। इसी दिन सायंकाल में भव्य ‘इंद्र दरबार’ सजाया जाएगा, जिसमें आनंद रस की रसधार बहेगी और श्रद्धालु भक्ति नृत्य का आनंद ले सकेंगे।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-107839" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260608-WA0015-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260608-WA0015-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260608-WA0015-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260608-WA0015-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260608-WA0015-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260608-WA0015-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260608-WA0015-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260608-WA0015-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260608-WA0015-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260608-WA0015-1320x990.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260608-WA0015.jpg 1600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>महोत्सव में 14 जून का दिन बेहद विशेष और ऐतिहासिक होने जा रहा है क्योंकि, इस दिन रविवार के साथ-साथ पावन कल्याणोत्सव का महायोग बन रहा है। इस विशेष दिवस पर प्रातःकाल श्री जी का भव्य अभिषेक और शांतिधारा होगी, जिसके बाद प्रभु शांतिनाथ जी की पालकी यात्रा पूरे हर्षाेल्लास के साथ निकाली जाएगी। इस दौरान शांति भक्ति विधान पूजा रचकर भगवान शांतिनाथ से विश्व शांति की कामना की जाएगी और प्रभु के चरणों में विशेष लाडू समर्पित किया जाएगा। इसी दिन संध्याकाल में एक भावुक और गरिमामयी कार्यक्रम होगा, जिसमें माता-पिता के चरणों में नमन करते हुए पारिवारिक मंगल गान गाए जाएंगे और विशिष्ट जनों का अभिनंदन कर गुप्तिसदन सबको हर्षित करेगा। चार दिवसीय इस महामहोत्सव का समापन 15 जून को ‘पंचमेरु स्थापन’ के पावन अनुष्ठान के साथ होगा। गुप्तिसदन प्रबंधन और आयोजकों ने हाथ जोड़कर सभी भक्तों से करबद्ध प्रार्थना की है कि वे अपने सभी सांसारिक कार्यों को कुछ समय के लिए विराम देकर आगे आएं और सपरिवार इस महोत्सव का हिस्सा बनें। आयोजकों का कहना है कि समाज के सभी बंधुओं के सुझावों और सहयोग से ही हर सपना पूरा होगा और यह आयोजन गुप्तिसदन की गरिमा में चार चांद लगाएगा।</p>
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		<title>मुनिश्री प्रसन्न सागर जी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश : जैन धर्म ध्वजा लिए मुनि श्री की अगवानी की, जगह-जगह पाद प्रक्षालन किया  </title>
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		<pubDate>Fri, 29 May 2026 13:28:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री प्रसन्न सागर जी का भव्य मंगल प्रवेश शुक्रवार को बैंडबाजों की मंगल धुन के साथ हुआ। मुनि श्री का रैयाणा गांव से मंगल विहार हुआ। नौगामा नगर के सभी धर्म प्रेमी बंधु मुनि श्री की अगवानी के लिए पुरुष सफेद वस्त्रों में तथा महिलाएं केसरिया वस्त्रो में मंगल कलश लिए तथा जैन पाठशाला [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री प्रसन्न सागर जी का भव्य मंगल प्रवेश शुक्रवार को बैंडबाजों की मंगल धुन के साथ हुआ। मुनि श्री का रैयाणा गांव से मंगल विहार हुआ। नौगामा नगर के सभी धर्म प्रेमी बंधु मुनि श्री की अगवानी के लिए पुरुष सफेद वस्त्रों में तथा महिलाएं केसरिया वस्त्रो में मंगल कलश लिए तथा जैन पाठशाला के बच्चे जैन धर्म ध्वजा लिए पहुंचे। <span style="color: #ff0000">नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>नौगामा।</strong> मुनि श्री प्रसन्न सागर जी का भव्य मंगल प्रवेश शुक्रवार को बैंडबाजों की मंगल धुन के साथ हुआ। मुनि श्री का रैयाणा गांव से मंगल विहार हुआ। नौगामा नगर के सभी धर्म प्रेमी बंधु मुनि श्री की अगवानी के लिए पुरुष सफेद वस्त्रों में तथा महिलाएं केसरिया वस्त्रो में मंगल कलश लिए तथा जैन पाठशाला के बच्चे जैन धर्म ध्वजा लिए पहुंचे। मुनि श्री की अगवानी कर जगह-जगह उनका पाद पक्षालन किया गया। तोरण द्वार सजाए गए। सबने अपने घरों के बाहर रंगोली सजाई। जैसे ही मुनिश्री आदिनाथ मंदिर पहुंचे। जयकारों के साथ आकाश गुंजामान हो गया। मुनि श्री के सानिध्य में वागड़ के बड़े बाबा भगवान आदिनाथ नेमिनाथ की शांतिधारा अभिषेक किया गया। अभिषेक का प्रथम सौभाग्य शिपाल नानावटी, प्रसिद्ध अक्षत भीलवाड़ा को प्राप्त हुआ। महाराज श्री का आगमन पंडाल में हुआ, जहां पर महाराज श्री को शास्त्र भेंटकर पाद पक्षालन किया गया। इसका सौभाग्य गीतांश विपुल को प्राप्त हुआ। मुनिश्री ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि यह वही नौगामा नगर है। जहां पर 37 वर्ष पूर्व गुरुदेव आचार्यश्री पुष्पदंत सागर जी के सानिध्य में चातुर्मास हुआ था। हमारा यह पहला चातुर्मास था। नौगामा नगर की यादें आज भी ताजा हैं। चिड़िया के घोंसले, वागड़ के बड़े बाबा की प्रतिमाएं, नसिया जी क्षेत्र, छोटे बच्चे जो जवान हो गए हैं और जो जवान थे बूढ़े हो गए हैं। उनके चेहरे देखकर बड़ी प्रसन्नता हो रही है।</p>
<p>आप सभी मोक्ष मार्ग की ओर बढ़े और अपनी दृष्टि बदलें। सृष्टि बदल जाएगी अपने पुण्य कार्यों को बढ़ाओ। पुण्य कार्य को बढाओगे तो सुख मिलेगा। पाप कार्य करोगे तो दुख मिलेगा। इस अवसर पर मंच पर विराजमान आर्यिका सिद्ध मति माताजी को मुनिश्री ने आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर ‌आचार्य भक्ति, प्रश्न मंच, आरती के बाद भक्ति संगीत का कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम का संचालन मुनिश्री पीयूष सागर जी और रमेशचंद्र गांधी ने किया। आभार नवयुग मंडल अध्यक्ष मुकेश गांधी ने माना।</p>
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